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Tuesday, December 16, 2025

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पेश, ये बदलाव होगा

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पेश, ये बदलाव होगा
 

लोकसभा में सोमवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र स्व-शासन वाले संस्थान बनाने के प्रावधान वाले विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान, 2025 विधेयक पेश किया। विपक्ष ने विधेयक को लेकर कई आपत्तियां जताई, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदस्यों को इस विधेयक को लेकर दिक्कत नहीं होनी चाहिए थी। चूंकि आपत्ति की जा रही है इसलिए सरकार सदन से इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजने का अनुरोध कर रही है।

कांग्रेस के मनीष तिवारी ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता का उल्लंघन करता है। आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, तृणमूल के सौगत राय, कांग्रेस की एस जोतिमणि व द्रमुक के टीवी सेल्वागणपति ने भी बिल का विरोध किया। जोतिमणि व सेल्वागणपति ने कहा, यह तमिलनाडु जैसे राज्यों पर हिंदी थोपने की कोशिश है। रिजिजू बोले, आशंकाएं उचित नहीं हैं।


ये बदलाव होगा

1. उच्च शिक्षा के लिए कानूनी आयोग बनेगा, जो नीति निर्धारण वसमन्वय को लेकर सरकार को सलाह देगा।

2. शैक्षणिक मानक तय करने का जिम्मा होगा, परीक्षा परिणाम, छात्रों की आवाजाही और शिक्षकों के न्यूनतम मानदंड तय होंगे।




उच्च शिक्षा के लिए एकल नियामक वाला बिल मंजूर, प्रस्तावित विधेयक अब विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक के नाम से जाना जाएगा

12 दिसम्बर 2025
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूजीसी और एआईसीटीई जैसे निकायों की जगह उच्च शिक्षा नियामक निकाय स्थापित करने वाले विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी।

प्रस्तावित विधेयक जिसे पहले भारत का उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) विधेयक नाम दिया गया था, अब विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक के नाम से जाना जाएगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रस्तावित एकल उच्च शिक्षा नियामक का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को प्रतिस्थापित करना है।

अधिकारी ने बताया, विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण की स्थापना से संबंधित विधेयक को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। यूजीसी गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा क्षेत्र की, जबकि एआईसीटीई तकनीकी शिक्षा की देखरेख करती है और एनसीटीई शिक्षकों की शिक्षा के लिए नियामक निकाय है।

मेडिकल-लॉ कॉलेज दायरे में नहीं : प्रस्तावित आयोग को उच्च शिक्षा के एकल नियामक के रूप में स्थापित किया जाएगा, लेकिन मेडिकल और लॉ कॉलेज इसके दायरे में नहीं आएंगे। इसके तीन प्रमुख कार्य प्रस्तावित हैं-विनियमन, मान्यता और व्यावसायिक मानक निर्धारण। वित्त पोषण, जिसे चौथा क्षेत्र माना जाता है, अभी तक नियामक के अधीन प्रस्तावित नहीं है।




HECI : बनेगा भारतीय उच्च शिक्षा आयोग, UGC, NCTE और AICTE जैसी संस्थाओं की जगह लेगा नया आयोग

23 नवंबर 2025
नई दिल्ली : सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश करने के लिए कुल 10 विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक भी सरकार के एजेंडे में है। प्रस्तावित कानून के जरिये उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना की जाएगी। प्रस्तावित उच्च शिक्षा आयोग विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) जैसी संस्थाओं की जगह लेगा और उच्च शिक्षा के एकीकृत नियामक के तौर पर काम करेगा। संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू हो रहा है। 


लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रस्तावित भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआइ) यूजीसी, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का स्थान लेगा। इस समय यूजीसी गैर तकनीकी उच्च शिक्षा का नियामक है, जबकि एआइसीटीई तकनीकी शिक्षा का नियमन करता है और एनसीटीई अध्यापक शिक्षा का नियामक निकाय है। 


एचईसीआइ को एकल उच्च शिक्षा विनियामक के तौर पर स्थापित करने का प्रस्ताव है, लेकिन चिकित्सा और विधि महाविद्यालयों को इसके दायरे में नहीं लाया जाएगा। इस आयोग की तीन भूमिकाएं-नियमन, मान्यता और मानक तय करने की है।

