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Sunday, May 10, 2026

राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की संबद्धता समाप्त, उच्च शिक्षा निदेशालय ने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के दिए निर्देश

राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की संबद्धता समाप्त, उच्च शिक्षा निदेशालय ने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के दिए निर्देश

शिक्षकों की संबद्धता में भेदभाव का उठा था मामला

राजधानी के कॉलेजों पर मेहरबानी सोनभद्र और लखीमपुर उपेक्षित

जहां शिक्षकों की पर्याप्त संख्या वहीं अटैच किए शिक्षक

लखनऊ। प्रदेश के विभिन्न राजकीय स्नातक व परास्नातक महाविद्यालयों में की गई शिक्षकों की संबद्धता समाप्त कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों को अपने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।


अमर उजाला ने 29 अप्रैल के अंक में राजधानी के कॉलेजों पर मेहरबानी, सोनभद्र और लखीमपुर उपेक्षित शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें यह बताया गया था कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पर्याप्त संख्या वाले विद्यालयों में शिक्षकों को संबद्ध किया जा रहा है। जबकि जिन कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या काफी कम है, वहां ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के विभिन्न राजकीय स्नातक व स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में एक महाविद्यालय से दूसरे महाविद्यालय में कतिपय शिक्षकों की संबद्धता की गई थी। इसके तहत इन सभी की संबद्धता आदेश को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। हालांकि इसमें प्रशासनिक आधार (प्रशासनिक काम को) पर की गई संबद्धता को छोड़ा गया है।

उन्होंने सभी प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर को अपने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने को कहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तबादला नीति जारी होने के बाद अब जिन कॉलेजों में जरूरत है, वहां पर नए सिरे से शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इसमें छात्र-शिक्षक अनुपात को ध्यान में रखा जाएगा। इससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

Tuesday, December 2, 2025

कर्मचारियों के विरोध के बीच लखनऊ में उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय 10 दिसंबर से खोलने की तैयारी

कर्मचारियों के विरोध के बीच लखनऊ में उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय 10 दिसंबर से खोलने की तैयारी

01 दिसम्बर 2025
प्रयागराज। कर्मचारियों के विरोध के बीच उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय लखनऊ में दस दिसंबर से खोलने की तैयारी है। शासन के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज को 30 अक्तूबर को कैंप कार्यालय का संचालन नवनिर्मित राजकीय महाविद्यालय लतीफनगर, सरोजनीनगर लखनऊ से करने के लिए तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे।

इस बीच कैंप कार्यालय संचालन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विशेष सचिव से अनुमोदन पत्र भी निदेशालय को मिल चुका है। फिलहाल उच्च शिक्षा निदेशक सप्ताह में तीन दिन लखनऊ और चार दिन प्रयागराज में बैठेंगे। इसके साथ ही एक अपर निदेशक भी लखनऊ कैंप कार्यालय में तैनात रहेंगे। प्रयागराज से छह विभागों को लखनऊ स्थानांतरित करने की तैयारी है। कैंप कार्यालय के लिए 15 कर्मचारियों का तबादला लखनऊ किया जाएगा।

कैंप कार्यालय को लेकर कर्मचारियों का विरोध जारी

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय लखनऊ में खोले जाने को लेकर कर्मचारियों का विरोध जारी है। शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ की सामान्य सभा में लिए गए निर्णय के अनुसार कैंप कार्यालय खोलने संबंधी शासनादेश निरस्त कराने के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों से मिलकर अनुरोध कर रहे हैं। संघ के अध्यक्ष घनश्याम यादव और मंत्री सुरेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि शासनादेश निरस्त कराने के लिए अब तक कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता 'नन्दी', सांसद फूलपुर प्रवीण पटेल, महापौर गणेश केशरवानी, एमएलसी सुरेन्द्र चौधरी, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, दीपक पटेल व गुरू प्रसाद मौर्य मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध कर चुके हैं।



लखनऊ में उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय खोलने का विरोध हुआ तेज

09 नवंबर 2025
प्रयागराज। लखनऊ में उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय खोलने का विरोध तेज हो गया है। यह फैसला वापस लेने के लिए कर्मचारियों ने स्थानीय मंत्रियों, विधायकों एवं अन्य नेताओं को पत्र लिखा है। सोमवार को संघ की आमसभा में आंदोलन की रणनीति तय होगी।

 कर्मचारियों का यह भी कहना है कि कैंप कार्यालय के लिए जो स्थान चिह्नित किया गया है वह सचिवालय से 35 से 40 किमी दूर है। पूरा रास्ता जाम वाला है। ऐसे में कैंप कार्यालय वहां ले जाने का भी कोई औचित्य नहीं है। 

इसके विरोध में उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ ने जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा। संघ के मंत्री सुरेंद्र सिंह का कहना है कि सोमवार को कार्यकारिणी की बैठक में बात रखी जाएगी। इसमें फैसले को आमसभा में रखा जाएगा। 


