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Sunday, October 25, 2026

स्पेशल टीईटी की लिखित परीक्षा तीन नवंबर को प्रदेश के छ प्रमुख मंडल मुख्यालयों में होगी, 31 अक्टूबर से डाउनलोड कर सकेंगे प्रवेश पत्र

स्पेशल टीईटी की लिखित परीक्षा तीन नवंबर को प्रदेश के छ प्रमुख मंडल मुख्यालयों में होगी,  31 अक्टूबर से डाउनलोड कर सकेंगे प्रवेश पत्र 



प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शुक्रवार देर रात 'विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा' (विशेष टीईटी) की परीक्षा तिथि और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि स्पेशल टीईटी की लिखित परीक्षा आगामी तीन नवंबर को प्रदेश के 6 प्रमुख मंडल मुख्यालयों में होगी।


परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा के निर्धारित केंद्रों पर दो पालियों में संपन्न होगी। प्रथम पाली सुबह 09:30 से 12 बजे तक और द्वितीय पाली दोपहर 02:30 से पांच बजे तक आयोजित होगी। आयोग की ओर से परीक्षा के लिए आधिकारिक विज्ञापन पांच सितंबर को प्रकाशित किया गया था।

आयोग के उपसचिव संजय कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा और समयबद्ध यात्रा प्रबंधन के दृष्टिगत आवंटित परीक्षा जनपद का विवरण आयोग की अधिकृत वेबसाइट http://upessc.up.gov.in/ पर प्रदर्शित कर दिया गया है।


Friday, October 23, 2026

प्रदेश के मान्यता प्राप्त एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक (स्नातक वेतनक्रम) के पद की अर्हता संशोधन के सम्बन्ध में

प्रदेश के मान्यता प्राप्त एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक (स्नातक वेतनक्रम) के पद की अर्हता संशोधन के सम्बन्ध में



Monday, October 12, 2026

स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्पेशल टीईटी-2026 को लेकर अहम सुनवाई, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश में होने वाली स्पेशल टीईटी परीक्षा-2026 को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दाखिल की गई है। प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की टीईटी परीक्षा में भी आवेदन करने का विकल्प दिए जाने की मांग की है।
याचिकाकर्ता वंदना उपाध्याय एवं 28 अन्य हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा जारी विज्ञापन संख्या-03/2026 दिनांक 03 सितंबर 2026 के क्लॉज 7.1 के पैराग्राफ संख्या-2 को चुनौती दी गई है।

इस क्लॉज के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक केवल प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक केवल उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्राथमिक शिक्षक उच्च प्राथमिक (जूनियर) टीईटी में आवेदन नहीं कर सकते। इसी प्रतिबंध को याचिका में अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत में हुई। कोर्ट नंबर-6 में हुई सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों के वकीलों ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि यह मामला 28 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे दोबारा पेश किया जाए। अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि अगली तारीख पर निर्देश लेने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा।

इस याचिका पर अब 28 अक्टूबर को महत्वपूर्ण सुनवाई होने वाली है। कोर्ट के रुख को देखते हुए इस दिन कोई अहम आदेश या फैसला आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है।



स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की स्पेशल टीईटी-2026 को लेकर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। 

चयन आयोग की ओर से पांच सितंबर को जारी विज्ञापन में यह शर्त है कि प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षक प्राथमिक स्तर की विशेष टीईटी के लिए अर्ह होंगे। जबकि उच्च प्राथमिक स्तर/जूनियर हाईस्कूल स्तर के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक उच्च प्राथमिक स्तर की विशेष टीईटी के लिए अर्ह होंगे। प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की टीईटी में भी आवेदन करने का विकल्प दिए जाने की मांग की है।

 याचिकाकर्ता वंदना उपाध्याय एवं 28 अन्य ने इसी शर्त को चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई पांच अक्तूबर को न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत में हुई और अगली सुनवाई की तारीख 28 अक्तूबर निर्धारित हुई है। अदालत ने साफ किया है कि अगली तारीख पर निर्देश लेने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा।


