DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Monday, August 15, 2022

तदर्थ शिक्षकों के रिक्त पदों को समाहित करने की याचिका खारिज

तदर्थ शिक्षकों के रिक्त पदों को समाहित करने की याचिका खारिज




प्रयागराजः  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में तदर्थ शिक्षकों के रिक्त पदों को पिछले भर्ती विज्ञापन में समाहित करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि याची के पास ऐसा कोई विधिक अधिकार नहीं है, जिसके तहत न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को रिक्त पदों को विज्ञापित करने का निर्देश दिया जा सके। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने दिया है। शीतला प्रसाद ओझा की ओर से याचिका में प्रदेश के विभिन्न एडेड इंटर कालेजों में कार्यरत तदर्थ सहायक अध्यापक एवं प्रवक्ता के पदों को रिक्त घोषित कर पिछले भर्ती विज्ञापन में शामिल करने की मांग की गई थी।


गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में संजय सिंह केस में प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग को तदर्थ शिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अगली भर्ती में अनुभव के आधार पर भारांक देने की व्यवस्था की थी।


इसके बाद तदर्थ शिक्षकों ने भर्ती प्रक्रिया में भाग भी लिया था । इसमें अधिकतर प्रतिभागी असफल रहे। फिर राज्य सरकार ने भर्ती में असफल रहे तदर्थ शिक्षकों को सेवा मुक्त नहीं किया। उन्हीं तदर्थ शिक्षकों के पदों को रिक्त घोषित कर पिछले विज्ञापन में शामिल कराने के लिए याचिका की गई थी। 

No comments:
Write comments