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Friday, September 4, 2026

शिक्षामित्रों को भी मिले टीईटी में शामिल होने का अवसर, प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षामित्र नहीं पास हैं टीईटी, आंदोलन करने की तैयारी

शिक्षामित्रों को भी मिले टीईटी में शामिल होने का अवसर, प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षामित्र नहीं पास हैं टीईटी,  आंदोलन करने की तैयारी


प्रयागराज। शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित कराए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस परीक्षा में शिक्षामित्रों को नहीं शामिल किया गया है। इससे शिक्षामित्रों में नाराजगी है। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की ओर से मांग की गई है कि इस पर सरकार को विचार करने की जरूरत है।


शिक्षामित्र भी लंबे समय से विद्यालयों में कार्यरत हैं और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों ने सेवा के दौरान बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया है। इसके बावजूद उन्हें विभागीय टीईटी का अवसर न दिया जाना गलत है। करीब 1.43 लाख में करीब 70 हजार शिक्षामित्र हैं जो टीईटी पास नहीं हैं।

प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा, "सरकार जब सेवारत अध्यापकों को विभागीय टीईटी के माध्यम से अपनी पात्रता पूरी करने का अवसर दे सकती है तो 26 वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षामित्रों के लिए ऐसा अवसर क्यों नहीं? यदि शिक्षामित्रों शिक्षामित्रा को नजरअंदाज किया गया तो प्रयागराज से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू होगा।"

संघ के जिला महामंत्री सुनील तिवारी ने कहा, "एक तरफ सेवारत अध्यापकों के लिए विशेष टीईटी की व्यवस्था की जा रही है और दूसरी तरफ शिक्षामित्रों को उस अवसर से वंचित किया जा रहा है।

Friday, August 7, 2026

शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने सहित रखी कई मांगें, मुख्यमंत्री से मिले एमएलसी व शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारी

शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने सहित रखी कई मांगें, मुख्यमंत्री से मिले एमएलसी व शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारी

7 अगस्त 2026
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान को लेकर शिक्षामित्र संघ का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मिला। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को सुनकर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।


एमएलसी कुंवर महाराज सिंह के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने सीएम से शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से 62 साल करने, शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल करने, टीईटी पास शिक्षामित्र जो एनसीटीई की सभी अर्हताओं को पूरा करते हैं, उन्हें नियमित करने का अनुरोध किया। 

संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला ने बताया कि इसके साथ ही महिला शिक्षामित्रों के तबादले व मूल विद्यालय वापसी व्यवस्था को पूरा कराने, मृतक शिक्षामित्रों के परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ नौकरी देने का अनुरोध भी किया गया। इसके साथ ही शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि, कैशलेस चिकित्सा कार्ड और जीवन सुरक्षा कवर जैसी व्यवस्था लागू करने के लिए आभार भी जताया। मुलाकात में प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार भी उपस्थित थे। 



शिक्षामित्रों को सुपरटेट से छूट सहित सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष करने और विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को भी शामिल करने की रखी मांग

बेसिक शिक्षा मंत्री से मिला शिक्षामित्र संघ का प्रतिनिधिमंडल

5 अगस्त 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह से मुलाकात की। इसमें शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देते हुए नियमितीकरण की मांग की गई।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि टीईटी पास व एनसीटीई के सभी मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देते हुए उन्हें विद्यालयों में शिक्षकों को मिलने वाली सभी सुविधाओं के साथ समायोजित किया जाए। 

सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल से बढ़ाकर 62 साल की जाए और पूरे 12 महीने का मानदेय दिया जाए। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए होने वाली विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को भी शामिल होने का अवसर दिया जाए। 

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों की मांगों को पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह, रामसेवक पाल, मंडल उपाध्यक्ष अयोध्या दिनेश वर्मा शामिल थे।

Thursday, July 23, 2026

टीईटी से राहत / छूट देने संबंधी लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों की जानकारी दी, संशोधन, छूट या राहत पर नहीं की कोई पुष्टि