Friday, October 2, 2026

स्पेशल टीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे शिक्षामित्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी,हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल टीईटी नई नियुक्ति पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं

स्पेशल टीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे शिक्षामित्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी,हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल टीईटी नई नियुक्ति पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं

नियमित शिक्षकों के लिए अनिवार्य योग्यता पूरी करने का एक विशेष अवसर है स्पेशल टीईटी


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में शामिल करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्पेशल टीईटी कोई नई भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सेवारत (इन-सर्विस) नियमित शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अनिवार्य योग्यता पूरी करने का एक विशेष अवसर है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने वसीम अहमद समेत 221 शिक्षामित्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

मामले के तथ्यों के अनुसार उत्तर प्रदेश शासन ने गत दो सितंबर को एक शासनादेश जारी किया था, जिसके तहत उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को स्पेशल टीईटी आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद आयोग ने गत तीन सितंबर को परीक्षा की अधिसूचना जारी की।

याची शिक्षामित्रों ने इस शासनादेश और अधिसूचना को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि वे लगभग 26 वर्षों से परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नियमित सहायक अध्यापकों की तरह ही शिक्षण कार्य कर रहे हैं। एनसीटीई की न्यूनतम अर्हता रखने के बावजूद उन्हें स्पेशल टीईटी से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 16 (अवसर की समानता) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है, ऐसे में उन्हें भी अपनी सेवा सुरक्षा व भविष्य के लिए इस परीक्षा में बैठने का अवसर मिलना चाहिए।

आयोग व राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (अंजुमन इशअत-ए-तालीम ट्रस्ट व समीक्षा याचिका आदेश) के अनुपालन में केवल उन इन-सर्विस शिक्षकों को छूट/अवसर दिया गया है, जिनकी नियुक्ति टीईटी अनिवार्य होने से पूर्व हो चुकी थी और जिनकी सेवा निरंतरता टीईटी पास करने पर निर्भर है।

शिक्षामित्र संविदा व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं और वे नियमित इन-सर्विस शिक्षकों के समकक्ष नहीं हैं। जुलाई 2026 में आयोजित नियमित टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्र आवेदन करने के लिए पात्र थे लेकिन उन्होंने उसमें भाग नहीं लिया। कोर्ट ने शिक्षामित्रों की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि स्पेशल टीईटी किसी नई नियुक्ति, पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं है। यह केवल उन सेवारत शिक्षकों के लिए एक संक्रांतिकालीन व्यवस्था है, जिनकी नौकरी बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी पास करना अनिवार्य किया है। 

शिक्षामित्रों की नियुक्ति का स्वरूप और विधिक दर्जा नियमित सहायक अध्यापकों से पूरी तरह भिन्न है। असमान वर्गों को एक समान नहीं माना जा सकता इसलिए सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा कराना अनुच्छेद 14 या 16 का उल्लंघन नहीं है। राज्य सरकार ने शासनादेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जारी किया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के दायरे को हाईकोर्ट अपनी मर्जी से नहीं बढ़ा सकता।

... तो खटखटा सकते हैं न्यायालय का दरवाजा

कोर्ट ने इसी मुद्दे पर प्रतीक मिश्र व दो अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी व सरकारी वकील को सुनने के बाद याचिका खारिज करते हुए याचियों को यह छूट दी है कि भविष्य में भर्ती प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार स्पेशल टीईटी प्राप्त शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध कोई अनुचित वरीयता या आरक्षण देती है, तो वे उसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।



विभागीय  TET  में बैठने की मांग को लेकर दायर शिक्षामित्रों की याचिका खारिज, देखें हाईकोर्ट ऑर्डर

01 अक्टूबर 2026





शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर देने की मांग के लिए दाखिल याचिका पर फैसला सुरक्षित

25 सितंबर 2026
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में आवेदन का अवसर दिए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर गुरुवार को निर्णय सुरक्षित कर लिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिया।

