अब गुरुजी AI से बच्चों को पढ़ाएंगे, वर्ष 2027 तक 10 लाख शिक्षकों को एआई से पढ़ाने में दक्ष बनाने का लक्ष्य
नई दिल्ली। दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षक भी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से पढ़ाएंगे। आखिरी छोर के छात्र तक एआई की पहुंच सुनिश्चित कराने का खाका तैयार हो गया है। वर्ष 2027 तक 10 लाख स्कूली शिक्षकों को एआई से पढ़ाने में दक्ष आईआईटी मद्रास का बोधन एआई बनाने का लक्ष्य है। इसमें सहयोग करेगा।
1 जून से शिक्षकों के लिए एआई साक्षरता पायलट परियोजना शुरू होगी। इसमें भाषाई बंधन से इतर बाल वाटिका से 12वीं कक्षा तक के शिक्षक सभी विषयों में 22 भारतीय भाषाओं में एआई से पढ़ाने का प्रशिक्षण लेंगे। खास बात है कि एआई की मदद से शिक्षक कक्षा में पिछड़ने वाले छात्रों की पहचान कर अलग से पढ़ाई का प्लान तैयार कर उनको आगे बढ़ने में मदद करेंगे।
शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2027 तक 10 लाख शिक्षकों को एआई से पढ़ाने में दक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है। एआई से शिक्षक पढ़ाने की गुणवत्ता में सुधार भी कर सकते हैं। राज्य सरकारों के सहयोग से सरकारी स्कूलों को मुख्य रूप से फोकस किया जा रहा। आईआईटी मद्रास का बोधन एआई इस परियोजना का नेतृत्व करेगा।
एनसीईआरटी, एनसीटीई और स्कूलों में काम करने वाली संस्थाएं भी सहयोग करेंगी। अब शिक्षकों को डर है कि एआई उनकी जगह ले लेगा और उनकी नौकरी चली जाएगी। हालांकि, एआई के माध्यम से शिक्षक पढ़ाने के स्किल में बदलाव कर गुणवत्ता में सुधार लाकर रिजल्ट में बदलाव ला सकते हैं।
छात्र को उसकी मातृभाषा में एआई से पढ़ने का मिलेगा मौका :शिक्षकों को 22 भारतीय भाषाओं में एआई की मदद से पढ़ाने का प्रशिक्षण मिलेगा। इसका मकसद छात्र को उसकी अपनी मातृभाषा में एआई से पढ़ने का मौका उपलब्ध कराना है।
एआई से पिछड़ने वाले छात्रों की पहचान से लेकर सुधार पर काम
बोधन एआई पार्टनरशिप को लीड करने वाली निधि शर्मा ने बताया कि कक्षा में हर छात्र पर ध्यान देना शिक्षक के लिए संभव नहीं होता, क्योंकि मैनुअल में एक ही प्लान से पढ़ाई होती है। मगर, एआई से शिक्षक कक्षा के हर छात्र पर नजर रख सकते हैं। छात्र का टेस्ट पेपर स्कैन करते ही एआई कमियां बता देगा। मध्यम स्तर और होनहार छात्रों के लिए अलग-अलग प्लान बनाकर शिक्षक पढ़ा सकते हैं।
यूपी, बिहार, ओडिशा, हरियाणा, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्य जुड़ेंगे
यूपी, बिहार, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, ओडिशा समेत अन्य राज्यों में इस परियोजना को शुरू करने की बात चल रही। आंध्र प्रदेश सरकार ने करार भी कर लिया है। इसमें संबंधित राज्यों के शिक्षा विभाग की जरूरतों के आधार पर शिक्षकों को एआई में दक्ष किया जाएगा।
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