टीईटी से राहत / छूट देने संबंधी लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों की जानकारी दी, संशोधन, छूट या राहत पर नहीं की कोई पुष्टि 


नई दिल्ली। लोकसभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों की जानकारी दी। सरकार ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षक नियुक्ति के लिए निर्धारित न्यूनतम अनिवार्य अर्हताओं में से एक है।

सरकार ने यह भी अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 के अपने आदेश में टीईटी अर्हता प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है, ताकि पात्र शिक्षकों को आवश्यक योग्यता हासिल करने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों एवं संबंधित प्राधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे टीईटी का आयोजन नियमित रूप से करें तथा संभव हो तो वर्ष में दो बार, लगभग छह माह के अंतराल पर परीक्षा आयोजित करने का प्रयास करें। इससे पात्र अभ्यर्थियों एवं कार्यरत शिक्षकों को निर्धारित समयसीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने का उचित अवसर मिल सकेगा।

केंद्र सरकार ने अपने उत्तर में यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और तैनाती राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र का विषय है। इसलिए टीईटी से संबंधित कार्यरत शिक्षकों का राज्यवार विवरण संबंधित राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पास उपलब्ध है।


उत्तर में टीईटी से छूट (Exemption/Relaxation) देने के लिए किसी प्रकार की नई पहल, संशोधन प्रस्ताव, या प्रक्रिया चलने की बात नहीं कही गई है।

पत्र का सार यह है कि—

1️⃣ केंद्र सरकार ने कहा है कि शिक्षक भर्ती, सेवा शर्तें और तैनाती का विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

2️⃣ सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय का उल्लेख किया गया है, जिसमें टीईटी को आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षक नियुक्ति के लिए न्यूनतम अनिवार्य योग्यता माना गया।

3️⃣ 29 मई 2026 के निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि टीईटी प्राप्त करने की अंतिम समय-सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी गई है।

4️⃣ राज्यों को सलाह दी गई है कि टीईटी परीक्षा नियमित रूप से, अधिमानतः वर्ष में दो बार आयोजित करने का प्रयास करें ताकि पात्र शिक्षक समय-सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण कर सकें।


ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रश्न (c) और (e) में सांसद ने स्पष्ट रूप से पूछा था कि

🔴 क्या आरटीई अधिनियम की धारा 23 में संशोधन कर पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत देने का प्रस्ताव है?

🔴 क्या किसी प्रकार की संक्रमणकालीन (transitional) राहत पर विचार किया जा रहा है?


लेकिन सरकार के उत्तर में इन दोनों बिंदुओं पर किसी भी संशोधन, छूट या राहत पर विचाराधीन होने की पुष्टि नहीं की गई। उत्तर केवल वर्तमान कानूनी स्थिति, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और समय-सीमा बढ़ाने तक सीमित है।

Friday, June 19, 2026

केवल शिक्षकों के लिए 'विशेष टीईटी' सरकार के लिए चुनौती, सरकार ने विशेष टीईटी के लिए निदेशक से मांगी है सूचना

केवल शिक्षकों के लिए 'विशेष टीईटी' सरकार के लिए चुनौती, बेरोजगारों या शिक्षामित्रों को बाहर रखने पर विवाद होना तय, गाइडलाइन बनी बाधा

पहले उर्दू की विशेष टीईटी को एनसीटीई ने गलत माना था

सरकार ने विशेष टीईटी के लिए निदेशक से मांगी है सूचना


प्रयागराज । चुनावी साल में सेवारत परिषदीय शिक्षकों को तोहफा देते हुए प्रदेश सरकार विशेष टीईटी कराने पर विचार कर रही है लेकिन इसे कराना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 और उसके बाद के फैसलों के बाद सरकार यह कदम उठाने जा रही है ताकि हजारों शिक्षकों की सेवा बनी रहे। सर्वोच्च न्यायालय ने दो टूक कहा है कि आरटीई लागू होने के पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी करना अनिवार्य है।