वसीम अहमद एवं 220 अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से अधिवक्ता जेन अब्बास ने शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल किए जाने के मुद्दे पर कहा कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षामित्र लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों का करीब 26 वर्षों से बतौर शिक्षक शिक्षण कार्य के साथ निर्वाचन कार्य, चुनाव ड्यूटी, एसआईआर, जनगणना, मतगणना, बालगणना, विद्यालय संचालन प्रभार, सरकार द्वाराजैन अब्बास आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में कक्ष निरिक्षक ड्यूटी, गुणवत्ता संवर्धन के लिए विभाग द्वारा कराए जाने वाले समस्त प्रशिक्षण अध्यापक के समान अनुभव है।

इसके बाद भी विशेष टीईटी में आवेदन के अवसर को लेकर शिक्षामित्रों के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है जबकि अन्य श्रेणियों में कार्यरत शिक्षकों एवं विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया है। यह भी तर्क रखा गया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भविष्य में शिक्षण कार्य जारी रखने के लिए टीईटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर दिया जाना आवश्यक है।



विशेष टीईटी में योग्यता में छूट को दी चुनौती, आज हाईकोर्ट में सुनवाई

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। हाईकोर्ट में बीटीसी (डीएलएड), बीएड एवं दूरस्थ बीटीसी पास प्रतीक मिश्रा एवं दो अन्य अभ्यर्थियों ने विशेष टीईटी के लिए निर्धारित योग्यता में छूट को चुनौती दी है। याचिका में दो सितंबर के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें राज्य सरकार ने सेवारत शिक्षकों की टीईटी योग्यता संबंधी शर्त को शिथिल कर दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में फैसला सुनाया था कि सेवारत शिक्षकों को दो साल के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य है। पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने दो वर्ष की छूट को तीन वर्ष कर दिया है। इस तरह से सेवारत शिक्षकों को एक सितंबर 2028 के पूर्व टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। याचियों का आरोप है कि राज्य सरकार के आदेश से सुप्रीम कोर्ट के फैसले एवं आरटीई एक्ट 2009 की मूल भावना का उल्लंघन हो रहा है। इस मामले की सुनवाई 16 सितंबर को होगी।



विशेष टीईटी में मौके पाने की जद्दोजहद में हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षामित्र, आज सुनवाई 

हाईकोर्ट में कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों ने दायर की याचिका

सरकार ने टीईटी में केवल सेवारत एवं विशेष शिक्षकों से मांगे आवेदन

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से सेवारत एवं विशेष शिक्षकों के लिए कराई जा रही विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अवसर देने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की है। कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें भी स्पेशल टीईटी में बैठने का अवसर दिया जाए, ताकि वे नियमित शिक्षक बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकें।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शिक्षामित्र कोई नए अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी योग्यता, सेवाकाल और अनुभव को नजर अंदाज कर विशेष टीईटी से बाहर रखना उचित नहीं है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के बाद अब इसे 16 सितंबर को प्रतीक मिश्रा व तीन अन्य की याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।


स्पेशल TET में शामिल होने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों की दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को 'स्पेशल TET' (विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। शिक्षामित्रों की इस पहल से परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों की नजरें अब अदालत के आगामी फैसलों पर टिक गई हैं।


शिक्षामित्रों द्वारा दायर याचिकाओं और उनकी स्थिति का विवरण निम्न प्रकार है:


Writ A 14346/2026 (प्रतीक मिश्रा व अन्य): इस याचिका पर 10 सितंबर 2026 को प्रारंभिक सुनवाई संपन्न हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने इसकी अगली सुनवाई की तिथि 16 सितंबर 2026 तय की है।

Writ A 14495/2026 (कुमारी गुलाबी व अन्य): शिक्षामित्रों द्वारा राहत की मांग को लेकर दाखिल की गई इस दूसरी याचिका पर आज 14 सितंबर 2026 को उच्च न्यायालय की पीठ में सुनवाई होनी तय हुई है।