Sunday, November 30, 2025

यूपी में निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षको की शैक्षिक अर्हता की जांच होगी, बिना अर्हता ही शिक्षक रखने की शिकायत पर एनसीटीई की ओर से दिए गए जांच के आदेश

यूपी में निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षको की शैक्षिक अर्हता की जांच होगी, बिना अर्हता ही शिक्षक रखने की शिकायत पर एनसीटीई की ओर से दिए गए जांच के आदेश


75 जिलों में जिला विद्यालय निरीक्षक निजी स्कूलों की शुरू करेंगे पड़ताल


लखनऊ। यूपी में सभी निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता की जांच कराई जाएगी। मानक विपरीत बिना अर्हता के शिक्षकों से पढ़ाई पर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने नाराजगी जताई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग अब सभी जिलों में इन विद्यालयों के शिक्षकों की जांच कर रिपोर्ट देगा।


एनसीटीई को इस मामले में झांसी के रहने वाले राहुल जैन की ओर से साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई है, जिसमें कई निजी स्कूलों में शिक्षक बिना डीएलएड, बीएड, सीटीईटी, टीईटी पास किए बिना ही निजी स्कूलों में पढ़ाई करा रहे हैं।

एनसीटीई के अनिवार्य मानकों का पालन न किए जाने से तमाम निजी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसेमें अबसभी जिलों में जिला विद्यालय निरीक्षक निजी स्कूलों के शिक्षकों की अर्हता का ब्योरा खंगालेंगे। मानकों के विपरीत मिलने पर शिक्षक बाहर किए जाएंगे। प्रबंधतंत्र सेजवाब-तलब होगा।


मुख्य सचिव तक पहुंची मामले की शिकायत

निजी स्कूलों में बिना अर्हता शिक्षक रखने का मामला मुख्य सचिव एसपी गोयल और अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक शिक्षा तक पहुंचा है। एनसीटीई के पत्र के बाद शिक्षा विभाग ने जिलों में इसकी जांच कराने का निर्णय लिया। अब शासन की सख्ती के बाद जिलों में जांच शुरू होगी।

Thursday, November 27, 2025

TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से RTE और NCTE कानूनों में संशोधन की मांग की

TET  अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से RTE और NCTE कानूनों में संशोधन की मांग की


चेन्नई । सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले के बाद, जिसमें कहा गया है कि सेवा में कार्यरत वे सभी शिक्षक जिन्होंने अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं की है, उन्हें सेवा जारी रखने के लिए दो वर्ष के भीतर TET अनिवार्य रूप से पास करना होगा—तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि RTE अधिनियम, 2009 और NCTE अधिनियम, 1993 में आवश्यक संशोधन किए जाएं ताकि 23 अगस्त 2010 को सेवा में मौजूद शिक्षकों को संरक्षित किया जा सके।


पूर्वलाभ समाप्त होने से पैदा हुई समस्या
स्टालिन ने कहा कि NCTE ने शुरू में 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को नए योग्यता मानकों—जैसे TET—से छूट दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की नई व्याख्या के बाद यह छूट समाप्त हो गई है। इससे लाखों शिक्षकों पर TET अनिवार्य हो गया है, और नियमों में यह बदलाव उनके सेवा अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

उन्होंने बताया कि इस अचानक और पूर्वव्यापी नियम-प्रवर्तन से लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के अधिकार प्रभावित होंगे, जो अपने समय के नियमों के अनुसार पात्र और योग्य थे।


दो वर्ष में TET न देने पर नौकरी जाएगी
फैसले के अनुसार अब इन शिक्षकों को दो वर्ष में TET पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा नौकरी समाप्त हो सकती है। इससे भारी प्रशासनिक दबाव और व्यक्तिगत कठिनाइयाँ पैदा होंगी।

स्टालिन ने कहा कि लाखों शिक्षकों को बदलना किसी भी राज्य के लिए व्यावहारिक नहीं है, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जहाँ योग्य उम्मीदवारों की उपलब्धता पहले ही सीमित है।


प्रमोशन और करियर पर बड़ा प्रभाव
उन्होंने आगाह किया कि नियुक्ति के वर्षों बाद अचानक योग्यता की नई शर्तें लागू करने से शिक्षकों के प्रमोशन के अवसर बाधित होंगे, जो उनकी वैध अपेक्षाओं और सेवा संतुलन के विपरीत है।

स्टालिन ने प्रधानमंत्री से इस “अत्यंत जरूरी और राष्ट्रीय महत्व” के मुद्दे पर तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहे और लाखों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

Thursday, August 14, 2025

देश में शिक्षकों के लगभग दस लाख पद रिक्त, संसदीय समिति ने जल्द पदों को भरने का दिया निर्देश, नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों में संविदा नियुक्तियां रोकने की सिफारिश

देश में शिक्षकों के लगभग दस लाख पद रिक्त, संसदीय समिति ने जल्द पदों को भरने का दिया निर्देश, नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों में संविदा नियुक्तियां रोकने की सिफारिश

14.8 लाख स्कूलों में से तीन हजार केंद्र चला रहा


नई दिल्ली । देश में स्कूली शिक्षा में शिक्षकों के लगभग 10 लाख पद रिक्त हैं। संसदीय समिति की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिक्तियों को भरने के लिए समिति की बार-बार की गई सिफारिश के बावजूद शिक्षकों की संविदा नियुक्तियां की जा रही हैं।

संसदीय समिति ने कहा कि 14.8 लाख विद्यालयों में से भारत सरकार केवल लगभग तीन हजार विद्यालयों का ही संचालन करती है। इनमें भी भारत सरकार द्वारा संचालित विद्यालयों केंद्रीय विद्यालय (केवी), नवोदय विद्यालय (एनवी) आदि में रिक्तियों का स्तर भी चिंताजनक है। केवी और एनवी में भी कुल मिलाकर 30 से 50% रिक्तियां हैं। 

समिति ने अपनी 349वीं और 363वीं रिपोर्ट में सिफारिशों को दोहराते हुए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को निर्देश दिया है कि वह भारत सरकार द्वारा संचालित विद्यालयों जैसे केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों आदि में शिक्षकों के रिक्त पदों को संविदा शिक्षकों के स्थान पर नियमित/स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के माध्यम से 31 मार्च, 2026 से पहले भरे। 

समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है कि वह इन स्कूलों में शिक्षकों की संविदा नियुक्तियों को रोकने की सिफारिश करती है। समिति का कहना है कि विभिन्न राज्यों में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) द्वारा वित्त पोषित स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 10 लाख रिक्त पदों में से प्राथमिक स्तर पर लगभग 7.5 लाख पद रिक्त हैं।


कार्यान्वयन के दो स्तर हों
समिति का मानना है कि टीचर एजुकेशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए दो व्यापक स्तर होने चाहिए। पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक स्तर के लिए प्राथमिक स्तर के शिक्षक जो इस स्तर पर सभी विषय पढ़ा सकें और विषय-विशिष्ट शिक्षकों के लिए मध्य और माध्यमिक स्तर के शिक्षक हों।


आवंटन स्थगित रखा जाए
समिति ने कहा है कि जिन राज्यों ने नियमित/स्थायी शिक्षकों से रिक्तियों को भरने के लिए विभाग के निर्देशों का पालन नहीं किया है उन राज्यों के सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) कोष के आवंटन को तब तक स्थगित रखा जाए जब तक कि संबंधित राज्य केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन नहीं कर लेते।


कांग्रेस का समिति की सिफारिशों का समर्थन
नई दिल्ली । कांग्रेस ने बुधवार को शिक्षा संबंधी संसदीय समिति की सिफारिशों का समर्थन किया है। समिति ने केंद्र और राज्यों के अधीनस्थ विद्यालयों में 10 लाख शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने समेत कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। समिति के अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने शिक्षा, महिला, बाल, खेल एवं युवा मामलों संबंधी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट का लिंक 'एक्स' पर साझा किया।


छह राज्यों में स्कूलों का औचक निरीक्षण
नई दिल्ली । सीबीएसई ने छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दस स्कूलों में बुधवार को औचक निरीक्षण किया। मकदस स्कूलों में नियमों के उल्लंघन से जुड़ी जानकारी जुटानी थी। सीबीएसई बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि औचक निरीक्षण के जरिए ये देखा गया की स्कूलों के संचालन में नियमों की अनदेखी तो नहीं हो रही। ऐसे छात्र तो नहीं है जिनका दाखिला तो है लेकिन उनकी उपस्थिति नहीं है और स्कूल में पढ़ाई व सुविधाओं की स्थिति क्या है।




