उतरौला (बलरामपुर) :परिषदीय स्कूलों में नवीन शैक्षिक सत्र का आगाज हो गया लेकिन स्कूलों की दशा सुधरने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। विद्यालयों को विकास अनुदान के तहत मिलने वाली रकम जहां गत शैक्षिक सत्र में आधी दी गई थी वहीं रंगाई पुताई के मद में भेजे जानी वाली धनराशि भी आधी रही। आधी अधूरी रकम से जैसे तैसे स्कूलों में व्यवस्था की गई थी लेकिन नए सत्र में स्थिति और विकट है। कारण है कि पुरानी चटाइयां जमीन पर घिसकर वजूद खो चुकी हैं। परिषदीय स्कूलों में प्राथमिक विद्यालयों की रंगाई पुताई तथा भवन अनुरक्षण के लिए पांच हजार तथा पूर्व माध्यमिक स्कूलों को अधिकतम आठ हजार रुपये प्रत्येक शैक्षिक सत्र में जारी करने की व्यवस्था थी। इसी तरह विद्यालय विकास अनुदान के लिए प्राथमिक स्कूलों को पांच हजार तथा जूनियर विद्यालयों को सात हजार रुपये निर्गत किए जाते हैं। गत शैक्षिक सत्र में दोनो निधियों के तहत पचास प्रतिशत की रकम ही खातों में भेजी गई। रकम कम होने से अधिसंख्य विद्यालयों ने रंगाई पुताई के लिए धन खर्च ही नहीं किया। विकास अनुदान के लिए मिले धन से चटाइयां खरीदी गई तो फर्श पर घिसते- घिसते उनका अस्तित्व खत्म हो गया। प्राथमिक पाठशाला हासिमपारा, बदलपुर, मधपुर, तेंदुआ तकिया, बड़हरा कोट, पुरैनिया जाट आदि स्कूलों में बच्चों को जहां फटी चटाइयों पर बैठना पड़ता है वहीं अधिकांश स्कूल रंगाई पुताई के अभाव में जर्जर नजर आ रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी शत्रुघन सरोज स्वीकार करते हैं कि पिछले सत्र में दोनों निधियों में स्कूलों में कम पैसे भेजे गए थे लेकिन इस सत्र में डिमांड बनाकर भेजा जा चुका है।
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