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Monday, September 7, 2020

हरदोई : 15 सितम्बर तक ड्रेस वितरण का काम पूरा होने के नहीं आसार, स्वयं सहायता समूहों को चार लाख से ज्यादा सिलनी हैं ड्रेस पर सिलीं 50 हजार, तो क्या कमीशनखोरी के चक्कर में हो रहा विलंब?

हरदोई : 15 सितम्बर तक ड्रेस वितरण का काम पूरा होने के नहीं आसार, स्वयं सहायता समूहों को चार लाख से अधिक ड्रेस सिलकर करनी है तैयार।

हरदोई : जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के करीब चार हजार स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को मुफ्त ड्रेस वितरण में कोरोना, बजट आवंटन में देरी के बाद अब जिम्मेदारों की लापरवाही बाधक बन गई है। यही वजह है कि जिले में 15 सितंबर तक शत प्रतिशत बच्चों को ड्रेस मिल जाने का लक्ष्य पूरा होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अभिभावकों ने सांसदों, विधायकों से इस मामले में दखल देने की मांग की है ताकि गुणवत्तायुक्त ड्रेस समय से विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

जिले में करीब पौने पांच लाख बच्चों को ड्रेस वितरित की जानी है। एक बच्चे को दो सेट ड्रेस मिलेगी, जिसकी कीमत शासन से 600 रुपये निर्धारित की गई है।




मांग के सापेक्ष 75 फीसदी बजट शासन ने जारी करदिया है। शेष धनराशि सत्यापन के बाद भेजी जाएगी। जो धनराशि आई है उसे पीएफएमएस के जरिए स्कूल प्रबंधन समिति के खातों में भेज दिया गया है।

जिन स्कूलों में 167 या इससे ज्यादा बच्चे अध्ययनरत हैं वहां पर टेंडर प्रक्रिया के जरिए ड्रेस बंटवाई जानी हैं। वहीं जिन स्कूलों में 166 या इससे कम बच्चे हैं वहां पर स्वयं सहायता समूहों से सिलवाकर ड्रेस बांटनी हैं। इसके लिए प्रबंध समिति कपड़ा खरीदकर समूहों को उपलब्ध कराएगी। विभागीय जानकारों के मुताबिक पहले 31 अगस्त तक की समयसीमा ड्रेस वितरण के लिए निर्धारित की गई थी।

शासन-प्रशासन ने दावा किया था कि समय से ड्रेस बंट जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इसलिए 15 सितंबर तक की समय सीमा और बढ़ा दी गई है।

इसके बावजूद शत प्रतिशत बच्चों को ड्रेस वितरण मिलने की उम्मीदें टूटने लगी हैं क्योंकि ड्रेस वितरण की प्रगति बेहद धीमी है।

मानीटरिंग में भी केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। अब तक कितनी ड्रेस बंट चुकी हैं इसकी जानकारी तक जिम्मेदार नहीं दे पा रहे हैं।

चार से ज्यादा ड्रेस सिलनी हैं पर सिलीं 50 हजार : स्वयं सहायता समूहों को 4 लाख से ज्यादा ड्रेस सिलकर तैयार करनी हैं, लेकिन अब तक 70 हजार ड्रेस तैयार करने का ही आर्डर मिला है। वहीं 50 हजार ड्रेस ही अब तक सिल सकी हैं। इसका भुगतान अभी शून्य है। समितियों को ड्रेस सिलने की जिम्मेदारी मिले दो महीने से भी ज्यादा समय बीत चुका है। अब शेष एक सप्ताह में साढ़े तीन लाख से ज्यादा ड्रेस तैयार कराने की राह भी काफी मुश्किल है।

तो क्या कमीशनखोरी के चक्कर में हो रहा विलंब :  ड्रेस वितरण में राजनीतिक दलों के नेताओं से जुड़े ठेकेदार भी सक्रिय हो गए हैं। चर्चा है कि सियासी पहुंच के कारण वे मनमानी पर उतारू हैं। वहीं ब्लाकों के अधिकारी भी खुश हुए बगैर उन्हें हरी झंडी देने में आनाकानी कर रहे हैं। कमीशनखोरी के इस खेल में सेटिंग के चक्कर में भी विलंब होने की बातें जानकार बता रहे हैं। बीते दिनों बीएसए को भी निरीक्षण के दौरान स्कूल में कपड़ा विभागीय नियमानुसार नहीं मिला था।

95 फीसदी से ज्यादा स्कूल प्रबंधन समितियों के खाते में बजट भेज दिया गया है। कुछ जगहों पर तकनीकी फाल्ट सामने आई है। इसे भी जल्द दूर कर खाते में धनराशि पहुंचा दी जाएगी। हेडटीचरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द धनराशि का आहरण कर बच्चों को ड्रेस वितरित करा दें।
-अमित वर्मा, जिला समन्वयक

कपड़ा खोलने में कोई दिक्कत नहीं है। तेजी से ड्रेस सिलने में समूह की महिलाएं जुटी हुई हैं। ड्रेस सिलाई का रेट भी निर्धारित हो गया है। 140 रुपये एक पैंट-शर्ट सिलने पर मिलेंगे। आपूर्ति होने के बाद भुगतान कराया मिलेगा। समय से समस्त ड्रेस सिलकर तैयार हो जाएंगी। किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हैं। कोरोना के चक्कर में थोड़ा विलम्ब जरुर हुआ लेकिन अब कोई समस्या नहीं है। समय के साथ ड्रेस तैयार है।
-विपिन चौधरी, डीसी एनआरएलएम


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