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Thursday, November 10, 2022

शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों पर न विषय लिखा न वर्ग, एडेड जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती मामले में लापरवाही

शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों पर न विषय लिखा न वर्ग, एडेड जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती मामले में लापरवाही



प्रदेश के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों पर भर्ती से पहले अधियाचन की गड़बड़ी दूर की जा रही है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सही अधियाचन भेजने की चेतावनी दी गई थी लेकिन उसके बावजूद जो सूचना मिली है उसमें कई पदों का विषय और वर्ग नहीं लिखा है। 


उप शिक्षा निदेशक विज्ञान दिनेश सिंह ने 40 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को बुधवार को शिक्षा निदेशालय में उपस्थित होकर गड़बड़ी दूर कराने के निर्देश दिए थे।



लेकिन इसके बावजूद बुधवार को बीएसए और उनके प्रतिनिधि आधी-अधूरी सूचना के साथ पहुंचे। उन्हें फिर से सही सूचना देने को कहा गया है। इसके चलते भर्ती फंसी हुई है।


 17 अक्तूबर 2021 को आयोजित लिखित परीक्षा का संशोधित परिणाम छह सिंतबर को जारी हुआ था। अभ्यर्थी भर्ती शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और अधिकारी रिक्त पदों की गड़बड़ी ही दूर नहीं कर पा रहे हैं। सबसे पहले 30 दिसंबर 2019 को रिक्त पदों का ब्योरा मांगा गया था। उसके बाद तीन नवंबर 2021 को रिक्त पदों को सत्यापित करने के लिए कहा गया। सात नवंबर को फिर से सही सूचना देने को कहा गया। लेकिन गड़बड़ी दूर नहीं हो पाई है।

कायाकल्प विद्यांजलि पोर्टल के जरिए अब परिषदीय स्कूल देश-विदेश से ले सकेंगे दान

कायाकल्प विद्यांजलि पोर्टल के जरिए अब परिषदीय स्कूल देश-विदेश से ले सकेंगे दान

खास-खास

● किसी स्कूल को गोद लेकर, विद्यालय विकास कोष में दान देकर, अध्ययन सामग्री देकर या पथ प्रदर्शक बनकर भी सहयोग दिया जा सकेगा।

● पंजीकृत एनजीओ, विद्यालय के पुरा छात्र या परिजन, कोई व्यक्ति विशेष या व्यवसायी आदि सहयोग प्रदान कर सकेंगे।



प्रदेश के 1.50 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को अब दान मिल सकेगा। देश-विदेश के इच्छुक लोग दान कर सकेंगे। सामाजिक अथवा व्यक्तिगत सहयोग के माध्यम से स्कूलों में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कायाकल्प विद्यांजलि पोर्टल की व्यवस्था लागू की जा रही है। 


इसके तहत प्रत्येक जिले में सोसाइटी पंजीकृत की जा रही है। सोसाइटी का खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जाएगा, जिसे पोर्टल से लिंक किया जाएगा। फिर पोर्टल के माध्यम से देश या विदेश से सीधे वित्तीय मदद भेजी जा सकेगी।


खास बात यह कि सभी प्रकार की दान संबंधी धनराशि पोर्टल के माध्यम से ही जमा की जाएगी। अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। वित्तीय मदद प्राप्त करने के लिए कोई खाता न होने के कारण कोई दान करना भी चाहता था तो वह संभव नहीं हो पाता था। 


खाते का संचालन मुख्य विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा। इस खाते से खर्च की जाने वाली राशि का उपभोग जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी सुनिश्चित करेगी।


कायाकल्प विद्यांजलि पोर्टल के जिला स्तर पर क्रियान्वयन के लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शीघ्र ही सोसाइटी का पंजीकरण कराते हुए उसका अलग से खाता खुलवाया जाएगा, जिसमें देश-विदेश से वित्तीय सहायता प्राप्त की जा सकेगी। वर्तमान में सीधे वित्तीय मदद प्राप्त करने की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए प्रयागराज

Wednesday, November 9, 2022

डॉ महेंद्र देव को मिला माध्यमिक शिक्षा निदेशक का अतिरिक्त प्रभार, सरिता तिवारी अपर शिक्षा निदेशक (पत्राचार) पद पर दी गई नवीन तैनाती

डॉ महेंद्र देव को मिला माध्यमिक शिक्षा निदेशक का अतिरिक्त प्रभार,  सरिता तिवारी अपर शिक्षा निदेशक (पत्राचार) पद पर दी गई नवीन तैनाती। 


लखनऊ। शासन ने बुधवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर निदेशक महेंद्र देव को विभाग का निदेशक नियुक्त किया है। उन्होंने पदभार भी ग्रहण कर लिया है। वहीं विभाग में निदेशक का पदभार संभाल रहीं सरिता तिवारी को अपर निदेशक पत्राचार प्रयागराज के पद पर स्थानांतरित किया है। 

महेंद्र देव विभाग में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। बताया जा रहा है कि आगामी दिनों में विभाग में बड़े स्तर पर कुछ अन्य बदलाव किए जाएंगे। 


Ayush admission scam : आयुष कॉलेजों में गड़बड़ी पर सख्ती जारी : CBI जांच के बाद हेराफेरी से दाखिले वाले 891 विद्यार्थी भी निलंबित

Ayush admission scam : आयुष कॉलेजों में गड़बड़ी पर सख्ती जारी :  CBI जांच के बाद हेराफेरी से दाखिले वाले 891 विद्यार्थी भी  निलंबित


यूपी के आयुष एडमिशन घोटाला मामले की होगी CBI जांच! योगी सरकार ने की सिफारिश 


लखनऊ। प्रदेश के आयुष कॉलेजों में हेराफेरी से दाखिला लेने वाले सभी 891 विद्यार्थियों को निलंबित कर दिया गया है। इन सभी के दस्तावेज भी सीज कर लिए गए हैं। जांच के बाद इनकी बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हो सकती है।


उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी कॉलेजों को मिलाकर आयुष की 7,338 सीटें हैं। इस बार 6,797 सीटों पर दाखिला हुआ है। हेराफेरी करने वाले 53 सरकारी और 838 निजी कॉलेजों के छात्र हैं। इनमें आयुर्वेद (बीएएमएस) के 516, होम्योपैथी (बीएचएमएस) के आठ और यूनानी (बीयूएमएस) के 367 विद्यार्थी हैं। इन सभी के बारे में आयुर्वेद निदेशालय की ओर से कॉलेजों को रिपोर्ट भेजी गई थी। 


रिपोर्ट मिलने के बाद लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के छह छात्रों को एक नवंबर को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद पीलीभीत, बरेली सहित अन्य सरकारी कॉलेजों से भी हेराफेरी कर प्रवेश लेने वाले छात्रों को निलंबित किया गया। वहीं, इस कार्रवाई के बाद सभी कॉलेज संचालक डरे हुए हैं। एक प्रधानाचार्य ने बताया कि संदिग्ध छात्रों का नाम सामने आने के बाद पूरी व्यवस्था ठप सी हो गई है। सभी कर्मचारी सशंकित हैं कि मामले की सीबीआई जांच होने पर किस पर गाज गिरेगी।


समिति का गठन

सभी निलंबित विद्यार्थियों के दस्तावेज कॉलेजों में ही सीज कर दिए गए हैं। इनकी निगरानी के लिए समिति बना दी गई है। ज्यादातर कॉलेजों ने छात्रों को निलंबित किए जाने की रिपोर्ट आयुष विभाग को भेज दी है।

नए सिरे से जांच संभव हेराफेरी कर प्रवेश लेने वाले छात्रों की नए सिरे से भी जांच होने की संभावना है। अभी तक की रिपोर्ट आयुर्वेद निदेशक प्रो. एसएन सिंह की टीम ने बनाई थी। वह निलंबित किए जा चुके हैं। ऐसे में नए सिरे से जांच कर वस्तुस्थिति परखी जाएगी।


मास्टरमाइंड की तलाश: जांच  रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिन छात्रों के खिलाफ मामला सही पाया जाएगा, उनकी कॉलेज से बर्खास्तगी करते हुए रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी। जांच के जरिये इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जाएगा। -डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, आयुष मंत्री, उत्तर प्रदेश




Ayush admission scam: उत्तर प्रदेश का आयुष एडमिशन घोटाला मामला तूल पकड़ता जा रहा है. कम मेरिट के बावजूद एक या एक सौ नहीं बल्कि करीब 900 छात्रों के एडमिशन को लेकर हुई धांधली में सीबीआई जांच की सिफारिश हुई है. यूपी सरकार ने इस फर्जीवाड़े की जांच CBI से कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है.


क्या है पूरा मामला?

ये पूरा मामला NEET 2021 की परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें खूब धांधली की गई और 891 ऐसे छात्रों को यूपी के आयुर्वेदिक होम्योपैथिक और यूनानी कॉलेज में एडमिशन दिया गया. जिनमें से कईयों का नाम मेरिट में था ही नहीं, और कईयों का नंबर बेहद कम होने के बावजूद उन्हें अच्छे कॉलेजों में एडमिशन मिल गया. 


बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा गड़बड़ी आयुर्वेदिक कॉलेज में हुए एडमिशन में सामने आई. पैसा लेकर अपात्र छात्रों को एडमिशन देने के इस मामले में आयुर्वेद होम्योपैथी और यूनानी निदेशालय के अफसर और कर्मचारी जांच के दायरे में हैं. आरोप है कि कि सीटों की बड़े स्तर पर सौदेबाजी हुई, पांच-पांच लाख रुपये में सीटें बेच दी गईं. इस मामले में डायरेक्टर आयुर्वेद एसएन सिंह ने हजरतगंज कोतवाली में काउंसलिंग कराने वाली नोडल एजेंसी UPTRON पावर्ट्रॉनिक्स पर एफआईआर दर्ज करवाई थी. जिसके बाद एसटीएफ को जांच सौंपी गई. 


पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब रैंक मिलने के बावजूद कई छात्रों को एडमिशन नहीं मिला. तो उन छात्रों ने आवाज उठाई, आयुष मंत्रालय से लेकर राष्ट्रपति भवन तक इस मामले की शिकायत की. फिर मामले ने तूल पकड़ा, राज्य सरकार हरकत में आई, एसटीएफ जांच के आदेश के बाद अब CBI जांच की सिफारिश की गई है.

