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Tuesday, October 13, 2026

पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल से जोड़ेंगे 'NIOS मित्र'योजना में सौ से अधिक बच्चों को प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश मिलेगा 120 रुपए मानदेय

पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल से जोड़ेंगे 'NIOS मित्र'
योजना में सौ से अधिक बच्चों को प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश मिलेगा 120 रुपए मानदेय

10वीं और 12वीं कक्षा के साथ स्कूली शिक्षा की आयु वर्ग के सभी बच्चों की होगी मैपिंग


नई दिल्ली: 10वीं और 12वीं कक्षाओं में फेल हो चुके छात्रों के साथ ही अब स्कूली शिक्षा से दूर या फिर वंचित प्रत्येक आयु वर्ग के बच्चों की तलाश के लिए देश भर में अभियान चलेगा। शिक्षा मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) राज्यों के साथ मिलकर इसकी तैयारी में जुटा है। इसके तहत जल्द ही देश के सभी ब्लाकों में 'एनआइओएस मित्र' की तैनाती की जाएगी, जो अपने ब्लाक में स्कूली शिक्षा की उम्र में स्कूलों से दूर सभी बच्चों की पहचान करेगा। इनमें से जो बच्चे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत राज्यों के स्कूलों में पढ़ने के लिए पात्र होंगे, उन्हें राज्य पढ़ाएंगे, बाकी बच्चों को, जिनमें दसवीं और बारहवीं के फेल छात्र भी होंगे, उन्हें एनआइओएस के जरिए पढ़ाया जाएगा।


एनआइओएस ने इस मुहिम को प्रोत्साहित करने के लिए एक इंसेंटिव प्लान भी तैयार किया है। इसमें ऐसे प्रत्येक बच्चे को प्रवेश दिलाने पर उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। फिलहाल इसे लेकर जो प्लान बनाया गया है, उनमें 49 प्रवेश दिलाने वाले एनआइओएस मित्र को प्रत्येक प्रवेश पर 80 रुपए दिए जाएंगे। वहीं 50 से 99 प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश सौ रुपए और सौ से डेढ़ सौ प्रवेश दिलाने पर उन्हें प्रति प्रवेश 120 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की योजना है। यह खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी। इस स्कीम में जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं उनकी फीस व पढ़ाई का खर्च भी केंद्र व राज्य मिलकर उठाएंगें। मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक एनआइओएस मित्र की पहल अगले महीने से शुरू हो जाएगी।


यूपी सहित पांच राज्यों में होगा ट्रायल: इससे पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक और गुजरात के पांच ब्लाकों में एनआइओएस की ओर से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। इसे लेकर एक एप तैयार कराया गया है। इसके जरिये एनआइओएस मित्र अपने काम को अंजाम देंगे। इनमें फिलहाल उत्तर प्रदेश के अयोध्या व श्रावस्ती जिले को शामिल किया गया है। बाकी राज्यों में जिलों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इस अभियान के तहत 10वीं और 12वीं फेल हो चुके दो करोड़ बच्चों को स्कूलों से फिर से जोड़ने के साथ 2030 तक स्कूली शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात को शत-प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा समय में 10वीं कक्षा तक आते-आते करीब 20 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं।

Saturday, September 26, 2026

पॉक्सो पर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, स्कूलों में विस्तार से दी जाएगी अधिनियम की जानकारी

पॉक्सो पर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू,  राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, स्कूलों में विस्तार से दी जाएगी अधिनियम की जानकारी


लखनऊ। उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने शुक्रवार से लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो) के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पॉक्सो के विधिक प्रावधानों, अधिकारों, दायित्वों और उल्लंघन के कानूनी परिणामों की जानकारी देना है। 


अभियान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश व राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के नेतृत्व और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं वरिष्ठ न्यायाधीश व कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। 


अभियान के तहत विद्यार्थियों, विशेषकर किशोरों व युवाओं को बताया जा रहा है कि कानून में 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चा माना गया है और उसकी सहमति को कानूनी मान्यता नहीं है। 

