पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल से जोड़ेंगे 'NIOS मित्र'योजना में सौ से अधिक बच्चों को प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश मिलेगा 120 रुपए मानदेय
पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल से जोड़ेंगे 'NIOS मित्र'
योजना में सौ से अधिक बच्चों को प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश मिलेगा 120 रुपए मानदेय
10वीं और 12वीं कक्षा के साथ स्कूली शिक्षा की आयु वर्ग के सभी बच्चों की होगी मैपिंग
नई दिल्ली: 10वीं और 12वीं कक्षाओं में फेल हो चुके छात्रों के साथ ही अब स्कूली शिक्षा से दूर या फिर वंचित प्रत्येक आयु वर्ग के बच्चों की तलाश के लिए देश भर में अभियान चलेगा। शिक्षा मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) राज्यों के साथ मिलकर इसकी तैयारी में जुटा है। इसके तहत जल्द ही देश के सभी ब्लाकों में 'एनआइओएस मित्र' की तैनाती की जाएगी, जो अपने ब्लाक में स्कूली शिक्षा की उम्र में स्कूलों से दूर सभी बच्चों की पहचान करेगा। इनमें से जो बच्चे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत राज्यों के स्कूलों में पढ़ने के लिए पात्र होंगे, उन्हें राज्य पढ़ाएंगे, बाकी बच्चों को, जिनमें दसवीं और बारहवीं के फेल छात्र भी होंगे, उन्हें एनआइओएस के जरिए पढ़ाया जाएगा।
एनआइओएस ने इस मुहिम को प्रोत्साहित करने के लिए एक इंसेंटिव प्लान भी तैयार किया है। इसमें ऐसे प्रत्येक बच्चे को प्रवेश दिलाने पर उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। फिलहाल इसे लेकर जो प्लान बनाया गया है, उनमें 49 प्रवेश दिलाने वाले एनआइओएस मित्र को प्रत्येक प्रवेश पर 80 रुपए दिए जाएंगे। वहीं 50 से 99 प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश सौ रुपए और सौ से डेढ़ सौ प्रवेश दिलाने पर उन्हें प्रति प्रवेश 120 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की योजना है। यह खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी। इस स्कीम में जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं उनकी फीस व पढ़ाई का खर्च भी केंद्र व राज्य मिलकर उठाएंगें। मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक एनआइओएस मित्र की पहल अगले महीने से शुरू हो जाएगी।
यूपी सहित पांच राज्यों में होगा ट्रायल: इससे पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक और गुजरात के पांच ब्लाकों में एनआइओएस की ओर से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। इसे लेकर एक एप तैयार कराया गया है। इसके जरिये एनआइओएस मित्र अपने काम को अंजाम देंगे। इनमें फिलहाल उत्तर प्रदेश के अयोध्या व श्रावस्ती जिले को शामिल किया गया है। बाकी राज्यों में जिलों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इस अभियान के तहत 10वीं और 12वीं फेल हो चुके दो करोड़ बच्चों को स्कूलों से फिर से जोड़ने के साथ 2030 तक स्कूली शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात को शत-प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा समय में 10वीं कक्षा तक आते-आते करीब 20 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं।