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Tuesday, October 28, 2025

आरटीई के आवेदन और प्रवेश की होगी आनलाइन निगरानी

आरटीई के आवेदन और प्रवेश की होगी आनलाइन निगरानी

प्रयागराज : शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में गरीब परिवार के बच्चों को निश्शुल्क प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जा रहा है। आवेदन करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की आनलाइन ट्रैकिंग होगी। प्रत्येक चरण में प्रवेश न पाने वाले बच्चों की संख्या दर्ज होगी। किन कारणों से प्रवेश नहीं मिला उसकी समीक्षा की जाएगी। शिक्षाधिकारियों व निजी स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी। प्रवेश के लिए आवेदन वेबसाइट www.rte25.upsdc.gov.in के माध्यम से किया जाएगा।

नए सत्र में आरटीई के तहत होने वाली प्रवेश प्रक्रिया में पूरी निगरानी की जाएगी। यदि किसी बच्चे के आवेदन में कोई गलती है तो ब्लाक स्तर पर बनी हेल्प डेस्क अभिभावकों से संवाद कर उस गलती को ठीक कराएगी। आरटीई के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित कराया जाएगा। 




आरटीई में दाखिले वाले हर बच्चे की होगी ट्रैकिंग

लखनऊ। प्रदेश में नए सत्र 2026-27 में निःशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में गरीब परिवार के बच्चों को दाखिला दिलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जल्द ही इसका विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जाएगा।

वहीं नए सत्र में दाखिले के लिए आवेदन करने और सीट पाने वाले हर बच्चे को ऑनलाइन ट्रैक किया जाएगा। हर चरण में प्रवेश न पाने वाले बच्चों को किन कारण से प्रवेश नहीं मिला इसकी समीक्षा होगी। संबंधित आधिकारियों व निजी स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी। 


समग्र शिक्षा के उप शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि अगर किसी बच्चे के आवेदन फॉर्म में कोई कमी है तो ब्लॉक स्तर पर हेल्प डेस्क पर अभिभावकों को बुलाकर उसे दूर कराया जाएगा। विशेष चरण में छूटे हुए बच्चों को दाखिला दिलाया जाएगा। आरटीई के तहत निजी
म स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश के लिए अगले महीने से प्रक्रिया शुरू होगी।

वर्तमान में 67 हजार स्कूलों की मैपिंग की गई है। इनमें करीब 5.25 लाख सीटें हैं। वर्तमान शैक्षिक सत्र में करीब कुल 1.40 लाख बच्चों को प्रवेश दिलाया गया है। जबकि 1.85 लाख बच्चों को सीटें आवंटित की गईं थी। हमारा प्रयास है कि हर सीट पाने वाले बच्चे को दाखिला मिले।

उन्होंने कहा कि बच्चों का ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी और अभिभावकों का आधार कार्ड से सत्यापन किया जाएगा।

Monday, June 23, 2025

सरकार की सख्ती के बावजूद गरीब बच्चों को पढ़ाने में निजी स्कूल उदासीन, RTI अंतर्गत हुए मात्र 1.30 लाख प्रवेश

सरकार की सख्ती के बावजूद गरीब बच्चों को पढ़ाने में निजी स्कूल उदासीन, RTI अंतर्गत हुए मात्र 1.30 लाख प्रवेश

प्रयागराज में 3,862 सीटों पर होना था प्रवेश, लिए सिर्फ 2607

गोंडा में सबसे अधिक 94 एवं फिरोजाबाद में 93 प्रतिशत प्रवेश

23 जून 2025
प्रयागराजः शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त प्रवेश देने में निजी स्कूलों ने सरकार का साथ नहीं दिया। स्कूली शिक्षा महानिदेशालय की सख्ती के बावजूद छह लाख में से 1.30 लाख सीटों पर ही प्रवेश हो पाए हैं। कुल सीटों में से अब तक 22 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हुआ है। इस वर्ष आवंटित की गईं 1,85,675 सीटों में से भी 55,401 सीटें अभी नहीं भर पाईं हैं। ऐसे में आवंटित सीटों में से भी 30 प्रतिशत सीटें अभी रिक्त हैं। कम प्रवेश वाले जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) से जवाब मांगा गया है।

