40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं, 101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत, शिक्षा मंत्रालय की पीजीआईडी रिपोर्ट में किया गया उल्लेख
स्कूलों में बच्चों के रुकने के समय में हुआ सुधार
एक से दूसरे क्लास में जाने की स्थिति भी हुई है बेहतर
लखनऊ। शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के सीखने के स्तर व आधारभूत सुविधाओं का आकलन करते हुए परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट (पीजीआई डी) 2025-26 जारी की गई है। इसमें जहां प्रदेश की स्कूली शिक्षा में कुछ स्तर पर सुधार देखने को मिला है तो कुछ जगह पर अभी भी हम राष्ट्रीय स्तर से पीछे हैं, इनमें सुधार की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्कूलों में बच्चों के रुकने का समय राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से तो कम है। लेकिन प्रदेश के ही पिछले साल के आंकड़ों में सुधार हुआ है। प्राइमरी में जहां ठहराव दर 86.9 फीसदी थी, वह 2025-26 में 86 हो गई है। वहीं उच्च प्राथमिक में गत वर्ष ठहराव दर 70.4 फीसदी था, वह बढ़कर 72 फीसदी हो गई है। 9वीं-10वीं में 49.6 फीसदी से बढ़कर 55 व 11वीं-12वीं में 42.8 से बढ़कर 45 फीसदी हो गई है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से यह अभी पीछे है। इसमें सुधार के लिए अभी और काम करना पड़ेगा।
एक से दूसरे क्लास में बच्चों के जाने की दर में भी पिछले साल की अपेक्षा स्थिति बेहतर हुई है। प्राइमरी से अपर प्राइमरी में बच्चों के जाने की दर पिछले सत्र में 91 फीसदी थी जो 2025-26 में 92.2 फीसदी हुई है। अपर प्राइमरी से सेकेंडरी में छात्रों के जाने की दर 78.1 से बढ़कर 78.7 फीसदी हुई है। सेकेंडरी से उच्च स्तर पर जाने की दर 76.6 फीसदी से बढ़कर 79.2 फीसदी हुई है।
स्कूलों में कंप्यूटर व बिजली कनेक्शन की जरूरत : बेसिक से माध्यमिक तक के सरकारी व निजी स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी है। वहीं 40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं है। वहीं 101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत है। शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में पिछले साल की तुलना में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी हैं। पिछले सत्र में 262358 स्कूल थे और इनकी संख्या बढ़कर 265278 हो गई है।
निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी
प्रदेश में निजी स्कूलों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 3397 स्कूल बढ़े हैं। एक साल में स्कूलों की संख्या 2913 बढ़ी है। जबकि सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी आई है। प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के 69 स्कूल कम हुए हैं।
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