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Friday, April 15, 2022

UP Board Exam 2022 : दो चरणों में हो रही कक्षा 10-12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षाएं, यहां देखें शेड्यूल और गाइडलाइन

UP Board Exam 2022 : दो चरणों में हो रही कक्षा 10-12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षाएं, यहां देखें शेड्यूल और गाइडलाइन

UP Board Exam Practical 2022: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पहले ही यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं की लिखित परीक्षाएं आयोजित कर ली हैं। इस साल यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं की परीक्षा 24 मार्च से 12 अप्रैल तक और 12वीं की परीक्षा 24 मार्च से 13 अप्रैल तक आयोजित की गई थी। अब प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।

UP Board Practical Exam 2022:  उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपीएमएसपी (UPMSP) की ओर से 10वीं, 12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षाएं दो चरणों में आयोजित की जा रही हैं। पहले चरण की प्रायोगिक परीक्षाओं का आयोजन 20 अप्रैल से 27 अप्रैल तक किया जा रहा है। जबकि दूसरे चरण की परीक्षाएं यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं की व्यावहारिक परीक्षा 28 अप्रैल से 04 मई, 2022 तक आयोजित की जाएगी। 
उम्मीदवारों की ज्यादा संख्या और कोविड गाइडलाइन की वजह से यूपी बोर्ड की प्रैक्टिकल परीक्षाएं दो पालियों में आयोजित की जा रही हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पहले ही यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं की लिखित परीक्षाएं आयोजित कर ली हैं। इस साल यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं की परीक्षा 24 मार्च से 12 अप्रैल, 2022 तक और कक्षा 12वीं की परीक्षा 24 मार्च से 13 अप्रैल, 2022 तक आयोजित की गई थी।

यूपी बोर्ड 2022 कक्षा 10वीं की प्रैक्टिकल परीक्षा तिथियां
◆ पहला चरण 20 अप्रैल से 27 अप्रैल, 2022 
◆ दूसरा चरण 28 अप्रैल से 04 मई, 2022

किस जोन में किस चरण में कहां होंगी 10वीं की परीक्षाएं

◆ चरण 1- आगरा, सहारनपुर, बरेली, लखनऊ, झांसी, चित्रकूट, फैजाबाद, आजमगढ़, देवीपाटन, बस्ती
◆ चरण 2- अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, मिर्जापुर, वाराणसी, गोरखपुर
 
यूपी बोर्ड 2022 कक्षा 12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षा तिथियां
◆ पहला चरण : 20 से 27 अप्रैल, 2022
◆ दूसरा चरण : 28 अप्रैल से 04 मई, 2022
 
किस जोन में किस चरण में कहां होंगी 12वीं की परीक्षाएं
◆ चरण 1- आगरा, बरेली, बस्ती, चित्रकूट, देवीपाटन, फैजाबाद, झांसी, लखनऊ, मिर्जापुर और सहारनपुर
◆ चरण 2- अलीगढ़, आजमगढ़, गोरखपुर, कानपुर, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज और वाराणसी  

प्रैक्टिकल के दिन के लिए परीक्षा दिशा-निर्देश

1- छात्रों को अपना एडमिट कार्ड प्रायोगिक परीक्षा हॉल में ले जाना होगा।
2- उन्हें परीक्षा समय से कम से कम 30-45 मिनट पहले परीक्षा हॉल में पहुंचना होगा।
3- कोविड-19 दिशा-निर्देशों का पालन करें जैसे मास्क पहनना, इकट्ठा होने से बचना आदि।
4- परीक्षा हॉल में कोई भी निषिद्ध वस्तु जैसे मोबाइल फोन, गैजेट्स, गॉगल्स आदि न ले जाएं।
5- अपनी स्टेशनरी साथ ले जाएं, क्योंकि परीक्षा हॉल में छात्रों को दूसरों से मांगने की अनुमति नहीं है।
6- किसी भी असुविधा से बचने के लिए प्रवेश-पत्र में उल्लेखित सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें।

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पहले मूल्यांकन या प्रायोगिक परीक्षा के लिए शासन पर नजर, परीक्षा संपन्न कराने के बाद यूपी बोर्ड ने पूरी की दोनों की तैयारी 

यूपी बोर्ड परीक्षा के बाद अब मूल्यांकन की तैयारी, 23 अप्रैल से जांची जाएंगी कॉपियां, खबर पढ़ें सबसे नीचे


◆ परीक्षा संपन्न कराने के बाद यूपी बोर्ड ने पूरी की दोनों की तैयारी 
◆ परीक्षकों के विवरण विषयवार वेबसाइट पर किए गए अपडेट


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2022 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा संपन्न कराने के बाद प्रायोगिक परीक्षा और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की तैयारी पूरी कर ली है। पहले प्रायोगिक परीक्षा कराने या मूल्यांकन शुरू कराने के मामले में शासन के निर्णय के आधार पर प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

आमतौर पर यूपी बोर्ड की लिखित परीक्षा के पहले प्रायोगिक परीक्षा संपन्न कराई जाती है, लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव आचार संहिता के कारण प्रायोगिक परीक्षा पिछड़ गई। आचार संहिता खत्म होने के बाद शासन के निर्देश पर सभापति माध्यमिक शिक्षा परिषद विनय कुमार पाण्डेय ने बोर्ड की लिखित परीक्षा की तिथियों की घोषणा कर दी थी।

उन्होंने कहा था कि इस बार प्रायोगिक को लिखित परीक्षा के बाद कराया जाएगा। अब 13 अप्रैल को परीक्षाएं संपन्न हो गई।

ऐसे में परीक्षा संपन्न होने के पहले ही यूपी बोर्ड ने प्रायोगिक परीक्षा और मूल्यांकन कार्य कराने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी थीं, जो कि पूरी हो गई हैं। प्रायोगिक परीक्षा को संपन्न कराने में लगभग दस दिन का समय लग सकता है। इसी तरह यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन शुरू कराने को लेकर परीक्षकों का डाटा वेबसाइट पर पहले ही फीड करा दिया।

कुछ परीक्षकों के डाटा अपडेट नहीं होने के कारण यूपी बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ल के निर्देश पर परिषद की वेबसाइट को 13 और 14 अप्रैल के लिए खोला। प्रधानाचार्यों को निर्देश देकर इस अवधि में शिक्षकों विवरण का कराया गया। इसमें खासतौर पर शिक्षक की नियुक्ति किस विषय के लिए की गई है, पदनाम, शैक्षिक योग्यता, स्नातक व परास्नातक विषय को अपडेट किया गया, ताकि मूल्यांकन के कार्य में विषय की विशेषज्ञता को देखते हुए ड्यूटी लगाई जा सके। आगे की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी।

बोर्ड परीक्षा में कार्रवाई की जेडी से मांगी रिपोर्ट

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा संपन्न कराने के बाद परीक्षा के दौरान की गई। कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। सचिव ने प्रदेश के सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी) से शुक्रवार तक परिषद की ईमेल आइडी पर पूरा विवरण भेजने को कहा है। इसमें कुल दर्ज कराए मुकदमे, कक्ष निरीक्षकों पर की गई कार्रवाई, कुल पकड़े गए नकलची, कक्ष निरीक्षकों की संदिग्ध भूमिका आदि की जानकारी देनी है।

यूपी बोर्ड परीक्षा के बाद अब मूल्यांकन की तैयारी, 23 अप्रैल से जांची जाएंगी कॉपियां


गोरखपुर : गोरखपुर जिले में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा समाप्त होने के साथ-साथ मूल्यांकन की तैयारी शुरू हो गई है। बोर्ड ने 23 अप्रैल से कापियों के मूल्यांकन को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश जारी कर दिया है। जनपद में इस बार पांच मूल्यांकन केंद्रों पर हाईस्कूल व इंटर की कापियां जंचेंगी। इन केंद्रों में राजकीय जुबिली इंटर कालेज, एमएसआइ इंटर कालेज, मारवाड़ इंटर कालेज, एमपी इंटर कालेज तथा सेंट एंड्रयूज इंटर कालेज शामिल हैं।

सीसी कैमरे के निगरानी में होगा मूल्यांकन: परीक्षा की तरह ही मूल्यांकन कार्य भी सीसी कैमरे की निगरानी में होगा। मूल्यांकन कक्ष राज्य व जिला स्तरीय कंट्रोल रूम से जुड़ा रहेगा। अधिकारियों को निगरानी के लिए लगाया जा रहा है। कंट्रोल रूम में प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। बुधवार को परीक्षा समाप्त होने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच कापियां जिले के उप संकलन केंद्र से राजकीय जुबिली इंटर कालेज स्थित मुख्य संकलन केंद्र पर जमा कराई गईं। मुख्य संकलन केंद्र से उत्तर पुस्तिकाओं को यूपी बोर्ड की ओर से एलाट जिलों में भेजा जाएगा।

30 अप्रैल तक अपलोड करने होंगे आंतरिक मूल्यांकन के अंक: बोर्ड ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को हाईस्कूल के आंतरिक मूल्यांकन के अंक 30 अप्रैल तक बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। 10वीं के सभी विषयों के लिए आवंटित 100 नंबर में से 70 अंकों की बोर्ड परीक्षा होती है। शेष 30 अंकों के लिए 10-10 अंकों के तीन सत्रीय कार्य होते हैं, जिसे आंतरिक मूल्यांकन कहते हैं। इसके अलावा हाईस्कूल व इंटर के नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा की लिखित एवं प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक भी बाेर्ड की वेबसाइट पर स्कूलों को 30 अप्रैल तक अपलोड करने होंगे।

अधिकारी बोले: जिला विद्यालय निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया ने बताया कि सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विभागीय अधिकारियों के साथ आनलाइन बैठक कर 23 अप्रैल से कापियों के मूल्यांकन शुरू करने की जानकारी दी है। हालांकि अभी लिखित कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन उनके निर्देश के क्रम में मूल्यांकन की तैयारी शुरू कर दी गई है। मुख्यालय स्थित पांच मूल्यांकन केंद्र तय कर सूची बोर्ड को भेज दी गई है। कापियों का मूल्यांकन सीसी टीवी कैमरे की निगरानी में कराई जाएगी।

मदरसा शिक्षकों की भर्ती में अब में नहीं चलेगा भाई-भतीजावाद, सरकार टीईटी की तर्ज पर एमटीईटी करने जा रही है लागू

मदरसा शिक्षकों की भर्ती में अब में नहीं चलेगा भाई-भतीजावाद, सरकार टीईटी की तर्ज पर एमटीईटी करने जा रही है लागू

◆ एमटीईटी पास करने वाले ही बन सकेंगे मदरसों में शिक्षक
◆ मदरसों में गुणवत्ता शिक्षा के लिए सरकार का एक और कदम

लखनऊ : मदरसा शिक्षकों की भर्ती में अब भाई-भतीजावाद नहीं चलेगा। मदरसों में सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के तहत योगी सरकार ने अब मदरसा शिक्षकों की भर्ती की इस व्यवस्था पर लगाम लगाने जा रही है। सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) लागू करने का निर्णय लिया है। एमटीईटी पास करने वाले अभ्यर्थी ही मदरसों में शिक्षक बन सकेंगे। यह परीक्षा उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद कराएगा।


दरअसल, प्रदेश सरकार से अनुदानित मदरसों में शिक्षकों के पद भरने का अधिकार वहां की प्रबंध समिति के पास होता है। मदरसा प्रबंधक शिक्षकों की भर्ती में अपनी मनमानी करते हैं। ज्यादातर प्रबंधक मदरसों में अपने रिश्तेदारों को ही तैनात कर लेते हैं। ऐसे में कई बार मदरसों में योग्य शिक्षक नहीं आ पाते हैं।इसका असर मदरसों की शिक्षा पर पड़ता है। इसलिए सरकार मदरसा शिक्षकों की भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश अरबी फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 में जरूरी संशोधन किया जाएगा। मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने बताया कि मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एमटीईटी का नियम लागू किया जा रहा है। इसके लागू होने के बाद उत्तर पाते हैं। इसका असर मदरसों की प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद एमटीईटी कराएगा। इसमें जो भी अभ्यर्थी उत्तीर्ण होंगे वह मदरसा शिक्षक बनने के योग्य होंगे। यानी मदरसों में अब जितने भी शिक्षकों के पद रिक्त हैं या भविष्य में रिक्त होंगे उनमें एमटीईटी पास करने वाले अभ्यर्थी ही शिक्षक बन सकेंगे। इसका विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।