Sunday, August 23, 2026

देशभर के सभी स्कूलों में बनेंगे चुनावी साक्षरता क्लब, चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग की मुहिम

देशभर के सभी स्कूलों में बनेंगे चुनावी साक्षरता क्लब, चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग की मुहिम

दिसंबर तक हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 ऐसे क्लबों को सक्रिय करने का लक्ष्य


नई दिल्ली ।  इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) सहित देश की चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने अब नई पीढ़ी को इन चुनावी प्रक्रियाओं से जोड़ने और समझाने की एक मुहिम शुरू की है। इसके तहत देशभर के प्रत्येक स्कूल, कालेज व विश्वविद्यालय में अब एक चुनावी साक्षरता क्लब (ईएलसी) स्थापित होगा। जहां छात्रों को ईवीएम के कामकाज सहित मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, मतगणना की प्रक्रिया आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। जल्द ही आयोग इसके लिए एक पाठ्यक्रम भी जारी करेगा। इसकी तैयारी जोरों पर है।


इस मुहिम के तहत  देश के 14.71 लाख स्कूलों, करीब 70 हजार उच्च शिक्षण संस्थानों और 1420 निजी व सरकारी विश्वविद्यालयों तक चुनावी साक्षरता क्लब खोलने की योजना बनाई है। इस साल के अंत यानी दिसंबर तक देश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 सक्रिय क्लब शुरू करने की योजना है। देश में मौजूदा समय में 4,123 विधानसभा क्षेत्र हैं। ऐसे में 41 हजार से अधिक क्लब इस साल के अंत तक सक्रिय हो जाएंगे। प्रत्येक क्लब में सदस्यों की संख्या करीब 25 होगी। ऐसे में इस मुहिम के जरिए इस साल 10 लाख से अधिक छात्रों को जोड़ने की योजना है। आयोग इस मुहिम को राज्यों के साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ाने में जुटा है।

इस पूरी मुहिम की कमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने खुद ही संभाली है। उन्होंने इसे लेकर राज्यों का दौरा भी शुरू कर दिया है। दिसंबर तक उनकी सभी 36 राज्यों तक पहुंचने की तैयारी है। इस कड़ी में सोमवार को वह उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। उसके बाद वह तमिलनाडु, गोवा व गुजरात जाएंगे। इन दौरों के दौरान वह राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, कालेजों व स्कूलों के प्राचार्यों के साथ करीब छह-सात सौ छात्रों की एक कांफ्रेंस में हिस्सा लेते हैं।

स्कूल के क्लब में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के बच्चे शामिल होंगे। प्रत्येक कक्षा के प्रत्येक सेक्शन से दो-दो बच्चे (एक छात्र व एक छात्रा) चयनित होंगे। इसका चयन क्लास टीचर करेंगे। क्लब के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन चयनित छात्रों के बीच चुनाव के जरिए होगा। कालेज व विश्वविद्यालय स्तर पर क्लब में भी प्रत्येक स्ट्रीम में एक सेक्शन से दो-दो छात्र चयनित होंगे। इन सभी का चयन एक शैक्षणिक सत्र के लिए होगा। यह क्लब चुनावी साक्षरता के अपने तय पाठ्यक्रम के मुताबिक हफ्ते में एक दिन करीब एक घंटे के लिए एक्टिविटी आयोजित करेगा।


Saturday, August 15, 2026

हर साल शिक्षा बजट 10% अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश, प्राकलन समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी

हर साल शिक्षा बजट 10% अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश,  प्राकलन समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी


नई दिल्लीः केंद्र सरकार के बजट आवंटन पर पैनी नजर रखने वाली प्राक्कलन समिति ने शिक्षा के बजट में कमी पर सवाल उठाए हैं और इसे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के अनुरूप जीडीपी के छह प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए सालाना दस प्रतिशत तक की अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश की है।


समिति का मानना है कि मौजूदा समय में देश में शिक्षा पर कुल जीडीपी का संयुक्त व्यय (केंद्र व राज्य दोनों का) अभी 4.1 प्रतिशत ही है, जो लक्ष्य से दूर है। यह स्थिति तब है, जब नीति का अमल अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

