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Thursday, May 21, 2026

अब अंग्रेजी में भी मिलेंगी यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी की किताबें

अब अंग्रेजी में भी मिलेंगी यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी की किताबें

प्रदेश के लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत देने की तैयारी की है। लंबे समय बाद यूपी बोर्ड अब अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिए एनसीईआरटी आधारित पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन अंग्रेजी भाषा में कराने जा रहा है। इस फैसले से प्रदेश के करीब ढाई लाख विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।


अब तक यूपी बोर्ड में अंग्रेजी माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी समस्या अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों की उपलब्धता को लेकर होती थी। विद्यालयों में पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होती थी, लेकिन किताबें प्रायः हिंदी माध्यम में ही उपलब्ध कराई जाती थीं। ऐसे में विद्यार्थियों को बाजार से महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदनी पड़ती थीं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को कम कीमत पर अंग्रेजी माध्यम की एनसीईआरटी पुस्तकें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। हर वर्ष 50 से 52 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकरण कराते हैं। इनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करते हैं। परिषद ने इन्हीं छात्रों की जरूरत को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 से अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों के प्रकाशन की तैयारी शुरू की है।

परिषद के अनुसार कक्षा नौ, 10, 11 और 12 के विभिन्न विषयों की एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। खास बात यह है कि ये पुस्तकें बाजार में उपलब्ध निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की तुलना में काफी सस्ती होंगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। अभी तक सीबीएसई पैटर्न की अंग्रेजी माध्यम की किताबें निजी बाजार में महंगे दामों पर मिलती थीं, जिसके कारण कई छात्र पूरी पुस्तकें खरीदने में सक्षम नहीं हो पाते थे। यूपी बोर्ड की ओर से कम कीमत पर पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने से छात्रों का आर्थिक बोझ कम होगा।


अभी तक हिंदी माध्यम की पुस्तकों का ही प्रकाशन कराया जाता था, लेकिन अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की समस्याओं को देखते हुए अब अंग्रेजी भाषा में भी एनसीईआरटी पुस्तकों का प्रकाशन कराया जाएगा। इससे छात्रों को अध्ययन सामग्री प्राप्त करने में काफी सुविधा होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। -भगवती सिंह, सचिव, उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद

यूपी बोर्ड : अब घर बैठे ऑनलाइन पुस्तकें मंगा सकते हैं विद्यार्थी, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विकसित किया छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल

यूपी बोर्ड : अब घर बैठे ऑनलाइन पुस्तकें मंगा सकते हैं विद्यार्थी, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विकसित किया छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल

एनसीईआरटी पुस्तकों की ऑनलाइन उपलब्धता, अमेजन वेबसाइट और पोर्टल के जरिए बिक्री

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि यूपी बोर्ड ने विद्यार्थियों की पाठ्य पुस्तकों की खोज और ऑर्डर प्रक्रिया को सरल व सहज बनाने के लिए छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है। इसके माध्यम से छात्र कक्षानुसार पुस्तक सेट का चयन कर सीधे संबंधित वेबसाइट के विक्रय पृष्ठ पर जाकर ऑनलाइन ऑर्डर कर सकेंगे और घर बैठे पुस्तकें प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौ, 10, 11 और 12 के विभिन्न विषयों की 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए सस्ती दर पर उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान एवं गृह विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अलावा परिषद की ओर से विकसित हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की 12 पाठ्य पुस्तकें भी कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रचलन में लाई गई हैं। सचिव ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पुस्तकों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने और घर बैठे पुस्तक प्राप्ति की सुविधा देने के उद्देश्य से अधिकृत प्रकाशकों के सहयोग से यह व्यवस्था शुरू की गई है।



