जासं बदायूं : कम नामांकन की मार ङोल रहे कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में नई जान फूंकने की कोशिश की गई है। सर्व शिक्षा अभियान की परियोजना के निर्देशानुसार विद्यालयों में नामांकन पूरा कराने की तैयारी की गई है। सभी बा विद्यालयों की वार्डन व पूर्णकालिक शिक्षिकाओं का मानदेय रोक दिया गया है। जब तक वह विद्यालयों में छात्रओं का नामांकन पूरा नहीं करेंगी और छात्रओं की उपस्थिति स्थिर नहीं करेंगी, उनका मानदेय आहरित नहीं किया जाएगा।बा विद्यालयों में छात्रओं की घटती उपस्थिति को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी 18 बा विद्यालयों की 18 वार्डन व फुलटाइम शिक्षिकाओं का मानदेय रोक दिया है। दोनों को ही कम उपस्थिति के लिए जिम्मेदार माना गया है। नियमानुसार उन्हें अपने विद्यालय में छात्रओं की संख्या सौ करनी होगी। जिसमें बीस प्रतिशत अल्पसंख्यक छात्रओं की संख्या होनी अनिवार्य है। अवकाश के बहाने घर चले जाने की वजह से विद्यालयों में छात्रओं की संख्या कम होती जा रही है। वहीं अल्पसंख्यक छात्रओं के परिजन घर पर ही कोई कार्य होने की दुहाई देकर छात्रओं को घर पर ही बिठा लेते हैं, जो कढ़ाई-बुनाई या कारचोबी का कार्य करती हैं और परिवार का आर्थिक सहयोग करती हैं। आलम यह है कि पिछले सत्र में मात्र एक ही बा विद्यालय में अल्पसंख्यक छात्रओं के प्रवेश पूरे हो पाए थे। बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा ने बताया कि विद्यालयों में छात्रओं का पंजीकरण कम है। निरीक्षण के दौरान पंजीकृत छात्रओं के घर जाने की बात कही जाती है तो अल्पसंख्यक छात्रओं का नामांकन न होने की बात कही जाती है। ऐसे में जरुरतमंद बच्चियों को शिक्षित नहीं हो पा रही हैं। जिसके चलते नामांकन कराने तक मानदेय रोकने की कार्रवाई की गई है।
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