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Thursday, October 8, 2026

प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता को लेकर अब बढ़ा विवाद, नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में दायर की याचिकाएं

प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता को लेकर अब बढ़ा विवाद, नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में दायर की याचिकाएं 

परास्नातक में 50 प्रतिशत अंक के नियम का हो रहा विरोध

आठ अक्तूबर से प्रस्तावित है प्रधानाचार्य भर्ती के आवेदन

8 अक्टूबर 2026
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य 1172 एवं प्रधानाध्यापक 1475 पदों पर भर्ती के आवेदन शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से 13 साल बाद आठ अक्तूबर से इस भर्ती के आवेदन प्रस्तावित हैं। इस बीच नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में याचिकाएं दायर कर दी हैं।

 इलाहाबाद हाईकोर्ट में दुर्गेश कुमार और नौ अन्य की ओर से 28 सितंबर को याचिका दायर की गई है। सर्वाधिक विरोध बीएड और परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि बिना बीएड नियुक्त हजारों शिक्षक आवेदन से वंचित हो जाएंगे।

वहीं परास्नातक में 50 प्रतिशत की अनिवार्यता संबंधी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की कोई गाइडलाइन नहीं होने के बावजूद इसे लागू करना अनुचित है। लिहाजा नियमानुसार पूर्व से नियुक्त प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापकोंको अनुभवके आधार पर बीएड प्रशिक्षण से छूट प्रदान करने तथा बीएड के समकक्ष (एलटी आदि) प्रशिक्षणों को स्वीकार करने की मांग कर रहे हैं।

दो सितंबर को जारी संशोधन में प्रधानाचार्य भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) और केन्द्र /राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता या सहायक अध्यापक या हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्युनतम चार वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए मान्य किया गया है। 

प्रधानाध्यापक भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) अथवा बीपीएड की उपाधि अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास केन्द्र/राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता अथवा सहायक अध्यापक अथवा जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्यूनतम चार वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। अभ्यर्थी की आयु 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए।




वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी बाहर, भर्ती से हजारों एलटी प्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर करने से नाराजगी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने पैदा की अजीब स्थिति

केवल बीएड अभ्यर्थियों को मान्य किए जाने का विरोध कर रहे कार्यरत शिक्षक

तीन सितंबर को जारी आदेश में बीएड अनिवार्य और पीजी में 50% का प्रावधान

10 सितंबर 2026
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने अजीब स्थिति पैदा कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने एक तरफ वित्तविहीन स्कूल के शिक्षकों को इन पदों पर भर्ती के लिए मान्य कर लिया है तो वहीं एडेड कॉलेजों में सालों से पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 2013 के बाद प्रधानाध्यापक के 1172 और प्रधानाचार्य के 1475 पदों पर अब शुरू होने जा रही भर्ती में तीन सितंबर के शासनादेश के जरिए बीएड अनिवार्य किए जाने के कारण गैर-बीएड वाले शिक्षकों को अयोग्य कर दिया है।


इससे एलटी प्रशिक्षित, कला, व्यायाम और संगीत आदि विषयों के शिक्षक आवेदन नहीं कर सकेंगे। पूर्व में विभागीय कायदे-कानून के तहत इनकी नियुक्ति हुई थी, लेकिन अब इन्हें एक झटके में बाहर कर दिया गया है। इसे लेकर इन शिक्षकों में खासी नाराजगी है। इसके अलावा परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता का भी विरोध हो रहा है। 


शिक्षकों का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना में पूर्वप्राथमिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन के लिए शिक्षकों के विभिन्न स्तर की अहर्ताओं में प्रतिशत (45% या 50%) की अनिवार्यता का निर्देश दिया गया है। हालांकि संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापकों) के पदों के अर्हता में स्नातकोत्तर में 50% अंक के अनिवार्यता का कोई निर्देश नहीं है।


 देश और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भिन्नता है तथा इन विश्वविद्यालयों में पिछले 25 से 30 वर्षों के समयांतराल में पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भी परिवर्तन हो गया है, जिसके कारण इस प्रकार की शर्त उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग संस्था प्रधान भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी करने जा रहा है।