पहल : बोर्ड परीक्षा में बेहतर अंक लेने के लिए CBSE ने जारी किए टिप्स

पहल : बोर्ड परीक्षा में बेहतर अंक लेने के लिए CBSE ने जारी किए टिप्स



केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए बेबसाइट पर महत्वपूर्ण टिप्स अपलोड किए हैं। सीबीएसई के अधिकारियों का कहना है कि 10वीं व 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थी इन टिप्स को अपनाकर बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।


सीबीएसई की तरफ से 10वीं व 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी माह के अंत या मार्च माह की शुरुआत में आयोजित की जा सकती हैं। उससे पहले प्रायोगिक व प्री-बोर्ड परीक्षाएं भी होंगी। अधिकारियों की मानें तो प्री-बोर्ड परीक्षाएं प्रायोगिक परीक्षाओं के आयोजन पर निर्भर करेंगी। हालांकि सीबीएसई की तरफ से अभी तक प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर किसी प्रकार का शेड्यूल जारी नहीं किया है।


 प्रायोगिक परीक्षाएं आमतौर पर जनवरी माह में आयोजित की जाती हैं। जिसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि प्री-बोर्ड परीक्षाएं दिसंबर में आयोजित करवाई जा सकती हैं। अधिकारियों ने 10वीं व 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को अभी से परीक्षा की तैयारी में जुटने की बात कही है।


बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थी विभिन्न प्रकार के उपाय अपनाते हैं। कुछ विद्यार्थी जहां गत वर्षों के प्रश्नों को हल करने का अभ्यास करते हैं तो कुछ विद्यार्थी सैंपल पेपर व मॉडल टेस्ट पेपर से तैयारी करते हैं। कुछ यू-ट्यूब व गूगल के माध्यम से बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने के लिए नए उपाय खोजते हैं। ऐसे में सीबीएसई ने भी विद्यार्थियों की इस दुविधा का समाधान करते हुए बोर्ड परीक्षा की तैयारी के टिप्स आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए है। 

बोर्ड ने इन टिप्स को अपने ट्विटर हैंडल से शेयर भी किया है।

- प्रत्येक अध्याय के महत्वपूर्ण टॉपिक्स को लेकर नोट्स बनाएं।

- कोई भी पाठ्यक्रम छूटना नहीं चाहिए।

- सीबीएसई की तरफ से जारी किए गए सैंपल पेपर के पैटर्न के अनुसार विषय की दोहराई करें।

- सही सैंपल पेपर पैटर्न पर प्रति विषय कम से कम 10 सैंपल पेपर को पूरा करने का अभ्यास करें।

- यह सुनिश्चित करें कि किसी भी सैंपल पेपर को हल करते समय 3 घंटे से अधिक का समय न लगे।

- मुश्किल प्रश्नों पर एनसीईआरटी से संकल्पना (कॉन्सेप्ट) स्पष्ट करते रहें।

- पढ़ाई के दौरान शोर-शराबे से दूर रहें, फोन से दूरी बनाकर रखें।


विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं की बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें, इसके लिए सीबीएसई ने वेबसाइट पर बेहतर तैयारी करने के टिप्स अपलोड किए हैं। विद्यार्थी इन टिप्स को अपनाकर बेहतर तरीके से तैयारी कर सकते हैं और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। 

KGBV : यूपी में और 40,000 बालिकाओं को आवासीय सुविधा के साथ पढ़ने का मौका जल्द मिलेगा

KGBV : यूपी में और 40,000 बालिकाओं को आवासीय सुविधा के साथ पढ़ने का मौका जल्द मिलेगा




लखनऊ। प्रदेश में 40,000 बालिकाओं को कक्षा नौ में आवासीय सुविधा के साथ निशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिलेगा। ये मौका मिलेगा उच्चीकृत हो रहे लगभग 400 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में...। 


अगले दो सत्रों में 20-20 हजार छात्राओं को प्रवेश मिलेगा। प्रदेश में 746 केजीबीवी हैं। इनमें से अभी केवल 56 केजीबीवी में कक्षा नौ से 12 तक की छात्राएं पढ़ रही हैं। इतनी बड़ी संख्या में आवासीय सुविधा के साथ पढ़ने की सुविधा प्रदेश मेें पहली बार दी जाएगी।


प्रदेश में 446 केजीबीवी को कक्षा 9 से 12 तक किया जा रहा है, इनमें से 56 में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। बचे हुए 390 में से 50 फीसदी में मार्च, वर्ष 2023 और बचे हुए स्कूलों में मार्च 2024 में पढ़ाई शुरू की जाएगी। इन्हें दो मॉडलों पर विकसित किया गया है। 


जिन केजीबीवी के आसपास तीन किमी के इलाके में माध्यमिक स्तर के स्कूल हैं, वहां केवल हॉस्टल का निर्माण किया गया है ताकि छात्राएं यहां पढ़ें और उन्हें केजीबीवी के हॉस्टल में रहने का मौका मिले। वहीं कुछ ऐसे हैं, जहां स्कूल न होने पर एकेडेमिक ब्लॉक और हॉस्टल दोनों बनाए जा रहे हैं।


अभी कक्षा छह से आठ तक की है सुविधा

प्रदेश के केजीबीवी में कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई की सुविधा है लेकिन कक्षा आठ के बाद आसपास माध्यमिक स्कूल न होने के कारण छात्राओं की पढ़ाई छूट जाती थी, इसे देखते हुए समग्र शिक्षा अभियान के तहत केजीबीवी में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई की सुविधा दी रही है। अभी प्रदेश के 56 केजीबीवी उच्चीकृत हो चुके हैं और यहां करीब छह हजार को इसका लाभ दिया जा रहा है। वहीं 74 हजार छात्राएं कक्षा छह से आठ तक की शिक्षा ले रही हैं।


300 केजीबीवी को भी किया जाएगा कक्षा 12 तक

बचे हुए 300 केजीबीवी को उच्चीकृत करने का प्रस्ताव अगले वर्ष केन्द्र सरकार के सामने रखा जाएगा। ये ऐसे केजीबीवी हैं जिनके पास मानक के मुताबिक जमीन नहीं है। इन्हें ब्लॉक में अन्य जगहों पर मौजूद जमीन पर उच्चीकृत करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।

शिक्षा लाभ कमाने का जरिया नहीं, ट्यूशन फीस हमेशा सस्ती होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

शिक्षा लाभ कमाने का जरिया नहीं, ट्यूशन फीस हमेशा सस्ती होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट


उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि शिक्षा लाभ कमाने का जरिया नहीं है और ट्यूशन फीस हमेशा सस्ती होनी चाहिए। साथ ही न्यायालय ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें मेडिकल कॉलेजों में ट्यूशन फीस बढ़ाकर 24 लाख रुपये सालाना किए जाने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था।


न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने याचिकाकर्ता नारायण मेडिकल कॉलेज और आंध्र प्रदेश पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह राशि छह सप्ताह के अंदर न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा करानी होगी।


 पीठ ने कहा कि फीस बढ़ाकर 24 लाख रुपये सालाना करना, यानी पहले से तय की गई फीस से सात गुना अधिक, बिल्कुल भी उचित नहीं है। शिक्षा लाभ कमाने का व्यवसाय नहीं है। ट्यूशन फीस हमेशा सस्ती होनी चाहिए। 


पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ मेडिकल कॉलेज द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

Tuesday, November 8, 2022

किताब वितरण का मुद्दा उठाने वाले शिक्षक का दो माह का वेतन रोकने के बाद अंततः हुआ निलंबन, किताब वितरण में हुई देरी पर भुगतान रोकने की रखी थी मांग

किताब वितरण का मुद्दा उठाने वाले शिक्षक का दो माह का वेतन रोकने के बाद अंततः हुआ निलंबन, किताब वितरण में हुई देरी पर भुगतान रोकने की रखी थी मांग


गोंडा। परिषदीय स्कूलों में किताब वितरण में हुई देरी के मुद्दे को उठाना शिक्षक नेता को भारी पड़ गया। दो माह तक वेतन रोकने के बाद शनिवार को बीएसए ने कार्यों में लापरवाही के आरोप में विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अनूप सिंह को निलंबित कर दिया है।



बेलसर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बड़नापुर में कार्यरत शिक्षक नेता अनूप सिंह ने बीती 19 जुलाई को सीएम योगी से किताब वितरण में हुई देरी में जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की थी। जिस पर सीएम के विशेष सचिव शशांक त्रिपाठी ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 


इस पर महानिदेशक विजय किरण आनंद ने बीते पांच सितंबर को शासन को रिपोर्ट दी कि 29 लाख के सापेक्ष 17 लाख 44 हजार किताबें स्कूलों में बांट दी गई हैं। और शेष 20 फीसदी किताब दो दिन के भीतर बांट दी जाएगी। 


शिक्षक नेता अनूप सिंह ने बीएसए की रिपोर्ट को गलत बताया और पुनः 16 अक्टूबर को सीएम को पत्र भेजकर किताब वितरण कराने और देरी के कारण किताब का भुगतान रोकने की मांग की। 

अनूप सिंह ने बताया कि बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने शिकायत को उठा लेने की बात कही और उनकी बात न मानने पर पहले दो माह का वेतन रोका और निलंबित कर दिया है। वेतन रोकने का कारण पूछने पर भी कोई पत्र नहीं दिया गया।


अंग्रेजी माध्यम स्कूल में भेजी हिंदी माध्यम की किताबें

बेलसर के अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय बड़नापुर में बीते अक्टूबर में हिन्दी माध्यम की किताबें भेजी गईं। यहां के बच्चों की पढ़ाई इसी किताब से शुरू हुई। फिर बीते एक नवंबर को अंग्रेजी माध्यम की किताबें भेजी गईं। यहां पर कार्यरत प्रधानाध्यापक अनूप सिंह ने दो बीईओ, एबीएसए और महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर अंग्रेजी माध्यम स्कूल में हिन्दी माध्यम किताबों से बच्चों को पढ़ाने के लिए मार्गदर्शन मांगा था।


कार्यों में लापरवाही पर शिक्षक को किया निलंबित : बीएसए

बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि शिक्षक अनूप सिंह स्कूल के कार्यों में रूचि न लेकर समूह बनाकर लोगों को सोशल मीडिया पर उकसा रहे थे। में बड़नापुर में अंग्रेजी माध्यम की किताबें 24 सितंबर को भेज दी गईं थी. जिसको शिक्षक ने वापस कर दिया। शासन के कार्यों को न करके पुस्तक न मिलने की अनावश्यक शिकायत कर रहे थे जो कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत था। बीईओ इटियाथोक को जांच अधिकारी बनाया गया है।


शासनादेश के विपरीत मण्डलायुक्त मुरादाबाद द्वारा परिषदीय विद्यालयों के छात्रों की परीक्षा का आयोजन कराये जाने के विरोध में प्राथमिक शिक्षक संघ ने लिखा शासन को पत्र

शासनादेश के विपरीत मण्डलायुक्त मुरादाबाद द्वारा परिषदीय विद्यालयों के छात्रों की परीक्षा का आयोजन कराये जाने के विरोध में प्राथमिक शिक्षक संघ ने लिखा शासन को पत्र 





UP Kanya Vidya Dhan Yojana 2022: 12वीं पास छात्राओं को मिलती है 30 हजार की आर्थिक सहायता