पहल: यूपी बोर्ड की किताबें अब घर बैठे मिल सकेंगी

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौ से 12वीं तक की एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों की ऑनलाइन उपलब्धता और होम डिलीवरी व्यवस्था शुरू कर दी है। अब छात्र-छात्राओं को किताबें खरीदने के लिए बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि वे घर बैठे ही ऑनलाइन माध्यम से पुस्तकें मंगा सकेंगे।

बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से मंगलवार को जारी सूचना के अनुसार, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र समेत कुल 36 विषयों की लगभग 70 एनसीईआरटी पैटर्न की पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की पुस्तकें भी विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होंगी। पुस्तकों के मुद्रण और वितरण की जिम्मेदारी तीन प्रमुख प्रकाशकों को सौंपी गई है। कक्षा 9 से 12 तक की पुस्तकों के लिए मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशर्स, आगरा को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कक्षा 10 की पुस्तकों के लिए मेसर्स पीतांबरा बुक प्राइवेट लिमिटेड, झांसी तथा कक्षा 11 की पुस्तकों के लिए मेसर्स सिंघल एजेंसीज, लखनऊ को अधिकृत किया गया है।

बोर्ड ने इस संबंध में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और क्षेत्रीय कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। विद्यार्थी अमेजन और pioneerbooks.in पोर्टल के माध्यम से किताबें ऑर्डर कर सकेंगे। खास बात यह है कि होम डिलीवरी के लिए विद्यार्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। बोर्ड की इस पहल से दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है।

Saturday, April 25, 2026

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।


कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।

एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी



संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।

कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे। 


नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता

Wednesday, April 15, 2026

स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं

स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं


लखनऊ। प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो गया है। जोर शोर से स्कूल चलो अभियान भी चलाया जा रहा है। पहले दिन से विद्यार्थियों को सभी किताबें उपलब्ध भी कराई जानी थीं। किंतु हालत यह है कि 15 दिन बाद भी विद्यालयों में किताबों का इंतजार हो रहा है। विभाग ने इस पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं। 


हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा में बताया गया कि किताब वितरण की गति 25 जिलों में अपेक्षाकृत धीमी है। इसमें इटावा व हाथरस ने कोई रिपोर्ट ही नहीं दी है। जबकि बहराइच के 2834 में से 2002 विद्यालयों में किताबें नहीं वितरित हुई हैं। बता दें कि बहराइच में ही फरवरी की शुरुआत में कबाड़ में किताबें बेचने का मामला सामने आया था।

आजमगढ़ के 2955 में से 1921 विद्यालयों में, संभल के 1289 में से 803 विद्यालयों में, बांदा के 1797 में से 630 विद्यालयों में, चित्रकूट के 1262 में से 377 विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची हैं। इसी क्रम में अयोध्या में 335, गोरखपुर में 247, सीतापुर में 52, अमेठी में 50, लखनऊ के 33 विद्यालयों में अभी तक सभी किताबें नहीं पहुंची हैं। इसका असर यहां के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। 

Tuesday, April 7, 2026

अनधिकृत किताबों पर सख्ती, 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान, यूपी बोर्ड पुस्तक जागरुकता के लिए आयोजित करेगा शिविर

अधिकृत-सस्ती किताबों के लिए हर जिले में लगाएंगे पुस्तक मेला, सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिया निर्देश

15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से लगाएं शिविर

प्रयागराज। यूपी बोर्ड के 29 हजार से अधिक स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को अधिकृत और सस्ती किताबें उपलब्ध कराने के लिए हर जिले में पुस्तक जागरुकता और सुलभता शिविर (पुस्तक मेला) लगेगा। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों, उप शिक्षा निदेशकों और संयुक्त शिक्षा निदेशकों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। सचिव ने अभिभावकों को जागरूक करने और छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आगरा एवं सहारनपुर मंडलों की तरह प्रत्येक जिले के राजकीय एवं सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से पुस्तक मेला आयोजित कराने को कहा है।