प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक भर्ती में शिक्षा स्नातक तक (बीएड) के साथ एलटी प्रशिक्षण को भी समकक्ष अर्हता के रूप में शामिल करना चाहिए। साथ ही स्नात्तकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए। ये विसंगतियां दूर नहीं हुईं तो उच्च न्यायालय में याचिकाएं होने की आशंका है, जिसके कारण संस्था प्रधान की चयन प्रक्रिया अनावश्यक रूप से बाधित हो सकती है। - लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट।

Tuesday, September 29, 2026

सरकार बनी तो पुरानी पेंशन बहाल करेंगे, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षामित्रों को बनायेंगे शिक्षक, बोले अखिलेश यादव

सरकार बनी तो पुरानी पेंशन बहाल करेंगे, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षामित्रों को बनायेंगे शिक्षक, बोले अखिलेश यादव 

लखनऊ। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश सपा मुख्यालय पर विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक चुनाव की तैयारी को लेकर पार्टी विधायकों और प्रत्याशियों के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें सपा के प्रत्याशियों को जिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में समाजवादी सरकार बनने जा रही है। कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी नेताजी के समय से शिक्षकों के लिए काम करती रही है।


अखिलेश ने कहा कि जब भी मौका मिला, समाजवादी पार्टी ने शिक्षकों के हित में फैसले लिए। वित्तविहीन शिक्षकों के लिए बजट में मानदेय के लिए व्यवस्था करेंगे। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और तदर्थ प्रधानाचार्यों के वेतन संबंधी धारा 12,18 व 21 को बहाल किया जाएगा। आधुनिक मदरसा शिक्षकों का वेतन बहाल किया जाएगा। संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का समाधान होगा। 

शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाकर सम्मान देने का काम किया जाएगा। डिग्री कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम खत्म करेंगे। अनुदेशक, रोजगार और आंगनबाड़ी की समस्याओं का समाधान करेंगे।

Wednesday, August 5, 2026

वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा के लिए नई नीति से सरकार का इंकार, 2001 के शासनादेश का दिया हवाला

वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा के लिए नई नीति से सरकार का इंकार, 2001 के शासनादेश का दिया हवाला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र में पूछे गए तारांकित प्रश्न संख्या-20 के उत्तर में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु फिलहाल कोई नई नीति या सेवा नियमावली बनाने पर सरकार विचार नहीं कर रही है।

सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्तें 10 अगस्त 2001 के शासनादेश में पहले से निर्धारित हैं। इसके अनुसार अंशकालिक अध्यापकों का पारिश्रमिक विद्यालय प्रबंधन अपने संसाधनों से नियमित रूप से पूरे शिक्षण सत्र के दौरान देगा तथा उसका लेखा-जोखा भी रखा जाएगा। साथ ही यह भी प्रावधान है कि उनका भुगतान न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत कुशल श्रमिकों के लिए समय-समय पर निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होगा।

उत्तर में यह भी कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन ऐसे अंशकालिक शिक्षकों के लिए नियमानुसार भविष्य निधि (EPF) तथा जीवन बीमा जैसी योजनाएं भी लागू करेगा, जिनमें नियोक्ता का अंशदान प्रबंधन अपने निजी संसाधनों से वहन करेगा।

इस प्रकार सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए अलग से नई सेवा नीति बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है और वर्तमान व्यवस्था 2001 के शासनादेश के अनुसार ही संचालित रहेगी।


Sunday, August 2, 2026

यूपी में 25 हजार निजी माध्यमिक स्कूलों के 3.50 लाख शिक्षकों की बनेगी सेवा नियमावली

यूपी में 25 हजार निजी माध्यमिक स्कूलों के 3.50 लाख शिक्षकों की बनेगी सेवा नियमावली

 ● बिना वाजिब कारण बताए शिक्षकों को नहीं हटा सकेंगे

● निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी

01 अगस्त 2026
लखनऊ ।  राज्य सरकार यूपी के 25 हजार निजी माध्यमिक स्कूलों के 3.50 लाख शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करने जा रही है। इसके लिए सेवानियमावली बनाई जाएगी।

अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। इसकी देखरेख में सेवा नियमावली बनाई जाएगी। इसके बाद बिना वाजिब कारण के शिक्षकों को नौकरी से नहीं हटाया जा सकेगा। नियमावली बनने के बाद निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।