UP Kanya Vidya Dhan Yojana 2022: 12वीं पास छात्राओं को मिलती है 30 हजार की आर्थिक सहायता


UP Kanya Vidya Dhan Yojana 2022: यूपी सरकार ने लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कन्या विद्या धन योजना की शुरूआत की है जिसके तहत लड़कियों को 30 हजार रुपये दिए जाते हैं।


UP Kanya Vidya Dhan Yojana 2022: लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए यूपी सरकार ने एक वित्तीय सहायता योजना शुरू की है। इसके तहत सरकार 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास करने वाली लड़कियों को 30 हजार रुपये देती है। इस योजना का नाम है यूपी कन्या विद्या धन योजना। योजना के मुताबिक ये छात्रवृति उन लड़कियों को प्रदान की जाएगी जिन्होंने सीबीएसई या यूपी बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास की है। जो लड़कियां महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायता से शिक्षा प्राप्त कर रही हैं उन्हें ये वित्तीय सहायता दी जाएगी ताकि वो अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सकें।


इस योजना के लिए केवल यूपी बोर्ड, भारतीय माध्यमिक शिक्षा प्रमाणपत्र, यूपी मदरसा परिषद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), राज्य माध्यमिक शिक्षा परिषद और यूपी संस्कृत शिक्षा परिषद की छात्राएं ही इस योजना के तहत आवेदन कर सकती हैं।


कन्या विद्या धन योजना की शुरूआत अखिलेश यादव की सरकार में शुरू की गई थी जिसका मकसद था छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना। योजना का मकसद उन लड़कियों की आर्थिक सहायता करना है जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी शिक्षा जारी रखने में असमर्थ हैं। यूपी में लड़कियों की पढ़ाई के लिए कन्या सुमंगला योजना चल रही है। 


यूपी कन्या धन योजना पात्रता

# आवेदक लड़की उत्तर प्रदेश की निवासी होनी चाहिए।

# आवेदक छात्रा को सीबीएसई या यूपी स्टेट बोर्ड से 12वीं पास होना चाहिए।

# मेधावी छात्राओं के परिवार की वार्षिक आय 48,000 रुपये सालाना से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

# इस योजना में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी की छात्राओं को वरीयता दी जाएगी, जिन्होंने पहले ही यूपी कन्या धन योजना के लिए आवेदन किया है।


यूपी कन्या विद्या धन योजना दस्तावेजों की सूची

* लड़की आवेदक का आधार कार्ड
* अधिवास / निवास प्रमाण पत्र
* 12 वीं कक्षा की मार्कशीट और इंटरमीडिएट की सर्टिफिकेट की * फोटो कॉपी की सेल्फ अटेस्टेड
* बैंक के खाते का विवरण
* आय प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति
* बीपीएल श्रेणी प्रमाणपत्र

अब यूपी बोर्ड परीक्षा में नहीं बदल पाएंगे मेधावियों की कॉपी

अब यूपी बोर्ड परीक्षा में नहीं बदल पाएंगे मेधावियों की कॉपी


प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान केंद्रों पर अब मेधावी बच्चों की कॉपियां नहीं बदलेगी। 2023 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में बोर्ड ने सभी 75 जिलों में सिलाई वाली उत्तरपुस्तिकाएं भेजने का निर्णय लिया है। पूर्व की परीक्षाओं में नकल माफिया पेपर खत्म होने के बाद केंद्र पर मेधावी बच्चों की कॉपी का कवर पृष्ठ निकालकर कमजोर बच्चों की कॉपी पर लगा देते थे।




ऐसे कई मामलों में यूपी बोर्ड ने दोषी स्कूलों को परीक्षा से डिबार करने के साथ ही प्रबंधकों-शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की है। इससे बचने के लिए 2020 की बोर्ड परीक्षा से नकल की दृष्टि से दस संवेदनशील जिलों मथुरा, प्रयागराज, मुजफ्फरनगर, हरदोई, बलिया, जौनपुर, आजमगढ़, अलीगढ़, गाजीपुर व कौशाम्बी में 10वीं-12वीं की सिलाई वाली उत्तरपुस्तिकाएं भेजने की शुरूआत की गई थी।


इसके सकारात्मक परिणाम मिलने पर बोर्ड की ओर से इस साल गर्वनमेंट प्रेस के अफसरों से सभी 75 जिलों में सिलाई वाली कॉपियां ही सप्लाई करने का अनुरोध किया है। गर्वनमेंट प्रेस ने इसकी प्रक्रिया शुरू करते हुए टेंडर भी जारी कर दिया है। बच्चों को ए के साथ ही बी कॉपी भी सिलाई वाली दी जाएगी।


नकल माफिया पर अंकुश के लिए बदली व्यवस्था

बोर्ड की कॉपियां स्टेपल होने के कारण मुख्य पृष्ठ निकालकर दूसरी कॉपी से बदलना आसान होता था। नकल माफिया कमजोर या नकल के सहारे पास होने वाले परीक्षार्थियों से रुपये लेकर उनकी कॉपी मेधावी बच्चों की उत्तरपुस्तिकाओं से बदल देते थे। अधिकांश मामलों में तो मेधावी बच्चे या उनके अभिभावक चुप रह जाते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कुछ बच्चों ने हाईकोर्ट में मुकदमा कर दिया। कॉपी की अदला-बदली की बात साबित होने पर बोर्ड की भी खासी किरकिरी हुई। इसे देखते हुए बोर्ड ने दो साल पहले दस जिलों में सिलाई वाली कॉपी भेजने का प्रयोग शुरू किया था। क्योंकि सिलाई को खोला नहीं जा सकता और मुख्य पृष्ठ फाड़ने पर चोरी पकड़ी जाएगी।

NMMSE Tips : राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में हल करें सभी प्रश्न, क्योंकि नहीं है निगेटिव मार्किंग



NMMSE Tips : राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में हल करें सभी प्रश्न, क्योंकि नहीं है निगेटिव मार्किंग 


प्रयागराज । 13 नवंबर को प्रस्तावित राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना परीक्षा 2023-24 के लिए आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए मनोविज्ञानशाला की ओर से सोमवार को राजकीय इंटर कॉलेज में निशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

निदेशक मनोविज्ञानशाला ऊषा चंद्रा ने विद्यार्थियों से कहा कि परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग (ऋणात्मक अंकन) नहीं है इसलिए कोई सवाल छोड़ना समझदारी नहीं होगी।



मनोविज्ञान के प्रधानाध्यापक डॉ. कमलेश कुमार ने सामान्य मानसिक योग्यता परीक्षण के विभिन्न प्रारूपों जैसे वर्गीकरण, संबंध चिन्ह, परिवर्तन, श्रृंखला, सीक्वेंस कोष्ठक बंद की विधाओं से संबंधित प्रश्नों को हल करने के तरीके को बताया।

 प्रवक्ता राजकुमार राय, जयमेंद्र कुमार मौर्य, रिचा उपाध्याय, अनामिका सिंह ने प्रश्नों को हल करने के तरीके से अवगत कराया। स्वागत जीआईसी के उप प्रधानाचार्य डॉ. अब्दुल कादिर व धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य विरेंद्र कुमार सिंह ने दिया।

एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती पूरा होने की राह पर अब अधियाचन का अड़ंगा, जानिए पूरा मामला

एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती पूरा होने की राह पर अब अधियाचन का अड़ंगा, जानिए पूरा मामला



प्रदेश के 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी होने में और वक्त लगेगा। 17 अक्तूबर 2021 को आयोजित लिखित परीक्षा का परिणाम संशोधित हुए दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अधिकारी अभी रिक्त पदों की गड़बड़ी में ही उलझे हुए हैं।



 उप शिक्षा निदेशक (विज्ञान) दिनेश सिंह ने 40 जिलों के बीएसए को पत्र लिखकर नौ नवंबर को 11 बजे से शिक्षा निदेशालय में होने वाली बैठक में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इन 40 जिलों से बार-बार संपर्क करने के बावजूद अधियाचन (रिक्त पदों) से संबंधित विसंगतियों का निराकरण नहीं किया जा रहा है।



अधियाचन में गड़बड़ी

मथुरा, मैनपुरी, चित्रकूट, महोबा, बरेली, मऊ, फिरोजाबाद, बदायूं, अयोध्या, बाराबंकी, हरदोई, खीरी, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया, गोंडा, बलरामपुर, बहराईच श्रावस्ती, झांसी, मुरादाबाद, बिजनौर, संभल, अमरोहा, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशाम्बी, कानपुर देहात, मेरठ, हापुड़, सहारनपुर, शामली, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, आजमगढ़, बलिया और गौतमबुद्धनगर ।

Monday, November 7, 2022

स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थाओं में 15 नवंबर को मनाया जाएगा जनजातीय गौरव दिवस Janjatiya Gaurav Divas

स्कूलों,  कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थाओं में 15 नवंबर को मनाया जाएगा जनजातीय गौरव दिवस 
 Janjatiya Gaurav Divas



देश भर के स्कूलों एवं उच्च शैक्षणिक संस्थानों में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन किया जाएगा. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसकी घोषणा की है. ग़ौरतलब है कि सरकार ने पिछले वर्ष 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया था. जिसके बाद सभी शैक्षणिक संस्थानों में इसका आयोजन किया जाएगा.


इसे लेकर शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि, ’15 नवंबर बिरसा मुंडा की जन्मतिथि है. जिन्हें देश भर के जनजातीय समुदाय की ओर से भगवान के रूप में पूजा जाता है. बिरसा मुंडा एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और सम्माननीय आदिवासी नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की शोषण व्यवस्था के ख़िलाफ़ वीरता से लड़ाई की थी.’


ऐसे में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में शिक्षा मंत्रालय, एआईसीटीई, UGC, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर देश भर में जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन करेगा. इस मौक़े पर स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय नायकों के योगदान के विषय पर वाद विवाद प्रतियोगिता समेत कई अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

69000 शिक्षक भर्ती में निर्णायक मोड़ पर एक प्रश्न का विवाद, 9 नवंबर को फिर सुनवाई

69000 शिक्षक भर्ती में निर्णायक मोड़ पर एक प्रश्न का विवाद, 9 नवंबर को फिर सुनवाई 


परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 शिक्षक भर्ती में एक गलत प्रश्न का विवाद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। इस मामले में सरकार की ओर से दायर स्पेशल अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सात बार सुनवाई हो चुकी है और नौ नवंबर को फिर से तारीख लगी है।




सर्वोच्च न्यायालय ने तीन नवंबर को सुनवाई में सरकार से सात नवंबर तक इस आशय का शपथपत्र दाखिल करने को कहा है कि ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्त करने के लिए कितने रिक्त पदों की आवश्यकता होगी। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि उस दिन अंतिम फैसला आ सकता है।


ऐसा होने पर एक नंबर से पास होने वाले तकरीबन एक हजार अभ्यर्थियों को सरकारी टीचरी मिल सकती है। छह जनवरी 2019 को आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम से असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने छह प्रश्नों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इनमें एक प्रश्न ऐसा था जिसके चारों विकल्प गलत थे। हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2021 के अपने आदेश में पांच प्रश्नों पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। लेकिन उन अभ्यर्थियों का परिणाम घोषित करने के आदेश दिए थे।


जिन्होंने उस प्रश्न को हल करने की कोशिश की थी जिसके चारों विकल्प गलत थे। शर्त यह थी कि ऐसे अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका की हो और एक नंबर से फेल हो रहे हो।


इस प्रश्न को लेकर हुआ विवाद


69000 शिक्षक भर्ती के प्रश्नपत्र में बुकलेट संख्या ए के प्रश्न संख्या 60 में पूछा गया था-शैक्षिक प्रशासन उपयुक्त विद्यार्थियों को उपयुक्त शिक्षकों द्वारा समुचित शिक्षा प्राप्त करने योग्य बनाता है। जिससे वे उपलब्ध अधिक साधनों का उपयोग करके अपने प्रशिक्षण से सर्वोत्तम को प्राप्त करने में समर्थ हो सकें। यह परिभाषा दी गई है। इस प्रश्न के चारों विकल्प गलत थे। इसका सही जवाब ग्राहम बाल्फोर है। लेकिन चयन बोर्ड के विशेषज्ञों ने वेलफेयर ग्राह्य को सही मान लिया था।


पूछे गए इस प्रश्न को लेकर हुआ विवाद


69000 शिक्षक भर्ती के प्रश्नपत्र में बुकलेट संख्या ए के प्रश्न संख्या 60 में पूछा गया था-शैक्षिक प्रशासन उपयुक्त विद्यार्थियों को उपयुक्त शिक्षकों द्वारा समुचित शिक्षा प्राप्त करने योग्य बनाता है। जिससे वे उपलब्ध अधिक साधनों का उपयोग करके अपने प्रशिक्षण से सर्वोत्तम को प्राप्त करने में समर्थ हो सकें। यह परिभाषा दी गई है। इस प्रश्न के चारों विकल्प गलत थे। इसका सही जवाब ग्राहम बाल्फोर है। लेकिन चयन बोर्ड के विशेषज्ञों ने वेलफेयर ग्राह्य को सही मान लिया था

NMMS : छोटे जिलों के बच्चों ने देखा बड़ा सपना, केंद्र सरकार चार साल तक प्रतिमाह देती है एक हजार रुपए की छात्रवृत्ति

NMMS : छोटे जिलों के बच्चों ने देखा बड़ा सपना, केंद्र सरकार चार साल तक प्रतिमाह देती है एक हजार रुपए की छात्रवृत्ति


● छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए छोटे जिलों से सर्वाधिक आवेदन

● जौनपुर, सीतापुर और पीलीभीत के छात्र-छात्राएं सबसे आगे

● सरकारी स्कूलों के प्रदेशभर के 15,143 बच्चों को मिलती है छात्रवृत्ति

● केंद्र सरकार चार साल तक प्रतिमाह देती है एक हजार छात्रवृत्ति

● आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं बच्चे


उत्तर प्रदेश के छोटे जिलों के बच्चों ने बड़े सपने देखे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से दी जाने वाली राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति के लिए छोटे जिलों के सरकारी स्कूलों में कक्षा आठ में पढ़ने वाले बच्चों ने सर्वाधिक आवेदन किए हैं। 


आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण सरकारी स्कूलों के बच्चे 8वीं के बाद पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। इस योजना के तहत कक्षा नौ से 12 तक मिलने वाली प्रतिमाह एक हजार रुपये की छात्रवृत्ति इन बच्चों की पढ़ाई और सपनों को पूरा करने का सहारा बनेगी।


पूरे प्रदेश में 13 नवंबर को होने जा रही परीक्षा के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी को सबसे अधिक 6347 आवेदन जौनपुर से मिले हैं। सीतापुर से 5265, पीलीभीत 4802, वाराणसी 4511, अयोध्या 4218 व अम्बेडकरनगर से 4175 बच्चे छात्रवृत्ति परीक्षा देने जा रहे हैं। खास बात है कि इस बार छात्रवृत्ति के लिए रिकॉर्ड 1,67,545 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किए हैं।


पिछले साल केवल 38,837 बच्चों ने आवेदन किया था और उनमें से 6456 बच्चे ही छात्रवृत्ति परीक्षा में पास हो सके थे। यूपी के लिए निर्धारित 15143 सीटों में से आधे से अधिक 8687 खाली चली गई थी।


टॉप पांच जिले और सीटों का कोटा

जिला          आवेदन        सीटें
जौनपुर         6347         358
सीतापुर        5265          359
पीलीभीत      4802          160
वाराणसी       4511          269
अयोध्या        4218          208

DGSE का दावा : नए सत्र में परिषदीय स्कूलों में किताबें 15 मार्च तक पहुंच जाएंगी

DGSE का दावा : नए सत्र में परिषदीय स्कूलों में किताबें 15 मार्च तक पहुंच जाएंगी


प्रयागराज ।  यूपी के परिषदीय स्कूलों में पठन-पाठन को सुधारने की दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है। नए सत्र में 15 मार्च तक सभी परिषदीय स्कूलों में पाठ्य पुस्तकें, अभ्यास पुस्तिकाओं को पहुंचा दिया जाएगा। 


यह दावा स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने प्रयागराज में किया। उन्होंने बताया कि नए सत्र में प्रदेश भर में करीब 17 करोड़ किताबें बच्चों तक पहुंचाई जाएंगी। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया अभी ही पूरी कर ली गई है। यह भी कहा कि बच्चों को नई शिक्षा नीति के तहत एनसीईआरटी की पुस्तकें दी जाएंगी।



प्रयागराज में मंडलीय कार्यशाला में शामिल हुए स्‍कूल शिक्षा महानिदेशक 

प्रयागराज में निपुण भारत अभियान के तहत आयोजित मंडलीय कार्यशाला में शामिल होने आए स्कूल शिक्षा के महानिदेशक ने अनौपचारिक बातचीत में माना कि वर्तमान सत्र में अब तक सभी बच्चों को पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। इसकी वजह टेंडर में विलंब होने सहित कई अन्य तकनीकी कारण हैं।


बेसिक स्‍कूलों में तिमाही परीक्षाएं हो रहीं : स्‍कूल शिक्षा के महानिदेशक ने विश्वास दिलाया कि अगले सत्र में इस तरह की चूक नहीं होगी। वर्तमान सत्र के संदर्भ में बताया कि मंडलवार सभी बेसिक स्कूलों में तिमाही परीक्षाएं कराई जा रही हैं। 

प्रयागराज में नवंबर में यह परीक्षा सरल एप के माध्यम से कराई जाएगी। कहा कि परीक्षा के बाद प्रत्येक विद्यार्थी और अभिभावक तक रिपोर्ट कार्ड भी भेजा जाएगा।


बेसिक शिक्षा में रिक्‍त पद शीघ्र भरे जाएंगे : बेसिक शिक्षा में स्थायी निदेशक सहित जो भी अन्य पद रिक्त हैं वह शीघ्र भरे जाएंगे। यह भी कहा कि शासन का पूरा जोर शिक्षा के सुधार पर है। सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जाए। अध्यापन का स्तर सुधरे। इन सभी बातों को लेकर निपुण भारत अभियान चलाया जा रहा है। अध्यापकों को कई तरह के प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं।


जहां तक सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी में अधिकारियों की कमी की बात है तो वहां की परीक्षाएं दूसरे आयोग से होने जा रही हैं। ऐसे में पीएनपी का कार्य किताबों और डीएलएड परीक्षा कराने तक रह जाएगा। बेसिक शिक्षा में स्थाई निदेशक सहित जो भी अन्य पद रिक्त हैं वह शीघ्र भरे जाएंगे। यह भी कहा कि शासन का पूरा जोर शिक्षा के सुधार पर है। सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जाए। अध्यापन का स्तर सुधरे। इन सभी बातों को लेकर निपुण भारत अभियान चलाया जा रहा है। अध्यापकों को कई तरह के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं।

बीएड की पूल काउंसिलिंग में बुलाए 1.48 लाख अभ्यर्थी, रजिस्ट्रेशन आज से

बीएड की पूल काउंसिलिंग में बुलाए 1.48 लाख अभ्यर्थी, रजिस्ट्रेशन आज से

रुहेलखंड विश्वविद्यालय आज से शुरू कराने जा रहा है पूल काउंसिलिंग


बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को बीएड की पूल काउंसिलिंग शुरू होगी जो 12 नवंबर तक चलेगी। इसके बाद 13 नवंबर को सीटों का अलॉटमेंट कर दिया जाएगा। पूल उंसिलिंग के लिए 1.48 लाख अभ्यर्थियों को बुलाया गया है जो अपने अभिलेख अपलोड कर कॉलेजों का चयन करेंगे।


विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि पूल काउंसिलिंग में एक लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं। यदि यह संख्या विश्वविद्यालय की उम्मीदों के अनुरूप रही तो सीधी काउंसिलिंग में कम सीटें आ पाएंगी।


सीधी काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूल काउंसिलिंग के जरिये सीट अलॉटमेंट के तीन-चार दिन बाद शुरू होगी। हालांकि पिछले रिकॉर्ड के मुताबिक सीधी काउंसिलिंग के जरिये दाखिले लेने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 50 हजार से ज्यादा रही है। इस बार भी सीधी काउंसिलिंग में बचे हुए अभ्यर्थी शामिल होंगे। राज्य समन्वयक प्रो. पीबी सिंह का कहना है कि पूल काउंसलिंग में 1.48 लाख सीटें आवंटित की गई हैं।

Sunday, November 6, 2022

अब निजी विद्यालयों के छात्र भी बन सकेंगे NCC कैडेट, स्ववित्तपोषित योजना के तहत शुरू होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

अब निजी विद्यालयों के छात्र भी बन सकेंगे NCC कैडेट, स्ववित्तपोषित योजना के तहत शुरू होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम


लखनऊ। प्रदेश के निजी माध्यमिक विद्यालयों के छात्र भी अब एनसीसी कैडेट बन सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पहले चरण में विभिन्न जिलों के उन विद्यालयों से प्रस्ताव मांगे हैं, जिन्होंने अपने छात्रों के प्रशिक्षण की इच्छा जताई थी। हालांकि प्रशिक्षण का खर्च निजी विद्यालयों को ही वहन करना होगा। इसके लिए एनसीसी मुख्यालय ने बजट प्रस्तावित किया है। 



शासन के निर्देशानुसार निजी माध्यमिक विद्यालयों में स्ववित्तपोषित योजना के तहत एनसीसी प्रशिक्षण शुरू करने का निर्णय किया गया है। एनसीसी मुख्यालय व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद इसकी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। 


माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. सरिता तिवारी के अनुसार वर्तमान में राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में एनसीसी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब स्ववित्तपोषित योजना के तहत हर साल 10 फीसदी निजी विद्यालयों में एनसीसी प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है। 


इस बाबत सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि जो वित्तविहीन विद्यालय स्वयं के खर्च पर एनसीसी प्रशिक्षण शुरू करना चाहते हैं, उनके प्रबंधकों से सहमति ली जाए। इन विद्यालयों का ब्योरा भी मांगा गया है। वहीं मंडलों को ऐसे विद्यालयों की सूची भी भेजी गई है, जिन्होंने एनसीसी निदेशालय में पूर्व आवेदन किया था, वह अभी लंबित है।



100 छात्रों के प्रशिक्षण पर खर्च होंगे सालाना पौने दस लाख रुपये

स्ववित्तपोषित योजना के तहत निजी विद्यालयों को सौ छात्रों के प्रशिक्षण पर लगभग पौने दस लाख रुपये सालाना खर्च करना होगा। इनमें 100 सेट यूनिफॉर्म पर 1.90 लाख, नाश्ते पर 3.82 लाख, दस माह के लिए सेवानिवृत्त सैनिक की तैनाती पर एक लाख रुपये का प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त कैंप के दौरान एनसीसी कैडेट्स पर करीब डेढ़ लाख रुपये व अन्य खर्च भी होंगे। वहीं एनसीसी कैडेट्स को और एक सेट यूनिफॉर्म की जरूरत होगी। पर, प्रस्तावित बजट में इसका खर्च नहीं जोड़ा गया है। एक सेवानिवृत्त सैनिक दो विद्यालयों के छात्रों को प्रशिक्षण देंगे। इस हिसाब से उन पर सालना दो लाख रुपये खर्च होंगे।

CBSE 10, 12 Board Exams 2023: क्या इस महीने जारी होगी CBSE बोर्ड 10वीं-12वीं की डेटशीट?

CBSE 10, 12 Board Exams 2023: क्या इस महीने जारी होगी CBSE बोर्ड 10वीं-12वीं की डेटशीट?

CBSE 10, 12 Board Exams 2023: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेंकडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा 2023 की डेटशीट जल्द जारी होने की उम्मीद है। कथित तौर पर, सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2023 डेट शीट संबंधित अधिकारियों द्वारा नवंबर 2022 के आखिरी सप्ताह में जारी की जाएगी। एक बार जारी होने के बाद, उम्मीदवार सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in से डेटशीट डाउनलोड और चेक कर सकते हैं।


सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2023 डेटशीट में परीक्षा की तारीख, समय, कोर्स, सब्जेक्ट कोड और बहुत कुछ सहित सभी महत्वपूर्ण डिटेल्स होगी।

CBSE Board:10वीं और 12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षा एक जनवरी से

सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं के 2022-23 सत्र के लिए प्रैक्टिकल परीक्षा, प्रोजेक्ट वर्क और आंतरिक मूल्यांकन कार्य एक जनवरी से शुरू होंगे। सीबीएसई की ओर से स्कूलों को इस संबंध में पत्र भेज दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि एक जनवरी से परीक्षा होनी है, जिसके लिए स्कूलों को तैयारी पूरी जल्द करनी है।

बता दें, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या सीबीएसई 15 फरवरी से कक्षा 10 और कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा आयोजित करेगा। अगले साल 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा को दो टर्म में नहीं बल्कि सिर्फ एक फाइनल परी्क्षा में बांटा जाएगा। बोर्ड ने सिलेबस में भी बदलाव किया है। करीब दो साल तक कम सिलेबस पर 10वीं और 12वीं की परीक्षा आयोजित करने के बाद सीबीएसई 100 फीसदी सिलेबस पर वापस जाएगा।

Saturday, November 5, 2022

उच्च शिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन की कसी जाएगी कसौटी

उच्च शिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन की कसी जाएगी कसौटी



नई दिल्ली  : शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षण संस्थानों की मान्यता एवं उनके मूल्यांकन की कसौटी को कसने की तैयारी की है। इसके लिए उच्च-स्तरीय पैनल गठित किया गया है। पैनल की अध्यक्षता आइआइटी कानपुर के बोर्ड आफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन डा. के. राधाकृष्णन करेंगे। वह आइआइटी काउंसिल की स्टैंडिंग कमेटी के भी चेयरपर्सन हैं। 


मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कमेटी मूल्यांकन एवं मान्यता की प्रक्रिया को मजबूत करने तथा राष्ट्रीय मान्यता परिषद की स्थापना का रोडमैप तैयार करने पर राय देगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में एनएसी के गठन की बात कही गई है। 


अधिकारी ने कहा कि मान्यता की प्रक्रिया उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में अहम भूमिका निभाती है। इससे संस्थानों को अपनी कमजोरी और ताकत को जानने का मौका मिलता है। यही नहीं, मान्यता के स्तर से छात्रों, कर्मियों व अन्य को किसी उच्च शिक्षण संस्थान में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भरोसेमंद जानकारी भी मिलती है।


 पैनल के अन्य सदस्यों में असम के महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव विश्वविद्यालय के कुलपति मृदुल हजारिका, आइआइएम लखनऊ के प्रोफेसर भारत भास्कर व शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शामिल होंगे।

पहल: डीम्ड विश्वविद्यालयों में सुधार का मसौदा तैयार

पहल: डीम्ड विश्वविद्यालयों में सुधार का मसौदा तैयार



नई दिल्ली  | देश के डीम्ड विश्वविद्यालयों में सुधार प्रक्रिया के तहत यूजीसी (इंस्टीट्यूट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) नियमन 2022 का मसौदा जारी कर दिया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने शुक्रवार को इस पर विभिन्न पक्षकारों से सुझाव मांगे हैं। यूजीसी चेयरमैन जगदीश कुमार ने बताया कि 18 नवंबर तक सुझाव भेजे जा सकते हैं।

यूजीसी के नोटिस में कहा गया है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद से देश में उच्च शिक्षा महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे में यूजीसी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (इंस्टीट्यूट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) नियमन 2019 में बदलाव किए हैं। इसे विशेषज्ञ समिति की मदद से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बनाया गया है । 


मसौदा यूजीसी ( इंस्टीट्यूट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) विनियम, 2022 की कुछ विशेषताओं में डीम्ड विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ तालमेल बनाना, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के समान शासन संरचना स्थापित करना शामिल है।

मुख्यमंत्री योगी बांटेंगे चयनित GIC शिक्षकों को नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री योगी बांटेंगे चयनित GIC शिक्षकों को नियुक्ति पत्र


प्रयागराज  : राजकीय इंटर कालेजों (जीआइसी) के लिए चयनित किए। 1395 प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों को मुख्यमंत्री नियुक्त पत्र बांटेंगे, लेकिन इसकी तिथि अब तक तय नहीं हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय से समय मिलने के बाद अभ्यर्थियों को सूचित करेंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इससे जुड़ी तैयारी कर ली है। इन अभ्यर्थियों को 30 अक्टूबर तक नियुक्ति पत्र आनलाइन जारी करने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री के हाथों वितरण का निर्देश मिलने के बाद उसे स्थगित कर दिया गया।


उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से जीआइसी में 16 विषयों के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जून में पूरी कर ली गई थी। चयनितों में 1272 प्रवक्ता और 123 सहायक अध्यापक हैं। इन सभी के प्रमाणपत्रों की जांच जुलाई में की गई थी। चयनितों को कालेज आवंटन होना था । कालेज आवंटन से पहले रिक्त पदों का सत्यापन कराया गया। लेकिन इसमें पारदर्शिता लाने के लिए आवंटन आनलाइन कराने का फैसला लिया गया । 


माध्यमिक शिक्षा निदेशक के निर्देश पर चयनित शिक्षकों से 10 से 20 अक्टूबर तक कालेज का विकल्प भरवाया गया। उसके बाद मेरिट के अनुसार 30 अक्टूबर तक आनलाइन नियुक्ति पत्र जारी करना था । इस तिथि तक नियुक्ति पत्र जारी न होने से शिक्षकों में नाराजकी है। वहीं अफसरों ने बताया कि शिक्षकों को मुख्यमंत्री नियुक्ति पत्र बांटेंगे। इसलिए नियुक्ति पत्र आनलाइन जारी नहीं किया है। आसार है कि अगले कुछ दिनों में चयनितों को नियुक्ति पत्र बांट दिया जाएगा।

शिक्षा विभाग की दूसरी संशोधित सूची में भी दूर नहीं हुईं बाबुओं के तबादलों की गड़बड़ियां

शिक्षा विभाग की दूसरी संशोधित सूची में भी दूर नहीं हुईं बाबुओं के तबादलों की गड़बड़ियां



केस - 1

मंडलीय कार्यालय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) बरेली में कार्यरत उर्दू अनुवादक/सह वरिष्ठ लिपिक असलम अंसारी का तबादला 28 जून को मंडलीय उप शिक्षा निदेशक (मा.) बरेली दफ्तर में किया गया था। 5 जुलाई को जब नए तैनाती कार्यालय में पहुंचे तो वहां पद सृजित न होने के कारण कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया। तब से वे बिना वेतन हैं और शिकायतें करते जा रहे हैं लेकिन कुछ नहीं हो रहा।


केस - 2

डीआईओएस कार्यालय अलीगढ़ में तैनात रहे राजेंद्र कुमार भटनागर की सेवानिवृत्ति सात महीने बाद जुलाई 2023 में होनी है। उनका तबादला शासनादेश की व्यवस्था के विपरीत 65 किलोमीटर दूर रेवती गोयल राजकीय इंटर कॉलेज जट्टारी अलीगढ़ में कर दिया गया था। नियमों व पत्नी की बीमारी का हवाला देकर निवेदन के बावजूद उनके तबादले में संशोधन नहीं किया गया।


केस - 3

वरिष्ठ सहायक अनिल गुप्ता का तबादला संशोधित करके जिला विद्यालय निरीक्षक गाजीपुर कार्यालय से राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गहमर किया गया है, जबकि वहां पर पहले से ही अरविंद श्रीवास्तव वरिष्ठ सहायक पद पर कार्यरत हैं। 


केस-4

बीएसए कार्यालय बलिया में तैनात ब्रजेश सिंह का तबादला जीजीआईसी में किया गया था जबकि जीआईसी में होना चाहिए था। वह इस संशोधन के लिए परेशान हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।



शिक्षा विभाग में समूह ग कर्मियों के तबादलों में हुईं गड़बड़ियां सुधारने की प्रक्रिया पर रार दूर नहीं हो रही है। दो-दो बार जांच करके करीब सवा सौ से अधिक तबादलों में संशोधन हो चुके हैं। दो अधिकारियों व कई बाबुओं पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन गड़बड़ियां की शिकायतें दूर नहीं हो रहीं। सेवानिवृत्त व दिव्यांग कर्मचारी भी शासनादेश के विरुद्ध हुए तबादले निरस्त कराने की गुहार लगा रहे हैं।


