प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता को लेकर अब बढ़ा विवाद, नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में दायर की याचिकाएं
प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता को लेकर अब बढ़ा विवाद, नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में दायर की याचिकाएं
परास्नातक में 50 प्रतिशत अंक के नियम का हो रहा विरोध
आठ अक्तूबर से प्रस्तावित है प्रधानाचार्य भर्ती के आवेदन
8 अक्टूबर 2026
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य 1172 एवं प्रधानाध्यापक 1475 पदों पर भर्ती के आवेदन शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से 13 साल बाद आठ अक्तूबर से इस भर्ती के आवेदन प्रस्तावित हैं। इस बीच नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में याचिकाएं दायर कर दी हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दुर्गेश कुमार और नौ अन्य की ओर से 28 सितंबर को याचिका दायर की गई है। सर्वाधिक विरोध बीएड और परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि बिना बीएड नियुक्त हजारों शिक्षक आवेदन से वंचित हो जाएंगे।
वहीं परास्नातक में 50 प्रतिशत की अनिवार्यता संबंधी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की कोई गाइडलाइन नहीं होने के बावजूद इसे लागू करना अनुचित है। लिहाजा नियमानुसार पूर्व से नियुक्त प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापकोंको अनुभवके आधार पर बीएड प्रशिक्षण से छूट प्रदान करने तथा बीएड के समकक्ष (एलटी आदि) प्रशिक्षणों को स्वीकार करने की मांग कर रहे हैं।
दो सितंबर को जारी संशोधन में प्रधानाचार्य भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) और केन्द्र /राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता या सहायक अध्यापक या हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्युनतम चार वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए मान्य किया गया है।
प्रधानाध्यापक भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) अथवा बीपीएड की उपाधि अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास केन्द्र/राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता अथवा सहायक अध्यापक अथवा जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्यूनतम चार वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। अभ्यर्थी की आयु 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए।
वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी बाहर, भर्ती से हजारों एलटी प्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर करने से नाराजगी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने पैदा की अजीब स्थिति
केवल बीएड अभ्यर्थियों को मान्य किए जाने का विरोध कर रहे कार्यरत शिक्षक
तीन सितंबर को जारी आदेश में बीएड अनिवार्य और पीजी में 50% का प्रावधान
10 सितंबर 2026
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने अजीब स्थिति पैदा कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने एक तरफ वित्तविहीन स्कूल के शिक्षकों को इन पदों पर भर्ती के लिए मान्य कर लिया है तो वहीं एडेड कॉलेजों में सालों से पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 2013 के बाद प्रधानाध्यापक के 1172 और प्रधानाचार्य के 1475 पदों पर अब शुरू होने जा रही भर्ती में तीन सितंबर के शासनादेश के जरिए बीएड अनिवार्य किए जाने के कारण गैर-बीएड वाले शिक्षकों को अयोग्य कर दिया है।
इससे एलटी प्रशिक्षित, कला, व्यायाम और संगीत आदि विषयों के शिक्षक आवेदन नहीं कर सकेंगे। पूर्व में विभागीय कायदे-कानून के तहत इनकी नियुक्ति हुई थी, लेकिन अब इन्हें एक झटके में बाहर कर दिया गया है। इसे लेकर इन शिक्षकों में खासी नाराजगी है। इसके अलावा परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता का भी विरोध हो रहा है।
शिक्षकों का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना में पूर्वप्राथमिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन के लिए शिक्षकों के विभिन्न स्तर की अहर्ताओं में प्रतिशत (45% या 50%) की अनिवार्यता का निर्देश दिया गया है। हालांकि संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापकों) के पदों के अर्हता में स्नातकोत्तर में 50% अंक के अनिवार्यता का कोई निर्देश नहीं है।
देश और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भिन्नता है तथा इन विश्वविद्यालयों में पिछले 25 से 30 वर्षों के समयांतराल में पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भी परिवर्तन हो गया है, जिसके कारण इस प्रकार की शर्त उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग संस्था प्रधान भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी करने जा रहा है।
प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक भर्ती में शिक्षा स्नातक तक (बीएड) के साथ एलटी प्रशिक्षण को भी समकक्ष अर्हता के रूप में शामिल करना चाहिए। साथ ही स्नात्तकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए। ये विसंगतियां दूर नहीं हुईं तो उच्च न्यायालय में याचिकाएं होने की आशंका है, जिसके कारण संस्था प्रधान की चयन प्रक्रिया अनावश्यक रूप से बाधित हो सकती है। - लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट।