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Saturday, August 8, 2020

फतेहपुर : शिक्षक स्कूल ले गए किताबें, मद में आई धनराशि विभाग में डंप, शिक्षकों ने की भाड़े की मांग

फतेहपुर : शिक्षक किताबें ले गए स्कूल, बीईओ को मिलेगा भाड़ा।

फतेहपुर में ब्लाक संसाधन केंद्रों से परिषदीय स्कूलों तक किताबें पहुंचाने के लिए भाड़े के नाम पर अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग ने एक धेला भुगतान नहीं किया है। जबकि इस मद में आई आठ लाख का बजट अभी तक डंप है। ब्लाक संसाधन केंद्रों से स्कूलवार शिक्षकों को किताबें आवंटित कर भेजी गई हैं। अब तक 81 प्रतिशत किताबें शिक्षक स्कूल में पहुंचा चुका है।






जिले में संचालित 2,650 परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठ तक पंजीकृत दो लाख 38 हजार बच्चों को मुफ्त में देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने 17 लाख 58 हजार 613 किताबें खरीदी हैं। जुलाई महीने में आईं 81 फीसदी किताबें शिक्षकों के माध्यम से स्कूल भेजी जा चुकी हैं। इस महीने के पहले सप्ताह में सात प्रतिशत किताबें और आई हैं। इनका शुक्रवार को सत्यापन कराया गया है। यह 10 अगस्त को ब्लाक संसाधन केंद्र भेज दी जाएंगी।




चालू सत्र में पहली बार सर्व शिक्षा अभियान के तहत ब्लाक संसाधन केंद्रों से स्कूल तक किताबें भेजने के लिए बीईओ (ब्लॉक एजूकेशन ऑफिसर) को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए सभी 13 बीईओ के खाते में स्कूल तक किताबें पहुंचाने का भाड़ा आठ लाख की धनराशि भेजी गई है। शिक्षकों के मोबाइल में मैसेज भेजकर उन्हें ब्लाक संसाधन केंद्र भेजकर किताबें आवंटित की गई हैं। शिक्षक बाइकों से बोरियों में भरकर किताबें स्कूल ले गए हैं। ऐसे में वह भाड़े की मांग कर रहे हैं।


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Monday, July 27, 2020

लखनऊ : सरकारी स्कूल में वाहनों से किताबें भेजी जाएंगी, सभी बीईओ को अपने क्षेत्र के स्कूलों का रूट चार्ट बनाने के निर्देश


लखनऊ | राजधानी के सरकारी प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों तक अब वाहन के जरिए किताबें पहुंचाई जाएंगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर गाड़ियों की व्यवस्था की गई है।
आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान में खबर छपने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय हरकत में आया है। 
बच्चों को किताबें नहीं मिल पाने के मुद्दे को हिंदुस्तान ने रविवार के अंक में प्रमुखता से उठाया। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय हरकत में आया है।

बीएसएफ दिनेश कुमार ने रविवार को वाहन से किताबें पहुंचाने के लिए आदेश जारी कर दिया। बीएसए की ओर से पूरे लखनऊ को 12 विकासखण्ड में बांटकर गाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं। सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों को अपने क्षेत्र के स्कूलों का रूट चार्ट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह चार्ट संबंधित ड्राइवर को उपलब्ध कराना होगा।

Thursday, July 9, 2020

यूपी बोर्ड की किताबें NCERT से भी 80 फीसदी तक सस्ती

यूपी बोर्ड की किताबें NCERT से भी 80 फीसदी तक सस्ती



यूपी बोर्ड की किताबें राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से भी 80 फीसदी तक सस्ती हैं। कक्षा 11 अंग्रेजी की किताब स्नैपशॉट बाजार में सिर्फ 7 रुपये में मिल रही है जबकि एनसीईआरटी की यही किताब 35 रुपये में मिल रही है। 

ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी तो चाहिए किताब, यूपी बोर्ड के छात्रों की बगैर किताबों के शुरू होने जा रही ऑनलाइन पढ़ाई



ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी तो चाहिए किताब, यूपी बोर्ड के छात्रों की बगैर किताबों के शुरू होने जा रही ऑनलाइन पढ़ाई


यूपी बोर्ड के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बगैर किताबों के शुरू होने जा रही है। एनसीईआरटी के पैटर्न पर यूपी बोर्ड की किताबें लागू तो कर दी गई लेकिन ये अभी छात्रों के पास नहीं पहुंची हैं। प्रकाशकों के पास किताबों का स्टॉक भरा पड़ा है लेकिन मांग न होने की वजह से विक्रेता किताबें नहीं उठा रहे हैं।...
जेएनएन, मेरठ। यूपी बोर्ड के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बगैर किताबों के शुरू होने जा रही है। एनसीईआरटी के पैटर्न पर यूपी बोर्ड की किताबें लागू तो कर दी गई, लेकिन ये अभी छात्रों के पास नहीं पहुंची हैं। प्रकाशकों के पास किताबों का स्टॉक भरा पड़ा है, लेकिन मांग न होने की वजह से विक्रेता किताबें नहीं उठा रहे हैं। हालात तो ये हैं कि बहुत से प्रकाशक किताबों से रायल्टी तक नहीं निकाल पा रहे।

प्रदेश में यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी पैटर्न की किताबों के प्रकाशन के लिए चार प्रकाशक अधिकृत किए गए हैं। इनमें रवि आफसेट प्रिटर्स एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा, राजीव प्रकाशन प्रयागराज, आलोक प्रिटर्स आगरा और काका संस नोएडा हैं। मेरठ के बहुत से प्रकाशक यूपी बोर्ड की संदर्भ किताबें व एनसीईआरटी से इतर किताबें प्रकाशित करते हैं। प्रकाशकों पर कोविड का व्यापक असर पड़ा है। मार्च में प्रकाशकों ने किताबें छाप दीं, लेकिन इस समय तक मुश्किल से 20 फीसद ही विक्रेताओं के पास पहुंच पाई। ये कहते हैं प्रकाशक


मार्च में किताबें सप्लाई कर दी थीं। बच्चे किताब नहीं खरीद रहे हैं, जिस वजह से दुकानदार किताब लेने को तैयार नहीं है। पिछले साल के मुकाबले मांग शून्य है। दुकान और प्रकाशक दोनों जगह स्टाक भरे हैं। पूरे प्रदेश की यही स्थिति है। इस साल रायल्टी भी नहीं निकाल पा रहे हैं। यह रायल्टी बोर्ड के माध्यम से एनसीईआरटी को जाती है। अतुल जैन, डायरेक्टर, रवि आफसेट प्रिटर एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा 


करीब 25 फीसद किताबें ही मार्केट में सप्लाई हुई थीं। 75 फीसद स्टॉक गोदाम में है। स्कूल कब खुलेंगे पता नहीं। यूपी बोर्ड में छात्रों के पास किताबें नहीं होंगी तो वे क्या पढ़ेंगे। बच्चों को प्रोत्साहित करें। किताबें खरीदें, स्वयं अध्ययन करें। अजय रस्तोगी, डायरेक्टर, चित्रा प्रकाशन, मेरठ 


यूपी बोर्ड की संदर्भ किताबें प्रकाशित करते हैं। इस बार मांग शून्य है। बच्चे किताब नहीं खरीद पा रहे हैं। जब तक स्कूल नहीं खुलेंगे, किताबों की मांग नहीं आएगी। सौरभ जैन, डायरेक्टर, विद्या प्रकाशन मेरठ 


किताबों की बिक्री के लिए विकल्प देना होगा। स्कूल के अंदर स्टाल लगा दिए जाएं, सेक्शन वाइज कक्षा में किताबें रख दी जाएं। अभिभावक को बुलाकर किताबें दी जा सकती हैं। मोहित जैन, नगीन प्रकाशन, मेरठ 