आरटीई में अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिलों की बात करें तो गोंडा 94, फिरोजाबाद 93, प्रतापगढ़ व ललितपुर 92, श्रावस्ती व हरदोई  91 प्रतिशत प्रवेश लिए गए हैं। मुरादाबाद 67, कानपुर में 52, मेरठ में 47 और गाजियाबाद में 48 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश नहीं लिए गए। कन्नौज में 41, गोरखपुर में 38, गौतमबुद्ध नगर में 37, कानपुर देहात व वाराणसी में 35 प्रतिशत, अयोध्या, बलिया में 34 प्रतिशत सीटें रिक्त हैं। प्रयागराज में 67.50 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश लिए गए हैं।

कुल चार चरणों में आरटीई के तहत आवेदन मांगे गए थे। पहला चरण एक से 19 दिसंबर, दूसरा एक जनवरी से 19 जनवरी, तीसरा एक फरवरी से 19 फरवरी और चौथा चरण एक मार्च से 19 मार्च तक चला।



RTI Admission : 55 हजार बच्चों के नहीं हुए दाखिले, होगी सख्ती, बेसिक शिक्षा निदेशालय जारी कर रहा विद्यालयों को नोटिस, देखें टॉप टेन और फिसड्डी टेन जिलों का नाम  

1.85 लाख आवंटित सीटों पर 1.30 लाख का ही हुआ प्रवेश

22 जून 2025
लखनऊ। निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रदेश में अब भी 55 हजार छात्रों का प्रवेश नहीं हुआ है। जिलों के बाद अब बेसिक शिक्षा निदेशालय प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों पर सख्ती करेगा। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया गया है कि विद्यालयों को नोटिस जारी कर प्रवेश न लेने का कारण पूछा जाए। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।


इस बार चार चरणों में की गई आवेदन प्रक्रिया में 1.85 लाख बच्चों को सीटें अलॉट की गईं। इसमें से अब तक 1.30 लाख बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित हुआ है। जबकि 55 हजार बच्चों के प्रवेश अभी भी नहीं हुए हैं।

एक जुलाई से नए सत्र में पढ़ाई शुरू होगी। इससे पहले अब निदेशालय की ओर से निजी स्कूलों पर इन बच्चों के प्रवेश के लिए सख्ती की जा रही है। हाल में हुई समीक्षा बैठक में निर्देश दिया गया कि इन स्कूलों से प्रवेश न लेने का कारण पूछा जाएगा। इसमें उचित कारण न मिलने पर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। जानकारी के अनुसार कुछ जिलों में ऐसे विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की गई है।


कम प्रवेश वाले दस जिले

मुरादाबाद में 33 फीसदी, गाजियाबाद में 52 फीसदी, मेरठ में 53 फीसदी, महराजगंज में 64 फीसदी, कौशांबी में 64 फीसदी, अयोध्या में 66 फीसदी, गौतमबुद्ध नगर में 63 फीसदी, कानपुर नगर में 48 फीसदी, कानपुर देहात में 65 फीसदी, कन्नौज में 59 फीसदी प्रवेश आवंटित सीटों के सापेक्ष हुए हैं।


बेहतर प्रवेश वाले दस जिले

बहराइच में 90 फीसदी, बलरामपुर में 92 फीसदी, गोंडा में 94 फीसदी, श्रावस्ती में 91 फीसदी, देवरिया में 90 फीसदी, फिरोजाबाद में 93 फीसदी, हरदोई में 91 फीसदी, ललितपुर में 92 फीसदी, प्रतापगढ़ में 92 फीसदी, पीलीभीत में 89 फीसदी प्रवेश आवंटित सीटों के सापेक्ष हुए हैं।

Tuesday, March 4, 2025

आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि में अभी वृद्धि का कोई विचार नहीं, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने विधान परिषद में दिया जवाब

आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि में अभी वृद्धि का कोई विचार नहीं, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने विधान परिषद में दिया जवाब  


लखनऊ। प्रदेश में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश के सापेक्ष की जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने का अभी कोई विचार नहीं है। विधान परिषद में शुल्क प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने के सवाल पर यह जवाब बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने दिया। 