उच्च शिक्षा निदेशालय का लखनऊ में कैंप कार्यालय खोलने का विरोध, कैंप कार्यालय के औचित्य को नकारने वाले निदेशालय के पत्र का भी हवाला दे रहे कर्मचारी

मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ की मांग पर उप मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव को लिखा पत्र

प्रयागराज । उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय लखनऊ में खोलने का विरोध मुखर हो गया है। शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ की मांग पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी हस्तक्षेप किया है। साथ में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा को पत्र लिखा है।

कार्यालय लखनऊ ले जाने से संबंधित निदेशालय के एक पत्र का हवाला देते हुए भी कर्मचारी शासन के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। शासन की ओर से उच्च शिक्षा निदेशालय को लखनऊ शिफ्ट करने का फैसला लिया गया था लेकिन कर्मचारियों के तीव्र विरोध के बाद इसकी प्रक्रिया रोक दी गई लेकिन विवाद थमा नहीं है।

लखनऊ में कैंप कार्यालय खोले जाने का आदेश जारी किया गया जिसके लिए निदेशालय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कर्मचारियों के अनुसार, मार्च में उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भी कार्यालय लखनऊ ले जाने के औचित्य पर सवाल उठाया गया था। इसके बाद कैंप कार्यालय का मुद्दा शांत रहा लेकिन शुक्रवार को अचानक लखनऊ में कैंप कार्यालय खोलने का आदेश जारी हो गया।

इसके विरोध में कर्मचारी संघ के महामंत्री ने लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय में मांग पत्र सौंपकर इस आदेश को निरस्त करने की मांग की। संघ के पदाधिकारियों ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत अन्य नेताओं को भी इस बाबत मांग पत्र सौंपा।

संघ के मंत्री सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि उप मुख्यमंत्री का जवाब भी आया है। उन्होंने कर्मचारियों की मांग पत्र पर प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। सुरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि लखनऊ में कैंप कार्यालय का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।




उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय लखनऊ में खुलेगा, शासनादेश जारी

फिलहाल लखनऊ के राजकीय महाविद्यालय से कार्यालय संचालन की तैयारी, निदेशक पूरी करेंगे आवश्यक कार्रवाई

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय भी लखनऊ में खोला जाएगा। शासन की ओर से आदेश जारी कर उच्च शिक्षा निदेशक से इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। फिलहाल कैंप कार्यालय सरोजनी नगर के लतीफ नगर में नवनिर्मित राजकीय महाविद्यालय परिसर में खोला जाएगा।

माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय लखनऊ में है। अब उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय भी लखनऊ में खोला जाएगा। पूर्व में भी इस बाबत आदेश जारी किया गया था लेकिन कर्मचारियों के तीव्र विरोध के बाद इस फैसले को स्थगित कर दिया गया था। शासन की ओर से अब एक बार फिर लखनऊ में कैंप कार्यालय खोलने का आदेश जारी किया गया है। इसे लेकर विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी की ओर से उच्च निदेशक को पत्र लिखा गया है। पत्र के अनुसार पिछले दिनों समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया ताकि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ शासकीय कार्यों को त्वरित और प्रभावी तरीके से निस्तारित किया जा सके।

नया भवन मिलने तक कैंप कार्यालय लखनऊ में सरोजनी नगर स्थित राजकीय महाविद्यालय परिसर से संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशक को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के लिए कहा गया है। 


मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा : शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में उच्च शिक्षा निदेशालय का लखनऊ में कैंप कार्यालय खोले जाने का विरोध किया गया। संघ की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर यह आदेश निरस्त करने की मांग की गई। कर्मचारियों का कहना था कि मुख्यमंत्री प्रयागराज के गौरव के लिए लगातार प्रयासरत हैं लेकिन यह आदेश शिक्षा नगरी की गरिमा के साथ अन्याय है। लय. उत्तर प्रदेश उनका कहना था कि निदेशालय में एक करोड़ रुपये की लागत से ई-कंटेंट स्टूडियो स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से निदेशालय के अधिकारी और शासन के अफसर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सीधे जुड़कर कार्यों को निस्तारित कर रहे हैं। संघ के अध्यक्ष घनश्याम यादव और मंत्री सुरेंद्र कुमार सिंह ने ज्ञापन के माध्यम से लखनऊ में निदेशालय का कैंप कार्यालय खोले जाने का आदेश निरस्त करने की मांग की।



शासन से मांगी गाइडलाइन

शासन से आदेश आने के बाद कैंप कार्यालय के स्वरूप, इसमें किन-किन अफसरों और कर्मचारियों की तैनाती होगी, जरूरी कागजातों की शिफ्टिंग आदि बिंदुओं पर मंथन शुरू हो गया है। इसके लिए शासन से गाइडलाइन भी मांगी गई है। अफसरों का कहना है कि जरूरी कार्रवाई कर जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर कैंप कार्यालय के संचालन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


