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Sunday, July 26, 2026

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी


 लखनऊ : प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे आज भी ऐसे सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं, जिनके ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजर रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष की जिला शुरुआत में प्रदेश के 9,009 ऐसे सरकारी विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही थीं। बिजली विभाग ने अब तक 5,119 विद्यालयों के ऊपर से इन लाइनों को हटा दिया है, लेकिन 3,890 विद्यालय अब भी खतरे की जद में हैं।


हाईटेंशन लाइन का खतरे झेल रहे ऐसे सर्वाधिक 270 विद्यालय प्रयागराज में हैं। दूसरे स्थान पर जौनपुर है जहां ऐसे 267 विद्यालय हैं। इसके अलावा बस्ती में ऐसे 222, आजमगढ़ में 172, गाजीपुर में 169, सोनभद्र में 156, झांसी में 136, सिद्धार्थनगर में 119, फतेहपुर में 115, रायबरेली में 116 और बलिया में 102 विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं। 

विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई विद्यालय परिसरों के भीतर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर भी लगे हुए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। इसी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा हटाने का अनुरोध किया था।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा स्थानांतरित करने के लिए विद्युत निगमों को 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इसमें से 80 प्रतिशत राशि जारी की जा चुकी है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि वह लगातार ऊर्जा विभाग के संपर्क में है और प्रयास है कि जल्द ही किसी भी विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन न गुजरे।

Friday, January 30, 2026

समस्त स्टेकहोल्डर विभागों द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह को "जीरो फैटेलिटी माह के रूप में मनाए जाने के सम्बन्ध में दिशा निर्देश निर्गत

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह (दिनांक 01 जनवरी, 2026 से दिनांक 31 जनवरी, 2026 तक) आयोजित किये जाने के सम्बन्ध में।

समस्त स्टेकहोल्डर विभागों द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह को "जीरो फैटेलिटी माह के रूप में मनाए जाने के सम्बन्ध में दिशा निर्देश निर्गत 




Sunday, December 21, 2025

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लावारिस कुत्तों का प्रवेश रोकेंः UGC

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लावारिस कुत्तों का प्रवेश रोकेंः UGC 


नई दिल्ली। देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लावारिस कुत्तों से निजात मिलने वाली है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राज्यों और उच्च शिक्षण संस्थानों को पत्र लिखकर कैंपस, स्टेडियम और खेल परिसर में 24 घंटे सुरक्षा कर्मी तैनात करने और कुत्तों से छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया है। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में यूजीसी को रिपोर्ट भी भेजनी होगी। 


सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को कैंपस की देखरेख और स्वच्छता के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा। यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि लावारिस कुत्ते कैंपस प्रवेश न करें। इसके अलावा पहले से कोई कुत्ते हों तो उन्हें वहां से बाहर करना होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रो. मनीष जोशी ने इस संबंध में पत्र लिखा है। इसमें सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों को कैंपस में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए लावारिस कुत्तों के प्रवेश और निवास को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से काम करने का निर्देश है। 

Saturday, December 20, 2025

बालिकाओं की सुरक्षा को स्कूलों में लगाई जाएंगी शिकायत पेटिका

बालिकाओं की सुरक्षा को स्कूलों में लगाई जाएंगी शिकायत पेटिका

लखनऊ: बालिकाओं की सुरक्षा संबंधी  शिकायतें दूर करने के लिए स्कूलों में प्रधानाचार्यों की सहमति से शिकायत पेटिकाएं लगाई जाएंगी। इनमें आने वाली शिकायतों को संबंधित मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से दूर किया जाएगा। डीजीपी राजीव कृष्ण ने इस संदर्भ में पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।


शुक्रवार को डीजीपी ने वीडियो - कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से मिशन शक्ति केंद्रों की समीक्षा की। उन्होंने  कहा कि मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद दुष्कर्म सम्बंधी  मामलों में 33.92 प्रतिशत की कमी आई है। सर्वाधिक 76.92 प्रतिशत की कमी बाराबंकी में पाई गई है। महिलाओं व बच्चियों के अपहरण संबंधी मामलों में 17.03 प्रतिशत की कमी हुई है।

सर्वाधिक 42.61 प्रतिशत की कमी अमेठी में आई है। दहेज हत्या संबंधी मामलों में 12.96 प्रतिशत की कमी हुई है जिसमें सर्वाधिक 80 प्रतिशत की कमी बलरामपुर में हुई है। घरेलू हिंसा के मामलों में 9.54 प्रतिशत कमी आई है। श्रावस्ती में सर्वाधिक 35.90 प्रतिशत की कमी हुई है।

Wednesday, November 5, 2025

देशभर में आरएफआईडी से ट्रैक होंगी स्कूल बसें, माता-पिता को मिलेगी पल-पल की जानकारी

देशभर में आरएफआईडी से ट्रैक होंगी स्कूल बसें, माता-पिता को मिलेगी पल-पल की जानकारी