शिक्षकों के खाली हैं 482 पद

मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार एसएन पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश सरकार 558 मदरसों को अनुदान देती है। वर्तमान में प्रधानाचार्य के 49 व शिक्षकों के 482 पद रिक्त हैं। इन सभी पदों पर भर्ती एमटीईटी पास करने वाले अभ्यर्थियों की होगी। एमटीईटी लागू होने के बाद मदरसों में योग्य शिक्षक मिल सकेंगे।

UPTET : ओएमआर शीट भरने में मामूली चूक से रोका गया यूपीटीईटी का परिणाम, गोला भरने की गलती से छह हजार युवा हुए बाहर

UPTET : ओएमआर शीट भरने में मामूली चूक से रोका गया यूपीटीईटी का परिणाम, गोला भरने की गलती से छह हजार युवा हुए बाहर



प्रयागराज : आठ अप्रैल को घोषित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) 2021 के परिणाम ने हजारों युवाओं को निराश कर दिया। टीईटी के दौरान भाषा, रोल नंबर, बुकलेट सीरीज आदि का गोला सही नहीं भरने या एक से अधिक गोला भरने के कारण उनकी ओएमआर शीट का मूल्यांकन नहीं हुआ और पास होते हुए भी तकरीबन छह हजार प्रतियोगी छात्र बाहर हो गए। 


हालत यह है कि परिणाम घोषित होने के बाद से प्रतिदिन सैकड़ों छात्र सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय एलनगंज में पहुंचकर अपनी ओएमआर का मूल्यांकन करने की गुहार लगा रहे हैं। कई अभ्यर्थी तो अफसरों को अपना नंबर बताकर रो पड़ते हैं। लेकिन उन्हें टका सा जवाब मिलता है कि यदि गोला गलत भरा या नहीं भरा है तो किसी भी सूरत में ओएमआर का मूल्यांकन नहीं हो सकता।


महज एक चूक ने इन युवाओं का कॅरियर बिगाड़ दिया और शिक्षक बनने के उनके सपने फिलहाल टूटे हुए नजर आ रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में सरकार परिषदीय स्कूलों के लिए शिक्षक भर्ती निकालती है तो ये अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाएंगे। पूर्व की परीक्षाओं में ऐसी गलती करने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं की मगर कोई राहत नहीं मिली।

Thursday, April 14, 2022

महंगाई से कुपोषित हुई बच्चों को पोषित करने वाली योजना, वर्ष 2020 के बाद से नहीं बढ़ी कंवर्जन कास्ट

महंगाई से कुपोषित हुई बच्चों को पोषित करने वाली योजना


सरसों तेल, गैस सिलिंडर, दूध और फल-सब्जियों के दाम बढ़ने से गुणवत्ता में गिरावट के जरिए दिया जा रहा भोजन

4.97 रुपये (प्राथमिक), 7.45 रुपये (जूनियर) की मिल रही है कंवर्जन कास्ट

2020 के बाद से नहीं बढ़ी कंवर्जन कास्ट, 40 फीसदी तक बढ़ चुकी है भोजन की लागत
 
प्राथमिक स्कूल के प्रति छात्र 100 ग्राम और जूनियर हाईस्कूल के बच्चे को 150 ग्राम मिलता है चावल या गेहूं

100 एमएल प्राथमिक और 200 एमएल जूनियर के बच्चों को दूध देना होता है.



गुणवत्ता और पौष्टिकता की उम्मीद बेमानी :  दो साल से MDM कन्वर्जन कास्ट और 8 साल से फलों के लिए दिए जाने वाले धनराशि में नहीं हुई बढ़ोत्तरी


MDM : महंगाई चरम पर - दो साल से शासन ने नहीं बढ़ाई कनवर्जन कॉस्ट

बढ़ती महंगाई के दौर में दो साल से MDM की कन्वर्जन कॉस्ट न बढ़ने से गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करा पाना बनी बड़ी चुनौती
 


बढ़ती महंगाई के चलते हर सामान के दाम बढ़ गए हैं। खाद्य तेल, दाल, सब्जी, गैस सिलेंडर की रोफिलिंग आदि पर महंगाई का असर हुआ, लेकिन बेसिक स्कूलों में चलाए जा रहे मध्याहन भोजन योजना के कन्वर्जन कॉस्ट में दो सालों से वृद्धि नहीं हुई है। कन्वर्जन कॉस्ट अभी भी अप्रैल 2020 के रेट पर चल रही है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करा पाना चुनौती बन गया है।



 माध्यहन भोजन योजना का संचालन के तहत बच्चों को निशुल्क भोजन की व्यवस्था है। इन स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर 4.97 रुपये प्रति छात्र और उच्च प्राथमिक स्तर पर 7.45 रुपये प्रति छात्र की दर से कन्वर्जन कॉस्ट मिल रही है। वह कन्वर्जन फॉस्ट वर्ष 2020 में लागू हुई थी। तब से लगभग दो वर्ष का वक्त बीत चुका है, लेकिन कन्वर्जन कास्ट के रेट में एक पैसे की बढ़ोतरी नहीं हुई है। 


वर्तमान में खाद्य तेज, दाल, सब्जी, हरी सब्जी, फल व दूध आदि पर महंगाई की मार पड़ी है। गैस सिलेंडर रीफिलिंग के दाम लगोग दोगुने हो गए हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्ष 2020 में अरहर की दाल 80 रुपये के आसपास थी जो अब 130 रुपये से अधिक प्रति किलो हो गई है। सरसों का तेल दोगुने दाम पर मिल रहा है। 2020 में इसका रेट 100 रुपये के आसपास था जो अब लगभग 200 रुपये के आसपास है।


 कन्वर्जन कॉस्ट का रेट नहीं बढ़ने से प्रधानाध्यापकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारी व प्रशासन के अधिकारी विद्यालय में निरीक्षण के समय पहले एमडीएम की गुणवत्ता ही चेक करते हैं। गुणवत्ता खराब मिलने पर संबंधित प्रधानाध के खिलाफ कार्रवाई होती है। शिक्षकों ने कन्वर्जन कॉस्ट के दामों में बढ़ोतरी की मांग की है। पहले हर वर्ष कन्वर्जन कॉस्ट बढ़ती रही है, लेकिन इस बार दो वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

KVS : केन्द्रीय विद्यालयों में प्रवेश से संबंधित 17 श्रेणियों के विवेकाधीन कोटे पर लगी अस्थाई रोक

KVS : केन्द्रीय विद्यालयों में प्रवेश से संबंधित 17 श्रेणियों के विवेकाधीन कोटे पर लगी अस्थाई रोक



KVS admission: केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने इसके तहत आने वाले स्कूलों में प्रवेश के संबंध में सांसदों सहित सभी 17 श्रेणियों के विवेकाधीन कोटे पर अस्थायी रोक लगा दी है। 


संगठन के एक अधिकारी ने बताया कि अगले सप्ताह कोटे से जुड़े विषय की समीक्षा होने वाली है, ऐसे में कुछ समय के लिये इस बारे में अस्थायी रोक लगाने को कहा गया है। 

उन्होंने कहा कि  यह अस्थायी निर्देश है और केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश से संबंधित सभी 17 श्रेणियों के विवेकाधीन कोटे के संबंध में है । विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है, ऐसे में अगले आदेश तक इस पर (कोटे) रोक लगाने को कहा गया है। '' 


उन्होंने बताया कि समीक्षा के बाद ही कोई आदेश जारी किया जायेगा ।  समझा जाता है कि समीक्षा के बाद इस विषय को केंद्रीय विद्यालय संगठन से जुड़े संचालक बोर्ड के समक्ष रखा जायेगा । इसमें किस कोटे को जारी रखना और किस को खत्म करना है, इस पर अंतिम निर्णय हो सकता है। 


सूत्रों के अनुसार जिन विषयों की समीक्षा की जानी है, उनमें जिलाधिकारी, केंद्रीय विद्यालय कर्मियों, पहले बच्चे के बालिका होने, सांसदों आदि का विवेकाधीन कोटा शामिल है। इससे पहले शिक्षा मंत्री ने भी पिछले साल केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के अपने कोटे पर खत्म कर दिया था।


प्रत्येक सांसद को उसके निर्वाचन क्षेत्र में स्थित केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश के लिए 10 सीटों का कोटा मिलता है जिसमें उसकी सिफारिश पर क्षेत्र के किसी विद्यार्थी का इन विद्यालय में दाखिल हो सकता है। 


गौरतलब है कि हाल में संपन्न संसद के बजट सत्र में 21 मार्च को कई सांसदों ने केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के संबंध में प्रत्येक सांसद को दिये गए 10 सीटों के कोटे का विषय लोकसभा में उठाया था । कांग्रेस के मनीष तिवारी सहित कुछ सांसदों ने मांग की थी कि कोटे की संख्या को बढ़ाया जाए अन्यथा इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए।


इस पर लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा था कि इस विषय पर सभी दलों के नेताओं से मंत्री बात करेंगे और फिर कोई अंतिम निर्णय किया जायेगा ।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुशील कुमार मोदी ने केंद्रीय विद्यालय में दाखिले के संबंध में सांसदों को मिले विवेकाधीन कोटे को समाप्त करने की मांग राज्यसभा में उठाई थी। 




केंद्रीय विद्यालयों के दाखिले में अब नहीं चलेगा कोई कोटा, सांसदों की सिफारिश पर भी लगी रोक


केंद्रीय विद्यालय संगठन के मुताबिक सांसदों के केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले से जुड़े कोटे को खत्म करने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इसे सिर्फ रोका गया है। इसके साथ ही दूसरी श्रेणियों के भी विशेष कोटे की भी समीक्षा की जा रही है।


नई दिल्ली : केंद्रीय विद्यालयों के दाखिले में अब कोई कोटा नहीं चलेगा। केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने फिलहाल सांसदों सहित केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले से जुड़ी सभी 17 श्रेणियों के विशेष कोटे पर रोक लगा दी है। यह रोक अभी अस्थायी रूप से लगाई गई है, लेकिन माना जा रहा है कि अब इसका बहाल होना मुश्किल है। इससे पहले शिक्षा मंत्री ने भी पिछले साल केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के अपने कोटे पर खत्म कर दिया था। इससे पहले तक शिक्षा मंत्री अपने कोटे से हजारों छात्रों को केंद्रीय विद्यालयों में दाखिला दिलवाते थे। यह दाखिला केंद्रीय विद्यालयों में निर्धारित सीटों के अतिरिक्त होता था।


केंद्रीय विद्यालय संगठन के मुताबिक सांसदों के केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले से जुड़े कोटे को खत्म करने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इसे सिर्फ रोका गया है। इसके साथ ही दूसरी श्रेणियों के भी विशेष कोटे की भी समीक्षा की जा रही है। इनमें कलेक्टर, केंद्रीय विद्यालय कर्मियों और पहले बच्चे के बालिका होने आदि से जुड़ा कोटा शामिल है।


केंद्रीय विद्यालयों में इस बार दाखिले की प्रक्रिया में है कुछ देरी

संगठन के मुताबिक समीक्षा के बाद इन्हें केंद्रीय विद्यालय संगठन से जुड़े बोर्ड आफ गर्वनेंस (BOG) की बैठक में रखा जाएगा। जिसके अध्यक्ष शिक्षा मंत्री होते हैं। इसमें किस कोटे को जारी रखना और किस को खत्म करना इस पर अंतिम निर्णय होगा। वैसे देखा जाए तो केंद्रीय विद्यालयों में इस बार दाखिले का प्रक्रिया में कुछ देरी है। इसकी एक वजह कोरोना संक्रमण है, जबकि दूसरा कारण केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले की उम्र सीमा को पहली कक्षा में छह वर्ष किए जाने के फैसले को लेकर पैदा हुआ विवाद था। जिसे कोर्ट में भी चुनौती दी गई, लेकिन कोर्ट ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुरूप करार देते हुए इसमें दखल देने से अब इन्कार कर दिया है।


अभी तक एक सांसद दस बच्चों का करा सकते थे दाखिला

मौजूदा समय में प्रत्येक सांसद किन्हीं भी दस बच्चों का किसी भी कक्षा में अपने विशेष कोटे से दाखिला दिला सकते थे। इनमें लोकसभा सदस्य को अपने लोकसभा क्षेत्र के बच्चों को जबकि राज्यसभा सदस्य जिस प्रदेश से चुनकर आते हैं उस प्रदेश के किन्हीं भी दस बच्चों को प्रदेश के किसी भी जिले के केंद्रीय विद्यालय में दाखिला दिला सकते हैं।


गौरतलब है कि केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के विशेष कोटे को खत्म करने की मांग संसद में भी उठी थी। कई सांसदों का कहना था कि कभी कभी यह उनके हारने का भी कारण बन जाता है। क्योंकि अभी उनके पास दस सीटों का ही कोटा है, लेकिन उनके पास दाखिले के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। जिनका काम नहीं हो पाता वे लोग नाराज हो जाते हैं।

यूपी बोर्ड : परीक्षा ड्यूटी में अनुपस्थित और लापरवाही करने वालों पर शासन सख्त

यूपी बोर्ड : परीक्षा ड्यूटी में अनुपस्थित और लापरवाही करने वालों पर शासन सख्त, बोर्ड सचिव ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर मांगी जानकारी

सचिव यूपी बोर्ड दिव्यकांत शुक्ल ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसमें परीक्षा के दौरान कितनी एफआईआर दर्ज हुई एवं इसमें सम्मिलित व्यक्तियों की सूचना मांगी है।


यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 खत्म हो चुकी है। अब शासन ने परीक्षा के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित और लापरवाही बरतने वालों पर शिकंजा कसेगा। शासन ने सचिव माध्यिमक शिक्षा परिषद से अब तक दर्ज एफआईआर समेत अन्य रिपोर्ट तलब की है। इस पर सचिव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर इस संबंध में जानकारी मांगा है। 

सचिव यूपी बोर्ड दिव्यकांत शुक्ल ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसमें परीक्षा के दौरान कितनी एफआईआर दर्ज हुई एवं इसमें सम्मिलित व्यक्तियों की सूचना मांगी है। साथ परीक्षा ड्यूटी में लगाए कक्ष निरीक्षकों एवं अन्य के बारे में सूचना मांगी है, जो अनुपस्थित रहे। साथ ही इनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

इस बाबत रिपोर्ट देना है। इसके अलावा अनुपस्थित/ दोषी अधिकारी जिनके द्वारा शासकीय कार्म में लापरवाही की गई। इसकी सूचना एवं उनके विरुद्ध प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में निश्चित प्रोफार्मा पर 15 अप्रैल तक जानकारी देना है। सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को सभी जिलों से 15 अप्रैल तक रिपोर्ट लेकर निश्चित प्रोफार्मा पर परिषद के ईमेल करना है।

एडेड जूनियर भर्ती के विवादों का होगा निपटारा, खुलेगी भर्ती की राह

एडेड जूनियर भर्ती के विवादों का होगा निपटारा, खुलेगी भर्ती की राह


प्रयागराज : प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती परीक्षा 2021 के परिणामों को लेकर हुए विवादों का जल्द निपटारा होगा। तकरीबन 600 से 700 अभ्यर्थियों ने प्रत्यावेदन देकर परीक्षा में कम अंक मिलने के आरोप लगाए हैं। 40 से 50 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की हैं। टीईटी पेपर लीक के बाद गिरफ्तार परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के पूर्व सचिव संजय उपाध्याय के पास कोठार की चाबी थी। लेकिन कोठार नहीं खुलने के कारण प्रत्यावेदनों का निस्तारण नहीं हो पा रहा था।


हाईकोर्ट से भी बार-बार समय लेना पड़ रहा था। अब कोठार से मूल ओएमआर शीट निकालने के लिए शासन ने चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी की ओर से 12 अप्रैल को जारी आदेश में डीएम प्रयागराज से नामित उपजिलाधिकारी स्तर का अधिकारी, एसएसपी से नामित उपाधीक्षक स्तर का अधिकारी, शिक्षा निदेशक से नामित उप निदेशक स्तर का अधिकारी और रजिस्ट्रार विभागीय परीक्षा को सदस्य बनाया गया है।


 कोठार से मूल ओएमआर निकालते समय वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी आंतरिक समिति गठित करते हुए प्रत्यावेदनों का परीक्षण कराएंगे और यदि कोई विसंगति मिलती है तो उसकी रिपोर्ट शासन को भेजेगी।


विवाद हल होने के बाद खुलेगी भर्ती की राह: एडेड जूनियर भर्ती की मूल ओएमआर मिलने के बाद परिणाम को लेकर जो प्रत्यावेदन मिले हैं या फिर हाईकोर्ट में याचिकाएं हुई हैं, उनका निस्तारण हो सकेगा। उसके बाद भर्ती की राह खुलेगी।

Wednesday, April 13, 2022

यूपी बोर्ड पेपर लीक केस में DIOS बृजेश मिश्र की बढ़ेगी मुश्किलें, संपत्ति की जांच का आदेश, पूर्व में थे BSA

यूपी बोर्ड पेपर लीक केस में  DIOS बृजेश मिश्र की बढ़ेगी मुश्किलें,  संपत्ति की जांच का आदेश, पूर्व में थे BSA



यूपी बोर्ड 12वीं अंग्रेजी का पेपर लीक होने के मामले में निलंबित बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) बृजेश कुमार मिश्र की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निलंबित डीआइओएस के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति की जांच कराये जाने का आदेश दिया है। जल्द संबंधित जांच एजेंसी इसकी पड़ताल शुरू करेगी।


यूपी बोर्ड 12वीं अंग्रेजी का पेपर लीक होने के बाद शासन ने परीक्षा रद कर दी थी और पूरे मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी थी। एसटीएफ ने डीआइओएस बृजेश कुमार मिश्र व एक स्थानीय पत्रकार समेत अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की थी। इसी दौरान निलंबित डीआइओएस बृजेश कुमार मिश्र के अकूत संपत्ति के मालिक होने का तथ्य सामने आया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी बृजेश मिश्र की संपत्तियों का ब्योरा जुटा रहा है।

यूपी बोर्ड 12वीं के अंग्रेजी के पेपर लीक मामले में फंसे बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक बृजेश मिश्रा प्रयागराज और लखनऊ समेत कई जिलों में अकूत संपत्ति के मालिक हैं। प्रयागराज जिले में सिविल लाइंस के हनुमान मंदिर के पास करोड़ों की कोठी है और झूंसी में कई एकड़ में उनका फार्म हाउस है। बिहार में भी उनके पास आलीशान माल होने की बात कही जा रही।

बृजेश मिश्र प्रयागराज में तैनाती के दौरान भी सुर्खियों में रहे हैं। सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर के पास एक बंगला उनका ही बताया जाता है। जानकारों का दावा है कि वह जब वर्ष 2007 से 2009 तक बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) थे उसी दौरान इसे खरीदा गया था। जिलाधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल में आशीष कुमार गोयल ने इस बंगले में छापा भी मारा था। हालांकि, कैश नहीं मिला था।

मूलत: बिहार निवासी बृजेश मिश्र की तैनाती प्रयागराज के अलावा प्रतापगढ़, हरदोई, जौनपुर में भी रही है। उनकी पत्नी अन्विता की तैनाती अल्पसंख्यक विद्यालय (नूरजहां उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) में 21 अप्रैल 2011 को सहायक अध्यापक के रूप में हुई। बीएसए कार्यालय से 15 अप्रैल 2011 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। आरोप लगा था कि मनमाने तरीके से बृजेश ने पत्नी की नियुक्ति कराई है। उस समय भी बृजेश यहां बीएसए ही थे।

हरदोई में बीएसए रहते हुए बृजेश के पास डीआइओएस का भी चार्ज था। यहां मनमाने ढंग से बोर्ड परीक्षा के केंद्र बनाने और शिक्षक भर्ती को लेकर उन पर उंगली उठी थी। बलिया में डीआइओएस के रूप में तैनाती से पहले प्रयागराज में सहायक शिक्षा निदेशक पत्राचार के पद पर उनकी तैनाती थी।

Tuesday, April 12, 2022

UP Board 10th 12th Result 2022 date : परीक्षाएं खत्म, जानें कब तक जारी होगा यूपी बोर्ड रिजल्ट

UP Board 10th 12th Result 2022 date : परीक्षाएं खत्म, जानें कब तक जारी होगा यूपी बोर्ड रिजल्ट

UP Board 10th 12th Result 2022 : 4.25 लाख छात्रों ने छोड़ी यूपी बोर्ड परीक्षा, upmsp.edu.in पर जारी होगा रिजल्ट खबर पढ़ें सबसे नीचे

UP Board Result 2022 : परिणाम घोषित होने पर विद्यार्थी अपना रिजल्ट upmsp.edu.in पर चेक कर सकेंगे। इस वर्ष करीब 52 लाख विद्यार्थियों ने यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था।


UPMSP UP Board 10th 12th Result 2022 date : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की 10वीं 12वीं की परीक्षाएं खत्म हो गई हैं। अब यूपी बोर्ड के करीब 52 लाख विद्यार्थियों को अपने रिजल्ट का इंतजार है। यूपी बोर्ड भी मूल्यांकन कार्य में जुट गया है। परिणाम घोषित होने पर विद्यार्थी अपना रिजल्ट upmsp.edu.in या upresults.nic.in पर चेक कर सकेंगे। इस वर्ष करीब 52 लाख विद्यार्थियों ने यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। इमें 27,81,654 परीक्षार्थी 10वीं के और 24,1,035 छात्र-छात्राएं 12वीं के थे। 

वहीं, यूपी बोर्ड इंटर के अंग्रेजी विषय की निरस्त परीक्षा कल 13 अप्रैल को फिर से होगी। 30 मार्च को पेपर लीक होने के चलते अंग्रेजी विषय की परीक्षा 24 जिलों में निरस्त कर दी गई थी। 

कब तक जारी होगा रिजल्ट
यूपी बोर्ड ने पिछले वर्ष (2021) कोरोना के चलते 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं। रिजल्ट 31 जुलाई 2021 को जारी किया गया था। इस बार परिणाम मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह तक जारी हो सकता है।

पिछले वर्ष बच्चों का रिजल्ट इंटरनल असेसमेंट के आधार पर निकाला गया था। यूपी बोर्ड के इतिहास में पहली बार बिना परीक्षा विद्यार्थियों का रिजल्ट जारी किया गया था। 10वीं में 99.52 फीसदी और 12वीं में 97.88 फीसदी स्टूडेंट्स पास हुए थे। इंटरनल असेसमेंट के आधार पर रिजल्ट घोषित होने के चलते मेरिट लिस्ट और टॉपरों की लिस्ट जारी नहीं की गई थी। हाईस्कूल में 99.52 प्रतिशत लड़के और 99.55 प्रतिशत लड़कियां सफल हुए थे। 10वीं में लड़कियों का पास फीसदी लड़कों की तुलना में .03 फीसदी ज्यादा था। जबकि 12वीं में 97.88 फीसदी बच्चे पास हुए थे। 12वीं आर्ट्स स्ट्रीम में 97.92 फीसदी पास, साइंस में 97.88 फीसदी और कॉमर्स में 97.22 फीसदी पास हुए। 12वीं कृषि भाग-1 का रिजल्ट 95.89 प्रतिशत, कृषि भाग-2 का रिजल्ट 98.11 प्रतिशत और व्यावसायिक स्ट्रीम का रिजल्ट 98.47 प्रतिशत रहा था। इंटर में 97.47 फीसदी लड़के और 98.40 फीसदी लड़कियां सफल रहे। यानी लड़कियां 0.93 फीसदी ज्यादा पास हुईं। इंटरनल असेसमेंट से जारी रिजल्ट से असंतुष्ट 10वीं 12वीं के विद्यार्थियों को अपने अंक सुधारने का मौका दिया गया था। इनके लिए अंक सुधार परीक्षा आयोजित की गई थी।