उठने लगे कर्मचारियों के विरोध के स्वर

लखनऊ में कैंप कार्यालय खोले जाने के आदेश से निदेशालय में हलचल तेज होने के साथ कर्मचारियों के विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय लखनऊ में खोले जाने का तीव्र विरोध किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा का भी कैंप कार्यालय लखनऊ में है लेकिन धीरे-धीरे निदेशालय के ज्यादातर काम वहीं चले गए। यहां महज औपचारिकता भर रह गई है। 

आशंका है कि लखनऊ में कैंप कार्यालय खुलने से उच्च शिक्षा निदेशालय का भी यही अंजाम होगा। धीरे-धीरे सभी काम वहीं चले जाएंगे। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि शासन की मंशा है कि सभी विभागों के मुख्यालय लखनऊ में शिफ्ट कर दिए जाएं। पुलिस मुख्यालय, निबंधन कार्यालय, राजस्व परिषद समेत कई विभागों के ज्यादातर काम लखनऊ शिफ्ट हो चुके हैं। कर्मचारियों को आशंका है कि उच्च शिक्षा निदेशालय का कैंप कार्यालय खोला जाना भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

Saturday, November 15, 2025

अब उच्च शिक्षा निदेशालय में सब कुछ होगा ऑनलाइन, बायोमेट्रिक हाजिरी भी होगी शुरू


अब उच्च शिक्षा निदेशालय में सब कुछ होगा ऑनलाइन, बायोमेट्रिक हाजिरी भी होगी शुरू 

 70 फीसदी दस्तावेज की स्कैनिंग पूरी, अन्य कार्यालयों एवं कॉलेजों में भी होगी व्यवस्था

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशालय और अन्य संबंधित कार्यालयों में आने वाले दिनों में सभी काम ऑनलाइन होंगे। निदेशालय में 70 फीसदी से अधिक दस्तावेज की स्कैनिंग हो चुकी है। इन्हें ऑनलाइन भी किया जा रहा है। उच्च शिक्षा निदेशालय, क्षेत्रीय कार्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों आदि में सभी काम ऑनलाइन करने का आदेश दिया गया है।

इसके तहत निदेशालय में प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अफसरों और कर्मचारियों की अलग-अलग टीमें बनाकर विशेषज्ञ एजेंसी की मदद से आवश्यक कार्य कराए जा रहे हैं। संयुक्त निदेशक डॉ. शशी कपूर ने बताया कि निदेशालय में करीब 70 प्रतिशत दस्तावेज ऑनलाइन कर दिए गए हैं। कई काम ऑनलाइन किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी दस्तावेज स्कैन कर लिए जाएंगे। इसके बाद सभी काम ऑनलाइन होंगे।


उच्च शिक्षा निदेशालय में सोमवार से बायोमीट्रिक उपस्थिति

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशालय में सोमवार से अफसरों एवं कर्मचारियों की बायोमीट्रिक उपस्थिती दर्ज कराने की तैयारी है। सचिव उच्च शिक्षा ने पिछले दिनों समीक्षा बैठक एवं निदेशालय के निरीक्षण के दौरान यह आदेश दिया था। इसी के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। 95 फीसदी से अधिक अफसरों एवं कर्मचारियों की बायोमीट्रिक पहचान मशीन में दर्ज करा ली गई है। संयुक्त निदेशक डॉ. शशी कपूर का कहना है कि सोमवार से बायोमीट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए परिसर में तीन जगह मशीन लगाई जाएगी। 




उच्च शिक्षा निदेशालय में होगी बायोमीट्रिक उपस्थिति, तीन साल से डटे कर्मचारियों के बदले जाएंगे पटल

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशालय और इसके अन्य कार्यालयों में अफसरों एवं कर्मचारियों की अब बायोमीट्रिक उपस्थिति होगी। अफसरों के लिए निदेशक कक्ष के पास पंचिंग मशीन लगाई जाएगी। वहीं कर्मचारियों के लिए परिसर स्थित दो अन्य भवन में मशीन लगेगी। बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू होने के बाद अफसरों एवं कर्मचारियों के रोजाना आने-जाने का समय भी दर्ज हो जाएगा। 

निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज ने बताया कि बायोमीट्रिक उपस्थिति के लिए उपकरण आदि लगाने के लिए टेंडर हो गया है। जल्द ही व्यवस्था लागू होगी। पिछले इस संबंध में पिछले दिनों समीक्षा बैठक में सचिव उच्च शिक्षा ने निर्देश दिए थे। 

 

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशालय में तीन वर्ष या अधिक समय से एक ही स्थान पर डटे कर्मचारियों के पटल बदले जाएंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कर्मचारियों के कार्य वितरण को लेकर निदेशालय में कई तरह की विसंगतियों की बात कही जा रही है। 

खासतौर पर महिला कर्मचारियों ने उच्च शिक्षा सचिव से मुलाकात कर इसकी शिकायत की थी। डॉ. अमित भारद्वाज का कहना है कि निदेशालय में कार्यरत सभी कर्मचारियों का विवरण मांगा गया है। शासनादेश एवं सचिव के निर्देश के क्रम में कर्मचारियों के पटल परिवर्तित किए जाएंगे। यह प्रक्रिया एक सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी। 

