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Sunday, August 23, 2026

देशभर के सभी स्कूलों में बनेंगे चुनावी साक्षरता क्लब, चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग की मुहिम

देशभर के सभी स्कूलों में बनेंगे चुनावी साक्षरता क्लब, चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग की मुहिम

दिसंबर तक हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 ऐसे क्लबों को सक्रिय करने का लक्ष्य


नई दिल्ली ।  इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) सहित देश की चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने अब नई पीढ़ी को इन चुनावी प्रक्रियाओं से जोड़ने और समझाने की एक मुहिम शुरू की है। इसके तहत देशभर के प्रत्येक स्कूल, कालेज व विश्वविद्यालय में अब एक चुनावी साक्षरता क्लब (ईएलसी) स्थापित होगा। जहां छात्रों को ईवीएम के कामकाज सहित मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, मतगणना की प्रक्रिया आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। जल्द ही आयोग इसके लिए एक पाठ्यक्रम भी जारी करेगा। इसकी तैयारी जोरों पर है।


इस मुहिम के तहत  देश के 14.71 लाख स्कूलों, करीब 70 हजार उच्च शिक्षण संस्थानों और 1420 निजी व सरकारी विश्वविद्यालयों तक चुनावी साक्षरता क्लब खोलने की योजना बनाई है। इस साल के अंत यानी दिसंबर तक देश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 सक्रिय क्लब शुरू करने की योजना है। देश में मौजूदा समय में 4,123 विधानसभा क्षेत्र हैं। ऐसे में 41 हजार से अधिक क्लब इस साल के अंत तक सक्रिय हो जाएंगे। प्रत्येक क्लब में सदस्यों की संख्या करीब 25 होगी। ऐसे में इस मुहिम के जरिए इस साल 10 लाख से अधिक छात्रों को जोड़ने की योजना है। आयोग इस मुहिम को राज्यों के साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ाने में जुटा है।

इस पूरी मुहिम की कमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने खुद ही संभाली है। उन्होंने इसे लेकर राज्यों का दौरा भी शुरू कर दिया है। दिसंबर तक उनकी सभी 36 राज्यों तक पहुंचने की तैयारी है। इस कड़ी में सोमवार को वह उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। उसके बाद वह तमिलनाडु, गोवा व गुजरात जाएंगे। इन दौरों के दौरान वह राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, कालेजों व स्कूलों के प्राचार्यों के साथ करीब छह-सात सौ छात्रों की एक कांफ्रेंस में हिस्सा लेते हैं।

स्कूल के क्लब में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के बच्चे शामिल होंगे। प्रत्येक कक्षा के प्रत्येक सेक्शन से दो-दो बच्चे (एक छात्र व एक छात्रा) चयनित होंगे। इसका चयन क्लास टीचर करेंगे। क्लब के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन चयनित छात्रों के बीच चुनाव के जरिए होगा। कालेज व विश्वविद्यालय स्तर पर क्लब में भी प्रत्येक स्ट्रीम में एक सेक्शन से दो-दो छात्र चयनित होंगे। इन सभी का चयन एक शैक्षणिक सत्र के लिए होगा। यह क्लब चुनावी साक्षरता के अपने तय पाठ्यक्रम के मुताबिक हफ्ते में एक दिन करीब एक घंटे के लिए एक्टिविटी आयोजित करेगा।


Saturday, August 15, 2026

हर साल शिक्षा बजट 10% अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश, प्राकलन समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी

हर साल शिक्षा बजट 10% अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश,  प्राकलन समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी


नई दिल्लीः केंद्र सरकार के बजट आवंटन पर पैनी नजर रखने वाली प्राक्कलन समिति ने शिक्षा के बजट में कमी पर सवाल उठाए हैं और इसे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के अनुरूप जीडीपी के छह प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए सालाना दस प्रतिशत तक की अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश की है।


समिति का मानना है कि मौजूदा समय में देश में शिक्षा पर कुल जीडीपी का संयुक्त व्यय (केंद्र व राज्य दोनों का) अभी 4.1 प्रतिशत ही है, जो लक्ष्य से दूर है। यह स्थिति तब है, जब नीति का अमल अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

