करीब तीन-साढे तीन साल का मासूम यश, जिसे कुछ खबर ही नहीं, उसकी मां इस दुनिया से गुजर चुकी है। वह तो कभी मां को देखता और कभी मम्मी कहकर पुकार उठता। हृदय विदारक इस दृश्य को देखते ही जो कोई वहां मौजूद रहा, सभी की आंखों से आंसू निकल पड़े। साथ में कार्यरत शिक्षिकाएं जैसे-तैसे बच्चे को ढांढस देकर बहलाने की कोशिश में लगी रहीं।1ये दृश्य शनिवार की सुबह डुमरियागंज स्थित टीचर कालोनी में दिखाई दिया। जहां 30 वर्षीय शिक्षिका मुक्ति त्रिपाठी की अचानक मौत हो गई। शिक्षिका अपने एकलौते बेटे यश के साथ यहां रहती थीं। 2015-16 में इनकी पहली तैनाती इस ब्लाक में हुई। सेमुआडीह स्थित प्राथमिक विद्यालय में पो¨स्टग हुई तो यहीं किराए के मकान में रहने लगी। पति आनंद समेत परिवार के लोग जनपद औरैया के दिव्वापुर में रहते थे। बीच-बीच में पति यहां आते और फिर वापस लौट जाते। बताया जाता इस बार वह कहकर गए कि शनिवार को आएंगे, फिर दो दिन की छुट्टी हैं तो घर ले जाएंगे, परंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था, पत्नी को नहीं, हां उनका शव उन्हें यहां से ले जाना पड़ा।
मौत के बाद मासूम यश की स्थिति बड़ी कष्ट दायक दिखी। जिसकी भी नजर मासूम पर पड़ती, एक आह निकल जाती। वह तो यही समझ रहा था कि उनकी मां गहरी नींद में सो रही है, मम्मी कहकर वह कई बार जगाने का प्रयास भी करता रहा, इस बीच मृतक शिक्षिका के ही स्कूल में तैनात नीलम व वर्षा सक्सेना बच्चे को लेकर इधर-उधर ले जाकर बहलाने लगती, थोड़ी देर चुप रहता तो फिर वहीं भाग आता, जहां उसकी मम्मी की मौत की नींद में सो रही थीं।
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