लोकसभा सदस्य डा. संजय जायसवाल की अगुवाई में गठित इस 30 सदस्यीय प्राक्कलन समिति ने बुधवार को इसे लेकर अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंप दी है। इसमें समिति ने कहा कि 2020 में आई नई शिक्षा नीति के प्राथमिक और बड़े उद्देश्यों में एक शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को जीडीपी के छह प्रतिशत तक बढ़ाना था। लेकिन इसके बाद भी यह लक्ष्य से लगातार कम बना हुआ है। 

2026-27 में शिक्षा मंत्रालय को 1.39 लाख करोड़ रुपये का आवंटन दिया गया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.27 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है, लेकिन यह वृद्धि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समयबद्ध रूपरेखा तैयार की जाए। इसमें केंद्र व राज्य दोनों अपने शिक्षा खर्च में और बढ़ोतरी करें।

 शिक्षा बजट में औसत की जगह हर साल दस प्रतिशत तक अनिवार्य बढ़ोतरी सुनिश्चित करनी चाहिए। प्राक्कलन समिति हर साल बजट के आवंटन को जांचती है और देखती है कि नीति के अनुरूप आवंटन हो रहा है या नहीं।

Sunday, July 26, 2026

प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सीजेपी ने खत्म किया आंदोलन

आंदोलन खत्म करने के एलान के बाद सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की

जनभावनाओं को देखते हुए और ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद त्यागपत्र का फैसला


नई दिल्ली । धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दी है। हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी. यानी फिलहाल वह अपने मौजूदा कामकाज के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी संभालेंगे। 

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है. इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में था 


नई दिल्लीः नीट पेपर लीक से उठे विवाद में आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सरकार ने इस्तीफे के साथ साथ आंदोलनकारियों पर हुए सभी केस वापस करने और नीट के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी मान ली। इसके साथ ही जंतर मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (रॉजेपी) का छात्र आंदोलन भी खत्म हो गया। केंद्रीय स्वास्म्म मंत्री जेपी नड्‌डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के साथ प्रर्ता व सरकार की ओर से सभी मांगें माने जाने के बाद सीजेपी के प्रतिनिधि आशुतोष कर संका में जंतर-मंतर पर 35 दिन से चल रहा आंदोलन तत्काल खत्म करने का एलान किया और सभी प्रदर्शनकारियों से अपस अपने घर लौटने की अपील की। इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्भु ने प्रधान क इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक शिशारण मंत्री प्रल्हाद जोरी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

जनभावनाओं को देखते हुए और सुरक्षा को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधान का इस्तीपय लेने का फैसला लिया गया। इस्तीफा देते हुए प्रधान ने भारत की दुवा शक्ति' को देश की असली ताकत बताते हुए कहा कि वह वह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है और पहले ही दिन से इस पर मैंने अपनी जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्तियों द्वारा छात्रों को गुमराह करने की कोशिशों लेकर भी का व्यथित हैं। सूत्रों के अनुसार, शनिवार की सुबह उन्हें बताया गया कि आज की स्थिति में त्यागपत्र जरूरी है। प्रधान ने रॉजेपी के साथ सरकार की वार्ता से पहले दोपहर ढाई बजे पोस्ट के जरिये अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। बताते चलें, आंदोलन खत्म करने के लिए सीजेपी की सत्तों में धर्मेंद्र प्रबयान का इस्तीफा, केस वापस लेने और आत्महत्या करने वाले नोट छात्रओं के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग शामिल थी। सोमवार को प्रदर्शनकारियों के सांसद मार्च के पैरान हुई हिंसक झड़पों के बाद से ही सरकार ने इस आंदोलन को खत्म करने को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू किया था।


Saturday, July 11, 2026

प्रशिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, फिर भी ग्रेडिंग काफी नीचे, उत्तर प्रदेश के पीजीआईडी रैंकिंग में गर्वनेंस व प्रशिक्षण में बढ़े नंबर