निर्दल समूह के डॉ. आकाश अग्रवाल व राजबहादुर चंदेल ने नियम 105 के तहत यह मामला उठाते हुए कहा कि निजी स्कूलों को शुल्क प्रतिपूर्ति राशि 2011 में 450 रुपये प्रति छात्र प्रति माह तय की गई थी। आज 14 साल बाद भी वही पैसा निजी स्कूलों को दिया जा रहा है। इसकी वजह से वे आरटीई के प्रवेश में रुचि नहीं ले रहे हैं। वहीं शुल्क प्रतिपूर्ति का कई जिलों में स्कूलों का बकाया भी कई साल से लंबित पड़ा है। 


राजबहादुर चंदेल ने कहा कि सीबीएसई व आईसीएसई के स्कूल प्रवेश नहीं लेते हैं। ऐसे स्कूलों पर सरकार सख्ती करे। इस पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि अभी इस राशि को बढ़ाने का कोई विचार नहीं है। साल दर साल आरटीई में आवेदन करने और प्रवेश लेने वालों की संख्या बढ़ रही है। 2022-23 में 181 करोड़ अतिरिक्त की व्यवस्था कर निजी स्कूलों का बकाया भुगतान किया गया है। अगर किसी विद्यालय का पैसा बकाया है तो उसे दिखवाकर भुगतान कराया जाएगा। 

Sunday, December 22, 2024

यूपी के निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले के लिए आए 1.32 लाख आवेदन, 24 दिसंबर को निकलेगी ऑनलाइन लाटरी

यूपी के निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले के लिए आए 1.32 लाख आवेदन, 24 दिसंबर को निकलेगी ऑनलाइन लाटरी


लखनऊ । प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी व कक्षा एक में प्रवेश के लिए 1.32 लाख आवेदन फार्म भरे गए हैं। गरीब परिवार के बच्चों को मुफ्त दाखिला देने के लिए पहले चरण की प्रक्रिया चल रही है। अब सत्यापन के बाद 24 दिसंबर को आनलाइन लाटरी निकाली जाएगी और सीटें आवंटित की जाएगी। आवंटित स्कूलों में अभिभावक 27 दिसंबर तक अपने बच्चे का प्रवेश करा सकेंगे।


शैक्षिक सत्र 2025-26 में प्रवेश के लिए चार चरणों में प्रवेश प्रक्रिया 27 मार्च 2025 तक चलेगी। 62,871 निजी स्कूलों में 6.03 लाख सीटें हैं। प्रदेश में इस बार सर्वाधिक 10,278 आवेदन फार्म वाराणसी में भरे गए हैं। वहीं लखनऊ में 8,714, कानपुर में 8,276, अलीगढ़ में 4,880 और आगरा में 4,626 आवेदन फार्म भरे गए हैं। आरटीई के तहत अधिक से अधिक दाखिले कराने के लिए इस बार चार चरणों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 


शैक्षिक सत्र 2025- 26 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 27 मार्च तक ही पूरी की जाएगी। इस अब 62,871 निजी स्कूलों में कुल 6.03 लाख सीटें हैं। 3.91 लाख कक्षा एक और 2.11 लाख सीटें प्री-प्राइमरी कक्षा में हैं। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के निर्देश पर सभी जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में हेल्प डेस्क बनाकर अभिभावकों को आनलाइन आवेदन फार्म भरवाने में मदद की जा रही है।

Tuesday, November 12, 2024

आरटीई: गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में दाखिला की प्रक्रिया हेतु एक दिसंबर से ऑनलाइन आवेदन

आरटीई: गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में दाखिला की प्रक्रिया हेतु एक दिसंबर से ऑनलाइन आवेदन


लखनऊ। आरटीई के तहत गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में दाखिला की प्रक्रिया अप्रैल में नया सत्र शुरू होने से पहले पूरे हो जाएंगे। शासन ने आवेदन से लेकर सत्यापन, लॉटरी व दाखिले की तारीखें जारी कर दी हैं। आरटीई में चयनित छात्रों को स्कूल, 29 मार्च तक आवंटित होंगे। दाखिले के ऑनलाइन आवेदन एक दिसम्बर से लिये जाएंगे। पहले चरण के लिये आवेदन एक से 19 दिसम्बर तक लिये जाएंगे। 24 दिसम्बर को लॉटरी निकाली जाएगी। दाखिले की प्रक्रिया 27 से शुरू होगी।