80 फीसद पुस्तक विक्रेताओं के पास जा चुकी हैं। लेकिन ये बच्चों तक नहीं पहुंची हैं। अगर अप्रैल में किताबें उपलब्ध करा दी जाती तो बहुत अच्छा रहता। यूपी बोर्ड में ऑनलाइन पढ़ाई तभी होगी जब हाथ में किताब हो। कोरोना की वजह से किताबों की बिक्री की सरकार ने अनुमति नहीं दी। अजय रस्तोगी, रीडर्स च्वाइस, मेरठ


सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बांटी जाएंगी किताबें, अभिभावकों को स्कूल बुलाकर दी जाएंगी पुस्तकें

परिषदीय स्कूलों में मुफ्त मिलती हैं किताबें, 

अभिभावकों को स्कूल बुलाकर दी जाएंगी पुस्तकें

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बांटी जाएंगी किताबें


परिषदीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की किताबें खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों तक पहुंच चुकी हैं। एक दो दिन में स्कूलों से किताबों का वितरण शुरू हो जाएगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार बच्चों के बजाए उनके अभिभावकों को स्कूल बुलाकर किताबें वितरित की जाएंगी। शिक्षकों को पुस्तक वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखना होगा। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सरकार की ओर से


निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाता है। लखनऊ में 1850 से अधिक स्कूलों में करीब एक लाख साठ हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि बच्चों की पुस्तकें छप कर आ चुकी हैं। इन्हें सभी ब्लाकों के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों तक पहुंचा दिया है। यहां से शिक्षक पुस्तकें ले जाकर वितरित करेंगे। 


उन्होंने बताया कि इस बार अभिभावकों को स्कूल बुलाकर पुस्तकें वितरित की जाएंगी। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक बार में दस से बारह अभिभावकों को ही पुस्तकें प्राप्त करने के लिए स्कूल बुलाएं। एक समय में अभिभावकों की भीड़ स्कूल में न लगने दें। पुस्तक वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जाए। हालांकि नगर क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पुस्तकें अभी नहीं पहुंची हैं। अधिकारियों का कहना है कि नगर क्षेत्र के छात्रों की पुस्तकें भी जल्द वितरित की जाएंगी।



अभिनव मॉडल स्कूल में पुस्तक वितरण शुरू

जिले के अभिनव मॉडल स्कूलों में बच्चों की पुस्तकों का वितरण शुरू हो गया है। एडी बेसिक पीएन सिंह और बीएसए दिनेश कुमार ने बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर पुस्तक वितरण की शुरूआत की। उन्होंने बताया कि इस बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि सब कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहें। अब यहां पर शिक्षक पुस्तकें वितरित करेंगे।

Wednesday, June 17, 2020

स्कूलों में पहुंचीं किताबें, बांटने की तैयारी शुरू, पाठ्य पुस्तक अधिकारी का दावा, 7.9 लाख किताबें छप कर तैयार

लखनऊ: जिले के बेसिक स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए 67 फीसदी किताबें पहुंचा दी गई हैं। दस दिनों के अंदर अभिभावकों को स्कूल परिसर में बुलाकर किताबें बांटी जाएंगी।
पाठ्य पुस्तक अधिकारी डॉ. पवन सचान ने बताया कि लॉकडाउन में भी किताबें छापने का काम जारी रहा, ताकि समय रहते किताबें बच्चों तक पहुंच जाएं। हमारी कोशिश है कि जून में ही बच्चों को किताबें पहुंचा दी जाएं, जिससे उनकी ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान असुविधा न हो। उन्होंने बताया कि इस साल लखनऊ में 11.9 लाख किताबें छापी जानी थीं, जिसमें 7.9 लाख किताबें फिलहाल छप चुकी हैं। बाकी बची हुईं किताबों की छपाई और बच्चों को उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है।

एक समय पर तीन अभिभावकों को एंट्री

वहीं, कोरोना के कारण इस साल किताबें बांटने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का खास ख्याल रखा जाएगा। एक वक्त पर तीन अभिभावकों की एंट्री मिलेगी। भीड़-भाड़ को रोकने के साथ सैनिटाइजेशन का भी इंतजाम रहेगा।