इन दोनों ही याचिकाओं के माध्यम से शिक्षामित्रों ने माननीय न्यायालय से प्रार्थना (Prayer) की है कि उन्हें भी स्पेशल TET परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए। 14 और 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अदालत शिक्षामित्रों को इस परीक्षा में बैठने की अनुमति देती है या नहीं।


Wednesday, September 30, 2026

विशेष टीईटी पर प्रधानाध्यापक असमंजस में, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सिर्फ प्राइमरी टीईटी का विकल्प

विशेष टीईटी पर प्रधानाध्यापक असमंजस में, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सिर्फ प्राइमरी टीईटी का विकल्प

पदोन्नति के लिए उच्च प्राथमिक टीईटी की पात्रता पर सवाल

 लखनऊ : विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन को लेकर कुछ शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है। खासकर प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि उन्हें प्राथमिक स्तर की टीईटी देनी है या उच्च प्राथमिक स्तर की। आवेदन की अंतिम तिथि चार अक्टूबर है और परीक्षा तीन नवंबर को होनी है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने बेसिक शिक्षा विभाग से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी का विकल्प दिया गया है। इससे प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक असमंजस में हैं। उनका कहना है कि उनका पद उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक के समकक्ष माना जाता है। ऐसे में उन्हें उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी में आवेदन का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है?

 शिक्षकों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए वर्तमान पद पर बने रहने को संबंधित स्तर की टीईटी और पदोन्नति के लिए उच्च स्तर की टीईटी जरूरी है। ऐसे में प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए केवल प्राथमिक टीईटी का विकल्प रखने से पदोन्नति की पात्रता प्रभावित हो सकती है। कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत प्राथमिक संवर्ग के प्रधानाध्यापकों की स्थिति भी इसी तरह की है। शिक्षकों की मांग है कि उन्हें दोनों स्तर की टीईटी में आवेदन की अनुमति दी जाए, ताकि वर्तमान पद की पात्रता के साथ भविष्य की पदोन्नति का रास्ता भी खुला रहे। आवेदन की अंतिम तिथि से पहले स्पष्ट निर्देश जारी करने व आवश्यक पर संशोधित अधिसूचना जारी करने की मांग की है।



पद समकक्ष तो जूनियर TET देने का मौका क्यों नहीं? प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल से कंपोजिट स्कूल में तैनात शिक्षक परेशान

प्राइमरी और अपर प्राइमरी के शिक्षकों के लिए अलग-अलग होनी है स्पेशल टीईटी की परीक्षा


लखनऊः विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तैनात शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। सबसे अधिक परेशानी प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कंपोजिट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को हो रही है, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे प्राथमिक स्तर की टीईटी दें या उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की।


क्या है विवाद?: बेसिक शिक्षा विभाग के कैडर स्ट्रक्चर के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक का पहला प्रमोशन 'प्राथमिक का हेडमास्टर' या 'जूनियर का सहायक अध्यापक' के तौर पर होता है। दोनों पद समान वेतनमान और समकक्ष है, जबकि अगला प्रमोशन जूनियर विद्यालय के प्रधानाध्यापक के तौर पर होता है।

अब शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि जब प्राथमिक हेडमास्टर का पद जूनियर के सहायक अध्यापक के समकक्ष है, तो उन्हें केवल प्राथमिक टीईटी का ही विकल्प क्यों दिया जा रहा है? उन्हें उच्च प्राथमिक (जूनियर) टीईटी में भी मौका मिलना चाहिए। कंपोजिट स्कूलों में प्राथमिक हेडमास्टरों का पद 'मानव संपदा पोर्टल' पर प्रधानाध्यापक/जूनियर सहायक अध्यापक दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत वर्तमान पद पर बने रहने और भविष्य में पदोन्नति पाने के लिए संबंधित और उच्च स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। शिक्षकों का कहना है कि यदि उन्हें अभी सिर्फ प्राथमिक टीईटी का विकल्प मिला, तो कल को जूनियर स्तर पर होने वाली पदोन्नति की पात्रता पर संकट खड़ा हो जाएगा।


