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Saturday, October 8, 2022

मानदेय पर रखे जाएंगे 2090 तदर्थ शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निरस्त कर दी गई है इनकी नियुक्ति

मानदेय पर रखे जाएंगे 2090 तदर्थ शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निरस्त कर दी गई है इनकी नियुक्ति


● नियम विरुद्ध प्रबंधन ने कर दी थी इन शिक्षकों की नियुक्ति

● सहानुभूति के आधार पर इन्हें अब मानदेय पर रखने की तैयारी


प्रयागराज । सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी से बाहर किए गए सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के 2090 तदर्थ शिक्षकों को मानदेय पर रखने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से तदर्थ शिक्षकों को निश्चित मानदेय पर रखने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कॉलेज प्रबंधकों ने नियम विरुद्ध तरीके से इनकी नियुक्ति की थी।


संजय सिंह के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने तदर्थ शिक्षकों को प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) 2021 में एक अवसर दिया था। हालांकि मात्र 40 तदर्थ शिक्षक (छह प्रवक्ता और 34 सहायक अध्यापक) ही उसमें सफल हो सके थे। दो दशक से अधिक समय तक नौकरी के बाद अचानक से बाहर होने पर इनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। 


ऐसे में प्रदेश सरकार के निर्देश पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए इनके समायोजन का प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से तैयार किया गया। प्रस्ताव में इन्हें वेतन की बजाय निश्चित मानदेय देने पर सहमति बनी है। मानदेय पर रखने के लिए जो तीन फॉर्मूला सुझाया गया है, उसमें सरकार पर एक अरब 20 करोड़ से लेकर दो अरब 41 करोड़ रुपये तक सालाना व्ययभार पड़ने का अनुमान है।


चार महीने से नहीं मिला तदर्थ शिक्षकों को वेतन

सात अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 तक 979 और वर्ष 2000 के बाद 1111 कुल नियुक्त 2090 शिक्षक इस दायरे में आ रहे हैं। प्रयागराज, प्रतापगढ़ समेत कई जिलों में इन तदर्थ शिक्षकों को चार माह से वेतन नहीं मिला है।


पूर्व में वेतन पा रहे तदर्थ शिक्षक को ही रखेंगे

शासन के एक बड़े अफसर की मंशा थी कि उन शिक्षकों को भी मानदेय पर रखा जाए जो हाईकोर्ट के आदेश पर नौकरी तो कर रहे थे लेकिन उन्हें वेतन नहीं मिल रहा था। लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसर इसके पक्ष में नहीं थे। लंबे समय तक इस पर पेच फंसा रहा। परिस्थितियां बदलने के बाद जिन्हें वेतन नहीं मिल रहा था उन तदर्थ शिक्षकों को बाहर करते हुए वेतन पा रहे शिक्षकों के समायोजन का प्रस्ताव भेजा गया है।

पॉलीटेक्निक की 1.6 लाख सीटें खाली, 2,28,527 सीटों के सापेक्ष 80 हजार ने करायी काउंसिलिंग

पॉलीटेक्निक की 1.6 लाख सीटें खाली, 2,28,527 सीटों के सापेक्ष 80 हजार ने करायी काउंसिलिंग


ये है सूरतेहाल

● 2,28,527 सीटों के सापेक्ष 80 हजार ने करायी काउंसिलिंग

● पॉलीटेक्निक की 2,28,527 सीटों के लिए हुई प्रवेश परीक्षा में पास हुए थे 1,74,160 छात्र

● 38261 ने लिया दाखिला


लखनऊ : पॉलीटेक्निक संस्थाओं में अभी भी एक लाख 60 हजार से अधिक सीटें खाली हैं। 2,28,527 सीटों के सापेक्ष अब तक हुई काउंसलिंग से 38261 अभ्यर्थियों ने दाखिला लिया है जबकि 80 हजार अभ्यर्थी काउंसलिंग करा चुके हैं। अभ्यर्थियों की दाखिले की गति धीमी होने की वजह से संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद ने प्रवेश परीक्षा 2022 में शामिल न होने वाले अभ्यर्थियों के भी दाखिले का मौका दिया है। इच्छुक अभ्यर्थी अनुदानित, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप एवं निजी पॉलीटेक्निक संस्थाओं में दाखिला ले सकते हैं।


संयुक्त प्रवेश परीक्षा के प्रभारी सचिव राम रतन का कहना है कि इच्छुक अभ्यर्थी परिषद की वेबसाइट jeecup. admissions. nic. in पर पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रत्येक पाठ्यक्रम ग्रुप का पंजीकरण शुल्क 250 रुपये है। काउंसलिंग में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। अन्य सभी जानकारियां परिषद की वेबसाइट पर हैं। आठ अक्तूबर तक पंजीकरण करने वाले अभ्यर्थी नौ व 10 अक्टूबर को संस्था एवं पाठ्यक्रम का चयन कर सकते हैं। 11 अक्तूबर को सीट आवंटन होने पर 12 से 14 अक्तूबर तक अभिलेख सत्यापन एवं प्रवेश शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। इस चरण में सीट आवंटित न होने की दशा में काउंसलिंग के अगले चरण में मौका मिलेगा। इसका शुल्क नहीं देना होगा। यह प्रक्रिया काउंसलिंग के सातवें एवं आठवें चरण में भी जारी रहेगी।

संचालित कार्यक्रमों व योजनाओं की प्रगति के अनुश्रवण हेतु दिनांक 13 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11ः30 बजे आहूत ऑनलाइन बैठक के सम्बन्ध में।

संचालित कार्यक्रमों व योजनाओं की प्रगति के अनुश्रवण हेतु दिनांक 13 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11ः30 बजे आहूत ऑनलाइन बैठक के सम्बन्ध में।


35 बिंदुओं में जानिए निपुण एप्टीट्यूड टेस्ट 1 (NAT) पर आयोजित यूट्यूब सत्र का निचोड़

सरल एप के जरिए मूल्यांकन को लेकर दिनांक 12 अक्टूबर  को यू-ट्यूब के माध्यम से ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किए जाने के सम्बन्ध में।

35 बिंदुओं में जानिए निपुण एप्टीट्यूड टेस्ट 1 (NAT) पर आयोजित यूट्यूब सत्र का निचोड़


1  यह लर्निंग लेवल पर बेसलाइन पर काम करने के लिए असेसमेंट है।

2  यह असेसमेंट पूर्ण पारदर्शिता एवं शुचिता के साथ संपन्न कराएं।

3  त्रैमासिक असेसमेंट कब – 18 अक्टूबर 2022 (पायलट प्रोजेक्ट)

4 त्रैमासिक असेसमेंट क्यों – यह निपुण लक्ष्य के प्रति हमारी वर्तमान प्रगति जांचने के लिए है। यह हमारा अगली तिमाही के लिए लक्ष्य निर्धारित करेगा।

5  इसी के आधार पर जनपद आधारित फोकस्ड गतिविधियों का संचालन किया जाएगा।

6  1 से 8 तक सभी कक्षाओं के छात्रों का आंकलन होगा।

7  आंकलन ओएमआर शीट पर होगा सरल ऐप के माध्यम से👉🏻 कक्षा 1 से तीन 3 हर बच्चे का आंकलन अध्यापक करेंगे v ओएमआर भरेंगे, और कक्षा 4 से 8 तक के बच्चे खुद हल करेंगे और ओएमआर भरेंगे।

8  सभी ओएमआर स्कैन का कार्य अध्यापक का ही होगा

9  Subject चयन में मंडल का नाम और सेट नंबर का ध्यान रखें। गलत चयन कतई न करें।

10  स्कैनिंग में फोन लैंडस्केप मोड में रखें।

11  जो छात्र आए नहीं हैं उन्हें एब्सेंट चिन्हित करें।


🔴  कक्षा 1 से 3 से जुड़े निर्देश


12  एक से तीन में हर बच्चे का प्रश्नपत्र अलग अलग नहीं होना है और यह बच्चों को वितरित नहीं करना है, अतः इनकी संख्या आप तक कम आई है।

13  पूरे प्रदेश में कक्षा के सेक्शन में A ही भरा जाना है।

14  प्रत्येक छात्र की यूनिक आईडी सरल ऐप पर उपलब्ध है, उसे एक दिन पहले ही सूचीबद्ध कर लें।

15  बच्चा उत्तर सही देता है तो गोला भरें अन्यथा उत्तर गलत होने या उत्तर न ज्ञात होने पर खाली छोड़ दें।

16  जब सभी बच्चों का आंकलन हो जाए तब ओएमआर भरने के उपरांत ही स्कैनिंग आरंभ करें।

17  ओएमआर शीट पर रिक्त स्थान पर कुछ भी नहीं लिखें।

18  स्कैन करते समय स्क्रीन पर केवल ओएमआर शीट ही आए अन्य कोई सामग्री मेज पर न रखें

19  एक बार में अधिकतम 5 ओएमआर शीट स्कैन करके सेव करें। पुनः शेष स्कैनिंग आरंभ करें। अधिक स्कैन होने पर अपलोड होने में समस्या आयेगी।


🔴  कक्षा 4 से 8 से जुड़े निर्देश


20  बच्चों को प्रश्नपत्र हल करने का पर्याप्त समय दें।

21  जब बच्चे प्रश्नपत्र हल कर लें तब ओएमआर शीट का वितरण करें।

22  एक ओएमआर शीट पर एक ही छात्र अंकित होगा।

23  ओएमआर शीट छात्र स्वयं भरेंगे। यदि मूल सूचना भरने में छात्र को कठिनाई है तो अध्यापक सहायता कर सकते हैं। यह ध्यान रखें कि बच्चे की आईडी गलत नहीं भरी जाए।

