राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की संबद्धता समाप्त, उच्च शिक्षा निदेशालय ने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के दिए निर्देश
शिक्षकों की संबद्धता में भेदभाव का उठा था मामला
राजधानी के कॉलेजों पर मेहरबानी सोनभद्र और लखीमपुर उपेक्षित
जहां शिक्षकों की पर्याप्त संख्या वहीं अटैच किए शिक्षक
लखनऊ। प्रदेश के विभिन्न राजकीय स्नातक व परास्नातक महाविद्यालयों में की गई शिक्षकों की संबद्धता समाप्त कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों को अपने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।
अमर उजाला ने 29 अप्रैल के अंक में राजधानी के कॉलेजों पर मेहरबानी, सोनभद्र और लखीमपुर उपेक्षित शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें यह बताया गया था कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पर्याप्त संख्या वाले विद्यालयों में शिक्षकों को संबद्ध किया जा रहा है। जबकि जिन कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या काफी कम है, वहां ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के विभिन्न राजकीय स्नातक व स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में एक महाविद्यालय से दूसरे महाविद्यालय में कतिपय शिक्षकों की संबद्धता की गई थी। इसके तहत इन सभी की संबद्धता आदेश को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। हालांकि इसमें प्रशासनिक आधार (प्रशासनिक काम को) पर की गई संबद्धता को छोड़ा गया है।
उन्होंने सभी प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर को अपने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने को कहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तबादला नीति जारी होने के बाद अब जिन कॉलेजों में जरूरत है, वहां पर नए सिरे से शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इसमें छात्र-शिक्षक अनुपात को ध्यान में रखा जाएगा। इससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
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