बीएलएड अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, 897 पदों पर आवेदन का रास्ता साफ, काम-वेतन समान होने पर भी योग्यता में भिन्नता पर उठा था सवाल
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती के 897 पदों पर बीएलएड डिग्री और दो वर्षीय विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को भी शामिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 11 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन को एनसीटीई एक्ट और 23 अगस्त 2010 के नोटिफिकेशन के विपरीत मानते हुए रद कर दिया है। यह आदेश महेश कुमार और 18 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने दिया है।
याचियों की ओर से अधिवक्ता राहुल मिश्र व सौरभ कुमार भार्गव ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज ने शहरी क्षेत्र के 11,508 सहायक अध्यापक पदों और संबद्ध प्राइमरी स्कूलों के 897 पदों के लिए भर्ती
निकाली है। विज्ञापन के क्लाज 7.1 में दो वर्षीय डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन और चार वर्षीय बीएलएड डिग्री को 11,508 अर्बन एरिया पदों के लिए मान्य किया गया, लेकिन 897 एडेड प्राइमरी स्कूल पदों से बाहर रखा गया। याचिका में कहा
गया कि सहायक अध्यापक के लिए सीनियर सेकेंडरी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ चार वर्षीय बीएलएड वैध न्यूनतम योग्यता है। दोनों तरह के स्कूलों में काम और वेतन समान होने पर योग्यता अलग रखने पर भी सवाल उठाया गया।
याचियों के अनुसार स्कूल बेसिक शिक्षा परिषद के हों या माध्यमिक शिक्षा के, योग्यता तय करने का अधिकार केंद्र की एनसीटीई के पास है। कोर्ट ने कहा कि दोनों नोटिफिकेशन अधिनियम और 23 अगस्त 2010 के नोटिफिकेशन के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए उन्हें उस सीमा तक निरस्त किया जाता है, जहां बीएलएड और विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को 897 पदों से बाहर रखा गया है। कोर्ट ने विज्ञापन सुधार कर जारी करने का आदेश दिया, ताकि इन योग्यताओं वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकें। याचियों और समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को आवेदन का उचित अवसर देने तथा जरूरत पड़ने पर अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्देश भी दिया गया है।
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक भर्ती में बीएलएड डिग्री धारकों और विशेष शिक्षा में दो वर्षीय डिप्लोमा प्राप्त अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 897 पदों पर होने वाली भर्ती से इन अभ्यर्थियों को बाहर रखने संबंधी अधिसूचना को नियमों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया है।
साथ ही भर्ती विज्ञापन में तत्काल संशोधन जारी कर इन्हें आवेदन का अवसर देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने महेश कुमार व 18 अन्य की याचिका पर दिया।
याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 11,508 सहायक अध्यापक पदों के साथ एडेड प्राथमिक विद्यालयों के लिए 897 पद विज्ञापित किए हैं। इसके क्लॉज 7.1 में विशेष शिक्षा के दो वर्षीय डिप्लोमा और चार वर्षीय बीएलएड डिग्री को केवल 11,508 पदों के लिए ही मान्य किया गया है जबकि 897 पदों की भर्ती से इन अभ्यर्थियों को बाहर रखा गया।
याचिका में सवाल उठाया गया कि जब दोनों प्रकार के विद्यालयों में शिक्षकों के कार्य व वेतन समान हैं तो शैक्षणिक अर्हता (योग्यता) अलग-अलग क्यों रखी गई है। कोर्ट ने 11 सितंबर को जारी दोनों नोटिफिकेशन को एनसीटीई अधिनियम और 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुरूप नहीं माना।
कोर्ट ने विज्ञापन संख्या 5/2026 में तत्काल संशोधन कर अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देने और जरूरत पड़ने पर अंतिम तिथि बढ़ाने का आदेश दिया है।
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