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Saturday, October 31, 2026

वर्षों तक संविदा पर कम मानदेय में काम कराना जबरन श्रम के समान- हाईकोर्ट, सभी कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार मासिक मानदेय का लाभ

कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार रुपये मासिक मानदेय, चार माह में नियमितीकरण पर करे विचार

हाई कोर्ट ने चार माह में पद सृजित कर नियमित शिक्षकों के समान सेवा शर्ते लागू करने का दिया निर्देश

वर्षों तक संविदा पर कम मानदेय में काम कराना जबरन श्रम के समान- हाईकोर्ट, सभी कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार मासिक मानदेय का लाभ

31 अक्टूबर 2026

लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने प्रदेश सरकार को चार माह के भीतर शिक्षकों के पद स्वीकृत अथवा सृजित करने और उनकी सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों के समान बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने नियमितीकरण के दावों पर भी शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता और सेवा अवधि के आधार पर कानून के अनुसार विचार करने को कहा है। अर्चना बूध व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि जब तक सरकार आवश्यक कदम नहीं उठा लेती, तब तक सभी केजीबीवी शिक्षकों को निर्णय की तारीख से 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। उन्हें निश्शुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 24(2) के तहत सेवा संबंधी संरक्षण भी मिलेगा।

न्यायमूर्ति ने कहा कि शिक्षकों को वर्षों तक संविदा पर रखकर, पद सृजित किए बिना और नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान दिए बिना काम कराना संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत निषिद्ध जबरन श्रम के समान है। शिक्षकों को दिया जा रहा मानदेय अर्द्धकुशल श्रमिकों के निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम है। अदालत ने इसे मानदेय कहना क्रूर मजाक करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की सेवा शर्तें इंटरमीडिएट स्तर तक के नियमित शिक्षकों के समान होनी चाहिए। यह व्यवस्था केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी केजीबीवी शिक्षकों पर लागू होगी। मानदेय और वेतन में समय-समय पर संशोधन कर उन्हें सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन एवं परिलब्धियों के अनुरूप लाने का भी निर्देश दिया गया है।

अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार को सहमति के अनुसार खर्च में अपना हिस्सा देना होगा। हालांकि, केंद्र से धनराशि स्वीकृत नहीं होने का बहाना बनाकर राज्य सरकार आदेश के पालन से इन्कार नहीं कर सकती। राज्य सरकार पहले भुगतान कर बाद में केंद्र से उसका हिस्सा वसूल सकती है।

न्यायालय ने कहा कि वंचित वर्गों की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाली योजना में शिक्षकों को लंबे समय तक अपर्याप्त वेतन और असुरक्षित सेवा में रखना संवैधानिक प्रविधानों के अनुरूप नहीं है।


कस्तूरबा  गांधी स्कूलों के संविदा शिक्षकों को मिलेगा  17000₹ मानदेय, हाईकोर्ट ने दिए जा रहे मानदेय को अर्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम बताया

30 अक्टूबर 2026

लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) के संविदा शिक्षकों को 17000 रुपये मासिक मानदेय देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने चार महीने में शिक्षकों के नियमितिकरण पर विचार करने का आदेश भी दिया है। अदालत ने कहा कि वर्षों तक संविदा पर रखकर उचित वेतन और सेवा सुरक्षा से वंचित रखना जबरन श्रम कराने के समान है। शिक्षकों को दिया जा रहा मानदेय अर्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम है।


 न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने अर्चना बोध व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। यह व्यवस्था केवल याचियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि प्रदेश के सभी केजीबीवी शिक्षकों पर लागू होगी।

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