ऐसे प्रकरणों का खुलासा बीती 4 नवंबर को दूसरी संशोधित तबादलों की सूची जारी होने के बाद हुआ। यूपी एजुकेशनल मिनिस्टीरियल ऑफीसर्स एसोसिएशन केप्रांतीय महामंत्री राजेश चंद्र श्रीवास्तव के अनुसार ये स्थिति सिर्फ विभाग की मनमानी के कारण है।


जुलाई से तबादलों की गड़बड़ियां चिह्नित करके शिकायती पत्र दिए गए हैं। खुद विभाग के मंडलीय अधिकारियों ने कमियां आगे बढ़ाई हैं, लेकिन उनकी जांच नहीं हो रही। आश्वासन के बावजूद एसोसिएशन से कभी इन गड़बड़ियों पर चर्चा तक नहीं की गई। ये गलतियां सुधारने में भी अधिकारी मनमानी कर रहे हैं।


कई आपत्तियां अनुचित, कई पर मांगा है जवाब : अनिल भूषण
अपर शिक्षा निदेशक बेसिक अनिल भूषण चतुर्वेदी का कहना है कि तबादलों की गड़बड़ियां बहुत गहनता से परीक्षण के बाद दूर की गई हैं। बरेली जैसा कोई केस बचा है तो इसकी समय से सूचना नहीं मिली। इसके लिए मंडलीय अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। बाकी आपत्तियां जबरन की जा रही हैं।  पद रिक्त न होने की जो बात सामने आ रही है, वहां डीआईओएस की रिपोर्ट पर तबादला किया गया है।




शिक्षा विभाग में 33 लिपिकों के तबादले संशोधित 


आशुलिपिक का तबादला राज्य ब्यूरो, प्रयागराज बेसिक और माध्यमिक शिक्षा : विभाग के कार्यालयों और स्कूलों में तैनात 33 लिपिक संवर्ग और आशुलिपिक संवर्ग के कर्मियों को तबादला किया गया है। बाराबंकी के डायट में तैनात वरिष्ठ सहायक पाटेश्वरी प्रसाद बाजपेयी का तबादला रद कर दिया गया है। 


दरअसल जून में 1045 कर्मियों का तबादला किया गया था। एक ही दफ्तर में पांच वर्ष या इससे अधिक समय तक तैनात रहे कर्मियों का तबादला किया गया था। 34 कर्मियों के तबादले ऐसे कार्यालयों में किए थे, जहां उनके संवर्ग के पद ही नहीं थे। इसलिए अब रिक्त पदों के अनुसार उनके तबादले किए गए हैं।

 अपर शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने कहा कि जिन कर्मियों का तबादला हुआ है, वह तत्काल अपने नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। कार्यभार ग्रहण न करने पर अनुशासनिक कार्यवाही की जाएगी।



लखनऊ। माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के समूह ग के गड़बड़ तबादलों की दूसरी संशोधित सूची को शासन ने हरी झंडी दे दी है। करीब एक महीने परीक्षण के बाद शासन ने प्रस्तावित 33 में से 29 तबादलों को दुरुस्त करने का फैसला किया है। इनके अलावा पांच अन्य लिपिकों के तबादले जनहित का तर्क देकर किए गए हैं। प्रस्तावित संशोधन व नए तबादलों का आदेश शासन ने अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी को भेज दिया है।


जो पांच तबादले जनहित के आधार पर किए गए हैं उनमें देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव का महाराजगंज से डीआईओएस कार्यालय गोरखपुर तबादला एक सांसद व विधायक के अनुरोध पर किया गया है। दूसरे अशोक कुमार राव का जीआईसी सेवरही कुशीनगर से बीएसए कार्यालय कुशीनगर में अनुरोध व चिकित्सकीय आधार पर हुआ है। तीसरा बीएसए कार्यालय बरेली में तैनात ज्योति अग्रवाल का तबादला वहां पद रिक्त न होने से मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय बरेली किया गया है। अन्य दो में बीएसए कार्यालय मैनपुरी में तैनात कौशलेंद्र मिश्र और जीआईसी अमरोहा में तैनात चश्मुद्दीन खां का तबादला शिकायत पर किसी अन्य जिले में रिक्त पद पर करने का आदेश हुआ है।


इस तरह कौशलेंद्र को डीआईओएस कार्यालय फिरोजाबाद व चश्मुद्दीन खां को जीआईसी कैमरी रामपुर स्थानांतरित किया गया है। अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने शासन से मिले अनुमोदन के बाद 34 तबादलों की सूची जारी कर दी है। वहीं बाराबंकी के जीआईसी सिरौली गौसपुर में किया गया पाटेश्वरी प्रसाद वाजपेयी और जीजीआईसी मलिहाबाद में हुआ रामचंद्र प्रजापति का तबादला निरस्त किया गया है।

Friday, November 4, 2022

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को ही मदरसों के निरीक्षण का अधिकार, मदरसा बोर्ड के चेयरमैन बोले, शिक्षा विभाग के अधिकारी मदरसों में न दें दखल

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को ही मदरसों के निरीक्षण का अधिकार, मदरसा बोर्ड के चेयरमैन बोले, शिक्षा विभाग के अधिकारी मदरसों में न दें दखल



लखनऊ। मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मदरसों का निरीक्षण करने और उन्हें नोटिस जारी करने को अधिनियम के विपरीत बताते हुये नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मदरसों के निरीक्षण का अधिकार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को है।


 शिक्षा विभाग के दखल से मदरसों में असहजता की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने मदरसा विनियमावली के नियमों का अनुपालन कराने के लिये सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भिजवाया है।


डॉ. इफ्तिखार ने कहा कि अक्सर संज्ञान में आ रहा है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी मदरसों का निरीक्षण करने के साथ नोटिस भी दे रहे हैं जो मदरसा अधिनियम के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि 1995 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के गठन के बाद मदरसों का समस्त कार्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम 2004 प्रतिस्थापित किया गया। जिसके माध्यम से उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियमावली 2016 बनाई गई। 


अधिनियम और विनियमावली के तहत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अलावा किसी भी विभाग के अधिकारी द्वारा न तो निरीक्षण किया जाएगा और न ही किसी प्रकार की नोटिस दी जा सकती है।

बच्चों की आत्महत्या के लिए अकेले स्कूल जिम्मेदार नहीं, बेहतर माहौल दें माता-पिता, मद्रास हाईकोर्ट का फैसला

बच्चों की आत्महत्या के लिए अकेले स्कूल जिम्मेदार नहीं, बेहतर माहौल दें माता-पिता, मद्रास हाईकोर्ट का फैसला

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, शिक्षकों के खिलाफ आरोप के साक्ष्य जुटाना जरूरी


चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों की आत्महत्या के लिए अकेले स्कूल, शिक्षक या हेडमास्टर जिम्मेदार नहीं ठहराए जाने चाहिए। अभिभावक भी इसके लिए बराबर जिम्मेदार हैं और उन्हें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।


जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, देशभर में बच्चों की आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह घर के भीतर और बाहर बच्चों के लिए अच्छा माहौल बनाएं।


शिक्षकों व हेडमास्टर को सिर्फ तब कसूरवार ठहराया जा सकता है, जब इस बात के साक्ष्य मिलें कि उन्होंने स्कूली शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन किया है या कोई अपराध किया हो। पीठ ने बेटे की आत्महत्या पर 10 लाख रुपये का हर्जाना और स्कूल के हेडमास्टर पर उचित कार्रवाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता का 17 वर्षीय बेटा युवराज सरकारी स्कूल में कक्षा 12 का छात्र था।


यह है मामला : याचिकाकर्ता ने अरोप लगाया कि हेडमास्टर सबके सामने लड़कों के बाल काटते थे, ब्लेड से उनकी पैंट फाड़ देते और बच्चों को बेरहमी से पीटते थे। लगातार इस व्यवहार के कारण उनके बेटे ने अगस्त 2017 में खुदकुशी कर ली थी।

सुधार की होड़ बढ़ी तो बदलने लगी स्कूलों की सूरत, राज्यों में सुधार की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी

सुधार की होड़ बढ़ी तो बदलने लगी स्कूलों की सूरत, राज्यों में सुधार की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी


नई शिक्षा नीति में देश की स्कूली शिक्षा की जैसी कल्पना की गई है, उसकी तरफ राज्य बढ़ते नजर आ रहे हैं। राज्यों में शिक्षा की तस्वीर के मूल्यांकन को लेकर शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट कई सकारात्मक संकेत देने वाली है। राज्यों में सुधार की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है और वे जरूरी सुविधाओं और संसाधनों की निगरानी भी कर रहे हैं। शिक्षक छात्र अनुपात भी बेहतर हो रहा है। और शिक्षा के स्तर को लेकर राज्यों के बीच अंतर कम हो रहा है।


राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा पर शिक्षा मंत्रालय ने परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स' (पीजीआइ) नाम से रपट जारी की है। इससे पता चलता है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से लेकर ड्रापआउट पर अंकुश लगाने तक राज्यों में नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को पूरा करने की होड़ है। 


शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने यानी विद्यार्थियों के पंजीकरण, उन्हें स्कूल में बनाए रखने और ऊंची कक्षाओं तक उनके पहुंचने के मामले में बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात, झारखंड और दिल्ली ने पिछले साल के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है। 


असम, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब और सिक्किम ने पिछले साल का स्तर बनाए रखा है, जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों का प्रदर्शन गिरा है। जहां तक स्कूलों में बुनियादी ढांचा और सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात है तो दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु और पुडुचेरी समेत केवल चार राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सभी ने पिछले साल के मुकाबले सुधार दिखाया है। तीसरे लेवल में वे राज्य हैं जिन्होंने एक हजार में से 851 से 900 तक अंक प्राप्त किए हैं। स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, सफाई, बिजली, कंप्यूटर, इंटरनेट, पुस्तकालय और खेल से संबंधित सुविधाओं में कई राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।


घट रही असमानता

रिपोर्ट का एक अन्य उल्लेखनीय पहलू यह है कि राज्यों में स्कूली शिक्षा के ढांचे में असमानता का पहले जो स्तर होता था, वह अब घट रहा है। 2021-22 के सत्र में सबसे अधिक अंक (928) पाने वाले राज्य व सबसे कम अंक (669) पाने वाले राज्य के बीच 259 अंकों या 33% का फासला है। 2017-18 के सत्र में यह अंतर 51 प्रतिशत था।