24  बच्चे यह पहले से सिखाएं कि वह गोला ठीक से भरे।

25  जब सब बच्चे ओएमआर शीट भर लेंगे तब हर बच्चे की ओएमआर शीट उसके नाम के कॉलम में सरल ऐप पर स्कैन करनी है।

26  जब सभी मार्कशीट स्कैन हो जाएं और स्कैन स्टेटस में संख्या प्रदर्शित होने लगे भी save all scan का विकल्प चयन करें।

27  कक्षा में संख्या अधिक हो तो 20 – 20 के बैच में स्कैन करें अधिक संख्या होने पर अपलोड होने में समस्या आयेगी।

28  यदि गलती से सेव पहले चयन हो जाए तो घबराएं नहीं दोबारा स्कैन चयन करके फिर स्कैनिंग कर सकते है।

29  कोई भी समस्या होने पर बेझिझक अपने एसआरजी/एआरपी/शिक्षक संकुल /तकनीकी शिक्षक संकुल से फोन पर बात करें।

30  प्रश्नपत्र में जितने प्रश्न हैं उतने गोले भरे जाने हैं शेष खाली छोड़ दिए जाएंगे।

31  स्कैन करते समय डाटा गलत है तो स्वयं ठीक करें।

32  शत प्रतिशत विद्यार्थियों का आंकलन करना सुनिश्चित करें।

33  कल समस्त अभिभावकों तक असेसमेंट के बारे में अवश्य बताएं ।

34  जनपद को निपुण बनाने में यह आकलन पहली सीढ़ी है ।

35  टीम भावना से कार्य करें ।



🔴 जुड़ने का लिंक: https://bit.ly/SaralTrainingYTLive





Friday, October 7, 2022

नेट से डाउनलोड रिजल्ट की कॉपी लगा सकेंगे बीएड काउन्सलिंग में हिस्सा ले रहे अभ्यर्थी

नेट से डाउनलोड रिजल्ट की कॉपी लगा सकेंगे बीएड काउन्सलिंग में हिस्सा ले रहे अभ्यर्थी 



बरेली। बीएड काउंसलिंग में हिस्सा ले रहे उन विद्यार्थियों के लिए राहत की बात है, जिनके पास स्नातक, परास्नातक के रिजल्ट की मूल कॉपी नहीं है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऐसे विद्यार्थी अब इंटरनेट से रिजल्ट की कॉपी निकालकर ऑनलाइन अपलोड करके काउंसलिंग करा सकेंगे।





 बीएड के पहले चरण की काउंसलिंग में विद्यार्थी कम हिस्सा ले रहे हैं। इसका एक कारण यह भी पता चला है कि विद्यार्थियों के पास मूल रिजल्ट की कॉपी नहीं है। इसी को देखते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को राहत दी है।

यूजीसी ने विश्वविद्यालय में रैगिंग से निपटने को सुझाए उपाय, छात्रों की नियमित काउंसलिंग करने की दी सलाह

यूजीसी ने विश्वविद्यालय में रैगिंग से निपटने को सुझाए उपाय, छात्रों की नियमित काउंसलिंग करने की दी सलाह 

छात्र के रंग, जाति, धर्म, जातीयता, लिंग, क्षेत्रीय मूल, भाषाई पहचान, जन्म व निवास स्थान और आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भी टिप्पणी रैगिंग की श्रेणी



नई दिल्ली ।  उच्च शिक्षण संस्थान या फिर हॉस्टल कैंपस में किसी छात्र को बिहारी, जाट, काला, मोटा, मुस्लिम, हिंदू, जैसी टिप्पणियां की तो रैगिंग की श्रेणी में मुकदमा दर्ज होगा। किसी छात्र के मानसिक व शारीरिक शोषण के अलावा रंग, जाति, धर्म, जातीयता, लिंग, क्षेत्रीय मूल, भाषाई पहचान, जन्म व निवास स्थान और आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भी टिप्पणी रैगिंग की श्रेणी में आएगी।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों के अलावा आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल, तकनीकी, लॉ कॉलेजों को भी यूजीसी एंटी रैगिंग गाइडलाइन लागू करने का निर्देश दिया है। एंटी रैगिंग टीम को शौचालय, आराम सह मनोरंजन कक्ष, कैंटीन, हॉस्टल, बस स्टैंड के औचक निरीक्षण की रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके अलावा शिक्षण संस्थानों को अपने दाखिला आवेदन पत्र में एंटी- रैगिंग गाइडलाइन की जानकारी देना अनिवार्य होगा।


UGC ने कहा संस्थान की सूचना एवं विवरण पुस्तिका में रैगिंग रोधी चेतावनी का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए और इसके साथ ही संस्थान के ई-पत्रक में दाखिला लेने वाले छात्रों को संस्थान की ओर से प्रदान किए जाने वाले मार्गदर्शन की जानकारी होनी चाहिए।




नई दिल्ली । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों के परिसरों में रैगिंग की बुराई से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन उपायों में रैगिंग रोधी समिति बनाने, छात्रों के साथ नियमित संवाद एवं परामर्श तथा छात्रावासों का औचक निरीक्षण आदि जैसे कदम शामिल हैं।


छात्रों की नियमित हो काउंसलिंग
आयोग के सचिव रजनीश जैन ने विश्वविद्यालयों को लिखे पत्र में कहा कि छात्रों के साथ नियमित संवाद एवं उनकी काउंसलिंग होनी चाहिए ताकि रैगिंग के शुरुआती संकेतों और परेशानी पैदा करने वाले तत्वों का पता लगाया सके।


हास्टल, छात्रों के रहने के स्थान, कैंटीन, आराम सह मनोरंजन कक्ष, शौचालयों, बस स्टैंड का औचक निरीक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन कदमों से रैगिंग एवं किसी अवांछित व्यवहार या घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।


UGC ने कहा, 'रैगिंग रोधी समिति का हो गठन'
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अपने परामर्श में कहा कि रैगिंग रोधी समिति, रैगिंग रोधी दस्ता, रैगिंग रोधी प्रकोष्ठ का गठन तथा मीडिया के जरिए इन उपायों का पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि संस्थान की सूचना एवं विवरण पुस्तिका में रैगिंग रोधी चेतावनी का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए और इसके साथ ही संस्थान के ई-पत्रक में दाखिला लेने वाले छात्रों को संस्थान की ओर से प्रदान किए जाने वाले मार्गदर्शन की जानकारी होनी चाहिए।


आयोग ने सुझाव दिया है कि महत्वपूर्ण जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, संस्थान की वेबसाइट एवं संपर्क के ब्योरे तथा रैगिंग रोधी समिति के अधिकारियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इस विषय पर रैगिंग रोधी कार्यशाला, सेमिनार आदि भी किए जाने चाहिए।

आईटीआई में अब 'पहले आओ, पहले पाओ' की तर्ज पर प्रवेश, अन्तिम तिथि बढ़ी

आईटीआई में अब 'पहले आओ, पहले पाओ' की तर्ज पर प्रवेश

राजकीय आईटीआई में 15 और निजी में 30 अक्तूबर तक लिया जा सकेगा दाखिला

केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद बढ़ाई गई अंतिम तिथि



लखनऊ। प्रदेश के राजकीय व निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में दाखिले के लिए अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। अब राजकीय आईटीआई में 15 और निजी आईटीआई की खाली सीटों पर 30 अक्तूबर तक दाखिले होंगे। इसके लिए एक दिन पहले तक पंजीकरण किया जाएगा। दाखिले की न्यूनतम अर्हता रखने वाला कोई भी अभ्यर्थी अब प्रवेश ले सकेगा। संस्थानों में पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर दाखिला देने की रणनीति अपनाई गई है।


कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय से मिली अनुमति मिलने के बाद प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाई गई है। विशेष सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास अभिषेक सिंह ने बताया कि अब पूर्व पंजीकृत के साथ नए अभ्यर्थी भी दाखिला ले सकेंगे। कहां, किस संस्थान में कितनी और किस ग्रुप में सीटें खाली हैं, उसका ब्योरा एससीवीटी के पोर्टल पर देखा जा सकेगा। परिषद के अधिकारियों के अनुसार अभी राजकीय आईटीआई में 18150 और निजी आईटीआई में 281985 सीटें खाली हैं। चूंकि सरकारी संस्थानों की खाली सीटों की संख्या ज्यादा नहीं है, इसलिए उसमें पंजीकरण व दाखिले की अंतिम तिथि भी 15 अक्तूबर ही रखी गई है।


PSPSA ने की परिषदीय शिक्षकों के लिए कई तरह के अवकाशों की मांग, देखें मांगपत्र

PSPSA ने की परिषदीय शिक्षकों के लिए कई तरह के अवकाशों की मांग, देखें मांगपत्र


✊ मांग : केंद्रीय कर्मियों की तरह परिषदीय शिक्षकों को भी मिले अवकाश


लखनऊ। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से परिषदीय शिक्षकों को केंद्रीय कर्मचारियों की भांति अवकाश देने की मांग की है। इसको लेकर संगठन ने मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को ज्ञापन भेजा है। 


संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि कई ऐसे अवकाश हैं जो केंद्रीय कर्मचारियों को मिलते हैं, लेकिन परिषदीय शिक्षकों को नहीं हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कर्मियों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश, बाल्य देखभाल अवकाश, अर्ध दिवस का आकस्मिक अवकाश, अल्प दिवस का अवकाश, अल्प विशेष अवकाश, चिकित्सा अवकाश, प्रतिकर अवकाश मिलता है। उन्होंने ऐसे कई अवकाश शिक्षकों को भी देने की मांग की।



Thursday, October 6, 2022

विश्व शिक्षक दिवस: शिक्षा में रूपान्तरकारी बदलाव किये जाने की आवश्यकता पर UNESCO ने दिया बल

विश्व शिक्षक दिवस: शिक्षा में रूपान्तरकारी बदलाव किये जाने की आवश्यकता पर UNESCO ने दिया बल

यूनेस्को का आहवान : शिक्षकों पर ज्ञान निर्माता व नीति साझीदार के तौर पर भरोसा किया जाए


संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और एक साझीदार संगठन ने बुधवार, 5 अक्टूबर, को ‘विश्व शिक्षक दिवस’ के अवसर पर जारी अपने साझा वक्तव्य में ध्यान दिलाया है कि शिक्षा में अध्यापकों की केन्द्रीय भूमिका है, और शिक्षकों के मूल्यवान कार्य के अनुरूप, उनके लिये बेहतर वेतन व कामकाजी परिस्थितियों की भी व्यवस्था की जानी होगी.