बच्चों की सुरक्षा पर फोकस लेकिन साइबर विशेषज्ञों ने उठाए डेटा गोपनीयता को लेकर सवाल

नई दिल्ली। अब जल्द ही देशभर में आरएफआईडी से स्कूल बसों को ट्रैक किया जाएगा। इससे माता-पिता को बच्चों स्कूल पहुंचने व घर वापसी तक पल-पल की जानकारी मिलेगी। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) एक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित मॉडल तैयार कर रहा है। इससे माता-पिता और स्कूल प्रशासन बच्चों की बस को हर पल ट्रैक कर सकेंगे। परियोजना उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की देखरेख में चल रही है।


देश के 1.47 लाख स्कूलों में पढ़ने वाले 24.8 करोड़ छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह पहल की जा रही है। स्कूल बसों में आरएफआईडी टैग, जीपीएस, जीएसएम मॉड्यूल और कैमरे लगाए जाएंगे। इससे बच्चों की आवाजाही का पूरा रिकॉर्ड रहेगा। दरअसल, अमेरिका, चीन और सिंगापुर की तर्ज पर भारत भी अब स्कूल बसों के लिए आरएफआईडी आधारित ट्रैकिंग प्रणाली विकसित करने की तैयारी कर रहा है।


 सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने हालांकि चिंता जताई है कि यह प्रणाली बच्चों के लोकेशन डाटा से जुड़ी होगी जिसका गलत हाथों में जाने पर दुरुपयोग हो सकता है। कहा-सभी सेवा प्रदाताओं को डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और आईटी नियम 2021 के तहत सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इसमें डाटा सुरक्षा के मजबूत प्रावधान का होना जरूरी है।

Sunday, July 27, 2025

देश भर के सभी स्कूल भवनों का होगा सुरक्षा आडिट, केंद्र सरकार ने सरकारी के साथ निजी स्कूलों की भी जांच करने का दिया निर्देश

देश भर के सभी स्कूल भवनों का होगा सुरक्षा आडिट, केंद्र सरकार ने सरकारी के साथ निजी स्कूलों की भी जांच करने का दिया निर्देश

शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखा पत्र

छात्रों को ऐसी घटनाओं से न हो किसी तरह का नुकसान दोषियों की तय हो जिम्मेदारी


नई दिल्ली: राजस्थान में स्कूल की छत गिरने से सात स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद केंद्र ने अब देश भर के सभी स्कूल भवनों व उनसे जुड़ी जनसुविधाओं के तत्काल सुरक्षा आडिट कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि यह सुरक्षा आडिट स्कूलों के लिए वर्ष 2021 में जारी सुरक्षा और संरक्षा दिशा-निर्देश और वर्ष 2016 के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखकर किया जाए, जिसमें स्कूल भवनों के ढांचे की गुणवत्ता के साथ उनमें आग आदि से बचाव के जरूरी इंतजामों का भी आडिट किया जाए।


केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा है कि आडिट के साथ ही वह यह भी सुनिश्चित करें कि किसी भी स्कूलों में हादसे न हों, जिसमें किसी छात्र को अपनी जान गंवानी पड़े। मंत्रालय ने ऐसे हादसों को बड़ी सुरक्षा खामी बताया है और कहा कि सुरक्षा आडिट के दौरान यदि कहीं कोई खामी पाए तो इसके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 


इस बीच मंत्रालय ने यह साफ किया है कि सुरक्षा आडिट सरकारी और निजी दोनों स्कूलों का होगा। मंत्रालय ने इसके दौरान राजस्थान से पहले मध्य प्रदेश व झारखंड के स्कूलों में सामने आई ऐसी खामियों का भी जिक्र किया है। मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वह बगैर कोई देरी किए तुरंत स्कूलों के सुरक्षा आडिट का काम शुरू करें।


राज्यों को लिखे पत्र में शिक्षा मंत्रालय ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी आगे आने की अपील की है और कहा है कि उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए क्षेत्र के असुरक्षित स्कूल भवनों को लेकर स्थानीय प्रशासन व जिम्मेदार अधिकारियों के शिकायत दर्ज कराए। गौरतलब है कि मौजूदा समय में देश भर में करीब 15 लाख स्कूल हैं। इनमें सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूल शामिल हैं।


इन पहलुओं को मुख्य रूप से जांचने के दिए सुझाव

स्कूलों भवनों और उनसे जुडी जनसुविधाओं के ढांचे की गुणवत्ता को जांचा जाए।

स्कूलों में आग से बचाव के इंतजामों को जांचा जाए।

इमरजेंसी निकास और इलेक्ट्रिक वायरिंग की अनिवार्य रूप से जांच की जाए।

स्कूलों में प्राथमिक उपचार पेटी अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।

स्कूलों के शिक्षकों, कर्मचारियों व बच्चों को ऐसी घटना से बचाव को लेकर जागरूकता और प्रशिक्षण।

ऐसी किसी घटना पर रिपोर्टिंग तत्र का गठन।