DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label मातृत्व अवकाश. Show all posts
Showing posts with label मातृत्व अवकाश. Show all posts

Wednesday, April 22, 2026

दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य, सरकार की फाइनेंशियल हैंड बुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं: हाईकोर्ट

दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य, सरकार की फाइनेंशियल हैंड बुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं: हाईकोर्ट

05 साल पूर्व बच्चे के जन्म के दो साल बाद दूसरा अवकाश नहीं मिला


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहला मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस विषय में वित्तीय हैंडबुक के प्रावधान मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं हो सकते। यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने मनीषा यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 



याचिका में चार अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिए याची की दूसरे मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरानयाची की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 लाभकारी कानून है। इसके प्रावधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राज्य की ओर सेवित्तीय हैंडबुक के नियम 153 (1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो प्रसूति अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष जरूरी हैं।




दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा, सरकार की वित्तीय हैंडबुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं

लखनऊइलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहली मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस विषय में वित्तीय हैंडबुक (वित्तीय नियम संग्रह) के प्रविधान मातृत्व लाभकानून के ऊपर नहीं हो सकते हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने मनीषा यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में चार अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिये याची की दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान याची की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 एक लाभकारी कानून है और इसके प्रविधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, राज्य की ओर से वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो मातृत्व अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष का अंतर होना आवश्यक है।

अदालत ने पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम संसद द्वारा बनाया गया कानून है और यह किसी भी कार्यपालिका निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रविधानों से ऊपर है। ऐसे में यदि दोनों में कोई विरोधाभास हो तो अधिनियम के प्रविधान ही प्रभावी होंगे। कोर्ट ने पाया कि याची की पहली संतान 2021 में हुई थी और इसके बाद उन्होंने 2022 में दूसरे मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे गलत आधार पर खारिज कर दिया गया। अदालत ने इस आदेश को रद करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि याची को छह अप्रैल 2026 से दो अक्टूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए।

Tuesday, September 9, 2025

तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश नामंजूर करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश नामंजूर करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश अस्वीकार करने के बीएसए बिजनौर के आदेश को स्थापित विधि सिद्धांत के विपरीत होने के कारण रद्द कर दिया है। साथ ही उन्हें निर्धारित कानूनी प्रावधान के तहत मातृत्व अवकाश पर चार सप्ताह में नए सिरे से आदेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अंशुल दत्त की याचिका पर अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी व बीएसए बिजनौर के वकील को सुनने के बाद याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।


 बीएसए ने यह कहते हुए याची के मातृत्व अवकाश की अर्जी निरस्त कर दी कि याची के दो जीवित बच्चे हैं इसलिए तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश नहीं दिया जा सकता। अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी के मुताबिक याची सहायक अध्यापिका है।

Friday, May 30, 2025

बीएसए ने मांगी माफी... शिक्षिका को मिला दूसरा मातृत्व अवकाश, याचिका निस्तारित, निदेशक बेसिक शिक्षा ने सभी बीएसए को स्पष्ट सुसंगत आदेश पारित करने का दिया निर्देश

बीएसए ने मांगी माफी... शिक्षिका को मिला दूसरा मातृत्व अवकाश, याचिका निस्तारित, निदेशक बेसिक शिक्षा ने सभी बीएसए को स्पष्ट सुसंगत आदेश पारित करने का दिया निर्देश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद के बीएसए की ओर से बिना शर्त माफी मांगने, अपनी गलती सुधारने और भविष्य में अदालत के आदेशों का पालन करने का वचन देने के बाद मातृत्व अवकाश से संबंधित याचिका निस्तारित कर दी।

अधिकारियों ने एक हलफनामा दायर कर अदालत को बताया कि याची किरण देवी का दूसरा मातृत्व अवकाश स्वीकृत कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा निदेशक, लखनऊ ने अदालत को सूचित किया कि बीएसए को न केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, बल्कि सभी बीएसए को एक परिपत्र भी जारी किया गया है।

सभी को कानूनी प्रावधानों, सरकारी आदेशों, विभागीय नियमों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट और सुसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है। इस हलफनामे के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने किरण देवी की याचिका पर दिया।

अदालत के निर्देश पर प्रताप सिंह बघेल (निदेशक बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश), सुरेंद्र प्रसाद तिवारी (सचिव बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज) और गौतम प्रसाद (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, फर्रुखाबाद) कोर्ट में उपस्थित हुए। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश ने हाजिरी माफी की अर्जी दी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।



हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं दिया दूसरा मातृत्व अवकाश, प्रमुख सचिव, निदेशक, सचिव व बीएसए तलब