यह वक्तव्य संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की महानिदेशक ऑड्री अज़ूले, अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के महानिदेशक गिलबर्ट हूंगबो, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNIECF) की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल और एजुकेशन इण्टरनेशनल के प्रमुख डेविड एडवर्ड्स की ओर से जारी किया गया है.


उन्होंने कहा, “आज, विश्व शिक्षक दिवस पर, हम छात्रों में निहित सम्भावनाओं की कायापलट कर देने में शिक्षकों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हैं, यह सुनिश्चित करके कि उनके पास अपनी, अन्य लोगों की, और पृथ्वी के लिये ज़िम्मेदारी लेने के सभी आवश्यक साधन हैं.”


यूएन एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने देशों से यह सुनिश्चित करने का आहवान किया है कि शिक्षकों पर ज्ञान निर्माता व नीति साझीदार के तौर पर भरोसा किया जाए.


वादे की पूर्ति
वक्तव्य के अनुसार, कोविड-19 महामारी ने यह उजागर किया है कि वैश्विक शिक्षा प्रणालियों की बुनियाद में शिक्षक हैं, और उनके बिना समावेशी, न्यायोचित व गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करना असम्भव है.

साथ ही, वैश्विक महामारी से उबरने और छात्रों को भविष्य के लिये तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
“इसके बावजूद, यदि हम शिक्षकों के लिये हालात में रूपान्तरकारी बदलाव नहीं लाते हैं, तो सर्वाधिक ज़रूरतमन्दों के लिये शिक्षा का वादा, उनकी पहुँच से दूर ही रहेगा.”



यूएन एजेंसियों व साझीदार संगठन ने ध्यान दिलाया कि सितम्बर 2022 में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शिक्षा में कायापलट करने वाले बदलावों पर एक शिखर बैठक का आयोजन किया गया था.
इस बैठक में ज़ोर दिया गया कि शिक्षा व्यवस्था में रूपान्तरकारी बदलावों के लिये सशक्त, उत्साही व योग्य शिक्षकों व शिक्षाकर्मियों की आवश्यकता है.



हताशा भरा माहौल
मगर, विश्व के अनेक हिस्सों में कक्षाओं में भारी भीड़ है, शिक्षकों की संख्या कम है और उन पर काम का अत्यधिक बोझ है, वे निरुत्साहित हैं और उन्हें ज़रूरी समर्थन भी प्राप्त नहीं है.
इसके परिणामस्वरूप, अभूतपूर्व संख्या में शिक्षक अपना पेशा छोड़ रहे हैं, और शिक्षक बनने की तैयारियों मे जुटे लोगों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है.


शीर्ष अधिकारियों ने सचेत किया कि यदि इन चुनौतियों से नहीं निपटा गया तो टिकाऊ विकास के चौथे लक्ष्य को हासिल करने के प्रयासों को धक्का पहुँचेगा, जिसके तहत सर्वजन के लिये वर्ष 2030 तक गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है.


शिक्षकों के अभाव का सबसे अधिक असर दूरदराज़ के और निर्धन इलाक़ों में रहने वाली आबादी पर होता है, विशेष रूप से महिलाओं व लड़कियों, और निर्बल व हाशिये पर धकेल दिये गए समुदायों पर.


वैश्विक क़िल्लत
साझीदार संगठनों का कहना है कि विश्व भर में इस दशक के अन्त तक, सार्वभौमिक आधारभूत शिक्षा के लिये प्राथमिक स्कूलों में दो करोड़ 44 लाख शिक्षकों और माध्यमिक स्कूलों में चार करोड़ 44 लाख शिक्षकों की आवश्यकता होगी.


सब-सहारा अफ़्रीका और दक्षिणी एशिया में क़रीब ढाई करोड़ अतिरिक्त शिक्षकों की ज़रूरत होगी, जोकि विकासशील देशों में कुल आवश्यक शिक्षकों की लगभग आधी संख्या है.



इन क्षेत्रों में स्थित स्कूलों की कक्षाओं में छात्रों की संख्या बहुत अधिक है, शिक्षकों पर भीषण बोझ है और शिक्षा प्रणालियों में कर्मचारियों की भी कमी है.


90 फ़ीसदी माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. इसके मद्देनज़र, साझीदार संगठनों ने ज़ोर देकर कहा है कि योग्य, समर्थन-प्राप्त और उत्साही शिक्षकों को कक्षाओं में लाना और वहाँ उनकी मौजूदगी बनाए रखना, पढ़ाई-लिखाई में सुधार के लिये सबसे अहम उपाय है, जिससे छात्रों व समुदायों का कल्याण होगा.

 

शिक्षा मंत्रालय ने प्रधानमंत्री युवा लेखक मार्गदर्शन योजना ‘युवा 2.0’ की शुरुआत की

शिक्षा मंत्रालय ने प्रधानमंत्री युवा लेखक मार्गदर्शन योजना ‘युवा 2.0’ की शुरुआत की

 
नयी दिल्ली, दो अक्टूबर (भाषा) शिक्षा मंत्रालय ने रविवार को प्रधानमंत्री युवा लेखक मार्गदर्शन योजना ‘युवा 2.0’ की शुरुआत की। यह युवा एवं उभरते लेखकों को देश में पढ़ने, लिखने एवं पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने के वास्ते प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है।


मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ युवा 2.0 लोकतंत्र (संस्थान, घटनाएं, लोग, संवैधानिक मूल्य-अतीत, वर्तमान एवं भविष्य) के विषय पर लेखकों की युवा पीढ़ी के दृष्टिकोण को सामने लाने के लिए भारत एट 75 प्रोजेक्ट (आजादी का अमृत महोत्सव) का हिस्सा है। यह योजना लेखकों का एक समूह तैयार करेगी जो भारतीय धरोहर, संस्कृति एवं ज्ञान तंत्र को बढ़ावा देने के लिए विविध विषयों पर लिख सकते हैं।’’

बीएड काउंसलिंग : पहले चरण के लिए तीन दिन शेष, 22 हजार छात्रों ने ही लिया काउंसलिंग में हिस्सा, 53 हजार नहीं आए

बीएड काउंसलिंग : पहले चरण के लिए तीन दिन शेष, 22 हजार छात्रों ने ही लिया काउंसलिंग में हिस्सा, 53 हजार नहीं आए

बीस हजार से अधिक विद्यार्थियों ने सीटें लॉक कीं

9 अक्तूबर को विद्यार्थियों को सीटों का अलॉटमेंट



बरेली। बीएड काउंसलिंग में उत्तर प्रदेश के लगभग 22 हजार विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया है। 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने कॉलेजों में सीटें लॉक की हैं। काउंसलिंग में विद्यार्थियों के शामिल होने की रफ्तार धीमी होने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन चिंतित है। अभी 53 हजार विद्यार्थी पहली काउंसलिंग में शामिल होने हैं, जबकि सिर्फ तीन दिन ही बचे हैं।


रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने पहली काउंसलिंग में 75 हजार रैंक तक के विद्यार्थियों को काउंसलिंग के लिए बुलाया है। इन विद्यार्थियों को ऑनलाइन ही अपने अभिलेख डाउनलोड करके सीटें बुक करनी हैं। 30 सितंबर से काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही है। छह दिन में यह आंकड़ा लगभग 22 हजार ही पहुंच पाया है। जानकारों का कहना है कि तीन दिन में यह आंकड़ा बमुश्किल 50 हजार रैंक तक ही पहुंच पाएगा। यानी पहली काउंसलिंग में 75 हजार विद्यार्थियों में से 50 हजार ही हिस्सा लेंगे। हालांकि विश्वविद्यालय बचे विद्यार्थियों को बाद में भी मौका दे सकता है। राज्य समन्वयक प्रोफेसर बीपी सिंह का कहना है कि काउंसलिंग की रफ्तार अब बढ़ रही है।



अंतिम वर्ष के परिणाम में देरी भी बनी वजह

रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्नातक के अंतिम वर्ष परीक्षा के परिणाम करीब एक महीना देरी से आए थे। इधर अब बीएड काउंसलिंग में विद्यार्थियों की रुचि उस तरह से नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि परीक्षा परिणाम में देरी भी इसकी एक बड़ी वजह है। परिणाम में देरी होने के चलते कई विद्यार्थियों ने दूसरी यूनीवर्सिटी की ओर रूख कर लिया। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पर अभी तक कुछ नहीं कहा गया है।

नियुक्ति की मांग को लेकर बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन

नियुक्ति की मांग को लेकर बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन



उत्तर प्रदेश में 68500 सहायक शिक्षक भर्ती 2018 में पांच फीसदी की छूट से वंचित पिछड़ी जाति, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। 


