अनुकंपा नियुक्ति पर दूसरी बार ऊंचे पद का दावा नहीं स्वीकार्य : हाईकोर्ट, चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी मिलने के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक पद की मांग खारिज
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सेवा मामलों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी मृतक कर्मचारी के आश्रित को एक बार अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल चुकी है, तो बाद में उसे किसी ऊंचे पद पर दोबारा अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। अदालत ने इसी आधार पर सुल्तानपुर निवासी दिलीप कुमार जायसवाल की याचिका खारिज कर दी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अमिताभकुमार राय की एकल पीठ ने दी। याचिकाकर्ता दिलीप कुमार जायसवाल के पिता सुल्तानपुर के एक इंटर कॉलेज में सहायक शिक्षक थे। 2003 में उनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 2004 में दिलीप को अनुकंपा के आधार पर दूसरे इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर नौकरी दी गई।
बाद में दिलीप ने स्नातकोत्तर और बीएड की पढ़ाई पूरी कर ली। इसके आधार पर उसने एलटी ग्रेड सहायक शिक्षक के पद पर दोबारा अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) सुल्तानपुर ने 2007 में उसका आवेदन खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता ने डीआईओएस के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस का फैसला पूरी तरह सही और कानून के अनुरूप है। इसमें दखल की जरूरत नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना होता है, न कि बाद में बेहतर पद प्राप्त करने का अवसर देना। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
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