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Tuesday, February 3, 2026

हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा से शिक्षा में बराबरी का सपना होगा साकार

हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा से शिक्षा में बराबरी का सपना होगा साकार


केंद्रीय बजट 2026-27 में हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने की घोषणा की गई है। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो सुरक्षित आवास की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ देती थीं। हॉस्टल से छात्राओं को आत्मविश्वास, शिक्षा की निरंतरता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी।


लखनऊ । केंद्रीय बजट 2026-27 में हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की छात्राओं के लिए यह योजना वरदान साबित होगी। आज भी बड़ी संख्या में बेटियां सिर्फ इस वजह से आगे की पढ़ाई छोड़ देती हैं क्योंकि उनके जिले या आसपास सुरक्षित आवास की व्यवस्था नहीं होती। ग्रामीण छात्राओं को उच्च शिक्षा तक सीधी पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में इंटर, स्नातक या तकनीकी शिक्षा के संस्थान अक्सर जिला मुख्यालय या शहरी क्षेत्रों में होते हैं। आवास की सुविधा नहीं होने के कारण छात्राओं को रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या वे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं।


हॉस्टल बनने से उन्हें सुरक्षित और सुलभ आवास मिलेगा, जिससे वे बिना किसी बाधा के कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर सकेंगी। बालिका शिक्षा में गिरावट पर लगेगा अंकुश आर्थिक कमजोरी और सुरक्षा की चिंता के कारण कई परिवार बेटियों को दूर पढ़ने नहीं भेजते। जिले में ही छात्रा हॉस्टल होने से अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी। इससे बालिकाओं की शिक्षा निरंतरता बनी रहेगी। सुरक्षित वातावरण से आत्मविश्वास में वृद्धि छात्राओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए हॉस्टल में सुरक्षा, वार्डन, सीसीटीवी और अन्य मूलभूत सुविधाएं होंगी। सुरक्षित माहौल मिलने से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और कौशल विकास पर भी ध्यान दे सकेंगी। 

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत किराए के मकान या निजी हॉस्टल का खर्च गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए भारी होता है। सरकारी हॉस्टल कम शुल्क पर उपलब्ध होने से परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा और बेटियों की शिक्षा पर खर्च करना आसान होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सुविधा जिला मुख्यालयों में स्थित लाइब्रेरी, कोचिंग संस्थान और डिजिटल संसाधनों तक छात्राओं की पहुंच बढ़ेगी। इससे ग्रामीण छात्राएं भी इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रशासनिक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकेंगी। सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव जब बेटियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगी, तो समाज में शिक्षा के प्रति सोच बदलेगी। यह योजना महिला सशक्तिकरण को मजबूती देगी और “बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ” के संकल्प को जमीन पर उतारेगी। कुल मिलाकर, हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल की व्यवस्था न केवल शिक्षा तक पहुंच आसान बनाएगी, बल्कि ग्रामीण भारत की बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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