UP Board 10th 12th Result 2022 : 4.25 लाख छात्रों ने छोड़ी यूपी बोर्ड परीक्षा, upmsp.edu.in पर जारी होगा रिजल्ट

UPMSP UP Board 10th 12th Result 2022 : यूपी बोर्ड भी मूल्यांकन कार्य में जुट गया है। परिणाम घोषित होने पर विद्यार्थी अपना रिजल्ट upmsp.edu.in पर चेक कर सकेंगे। इस वर्ष 52 लाख विद्यार्थी पंजीकृत थे।

UP Board 10th 12th Result 2021 : यूपी बोर्ड परीक्षा में करीब सवा चार लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ी है। इस संबंध में सचिव परिषद दिब्यकांत शुक्ल ने कहा कि परीक्षा छोड़ने का कारण पता लगाया जायेगा। वहीं सभी परीक्षा केन्द्रों को सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के बैकअप को भी सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ अमरकांत सिंह ने बताया कि रिकार्डिंग परिणाम जारी होने तक रखनी होगी। मंगलवार को यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा समाप्त हो गई। आखिरी दिन प्रथम पाली में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी और संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) की टीम ने राजधानी लखनऊ के केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। मंत्री ने बताया कि परीक्षा सुव्यवस्थित एवं निर्धारित मापदंडों के अनुरूप चलती पायी गई।

यूपी बोर्ड भी मूल्यांकन कार्य में जुट गया है। परिणाम घोषित होने पर विद्यार्थी अपना रिजल्ट upmsp.edu.in या upresults.nic.in पर चेक कर सकेंगे। इस वर्ष करीब 52 लाख विद्यार्थियों ने यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। इमें 27,81,654 परीक्षार्थी 10वीं के और 24,1,035 छात्र-छात्राएं 12वीं के थे। 

पिछले वर्ष बच्चों का रिजल्ट इंटरनल असेसमेंट के आधार पर निकाला गया था। यूपी बोर्ड के इतिहास में पहली बार बिना परीक्षा विद्यार्थियों का रिजल्ट जारी किया गया था। 10वीं में 99.52 फीसदी विद्यार्थी पास हुए थे।

UGC ने एक साथ दो डिग्री कोर्स को लेकर जारी की गाइडलाइंस, देखें

खुशखबरी : UGC का उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव, अब एक साथ कर सकेंगे दो फुलटाइम डिग्री प्रोग्राम

UGC ने एक साथ दो डिग्री कोर्स को लेकर जारी की गाइडलाइंस, देखें



अब स्टूडेंट्स फिजिकल मोड में दो डिग्री प्रोग्राम एक साथ कर सकेंगे। ये दोनों प्रोग्राम वो .या तो एक ही यूनिवर्सिटी से करें या फिर दो अलग-अलग यूनिवर्सिटीज से भी कर सकते हैं।  


उन्होंने यह भी कहा कि स्टूडेंट्स नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( यूजीसी ) देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसी के तहत आज विश्वविद्यालय अनुदान आयोग  के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि छात्र एक ही विश्वविद्यालय से या अलग-अलग संस्थानों से एक साथ दो डिग्री कार्यक्रमों में पढ़ाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यूजीसी अब छात्रों को दो फुलटाइम डिग्री प्रोग्राम एक साथ प्रत्यक्ष तरीके से करने की अनुमति देगा। इस विषय में विस्तृत गाइडलाइन आयोग जल्द ही जारी करेगा। 

कुमार ने कहा कि जैसा कि नई शिक्षा नीति में बताया गया है और स्टूडेंट्स को मल्टीपल स्किल्स सिखाने के लिए यूजीसी नई गाइडलाइंस के साथ आ रहा है। जिसके तहत अब स्टूडेंट्स फिजिकल मोड में दो डिग्री प्रोग्राम एक साथ कर सकेंगे। ये दोनों प्रोग्राम वो .या तो एक ही यूनिवर्सिटी से करें या फिर दो अलग-अलग यूनिवर्सिटीज से भी कर सकते हैं। 

उन्होंने यह भी कहा कि स्टूडेंट्स को अब दो डिग्री प्रोग्राम पिजिकल और ऑनलाइनमोड दोनों में करने की भी अनुमति दी जाएगी।

CBSE Term 2 Exams 2022 : सीबीएसई टर्म 2 परीक्षाओं के लिए दिशा-निर्देश जारी, अगले सप्ताह जारी होंगे रोल नंबर

CBSE Term 2 Exams 2022 : सीबीएसई टर्म 2 परीक्षाओं के लिए दिशा-निर्देश जारी, अगले सप्ताह जारी होंगे रोल नंबर

CBSE Term 2 Exams 2022 छात्रों को प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका सुबह 1000 बजे वितरित की जाएगी ताकि वे उत्तर पुस्तिकाओं को ध्यान से भर सकें और प्रश्न पत्र भी देख सकें। छात्र को 20 मिनट का पढ़ने का समय प्रदान किया जाएगा।


नई दिल्ली : CBSE Term 2 Exams 2022 : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education, CBSE) की ओर से आयोजित होने वाली टर्म 2 की परीक्षाएं 26 अप्रैल से शुरू होने वाली हैं। इस एग्जाम में 10वीं और 12वीं के कुल 34 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होने वाले हैं। वहीं बोर्ड ने परीक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। वहीं इस परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राएं ध्यान दें कि स्टूडेंट्स ध्यान दें कि आधिकारिक वेबसाइट https://www.cbse.gov.in पर चेक कर सकते हैं। वहीं परीक्षा के लिए रोल नंबर अगले सप्ताह रिलीज हो सकते हैं।  

CBSE Term 2 Exams 2022 : सीबीएसई टर्म-2 एग्जाम के लिए यह है जरूरी गाइडलाइन

सीबीएसई ने टर्म- 2 की परीक्षा में इस बार एक कक्षा में 18 छात्रों को एग्जाम में बैठने की अनुमति दी है। हालांकि इसके पहले टर्म-1 परीक्षा में 12 स्टूडेंट्स को बैठने के निर्देश थे।

सीबीएसई परीक्षा में सोशल डिस्टेंसिंग का खास ध्यान रखना होगा। इसके अलावा स्टूडेंट्स को मास्क अनिवार्य तौर पर पहनना होगा।

सीबीएसई कक्षा 10वीं, 12वीं टर्म 2 परीक्षा 2022 दो घंटे की परीक्षा होगी। इसके अनुसार, एग्जाम 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आयोजित की जाएगी।

छात्रों को निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर सुबह 9:30 बजे तक रिपोर्ट करना होगा। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश सुबह 10:00 बजे बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी परिस्थिति में किसी भी छात्र को अंदर नहीं जाने दिया जाएगा।

छात्रों को प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका सुबह 10:00 बजे वितरित की जाएगी, ताकि वे उत्तर पुस्तिकाओं को ध्यान से भर सकें और प्रश्न पत्र भी देख सकें। छात्र को 20 मिनट का पढ़ने का समय प्रदान किया जाएगा।

सीबीएसई बोर्ड स्टूडेंट्स और पैरेंट्स ध्यान दें कि एडमिट कार्ड में छपे दिशा-निर्देशों का ध्यान से पढ़ें और उसके अनुरुप ही सेंटर पर पहुंचे। हालांकि अभी हॉल टिकट जारी नहीं किए गए हैं। लेकिन संभावना जताई जा रही है कि जल्द जारी कर दिए जाएंगे। वहीं अगर मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो CBSE TERM board 2 admit card 2022 अगले सप्ताह तक रिलीज किए जा सकते हैं। हॉल टिकट आधिकारिक वेबसाइट पर https://www.cbse.gov.in/ पर अपलोड किए जाएंगे।

UPTET : ओएमआर शीट ठीक न भरने पर कई के रिजल्ट 'अमान्य'

UPTET : ओएमआर शीट ठीक न भरने पर कई के रिजल्ट 'अमान्य'

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) परिणाम अमान्य देख कई अभ्यर्थी सोमवार को उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) कार्यालय पहुंचे। आशीष शुक्ला, आशुतोष तिवारी समेत अन्य अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनके परिणाम में त्रुटि है। मांग की है कि त्रुटियों पर विचार कर न्याय संगत कार्यवाही की जाए।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि ओएमआर शीट पर अभ्यर्थियों द्वारा भरे गए विवरण के आधार पर मूल्यांकन किया गया है। जिन्होंने अनुक्रमांक या सीरीज क्रमांक गलत भरे हैं, उनका परिणाम अमान्य आया है। जिन अभ्यर्थियों ने सभी सूचनाएं सही भरी हैं, उनके परिणाम में कोई त्रुटि नहीं है।

फतेहपुर : अभिभावकों की जेब में डाका डाल रहे आमान्य स्कूल

फतेहपुर : अभिभावकों की जेब में डाका डाल रहे आमान्य स्कूल

फतेहपुर :  नए शिक्षासत्र की शुरुआत से पहले ही कस्बे की गली-गली बिना मान्यता के स्कूल खुलने लगे हैं। चौराहों पर बड़ी-बड़ी होर्डिंग टांग दी गई हैं, तो कई स्कूल ई-रिक्शा से प्रचार कर दाखिले के लिए अभिभावकों को ऑफर दे रहे हैं। खासकर ग्रामीणांचलों में स्कूल संचालकों में प्रचार-प्रसार करने की होड़ लगी हुई है।


अप्रैल से नए शिक्षासत्र की शुरुआत होने के पहले ही अवैध स्कूलों की बाढ़ सी आ गई है। कस्बा हो या गांव हर जगह चौराहों पर अवैध स्कूलों के बड़े-बड़े होर्डिंग टंगे नजर आ रहे हैं। इन अवैध स्कूलों में धड़ल्ले से अभिभावकों को गुमराह करके फर्जी पंजीकरण नंबर भी दिखा रहे हैं। स्कूल संचालकों ने इस प्रकार जाल फैला रखा है कि अधिकारी और अभिभावक कोई भी उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है।

शिक्षा को बना दिया गया व्यवसाय: अधिकांश स्कूलों में बच्चों की ड्रेस और कापी-किताब का भी ठेका ले लिया है, जबकि कुछ स्कूल कमीशन सेट होने वाली दुकानों पर भेजने का कार्य करते हैं और अभिभावक उसी दुकान से किताब और कॉपी लेने को मजबूर हो जाते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि अब ग्रामीण इलाकों में हिंदी मीडियम स्कूल नहीं खुल रहे हैं।


प्ले स्कूल के लिए यह हैं नियम

● स्कूल पूरी तरह से स्वच्छ होने चाहिए।

● स्कूलों में बच्चों के खेलने के लिए प्ले ग्राउंड होना चाहिए।

● स्कूल में सीसीटीवी कैमरे जरूर लगे होने चाहिए।

● छात्र और छात्राओं के लिए अलग से शौचालयों की व्यवस्था होनी चाहिए।

● 20 बच्चों पर एक अध्यापक व एक केयर टेकर की व्यवस्था होनी चाहिए।

● सेफ्टी के लिए भी गाइड लाइन

● फायर सेफ्टी की व्यवस्था होनी चाहिए।

● प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए।

● स्कूलों में बच्चों को छोड़ने व ले जाने का पूरा रिकॉर्ड व बच्चों का पूरा रिकॉर्ड दुरुस्त होना चाहिए।


किसी भी हालत में आमान्य विद्यालय संचालित नहीं हो सकते हैं। सभी को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। सभी खंड शिक्षाधिकारियों से जांच कराई जाएगी। पकड़ में आने वालों के खिलाफ कार्रवाई तय है। 
-संजय कुमार कुशवाहा, बीएसए


जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण में बेसिक शिक्षा विभाग फेल, 19 मिले अनुपस्थित, वेतन रोका

जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण में बेसिक शिक्षा विभाग फेल,  19 मिले अनुपस्थित, वेतन रोका


सोमवार को जिलाधिकारी बीएसए कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान गैरहाजिर मिले 19 कर्मचारियों का अगले आदेश तक वेतन रोकने का आदेश दिया।


डीएम विजय किरन आनंद ने सोमवार को बीएसए कार्यालय का 10:15 बजे औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बेसिक, समग्र शिक्षा अनुभाग के 19 अधिकारी, कर्मचारी और लिपिक अनुपस्थित मिले। डीएम ने सभी अनुपस्थित मिले कर्मियों का अगले आदेश तक वेतन रोक दिया है। साथ ही सभी को तीन दिन के अंदर अनुपस्थिति के संबंध में साक्ष्य के साथ स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने को कहा।


औचक निरीक्षण को पहुंचे डीएम ने सबसे पहले बीएसए के कक्ष में पहुंचे। बीएसए के बारे में पूछताछ की। उपस्थित कर्मियों ने बताया कि वह कोर्ट गये हुए हैं। इस दौरान उनके निरीक्षण में जो भी कर्मचारी अनुपस्थित मिलते गये। उनके नाम के आगे अनुपस्थित लिखते हुए अगले आदेश तक वेतन रोकने की कार्रवाई की।


इन अनुपस्थित कर्मियों का रोका गया वेतन

जिला समन्वयक समग्र शिक्षा विवेक जायसवाल, लेखाकार आलोक कुमार जायसवाल, एसएसएस लिपिक संजय कुमार कार्यालय सहायक अनुज श्रीवास्तव, अनुचर अजय तिवारी,  सहायक लेखाधिकारी वित्त भारतेन्दु अनमोल, अभिषेक कुमार, अनिल कुमार कुशवाहा, दुर्गा प्रसाद दूबे, प्रधान सहायक बेसिक शिक्षा महेन्द्र प्रसाद, उर्दू अनुवाद बेसिक शिक्षा कट्टूसिया खातून, परिचारक बेसिक शिक्षा चंद्र  भूषण, परिचारक महताब, परिचारक सुशील त्रिपाठी, कनिष्ठ सहायक बेसिक शिक्षा अश्वनी पाण्डेय,  कम्प्यूटर ऑपरेटर बेसिक शिक्षा अनीष श्रीवास्तव, जिला समन्वयक एमडीएम दीपक पटेल, कंप्यूटर ऑपरेटर एमडीएम अनिल श्रीवास्तव

KVS Admission 2022: 6 साल ही रहेगी केंद्रीय विद्यालय में दाखिले की न्यूनतम उम्र सीमा, याचिका खारिज

KVS Admission 2022: 6 साल ही रहेगी केंद्रीय विद्यालय में दाखिले की न्यूनतम उम्र सीमा, याचिका खारिज


KVS Admission 2022 : केंद्रीय विद्यालय में दाखिले की न्यूनतम उम्र सीमा ( KVS Age Limit ) 6 साल ही रहेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूनतम उम्र बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया।



KVS Admission 2022: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय विद्यालयों में पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र ( KVS Age Limit ) छह साल करने के केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के फैसले को सही ठहराया है। न्यायालय ने दाखिले के लिए उम्रसीमा बढ़ाए जाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया। याचिका में केवीएस द्वारा दाखिले की न्यूनतम उम्र ( kendriya vidyalaya age limit ) 5 से बढ़ाकर छह साल किए जाने के केवीएस के फैसले को अचानक लिया गया फैसला बताते हुए इसे अनुचित और मनमाना बताया गया था। जस्टिस रेखा पल्ली ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया। 


इससे पहले, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय में दाखिला लेने के लिए याचिकाकर्ताओं में कोई निहित अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता अगले साल दाखिले के लिए पात्र हो जाएंगे। 
KVS Admissions 2022: केंद्रीय विद्यालय पहली कक्षा में एडमिशन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी


एनईपी के मुताबिक है उम्र सीमा बढ़ाने का फैसला: केवीएस व केंद्र सरकार
इससे पहले, केवीएस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया था कि दाखिले की न्यूनतम उम्र सीमा ( kendriya vidyalaya admission 2022-23 for class 1 age limit )  बढ़ाने का फैसला अचानक नहीं था क्योंकि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के मद्देनजर लिया गया है। केवीएस और सरकार ने न्यायालय से इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करने का आग्रह किया था। साथ ही कहा था कि इसमें अदालत के किसी भी तरह के हस्तक्षेप का अखिल भारतीय स्तर पर प्रभाव होगा और पांच से सात साल की उम्र के बच्चों के बीच विविधता पैदा करेगा। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शर्मा ने न्यायालय को बताया कि 21 राज्यों ने पहली कक्षा में छह साल से अधिक उम्र के बच्चों को दाखिला देने के प्रावधान को लागू किया है। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि केंद्रीय विद्यालय सरकार के कर्मचारियों के बच्चों के लिए है, जिन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है, इसलिए प्रवेश आयु के संबंध में एकरूपता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। 


आयु सीमा बढ़ाकर हो रहा संवैधानिक अधिकारिक का उल्लंघन: याचिकाकर्ता
इससे पहले याचिकाकर्ताओं में से एक 5 साल की बच्ची आरिन की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने न्यायालय में कहा था कि वह न तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को चुनौती दे रहे हैं और न ही केवीएस के अधिकार को। अग्रवाल ने कहा था कि वह सिर्फ आनन फानन में दाखिले की न्यूनतम उम्र में बढ़ोतरी किए जाने और इसके लिए अपनाए तरीके के खिलाफ हैं।  याचिकाकर्ता का कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21-ए के तहत शिक्षा के अधिकार की गारंटी का उल्लंघन है। साथ ही यह दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 और बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है। उसने दावा किया है कि केवीएस ने पिछले महीने प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से ठीक चार दिन पहले अपने पोर्टल पर केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए दिशानिर्देश अपलोड करके कक्षा एक के लिए प्रवेश मानदंड अचानक बदलकर छह वर्ष कर दिया।


केवीएस ने पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामा में दाखिले की न्यूनतम उम्र छह साल किए जाने को सही ठहराया था। केवीएस ने न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम उम्र छह साल करने का फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है।

Monday, April 11, 2022

JNVST Class 6th Admit Cards 2022 Download , जारी हुए नवोदय कक्षा 6 हेतु प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड, ऐसे करें डाउनलोड

JNVST Class 6th Admit Cards 2022 Download , जारी हुए नवोदय कक्षा 6 हेतु प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड, ऐसे करें डाउनलोड


JNVST Class VI Admit Cards 2022: नवोदय विद्यालय समिति (NVS) ने जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNVs) की छठी कक्षा की प्रवेश परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा (JNVST)





JNVST Class VI Admit Cards 2022: नवोदय विद्यालय समिति (NVS) ने जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNVs) की छठी कक्षा की प्रवेश परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा (JNVST) 30 अप्रैल, 2022 को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक एक चरण में सभी JNVs के लिए आयोजित की जाएगी।


प्रवेश परीक्षा में केवल ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्नों के साथ तीन सेक्शन होंगे। उम्मीदवारों को मानसिक क्षमता के 40 प्रश्नों, अंकगणित सेक्शन से 20 और भाषा सेक्शन से 20 प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कहा जाएगा। मानसिक क्षमता परीक्षण 60 मिनट का होगा और इसमें 50 अंक होंगे। अंकगणित और भाषा की परीक्षा प्रत्येक 30 मिनट की अवधि की होगी। इन दोनों वर्गों में से प्रत्येक में 30-30 अंक होंगे।


उम्मीदवार चयन परीक्षा के लिए अपने एडमिट कार्ड एनवीएस की आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in से डाउनलोड कर सकते हैं।


NVS class 6 Admit card : ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड

स्टेप 1-  सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in पर जाएं।

स्टेप 2- "download NVS class 6 Admit card" लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3- मांगी गई जानकारी भरें और  सबमिट करें।

स्टेप 4- एडमिट कार्ड आपके सामने होगा।

स्टेप 5- इसे डाउनलोड कर लें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट लेना न भूलें।
 

बेहतर रिजल्ट देने वाले स्कूल और छात्रों की कॉपी CBSE वेबसाइट पर करेगा अपलोड

बेहतर रिजल्ट देने वाले स्कूल और छात्रों की कॉपी CBSE वेबसाइट पर करेगा अपलोड

वहीं अब CBSE के एक अधिकारी (नाम न बताने की शर्त पर) ने कहा है कि बेहतर रिजल्ट देने वाले स्कूल और छात्र की कॉपी सार्वजनिक की जाएगी। 10वीं और 12वीं टॉपर्स और विषयवार छात्र की कॉपी वेबसाइट पर डाली जाएगी।


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं- 12वीं टर्म 1 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। सीबीएसई ने परिणाम अपनी वेबसाइट cbse.gov.in या cbseresults.nic.in पर अपलोड नहीं किया है। परीक्षार्थी स्कूल के माध्यम से अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं।

वहीं अब CBSE के एक अधिकारी  (नाम न बताने की शर्त पर) ने कहा है कि बेहतर रिजल्ट देने वाले स्कूल और छात्र की कॉपी सार्वजनिक की जाएगी। 10वीं और 12वीं टॉपर्स और विषयवार छात्र की कॉपी आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर डाली जाएगी। वहीं अन्य छात्रों के फायदे के लिए  बोर्ड स्कूलो को भी कॉपी भेजेगा। आपको बता दें, टर्म-2 के साथ टर्म-1 का ओएमआर भी स्कूल भेजा जाएगा। इसी के साथ ओएमआर भरने की जानकारी भी दी जाएगी।

सीबीएसई टर्म 1 कक्षा 10 की परीक्षाएं 30 नवंबर से 11 दिसंबर 2021 तक आयोजित की गई थीं। वहीं कक्षा 12 के लिए टर्म 1 की परीक्षाएं 1 दिसंबर से 22 दिसंबर तक आयोजित की  गईं थी। सीबीएसई 10वीं और 12वीं की टर्म 1 परीक्षा में करीब 36 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था।

CBSE Term 2 2022 : इस दिन होगी परीक्षा

सीबीएसई ने 10वीं 12वीं कक्षा की टर्म-2  परीक्षाएं 26 अप्रैल से शुरू होंगी। 10वीं की परीक्षा 24 मई को और 12वीं की परीक्षा 15 जून को खत्म होंगी। परीक्षाओं का समय सुबह 10:30 बजे से होगा। इस बार परीक्षा ( CBSE 10th 12th Term 2 Exam Date Sheet 2022 )  दो शिफ्टों में आयोजित नहीं की जाएगी। परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाएगा। छात्र cbse.gov.in व cbseacademic.nic.in पर जाकर अपनी कक्षा की डेटशीट डाउनलोड कर सकते हैं। स्टूडेंट्स को उनके एडमिट कार्ड उनके स्कूलों द्वारा ही दिए जाएंगे।

जूनियर एडेड हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती फंसी, अभ्यर्थी कर रहे परिणाम का इन्तजार

जूनियर एडेड हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती फंसी, अभ्यर्थी कर रहे परिणाम का इन्तजार


अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में भी शिक्षक भर्ती फंसी हुई है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से सहायक अध्यापक और प्रधानाध्यापक के 1500 से अधिक पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम भी घोषित हो चुका है।


 अब परीक्षा के अंक और एकेडमिक रिकार्ड के आधार पर मेरिट बननी है और इसके बाद अंतिम चयन परिणाम घोषित किया जाएगा। इसका अभी तक कोई अतापता नहीं। अभ्यर्थी परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।

गोरखपुर के 18 BEO पर भारी पड़ी स्कूलों के निरीक्षण में अनदेखी, जिलाधिकारी ने मांगा लिखित स्पष्टीकरण

गोरखपुर के 18 BEO पर भारी पड़ी स्कूलों के निरीक्षण में अनदेखी, जिलाधिकारी ने मांगा लिखित स्पष्टीकरण