Thursday, November 6, 2025

अब निशातगंज में बनेगा संस्कृत निदेशालय, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शासन को भेजा संशोधित प्रस्ताव

अब निशातगंज में बनेगा संस्कृत निदेशालय, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शासन को भेजा संशोधित प्रस्ताव,  निदेशालय के साथ ही यहां संस्कृत परिषद का होगा कार्यालय


लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मेट्रो के दूसरे चरण का काम स्वीकृत होने से संस्कृत निदेशालय व परिषद कार्यालय अब कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन (सीटीई) कैसरबाग परिसर में नहीं बनेगा। काफी जद्दोजहद के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए निशातगंज जीआईसी के पीछे की जगह तय की है। संशोधित प्रस्ताव शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया है।


प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने व उसके कामकाज को सुचारु रखने के लिए राजधानी में संस्कृत निदेशालय व परिषद का नया भवन प्रस्तावित किया गया है। वर्तमान में निदेशालय प्रयागराज में चल रहा है। परिषद का राजधानी स्थित भवन काफी जर्जर होने से नया बनाने और उसकी जमीन को केजीएमयू को देने का निर्णय लिया गया था। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए आवश्यक बजट की पहली किस्त जारी करते हुए कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी थी, लेकिन काम शुरू होने से पहले ही राजधानी में मेट्रो के दूसरे चरण के काम को मंजूरी मिल गई। इसके तहत सीटीई परिसर के एक हिस्से में मेट्रो स्टेशन बनना है। इससे यहां पर नया भवन बनाया जाना संभव नहीं था।


लंबी कवायद के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने निशातगंज जीआईसी में पीछे की तरफ खाली पड़ी जमीन पर इसके निर्माण का निर्णय लिया है। विभाग ने यहां की मिट्टी आदि की जांच-पड़ताल के बाद 42.42 करोड़ से बनने वाले चार मंजिला संस्कृत निदेशालय व संस्कृत परिषद भवन के निर्माण का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद जल्द ही इसका काम शुरू होगा। इससे प्रदेश में संस्कृत के पठन-पाठन को बढ़ावा देने के साथ ही 1200 से अधिक कॉलेजों के संचालन व देखरेख में भी काफी सहूलियत मिलेगी।


नागर शैली में बनेगा भवन

यह सीएम योगी आदित्यनाथ का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। शासन ने लंबी कवायद के बाद सीटीई कैसरबाग परिसर में निदेशालय व परिषद कार्यालय के निर्माण को हरी झंडी दी थी। सीएम ने खुद इसके भवन की डिजाइन फाइनल कर इसका भवन नागर शैली में बनाने के निर्देश दिए हैं। चार मंजिला (जी प्लस श्री) यह भवन मंदिर नुमा होगा और ऊपर शिखर भी बनाया जाएगा ताकि यहां आने वालों को संस्कृत से जुड़ाव महसूस हो।

Wednesday, April 30, 2025

शिक्षा विभाग के सभी कार्यालयों का होगा सेफ्टी ऑडिट, ई ऑफिस की व्यवस्था भी जल्द होगी लागू

शिक्षा विभाग के सभी कार्यालयों का होगा सेफ्टी ऑडिट, ई ऑफिस की व्यवस्था भी जल्द होगी लागू 


लखनऊ। प्रयागराज स्थित शिक्षा निदेशालय में आग लगने की घटना के बाद बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग सतर्क हो गए हैं। विभाग ने जहां आग लगने के कारणों की पड़ताल शुरू की है, वहीं भविष्य में इससे बचाव की व्यवस्था दुरुस्त करने की कवायद भी शुरू कर दी है। इसके तहत बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं।

शिक्षा निदेशालय में आग लगने की घटना का संज्ञान लेते हुए शासन ने तुरंत सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसी क्रम में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरी घटना के बारे में जानकारी ली है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने कार्यालयों का सेफ्टी ऑडिट कराएं।


वहीं उन्होंने अधिकारियों को अपने यहां ई- ऑफिस की व्यवस्था को भी जल्द से जल्द पूरी तरह प्रभावी करने के निर्देश दिए हैं। ताकि इस तरह की घटना में किसी रिकॉर्ड के जलने या उसके खोने, किसी तरह की हेरफेर की संभावना पर भी पूरी तरह रोक लगाई जा सके।