प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 68500 सहायक शिक्षक भर्ती के 9 जनवरी 2018 के शासनादेश में दिव्यांग सहित अन्य को आरक्षित वर्ग में न रखकर अनारक्षित वर्ग के साथ रख दिया गया था। प्रदर्शन में शिव वीर सिंह, भूपेंद्र चौधरी, ललिता चौधरी, महराज सिंह, कमा यादव, राहुल, बिजेेंद्र लोधी, नसीम सहित सैकड़ों अभ्यर्थी शामिल रहे।


उत्तर प्रदेश में 68500 सहायक शिक्षक भर्ती 2018 में पांच फीसदी की छूट से वंचित पिछड़ी जाति, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया।


प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 68500 सहायक शिक्षक भर्ती के 9 जनवरी 2018 के शासनादेश में दिव्यांग सहित अन्य को आरक्षित वर्ग में न रखकर अनारक्षित वर्ग के साथ रख दिया गया था। जिससे यह सभी आरक्षित वर्ग से वंचित हो गए थे। इस पर शिकायत हुई तो इसका संज्ञान राज्य व राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने लिया।


आयोग ने सरकार से संबंधित विभाग को फटकार लगाते हुए 15 दिनों में आरक्षित वर्ग के निमभन वर्गों को उत्तीर्ण अंक में पांच फीसदी की छूट प्रदान करके आयोग की संस्तुति का पालन करने का आदेश दिया था, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हो सका। प्रदर्शन में शिव वीर सिंह, भूपेंद्र चौधरी, ललिता चौधरी, महराज सिंह, कमा यादव, राहुल, बिजेेंद्र लोधी, नसीम सहित सैकड़ों अभ्यर्थी शामिल रहे।

फिट इंडिया क्विज कार्यक्रम में बच्चों की अधिक से अधिक प्रतिभागिता पर बेसिक शिक्षा विभाग का जोर

फिट इंडिया क्विज कार्यक्रम में बच्चों की अधिक से अधिक प्रतिभागिता पर बेसिक शिक्षा विभाग का जोर




फिट इंडिया क्विज कार्यक्रम के दूसरे संस्करण में बच्चों की ज्यादा से ज्यादा प्रतिभागिता कराने की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग कार्य कर रहा है। स्कूल शिक्षा निदेशक के निर्देश पर बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। फिट इंडिया क्विज कार्यक्रम में बच्चों को प्रतिभाग कराने के लिए पंजीकरण किया जा रहा है, जो 15 अक्टूबर तक चलेगा। 



निर्देश दिए गए हैं  कि फिट इंडिया कार्यक्रम में बच्चों का अधिकाधिक प्रतिभागिता सुनिश्चित कराने की दिशा में कार्रवाई की जाए। इस कार्यक्रम का स्थानीय और न्याय पंचायत स्तर पर प्रचार प्रसार कराते हुए बच्चों का पंजीकरण कराया जाए। इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नर्सिंग में सुधार के लिए मिशन निरामया, अभियान का आठ अक्तूबर को सीएम योगी के हाथों होगा शुभारंभ

नर्सिंग में सुधार के लिए मिशन निरामया, अभियान का आठ अक्तूबर को सीएम योगी के हाथों होगा शुभारंभ



मिशन निरामया: अभियान के दौरान भविष्य की जरूरतों के दृष्टिगत नर्सिंग एवं पैरामेडिकल प्रशिक्षण में व्यापक परिवर्तन पर जोर दिया जाएगा। अभियान के तहत नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्याप्त शिक्षक, सेवारत शिक्षकों का आधार सत्यापन आदि पर फोकस किया जाएगा।


सीएम योगी आदित्यनाथ मिशन निरामयाः अभियान की शुभारंभ 8 अक्टूबर को एसजीपीजीआई के कन्वेन्शन सेंटर में करेंगे। इस मिशन का उद्देश्य नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण प्लेसमेंट , कैरियर कॉउंसिलिंग और आकांक्षी करियर बनाना है। इस मौके पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और राज्यमंत्री चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण मयंकेश्वर शरण सिंह मौजूद रहेंगे।



नर्सिंग छात्रों को जरूरी है प्रैक्टिकल नॉलेज


मिशन निरामया: अभियान के दौरान नर्सिंग एवं पैरामेडिकल प्रशिक्षण में व्यापक परिवर्तन पर जोर दिया जाएगा। अभियान के तहत नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्याप्त शिक्षक, सेवारत शिक्षकों का आधार सत्यापन आदि पर फोकस किया जाएगा। वहीं परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षक दूसरे संस्थान से हों, परीक्षाओं की सीसीटीवी से निगरानी हो पर मंथन किया जाएगा।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि प्रदेश के कई संस्थान अच्छा कार्य कर रहे हैं। इनमें निजी क्षेत्र के संस्थान भी शामिल हैं। इन बेस्ट प्रैक्टिसेज को अन्य संस्थानों में भी लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए मेंटॉर-मेंटी मॉडल को अपनाया जाए। इसकी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।


विद्यार्थियों को स्मार्टफोन और टैबलेट से मिलेगी योगी सरकार की योजनाओं की जानकारी

अभियान में बेहतर प्रशिक्षण के साथ-साथ बेहतर सेवायोजन पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित हॉस्पिटल से संवाद कर नीति तय करने की दिशा में कार्ययोजना तय की जाएगी क्योंकि नर्सिंग का प्रशिक्षण ले रहे युवाओं के लिए प्रैक्टिकल नॉलेज बहुत आवश्यक है।


प्रमुख बिंदु

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में गुणवत्ता में सुधार के लिए जल्द ही 'मिशन निरामया' शुरू किया जाएगा. इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करना है।

मेंटरशिप के लिए 12 कॉलेजों का चयन किया गया है। इन कॉलेजों को दूसरे कॉलेजों का मेंटर बनाया गया है। इन कॉलेजों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर प्लेसमेंट के लिए जो बेहतरीन काम किया जा रहा है, उसे अन्य कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा।

जीएसजी कॉलेज ऑफ नर्सिंग, गोरखपुर, सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग संकाय और आईआईएमटी विश्वविद्यालय, नाइटिंगेल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, गौतमबुद्धनगर और शारदा विश्वविद्यालय के नर्सिंग संकाय, बाबा अस्पताल, लखनऊ में नर्सिंग स्कूल और यूपी नर्सिंग संकाय के चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जीवीएसएम मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग कॉलेज, हिलेरी क्लिंटन स्कूल ऑफ नर्सिंग सहारनपुर और गोंडा और बरेली के नर्सिंग कॉलेज।

इन नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों द्वारा पढ़ाई और प्लेसमेंट के लिए जो भी अच्छे कदम और नवाचार किए जा रहे हैं, उन्हें अन्य नर्सिंग कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा।

नवंबर 2022 से फरवरी 2023 तक, 900 नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों को क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QSI) द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा। बिना संसाधन व फैकल्टी के चल रहे नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों में तालाबंदी रहेगी।

Wednesday, October 5, 2022

5 अक्टूबर : आज मनाया जाता है विश्व शिक्षक दिवस, इन संदेशों के जरिए अपने शिक्षकों को दे सकते हैं संदेश

5 अक्टूबर :  आज मनाया जाता है विश्व शिक्षक दिवस, इन संदेशों के जरिए अपने शिक्षकों को दे सकते हैं संदेश


हर वर्ष 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को साल 1994 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य दुनिया भर के शिक्षकों की प्रशंसा करना, दुनिया भर में शिक्षकों पर अधिक ध्यान देना और शिक्षकों के अधिकारों व हितों की रक्षा में मदद करना है। 


विश्व शिक्षक दिवस मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक संगठन तथा अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा संगठन छात्रों और समाज के विकास में शिक्षकों की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए एक वार्षिक गतिविधि आयोजित करते हैं।


शिक्षा व्यक्तिगत जीवन को बदलने और आर्थिक व सामाजिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र के दौरान, परिवर्तनकारी शिक्षा पर शिखर सम्मेलन के नेताओं की बैठक न्यूयॉर्क में आयोजित हुई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुताबिक, शिक्षा संकट की गंभीरता ने शिक्षा सुधार को जरूरी बना दिया है। भौगोलिक अंतर, असमानता और कोविड-19 महामारी जैसी समस्याओं ने शिक्षा को एक गंभीर संकट पहुंचाया है।


शिक्षा-सुधार आसन्न है, शिक्षक शिक्षा प्रणाली का प्राण है और शिक्षा-सुधार का एक अत्यंत आवश्यक भाग है। हमें शिक्षकों की भूमिका और कौशल पर ध्यान केंद्रित करना, वैश्विक शिक्षकों की कमी को दूर करना और शिक्षकों की स्थिति को बढ़ावा देते हुए काम करने की स्थिति सुनिश्चित करने और प्रशिक्षण और सीखने के अवसरों को जारी रखते हुए उनकी गुणवत्ता में सुधार करना चाहिए।


आज इन संदेशों के जरिए आप अपने शिक्षकों को दे सकते हैं संदेश

Happy World Teacher's Day 2022: भगवान ने दी ज़‍िंदगी

भगवान ने दी ज़‍िंदगी,
मां-पापा ने दिया प्‍यार,
लेकिन सीखने और पढ़ने के लिए,
गुरु हम हैं आपके शुक्रगुज़ार!!


Happy World Teacher's Day 2022:  जीने की कला सिखाते शिक्षक

जीने की कला सिखाते शिक्षक,
ज्ञान की कीमत बताते शिक्षक,
पुस्तकों के होने से कुछ नहीं होता,
अगर मेहनत से नहीं पढ़ाते शिक्षक!!