गोरखपुर: परिषदीय विद्यालयों के निरीक्षण में खंड शिक्षाधिकारियों (बीईओ) की शिथिलता सामने आई है। राज्य परियोजना कार्यालय ने मिशन प्रेरणा के तहत संचालित महत्वपूर्ण गतिविधियों एवं क्रियाकलाप क्रियान्वयन, बेहतर समन्वय व सतत अनुश्रवण के लिए की परफारमेंस इंडीकेटर निर्धारित किया है। जिसके तहत खंड शिक्षाधिकारियों को प्रत्येक माह 40 अलग-अलग स्कूलों का निरीक्षण करना है। लेकिन मार्च माह में निरीक्षण को लेकर खंड शिक्षाधिकारियों द्वारा घोर लापरवाही बरती गई। किसी ने सिर्फ चार स्कूलों का निरीक्षण किया तो किसी का खाता तक नहीं खुला।


डीएम विजय किरन आनंद ने खंड शिक्षाधिकारियों के इस रवैये पर नाराजगी जताई है। उन्होंने जिले के 18 खंड शिक्षाधिकारियों को नोटिस देकर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही स्पष्टीकरण न देने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। डीएम ने कहा है कि मासिक समीक्षा बैठक में निर्देश देने के बाद भी खंड शिक्षाधिकारियों द्वारा निरीक्षण पूर्ण नहीं किया जा रहा है। जिसका सीधा असर विद्यालयों शिक्षकों की उपस्थिति, नामांकन तथा पठन-पाठन पर पड़ रहा है।


तीन बीईओ ने एक भी स्कूल का नहीं किया निरीक्षण: डीएम ने जिन 18 बीईओ को स्कूलों के निरीक्षण में लापरवाही बरतने पर नोटिस दी है उनमें से ब्रह्मपुर, गोला व पिपराइच के बीईओ ने मार्च में एक भी स्कूल का निरीक्षण नहीं किया है। भरोहिया के बीईओ ने 32, सरदानगर के 26, जंगल कौड़ियां के 25, बांसगांव व खोराबार के 20-20, गगहा के 18, पिपरौली के 19, बड़हलगंज के 12, कौड़ीराम के नौ, पाली के 10, चरगांवा के सात, खजनी के पांच, बेलघाट व भटहट के चार चार तथा सहजनवां के बीईओ द्वारा एक स्कूल का निरीक्षण शामिल है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में 31 अगस्त तक भरे जाएंगे शिक्षकों के रिक्त पद

उच्च शिक्षण संस्थानों में 31 अगस्त तक भरे जाएंगे शिक्षकों के रिक्त पद



 नई दिल्ली: देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों का पद अब लंबे समय तक खाली नहीं रहेगा। खाली होने से पहले ही उन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। शिक्षकों के खाली पदों को भरने में देरी को लेकर कोई बहाना भी नहीं चलेगा। शिक्षा मंत्रलय ने इसको लेकर एक विस्तृत योजना बनाने का काम शुरू कर दिया है। 


हालांकि, इससे पहले केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के खाली पदों को मिशन मोड में भरने का निर्देश दिया है। इस काम को पूरा करने के लिए 31 अगस्त, 2022 तक की समय सीमा भी निर्धारित की है। ध्यान रहे कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सचिवों के साथ बैठक में सभी मंत्रलयों और विभागों में खाली पदों को भरने का निर्देश दिया था।


उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल में एक बड़ी बाधा बन रही है। मंत्रलय ने इसको भांप कर पिछले साल ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने की मुहिम छेड़ी थी। 


खुद शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने देशभर के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से सीधी चर्चा की थी। हालांकि, उन्होंने सभी से तीन महीने के भीतर ही खाली पदों के विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पूर्णकालिक कुलपति न होने से यह मामला लटका रहा। अब इसमें नए सिरे से तेजी आई है। मंत्रलय के मुताबिक, शिक्षकों के करीब साढ़े आठ हजार पदों के लिए अब तक विज्ञापन जारी किए गए हैं।


शिक्षा मंत्रलय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा समय में केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के 11 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। इनमें साढ़े छह हजार पद अकेले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली हैं। आइआइटी में शिक्षकों के करीब 4,300 और आइआइएम में 422 पद खाली हैं। यह स्थिति तब है, जब केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या करीब 19 हजार है। आइआइटी में 11 हजार और आइआइएम में करीब 1,500 स्वीकृत पद हैं।


मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, देश के इन शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शिक्षकों की संख्या भी बढ़नी चाहिए।

लड़के स्कूली शिक्षा में लड़कियों से पिछड़े, यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट का दावा

लड़के स्कूली शिक्षा में लड़कियों से पिछड़े, यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट का दावा

यूनेस्को की रिपोर्ट का दावा, 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल से दूर

लड़कियों के मुकाबले लड़कों के एक ही कक्षा में दोबारा पढ़ने की संभावना अधिक: यूनेस्को



उच्च माध्यमिक कक्षाओं में भी लड़कों की संख्या कम

● 57 देशों में पढ़ पाने के कौशल में 10 वर्ष की उम्र के लड़के लड़कियों की तुलना में पीछे।

● 73 देशों में उच्च माध्यमिक कक्षाओं में लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या कम।

● 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षां में फिर अधिक पढ़ने की संभावना।


नई दिल्ली : लड़कियों की तुलना में लड़कों के एक ही कक्षा दोहराने की संभावना ज्यादा होती है। शारीरिक रूप से दंडित किए जाने का खतरा भी लड़कों को ही अधिक होता है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की एक वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 142 में से 130 देशों में ये हालात पाए गए हैं।


‘लीव नो चाइल्ड बिहाइंड : ग्लोबल रिपोर्ट ऑन बॉयज डिसेन्गेज्मेन्ट फ्रॉम एजुकेशन’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है, प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में पढ़ने की आयु वाले करीब 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। रिपोर्ट में शिक्षा से लड़कों के इस तरह के अलगाव के पीछे कड़े अनुशासन, शारीरिक दंड, गरीबी और काम करने की आवश्यकता को कारण बताया गया है।


गरीबी भी वजह: गरीबी और घर चलाने के लिए पैसे की जरूरत लड़कों को स्कूल से दूर करती है। इन वजहों से लड़कियों के कभी स्कूल नहीं जा पाने की अधिक आशंका होती है, लेकिन लड़कों के आगे की कक्षाओं में नहीं पढ़ पाने और अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाने का खतरा अधिक है।



नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की नई 'वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षाओं में दोबारा पढ़ने की संभावना अधिक है। 'लीव नो चाइल्ड बिहाइंड: ग्लोबल रिपोर्ट ऑन बॉयज डिसेन्गेजमेंट फ्रॉम एजुकेशन' शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में पढ़ने की आयु वाले करीब 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। 


रिपोर्ट में कहा गया है कि शारीरिक तौर पर लड़कियों के मुकाबले लड़कों को परेशान किए जाने का खतरा अधिक होता है। इसमें कहा गया है कि 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षाओं में फिर से पढ़ने की अधिक संभावना है और ये आंकड़े स्कूल में आगे की कक्षाओं में जाने की उनकी खराब गति की ओर इशारा करती है।


लड़कों के लिए शिक्षा का अधिकार अब भी दूर
लड़कों के लिए शिक्षा का अधिकार का ध्येय अब तक पूरा नहीं हुआ है। काफी बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर प्राथमिक और सेकेंडरी स्कूल से बाहर हैं। कोरोना महामारी ने पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या और तेजी से बढ़ाई है। 2020 में महामारी के पहले स्कूल में 25 करोड़ 90 लाख बच्चे थे, जिनमें से 13 करोड़ 20 लाख लड़के थे।

यूपी: बेसिक शिक्षा विभाग मेें कब होंगे अंतरजनपदीय तबादले? पिछली बार इस वजह से अपात्र हो गए थे 50% शिक्षक

यूपी: बेसिक शिक्षा विभाग मेें कब होंगे अंतरजनपदीय तबादले? पिछली बार इस वजह से अपात्र हो गए थे 50% शिक्षक


अपने परिवारों से दूर प्राइमरी शिक्षकों को नई तबादला नीति का बेसब्री से इंतजार, स्थायी नीति न होने के कारण बीते 10 सालों में केवल पांच बार ही तबादले हो सके।



लखनऊ। मेरठ की मृदुला पालीवाल बलरामपुर में शिक्षिका हैं। वर्ष 2015 में नियुक्ति हुईं। पति प्राइवेट नौकरी में हैं और छोटे बच्चे मेरठ में उनके साथ ही हैं। बच्चों को संभालने और परवरिश में खासी दिक्कतें आती हैं। गाजियाबाद की रुचि श्रावस्ती में शिक्षिका हैं और लम्बे समय से अंतरजनपदीय तबादले की राह ताक रही हैं।


नई सरकार से उम्मीदें: ये सिर्फ बानगी भर हैं, ऐसे कई उदाहरण हैं जहां शिक्षिका पत्नी अपने परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं। अब नई सरकार के कामकाज शुरू करने के साथ ही नया सत्र शुरू हो चुका है और तबादले की राह देख रहे शिक्षकों को नई सरकार से उम्मीद बंधी है। तबादले की कोई स्थायी नीति न होने के कारण बीते 10 सालों में केवल पांच बार ही तबादले हुए हैं।


पिछली बार तबादले वर्ष 2019- 2020 में हुए थे। इसके लिए आदेश 2019 में जारी हुआ, सरकार ने तबादले के लाभार्थियों की संख्या अगस्त 2020 में जारी की और तबादले की सूची दिसम्बर 2020 में जारी हो पाई।


स्थायी नीति नहीं फिर भी सरकार करती है सहानुभूति पूर्ण फैसला: अंतरजनपदीय तबादलों की कोई स्थायी नीति नहीं है। जब भी अंतजरनपदीय तबादले करने होते हैं, सरकार नए सिरे से नीति बनाती है। 10 से लेकर पांच व तीन साल तक अनिवार्य सेवा का नियम समेत अब मेरिट सूची बनाने के लिए अंक निर्धारित किए गए हैं। पिछली बार सरकार ने महिला शिक्षकों के लिए एक वर्ष की सेवा और पुरुष शिक्षकों के लिए तीन वर्ष की सेवा का अनिवार्य नियम बनाया था लेकिन हाईकोर्ट ने इस नियम को खारिज कर महिलाओं के लिए तीन वर्ष व पुरुष शिक्षकों के लिए पांच वर्ष की सेवा अनिवार्य की। इस फैसले के चलते 2020 में 50 फीसदी से ज्यादा शिक्षक अपात्र हो गए।


कम कटआफ होने से मिलती है दूर के जिले में तैनाती: बड़े शहरों में रिक्त पद कम होने के कारण कटऑफ बहुत ऊंचा ज्यादा है जबकि पिछड़े आठ जिलों समेत पूर्वांचल के कई जिलों की मेरिट काफी नीचे होती है। यही कारण है कि बड़े शहरों के अभ्यर्थी कम कटऑफ होने के कारण छोटे जिलों में नियुक्ति पाते हैं। इसके बाद शादी या अन्य कारणों से शिक्षक अपने परिवार के पास तबादला करवाना चाहते हैं।


सरकार को उन महिला शिक्षकों के बारे में सोचना चाहिए जो परिवार को छोड़ कर अलग रह रही हैं। इसके लिए एक स्थायी नीति बनानी चाहिए। - संतोष तिवारी-प्रदेश अध्यक्ष, विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन


मैं कन्नौज की हूं। मैं पिछड़े जिले बलरामपुर में नियुक्त हूं। पति गाजियाबाद में प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। हर वर्ष सोचती हूं कि शायद इस बार तबादला हो जाए। - अर्चना दीक्षित, शिक्षिका, बलरामपुर




Sunday, April 10, 2022

मिड डे मील के लिए सिर्फ 15 मिनट, 🙄  बेसिक शिक्षा परिषद का आदेश बना गले की फांस

मिड डे मील के लिए सिर्फ 15 मिनट, 🙄  बेसिक शिक्षा परिषद का आदेश बना गले की फांस

बेसिक शिक्षा : 15 मिनट में तो धुलते हैं बर्तन, बच्चे कैसे करेंगे भोजन?
 

बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में दोपहर का भोजन के लिए 15 मिनट निर्धारित कर दिया गया है, जबकि 15 मिनट में बच्चे लाइन में लगकर बर्तन धुलते हैं।

 बेसिक शिक्षा विभाग में अधिकारियों का आदेश अध्यापकों के गले की फांस बन रहा है। लोगों की मांग पर शिक्षण कार्य के लिए सुबह साढ़े सात बजे से साढ़े 12 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। इसमें सिर्फ 15 मिनट का वक्त एमडीएम के लिए दिया गया है। 15 मिनट में बच्चे हाथ धोकर कतार में बैठ भी नहीं पाते हैं। आदेश के बाद अध्यापक सोशल मीडिया पर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।


सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने धूप व गर्मी को देखते हुए परिषदीय व मान्यता प्राप्त विद्यालयों का संचालन सुबह साढ़े सात से दोपहर साढ़े 12 तक कर दिया है। प्रार्थना सभा साढ़े सात से 7:40 बजे तक व मध्यावकाश सुबह 10 से 10:15 बजे तक करने का निर्देश है। परिषदीय विद्यालयों में मध्यान भोजन योजना लागू है। एमडीएम ग्रहण करने के लिए अच्छे हाथोकर अपनी थाली लेकर कतार में बैठते हैं। 


भोजन ग्रहण करने के बाद बच्चों को अपनी थाली स्वयं धोनी होती है। हाथ धोकर खाना खाने और थाली धोने के लिए 15 मिनट का वक्त नाकाफी है। विद्यालयों में बच्चों की भीड़ की वजह से एक नल पर एक साथ इतने बच्चे हाथ धोने और बर्तन धोने का काम नहीं कर सकते हैं। सचिव के आदेश के बाद बीएसए ने भी साढ़े सात से साढ़े 12 बजे तक शिक्षण कार्य व इस बीच 15 मिनट का भोजन अवकाश करने का निर्देश दिया है।



परिषदीय विद्यालयों में समय बदलने का विरोध, शिक्षण स्टाफ को एक घण्टे विद्यालय में अकेले रहने के आदेश को बताया बेतुका




नये आदेश के जरिए फरमान, 15 मिनट में खिलाना होगा बच्चो को मिड डे मील


बेसिक शिक्षा परिषद ने शनिवार को ग्रीष्मावकाश होने तक परिषदीय स्कूलों के संचालन समय में बदलाव कर दिया। शिक्षकों को महज आधा घंटे की राहत दी गई जबकि स्कूली बच्चों को सुबह साढ़े सात बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। मात्र 15 मिनट के मध्यावकाश में ही बच्चों को एमडीएम खिलाना होगा। आदेश जारी होते ही यह चर्चा में आ गया।


सोशल मीडिया में आदेश की प्रति सामने आते ही शिक्षकों ने अपना विरोध जताया है। उनका साफ तौर पर कहना ै है कि दोपहर 2 बजे और डेढ़ बजे के अंतराल में तापमान कितना कम हो जाएगा। दरअसल शिक्षक अपने घरों से काफी दूर आते हैं। भीषण तपिश व गर्मी के बीच उन्हें बाइक या दूसरे साधनों से घर जाना पड़ता है। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों ने कहा कि जारी किया गया यह आदेश व्यवहारिक कमई नहीं है।


सुझाव देते हुए कहा कि इससे अच्छा होता कि समय पूर्ववत ही रहता। तर्क दिया गया कि सुबह अब और अधिक जल्दबाजी करनी होगी जो उनके लिए सड़क में खतरनाक भी साबित हो सकता है। कभी भी किसी तरह का हादसा भी हो सकता है।


दोपहर 12.30 बजे तक रहेंगे बच्चे:
स्कूली बच्चों को सुबह साढ़े सात बजे से पांच घंटे तक स्कूल में रहना होगा। सुबह 10 बजे से सवा दस बजे तक मध्यावकाश होगा। 15 मिनट में स्कूली बच्चों को खाना खिलाना बड़ी चुनौती होगा। जानकारों ने कहा कि घर में लोगों को अपने घर में 15 मिनट में खाना खत्म करना मुश्किल लगता है, यहां तो बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे हैं, वह इतने कम समय में कैसे खाना खाएंगे। जिन स्कूलों में सफाईकर्मी नहीं हैं, वहां रसोईयों को स्कूल की सफाई का भी काम करना पड़ता है। ऐसे में आदेश का पालन कैसे होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा। कई तरह की समस्याएं भी हैं।


कई जिलों में डीएम बदल चुके थे समय
सूबे के कुछ जिलों में डीएम स्तर से स्कूल संचालन समय पूर्व में ही बदला जा चुका था लेकिन परिषद के आदेश के आने के बाद दी गई व्यवस्था के अनुसार स्कूल संचालन होगा।
 
लखनऊ : बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने शनिवार को प्राइमरी स्कूलों के समय में बदलाव का आदेश जारी किया। कहा गया है कि ग्रीष्मावकाश शुरू होने तक विद्यालय सुबह 7.30 बजे से अपराह्न 1.30 बजे तक संचालित किए जाएंगे।


पठन-पाठन के लिए सभी छात्र-छात्राएं सुबह 7.30 बजे से अपराह्न 12.30 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस दौरान सुबह 7.30 बजे से 7.40 तक प्रार्थना/योगाभ्यास और सुबह 10 बजे से 10.15 बजे तक मध्यावकाश होगा। शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक सुबह 7.30 बजे से अपराह्न 1.30 बजे तक उपस्थित रहकर दायित्व,प्रशासकीय काम निपटाएंगे।


 इस बीच परिषद के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विद्यालय का समय सुबह आठ से दोपहर 12 तक करने की मांग की है। कहा कि विद्यालय में अध्यापक-अध्यापिकाओं के दोपहर 12.30 से 1.30 बजे तक अकेले रहने का आदेश अव्यवहारिक है। प्रदेश में बहुत से विद्यालय दूरदराज के ग्रामीण अंचलों में हैं, जहां एक ही अध्यापिका है। वह अकेले विद्यालय में असुरक्षित होगी और कोई घटना भी हो सकती है।

Saturday, April 9, 2022

यूपी : निजी स्कूल पर फीस बढ़ाने पर लगी रोक समाप्त, वर्तमान सत्र में सरकार द्वारा तय मानक के अनुसार बढ़ा सकेगें फीस, शासनादेश जारी

यूपी : निजी स्कूल पर फीस बढ़ाने पर लगी रोक समाप्त,  वर्तमान सत्र में सरकार द्वारा तय मानक के अनुसार बढ़ा सकेगें फीस, शासनादेश जारी

निजी स्कूलों में पांच फीसदी तक फीस बढ़ाने की मंजूरी, देखें शासनादेश


लखनऊ : प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों को शैक्षिक सत्र 2022-23 में फीस बढ़ाने की अनुमति दे दी है। फीस वृद्धि की गणना वर्ष 2019-20 की फीस को आधार मानकर की जाएगी। आधार वर्ष की फीस में पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी न किए जाने की शर्त के साथ फीस में नवीनतम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर वार्षिक वृद्धि की गणना करके जोड़ने का फार्मूला तैयार किया गया है।

अपर मुख्य सचिव गृह आराधना शुक्ला ने शनिवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया। यह शासनादेश प्रदेश में संचालित सभी शिक्षा बोर्डों के वित्त विहीन विद्यालयों पर लागू होगा। शासनादेश में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 की शुल्क संरचना को आधार वर्ष मानते हुए शुल्क वृद्धि की जा सकती है। सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को इसकी निगरानी करने को कहा गया है कि कोई विद्यालय अधिक फीस न बढ़ा पाए।

यहां करें शिकायत

विद्यालयों द्वारा सत्र 2022-23 में ली जाने वाली फीस से यदि कोई छात्र, अभिभावक क्षुब्ध है तो अधिनियम की धारा आठ के तहत जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष शिकायत की जा सकती है।

KVS Admission 2022: पहली क्लास में एडमिशन की लास्ट डेट 13 अप्रैल तक बढ़ी, ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

KVS Admissions 2022: केंद्रीय विद्यालय पहली कक्षा में एडमिशन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी

KVS Admission 2022: पहली क्लास में एडमिशन की लास्ट डेट 13 अप्रैल तक बढ़ी,  ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन


KVS Kendriya Vidyalaya Admission 2022 : दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय विद्यालय संगठन ने पहली कक्षा में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख दो दिन आगे बढ़ा दी है।


The last date for Online Registration for Admission to Class I in Kendriya Vidyalayas for the Academic Year 2022-23 has been extended upto 13.04.2022 (Wednesday) 07:00 pm.


KVS Admissions 2022: केंद्रीय विद्यालय संगठन ने पहली कक्षा में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख दो दिन आगे बढ़ा दी है। अब केंद्रीय विद्यालय कक्षा एक के लिए रजिस्ट्रेशन ( Kendriya Vidyalaya Class One Admissions Registration ) 13 अप्रैल 2022 तक कराए जा सकते हैं। पहले इसकी अंतिम तिथि 11 अप्रैल थी। केवीएस ने आयु सीमा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के कारण यह फैसला लिया है। केंद्रीय विद्यालय संगठन की आधिकारिक वेबसाइट kvsonlineadmission.kvs.gov.in पर इस संबंध में नोटिस भी जारी कर दिया गया है। 


आपको बता दें कि केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले की न्यूनतम उम्र सीमा पांच वर्ष से बढ़ाकर छह साल किए जाने के मामले में उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है। 

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उम्मीद जतायी थी कि केंद्रीय विद्यालय (केवी) कक्षा एक में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि दो दिन और बढ़ा देगा।
अदालत ने उक्त याचिका को 11 अप्रैल को आगे की सुनवायी के लिए सूचीबद्ध किया जिसमें आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए कक्षा एक के वास्ते न्यूनतम आयु मानदंड छह वर्ष किये जाने को चुनौती दी गई है।

केन्द्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के वकील न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष इसको लेकर सहमत हुए कि पंजीकरण की अंतिम तिथि आगे बढ़ाई जाएगी। केवीएस ने पहले समय सीमा को 21 मार्च से 11 अप्रैल तक बढ़ाया था।

केंद्र सरकार ने कक्षा एक के लिए न्यूनतम आयु मानदंड में बदलाव करके पांच साल से छह साल किये जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने का विरोध करते हुए कहा कि यह फैसला अचानक नहीं है क्योंकि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में आया है जो 2020 में आयी थी और नीति को चुनौती नहीं दी गई है। केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत से इस उम्र में हस्तक्षेप नहीं करने का आग्रह किया क्योंकि उसके आदेश का पूरे भारत में प्रभाव होगा और पांच से सात साल की उम्र के छात्रों के बीच ‘‘विविधता’’ उत्पन्न करेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि व्यथित छात्र अन्य स्कूलों में प्रवेश ले सकते हैं और प्रवेश के लिए ‘‘केवी पर निर्भर नहीं रह सकते।’’ उन्होंने कहा कि 21 राज्यों ने कक्षा एक के लिए छह-प्लस व्यवस्था लागू की है और चूंकि केवी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है, जिन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है, इसलिए प्रवेश आयु के संबंध में एकरूपता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

शर्मा ने बताया कि एक लाख सीटों के मुकाबले सात लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि केवी शिक्षा के प्रकाशस्तंभ हैं और एनईपी को लागू करने में अग्रणी हैं।

आयु सीमा बढ़ाकर हो रहा संवैधानिक अधिकारिक का उल्लंघन: याचिकाकर्ता
अदालत के समक्ष याचिकाओं में से एक में, पांच वर्ष की एक लड़की ने दावा किया है कि आयु मानदंड में बदलाव, जो पहले पांच साल था, याचिकाकर्ता को संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21-ए के तहत शिक्षा के अधिकार की गारंटी का उल्लंघन है। साथ ही यह दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 और बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता, यूकेजी की एक छात्रा है जिसका प्रतिनिधित्व वकील अशोक अग्रवाल कर रहे हैं। उसने दावा किया है कि केवीएस ने पिछले महीने प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से ठीक चार दिन पहले अपने पोर्टल पर केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए दिशानिर्देश अपलोड करके कक्षा एक के लिए प्रवेश मानदंड अचानक बदलकर छह वर्ष कर दिया।