चार मंडलों की 250 फाइलें हुई हैं क्षतिग्रस्त

निदेशालय में आग लगने की घटना के बाद विभाग की ओर से बताया गया है कि सामान्य प्रथम व द्वितीय अनुभाग से लगे केंद्रीय रसीद अनुभाग, लेखा अनुभाग (उच्च शिक्षा) में आग लगने से फर्नीचर जला है। वहीं सामान्य प्रथम व द्वितीय अनुभाग में आग लगने के कारण चार मंडलों से संबंधित 250 गतिमान पत्रावलियां जली या क्षतिग्रस्त हुई हैं। यहां अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधकीय विवाद, विद्यालय में शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मियों के वरिष्ठता विवाद, उच्च न्यायालय से संबंधित कार्य से जुड़ी फाइलें थीं। अपर शिक्षा निदेशक सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि जल गई पत्रावलियों को जिला, मंडल, शासन, उच्च न्यायालय में लगाए गए दस्तावेजों व ई-मेल आदि पर सुरक्षित अभिलेखों से फिर तैयार कर दी जाएंगी।


शिक्षा निदेशालय में लगी आग के लिए शासन ने बनाई 5 सदस्यीय जांच कमेटी, एडेड स्कूलों के तबादले व इससे संबंधित फाइलों के जलने की आशंका, रिकॉर्ड पूरी तरह से खत्म होने की बात निराधार

सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में बनी पांच सदस्यीय कमेटी

लखनऊ। प्रयागराज स्थित शिक्षा निदेशालय में आग लगने की घटना का शासन ने संज्ञान लिया है। जिन तीन अनुभागों में आग लगी थी, उन्हें सोमवार को सील कर दिया गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसे 15 दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है।

उन्होंने बताया कि माध्यमिक शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी इस आग लगने की घटना की जांच करेगी। इसमें माध्यमिक शिक्षा निदेशक, एडीएम प्रयागराज, मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रयागराज व उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से नामित वरिष्ठ अधिकारी कमेटी में शामिल किए गए हैं। कहाँ, कि जांच समिति 15 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट व संस्तुति उनके सामने प्रस्तुत करेगी।

वहीं विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों के अनुसार शिक्षा निदेशालय में पिछले दिनों ही काफी बजट खर्च कर बिल्डिंग का रिनोवेशन कराया गया था। ऐसे में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात पर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी तरफ माध्यमिक शिक्षक संगठनों ने यह आशंका जताई है कि पिछले साल अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में काफी संख्या में तबादले हुए थे।


रिकॉर्ड पूरी तरह से खत्म होने की बात निराधार

इस अग्निकांड में इससे जुड़ी फाइलें जली हैं। इतना ही नहीं तदर्थ शिक्षकों के भुगतान आदि से जुड़ी फाइलें भी जलने की आशंका जताई जा रही है। वहीं विभाग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस तरह की फाइलें जली हैं या सभी फाइलें सुरक्षित हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा कि किसी भी तरह के रिकॉर्ड अब डीआईसीआई, सहायक निदेशक, अपर निदेशक व निदेशालय में रहते हैं। ऐसे में कोई भी रिकॉर्ड पूरी तरह से खत्म होने की बात निराधार है।



तारों के जाल के बीच आग बुझाने के नहीं हैं कोई इंतजाम, इतने बड़े हादसे के बाद भी सबक नहीं ले रहा शिक्षा निदेशालय


प्रयागराज। शिक्षा निदेशालय भवन में आग लगने की पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी अगलगी की घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि रविवार को हुए हादसे के बावजूद विभाग सबक नहीं ले रहा है। वर्षों से जर्जर तारों के भरोसे बिजली सप्लाई आज भी जारी है। इन जर्जर तारों से घटना के चौबीस घंटे बाद सोमवार को भी चिंगारी निकलती रही। कर्मचारियों का कहना है कि जर्जर तारों के शॉर्ट करने और चिंगारी निकलना रोजाना की बात हो गई है। शिक्षा निदेशालय के भूतल में रविवार सुबह तीन कमरों में आग लगी थी। आग में सामान्य प्रभाग प्रथम व द्वितीय में अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों की पांच हजार से अधिक महत्वपूर्ण फाइलें जलकर राख हो गई। वहीं केंद्रीय रसीद अनुभाग व लेखा अनुभाग में भी रखी फाइलें जल गई। प्रथम दृष्टया शॉर्ट सर्किट को आग की वजह बताया गया है। हालांकि जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। 

इधर, निदेशालय के अधिकतर विभागों व कक्षों में जर्जर बिजली के तार भविष्य में भी ऐसी घटनाओं का संकेत दे रहे हैं। जिन कमरों में आग लगी थी, उससे चंद कदम दूर बिजली की मेन बोर्ड से सोमवार दोपहर भी चिंगारी निकल रही थी। पूरे भवन में जगह-जगह कटे तारों में खुला जोड़ दिखा। कर्मचारियों ने बताया कि डर के साये में काम करना पड़ता है। हमेशा तारों के शॉर्ट होने से चिंगारी निकलती रहती है।


धूल फांक रहा अग्निशमन यंत्र

जिन कमरों में आग लगी उनसे चंद कदम दूर दीवार पर दो अग्निशामक यंत्र धूल फांक रहे हैं। इन सिलेंडरों का आग लगने के बाद इस्तेमाल तक नहीं किया गया। कर्मचारियों ने बताया कि समय से रिफलिंग नहीं होने से अग्निशमन यंत्र बेकार पड़े है। इतने बड़े विभाग में कहीं भी आग बुझाने का सही इंतजाम नहीं है।