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद की शिक्षिका को मातृत्व अवकाश नहीं देने पर कड़ी नाराजगी जताई है। वहीं, आदेश का पालन न करने पर कोर्ट ने फर्रुखाबाद के बीएसए, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा विभाग, शिक्षा निदेशक (बेसिक), बेसिक शिक्षा निदेशालय, लखनऊ व उप्र बेसिक शिक्षा बोर्ड, प्रयागराज के सचिव को तलब किया है। कहा है कि 28 मई को दोपहर 12 बजे व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्पष्टीकरण दें।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने किरन देवी की याचिका पर दिया। याची के दूसरे मातृत्व अवकाश को बीएसए ने 'अनुमान्य नहीं' लिखकर बिना किसी विशिष्ट कारण के अस्वीकार कर दिया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने 29 अप्रैल 2025 को बीएसए के आदेश को रद्द कर दिया था। साथ ही मामले को संबंधित प्रतिवादी को वापस भेज दिया था, ताकि वह कानून के अनुसार एक नया आदेश पारित करे। 

इसके बाद भी बीएसए ने उस आदेश का पालन नहीं किया। इसके खिलाफ याची ने दूसरी याचिका दाखिल की। याची अधिवक्ता मानवानंद चौरसिया ने दलील दी कि अधिकारी ने दूसरा मातृत्व अवकाश 180 दिन का न देकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। वहीं, प्रतिवादियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि विवादित आदेश जल्दबाजी में पारित हो गया है। कोर्ट ने मातृत्व अवकाश न देने पर कड़ी नाराजगी जता बीएसए सहित अन्य अधिकारियों को तलब किया है। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।


महिला कर्मचारी कभी भी ले सकती है दूसरा मातृत्व अवकाश

याची अधिवक्ता मानवानंद चौरसिया ने बताया कि प्रदेश व केंद्र की नौकरियों में कोई भी महिला कर्मचारी अपनी सेवा के दौरान दो बार मातृत्व अवकाश 180-180 दिन कभी भी ले सकती हैं। राज्य के पहले के शासनादेश में दूसरा मातृत्व अवकाश दो साल के बाद ही लेने का प्रावधान था। लेकिन, वर्तमान में कोर्ट के आदेश पर राज्य ने अपने शासनादेश में संशोधन कर दिया है।

कोर्ट ऑर्डर 👇 

Sunday, April 13, 2025

तीसरी बार मातृत्व अवकाश पर विचार करे बेसिक शिक्षा विभाग : हाईकोर्ट, देखें कोर्ट ऑर्डर

तीसरी बार मातृत्व अवकाश पर विचार करे बेसिक शिक्षा विभाग : हाईकोर्ट

सहायक अध्यापिका ने याचिका में बताया कि एक बच्चे का हो चुका है निधन



प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग को सहायक अध्यापिका को तीसरी बार मातृत्व अवकाश मांगने की अर्जी पर विचार करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने की।

प्रयागराज निवासी याची रोली पांडेय सोनबरसा स्थित विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं। तीसरी बार गर्भवती होने पर उन्होंने 180 दिनों के वेतन सहित मातृत्व अवकाश की मांग की, जिसे विभाग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मातृत्व अवकाश सेवाकाल में केवल दो बार दिया जा सकता है।

इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची की दलील थी कि बेशक उन्हें दो बार मातृत्व अवकाश दिया गया। लेकिन पैदा हुए बेटे का निधन हो चुका है। अब केवल 13 साल की एक बेटी है, लिहाजा याची मातृत्व अवकाश पाने की हकदार है।


कोर्ट ऑर्डर अपडेटेड 👇 


Saturday, September 7, 2024

जुड़वा बच्चों के बाद अगले बच्चे हेतु मातृत्व अवकाश का आवेदन खारिज करने पर बीएसए कासगंज हाईकोर्ट में तलब, देखें कोर्ट ऑर्डर

जुड़वा बच्चों के बाद अगले बच्चे हेतु मातृत्व अवकाश का आवेदन खारिज करने पर बीएसए कासगंज हाईकोर्ट में तलब, देखें कोर्ट ऑर्डर

Wednesday, August 28, 2024

एक और फैसला : दो वर्ष की मैटरनिटी लीव की अनिवार्यता गलत – हाईकोर्ट, देखें कोर्ट ऑर्डर

एक और फैसला : दो वर्ष की मैटरनिटी लीव की अनिवार्यता गलत – हाईकोर्ट
 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव के लिए दो वर्ष गैप की अनिवार्यता को आधार बनाकर छुट्टी देने से इनकार करने के बीएसए रामपुर के आदेश को रद्द कर दिया है। 

कोर्ट ने आदेश रद्द करते हुए याची को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस अवधि का वेतन देने का भी निर्देश दिया है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने कुशल राणा की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। याचिका में बीएसए रामपुर के आदेश को चुनौती दी गई थी।