इस बीच महत्वपूर्ण कानूनी सवाल है कि क्या आरटीई के तहत टीईटी में बैठने के पात्र योग्य अभ्यर्थियों को विशेष टीईटी के आवेदन से वंचित किया जा सकता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अपने दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि टीईटी सभी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखने वाले पात्र अभ्यर्थियों के लिए खुला होना चाहिए। परीक्षा का आयोजन केंद्र और राज्य सरकारें करेंगी, पर एनसीटीई के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है। इसमें पारदर्शिता, सुरक्षा और समान अवसर पर विशेष बल दिया गया।

सरकार यदि विशेष टीईटी से शिक्षामित्र और अन्य पात्र अभ्यर्थियों (नए युवा उम्मीदवारों) को पूरी तरह बाहर रखती है तो यह आरटीई एक्ट 2009 का उल्लंघन होगा क्योंकि एनसीटीई टीईटी को सभी योग्य व्यक्तियों के लिए न्यूनतम बेंचमार्क मानती हैं, न कि केवल इन-सर्विस शिक्षकों तक सीमित है। उधर शिक्षामित्र भी अपनी लंबी सेवा का हवाला देते हुए लंबे समय से विभागीय टीईटी की मांग कर रहे हैं।

वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश सरकार ने हिंदी, उर्दू और संस्कृत की भाषा टीईटी कराई थी जिसमें एनसीटीई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए निबंधात्मक प्रश्न तक पूछे गए थे। उर्दू उत्तीर्ण लगभग छह हजार बेरोजगारों को नौकरी भी दे दी थी। उक्त भाषा टीईटी को नूतन ठाकुर ने जनहित याचिका में चुनौती दी थी। जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि वह भविष्य में एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही टीईटी आयोजित करेगी, जिस पर उच्च न्यायालय ने नियुक्त हो चुके शिक्षक शिक्षिकाओं को राहत प्रदान कर दी थी।

इस तरह से भाषा टीईटी को निरस्त तो नहीं किया गया लेकिन सरकार को उच्च न्यायालय ने ऐसी गलती न दोहराने की हिदायत दी थी। ऐसे में विशेष टीईटी कराना सरकार के लिए अग्निपरीक्षा साबित होगी।

Sunday, June 7, 2026

सुप्रीम कोर्ट के टीईटी की अनिवार्यता के आदेश के बाद नई मांग: सेवा अनुभव को वेटेज देकर कराया जाए विभागीय टीईटी

सुप्रीम कोर्ट के टीईटी की अनिवार्यता के आदेश के बाद नई मांग: सेवा अनुभव को वेटेज देकर कराया जाए विभागीय टीईटी

7 जून 2026
लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर हाल में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में लंबे समय से कार्यरत टीईटी-प्रभावित शिक्षकों के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इसी क्रम में एक ओर शिक्षक संगठन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सेवा अनुभव को महत्व देते हुए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित करने की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने का आग्रह किया है।


ज्ञापन में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया निर्णय में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए राज्यों को वर्ष में कम से कम दो बार टीईटी आयोजित करने तथा प्रभावित शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया है। ऐसे में प्रदेश में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अलग से विभागीय टीईटी आयोजित किया जाना चाहिए।

मांग करने वालों का तर्क है कि परिषदीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने वर्षों तक विद्यालयों में शिक्षण कार्य किया है और शिक्षा व्यवस्था को संभाले रखा है। यदि केवल औपचारिक परीक्षा के आधार पर उनकी सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसका असर न केवल शिक्षकों पर पड़ेगा बल्कि विद्यालयों के संचालन और लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि विभागीय टीईटी में शिक्षकों की सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त अंक (वेटेज) दिए जाएं। साथ ही न्यूनतम उत्तीर्णांक में आवश्यक शिथिलता प्रदान कर अनुभव और दक्षता के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को एक न्यायसंगत अवसर मिल सकेगा और शिक्षा व्यवस्था में अचानक उत्पन्न होने वाली अस्थिरता से भी बचा जा सकेगा।