15 दिन में देनी है रिपोर्ट

अग्निकांड की जांच के लिए उच्च स्तरीय पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। सचिव माध्यमिक शिक्षा को समिति का अध्यक्ष बनाय गया है। जबकि शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), शिक्षा निदेशक (उच्च), अपर जिलाधिकारी व मुख्य अग्निशमन अधिकारी को सदस्य मनोनीत किया गया है। समिति को 15 दिन के अंदर जांच कर रिपोर्ट देना है। आग लगे तीनों कमरों व सीसीटीवी कंट्रोल रूम को सीज कर दिया गया है। सीएफओ डॉ आरके पांडेय ने सोमवार को टीम के साथ पहुंचकर मुआयना किया।

तीन साल पहले हुई थी वायरिंग

विभागीय सूत्रों की मानें तकरीबन तीन साल पहले वायरिंग का टेंडर हुआ था लेकिन, मानक के अनुरूप काम नहीं किया गया। यहां तक कि जगह-जगह खुले तार छोड़ दिए गए। कुछ कार्यालयों व कक्षों में पुराने जर्जर तारों को बदला तक नहीं गया। आज भी जर्जर तारों के भरोसे बिजली सप्लाई चल रही है।

बड़ा सवाल, कैसे खुले अनुभागों के दरवाजे

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में जिन तीन अनुभागों में आग लगने की घटना का वीडियो वायरल हुआ है, उसमें तीनों अनुभाग के दरवाजे खुले नजर आ रहे हैं। निदेशालय में शनिवार व रविवार का साप्ताहिक अवकाश था। रविवार को सुबह आठ बजे के आसपास आग लगने की घटना हुई और उस वक्त निदेशालय में सन्नाटा था।

अनुभागों में रखे कंप्यूटर भी हुए क्षतिग्रस्त

अग्निकांड में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुभागों में रखे कंप्यूटर भी राख हो गए। सूत्रों का कहना है कि इन कंप्यूटरों में जांच से जुड़ी फाइलों की कई महत्वपूर्ण जानकारियां मौजूद थीं। कंप्यूटर इस कदर जले हैं कि उनसे महत्वपूर्ण जानकारियों की रिकवरी कर पाना भी काफी मुश्किल होगा।

80 मीटर की गैलरी में सिर्फ एक कैमरा

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के जिन तीन अनुभागों में आग लगी, वे 80 मीटर लंबी गैलरी में स्थित हैं। इस गैलरी में दो दर्जन कमरे हैं और गैलरी के बीचो-बीच सिर्फ एक सीसीटीवी कैमरा लगा है। वहां के कर्मचारियों को भी नहीं पता कि कैमरा ठीक से काम कर रहा है या नहीं। हालांकि, इस कैमरे में तीनों अनुभाग कवर होते हैं।


प्रयागराज। सिविल लाइंस स्थित शिक्षा निदेशालय में आग लगने का कारण जानने के लिए अग्निशमन विभाग की टीम सोमवार सुबह दस बजे घटनास्थल पर पहुंची। जिन तीन कमरों में आग लगी थी, उनकी जांच की गई। साथ ही पता लगाया कि घटना के 24 घंटे बाद भी कमरे से कहीं धुआं तो नहीं निकल रहा है। हालांकि, अग्निशमन विभाग को आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

हजारों फाइल जलने के मामले में बिल्डिंग में बिजली व्यवस्था और आग से बचने के इंतजाम को लेकर पोल खुल गई है। पूरे बिल्डिंग परिसर में खुले में बिजली के तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। जगह-जगह खुले तार हैं। यही नहीं, बिल्डिंग परिसर में आग बुझाने के इंतजाम भी पूरी तरह से चौपट हैं। प्रवेश द्वार के पास ही अग्निशमन यंत्र लगा हुआ है। लेकिन, ये दिखने में काफी पुराना है।

इसपर चस्पा स्टीकर में भी कुछ नहीं लिखा है। यहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि ये न जाने कितने सालों से ऐसा ही लगा है। इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। जिन जगहों पर अग्निशमन यंत्र लगा भी तो वह एक्सपायरी डेट के हैं। यानी अगर कोई बड़ा हादसा हो जाए तो बचने के कोई खास इंतजाम नहीं है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी डॉ. आरके पांडेय ने बताया कि जांच की जा रही है।


चर्चा... कंप्यूटर खुला होने से शॉर्ट सर्किट की आशंका

शनिवार और रविवार को कार्यालय बंद होने के बावजूद आग की घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। विभाग में चर्चा है कि कंप्यूटर खुला होने की वजह से शॉर्ट सर्किट हुआ होगा। जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। अगर बिजली को पूरी तरह से शटडाउन कर दिया जाता तो शायद यह हादसा नहीं होता।