अगले साल बदलेंगे संकेतक

शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग ने अब तक तीन पीजीआइ रिपोर्ट जारी की हैं। यह समग्र रूप से एक हजार अंकों के पूर्णांक पर राज्यों की ग्रेडिंग करती है। इसमें कुल 70 संकेतकों का सहारा लिया गया है, जिन्हें दो ग्रुपों में रखा गया है-प्रदर्शन और प्रशासन प्रबंधन । शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह अगले साल से राज्यों के आकलन के लिए डिजिटल एजुकेशन समेत कुछ नए संकेतक शामिल करेगा। ग्रेडिंग के कुल अंक एक हजार ही रहेंगे।



PGI रेटिंग : शिक्षा मंत्रालय के प्रदर्शन सूचकांक में सात राज्य सर्वश्रेष्ठ,  उत्तर प्रदेश स्तर-3 में

केरल, महाराष्ट्र और पंजाब ने शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में किया शीर्ष स्थान हासिल, कोई भी राज्य उच्चतम स्तर को हासिल नहीं कर पाया


केरल, महाराष्ट्र और पंजाब ने शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, जिला स्तर पर स्कूली शिक्षा का आकलन करने वाले प्रदर्शन ग्रेड इंडेक्स 2020-21 में शीर्ष स्थान हासिल किया है। छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने मंत्रालय के प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2020-21 में स्तर 2 (L2) की सर्वश्रेष्ठ रेटिंग प्राप्त की है, जो स्कूली शिक्षा प्रणाली के साक्ष्य-आधारित व्यापक विश्लेषण के लिए एक अद्वितीय सूचकांक है। हालांकि, कोई भी राज्य अब तक एल1 के उच्चतम स्तर को हासिल नहीं कर पाया है।


केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक (पीजीआई) 2020-21 में छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने स्तर-2 (एल-2) की सर्वश्रेष्ठ रेटिंग प्राप्त की है, जो स्कूली शिक्षा प्रणाली के साक्ष्य-आधारित व्यापक विश्लेषण के लिए अद्वितीय सूचकांक है। इसमें बताया गया कि कोई भी राज्य हालांकि अब तक एल-1 का सर्वश्रेष्ठ स्तर हासिल नहीं कर पाया।


 


सात राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जिन्होंने 2020-21 में एल-2 हासिल किया है, वे केरल, पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश हैं। गुजरात, राजस्थान और आंध्रप्रदेश एल-2 स्तर पर पहुंचने वाले नए राज्य हैं।


नवगठित केंद्र शासित प्रदेश, लद्दाख ने 2020-21 में पीजीआई के सन्दर्भ में स्तर-8 से स्तर-4 हासिल करके अपने प्रदर्शन में महत्वपूर्ण सुधार किया है, अर्थात 2019-20 की तुलना में 2020-21 में उसने अपने अंकों में 299 अंकों का सुधार किया है, जो एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक सुधार है। 


पीजीआई संरचना में 70 संकेतकों के साथ 1000 अंक शामिल किए गए हैं, जिन्हें 2 श्रेणियों- परिणाम और शासन प्रबंधन (जीएम)- में बांटा गया है। इन श्रेणियों को आगे पांच उप-श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जो सीखने के परिणाम (एलओ), पहुंच (ए), अवसंरचना और सुविधाएं (आईएफ), समानता (ई) और शासन प्रक्रिया (जीपी) हैं। पिछले वर्षों की तरह पीजीआई 2020-21 ने राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को दस श्रेणियों में वर्गीकृत किया है।


उत्तर प्रदेश स्तर-3 में


उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, और दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव ने 851 और 900 के बीच स्कोर के साथ स्तर-3 हासिल किया

पिछले आठ साल में खुले हर दस स्कूलों में सात निजी, यूनेस्को की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

पिछले आठ साल में खुले हर दस स्कूलों में सात निजी, यूनेस्को की रिपोर्ट में हुआ खुलासा


यूनेस्को द्वारा जारी ‘ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट-2022’ के अनुसार भारत में पिछले आठ साल में नए खुले प्रत्येक 10 स्कूलों में से 7 निजी हैं। भारत में 2014 के बाद से स्थापित 97,000 स्कूलों में से करीब 67,000 निजी और गैर सरकारी सहायता प्राप्त हैं।




रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 30 साल में दक्षिण एशिया ने दुनिया के बाकी हिस्सों को पीछे छोड़ते हुए शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार किया है। सरकारी स्कूलों में सुविधा, शिक्षा और गुणवत्ता की कमी ने भारत में निजी शिक्षा को बढ़ावा दिया है। यूनेस्को के सर्वे में शामिल केवल 46 वयस्कों ने कहा कि स्कूली शिक्षा प्रदान करने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार के पास है, 35 मध्यम और उच्च आय वाले देशों में यह सबसे कम है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सरकारी सहायता के बिना खुले स्कूलों के माध्यम से शिक्षा असमानता को बढ़ावा देगी।


रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान में लगभग एक तिहाई छात्र और नेपाल में एक चौथाई छात्र निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। भारत के आठ शहरों में कम आय वाले परिवारों के 4,400 माता-पिता की प्राथमिकताओं के विश्लेषण में पाया गया कि 86 से अधिक बच्चे निजी स्कूल में नामांकित थे या कक्षा एक से निजी स्कूल में जाएंगे। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में दाखिला अभिभावकों की पहली पसंद है।



प्राथमिक स्तर पर औसत फीस 500 से 1500 तक

यूनेस्को की ओर से देश के पांच राज्यों, आंध्र प्रदेश, असम, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना में 1,052 मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों के बीच सर्वे किया गया था। सर्वे के अनुसार, अधिकांश सस्ते निजी स्कूल 2000 के दशक की शुरुआत में स्थापित हुए थे। स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा के लिए औसत मासिक शुल्क जम्मू-कश्मीर में 500 रुपए, हरियाणा में 750 रुपए, आंध्र प्रदेश में 900 रुपए और तेलंगाना में 1500 रुपए था।

पीएमश्री स्कूलों के लिए पोर्टल लॉन्च, राज्य सरकारें कर सकेंगी आवेदन

पीएमश्री स्कूलों के लिए पोर्टल लॉन्च, राज्य सरकारें कर सकेंगी आवेदन

 

नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कार्यान्वयन प्रारंभ हो गया है। शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पीएमश्री (प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया) स्कूलों के चयन के लिए गुरुवार को पोर्टल लॉन्च किया।



pmshree.education.gov.in में सभी राज्य सरकारें आवेदन कर सकेंगी। इस योजना में प्रत्येक ब्लॉक से दो-दो सरकारी स्कूल आवेदन कर सकेंगे। सरकार की तरफ से कुछ मानक रखे गए हैं। जिन पर स्कूलों का चयन किया जाएगा।



स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) की वेबसाइट के अनुसार, पीएम श्री स्कूल भारत सरकार द्वारा एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इस पहल का उद्देश्य केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) सहित केंद्र सरकार/राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार/स्थानीय निकायों द्वारा प्रबंधित 14,500 पीएम श्री स्कूलों को विकसित करना है, जिसमें प्रत्येक छात्रों की शिक्षा व्यवस्था की देखभाल की जानी है।

Thursday, November 3, 2022

अब प्रधानाचार्य छात्रों को बताएंगे नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्स की महत्ता

अब प्रधानाचार्य छात्रों को बताएंगे नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्स की महत्ता


लखनऊ। प्रदेश में नर्सिंग व पैरामेडिकल कोर्स के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए नई रणनीति अपनाई गई है। इसके तहत हर जिले के चार प्रधानाचार्य को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जा रहा है।


ये अपने जिलों के विद्यालयों में जाकर 11वीं व 12वीं के विद्यार्थियों को नर्सिंग व पैरामेडिकल कोर्स की महत्ता और देश-विदेश में रोजगार की संभावनाओं के बारे में बताएंगे। 


प्रदेश में मिशन निरामयाः के तहत नर्सिंग व पैरामेडिकल क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। बुधवार को 75 जिलों से आए 300 प्रधानाचार्यों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।

Wednesday, November 2, 2022

सबसे ज्यादा आंगनबाड़ी केन्द्रों को नल कनेक्शन से जोड़ने वाला प्रदेश बना उत्तर प्रदेश

सबसे ज्यादा आंगनबाड़ी केन्द्रों को नल कनेक्शन से जोड़ने वाला प्रदेश बना उत्तर प्रदेश 


उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या 172946 है, जो देश में सबसे अधिक है। जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यूपी ने आंगनबाड़ी केंद्रों को नल कनेक्शन देने का 84.98 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है।


उप्र सबसे ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों को नल कनेक्शन देने वाला राज्य बन गया है। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने प्रदेश की 146968 आंगनबाड़ी केन्द्रों को टैप कनेक्शनों से जोड़ दिया है। 25978 आंगनबाड़ी केन्द्रों में नल कनेक्शन देने का काम तेज गति से पूरा किया जा रहा है।


उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या 172946 है, जो देश में सबसे अधिक है। जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यूपी ने आंगनबाड़ी केंद्रों को नल कनेक्शन देने का 84.98 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। बिहार में 96979, महाराष्ट्र में 91267, पश्चिम बंगाल में 91046 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। बाकी राज्यों में आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या इन सभी राज्यों से भी बहुत कम है।


ऐसे में नल कनेक्शन देने के काम को पूरा करने के लिए विभाग पूरी ताकत से जुटा है। बता दें कि देश भर में 11,16,540 आंगनबाड़ियों में नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाना है। वर्तमान में 9,01,051 आंगनबाड़ियों में नल के कनेक्शन  लगा दिए गए हैं।


सरकार की मंशा यह है कि बच्चों को भी शुद्घ पेयजल मिले। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते विभाग की योजना आंगनबाड़ी केन्द्रों को नल कनेक्शन से शुद्ध पेयजल की सुविधा प्रदान कर रही है।  सरकार की मंशा गांव, गरीब, किसान के साथ-साथ एक आंगनबाड़ी केन्द्रों में नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा देना है। - स्वतंत्र देव सिंह, जल शक्ति मंत्री, उत्तर प्रदेश


यूपी में छह लाख बच्चों ने छोड़ दी 10वीं की पढ़ाई, 2023 की बोर्ड परीक्षा के लिए भरे गए फार्म से साफ हुई तस्वीर

यूपी में छह लाख बच्चों ने छोड़ दी 10वीं की पढ़ाई, 2023 की बोर्ड परीक्षा के लिए भरे गए फार्म से साफ हुई तस्वीर

पिछले साल कक्षा 9 में पंजीकृत छात्रों से कम हैं 10वीं के छात्र


प्रयागराज । उत्तर प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2022-23 में छह लाख से अधिक बच्चों ने 10वीं की पढ़ाई छोड़ दी। 2023 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए भरे गए फार्म पर गौर करने से तस्वीर साफ हो जाती है। कक्षा नौ में पंजीकृत और पिछले साल की बोर्ड परीक्षा में 10वीं में फेल हुए और परीक्षा छोड़ने वाले छात्रों को मिलाकर 2023 में होने वाली 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 37.37 लाख से अधिक परीक्षार्थी होने चाहिए थे लेकिन फार्म भरा है 31.16 लाख ने। 6,20,747 छात्र कम हैं। 