प्रशिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, फिर भी ग्रेडिंग काफी नीचे, उत्तर प्रदेश के पीजीआईडी रैंकिंग में गर्वनेंस व प्रशिक्षण में बढ़े नंबर

आधार सीडिंग, आरटीई, प्रबंध पोर्टल व खर्च में स्थिति बेहतर

लखनऊ। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई डी) में प्रदेश की शैक्षिक व्यवस्था में अपेक्षाकृत हर क्षेत्र में सुधार हुआ है। प्रदेश में शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था बेहतर हुई है तो विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था भी बेहतर हुई है।

किंतु ओवरऑल यूपी की ग्रेडिंग काफी नीचे है। यूपी का लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी में सत्र 2024-25 में 81 नंबर था जो पिछले सत्र में भी 81 रहा है। वहीं एक्सेस में 2024-25 में 53 नंबर था जो अब 54 हो गया। इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फैसिलिटी में 73 से बढ़कर 77, इक्विटी में 231 की जगह 231, गर्वनेंस प्रोसेस में 69 की जगह 71 नंबर मिले हैं। इसी तरह शिक्षण-प्रशिक्षण में 62 से बढ़कर 66 नंबर मिले हैं। ओवरआल 1000 में से यूपी को 580 नंबर मिले हैं। प्रदेश में हाल में शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था काफी बेहतर हुई है। 




40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं,  101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत, शिक्षा मंत्रालय की पीजीआईडी रिपोर्ट में किया गया उल्लेख

स्कूलों में बच्चों के रुकने के समय में हुआ सुधार

एक से दूसरे क्लास में जाने की स्थिति भी हुई है बेहतर

लखनऊ। शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के सीखने के स्तर व आधारभूत सुविधाओं का आकलन करते हुए परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट (पीजीआई डी) 2025-26 जारी की गई है। इसमें जहां प्रदेश की स्कूली शिक्षा में कुछ स्तर पर सुधार देखने को मिला है तो कुछ जगह पर अभी भी हम राष्ट्रीय स्तर से पीछे हैं, इनमें सुधार की जरूरत है।


रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्कूलों में बच्चों के रुकने का समय राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से तो कम है। लेकिन प्रदेश के ही पिछले साल के आंकड़ों में सुधार हुआ है। प्राइमरी में जहां ठहराव दर 86.9 फीसदी थी, वह 2025-26 में 86 हो गई है। वहीं उच्च प्राथमिक में गत वर्ष ठहराव दर 70.4 फीसदी था, वह बढ़कर 72 फीसदी हो गई है। 9वीं-10वीं में 49.6 फीसदी से बढ़कर 55 व 11वीं-12वीं में 42.8 से बढ़कर 45 फीसदी हो गई है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से यह अभी पीछे है। इसमें सुधार के लिए अभी और काम करना पड़ेगा।

एक से दूसरे क्लास में बच्चों के जाने की दर में भी पिछले साल की अपेक्षा स्थिति बेहतर हुई है। प्राइमरी से अपर प्राइमरी में बच्चों के जाने की दर पिछले सत्र में 91 फीसदी थी जो 2025-26 में 92.2 फीसदी हुई है। अपर प्राइमरी से सेकेंडरी में छात्रों के जाने की दर 78.1 से बढ़कर 78.7 फीसदी हुई है। सेकेंडरी से उच्च स्तर पर जाने की दर 76.6 फीसदी से बढ़कर 79.2 फीसदी हुई है। 


स्कूलों में कंप्यूटर व बिजली कनेक्शन की जरूरत : बेसिक से माध्यमिक तक के सरकारी व निजी स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी है। वहीं 40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं है। वहीं 101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत है। शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में पिछले साल की तुलना में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी हैं। पिछले सत्र में 262358 स्कूल थे और इनकी संख्या बढ़कर 265278 हो गई है।

निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी
प्रदेश में निजी स्कूलों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 3397 स्कूल बढ़े हैं। एक साल में स्कूलों की संख्या 2913 बढ़ी है। जबकि सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी आई है। प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के 69 स्कूल कम हुए हैं।