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Monday, October 7, 2024

स्कूली बच्चों को यूनिफार्म पर एक माह में लें निर्णय, हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों को दिया आदेश

स्कूली बच्चों को यूनिफार्म पर एक माह में लें निर्णय, हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों को दिया आदेश


लखनऊः इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित स्कूलों के बच्चों को यूनिफार्म की सुविधा दिए  जाने के मामले में एक माह में निर्णय - लेने का आदेश दिया है। न्यायालय  ने कहा है कि इस संबंध में जो भी निर्णय लिया जाता है उसे हलफनामा के माध्यम दाखिल किया जाए अथवा बेसिक शिक्षा विभाग व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये अगली सुनवाई उपस्थित पर हों। मामले की अगली सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने यूपी अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक एसोसिएशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।

याचिका पर तीन अप्रैल को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दोनों प्रमुख सचिवों का जवाबी हलफनामा मांगा था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद - हलफनामा न दाखिल होने पर - न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए - दोनों अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने अथवा हाजिर होने का आदेश दिया था। न्यायालय के सख्ती के बाद दोनों अधिकारियों की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया कि मामले में निर्णय के लिए एक माह का समय दिया जाए।



समाज कल्याण के स्कूलों में यूनिफॉर्म न देने के मामले में एक माह में फैसला ले विभाग – हाईकोर्ट
 

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के बेसिक स्कूलों की तरह समाज कल्याण विभाग से संचालित स्कूलों में विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म न देने के मामले में महीने भर में निर्णय लेकर जानकारी पेश करने का आदेश दिया है। 


कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर नवंबर के पहले हफ्ते में होने वाली सुनवाई पर हलफनामा दाखिल न हुआ तो बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण विभागों के प्रमुख सचिवों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश होना होगा। इससे पहले सरकारी वकील ने दोनों प्रमुख सचिवों का जवाबी हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि मामले में निर्णय लेने में महीने भर का समय लगेगा।


 न्यायमूर्ति राजन रॉय और ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश यूपी अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक सहायक समिति लखनऊ के महासचिव द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर दिया। 

Monday, May 27, 2024

बीत गया शिक्षासत्र, लाखों बच्चों को नहीं मिल सका DBT के जरिए यूनिफॉर्म का धन

हर साल ऐसे ही होती है तैयारी, ध्वस्त हो जाती है व्यवस्था

पुराने को भूल गए अफसर, नए बच्चों का मांगा गया डाटा,

बीत गया शिक्षासत्र,  लाखों बच्चों को नहीं मिल सका DBT के जरिए यूनिफॉर्म का धन



लखनऊ : सूबे के परिषदीय प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को शिक्षासत्र बीतने के बाद भी यूनीफॉर्म, जूता-मोजा और स्कूल बैग के लिए रुपये नहीं मिले हैं। विभागीय अधिकारी पिछले वर्ष के बच्चों को भूल गए हैं। अब नए शिक्षासत्र में प्रवेश लेने वाले बच्चों के खाते में धनराशि भेजने के लिए डाटा मांगा है।


वर्ष 2023-24 में सूबे के प्राइमरी, मिडिल, मदरसा, सहायता प्राप्त और राजकीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक में पढ़ने वाले बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के तहत यूनिफॉर्म, स्वेटर, स्कूल बैग और जूता-मोजा स्कूलों में वितरित किया जाता था। पूरे प्रदेश में में नामांकित बच्चों का डाटा भेजकर 1200-1200 सौ रुपये भेजने की मांग की गई।


इसमें कई बच्चों के अभिभावकों के खाता नंबर और आधार नंबर में अंतर आने के कारण भुगतान नहीं किया जा रहा है। इधर, बेसिक शिक्षा विभाग के शीर्ष अफसरों ने विभाग को पत्र जारी कर नए सत्र में दाखिला लेने वाले बच्चों का डाटा 20 मई तक मुहैया कराने को कहा है।

पिछले सत्र में पूरे प्रदेश में लाखों बच्चों के खाते में अभी तक धनराशि नहीं आई है। आश्चर्य की बात यह है कि विभागीय अफसरों द्वारा एक अप्रैल से नई कक्षाओं में दाखिला लेने वाले बच्चों का डाटा मांगा जा रहा है।


हर साल ऐसे ही होती है तैयारी, ध्वस्त हो जाती है व्यवस्था

बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर हर साल कुछ ऐसा ही करते हैं। तैयारी तो वह मई से ही करना प्रारंभ कर देते हैं, मगर ठंडी प्रारंभ होने पर भी बच्चों को धनराशि मुहैया कराने में फेल हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही इस वर्ष भी देखने को मिल रहा है, फिलहाल अब देखना है कि इन बच्चों के खाते में धनराशि कब आती है।

Sunday, May 26, 2024

अधिकारियों को DBT और यूनिफॉर्म की याद आई, वह भी गर्मियों की छुट्टियों में ! स्कूल में छात्रों की संख्या और आधार सीडिंग की पूरी डिटेल भेजने के निर्देश

बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से कहा-DBT की तैयारी कर ली जाए

अधिकारियों को DBT और यूनिफॉर्म की याद आई, वह भी गर्मियों की छुट्टियों में !

स्कूल में छात्रों की संख्या और आधार सीडिंग की पूरी डिटेल भेजने के निर्देश


लखनऊ : एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हुआ। डेढ़ महीना बीत गया। बेसिक शिक्षा विभाग को अब बच्चों की यूनिफॉर्म और बैग के लिए तैयारी की याद आई है। वह भी गर्मियों की छुट्टियों में। अब शिक्षकों को कहा जा रहा है कि वे बच्चों का ब्योरा, आधार सीडिंग सहित डीबीटी की सभी तैयारियों पूरी कर लें। अब सवाल ये उठता है कि स्कूल बंद हैं। शिक्षक और बच्चों की छुट्टियां हैं तो ये तैयारी कैसे होगी ?




30 मई तक ब्योरा अपडेट करने के आदेश

प्रदेश के बेसिक स्कूलों में बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे के लिए सरकार अब डीबीटी के माध्यम से अभिभावक के खाते में 1200 रुपये एकमुश्त भेजती है। अप्रैल से सत्र शुरू हो जाता है। लेकिन हर साल ही लेटलतीफी और तकनीकी दिक्कतों के कारण सभी बच्चों के खाते में सत्र के अंत तक यह धनराशि नहीं पहुंच पाती। 


इस बार भी एक अप्रैल से अभी तक इसकी प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है। अब बेसिक शिक्षा निदेशक ने आदेश दिया है कि 30 मई तक इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। कहा गया है कि जो छात्र स्कूल छोड़ गए हैं, उनके नाम हटाए जाएं और जो नए दाखिल हुए हैं, उनके नाम जोड़े जाएं। उसके बाद पूरा ब्योरा भेजा जाए। इसमें आधार सीडिंग का ब्योरा भी अपलोड किया जाए।


छुट्टियों में कैसे ब्योरा अपडेट हो ?

शिक्षकों का कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों में यह आदेश किया गया है। शिक्षक हर समय अपने पास पूरा ब्योरा नहीं रखते। स्कूल में दस्तावेज होते हैं। उसे देखकर भरना होता है। वहीं छुट्टियों में शिक्षक घूमने और अन्य काम से बाहर भी जाते हैं। बाहर के कुछ अपने घर या मूल निवास पर चले जाते हैं। 

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि जब स्कूल खुले थे, तभी यह काम करा लेना चाहिए था। इससे तो अब बच्चों की यूनिफॉर्म का काम और लेट होगा। बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल कहते हैं कि ज्यादातर ब्योरा ऑनलाइन होता है। अभी से तैयारी के लिए इसलिए कहा जा रहा है, ताकि आचार संहिता खत्म होते ही धनराशि अभिभावकों के खाते में भेजी जा सके।

Tuesday, April 30, 2024

मांग : परिषदीय विद्यार्थियों को सिली सिलाई यूनिफॉर्म मिले तो खत्म हों कई दिक्कतें

मांग : परिषदीय विद्यार्थियों को सिली सिलाई यूनिफॉर्म मिले तो खत्म हों कई दिक्कतें


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नया सत्र 2024-25 शुरू हो चुका है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे के लिए उनके अभिभावकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिये पैसे भेजा जाएगा। पर, अभी ही विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म व बैग आदि देने की मांग उठने लगी है, क्योंकि अभिभावक पैसे का सही इस्तेमाल नहीं करते हैं। इससे शिक्षकों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। 


सरकार परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को जहां निशुल्क किताबें देती है। वहीं यूनिफॉर्म, बैग, जूता-मोजा और स्वेटर के पैसे डीबीटी के जरिये अभिभावकों के खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं। 


उप्र बीटीसी शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि यूनिफॉर्म के लिए पैसे नहीं, बच्चों को यूनिफॉर्म ही दी जाए। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग निविदा कर जेम पोर्टल से मानक के अनुसार यूनिफॉर्म लेकर पाठ्य-पुस्तकों की तरह वितरित करे।


 संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि अभिभावकों के खातों में जो पैसा भेजा जा रहा है, उसका शतप्रतिशत इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इससे आधे ही बच्चे यूनिफार्म में आते हैं। वहीं, शिक्षकों को बार-बार अभिभावकों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए कहा जाता है। इसे लेकर कई जगह विवाद भी हो रहा है।