पिछले साल कक्षा नौ में 31,78,305 छात्र - छात्राओं ने प्रवेश लिया था जिन्हें पास होकर इस बार हाईस्कूल में पंजीकरण कराना था। जबकि 2022 की हाईस्कूल में 5,58,900 लाख परीक्षार्थी या तो फेल हो गए थे या फिर परीक्षा छोड़ दी थी। कक्षा नौ के लिए पंजीकृत बच्चों और 2022 की हाईस्कूल परीक्षा में फेल और परीक्षा छोड़ने वाले विद्यार्थियों को जोड़ने पर 2023 की बोर्ड परीक्षा के लिए हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की संख्या 37,37,205 होनी चाहिए। 2023 की हाईस्कूल परीक्षा के लिए 31,16,458 बच्चों ने ही फार्म भरा है।


10वीं में बच्चे कम होने से पढ़ाई छोड़ने के साथ ही कक्षा नौ में बच्चों का फेल भी हो सकती है लेकिन जानकारों का मानना है कि कक्षा नौ की गृह परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का फेल होना संभव नहीं है।


अफसरों के पास समाधान नहीं सड़क पर छह हजार बेरोजगार, विवाद होने पर 24 जिलों के अभ्यर्थियों की नियुक्ति फंसी, नहीं खोज सके हल

अफसरों के पास समाधान नहीं सड़क पर छह हजार बेरोजगार, विवाद होने पर 24 जिलों के अभ्यर्थियों की नियुक्ति फंसी, नहीं खोज सके हल

15 दिसंबर 2016 को शुरू हुई भर्ती में 24 जिलों में शून्य पद थे

साढ़े चार साल से चले आ रहे विवाद का नहीं निकला समाधान



12460 बेसिक शिक्षक भर्ती : अफसरों की नाकामी से छह हजार बेरोजगार सड़क की खा रहें ठोकरें, जानिए पूरा मामला



अफसरों की नाकामी के कारण छह हजार बेरोजगार सड़क की ठोकरें खा रहे हैं। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 12460 सहायक अध्यापक भर्ती में शून्य जनपद के विवाद का समाधान अफसर नहीं खोज पा रहे जिसके कारण छह हजार युवाओं की नियुक्ति फंसी हुई है। 


सात मई को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा था कि इस भर्ती की समस्या का समाधान खोजने के लिए सरकार गंभीर है। इस पर कोर्ट ने 26 मई की अगली तारीख लगाते हुए समस्या का समाधान प्रस्तुत करने की उम्मीद जताई थी। लेकिन आज तक कुछ हल नहीं निकल सका।


क्या है समस्या

प्राथमिक स्कूलों में 12460 शिक्षक भर्ती 15 दिसंबर 2016 को शुरू हुई थी। इसमें प्रदेश के 75 में से 24 जिलों में एक भी पद रिक्त नहीं था। इन 24 जिलों के अभ्यर्थियों को किसी भी एक अन्य जनपद में आवेदन करने की छूट थी। हालांकि जिन 51 जिलों में रिक्त पद थे वहां से बीटीसी करने वाले अभ्यर्थियों ने यह कहते हुए कोर्ट में याचिका कर दी कि भर्ती में उनको प्राथमिकता मिलनी चाहिए भले ही शून्य 24 जनपद के अभ्यर्थियों की मेरिट अधिक क्यों न हो। उस समय भर्ती जिला स्तरीय मेरिट के आधार पर होती थी। तब से इसका समाधान नहीं मिल सका है।


एक मई 2018 को 6512 को मिला नियुक्ति पत्र

16 मार्च 2017 को पहली काउंसिलिंग हुई, लेकिन इस बीच सरकार बदलने के बाद नई सरकार ने समीक्षा के नाम पर 23 मार्च 2017 को भर्ती पर रोक लगा दी। 16 अप्रैल 2018 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती शुरू करने की अनुमति दी। 23 अप्रैल 2018 को फिर से सभी चयनित अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग कराई गई। लेकिन 18 अप्रैल 2018 को हाईकोर्ट ने 24 शून्य जनपद के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने पर रोक लगा दी। एक मई 2018 को मुख्यमंत्री ने 51 जिले के लगभग 6512 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दे दिया। बचे हुए 5948 पद आज तक नहीं भरे जा सके हैं।


साढ़े चार साल से चला आ रहा विवाद

इस भर्ती का विवाद पिछले चार साल से चला आ रहा है। आजमगढ़ के सौरभ शर्मा समेत अन्य अभ्यर्थियों को शिकायत है कि सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के कारण भर्ती फंसी हुई है। अब तक दो दर्जन से अधिक बार तारीख लग चुकी है, लेकिन कोई हल नहीं निकला। इन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र भी बीएसए कार्यालयों में जमा हैं।


एडेड माध्यमिक स्कूलों में 10 साल बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती का रास्ता साफ, आउटसोर्सिंग के जरिए होगी नियुक्ति

एडेड माध्यमिक स्कूलों में 10 साल बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती का रास्ता साफ, आउटसोर्सिंग के जरिए होगी नियुक्ति


यूपी के एडेड माध्यमिक स्कूलों में दस साल बाद नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। इन स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती आउटसोर्सिंग के आधार पर होगी। 2012 से एडेड स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर रोक लगी थी। इंटरमीडिएट पास और 40 वर्ष की उम्र तक के अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे। इन्हें 13072 रुपये मानदेय दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग अब नए सिरे से रिक्त पदों का निर्धारण करेगा। प्रदेश में लगभग 4500 सहायता प्राप्त स्कूल हैं।


पहले हाईस्कूल में 10 और इंटरमीडिएट में 14 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखे जाते थे। लम्बे समय से भर्ती न होने के कारण लगभग 45 हजार से ज्यादा पद रिक्त माने जा रहे हैं लेकिन अब छात्र संख्या के आधार पर ही पदों का निर्धारण होगा। इन पदों पर भर्ती मंडलवार होगी। जेम पोर्टल के माध्यम से मंडलवार संस्थाओं को सम्बद्ध किया जाएगा।


सेवा प्रदाता कंपनी के लिए नियम व शर्ते सरकार ने तय कर दी हैं, मसलन उसे ब्लैक लिस्ट में न डाला गया हो, तीन वर्षों का अनुभव हो, सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से चयन की प्रक्रिया सम्पन्न की जाती हो। मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें संबंधित जिले का डीआईओएस, वित्त व लेखाधिकारी समेत पांच सदस्य होंगे।


यदि चयनित अभ्यर्थी मापदण्डों पर खरा न उतरे तो उसे एक महीने का नोटिस देकर कार्यमुक्त किया जा सकेगा। सेवा प्रदाता कंपनी को दोबारा से एक महीने में चयनित अभ्यर्थी भेजना होगा। इन अभ्यर्थियों को 13072 रुपये मानदेय दिया जाएगा जिसमें से 1548 रुपये ईपीएफ के रूप में काटे जाएंगे।

Tuesday, November 1, 2022

यूपी बोर्ड ने जारी किया हाईस्कूल 2023 परीक्षा का मॉडल पेपर, करें डाउनलोड

यूपी बोर्ड परीक्षा : दसवीं के मॉडल प्रश्न पत्र वेबसाइट पर हुए जारी


प्रयागराज । यूपी बोर्ड परीक्षा 2023 के लिए दसवीं का मॉडल प्रश्न पत्र जारी कर दिया गया है। प्रश्नपत्र उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेसबाइट पर उपलब्ध है। 70 अंकों की परीक्षा में 20 नंबर के बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षार्थियों को ओएमआर शीट पर नीले या काले पेन से सही उत्तर के सामने का गोला भरना होगा।


अधिकांश विषयों के मॉडल पेपर की पीडीएफ फाइल मौजूद है। उम्मीद है कि जल्द ही शेष विषयों और कक्षा 9, 11 और 12 वीं के मॉडल पेपर भी जल्द ही जारी कर दिए जाएंगे। 


परीक्षा के लिए दसवीं और बारहवीं के 58 लाख 67 हजार परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। इसमें से 31 लाख दसवीं के हैं। इंटर में 27 लाख अभ्यर्थी हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार लगभग 6 लाख अभ्यर्थी बढ़े हैं। प्रश्नपत्र दो खंड अ और ब में विभाजित होगा।


पहले खंड में सिर्फ बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जो एक अंक के होंगे। इसके लिए एक घंटे का समय निर्धारित होगा। जबकि दूसरे खंड में वर्णनात्मक प्रश्नों को हल करने के लिए दो घंटे का समय मिलेगा। हर प्रश्न के सामने निर्धारित अंक लिखा रहेगा। प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट मिलेंगे।



यूपी बोर्ड ने जारी किया हाईस्कूल 2023 परीक्षा का मॉडल पेपर, करें डाउनलोड


🟣 डाउनलोड का सीधा लिंक 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा के लिए मॉडल पेपर जारी किया है। जो छात्र अगले साल बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे, वे इसे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in से डाउनलोड कर सकते हैं। अधिकांश विषयों के लिए मॉडल पेपर पीडीएफ उपलब्ध है। कक्षा 10 के शेष विषयों और कक्षा 9, 11 और 12 के विषयों के लिए, बोर्ड द्वारा जल्द ही मॉडल प्रश्न पत्र प्रकाशित करने की संभावना है। बोर्ड आगामी महीनों में यूपी बोर्ड परीक्षा 2023 के लिए तारीख और समय की घोषणा भी कर सकता है।


इस बार ज्यादा छात्रों ने कराया पंजीकरण

बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं परीक्षा 2023 के लिए कुल 58,67,329 छात्रों ने पंजीकरण कराया है। इसका मतलब है कि 2022 की तुलना में 6.74 लाख अधिक छात्र अगले साल यूपी बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। कुल पंजीकृत छात्रों में से, 31,16,458 कक्षा 10 से हैं और 27,50,871 कक्षा 12 से हैं। 2021-22 में कुल 51,92,689 छात्र, कक्षा 10 के लिए 27,81,654 और कक्षा 12 के लिए 24,11,035 छात्रों ने इन परीक्षाओं के लिए पंजीकृत थे।


ऐसे डाउनलोड करें मॉडल पेपर

सबसे पहले उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाएं।फिर होमपेज के बाईं ओर हिंदी में लिखे सेक्शन मॉडल पेपर पर क्लिक करें।मॉडल पेपर की एक नई वेबसाइट दिखाई देगी।विषय के नाम के अलावा डाउनलोड विकल्प पर क्लिक करें।उसकी एक प्रति अपने पास रखें।