'केंद्रीय स्कूलों में संविदा पर न हो नियुक्ति' – संसदीय समिति ने रिपोर्ट में लगभग 10 लाख रिक्त शिक्षक पदों पर जताई चिंता

NCTE में 2019 से 15 जून 2025 तक कोई भी स्थायी नियुक्ति न होने पर सवाल

समिति ने कहा, केवी और नवोदय विद्यालयों में भी 30 से 50% तक रिक्तियां 


नई दिल्लीः संसदीय पैनल ने स्कूली शिक्षा समेत दूसरे संस्थानों में शिक्षकों के लाखों खाली पदों और अनुबंध के आधार पर भर्ती पर गंभीर चिंता जताई है। शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति ने एक दिन पहले शुक्रवार को संसद में पेश 368वीं रिपोर्ट में कहा है कि देश के स्कूलों में शिक्षकों के करीब 10 लाख पद रिक्त हैं। 

देश में 14.8 लाख स्कूलों में से भारत सरकार करीब 3000 स्कूलों का ही संचालन करती है लेकिन समिति ने पाया है कि केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों में भी रिक्तियों का स्तर चिंताजनक है। केवी और नवोदय विद्यालयों में भी कुल मिलाकर 30 से 50% तक रिक्तियां हैं। समिति ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित केवी, नवोदय विद्यालयों में संविदा की जगह 31 मार्च 2026 तक शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति हो। समिति ने कहा कि स्कूलों में संविदा वाली नियुक्तियां रोकी जाएं।


'राज्यों की फंडिंग रोकी जाए': संसदीय पैनल ने कहा है कि विभिन्न राज्यों में समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के जरिए पैसा पाने वाले स्कूलों में प्रारंभिक और प्राथमिक स्तर पर ही 7.5 लाख रिक्तियां हैं। रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति करने के निर्देशों को नहीं मानने वाले राज्यों की सर्व शिक्षा अभियान के तहत फंडिंग (अध्यापक निधि) कतब तक रोकी जाए, जब तक वे निर्देशों का पालन नहीं कर लेते।


NCTE पर भी सवालः नैशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) में 2019 से 15 जून 2025 तक टीचिंग, नॉन टीचिंग और प्रशासनिक कर्मचारियों की कोई भर्ती नहीं होने के मसले को भी समिति ने गंभीर बताया है।


'यूनिवर्सिटी को मिले आजादी': समिति का मानना है कि यूनिवर्सिटीज को अपना पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए केवल 30% छूट के बजाए ज्यादा आजादी दी जानी चाहिए।

Tuesday, July 1, 2025

निजी बीएड डिग्री कॉलेजों ने एनसीटीई के फर्जी पत्र से ली बीएड की मान्यता, मान्यता खत्म कर कानूनी कार्यवाही की तैयारी

निजी बीएड डिग्री कॉलेजों ने एनसीटीई के फर्जी पत्र से ली बीएड की मान्यता, मान्यता खत्म कर कानूनी कार्यवाही की तैयारी

03 मार्च 2020 के जिस पत्र का हवाला लेकर ली मान्यता वो फर्जी


लखनऊ। निजी डिग्री कॉलेजों ने बीएड कोर्स की मान्यता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का फर्जी पत्र तैयार कर ले ली। यही नहीं मिलीगभत कर इसे एनसीटीई की वेबसाइट पर भी अपलोड करा दिया। फर्जीवाड़ा करने वाले इन डिग्री कॉलेजों ने विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। शिकायत के बाद जांच की गई तो पता चला कि इन्हें मान्यता देने के लिए एनसीटीई ने कोई पत्र ही जारी नहीं किया है। अब ऐसे कॉलेजों की मान्यता खत्म कर उनके यहां प्रवेश पर रोक लगा दी है और अब कानूनी कार्रवाई होगी।