अधिकृत मुद्रकों (पायनियर प्रिंटर्स आगरा, पीताम्बरा बुक्स झांसी एवं सिंघल एजेंसीज-लखनऊ) की सहभागिता से लगने वाले मेले के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी जिला स्तर के किसी शिक्षाधिकारी को देने और उसकी ग्रुप फोटो यूपी बोर्ड की वेबसाइट और व्हाट्सएप ग्रुप पर भी अनिवार्य रूप से भेजने को कहा है। एनसीईआरटी नई दिल्ली की 70 पाठ्यपुस्तकों एवं कक्षा नौ से 12 तक की हिन्दी, संस्कृत एवं उर्दू विषयों की चयनित 12 पाठ्यपुस्तकें छपवाई गई है।

स्कूलों में न चलने दें 149 से 361 प्रतिशत तक महंगी किताबेंः सचिव के अनुसार, पता चला है कि विद्यालयों में अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें अनुचित रूप से प्रचलित की रही हैं। कुछ संस्थाओं और पुस्तक विक्रेताओं ने साठगांठ करके निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए अनधिकृत निजी प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकें/गाइड बुक जो यूपी बोर्ड की किताबों से 149 प्रतिशत से 361 प्रतिशत तक महंगी हैं। लिहाजा 15 अप्रैल तक अभियान चला कर स्कूलों का निरीक्षण करें ताकि विद्यार्थियों एवं अभिभावकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। अनधिकृत पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करने वाले प्रधानाचार्य, प्रबंधक या शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए। ध्यान दें इस साल छपी पाठ्यपुस्तकों की असली नकली पहचान के लिए कवर पेज पर सात अंकों का अल्ट्रा वॉयलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग में सीरियल नंबर मुद्रित है।




अनधिकृत किताबों पर सख्ती, 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान, 
 यूपी बोर्ड पुस्तक जागरुकता के लिए आयोजित करेगा शिविर

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने स्कूलों में अनधिकृत किताबों और गाइड के प्रचलन पर सख्त रुख अपनाया है। परिषद के ने निर्देश पर प्रदेश भर के स्कूलों में 515 अप्रैल तक विशेष चेकिंग न अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान न किताबों की उपलब्धता, गुणवत्ता और निर्धारित प्रकाशकों की पुस्तकों । की बिक्री की जांच की जाएगी।

परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई स्कूल संचालक या प्रधानाचार्य छात्रों को अनधिकृत पुस्तकें या गाइड खरीदने छात्रों को अनधिकृत पुस्तकें या गाइड खरीदने के लिए बाध्य किया तो होगी कार्रवाई के लिए बाध्य करता है तो उसके खिलाफ इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के विनियम-18 के तहत कड़ी कार्रवाई करें।

शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 36 विषयों की एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त एवं स्ववित्त पोषित विद्यालयों में लागू किया गया है। कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू की चयनित 12 पुस्तकों को भी सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

सचिव ने अभिभावकों को जागरूक करने और छात्रों को आसानी से पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए 15 अप्रैल तक सभी जिलों में पुस्तक जागरूकता एवं सुलभता शिविर/पुस्तक मेला आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इन मेलों में अधिकृत मुद्रकों पायनियर प्रिंटर्स (आगरा), पीतांबरा बुक्स (झांसी) और सिंघल एजेंसीज (लखनऊ) की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।


नकली किताब बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

परिषद ने स्पष्ट किया है कि पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट उसके पास है। ऐसे में पायरेसी या डुप्लीकेसी कर नकली किताबें बेचने वाले अनधिकृत मुद्रकों और दुकानदारों के खिलाफ पुलिस, वाणिज्य कर, आयकर और प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनसीईआरटी की कॉपीराइट शर्तों के उल्लंघन पर कॉपीराइट एक्ट के तहत भी कार्रवाई होगी।