इससे प्रबंधतंत्र की मनमानी पर रोक लगेगी और निजी स्कूलों में योग्य शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ होगा। अर्हता व योग्यता पूरी किए बिना निजी स्कूलों में शिक्षक नहीं पढ़ा सकेंगे। प्रबंधतंत्र को शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देना होगा और आधार लिंक बैंक खाते में वेतन देना होगा। नियमावली में छुट्टियों से लेकर उनकी सेवा को सुरक्षित रखना का भी प्रावधान होगा। 

निजी माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों की सेवा नियमावली बनाए जाने को लेकर सात सदस्यीय कमेटी बनाने का आदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग के उप सचिव चंद्र प्रकाश मिश्र की ओर से जारी किया गया है। कमेटी में सदस्य सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव बनाए गए हैं। 


तय किया जाए न्यूनतम वेतन: शिक्षक संघ

उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा कहते हैं कि आउटसोर्सिंग कर्मियों का न्यूनतम वेतन तय कर दिया गया है। इसलिए निजी विद्यालयों के संसाधनों व छात्रों की संख्या के अनुसार शिक्षकों का न्यूनतम वेतन तय किया जाए। शिक्षकों को अभी बहुत कम वेतन मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो 5000-6000 रुपये ही दिए जाने की जानकारी मिल रही है। अच्छे कॉन्वेंट स्कूलों में 50 हजार व उससे अधिक वेतन मिलता है।




वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा नियमावली तैयार किए जाने की प्रक्रिया ने पकड़ी गति,  30 जुलाई को हुई अहम बैठक, शासन ने अधिकारियों को किया तलब

29 जुलाई 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली तैयार किए जाने की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। इस संबंध में 30 जुलाई 2026 को अपराह्न 3:00 बजे उत्तर प्रदेश सचिवालय स्थित नवीन भवन के सभागार में अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

उप सचिव, माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-7 द्वारा जारी पत्र के अनुसार, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली तैयार करने हेतु पूर्व में गठित सात सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया जा चुका है। इसी क्रम में समिति की बैठक आयोजित की जा रही है।

बैठक में विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ सहित संबंधित अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शिक्षा निदेशक को वित्तविहीन संस्थाओं एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के मामलों से जुड़े दो नामित प्रतिनिधियों को आवश्यक अभिलेखों और सुझावों सहित बैठक में शामिल कराने के निर्देश दिए गए हैं।

माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज को भी वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा नियमावली के संबंध में सभी प्रासंगिक अभिलेखों एवं सुझावों के साथ प्रस्तुतीकरण तैयार कर बैठक में प्रस्तुत करने को कहा गया है।

शासन का मानना है कि इस बैठक में प्राप्त सुझावों और अभिलेखों के आधार पर वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली के प्रारूप को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।


Thursday, July 23, 2026

प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के 3.50 लाख शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ, शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश जारी

प्रदेश के  वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के 3.50 लाख शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ, शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश जारी 

प्रधानाध्यापक करेंगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आवेदन का सत्यापन

लखनऊ। राजकीय और एडेड विद्यालयों के बाद अब प्रदेश के 2500 से अधिक वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के करीब 3.50 लाख शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। शासन ने इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश दे दिया है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से फरवरी 2026 में राजकीय और एडेड विद्यालय में यह सुविधा शुरू करते हुए कहा गया था कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है। इसलिए इनके चिह्नह्मांकन के लिए अलग से आदेश जारी किया जाएगा। इसी क्रम में विभाग के विशेष सचिव उमेश चंद्र ने जारी आदेश में कहा है कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए विकसित पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।

आदेश के मुताबिक शिक्षक खुद और अपने आश्रित का पोर्टल पर आधार कार्ड के अनुसार ब्योरा दर्ज करेंगे। उनके आवेदन का प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य सत्यापन कर अग्रसारित करेंगे। इसमें वे शिक्षक की नियुक्ति नियमानुसार होने और कार्यरत होने का परीक्षण करेंगे। साथ ही संबंधित शिक्षक के किसी कारण से विद्यालय से अलग होने की स्थिति में प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक डीआईओएस को अवगत कराएं। ऐसे शिक्षकों को योजना से अलग रखा जाएगा।

प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य के आवेदन को प्रमाणित करने के बाद अंतिम अनुमोदन डीआईओएस द्वितीय करेंगे। डीआईओएस सत्यापन आवेदन स्वीकृत करेंगे। इस क्रम में माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।



Saturday, May 16, 2026

प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के पंजीकृत छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के सम्बन्ध में

प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के पंजीकृत छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के सम्बन्ध में