नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।
कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।
एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी
संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।
कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे।
नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता
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