Happy World Teacher's Day 2022:   आपने सिखाया पढ़ना

आपने सिखाया पढ़ना, आपने सिखाई लिखाई,
गणित भी जाना आपसे, आपने ही भूगोल बताई,
बारंबार नमन करता हूं आपको, शिक्षक दिवस की स्वीकार करें बधाई!!!


Happy World Teacher's Day 2022:   गुरु ही सींचे बुद्धि को

गुरु ही सींचे बुद्धि को,
उत्तम करे विचार।
जिससे जीवन शिष्य का,
बने स्वयं उपहार।।


Happy World Teacher's Day 2022:   ऐ जिंदगी तुझे भी

ऐ जिंदगी तुझे भी
तूने मुझे बहुत कुछ सिखाया है
और आज भी सीखा रही है


Happy World Teacher's Day 2022:  हर राह आसान हो जाता है 

हर राह आसान हो जाता है,
जब गुरु का सनिध्य मिलता है,
फिर चाहे कितने ही आये जीवन में बदलाव,
गुरु के चरणों में ही मिलता है आराम।


Happy World Teacher's Day 2022: बुद्धिमान को बुद्धि देता अज्ञानी को ज्ञान 

बुद्धिमान को बुद्धि देता अज्ञानी को ज्ञान,
शिक्षक ही बना सकता है इस देश को महान



विश्व शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं 🙏💐🚩

हैप्पीनेस करिकुलम के तहत अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में मनाया जाएगा छात्रों का जन्मदिन! देखें सर्कुलर

हैप्पीनेस करिकुलम के तहत अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में मनाया जाएगा छात्रों का जन्मदिन! देखें सर्कुलर 


Delhi Govt Schools Happiness Curriculum: शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, हैप्पीनेस करिकुलम के तहत दिल्ली सरकार के स्कूलों के स्टूडेंट्स का जन्मदिन मनाने के लिए नए तौर तरीके का पालन किया जाएगा. सरकारी स्कूलों में 8वीं तक के बच्चों का जन्‍मदिन क्‍लास में ही मनाया जाएगा.


स्टूडेंट्स को मोटिवेट करने और पॉजिटिव सोच जगाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बार फिर जरूरी फैसला लिया है. दिल्ली के सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स के बर्थडे अब हैप्पीनेस करिकुम (Happiness Curriculum) के तहत मनाया जाएगा. शिक्षा निदेशालय (DoE) ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्रों के जन्मदिन मनाने से संबंधित सर्कुलर जारी किया है.


सर्कुलर में लिखा है, "स्कूलों में कृतज्ञता, प्रेरणा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के जन्मदिन मनाने के एक नए पैटर्न का पालन किया जाएगा. इससे स्टूडेंट्स का ध्यान एक्सप्लोर, एक्पीरियंस और खुशी जाहिर करने की ओर खींचा जा सकेगा."  हैप्पीनेस करिकुलम, यूनेस्को के मौलिक सिद्धांतों पर आधारित है, जो शिक्षा के मूलभूत पहलुओं के लिए शिक्षकों को गाइड करता है और सीखने की प्रक्रिया को नया रूप देता है.


इन छात्रों का मनाया जाएगा जन्मदिन

शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, हैप्पीनेस करिकुलम के तहत दिल्ली सरकार के स्कूलों के स्टूडेंट्स का जन्मदिन मनाने के लिए नए तौर तरीके का पालन किया जाएगा. पहली या उससे छोटी क्लास से लेकर 8वीं क्लास तक के छात्रों का जन्मदिन मनाया जाएगा।

रविवार या छुट्टी के दिन वाले जन्मदिन

जिन स्टूडेंट्स के जन्मदिन रविवार या किसी छुट्टी वाले दिन आते हैं तो उनका जन्मदिन सोमवार या स्कूल खुलने के पहले दिन मनाया जाएगा. शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, दिल्ली सरकार का मानना है कि इससे बच्चों के प्रति आभार पैदा होगा और वह आगे कुछ करने के लिए प्रेरित होंगे. इसके अलावा, इस पहल से स्टूडेंट्स की पॉजिटिव सोच को बढ़ाया जा सकेगा. शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, अवकाशकाल में जिन स्टूडेंट्स का जन्मदिन होगा, उन सभी का जन्मदिन स्कूल के खुलने के पहले दिन सामूहिक रूप से मनाया जाएगा. 


बता दें कि स्टूडेंट्स में खुशी एवं कल्याण की बुनियाद को मजबूत बनाने के लिए 2018 में हैप्पीनेस करिकुलम शुरू किया गया था. दिल्ली के 1,030 सरकारी स्कूलों में 8वीं तक के बच्चों के लिए 35 मिनट की क्लास लगती है. बच्चों में स्व-जागरूकता, अभिव्यक्ति, समानुभूति, संबंधों की समझ का विकास इस करिकुलम का मुख्य उद्देश्य है. 



बजट की कमी! यूपी बोर्ड ने कॉपी करवाई चेक, शिक्षकों का 8 करोड़ से ज्यादा भुगतान है बकाया

बजट की कमी!  यूपी बोर्ड ने कॉपी करवाई चेक, शिक्षकों का 8 करोड़ से ज्यादा भुगतान है बकाया


यूपी बोर्ड की कॉपियों के मूल्यांकन में शिक्षकों का 8 करोड़ से ज्यादा पारिश्रमिक बकाया है। बजट के अभाव में शिक्षकों का भुगतान नहीं हो पाया है। ये भुगतान 2018, 2019, 2020 का है। कई जिले ऐसे हैं, जहां शत-प्रतिशत शिक्षकों का मूल्यांकन नहीं हो पाया है। समय से भुगतान न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


इसमें 2018 का 48,02,704 रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। वहीं 2019 का 4,11,53,761 और 2020 का 4,98,22,301 रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। इन तीन वर्षों का कुल 8,98,22,301 रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है। यह जानकारी सरकार ने सदन में मानसून सत्र के दौरान दी है और सदन को आश्वस्त् किया कि समय से भुगतान न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


हालांकि 2021 में आयोजित अंक सुधार परीक्षा के लिए सभी जिलों को धनराशि का पूरा आवंटन किया जा चुका है और कोई भी भुगतान बकाया नहीं है। वहीं 2022 के भुगतान के लिए सभी डीआईओएस को धनराशि जारी कर दी गई है। यूपी बोर्ड में कॉपियां जांचने का पारिश्रमिक सीबीएसई बोर्ड से बहुत कम है। पारिश्रमिक कम होने के बाद भी समय से भुगतान न होने से कॉपी जांचने से शिक्षक बचते हैं।


माध्यमिमक शिक्षक संघ का कहना है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जांची गई बोर्ड की कॉपियों के मूल्यांकन का भुगतान ना करना कहीं न सरकार की मानसिकता को दर्शाता है। जब कि पारिश्रमिक का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। 

बीएड काउंसलिंग में 18 हजार विद्यार्थी हुए शामिल, 16 हजार ने कॉलेजों में सीटों का किया चयन

बीएड काउंसलिंग में 18 हजार विद्यार्थी हुए शामिल, 16 हजार ने कॉलेजों में सीटों का किया चयन



बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से बीएड की पहले चरण की काउंसलिंग कराई जा रही है। यह आठ अक्तूबर तक चलेगी। अब तक 18 हजार विद्यार्थियों ने ही ऑनलाइन काउंसलिंग में हिस्सा लिया है। 75 हजार रैंक तक के विद्यार्थियों को पहले चरण की काउंसलिंग में बुलाया गया है।


मंगलवार को भी बीएड की काउंसलिंग ऑनलाइन हुई। लगभग 16 हजार विद्यार्थियों ने कॉलेजों में सीटें बुक कीं। अंकपत्र से लेकर अन्य प्रमाणपत्र अपलोड किए। काउंसलिंग में अभी 57 हजार विद्यार्थियों को हिस्सा लेना है। रजिस्ट्रार डॉ. राजीव कुमार का कहना है कि अब काउंसलिंग की गति और तेज होगी। 10 अक्तूबर से काउंसलिंग का दूसरा चरण शुरू हो जाएगा।

तदर्थ शिक्षकों का वेतन और सेवाएं अधर में, दो-तीन माह से शिक्षकों को नहीं मिला वेतन, शिक्षक संघ ने समस्याओं को लेकर सीएम को लिखा पत्र

तदर्थ शिक्षकों का वेतन और सेवाएं अधर में, दो-तीन माह से शिक्षकों को नहीं मिला वेतन, शिक्षक संघ ने समस्याओं को लेकर सीएम को लिखा पत्र


लखनऊ। माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षक बीते दो-तीन महीने से बिना वेतन काम कर रहे हैं। स्थिति यह है कि न उनके वेतन भुगतान की स्थिति सुनिश्चित है और न ही उनकी सेवाओं का भविष्य । इसे देखते हुए शिक्षक संघ ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के साथ ही मुख्यमंत्री से तदर्थ शिक्षकों को सेवाकाल का वेतन देने के साथ ही उनके भविष्य की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।


मांग को लेकर माध्यमिक शिक्षक संघ आंदोलनरत है। पिछले दिनों संघ के अध्यक्ष व विधान परिषद सदस्य सुरेश कुमार त्रिपाठी ने इस मुद्दे को विधान परिषद में भी उठाया था। संघ के प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र कहते हैं कि जब तदर्थ शिक्षक विद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं तो उन्हें वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा? उनके अनुसार वर्ष 2000 से पहले के करीब 800 तदर्थ शिक्षक हैं, जिनके वेतन भुगतान में अक्सर अड़ंगा लगता है। विरोध के बाद इन शिक्षकों का वेतन कई जिलों में तो जारी हो जाता है, लेकिन कुछ जिलों में फंस जाता है। 


