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Tuesday, May 6, 2025

उ०प्र० गाध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियग-1982 की धारा 33(छः) के प्राविधानों के अन्तर्गत तदर्थ शिक्षकों के किये गये विनियमितीकरण की सूचना एवं वर्ष 2000 के पश्चात संस्था द्वारा अनियमित रूप से नियुक्त तदर्थ शिक्षक, जिनकी सेवायें शासनादेश दिनांक 09.11. 2023 द्वारा समाप्त की गयी है और उनके द्वारा मानदेय हेतु आवेदन किये गये है की सूचना उपलब्ध कराये जाने के संबंध में।

उ०प्र० माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम -1982 की धारा 33(छः) के प्राविधानों के अन्तर्गत तदर्थ शिक्षकों के किये गये विनियमितीकरण की सूचना एवं वर्ष 2000 के पश्चात संस्था द्वारा अनियमित रूप से नियुक्त तदर्थ शिक्षक, जिनकी सेवायें शासनादेश दिनांक 09.11. 2023 द्वारा समाप्त की गयी है और उनके द्वारा मानदेय हेतु आवेदन किये गये है की सूचना उपलब्ध कराये जाने के संबंध में।



Wednesday, March 12, 2025

उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की धारा 33 (छः) के प्राविधानों के अन्तर्गत तदर्थ शिक्षकों के किये गये विनियमितीकरण की सूचना व आदेश की प्रति उपलब्ध कराने के संबंध में

उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की धारा 33 (छः) के प्राविधानों के अन्तर्गत तदर्थ शिक्षकों के किये गये विनियमितीकरण की सूचना व आदेश की प्रति उपलब्ध कराने के संबंध में


अस्थायी शिक्षकों के विनियमितीकरण पर जानकारी मांगी गई

प्रयागराज।  11 मार्च 2025 – उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने एक आदेश जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से उन अस्थायी शिक्षकों के विनियमितीकरण से जुड़ी जानकारी मांगी है, जिन्हें उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 33(छ) के प्रावधानों के तहत नियुक्त किया गया था।

शासन द्वारा जारी पत्र (संख्या: 20673–20690/2024-25) के अनुसार, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया गया है कि वे उन शिक्षकों की जानकारी उपलब्ध कराएं, जो 7 अगस्त 1993 से 25 जनवरी 1999 तक अस्थायी राहत के तहत और 7 अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 तक धारा-18 के अंतर्गत मौलिक नियुक्ति के साथ कार्यरत थे।

शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का हवाला दिया गया है, जिसमें 22 मार्च 2016 से इन शिक्षकों के विनियमितीकरण की प्रक्रिया लागू करने का निर्देश दिया गया था। आदेश में जिला अधिकारियों को शिक्षकों के नाम, पद, विद्यालय का नाम, नियुक्ति की तिथि और विनियमितीकरण की स्थिति की जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है।

यह पहल शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और उनकी नियुक्ति को कानूनी रूप से सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे शीघ्र ही इस संबंध में आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करें।


Wednesday, January 15, 2025

तदर्थ शिक्षकों के प्रकरण में लापरवाही बरत रहे अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, सवा साल बाद भी विनियमितिकरण पर स्थिति नहीं हुई साफ

तदर्थ शिक्षकों के प्रकरण में लापरवाही बरत रहे अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, सवा साल बाद भी विनियमितिकरण पर स्थिति नहीं हुई साफ

लखनऊ : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों के तदर्थ शिक्षकों के विनियमितिकरण के प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब कार्रवाई शुरू की जाएगी। शासन की ओर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेन्द्र देव को पत्र लिखकर इस मामले में सख्त नाराजगी जताई गई है। मंडलीय समितियों में शामिल शिक्षाधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है।

विशेष सचिव, माध्यमिक शिक्षा कृष्ण कुमार गुप्त की ओर से भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि शासन के संज्ञान में आया है कि विनियमितिकरण के कतिपय प्रकरणों पर मंडलीय समिति ने अभी तक कोई विचार नहीं किया है। ऐसे में कई तदर्थ शिक्षकों को लगातार वेतन का भुगतान किया जा रहा है। शिक्षकों के प्रत्यावेदन को एक महीने के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिए गए थे। करीब सवा साल बीतने के बावजूद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया।

 ऐसे में मंडलीय अपर शिक्षा निदेशकों की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। ऐसे अपर निदेशकों की सूची मांगी गई है। दरअसल नौ नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गईं थी। ऐसे योग्य तदर्थ शिक्षक जिनकी वर्ष 2000 से पूर्व

एडेड माध्यमिक स्कूलों में भर्ती हुई थी उनका विनियमितिकरण कर दिया था। ऐसे 1,164 शिक्षकों को नियमित किया गया था। यह खाली पदों के सापेक्ष नियमित हुए थे। वहीं दूसरी ओर वर्ष 2000 के बाद प्रबंधकों द्वारा मनमाने ढंग से भर्ती करीब 946 शिक्षकों में से कई को बाहर कर दिया गया है, लेकिन तमाम ऐसे भी हैं जो लगातार वेतन पा रहे हैं। ऐसे में अभी तक स्थिति स्पष्ट न होने से ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है और तमाम शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं। वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने मांग की है कि सभी तदर्थ शिक्षकों को नियमित किया जाए। क्योंकि यह वर्षों से स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं।



तदर्थ शिक्षकों के मामले में लापरवाही पर शासन सख्त, नियमितीकरण व वेतन भुगतान के लिए काफी दिनों से संघर्ष कर रहे शिक्षक

लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2000 तक के नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के नियमितीकरण व वेतन भुगतान करने के मामले में लापरवाही पर शासन सख्त है। शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से इस मामले में लापरवाही बरतने वाले मंडलीय समिति के अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही का प्रस्ताव मांगा है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्त ने वर्ष 2000 तक के तदर्थ शिक्षकों को जो नियमानुसार नियुक्त किए गए हैं के मामले में नियमितिकरण के प्रकरणों के निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रकरण के निस्तारण की तिथि तक उनका वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

शासन के संज्ञान में आया है कि इस प्रकरणों में मंडलीय समिति द्वारा अभी तक विचार नहीं किया गया है। कार्यवाही न होने से संबंधित तदर्थ शिक्षकों को राजकोष से लगातार भुगतान किया जा रहा है। इससे संबंधित मामले एक महीने में निस्तारित हो जाना चाहिए था। ऐसे में क्यों न लापरवाही करने वाली मंडलीय समिति से ही वेतन की वसूली की जाए। उन्होंने जल्द से जल्द नियमितीकरण के लंबित प्रकरणों के बारे में जानकारी मांगी है।

उन्होंने कहा कि वेतन कार्य सत्यापन के साथ ही आहरित होने के बाद भी अभी तक क्यों नहीं किया गया, इसकी भी जानकारी दी जाए। साथ ही इसमें लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही का भी प्रस्ताव दिया जाए। शासन के इस पत्र से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। 



माध्यमिक शिक्षा: विनियमितीकरण के अनिस्तारित समस्त प्रकरणों को सम्यक् विचारोपरांत प्रत्येक दशा में 25 दिवस के अन्दर निस्तारित करने तथा संस्था में उनकी कार्यरतता के सत्यापन के पश्चात विनियमितीकरण प्रकरण के निस्तारण की तिथि तक वेतन भुगतान किये जाने के संबंध में 


माध्यमिक शिक्षा : विनियमितीकरण के प्रकरणों के सम्बन्ध में कोर्ट आर्डर के अनुपालन के सम्बंध में