
Thursday, November 10, 2022


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किताब वितरण का मुद्दा उठाने वाले शिक्षक का दो माह का वेतन रोकने के बाद अंततः हुआ निलंबन, किताब वितरण में हुई देरी पर भुगतान रोकने की रखी थी मांग
किताब वितरण का मुद्दा उठाने वाले शिक्षक का दो माह का वेतन रोकने के बाद अंततः हुआ निलंबन, किताब वितरण में हुई देरी पर भुगतान रोकने की रखी थी मांग
गोंडा। परिषदीय स्कूलों में किताब वितरण में हुई देरी के मुद्दे को उठाना शिक्षक नेता को भारी पड़ गया। दो माह तक वेतन रोकने के बाद शनिवार को बीएसए ने कार्यों में लापरवाही के आरोप में विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अनूप सिंह को निलंबित कर दिया है।
बेलसर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बड़नापुर में कार्यरत शिक्षक नेता अनूप सिंह ने बीती 19 जुलाई को सीएम योगी से किताब वितरण में हुई देरी में जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की थी। जिस पर सीएम के विशेष सचिव शशांक त्रिपाठी ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
इस पर महानिदेशक विजय किरण आनंद ने बीते पांच सितंबर को शासन को रिपोर्ट दी कि 29 लाख के सापेक्ष 17 लाख 44 हजार किताबें स्कूलों में बांट दी गई हैं। और शेष 20 फीसदी किताब दो दिन के भीतर बांट दी जाएगी।
शिक्षक नेता अनूप सिंह ने बीएसए की रिपोर्ट को गलत बताया और पुनः 16 अक्टूबर को सीएम को पत्र भेजकर किताब वितरण कराने और देरी के कारण किताब का भुगतान रोकने की मांग की।
अनूप सिंह ने बताया कि बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने शिकायत को उठा लेने की बात कही और उनकी बात न मानने पर पहले दो माह का वेतन रोका और निलंबित कर दिया है। वेतन रोकने का कारण पूछने पर भी कोई पत्र नहीं दिया गया।
अंग्रेजी माध्यम स्कूल में भेजी हिंदी माध्यम की किताबें
बेलसर के अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय बड़नापुर में बीते अक्टूबर में हिन्दी माध्यम की किताबें भेजी गईं। यहां के बच्चों की पढ़ाई इसी किताब से शुरू हुई। फिर बीते एक नवंबर को अंग्रेजी माध्यम की किताबें भेजी गईं। यहां पर कार्यरत प्रधानाध्यापक अनूप सिंह ने दो बीईओ, एबीएसए और महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर अंग्रेजी माध्यम स्कूल में हिन्दी माध्यम किताबों से बच्चों को पढ़ाने के लिए मार्गदर्शन मांगा था।
कार्यों में लापरवाही पर शिक्षक को किया निलंबित : बीएसए
बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि शिक्षक अनूप सिंह स्कूल के कार्यों में रूचि न लेकर समूह बनाकर लोगों को सोशल मीडिया पर उकसा रहे थे। में बड़नापुर में अंग्रेजी माध्यम की किताबें 24 सितंबर को भेज दी गईं थी. जिसको शिक्षक ने वापस कर दिया। शासन के कार्यों को न करके पुस्तक न मिलने की अनावश्यक शिकायत कर रहे थे जो कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत था। बीईओ इटियाथोक को जांच अधिकारी बनाया गया है।