सबसे बुरा हाल वर्ष 2000 के बाद नियुक्त करीब 15 हजार तदर्थ शिक्षकों का है। इन्हें विनियमितीकरण की मांग पर सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सेवाओं पर भी संकट है, लेकिन विभाग ने स्थिति स्पष्ट करने की बजाय उलझा दिया है। इन शिक्षकों से अध्यापन कार्य तो कराया जा रहा हैं, लेकिन कई जिलों में जून से इन्हें वेतन भुगतान नहीं हुआ। शिक्षक संघ ने त्योहारों को देखते हुए इन्हें वेतन भुगतान किए जाने की मांग की है। साथ ही नियमित करने के लिए माध्यमिक शिक्षा अधिनियम में संशोधन की मांग की है।



संगठनों ने उठाई विनयमितीकरण की मांग

शिक्षक नेता व लखनऊ के जिलाध्यक्ष आरके त्रिवेदी का कहना है कि वर्षों सेवाएं दे चुके तदर्थ शिक्षकों के हित में विभाग व शासन को फैसला लेना चाहिए। शिक्षक संघ के चेतनारायण गुट के डॉ. संजय द्विवेदी के अनुसार सभी तदर्थ शिक्षकों को भी विनियमित किया जाए। तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के लिए 22 मार्च 2016 के बिंदु 8 की बाधा को समाप्त किया जाए। उनके मुताबिक वर्ष 2000 से पहले के तदर्थ शिक्षकों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। उधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उच्च स्तर पर इन मांगों पर विचार चल रहा है।

संशोधित तबादलों के अनुमोदन का इंतजार, कर्मचारी परेशान, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के बाबुओं के तबादले में गड़बड़ी का मामला

संशोधित तबादलों के अनुमोदन का इंतजार, कर्मचारी परेशान

बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के समूह ग कर्मियों के गड़बड़ तबादलों का मामला


लखनऊ। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के समूह ग के कर्मियों के तबादलों की गड़बड़ी को दुरुस्त कर दूसरे चरण में भेजी गई 30 से अधिक कर्मचारियों की संशोधित सूची शासन में अटक गई है। शासन से अनुमोदन न होने से कर्मचारी परेशान हैं।


विभागीय अधिकारियों की मानें तो शासन स्तर पर तबादलों की गड़बड़ी का परीक्षण हो रहा है। इसके बाद संशोधित दूसरी सूची जारी होगी। यूपी एजुकेशनल मिनिस्टीरियल ऑफीसर्स एसोसिएशन के महामंत्री राजेश चंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि दूसरी संशोधित सूची जारी हो तो पता चले कि अभी कौन-कौन से गड़बड़ तबादले और बचे हैं। उनके अनुसार यह स्थिति इसलिए बनी है, क्योंकि विभाग ने पूरी गड़बड़ियां दूर नहीं की हैं।


 संगठन ने 291 गड़बड़ियां बताईं, लेकिन 100 ही सुधारी गईं। फिर विरोध के बाद 30 से अधिक कर्मचारियों की दूसरी संशोधित सूची शासन के पास अटकी है। उन्होंने कहा कि संशोधन में देरी से कर्मचारी भटक रहे हैं। और तो और बलिया में सेवानिवृत्ति से ठीक पहले रा.बा.इंका. रसड़ा से बीएसए कार्यालय स्थानांतरित पवन कुमार श्रीवास्तव के तो सेवानिवृत्ति के देयक भी फंसे हुए हैं। वहीं गलत तबादलों के शिकार कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिल रहा है।

नए शिक्षकों की तैनाती की तैयारी, फिर भी कई जिलों में रहेगी कमी, माध्यमिक शिक्षा विभाग की तैयारी पर शिक्षक संघ ने उठाए सवाल

नए शिक्षकों की तैनाती की तैयारी, फिर भी कई जिलों में रहेगी कमी,  माध्यमिक शिक्षा विभाग की तैयारी पर शिक्षक संघ ने उठाए सवाल



लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग 1395 नए शिक्षकों की राजकीय विद्यालयों में ऑनलाइन तैनाती करने जा रहा है। इसकी शुरुआत आकांक्षात्मक जिलों से होगी। लेकिन इनकी तैनाती सभी जिलों में नहीं होगी। इससे ज्यादातर जिलों में शिक्षकों की कमी बनी रहेगी। विभाग का कहना है कि पदोन्नति व नई भर्ती होते ही अन्य जिलों में भी खाली पदों पर तैनाती कर दी जाएगी।


वर्तमान में विभिन्न जिलों में कुछ विद्यालय ऐसे हैं, जहां मानक के आधे से भी कम शिक्षक हैं। कुछ विषयों के तो शिक्षक ही नहीं हैं। लखनऊ के कुछ विद्यालयों का भी यही हाल है। राजकीय शिक्षक  संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर पांडेय कहते हैं कि छोटे जिलों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। महोबा में चिराग लेकर ढूंढने पर भी कोई लेक्चरर नहीं मिलेगा।



हमीरपुर के कुरारा इंका में छात्र संख्या तो बहुत ज्यादा है, लेकिन शिक्षकों के पद खाली हैं। सोनभद्र में भी कुछ कॉलेजों को छोड़कर बाकी में पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ नियमों का हवाला देकर ऑनलाइन महज कुछ जिलों में नियुक्ति की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ ऑफलाइन तबादले मनमर्जी किए गए हैं।



लखनऊ वीवीआईपी है इसलिए अभी पद खाली रहेंगे

शिक्षा विभाग ने लखनऊ, गाजियाबाद व नोएडा जिलों को वीवीआईपी श्रेणी में रखा है। इसलिए यहां सभी जिलों के साथ नई नियुक्ति नहीं की जा रही। यह स्थिति तब है जब लखनऊ के कुछ विद्यालयों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। यहां मांग के बावजूद खाली पदों पर शिक्षक नहीं भेजे जा रहे।


शासन की व्यवस्था के अनुसार जिलों में शिक्षकों की तैनाती की जा रही है। लखनऊ समेत जिन जिलों के विद्यालयों में दिक्कत है, वहां भी जल्द ही शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। केके गुप्ता, अपर शिक्षा निदेशक

Tuesday, October 4, 2022

दरका शिक्षक संघों का वर्चस्व, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़ी राजनीतिक दलों की दखल, राजनीतिक दलों के उतरने से शिक्षक हितों को लगा झटका

दरका शिक्षक संघों का वर्चस्व, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़ी राजनीतिक दलों की दखल, 

राजनीतिक दलों के उतरने से शिक्षक हितों को लगा झटका

2020 के चुनाव में भाजपा ने विधान परिषद में शिक्षक निर्वाचन की चार सीटों पर पहली बार ठॉकी थी ताल

चार में से तीन पर भाजपा ने लहराया था परचम, वाराणसी में सपा से खाई थी मात

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के प्रत्याशी उतारने से शिक्षक हितों को झटका, शिक्षक हित के बजाय जातीय व पार्टी के एजेंडे हो रहे हावी



विधान परिषद के आठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर शिक्षक संघों के वर्चस्व का मामला बीते दिनों की बात होकर रह गई है। अब इस क्षेत्र में भी राजनीतिक दल कूद पड़े हैं। सत्ता दल भाजपा ने पिछली बार चार विधान परिषद क्षेत्रों में अपना भाग्य आजमाया था और तीन पर पताका फहराने में सफल भी हुई थी। इस बार भाजपा दूनी ताकत से सभी आठ विधान परिषद क्षेत्रों में उतर पड़ी है। उसकी सीधी टक्कर सपा से होनी है। वहीं शिक्षक संघ भी राजनीतिक दलों को सबक सिखाने वाले तेवर में दिखाई पड़ रहे हैं।


प्रदेश में विधान परिषद के सभी आठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षक संघों के दबदबे की स्वर्णिम विरासत की चमक आने वाले समय में क्या धूमिल पड़ जाएगी। तमाम राजनीतिक विश्लेषकों ने मान लिया है कि राजनीतिक दलों के इस क्षेत्र में दखल देने से बाजी पलट चुकी हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ( शर्मा गुट) का वह इतिहास याद आता है, जब वर्षों तक विधान परिषद के आठों निर्वाचन क्षेत्र में उसका परचम लहराया करता था। 


इस तरह से राजनीतिक दलों के बढ़ते दखल से शिक्षक नेताओं की भुजाएं फड़क उठी हैं। फिलहाल चुनाव फरवरी 2023 में होना है, उसके नतीजे शिक्षक संगठनों एवं राजनीतिक दलों का भविष्य तय करेंगे। एक बार वर्ष 2020 के चुनावी नतीजों पर गौर करें तो भाजपा ने पहली बार चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, तीन पर जीत दर्ज की थी। मेरठ से भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने दिग्गज नेता माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा को मात दी थी।


भाजपा के ही उमेश द्विवेदी ने लखनऊ और मुरादाबाद-बरेली सीट पर हरि सिंह ढिल्लो ने जीत दर्ज की थी। वहीं, वाराणसी में भाजपा हार गई थी। यहां से सपा के लाल बिहारी यादव जीते थे। गोरखपुर में माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के ध्रुव कुमार त्रिपाठी व आगरा से भाजपा के डा. आकाश अग्रवाल विधान परिषद पहुंचे थे। इलाहाबाद झांसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 2017 से शर्मा गुट के सुरेश कुमार त्रिपाठी लगातार तीन बार जीत दर्ज करा चुके हैं। कानपुर माध्यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट के राजबहादुर सिंह चंदेल विधान परिषद पहुंचे थे। भाजपा के राष्ट्रीय प्रशिक्षण अभियान के प्रदेश सह संयोजक डा. शैलेश पांडेय कहते हैं कि पिछले चुनाव नतीजे पार्टी के लिए उत्साहजनक थे। उसी आधार पर हम अबकी समस्त आठ सीटों पर जीत हासिल करेंगे। 