स्पष्ट गाइडलाइन की मांगः शिक्षकों को दोनों स्तरों (प्राथमिक और उच्च प्राथमिक) की टीईटी में आवेदन करने की छूट दी जाए। कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षकों और प्राथमिक प्रधानाध्यापकों के संबंध में संशोधित अधिसूचना व स्पष्ट निर्देश जारी किए जाए।

Monday, September 14, 2026

यूपीटीईटी पास 38.05 लाख, विज्ञापित पद सिर्फ 3.22 लाख, उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की तुलना में मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित

यूपीटीईटी पास 38.05 लाख, विज्ञापित पद सिर्फ 3.22 लाख,  उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की तुलना में मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित

वर्ष 2011 में पहली बार शुरू की गई शिक्षक पात्रता परीक्षा


प्रयागराज : प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षक भर्ती को लेकर आंदोलन चल रहे हैं। प्रयागराज में भी लंबे समय से धरना और ज्ञापन का सिलसिला चल रहा है। कभी शिक्षा सेवा चयन आयोग तो कभी सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी या सिविललाइंस के धरना स्थल पर प्रतियोगी छात्रों की मांगों की गूंज सुनाई देती है। उनका कहना है कि नौकरियों के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। अब तक पदों का विज्ञापन कितना सीमित रहा, इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि वर्ष 2011 में पहली बार शिक्षक पात्रता परीक्षा कराई गई। इसमें 270806 अभ्यर्थी सफल हुए। यदि इस वर्ष तक की परीक्षा के आंकड़े को जोड़ दें तो प्रदेश में कुल 3805377 प्रतियोगी छात्र छात्राओं ने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। 2011 से अब तक के पदों के विज्ञापन का कुल आंकड़ा देखें तो मात्र 321917 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए।


अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वालों और पदों के विज्ञापन के आंकड़े को देखें तो मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित हुए। इनमें भी बहुत से पदों को लेकर न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं। वर्ष 2013 में 102755 अभ्यर्थियों ने टीईटी पास की। इसमें 27882 प्राथमिक स्तर के, 74873 उच्च प्राथमिक के अभ्यर्थी रहे। 2014 में यह संख्या 184700 पहुंच गई। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के क्रमशः 71331 व 123369 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। 2015 में उत्तीर्ण 146415 अभ्यर्थियों में प्राथमिक के 59062 व उच्च प्राथमिक के 87353 रहे। वर्ष 2016, 2017, 2018 और 2019 में क्रमशः 75364, 94311, 574783 और 354703 अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफता प्राप्त की। 2021 में यह आंकड़ा 660592 रहा। 


इन सब के लिए शिक्षक बनने के अवसर पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2011 में प्राथमिक सतर पर बेसिक शिक्षा विभाग ने 72825 पदों का विज्ञापन जारी किया। 2012 में 9770 पद विज्ञापित हुए। 2013 में तीन बार पदों का विज्ञापन हुआ। एक बार 10800, दूसरी पर 10000 तीसी पर उर्दू के लिए 4280 पदों के विज्ञापन आए। 2015 में 15000, 2016 में उर्दू के 3500 पद और सामान्य शिक्षक भर्ती के 16448 और 12460 पदों का विज्ञापन जारी हुआ। 2018-19 में 69000 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आया। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान और गणित विषय की भर्ती का विज्ञापन भी 2013 में आया। उनकी संख्या 29334 रही।


 2018 के बाद से प्रतियोगी छात्र छात्राओं को भर्ती का इंतजार है। इसके लिए वे निरंतर आंदोलन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती के करीब 60000 पद रिक्त हैं। उधर, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सुरेन्द्र कुमार तिवारी का कहना है कि अभी नगर क्षेत्र के लिए 11500 शिक्षकों की भर्ती के लिए अधियान भेजा गया है, शेष के लिए प्रक्रिया चल रही है।