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सुधार की होड़ बढ़ी तो बदलने लगी स्कूलों की सूरत, राज्यों में सुधार की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी
सुधार की होड़ बढ़ी तो बदलने लगी स्कूलों की सूरत, राज्यों में सुधार की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी
नई शिक्षा नीति में देश की स्कूली शिक्षा की जैसी कल्पना की गई है, उसकी तरफ राज्य बढ़ते नजर आ रहे हैं। राज्यों में शिक्षा की तस्वीर के मूल्यांकन को लेकर शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट कई सकारात्मक संकेत देने वाली है। राज्यों में सुधार की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है और वे जरूरी सुविधाओं और संसाधनों की निगरानी भी कर रहे हैं। शिक्षक छात्र अनुपात भी बेहतर हो रहा है। और शिक्षा के स्तर को लेकर राज्यों के बीच अंतर कम हो रहा है।
राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा पर शिक्षा मंत्रालय ने परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स' (पीजीआइ) नाम से रपट जारी की है। इससे पता चलता है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से लेकर ड्रापआउट पर अंकुश लगाने तक राज्यों में नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को पूरा करने की होड़ है।
शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने यानी विद्यार्थियों के पंजीकरण, उन्हें स्कूल में बनाए रखने और ऊंची कक्षाओं तक उनके पहुंचने के मामले में बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात, झारखंड और दिल्ली ने पिछले साल के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है।
असम, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब और सिक्किम ने पिछले साल का स्तर बनाए रखा है, जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों का प्रदर्शन गिरा है। जहां तक स्कूलों में बुनियादी ढांचा और सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात है तो दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु और पुडुचेरी समेत केवल चार राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सभी ने पिछले साल के मुकाबले सुधार दिखाया है। तीसरे लेवल में वे राज्य हैं जिन्होंने एक हजार में से 851 से 900 तक अंक प्राप्त किए हैं। स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, सफाई, बिजली, कंप्यूटर, इंटरनेट, पुस्तकालय और खेल से संबंधित सुविधाओं में कई राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
घट रही असमानता
रिपोर्ट का एक अन्य उल्लेखनीय पहलू यह है कि राज्यों में स्कूली शिक्षा के ढांचे में असमानता का पहले जो स्तर होता था, वह अब घट रहा है। 2021-22 के सत्र में सबसे अधिक अंक (928) पाने वाले राज्य व सबसे कम अंक (669) पाने वाले राज्य के बीच 259 अंकों या 33% का फासला है। 2017-18 के सत्र में यह अंतर 51 प्रतिशत था।
अगले साल बदलेंगे संकेतक
शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग ने अब तक तीन पीजीआइ रिपोर्ट जारी की हैं। यह समग्र रूप से एक हजार अंकों के पूर्णांक पर राज्यों की ग्रेडिंग करती है। इसमें कुल 70 संकेतकों का सहारा लिया गया है, जिन्हें दो ग्रुपों में रखा गया है-प्रदर्शन और प्रशासन प्रबंधन । शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह अगले साल से राज्यों के आकलन के लिए डिजिटल एजुकेशन समेत कुछ नए संकेतक शामिल करेगा। ग्रेडिंग के कुल अंक एक हजार ही रहेंगे।

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सबसे ज्यादा आंगनबाड़ी केन्द्रों को नल कनेक्शन से जोड़ने वाला प्रदेश बना उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या 172946 है, जो देश में सबसे अधिक है। जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यूपी ने आंगनबाड़ी केंद्रों को नल कनेक्शन देने का 84.98 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। बिहार में 96979, महाराष्ट्र में 91267, पश्चिम बंगाल में 91046 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। बाकी राज्यों में आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या इन सभी राज्यों से भी बहुत कम है।
ऐसे में नल कनेक्शन देने के काम को पूरा करने के लिए विभाग पूरी ताकत से जुटा है। बता दें कि देश भर में 11,16,540 आंगनबाड़ियों में नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाना है। वर्तमान में 9,01,051 आंगनबाड़ियों में नल के कनेक्शन लगा दिए गए हैं।
सरकार की मंशा यह है कि बच्चों को भी शुद्घ पेयजल मिले। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते विभाग की योजना आंगनबाड़ी केन्द्रों को नल कनेक्शन से शुद्ध पेयजल की सुविधा प्रदान कर रही है। सरकार की मंशा गांव, गरीब, किसान के साथ-साथ एक आंगनबाड़ी केन्द्रों में नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा देना है। - स्वतंत्र देव सिंह, जल शक्ति मंत्री, उत्तर प्रदेश

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