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Friday, August 12, 2022

एक माह से बीएसए दफ्तर में हाजिरी लगा रहे 4000 शिक्षक, स्कूल आवंटन न होने से अन्य शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया भी लटकी

एक माह से बीएसए दफ्तर में हाजिरी लगा रहे 4000 शिक्षक, स्कूल आवंटन न होने से अन्य शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया भी लटकी 


जबरा मारे भी और रोने भी न दे... कुछ ऐसे ही हालात से बेसिक शिक्षा विभाग गुजर रहा है। स्कूल आवंटन न होने से अन्य शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया फंसी हुई है। एक माह से स्कूल आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है। यह प्रक्रिया निदेशालय स्तर से होनी है, जिलास्तर के अधिकारी हाथ मलने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे हैं।


स्थिति यह है कि जिले में शिक्षकों के तबादलों में अभी समय लगेगा। इससे पहले 68500 शिक्षक भर्ती के शिक्षकों की तैनाती के बाद ही तबादले की वेबसाइट खोली जाएगी। स्कूल में जिस शिक्षक की वजह से आरटीई का मानक गड़बड़ हुआ होगा, उसे ही तबादले के लिए चुना जाएगा। शिक्षकों के जिले में तबादले किए जाने हैं। जिले में बाहर से आए  शिक्षक जब कार्यभार ग्रहण करेंगे और इनका डाटा मानव संपदा पोर्टल पर अपडेट होगा, इसके बाद स्कूलों में रिक्तियों की संख्या स्पष्ट होगी।


बता दें कि प्रदेश में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत चयनित लगभग चार हजार (मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी-एमआरसी) शिक्षकों को हाईकोर्ट के आदेश पर मनचाहे जिले आवंटित किए गए हैं।  इनको अभी तक स्कूल नहीं भेजा जा सका है। पहले आवंटन प्रक्रिया जिले स्तर से ही होती थी, लेकिन मानव संपदा से स्कूल आवंटन किए जाने की प्रक्रिया साल 2018 के बाद शुरू हो गई है। निदेशालय से ऑनलाइन ही प्रक्रिया पूरे प्रदेश के जिलों में एक साथ होनी है। इससे पूरा मामला उलझा हुआ है।


तबादलों की प्रक्रिया में और कई फंस सकते हैं पेंच

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों के तबादले की राह आसान नहीं होगी। जिले में स्थानांतरण आदेश में 30 अप्रैल 2022 की छात्र संख्या को आधार बनाया गया है। स्कूलों में बच्चों का प्रवेश अभी तक चल रहा है। ऐसे में 30 अप्रैल की छात्रसंख्या के आधार पर सरप्लस होने पर असंतुष्ट शिक्षकों का कोर्ट जाना तय है। ठीक ऐसा मामला 2017 में हुआ था और जिले में तबादले नहीं हो सके थे।


13 जून 2017 के आदेश में सरकार ने 30 अप्रैल की छात्र संख्या को आधार बनाया था, जबकि स्कूलों में प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जुलाई रखी थी। बेसिक शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल की छात्रसंख्या के आधार पर जिन शिक्षकों को सरप्लस घोषित किया था, उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका कर दी और उनको कार्यमुक्त करने पर रोक लग गई थी। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्राथमिक स्कूलों में 30 बच्चों और उच्च प्राथमिक में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित/विज्ञान, सामाजिक विषय और भाषा के एक-एक शिक्षक होने चाहिए। इससे भी मामला फंसना तय है।


शर्तों की भरमार, तबादले आसान नहीं

जिले में तबादलों के लिए जारी शासनादेश में ओपन ट्रांसफर जैसी कोई बात नहीं है। ट्रांसफर के नाम पर समायोजन का झुनझुना थमा दिया गया है। तमाम शिक्षक दंपती पिछले कई वर्षों से अलग-अलग ब्लॉक में 100 से 150 किमी की दूरी पर तैनात हैं, और बच्चों के पालन-पोषण में कठिनाई उठा रहे हैं। तबादला आदेश में उनको 10 अंकों का वेटेज तो मिला है लेकिन उन्हें आवेदन का मौका नहीं मिलेगा। वहीं के शिक्षक आवेदन कर सकेंगे जहां शिक्षक सरप्लस यानी छात्र-शिक्षक अनुपात से अधिक हैं। इससे भी मामला फंसा हुआ है।

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