एडेड कॉलेजों के विवादों का कैसे होगा निपटारा? आग की भेंट चढ़ी हजारों फाइलें, फिर से रिकॉर्ड ढूंढना होगा मुश्किल, आग लगने के पीछे साजिश की आशंका पर जांच समिति गठित 
 

शिक्षा निदेशालय के दो महत्वपूर्ण अनुभागों में रविवार सुबह आग लगने से कई सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार आग ने उन सेक्शनों को चपेट में लिया, जहां एडेड कॉलेज (अशासकीय माध्यमिक विद्यालय) से जुड़ी अतिसंवेदनशील फाइलें रखी गई थीं। सभी फाइलें जलकर नष्ट होने से फिर से रिकॉर्ड ढूंढना मुश्किल है। चौंकाने वाली बात यह है कि आग खासतौर पर ऐसे समय में लगी, जब कई एडेड कॉलेजों की जांच प्रक्रियाएं चल रही है।
 

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आग लगने के कारणों की गहन जांच के आदेश दिए हैं। प्रथम दृष्टया शॉर्ट सर्किट की संभावना जताई जा रही है, लेकिन साजिश से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। आग कैसे व किन परिस्थितियों में लगी, इसका जांच के बाद खुलासा होगा। हालांकि आग लगने से प्रबंधकीय माध्यमिक विद्यालयों के लंबे समय से लंबित मामलों की भी जुड़ी फाइलें शामिल थीं। विभागीय सूत्रों की मानें तो इसमें शिक्षकों की नियुक्ति, स्थानांतरण व वेतन भुगतान के विवादों के अलावा प्रबंधकीय विवाद पव लंबित मुकदमें से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें थी। इसमें दस से अधिक मंडलों के माध्यमिक विद्यालयों की फाइलें आग से पूरी तरह राख हो गई हैं।

ड्यूटीरत कर्मचारियों से होगी पूछताछ

शिक्षा विभाग की मानें तो जिस वक्त आग लगी थी, उस वक्त वहां आउस सोर्सिंग गार्ड के अलावा कैंटीन के कर्मचारी समेत कुछ अन्य लोग मौजूद थे। रविवार को अवकाश का दिन होने से विभाग के कार्यालयों व अनुभागों के कक्ष में ताला लगा था। अंदर लाइट भी बंद थी, ऐसे में शार्ट सर्किट से कैसे आग लग सकती है, इस पर सवाल उठने लगे हैं। विभाग की ओर से गठित जांच समिति घटना के वक्त ड्यूटीरत व मौजूद लोगों से गहनता से पूछताछ करेगी। इसके साथ ही आस-पास लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जाएगा।

घटना की जांच के लिए समिति गठित

अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि घटना के हर पहलू की गहनता से जांच करने के लिए सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति में एडीएम सिटी और सीएफओ को भी शामिल किया गया है। घटना की गहराई से जांच करने और आवश्यक कदम उठाने के लिए पुलिस को भी तहरीर दी गई है।

डीआईओएस और ज्वाइंट डायरेक्टर की लेंगे मदद

शिक्षा निदेशालय के सूत्रों की मानें तो डीआईओएस व ज्वाइंट डायरेक्टर के कार्यालयों से संपर्क कर आग में जलकर राख हुई फाइलों के संबंध में रिकॉर्ड मांगा जाएगा। हालांकि केंद्रीय रसीद अनुभाग व लेखा अनुभाग से जुड़ी कुछ फाइलों का रिकॉर्ड तो मिल सकती है, लेकिन एडेड कॉलेजों के रिकॉर्ड मिलना नामुमकिन होगा। शिक्षा निदेशालय के भूतल में एक बड़े हॉल में सामान्य (1) के प्रथम व द्वितीय प्रभाग बनाया गया था। इसमें एडेड कॉलेजों की फाइलें रखी थी। इनका कोई ऑनलाइन डाटा भी उपलब्ध नहीं है।



शिक्षा निदेशालय में भीषण आग में पांच हजार से ज्यादा फाइलें जलकर राख, घटना की जांच के लिए समिति गठित
 
उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशालय के मुख्य भवन में रविवार सुबह अज्ञात कारणों से आग लग गई। तीन कमरों में लगी आग में अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों से जुड़ी लगभग पांच हजार से अधिक फाइलें जलकर नष्ट हो गईं। अग्निशमन कर्मचारियों ने तीन घंटे के प्रयास के बाद आग पर काबू किया। सहायक उप शिक्षा निदेशक अनुराग श्रीवास्तव ने सिविल लाइंस थाने में तहरीर देकर आग लगने के कारणों की जांच करने की मांग की है।

सिविल लाइंस स्थित शिक्षा निदेशालय के मुख्य भवन के भूतल पर स्थित सामान्य (1) के प्रथम व द्वितीय प्रभाग में रविवार सुबह लगभग आठ बजे आग की लपटें व धुआं निकलता दिखा। गार्ड प्रियांशु यादव ने तत्काल फार्म सहायक मोहम्मद सैफी को जानकारी दी। फार्म सहायक की सूचना पर थोड़ी देर में फायर ब्रिगेड पहुंच गई। हालांकि तब तक आग बगल में स्थित केंद्रीय रसीद अनुभाग व लेखा अनुभाग (उच्च शिक्षा) तक फैल गई। सूचना पर विभागीय अधिकारी व कर्मचारी और सिविल लाइंस पुलिस भी पहुंच गई।