ऐसे करें असली किताब की पहचान

इस वर्ष पाठ्य पुस्तकों के आवरण पर सात अंकों का अल्ट्रा वॉयलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग का सीरियल नंबर मुद्रित किया गया है। जिन पुस्तकों पर यह नंबर नहीं होगा, उन्हें अनधिकृत माना जाएगा।


Friday, April 3, 2026

परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक

परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक

कला शिक्षण के लिए सुनिश्चित है न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र

प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा तीन और चार के विद्यार्थियों को पहली बार कला की पुस्तक 'बांसुरी' पढ़ने को मिलेगी। अब तक शिक्षक बिना पुस्तक कला/संगीत पढ़ाते थे और परीक्षा लेते थे। नए सत्र से बच्चों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (एनसीईआरटी) की पुस्तक बांसुरी पढ़ने के लिए मिलेगी। एनसीएफएसई (स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा संबंधी मार्गदर्शिका) की अनुशंसा के अनुसार कला शिक्षण के लिए न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र सुनिश्चित किया गया है। इसमें कला के चारों घटक दृश्य कला, संगीत, नृत्य और अंग संचालन संबंधी जानकारी है।


कक्षा तीन की पुस्तक में 20 पाठ हैं। प्रत्येक अध्याय में क्यूआर कोड है, उसे स्कैन करके अतिरिक्त विषय सामग्री तक पहुंच सकते हैं। वर्तमान सत्र में बच्चों को कलात्मकता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ भी आमंत्रित किए जाएंगे। शिक्षण के दौरान बच्चों से कलाकृतियां बनवाई जाएंगी। उनका प्रदर्शन स्कूल परिसर या अन्य स्थानों पर किया जाएगा।

राज्य शिक्षा संस्थान उत्तर प्रदेश के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने बताया कि बांसुरी में सुझाई गई गतिविधियों को कराने से अभिव्यक्ति कौशल, सामुदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय विरासत के संरक्षण के लिए सचेत रहने की चेतना जागृत होगी। इससे छात्र छात्राओं में व्यक्तिगत स्तर तथा समूह में कार्य करने, आलोचनात्मक दृष्टिकोण का विकास, पढ़ने के साथ लिखने का अभ्यास में मदद मिलेगी।


दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच से होगा जुड़ाव

पुस्तक के दृश्य कला भाग में रेखांकन, चित्रकला, काटना, चिपकाना जैसी गतिविधि शामिल है। मिट्टी, रंग, प्रकृति की समझ बच्चों में आएगी। संगीत की ओर छात्रों का ध्यान खींचते हुए विभिन्न भाषाओं के गीत, वाद्ययंत्रों व थिरकने, धुनों और गीतों पर शारीरिक गतिविधां कराने के साथ नाटक पाठ्यक्रम का हिस्सा है। विदूषक बच्चों को अभिनय, मंच, सहायक सामग्री आदि से परिचित कराएंगे। राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डा. रीना मिश्रा कहती है कि यह पुस्तक सुगम और रोचक है। पुस्तक बताती है कि मिट्टी के घड़े का प्रयोग वाद्ययंत्र की तरह होता है, इसे घटम कहते हैं। कंदील, दीपक, मुखौटा, कागजों से आभूषण बनाना सीखने के साथ संगीत में ताली, चुटकी, लयबद्ध पैरों की धाप आदि को समझाने का प्रयास है।


20 घंटे दृश्यकला तो 20 घंटे संगीत की होगी पढ़ाई

पुस्तक में निहित दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच के लिए कुल 20-20 घंटे की पढ़ाई निर्धारित है। 20 घंटे अनुभवात्मक कार्य कराए जाएंगे। कला शिक्षक को सप्ताह में चार कक्षाएं और शनिवार को एक कक्षा आवंटित करने प्रविधान है। बच्चों के दक्षता स्तर को मापने के लिए चार श्रेणी ए, बी, सी, डी, ई का सुझाव है। इनका अर्थ क्रमशः उत्कृष्ट, कुशल, होनहार, विकासशील और आरंभिक है।