लोकसभा सदस्य डा. संजय जायसवाल की अगुवाई में गठित इस 30 सदस्यीय प्राक्कलन समिति ने बुधवार को इसे लेकर अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंप दी है। इसमें समिति ने कहा कि 2020 में आई नई शिक्षा नीति के प्राथमिक और बड़े उद्देश्यों में एक शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को जीडीपी के छह प्रतिशत तक बढ़ाना था। लेकिन इसके बाद भी यह लक्ष्य से लगातार कम बना हुआ है। 

2026-27 में शिक्षा मंत्रालय को 1.39 लाख करोड़ रुपये का आवंटन दिया गया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.27 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है, लेकिन यह वृद्धि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समयबद्ध रूपरेखा तैयार की जाए। इसमें केंद्र व राज्य दोनों अपने शिक्षा खर्च में और बढ़ोतरी करें।

 शिक्षा बजट में औसत की जगह हर साल दस प्रतिशत तक अनिवार्य बढ़ोतरी सुनिश्चित करनी चाहिए। प्राक्कलन समिति हर साल बजट के आवंटन को जांचती है और देखती है कि नीति के अनुरूप आवंटन हो रहा है या नहीं।

Sunday, July 26, 2026

प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सीजेपी ने खत्म किया आंदोलन

आंदोलन खत्म करने के एलान के बाद सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की

जनभावनाओं को देखते हुए और ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद त्यागपत्र का फैसला


नई दिल्ली । धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दी है। हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी. यानी फिलहाल वह अपने मौजूदा कामकाज के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी संभालेंगे। 

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है. इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में था 


नई दिल्लीः नीट पेपर लीक से उठे विवाद में आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सरकार ने इस्तीफे के साथ साथ आंदोलनकारियों पर हुए सभी केस वापस करने और नीट के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी मान ली। इसके साथ ही जंतर मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (रॉजेपी) का छात्र आंदोलन भी खत्म हो गया। केंद्रीय स्वास्म्म मंत्री जेपी नड्‌डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के साथ प्रर्ता व सरकार की ओर से सभी मांगें माने जाने के बाद सीजेपी के प्रतिनिधि आशुतोष कर संका में जंतर-मंतर पर 35 दिन से चल रहा आंदोलन तत्काल खत्म करने का एलान किया और सभी प्रदर्शनकारियों से अपस अपने घर लौटने की अपील की। इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्भु ने प्रधान क इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक शिशारण मंत्री प्रल्हाद जोरी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

जनभावनाओं को देखते हुए और सुरक्षा को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधान का इस्तीपय लेने का फैसला लिया गया। इस्तीफा देते हुए प्रधान ने भारत की दुवा शक्ति' को देश की असली ताकत बताते हुए कहा कि वह वह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है और पहले ही दिन से इस पर मैंने अपनी जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्तियों द्वारा छात्रों को गुमराह करने की कोशिशों लेकर भी का व्यथित हैं। सूत्रों के अनुसार, शनिवार की सुबह उन्हें बताया गया कि आज की स्थिति में त्यागपत्र जरूरी है। प्रधान ने रॉजेपी के साथ सरकार की वार्ता से पहले दोपहर ढाई बजे पोस्ट के जरिये अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। बताते चलें, आंदोलन खत्म करने के लिए सीजेपी की सत्तों में धर्मेंद्र प्रबयान का इस्तीफा, केस वापस लेने और आत्महत्या करने वाले नोट छात्रओं के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग शामिल थी। सोमवार को प्रदर्शनकारियों के सांसद मार्च के पैरान हुई हिंसक झड़पों के बाद से ही सरकार ने इस आंदोलन को खत्म करने को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू किया था।


Saturday, July 11, 2026

प्रशिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, फिर भी ग्रेडिंग काफी नीचे, उत्तर प्रदेश के पीजीआईडी रैंकिंग में गर्वनेंस व प्रशिक्षण में बढ़े नंबर

प्रशिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, फिर भी ग्रेडिंग काफी नीचे, उत्तर प्रदेश के पीजीआईडी रैंकिंग में गर्वनेंस व प्रशिक्षण में बढ़े नंबर

आधार सीडिंग, आरटीई, प्रबंध पोर्टल व खर्च में स्थिति बेहतर

लखनऊ। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई डी) में प्रदेश की शैक्षिक व्यवस्था में अपेक्षाकृत हर क्षेत्र में सुधार हुआ है। प्रदेश में शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था बेहतर हुई है तो विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था भी बेहतर हुई है।