एनसीटीई की बीते दिनों हुई नार्दन रीजन कमेटी की बैठक में सीतापुर के बिसवां स्थित अजीम मेमोरियल नेशनल डिग्री कॉलेज जो कि लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध है, उसका फर्जीवाड़ा उजागर होने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस कॉलेज ने मान्यता के लिए एनसीटीई का फर्जी पत्र तैयार कर लिया गया। तीन मार्च 2020 के जिस पत्र का हवाला लेकर इस कॉलेज ने लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्धता ली वह पूरी तरह फर्जी निकला। बीएड कोर्स की मान्यता खत्म किए जाने, दाखिले पर रोक लगाए जाने और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसी तरह बरेली के शिव ज्ञान डिग्री कॉलेज मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में भी बीएड पाठ्यक्रम की मान्यता ऐसे ही ली गई। जांच कमेटी ने डिस्पैच डायरी व अन्य दस्तावेजों से इसका मिलान किया तो यह पत्र भी फर्जी निकला। यही खेल मान्यता पाने के लिए बरेली के ही एलबीएस ग्रुप एजुकेशन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज ने भी किया। उसने भी फर्जी पत्र के सहारे बीएड पाठ्यक्रम चला डाला। शाहजहांपुर के गंगा राम सेठ डिग्री कॉलेज भी इस फर्जीवाड़े में शामिल है।


ढंग से जांच हो तो सामने आएगा बड़ा फर्जीवाड़ा

फिलहाल पांच-पांच साल से चल रहे इन कॉलेजों पर अब कार्रवाई की जाएगी। एनसीटीई के आईटी सेक्शन को यह जिम्मेदारी दी गई है कि आखिर किस तरह इन्होंने वेबसाइट पर फर्जी पत्र अपलोड किया। अब दूसरे बीएड कॉलेजों की भी जांच कराई जाएगी। अगर ढंग से जांच की गई तो बड़ी संख्या में दूसरे कॉलेजों का भी फर्जीवाड़ा सामने आएगा। यही नहीं बड़ा रैकेट पकड़ा जाएगा।

Sunday, June 29, 2025

उत्तर प्रदेश में डीएलएड और बीएड के 1059 कॉलेजों की मान्यता खत्म, जानिए क्यों?

उत्तर प्रदेश में डीएलएड और बीएड के 1059 कॉलेजों की मान्यता खत्म, जानिए क्यों? 


मेरठ। सत्र 2025-26 शुरू होने की तैयारियों से ठीक पहले नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने उत्तर प्रदेश के 1059 शिक्षक-शिक्षा कॉलेजों की मान्यता खत्म कर दी है। सबसे ज्यादा डीएलएड के 380 और बीएड के 178 कॉलेजों की मान्यता खत्म की गई है। 

यूपी में बीएड की अगले महीने काउंसिलिंग प्रस्तावित है और संबंधित विवि कॉलेजों के नाम भेज चुके हैं। ऐसे में मान्यता खत्म होने का मामला अदालत में जाने के आसार हैं। उक्त फैसले में चौ. चरण सिंह विवि के छह जिलों के 50 से अधिक कॉलेज भी आए हैं। शुक्रवार देर रात एनसीटीई के उक्त फैसले में शामिल कॉलेजों की सूची जारी कर दी गई।



NCTE के निर्देश पर 1066 शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों पर लगेगा ताला,  वर्ष 2025-26 से ही दाखिले पर लगा दी गई रोक, बीएड व डीएलएड कॉलेजों के फर्जीवाड़े पर बड़ा ekshan
 
01 जून 2025
बीएड, डीएलएड व बीपीएड कोर्स चला रहे डिग्री कॉलेज किस तरह हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं यह राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की जांच में सामने आया है। स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराए जाने पर मानक विहीन कॉलेजों ने सरेंडर कर दिया। उनके कारनामों की कलई खुल गई। एनसीटीई के निर्देश पर 1066 कॉलेजों पर ताला लगाया जाएगा। वर्ष 2025-26 से ही दाखिले पर रोक लगा दी गई है।

ऑनलाइन परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट न भरने पर शिकंजा कसा गया। पीएआर मांगी तो कॉलेज आनाकानी करने लगे। कॉलेजों ने एनसीटीई की नोटिसों का जवाब देना बंद कर दिया। ऑनलाइन रिपोर्ट में जीपीएस से लाइव लोकेशन, वीडियो व शिक्षकों इत्यादि की जानकारी भरनी थी। यही कारण है कि बीएड, डीएलएड व बीपीएड कोर्स चला रहे कॉलेजों ने हाथ खड़े कर दिए। 

पीएआर मॉड्यूल में मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं की जवाबदेही तय की गई। एनसीटीई के मानकों के पालन को लेकर सख्ती की गई तो धंधेबाजी सामने आ गई। यूपी के 1066 में से 50 डिग्री कॉलेजों के पते ही फर्जी निकले, 212 कॉलेजों ने पीएआर रिपोर्ट न जमा करने का जवाब नहीं दिया। 804 कॉलेजों ने 15 दिनों के नोटिस के जवाब की समयसीमा के बाद भी स्पष्टीकरण नहीं दिया। 