ज्ञापन और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई मांगों के बाद अब निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। शिक्षा जगत में यह चर्चा तेज है कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना का पालन करते हुए अनुभवी शिक्षकों के लिए कोई विशेष व्यवस्था या विभागीय टीईटी मॉडल तैयार करेगी, अथवा सभी प्रभावित शिक्षकों को सामान्य टीईटी प्रक्रिया से ही गुजरना होगा। फिलहाल इस मुद्दे ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


टीईटी की अनिवार्यता को लेकर मुख्यमंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल

6 जून 2026
लखनऊः  शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहे संकट के दृष्टिगत विधान परिषद के दो सदस्यों और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर उन्हें अपनी चिंता से अवगत कराया।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से कहा कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद संकट में हैं। शिक्षकों के लंबे अनुभव को देखते हुए उनके लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित की जाए और उन्हें सेवा अनुभव के आधार पर वेटेज देते हुए उनकी सेवाएं सुरक्षित की जाएं। प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल व देवेंद्र प्रताप सिंह और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी व संयुक्त महामंत्री अमित सिंह शामिल थे।

योगी के समक्ष सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को सहानुभूतिपूर्वक सुना और भरोसा दिलाया कि सभी शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाएगी और उनकी सेवाएं सुरक्षित रखने का प्रयास जारी रहेगा।



परिषदीय स्कूलों में सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय टीईटी कराएं

5 जून 2026
लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.86 लाख सेवारत शिक्षकों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच भाजपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेंद्र प्रताप सिंह ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को पत्र लिखकर सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित करने और उनकी सेवा अवधि के आधार पर वेटेज अंक देने की मांग की है।.

पत्र में उन्होंने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों को सेवारत शिक्षकों के लिए वर्ष में कम से कम दो बार टीईटी आयोजित करने का निर्देश दिया है। साथ ही टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा में एक वर्ष का अतिरिक्त विस्तार भी दिया गया है। ऐसे में प्रदेश सरकार को प्रभावित शिक्षकों को राहत देने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए। यदि शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसका असर स्कूलों के संचालन के साथ गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

एमएलसी ने सुझाव दिया कि सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित की जाए। इसके साथ ही न्यूनतम उत्तीर्णांक में आवश्यक शिथिलता प्रदान की जाए और शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त भारांक (वेटेज) दिया जाए।

Friday, June 5, 2026

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक महासंघ करेगा आंदोलन, गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करने का ऐलान

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक महासंघ करेगा आंदोलन, गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करने का ऐलान

लखनऊटीईटी की अनिवार्य के विरोध में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ आंदोलन करने जा रहा है। गुरुवार को हुई महासंघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षक अब शिक्षण कार्य के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करेंगे। इसके साथ जुलाई में जनप्रतिनिधि जवाब दो अभियान भी चलाया जाएगा। वहीं यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने भी जुलाई से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।


महासंघ की बैठक में वक्ताओं ने देश व प्रदेश के सभी शिक्षक और कर्मचारी संगठनों से आह्वान किया है कि वे इस लड़ाई को किसी एक संगठन का मुद्दा न मानकर शिक्षक समाज के अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई समझें और एक मंच पर आकर संयुक्त संघर्ष करें।

 बताया गया कि महासंघ द्वारा पांच जुलाई से 20 जुलाई के मध्य प्रदेश भर में 'जनप्रतिनिधि जवाब दो' अभियान चलाया जाएगा। इसमें सांसदों, विधायकों को ज्ञापन सौंपकर संसद और विधानमंडल में आवश्यक विधायी संशोधन के लिए बिल लाने की मांग की जाएगी। इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो सितंबर में लखनऊ में लाखों शिक्षकों की सहभागिता के साथ विशाल महाआंदोलन किया जाएगा। 

बैठक में महासंघ के महासचिव दिलीप चौहान, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय, अटेवा व एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, विशेष शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनुज शुक्ला आदि उपस्थित रहे। 

वहीं यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि संगठन की प्रदेश कार्यसमिति ने जुलाई में बड़ा आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है।