RTE : सूबे की राजधानी में चयनित दस हजार छात्रों को प्रवेश का अब तक इंतजार

RTE : सूबे की राजधानी में चयनित दस हजार छात्रों को प्रवेश का अब तक इंतजार


लखनऊ :  निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए चयनित होने के बाद भी अभी तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। पांच अप्रैल तक पहली लॉटरी में चयनित लाभार्थियों का प्रवेश स्कूलों में हो जाना चाहिए था लेकिन अभी तक चयनित बच्चों की सूची ही स्कूलों को नहीं भेजी गई है।


जिनका चयन हुआ है उनके अभिभावक प्रवेश के लिए स्कूल पंहुचे तो स्कूल प्रबंधन ने प्रवेश नहीं दिया। अभिभावक स्कूल और बेसिक शिक्षा कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।


आरटीई की आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में होनी है। पहले चरण में आवेदन दो से 25 मार्च तक हुए थे। जिसमें 13 हजार से अधिक अभिभावकों ने अपने बच्चों के निशुल्क प्रवेश के लिए आवेदन किया था। जिसकी लॉटरी 30 मार्च को निकाली गई और 9760 बच्चों का नाम प्रवेश के लिए फाइनल हुआ। इन बच्चों का प्रवेश स्कूलों में पांच अप्रैल तक कराने का लक्ष्य था। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने कहा कि चयनित बच्चों की फाइनल सूची जिलाधिकारी के पास अनुमोदन के लिए गई थी। अनुमोदन हो गया है। स्कूलों को सूची भेजी जा रही है।

Friday, April 8, 2022

बीएड की पढ़ाई फिलहाल पुराने पाठ्यक्रम से ही होगी

बीएड की पढ़ाई फिलहाल पुराने पाठ्यक्रम से ही होगी, पाठ्यक्रम में एनसीटीई के बदलाव ही अपनाएंगे विवि



रुहेलखंड विश्वविद्यालय बीएड के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में कोई बदलाव नहीं करेगा। वही बदलाव अपनाएगा जो एनसीटीई) की ओर से किए जाएंगे। फिलहाल बीएड की पढ़ाई पुराने पाठ्यक्रम से ही होगी।


रुहेलखंड विश्वविद्यालय समेत कई शिक्षण संस्थानों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है। इस नीति के मुताबिक कोर्स की शुरुआत से ही सेमेस्टर प्रणाली लागू होनी है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने स्नातक पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर सिस्टम शुरू कर दिया है। इसी वजह से सवाल उठाया जा रहा है कि नई शिक्षा नीति के तहत बीएड में भी सेमेस्टर प्रणाली लागू की जाए।


विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इस पर मंथन के बाद पाठ्यक्रम में बदलाव न करने का फैसला लिया है। सूत्रों का कहना है कि पाठ्यक्रम में विश्वविद्यालय को बदलाव का अधिकार नहीं है। लिहाजा विश्वविद्यालय एनसीटीई के आदेश का इंतजार कर रहा है। उसके बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा।

लखनऊ : छात्रवृत्ति पाने छात्रों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य, 15 दिन के भी सभी शिक्षण संस्थानों में लागू होगी व्यवस्था

लखनऊ : छात्रवृत्ति पाने छात्रों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य, 15 दिन के भी सभी शिक्षण संस्थानों में लागू होगी व्यवस्था

बायोमेट्रिक अटेंडेंस उन सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगा, जो दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद इंटर, प्राविधिक व व्यावसायिक शिक्षा के किसी भी सेक्टर की पढ़ाई करेंगे।


दसवीं पास करके आगे की पढ़ाई करने वाले उन सभी छात्रों के लिए स्कूलों में अब बायोमेट्रिक अटेंडेंस लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, जो छात्र सरकार की छात्रवृत्ति योजना का लाभ ले रहे हैं। बायोमेट्रिक अटेंडेंस उन सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगा, जो दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद इंटर, प्राविधिक व व्यावसायिक शिक्षा के किसी भी सेक्टर की पढ़ाई करेंगे। निदेशक समाज कल्याण विभाग राकेश कुमार ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को आदेश जारी कर दिया है।

निदेशक समाज कल्याण विभाग की ओर से इस संबंध में निदेशक उच्च शिक्षा, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा, निदेशक प्राविधिक शिक्षा, निदेशक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन, निदेशक माध्यमिक शिक्षा, सचिव स्टेट मेडिकल फैकल्टी, निदेशक कृषि प्रसार शिक्षा, निदेशक आयुष विभाग, सचिव प्राविधिक शिक्षा परिषद, निदेशक दिव्यांगजन एवं सशक्तिकरण, निदेशक संस्कृति विभाग, सचिव राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद और सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को आदेश की प्रति भेज दी गई है।

आदेश में कहा गया है कि अनुसूचित जाति/ जनजाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति (दशम) संशोधन नियमावली के प्रावधान के मुताबिक 75 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले छात्र ही छात्रवृत्ति पाने के पात्र हैं।

इस नियमावली में ही सभी राजकीय, अनुदानित और मान्यता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने व अघ्ययन करने वाले और छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले छात्रों का का आधार बेस उपस्थिति प्रणाली (बायोमेट्रिक) को लागू करने का भी प्रावधान है। इसलिए निदेशक समाज कल्याण ने सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थाओं में 15 दिन के भीतर बायोमेट्रिक अटेंडेट की प्रक्रिया शुरू करने के निर्दे दिए हैं।

Thursday, April 7, 2022

पुरानी पेंशन की बहाली के लिए सांसदों को भेजेंगे ज्ञापन

पुरानी पेंशन की बहाली के लिए सांसदों को भेजेंगे ज्ञापन



लखनऊ। शिक्षकों और कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। बुधवार को यूनीक टीचर्स इंप्लाइज कमेटी (यूटेक) ने ऑनलाइन बैठक में निर्णय लिया कि संगठन के सदस्य लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को पेंशन बहाली  की मांग को जनजागरुकता लेकर ज्ञापन अभियान प्रेषित करेंगे।


प्रदेश आईटी सेल प्रभारी अतुल मिश्रा ने बताया कि पार्टियों के मुख्य एजेंडे में पुरानी पेंशन बहाली शामिल था। उन्होंने बताया कि अपनी मांग को लेकर प्रदेश स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आम जनता को भी इसकी अहमियत बताई जाएगी।


 17 अप्रैल को राजधानी में प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक कर शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप सरल ने बताया कि नई दिल्ली में हुई अखिल भारतीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा की बैठक में सांसदों को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराने की रणनीति तय हुई है। इस अवसर पर प्रांतीय उपाध्यक्ष निर्मेश पांडे, जेपी सेठ, राघवेंद्र प्रताप सिंह, अलका गोयल समेत कई लोग मौजूद रहे।

मंत्री बदल गए - पर पूरी नहीं हुई शिक्षकों की जांच, बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों की 2020 से चल रही है जांच

मंत्री बदल गए, पर पूरी नहीं हुई शिक्षकों की जांच

बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों की 2020 से चल रही है जांच



लखनऊ। नई सरकार बनने के साथ ही बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री तो बदल गए, पर शिक्षकों के खिलाफ दो साल से चल रही जांच अब भी अधूरी है। 


दरअसल, बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2020 में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के सरकारी और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में जांच के आदेश दिए थे। 



तीनों विभागों ने हर जिले में एडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाकर जुलाई 2020 तक रिपोर्ट मांगी थी। इस दौरान बेसिक में महानिदेशक, प्रमुख सचिव और कई बीएसए बदल गए, जबकि माध्यमिक में अपर मुख्य सचिव पद पर आराधना शुक्ला और निदेशक पद पर विनय कुमार पांडेय बने हुए हैं। डॉ. दिनेश शर्मा की जगह अब योगेंद्र उपाध्याय उच्च शिक्षा के मंत्री बनाए गए हैं। विभाग की पूर्व राज्यमंत्री गुलाबदेवी अब राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं और मोनिका एस गर्ग अपर मुख्य सचिव है, फिर भी जांच पूरी नहीं हो पायी ।

इस बार सवा लाख ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति

इस बार सवा लाख ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति

लखनऊ : प्रदेश में चालू शैक्षिक सत्र में पिछले साल के मुकाबले करीब सवा लाख ज्यादा अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सुविधा दी गई।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक आर.पी.सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चालू शैक्षिक सत्र में प्री व पोस्ट मैट्रिक पाठ्यक्रमों में कुल 9.69 लाख अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को कुल 662 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की सुविधा दी गई। इसमें से 442 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने दिए जबकि राज्य सरकार से 220 करोड़ मिले।


उन्होंने बताया कि प्री मैट्रिक कक्षाओं में 6.03 लाख बच्चों को 341 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई जबकि पोस्ट मैट्रिक कक्षाओं में 3 लाख 66 हजार छात्र-छात्राओं को 321 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि दी गई। पिछले शैक्षिक सत्र में कुल 8 लाख 45 हजार अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को यह सुविधा मिली थी। इसी तरह ओबीसी के इस बार 13.77 लाख पोस्ट मैट्रिक कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को 1 हजार 40 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति व फीस भरपाई दी गई जबकि प्री मैट्रिक कक्षाओं के 7.92 लाख छात्र-छात्राओं को 150 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गयी।

Wednesday, April 6, 2022

69000 शिक्षक भर्ती मामला : एक अंक पर अटका है सात सौ से ज्यादा शिक्षकों का चयन, बेसिक शिक्षा मंत्री से की समाधान की उम्मीद

69000 शिक्षक भर्ती मामला : एक अंक पर अटका है सात सौ से ज्यादा शिक्षकों का चयन, बेसिक शिक्षा मंत्री से की समाधान की उम्मीद


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा में 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती उत्तरकुंजी मामले में कोर्ट के आदेश का अनुपालन न किए जाने से एक अंक से चयन से वंचित अभ्यर्थियों में निराशा है। प्रदेश में नए बेसिक शिक्षा मंत्री के कार्यभार ग्रहण करने के बाद राहत पाने की उम्मीद में अभ्यर्थियों ने लखनऊ में उनसे मुलाकात की। बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी किस तरह इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच के 25 अगस्त, 2021 के आदेश का अनुपालन नहीं कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियुक्ति नहीं मिल पा रही है।



शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से मिले दुर्गेश शुक्ला ने बताया कि हाई कोर्ट ने प्रश्न नंबर 60 के तीसरे विकल्प को परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) की उत्तरकुंजी में सही मानने को अमान्य कर दिया।

प्रश्न था - 'शैक्षिक प्रशासन उपयुक्त विद्यार्थियों को उपयुक्त शिक्षकों द्वारा समुचित शिक्षा प्राप्त करने योग्य बनाता है जिससे वे उपलब्ध अधिक साधनों का उपयोग करके अपने प्रशिक्षण से सर्वोत्तम को प्राप्त करने में समर्थ हो सकें।'

 यह परिभाषा दी गई है:-। उत्तर के विकल्प हैं- (1) एसएन मुखर्जी द्वारा, (2) कैम्बेल द्वारा, (3) वेलफेयर ग्राम द्वारा, (4) डा. आत्मानंद द्वारा। 


पीएनपी ने उत्तरकुंजी में विकल्प तीन को सही माना। इसे अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी विकल्पों को गलत माना और एक अंक से चयन से वंचित याचियों व अपीलकर्ताओं को एक अंक देकर चयन करने का आदेश 25 अगस्त, 2021 को दिया। दुर्गेश शुक्ला, राम मिश्रा, रोहित शुक्ला, प्रसून दीक्षित आदि का कहना है कि एक अंक दिए जाने पर सात सौ से ज्यादा अभ्यर्थियों को चयन हो जाएगा। सामान्य वर्ग में कटआफ अंक 97 गया है, जबकि उन्हें 96 अंक मिले हैं। एससी-एसटी का कटआफ अंक 90 है और कई को 89 अंक मिले हैं। 


अभ्यर्थियों ने मंत्री को बताया कि सात माह बाद भी अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन न कर उनके भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। मंत्री ने जल्द ही विभागीय अफसरों के साथ मीटिंग कर समाधान निकालने का भरोसा दिया है।