बिना भवन व किराए की बिल्डिंग में चले कॉलेज
प्रदेश के जिन 50 डिग्री कॉलेजों का पता सही नहीं निकला, उसमें कई कागजों पर थे। कई किराए की बिल्डिंग में थे। एक जमीन पर अलग दरवाजे की फोटो करा दो कॉलेज मान्यता लेकर कागज पर थे। सिर्फ डिग्री बांटी जा रही थी। 

1.06 लाख सीटें घटेंगी 60 दिन में करें अपील
प्रदेश में 1066 कॉलेजों पर ताले से 1.06 लाख सीटें कम होंगी। अभी 4.80 लाख सीटें हैं अब सीटें 3.74 लाख रह जाएंगी। स्वावित्तपोषित डिग्री कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी कहते हैं कि किसी कॉलेज को लगता है कि मानक पूरे हैं और ज्यादती हो रही है तो 60 दिनों में एनसीटीई में अपील करे



यूपी के 1066 कॉलेजों में बीएड व डीएलएड के प्रवेश पर रोक,  ऑनलाइन परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PAR) न जमा करने पर NCTE ने लगाई रोक

50 कॉलेजों के पते ही फर्जी निकले, जांच के दिए आदेश


लखनऊ । प्रदेश में बीएड व डीएलएड कोर्स चला रहे 1066 कॉलेजों के दाखिले पर तलवार लटक गई है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने ऑनलाइन परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (पीएआर) न भरने वाले और मानकों के साथ खिलवाड़ करने वाले इन संस्थानों में वर्ष 2025-26 में प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। जिसमें से 50 कॉलेज ऐसे हैं, जहां एनसीटीई की ओर से भेजा गया नोटिस डाक विभाग की ओर से यह कहकर वापस कर दिया गया कि जिन पते पर इन्हें भेजा गया है, वहां यह कॉलेज नहीं हैं। बीते दिनों एनसीटीई की नॉर्दन रीजन की मीटिंग में देश भर में ऐसे 2767 कॉलेजों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।


कॉलेजों की गुणवत्ता व मानकों के अनुसार संस्थान चल रहे हैं, इन्हें आंकने के लिए पीएआर ऑनलाइन भरवाई जाती है। वर्ष 2021-22 व वर्ष 2022-23 की ही पीएआर इन कॉलेजों ने नहीं जमा की। यही नहीं कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद इन्हें 15 दिनों का समय अपना पक्ष रखने के लिए दिया गया उस पर भी इन संस्थानों ने कोई जवाब नहीं दिया।


 उत्तर प्रदेश के 1066 में से 50 कॉलेजों के पते पर भेजी गई नोटिस बैरंग वापस लौट आई। 212 संस्थानों ने वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-23 की पीएआर रिपोर्ट ऑनलाइन न जमा किए जाने के बावजूद लापरवाही बरती और एनसीटीई को जवाब नहीं दिया। वहीं 804 कॉलेज ऐसे हैं, जिन्होंने एनसीटीई की ओर से पीएआर रिपोर्ट न जमा करने पर नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा तो इन्होंने भी कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। 


प्रदेश में रविवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी की ओर से बीएड की प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाना है। जिसमें 3.33 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। उससे पहले एनसीटीई ने बीएड व उसके साथ डीएलएड कोर्स चला रहे कॉलेजों पर चाबक चला दिया है।


पीएआर मॉड्यूल

मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही तय करने के लिए पीएआर मॉड्यूल लागू किया गया है। जिसे मान्यता प्राप्त संस्थाएं दाखिल करती हैं। वह बताती हैं कि वह एनसीटीई के सभी मापदंडों व मानकों का पालन कर रहीं हैं या नहीं। अगर रिपोर्ट के अनुसार मानक में कोई कमी होती है तो फिर उस कॉलेज का विशेषज्ञ कमेटी निरीक्षण करती है। सरकारी संस्थानों को पांच हजार, निजी को 15 हजार पीएआर की प्रॉसेसिंग फीस जमा करना जरूरी होता है। इन संस्थाओं ने उसे जमा नहीं किया।