दो दमकल की मदद से अग्निशमनकर्मियों ने तीन घंटे में आग पर काबू किया हालांकि तब तक सामान्य प्रभाग में लगभग पांच हजार से अधिक फाइलें पूरी तरह नष्ट हो गई। इसमें अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों की नियुक्ति, वेतन भुगतान, स्थानांतरण, प्रबंधकीय विवाद व लंबित मुकदमों की महत्वपूर्ण फाइलें शामिल थीं। वहीं केंद्रीय रसद व लेखा विभाग में भी रखी सैकड़ों फाइलें आग की भेंट चढ़ गई। एडीसीपी अभिजीत कुमार ने बताया कि शिक्षा निदेशालय के मुख्य भवन में लगी आग को अग्निशमन विभाग ने काबू कर लिया है। विभाग की तहरीर के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।

घटना की जांच के लिए समिति गठित

अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि घटना के हर पहलू की गहनता से जांच करने के लिए सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति में एडीएम सिटी और सीएफओ को भी शामिल किया गया है। घटना की गहराई से जांच करने और आवश्यक कदम उठाने के लिए पुलिस को भी तहरीर दी गई है।


Friday, January 3, 2025

उच्च शिक्षा निदेशालय का आधा काम लखनऊ स्थानांतरित करने की तैयारी, अपर निदेशक बेसिक व माध्यमिक का कार्यालय भी राजधानी ले जाने की योजना

उच्च शिक्षा निदेशालय का आधा काम लखनऊ स्थानांतरित करने की तैयारीअपर निदेशक बेसिक व माध्यमिक का कार्यालय भी राजधानी ले जाने की योजना

शासन ने मांगा प्रस्ताव, शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ ने किया विरोध


प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशालय का आधा काम प्रदेश की राजधानी लखनऊ शिफ्ट किए जाने की तैयारी है। वहीं, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशालय का एक हिस्सा भी लखनऊ ले जाने की तैयारी हो चुकी है। शासन ने इस बाबत प्रस्ताव मांगे हैं लेकिन शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ इसके विरोध में उतर आया है। बृहस्पतिवार को हुई संघ की सामान्य सभा की बैठक में इसके विरुद्ध प्रस्ताव पारित किए गए।


उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन की ओर से 30 दिसंबर, 2024 को पत्र जारी कर उच्च शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज स्थित मुख्यालय का शिविर कार्यालय लखनऊ में बनाए जाने व शिविर कार्यालय से ही 50 फीसदी कार्य संचालित किए जाने से संबंधित प्रस्ताव मांगा गया है। प्रयागराज की गरिमा उच्च शिक्षा निदेशालय को विखंडित किए जाने का सामान्य सभा की ओर से विरोध किया गया।


वहीं, शिक्षा निदेशक (बेसिक) द्वारा प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा को एक प्रस्ताव प्रेषित किया गया है, जिसमें शिक्षा निदेशालय उत्तर प्रदेश (मुख्यालय) प्रयागराज से अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) एवं अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) का कैम्प कार्यालय लखनऊ की प्रस्तावित बिल्डिंग में स्थापित किए जाने का उल्लेख है।


शिक्षा निदेशक (बेसिक) के पत्र द्वारा प्रेषित प्रस्ताव का भी सामान्य सभा ने विरोध किया है। सामान्य सभा की बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा निदेशालय प्रयागराज में तैनात अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) सुरेंद्र कुमार तिवारी व अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) अजय कुमार द्विवेदी द्वारा मुख्यालय से लगातार अनुपस्थित रहने के शासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है।


उन्होंने संबंधित अधिकारियों के प्रयागराज मुख्यालय में नियमित रूप से बैठने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखने का निर्णय लिया है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि अपर निदेशकों के अलावा प्रयागराज में ही सुरेंद्र कुमार तिवारी को सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद एवं अजय कुमार द्विवेदी को अपर शिक्षा निदेशक (पत्राचार) के अतिरिक्त पद की भी जिम्मेदारी शासन द्वारा दिए जाने के बावजूद शिक्षा निदेशालय मुख्यालय प्रयागराज में माह में दो से तीन दिन ही बैठते हैं। इन अधिकारियों के मुख्यालय में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण शासकीय कार्य प्रभावित हो रहा है।


संघ के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया कि इस मसले पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बात की जाएगी। सांसदों, विधायकों व मंत्रियों के माध्यम से भी मुख्यमंत्री तक बात पहुंचाई जाएगी। संघ के अध्यक्ष घनश्याम यादव व मंत्री सुरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रयागराज की गरिमा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। अगर बात नहीं बनी तो व्यापक रूप से आंदोलन किया जाएगा।