बीएसए व बीईओ कार्यालय में आरटीई अंतर्गत प्रवेश में मदद के लिए बनेगीं बनेगी हेल्पडेस्क


निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) का इस बार व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। बस व रेलवे स्टेशन सहित सार्वजनिक स्थानों पर होर्डिंग लगवाए जाएंगे। पंफलेट बांटकर जानकारी दी जाएगी।


RTE के तहत मुफ्त दाखिले की सभी सीटें भरने को पांच गुणा आवेदन पर जोर

5.45 लाख सीटों के मुकाबले 3.36 लाख आए थे फार्म

अगले सत्र में प्रवेश के लिए दिसंबर से शुरू होगी प्रक्रिया


लखनऊ : शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए निर्धारित सभी सीटों को भरने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में सीटों के मुकाबले पांच गुणा अधिक आवेदन फार्म भरवाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। अभी 5.45 लाख सीटों के मुकाबले 3.36 लाख बच्चों के ही आवेदन आए थे और 1.02 लाख सीटों पर प्रवेश हो सके थे। ऐसे में अब अगले सत्र 2025-26 में प्रवेश के लिए अधिक से अधिक आवेदन हो सकें, इसके लिए दिसंबर से ही प्रक्रिया शुरू की जा रही है।


स्कूल शिक्षा महानिदेशालय की ओर से सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिलों में आरटीई के लिए उपलब्ध सीटों के मुकाबले कम से कम पांच गुणा आवेदन फार्म भरवाएं। इसके लिए रेल और बस स्टेशनों सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर होर्डिंग व पोस्टर इत्यादि लगाए जाएंगे। 


गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त दाखिला दिलाने के लिए उनके अभिभावकों को आनलाइन आवेदन फार्म भरवाने में भी मदद की जाएगी। सभी खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) व बीएसए कार्यालय में इसके लिए हेल्प डेस्क बनाई जाएगी।


 ऐसे अभिभावक जिन्हें फार्म भरने में कठिनाई होगी उन्हें यहां फार्म भरवाया जाएगा। प्रदेश के 58 हजार निजी स्कूलों की मैपिंग की जा चुकी है। सभी विद्यालयों का ब्योरा आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध कराया जा रहा है। स्कूलवार सीटों का विवरण उस पर अपलोड किया जा रहा है।

Saturday, November 2, 2024

कैदियों के बच्चों को जेल से बाहर स्कूल में शिक्षा का मौलिक अधिकार – हाईकोर्ट

कैदियों के बच्चों को जेल से बाहर स्कूल में शिक्षा का मौलिक अधिकार – हाईकोर्ट 


प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जेल में जन्मे अथवा मां-बाप के साथ कैद में रह रहे बच्चों की स्कूली शिक्षा पर ध्यान के लिए राज्य सरकार को स्कीम तैयार करने का मौका देने के बाद कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2024 को फैसला लिखाना शुरू कर दिया। समय की कमी के चलते अंतिम फैसला 20 नवंबर सुनाया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कैदियों के बच्चों को जेल से बाहर स्कूल में शिक्षा का मौलिक अधिकार है। न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कैदी रेखा की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए सरकार को स्कीम तैयार करने का आदेश दिया था।


याची के साथ रह रहा उसका पांच साल का बच्चा जेल के भीतर कैदियों के बच्चों की शिक्षा के लिए बने स्कूल में पढ़ रहा है। कोर्ट ने इसे बच्चों के मूल अधिकारों के खिलाफ माना है। कहा कि बच्चों के विकास के लिए जरूरी है उन्हें जेल में न रखा जाय। उन्हें सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाय। 

कोर्ट ने महानिदेशक कारागार से प्रदेश के जेलों में रह रहे ऐसे बच्चों की बेहतरी की स्कीम तैयार करने को कहा। प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास व महानिदेशक कारागार उत्तर प्रदेश ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे बच्चों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

 इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास, प्रमुख सचिव कारागार व डीजी कारागार को 24 अक्टूबर तक स्कीम पेश करने का समय दिया था। इसके बाद अपना आदेश लिखाना शुरू कर दिया है। शेष आदेश 20 नवंबर को लिखाया जाएगा।