टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक महासंघ करेगा आंदोलन, गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करने का ऐलान
लखनऊ : टीईटी की अनिवार्य के विरोध में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ आंदोलन करने जा रहा है। गुरुवार को हुई महासंघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षक अब शिक्षण कार्य के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करेंगे। इसके साथ जुलाई में जनप्रतिनिधि जवाब दो अभियान भी चलाया जाएगा। वहीं यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने भी जुलाई से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
महासंघ की बैठक में वक्ताओं ने देश व प्रदेश के सभी शिक्षक और कर्मचारी संगठनों से आह्वान किया है कि वे इस लड़ाई को किसी एक संगठन का मुद्दा न मानकर शिक्षक समाज के अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई समझें और एक मंच पर आकर संयुक्त संघर्ष करें।
बताया गया कि महासंघ द्वारा पांच जुलाई से 20 जुलाई के मध्य प्रदेश भर में 'जनप्रतिनिधि जवाब दो' अभियान चलाया जाएगा। इसमें सांसदों, विधायकों को ज्ञापन सौंपकर संसद और विधानमंडल में आवश्यक विधायी संशोधन के लिए बिल लाने की मांग की जाएगी। इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो सितंबर में लखनऊ में लाखों शिक्षकों की सहभागिता के साथ विशाल महाआंदोलन किया जाएगा।
बैठक में महासंघ के महासचिव दिलीप चौहान, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय, अटेवा व एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, विशेष शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनुज शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
वहीं यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि संगठन की प्रदेश कार्यसमिति ने जुलाई में बड़ा आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है।
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