किंतु ओवरऑल यूपी की ग्रेडिंग काफी नीचे है। यूपी का लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी में सत्र 2024-25 में 81 नंबर था जो पिछले सत्र में भी 81 रहा है। वहीं एक्सेस में 2024-25 में 53 नंबर था जो अब 54 हो गया। इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फैसिलिटी में 73 से बढ़कर 77, इक्विटी में 231 की जगह 231, गर्वनेंस प्रोसेस में 69 की जगह 71 नंबर मिले हैं। इसी तरह शिक्षण-प्रशिक्षण में 62 से बढ़कर 66 नंबर मिले हैं। ओवरआल 1000 में से यूपी को 580 नंबर मिले हैं। प्रदेश में हाल में शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था काफी बेहतर हुई है। 




40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं,  101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत, शिक्षा मंत्रालय की पीजीआईडी रिपोर्ट में किया गया उल्लेख

स्कूलों में बच्चों के रुकने के समय में हुआ सुधार

एक से दूसरे क्लास में जाने की स्थिति भी हुई है बेहतर

लखनऊ। शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के सीखने के स्तर व आधारभूत सुविधाओं का आकलन करते हुए परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट (पीजीआई डी) 2025-26 जारी की गई है। इसमें जहां प्रदेश की स्कूली शिक्षा में कुछ स्तर पर सुधार देखने को मिला है तो कुछ जगह पर अभी भी हम राष्ट्रीय स्तर से पीछे हैं, इनमें सुधार की जरूरत है।


रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्कूलों में बच्चों के रुकने का समय राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से तो कम है। लेकिन प्रदेश के ही पिछले साल के आंकड़ों में सुधार हुआ है। प्राइमरी में जहां ठहराव दर 86.9 फीसदी थी, वह 2025-26 में 86 हो गई है। वहीं उच्च प्राथमिक में गत वर्ष ठहराव दर 70.4 फीसदी था, वह बढ़कर 72 फीसदी हो गई है। 9वीं-10वीं में 49.6 फीसदी से बढ़कर 55 व 11वीं-12वीं में 42.8 से बढ़कर 45 फीसदी हो गई है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से यह अभी पीछे है। इसमें सुधार के लिए अभी और काम करना पड़ेगा।

एक से दूसरे क्लास में बच्चों के जाने की दर में भी पिछले साल की अपेक्षा स्थिति बेहतर हुई है। प्राइमरी से अपर प्राइमरी में बच्चों के जाने की दर पिछले सत्र में 91 फीसदी थी जो 2025-26 में 92.2 फीसदी हुई है। अपर प्राइमरी से सेकेंडरी में छात्रों के जाने की दर 78.1 से बढ़कर 78.7 फीसदी हुई है। सेकेंडरी से उच्च स्तर पर जाने की दर 76.6 फीसदी से बढ़कर 79.2 फीसदी हुई है। 


स्कूलों में कंप्यूटर व बिजली कनेक्शन की जरूरत : बेसिक से माध्यमिक तक के सरकारी व निजी स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी है। वहीं 40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं है। वहीं 101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत है। शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में पिछले साल की तुलना में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी हैं। पिछले सत्र में 262358 स्कूल थे और इनकी संख्या बढ़कर 265278 हो गई है।

निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी
प्रदेश में निजी स्कूलों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 3397 स्कूल बढ़े हैं। एक साल में स्कूलों की संख्या 2913 बढ़ी है। जबकि सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी आई है। प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के 69 स्कूल कम हुए हैं।

Monday, June 8, 2026

पीएम मोदी की अध्यक्षता में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर होगा मंथन, 11 जून को होगी नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक

पीएम मोदी की अध्यक्षता में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर होगा मंथन, 11 जून को होगी नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक

राज्यों की आर्थिक प्रगति की रफ्तार कैसे बढ़े, इस पर भी विमर्श

नई दिल्ली: देश में पेपर लीक की घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बैठक 11 जून को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की होगी और इसमें शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लिए आवश्यक मानव संसाधन विकास, बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, सेकेंडरी स्तर की शिक्षा व्यवस्था, और बच्चों की एक्स्ट्रा कैरीकुलर गतिविधियों यानी खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और लीडरशिप कार्यक्रम आदि को लेकर किस तरह की नीति बनाई जाए, इस पर चर्चा होगी। साथ ही इस पर भी विमर्श होगा कि किस तरह से राज्यों में नियमों व व्यवस्थाओं को ज्यादा से ज्यादा उदारवादी बनाकर आर्थिक प्रगति की रफ्तार तेज की जाए।


बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के भाग लेने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पेपर लीक से संबंधित मुद्दे सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे, लेकिन कुछ मुख्यमंत्रियों द्वारा इस विषय को उठाए जाने की संभावना है। 

सभी राज्यों को पहले ही यह संदेश दिया गया है कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी, ताकि मुख्यमंत्री अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकें। मुख्य रूप से, विकसित भारत के लक्ष्यों के अनुसार मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और केंद्र तथा राज्यों के बीच सामंजस्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 

कांग्रेस शासित राज्यों के नए मुख्यमंत्रियों जैसे कि केरल और कर्नाटक द्वारा पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार को असहज करने का प्रयास किया जा सकता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद हो रही इस बैठक में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पहली बार भाग ले सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि इस बैठक को मई, 2026 में पीएम मोदी की उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ हुई अलग-अलग बैठकों के संदर्भ में भी देखना चाहिए। उक्त बैठकों में मोदी ने पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों को दूर करने के लिए रिफार्म एक्सप्रेस व विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों के स्तर पर कारोबार करने की राह की अड़चनों को दूर करने को प्राथमिकता के तौर पर लेने की बात कही थी।

 मुख्य सचिवों की बैठक में कई ऐसे फैसले किए गए थे जिनको लेकर अब मुख्यमंत्रियों के साथ विमर्श किया जाएगा। इसमें वामपंथी हिंसा से मुक्त कराये गए जिलों व क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यक्रम व योजनाओं को लागू करना भी शामिल है।

Tuesday, May 26, 2026

जानिए! क्या है श्रमिक विद्या योजना? जिसका 75 जिलों में किया जायेगा विस्तार

जानिए! क्या है श्रमिक विद्या योजना? जिसका 75 जिलों में किया जायेगा विस्तार 

लखनऊ । बाल श्रमिक विद्या योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख बाल कल्याण और शिक्षा प्रोत्साहन योजना है, जिसे राज्य में बाल श्रम को खत्म करने और गरीब कामकाजी बच्चों को शिक्षित करने के लिए शुरू किया गया था। अब इसका विस्तार उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कर दिया गया है

इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

उद्देश्य: आर्थिक तंगी के कारण बाल मजदूरी करने वाले 8 से 18 वर्ष के बच्चों को चिन्हित कर उन्हें शिक्षा से जोड़ना और मुख्यधारा में वापस लाना।

वित्तीय सहायता: बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करती है:

बालकों (लड़कों) को: ₹1,000 प्रति माह
बालिकाओं (लड़कियों) को: ₹1,200 प्रति माह

अतिरिक्त प्रोत्साहन: यदि ये बच्चे कक्षा 8, 9 और 10 पास करते हैं, तो उन्हें शिक्षा पूरी करने के लिए ₹6,000 की विशेष प्रोत्साहन राशि अलग से दी जाती है।कौशल विकास: निजी क्षेत्रों के सहयोग से इन बच्चों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण का भी प्रावधान किया गया है ताकि भविष्य में उन्हें बेहतर रोजगार मिल सके।



अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू होगी श्रमिक विद्या योजना, सीएम योगी ने दिए निर्देश, अब तक 20 जिलों में लागू थी

योजना के तहत 8 से 18 साल आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को भेजा जाएगा विद्यालय


24 मई 2026
लखनऊ। प्रदेश में श्रमिक परिवार के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए श्रम विभाग संचालित बाल श्रमिक विद्या योजना को अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने का फैसला किया है। योजना के तहत 8 से 18 वर्ष की आयु तक के कामकाजी बच्चों को विद्यालय से जोड़ा जाएगा। वहीं, सेवा मित्र योजना को और प्रभावी बनाते हुए बड़े और औद्योगिक शहरों में श्रमिक सुविधा केंद्रों का विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।


यह निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने रोजगार मिशन को वैश्विक अवसरों से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी श्रमिक परिवार का बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना तैयार करें।

वर्ष 2020 में शुरु बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत 8 से 18 वर्ष के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश के साथ आर्थिक सहायता दी जा रही है। वर्तमान में योजना 20 जिलों में संचालित है। मुख्यमंत्री ने इसे नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने 'सेवामित्र व्यवस्था' को रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताते हुए कहा कि तकनीक आधारित ऐसी व्यवस्थाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए नए अवसर तैयार करती हैं।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल अथवा कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के अनुकूल वातावरण और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।