एडेड संस्कृत विद्यालयों में कौन करेगा भर्ती आखिर? तीन साल पहले चयन बोर्ड समाप्त, नए आयोग को अधिकार नहीं
सरकार ने 2018 में शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था अधिकार
2022 से संविदा शिक्षकों के सहारे संस्कृत स्कूलों में पढ़ाई
प्रयागराज। संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए एक तरफ तो सरकार ने प्रत्येक विद्यार्थी को छात्रवृत्ति देने जैसी योजना शुरू की है, वहीं संस्कृत अध्यापन को लेकर कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आ रही है। प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में रिक्त सहायक अध्यापकों के 1300 से अधिक पदों पर चयन के लिए अब तक किसी भर्ती संस्था को अधिकृत नहीं किया जा सका है।
सरकार ने 28 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थानों के प्रधानों, अध्यापकों एवं संस्थानों के अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्ते) विनियमावली-2009 में संशोधन के बाद सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के चयन का अधिकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था।
2019 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में 1282 शिक्षकों की नियुक्ति का अधियाचन भेजा था। इसी प्रकार महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को दी गई थी। इन दोनों ही संस्थाओं का 2023 में गठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में विलय हो चुका है।
हालांकि नए आयोग को संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी नहीं मिली है। ऐसे में सवाल है कि एडेड संस्कृत
कॉलेजों में नियमित शिक्षकों का चयन किस माध्यम से होगा। नियमित शिक्षकों की नियुक्ति में देरी के कारण ही संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संविदा पर शिक्षकों का चयन हो रहा है।
बढ़ावा देने के लिए सहायता प्राप्त संस्कृत संस्थाओं में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। - सुरेश कुमार त्रिपाठी पूर्व एमएलसी व प्रदेश अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ।
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