राजनीतिक दलों के उतरने से शिक्षक हितों को लगा झटका

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ( शर्मा गुट) के अध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी कहते हैं कि राजनीतिक दलों के प्रत्याशी उतारने से शिक्षक हितों को झटका लगा है। इससे शिक्षक हित के बजाय जातीय व पार्टी के एजेंडे हावी हो रहे हैं। शिक्षक समझ रहे हैं कि उनकी आवाज उनके बीच के लोग ही उठा सकते हैं। इससे नतीजे भी अप्रत्याशित होंगे। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी कहते है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में दलगत राजनीति को बढ़ावा देना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। शिक्षक भी सड़क पर उतरा करेंगे, क्योंकि उनकी बात सदन में मजबूती से उठाने वाला कोई नहीं होगा।

बेहतर सुविधाओं के लिए सीतापुर दो कस्तूरबा विद्यालयों को मिला ISO प्रमाणन

बेहतर सुविधाओं के लिए सीतापुर दो कस्तूरबा विद्यालयों को मिला ISO प्रमाणन 

खैराबाद व बिसवां कस्तूरबा स्कूल प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ


सीतापुर। जिले के खैराबाद व बिसवां कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय को प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ होने का इनाम मिला है। आईएसओ संस्था ने स्कूल में बेहतर तरीके से पठन पाठन व बालिकाओं को सुविधाएं देने के लिए प्रमाणपत्र दिया है। डीएम ने बीएसए को प्रमाणपत्र देकर तारीफ की।



बीएसए अजीत कुमार ने बताया कि अपवंचित वर्ग की बालिकाओं को उत्कृष्ट आवासीय व्यवस्था के साथ गुणवत्तायुक्त रुचि पूर्ण शिक्षा, सुरक्षा, कंप्यूटर के माध्यम से शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा व खेल सहित विभिन्न गतिविधि के माध्यम से बालिकाओं में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में शिक्षा दी जा रही है। इसी आधार पर जनपद के खैराबाद व बिसवां विद्यालय को आईएसओ संस्था ने प्रमाणपत्र दिया है।


डीएम अनुज सिंह ने बीएसए को यह प्रमाणपत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक घुले सुशील चंद्रभान, एडीएम राम भरत तिवारी, डीसी बालिका शिक्षा शैलेश गुप्ता आदि मौजूद रहे। आईएसओ प्रमाणन संस्था की तरफ से रामधन गौतम एवं रमेश राय उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि दोनों कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय प्रदेश के पहले विद्यालय हैं, जिन्हें आईएसओ प्रमाणित किया गया है।

बीएड काउंसिलिंग : 13 हजार विद्यार्थियों ने लॉक कीं सीटें, सीटों का अलॉटमेंट 9 अक्तूबर को

बीएड काउंसिलिंग : 13 हजार विद्यार्थियों ने लॉक कीं सीटें

सीटों का अलॉटमेंट नौ अक्तूबर को कुल 15 हजार हुए शामिल


बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से करवाई जा रही बीएड काउंसिलिंग में सोमवार को करीब 15 हजार विद्यार्थी शामिल हुए। अब तक लगभग 13 हजार विद्यार्थियों ने कॉलेजों में सीटें लॉक कर दी हैं। इन विद्यार्थियों को सीटों का अलॉटमेंट नौ अक्तूबर को किया जाएगा।


प्रदेश के 2448 कॉलेजों में बीएड की 2.39 लाख सीटें हैं। वहीं बीएड में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या छह लाख है। ऐसे में दाखिले के लिए मारामारी है। सरकारी कॉलेजों में दाखिले दस हजार रैंक तक के विद्यार्थियों को ही मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


यदि इस बीच दस हजार रैंक तक के विद्यार्थियों ने किसी दूसरे शिक्षण संस्थान में दाखिला लिया है तो उनकी सीटें अन्य मेरिट वाले विद्यार्थियों को आवंटित हो जाएंगी। सोमवार को हर दिन की तरह विद्यार्थियों ने अपने शैक्षिक प्रमाण पत्र अपलोड किए और सीटें लॉक कीं।


राज्य समन्वयक प्रो. पीबी सिंह का कहना है कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की ओर से यह काउंसिलिंग करवाई जा रही है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। काउंसिलिंग चार चरणों में होगी। दूसरा चरण दस अक्तूबर से शुरू हो जाएगा। अक्तूबर में ही काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा योजना पर लगी रोक

राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा योजना पर लगी रोक 


नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अगले आदेश तक राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा योजना (एनटीएसई) पर रोक लगा दी है। एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई।

इस लोकप्रिय छात्रवृत्ति योजना का वित्तपोषण शिक्षा मंत्रालय करता है और इसे एनसीईआरटी लागू करती है। छात्रवृत्ति परीक्षा हर साल दो चरणों में आयोजित की जाती है। प्रथम चरण (राज्यस्तरीय) और द्वितीय चरण (राष्ट्रीय स्तर) का होता है।

एनसीईआरटी ने एक आधिकारिक आदेश में कहा, राष्ट्रीय प्रतिभा खोज योजना भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित एक केंद्रीय योजना है। एनसीईआरटी एनटीएस योजना के क्रियान्वयन की एजेंसी है।




राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा पर अगले आदेश तक रोक


नई दिल्ली । मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान कर पठन-पाठन में प्रोत्साहित करने वाली राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा योजना को अगले आदेश तक रोक दिया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के नोटिस में यह जानकारी दी गई है।



एनसीईआरटी के शैक्षणिक सर्वेक्षण प्रकोष्ठ की प्रमुख इंद्राणी एस भादुड़ी ने 30 सितंबर 2022 को यह नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि परीक्षा योजना 31 मार्च 2021 तक के लिए मंजूर की गई थी।


राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा योजना को अगले आदेश तक रोका गया

नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर (भाषा) मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान कर पठन-पाठन में प्रोत्साहित करने वाली राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (एनटीएस) योजना को अगले आदेश तक रोक दिया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के नोटिस में यह जानकारी दी गई है।


एनसीईआरटी के शैक्षणिक सर्वेक्षण प्रकोष्ठ की प्रमुख इंद्राणी एस भादुड़ी द्वारा 30 सितंबर 2022 को जारी नोटिस में कहा गया है कि राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा योजना 31 मार्च 2021 तक के लिए मंजूर की गई थी और इस योजना को वर्तमान स्वरूप में जारी रखने की मंजूरी नहीं है तथा इसे अगले आदेश तक रोका जाता है।


इस बारे में पूछे जाने पर भादुड़ी ने पीटीआई-भाषा से कहा कि जो बात नोटिस में कही गई है, वह उतनी ही जानकारी दे सकती हैं।
हालांकि, एक सूत्र ने बताया कि इस योजना को नवोन्मेषी बनाने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं और ऐसी संभवना है कि इसे नए रूप में पेश किया जाएगा।


एनसीईआरटी के अनुसार, राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा योजना का तीसरे पक्ष से साल 2020 में मूल्यंकन कराया गया था। तीसरे पक्ष के मूल्यांकन में यह बात उभरकर सामने आई थी कि यह योजना काफी हद तक प्रतिभाओं की पहचान करने में सफल रही तथा इसने छात्रों को आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
इसके अनुसार, सर्वेक्षण के अधिकतर पक्षकारों ने एनटीएस योजना को शानदार या अच्छा बताया था। इसमें कहा गया कि एनटीएस को जारी रखने की जरूरत है।

  

छुट्टी से प्रमोशन तक के लिए निदेशालय की दौड़, शिक्षक परेशान

छुट्टी से प्रमोशन तक के लिए निदेशालय की दौड़, शिक्षक परेशान


राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गोहरी में हिन्दी की सहायक अध्यापिका पूनम यादव को 22 अगस्त से 19 दिसंबर तक बाल्य देखभाल अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) की आवश्यकता थी। अवकाश स्वीकृत कराने के लिए उन्होंने प्रिंसिपल के माध्यम से 13 अगस्त को आवेदन पत्र जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को भेजा। वहां से प्रार्थना पत्र 27 अगस्त को संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय भेजा गया और फिर वहां से प्रार्थना पत्र शिक्षा निदेशालय स्थित अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक (राजकीय) कार्यालय को भेजा गया। डेढ़ महीने से अधिक बीतने के बावजूद अब तक शिक्षिका का अवकाश स्वीकृत नहीं हो सका है।


आगरा के मुन्नालाल व राजेन्द्र सिंह, मथुरा के विजय कुमार, मुकेश कश्यप व हरदम सिंह के प्रोन्नत वेतनमान और आगरा की ही सुजाता सिंह, नमिता, अंजना, मीता वर्मा, चारु सोलंकी, चेतना सिंह, पूनम बघेल, पूजा सक्सेना, शशि वर्मा, प्रेरणा सेठ व रेखा, मथुरा की खुशबू शर्मा और कल्पना सिंह के चयन वेतनमान की फाइल महीनों से लंबित पड़ी है।


प्रयागराज। ये दो उदाहरण मात्र हैं। प्रदेशभर के 2332 राजकीय विद्यालयों में कार्यरत हजारों सहायक अध्यापकों और प्रवक्ताओं की परेशानी का अंत नहीं है। इन शिक्षकों को छोटे से लेकर बड़े काम तक के लिए जिले से लेकर शिक्षा निदेशालय तक का चक्कर काटना पड़ रहा है।


मंडल स्तर पर संयुक्त शिक्षा निदेशकों की तैनाती होने के बावजूद सारे छोटे-बड़े काम शिक्षा निदेशालय से होते हैं। इसी समस्या को देखते हुए शिक्षा निदेशालय में दो साल पहले इन कार्यों को मंडल स्तर पर निस्तारित करने का प्रस्ताव तैयार हुआ लेकिन शासन तक नहीं पहुंच सका।


राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रकरण जैसे बाल्यकाल देखभाल अवकाश, 30 दिन से अधिक मेडिकल अवकाश या किसी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र /अनुमति प्रमाण पत्र का निस्तारण मंडल स्तर पर संयुक्त शिक्षा निदेशक से किया जाए। क्योंकि इनके निस्तारण में अनावश्यक विलंब होता है और प्रदेशभर के शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षा निदेशालय का चक्कर लगाना पड़ता है, जो दुरूह कार्य है।
-डॉ. रवि भूषण, महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ


एक साल में घूस लेते पकड़े गए दो बाबू यही कारण है कि शिक्षकों के छोटे बड़े कामों को करने के लिए शिक्षा विभाग से आए दिन रुपये मांगने की शिकायत मिलती रहती है। पिछले साल सितंबर में शिक्षा निदेशालय के प्रधान सहायक अनिल कुमार को एक शिक्षक से बकाया भुगतान के लिए 30 हजार रुपये घूस लेते हुए विजिलेंस की टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। 26 सितंबर 2022 को जिला विद्यालय कार्यालय द्वितीय के वरिष्ठ सहायक रामकृष्ण मिश्रा को शिक्षिका गार्गी श्रीवास्तव से दस हजार रुपये लेते हुए विजिलेंस की टीम ने रंगेहाथ पकड़ा।

Monday, October 3, 2022

बीएड काउंसलिंग में 11 हजार ने अपलोड किए अभिलेख, साढ़े नौ हजार विद्यार्थियों ने किया कॉलेजों का चयन

बीएड काउंसलिंग में 11 हजार ने अपलोड किए अभिलेख

साढ़े नौ हजार विद्यार्थियों ने किया कॉलेजों का चयन


बरेली। बीएड काउंसलिंग के तीसरे दिन प्रदेशभर के 11 हजार विद्यार्थियों ने ऑनलाइन काउंसलिंग में हिस्सा लेकर अपने अभिलेख अपलोड किए। लगभग साढ़े नौ हजार विद्यार्थियों ने कॉलेजों का चयन किया। कॉलेजों का आवंटन नौ अक्तूबर को हो जाएगा। विद्यार्थियों को मेसेज और मेल के जरिए इस बारे में सूचना दी जाएगी। विद्यार्थी खुद भी अपने लॉगिन और पासवर्ड का इस्तेमाल कर यह जानकारी ले सकेंगे।


रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से काउंसलिंग कराई जा रही है। काउंसलिंग के दौरान विद्यार्थियों को हाईस्कूल, इंटर, स्नातक के मूल प्रमाण पत्र स्कैन करके अपलोड करने हैं। इसके अलावा जाति प्रमाण पत्र और अन्य प्रमाण पत्र भी अपलोड किए जाने हैं। विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों से कहा है कि अभिलेख अपलोड करते समय जल्दबाजी न करें। सभी चीजों को ठीक से चेक करने के बाद ही समिट करें अन्यथा दाखिले में दिक्कतें आ सकती हैं। 


राज्य समन्वयक प्रो. पीवी सिंह का कहना है कि काउंसलिंग की रफ्तार ठीक है। आठ अक्तूबर तक पहले चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। नौ अक्तूबर को कॉलेज आवंटित होंगे।

Sunday, October 2, 2022

UGC: अब छात्र एक साथ दो डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई कर सकेंगे, देखें यूजीसी की गाइडलाइन

UGC: अब छात्र एक साथ दो डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई कर सकेंगे, देखें यूजीसी की  गाइडलाइन



नए नियमों के तहत छात्र अब फिजिकल मोड से दो पूर्णकालिक शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ा सकते हैं। लेकिन एक डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई का समय दूसरे डिग्री प्रोग्राम की कक्षा को बाधित न करें।  


इस शैक्षणिक सत्र से छात्र एक साथ दो डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई कर सकेंगे। यूजीसी काउंसिल बैठक में दो डिग्री प्रोग्राम, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, पीएचडी व विदेशी छात्रों के लिए अतिरिक्त सीटों पर दाखिले के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसी के आधार पर शुक्रवार को यूजीसी ने इसकी गाइडलाइन विश्वविद्यालयों और राज्यों को भेज दी है। छात्रों को सबसे अधिक फायदा दो शैक्षणिक डिग्री हासिल करने की मंजूरी से होगा। हालांकि, यह नियम पीएचडी प्रोग्राम में लागू नहीं होगा।



यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि  विश्वविद्यालयों से एक साथ दो शैक्षणिक डिग्री हासिल करने वाले छात्रों की सुविधा के लिए वैधानिक बदलाव को कहा गया है। इसमें उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) से अनुरोध किया गया था कि वे अपने सांविधिक निकायों के माध्यम से छात्रों को एक साथ दो शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की अनुमति देने के लिए तंत्र तैयार करें। यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से पत्र भेजा गया है। इसमें अनुरोध किया  गया है कि वे छात्रों के व्यापक हित में उक्त योजना के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करें।



नए नियमों के तहत छात्र अब फिजिकल मोड से दो पूर्णकालिक शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ा सकते हैं। लेकिन एक डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई का समय दूसरे डिग्री प्रोग्राम की कक्षा को बाधित न करें।  


एक छात्र को एक साथ दो डिग्री हासिल करने की अनुमति देने का उद्देश्य प्रत्येक छात्र की अद्वितीय क्षमताओं को पहचानना, पहचानना और बढ़ावा देना है। इसके अलावा ओडीएल (ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग) और ऑनलाइन मोड के तहत डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रमों को केवल ऐसे एचईआई के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।


UGC : बिना PhD और NET किए बनेंगे यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर, यूजीसी ने जारी किए भर्ती के नियम और दिशानिर्देश

UGC : बिना PhD और NET किए बनेंगे यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर, यूजीसी ने जारी किए भर्ती के नियम और दिशानिर्देश


विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान अब मशहूर एक्सपर्ट्स को प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस (पीओपी) इन यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस कैटेगरी के तहत फैकल्टी मेंबर्स के रूप में नियुक्त कर सकेंगे


विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान अब मशहूर एक्सपर्ट्स को प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस (पीओपी) इन यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस कैटेगरी के तहत फैकल्टी मेंबर्स के रूप में नियुक्त कर सकेंगे। इसके लिए औपचारिक शैक्षणिक योग्यता और प्रकाशन की आवश्यकताएं अनिवार्य नहीं होंगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा शुक्रवार को अधिसूचित नये दिशा-निर्देशों के अनुसार इंजीनियरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य, उद्यमिता, सामाजिक विज्ञान, ललित कला, सिविल सेवा और सशस्त्र बलों जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस श्रेणी के अंतर्गत नियुक्ति के लिए पात्र होंगे।


दिशानिर्देशों अनुसार, ''जिन व्यक्तियों की अपने विशिष्ट पेशे या भूमिका में कम से कम 15 साल की सेवा या अनुभव के साथ विशेषज्ञता है, अधिमानतः वरिष्ठ स्तर पर, वे 'प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस' के लिए पात्र होंगे। इस पद के लिए एक औपचारिक शैक्षणिक योग्यता आवश्यक नहीं, यदि उनके पास अनुकरणीय पेशेवर अभ्यास है।''


पीओपी दुनिया भर में सामान्य है। पीओपी, मुख्य रूप से गैर-कार्यकाल वाले संकाय सदस्य होते हैं। ये मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, एसओएएस यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी आफ हेलसिंकी जैसे कई विश्वविद्यालयों में प्रचलित है। भारत में भी, पीओएस को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली, मद्रास और गुवाहाटी में नियुक्त किया जाता है।


पीओपी की संख्या स्वीकृत पदों के 10 प्रतिशत से अधिक न हो
दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी समय उच्च शिक्षण संस्थान (एचईआई) में पीओपी की संख्या स्वीकृत पदों के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए और उन्हें तीन श्रेणियों में नियुक्त किया जाना चाहिए - उद्योगों द्वारा वित्त पोषित, एचईआई द्वारा अपने संसाधनों द्वारा वित्त पोषित और मानद आधार पर।


दिशानिर्देशों में कहा गया है कि किसी संस्थान में सेवा की अधिकतम अवधि तीन साल से अधिक नहीं होनी चाहिए, जिसे असाधारण मामलों में एक साल तक बढ़ाया जा सकता है।


योजना के तहत संकाय सदस्यों को तीन श्रेणियों में नियुक्त किया जाएगा - उद्योगों द्वारा वित्त पोषित प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस, एचईआई द्वारा अपने स्वयं के संसाधनों से रखे गए प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस और मानद आधार पर प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस।


दिशानिर्देशों में कहा गया है, ''प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस की नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए होगी। उनकी नियुक्ति किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज के स्वीकृत पदों को छोड़कर होगी। यह स्वीकृत पदों की संख्या और नियमित संकाय सदस्यों की भर्ती को प्रभावित नहीं करेगी। यह योजना उन लोगों के लिए खुली नहीं होगी जो शिक्षण पद पर हैं, चाहे सेवारत या सेवानिवृत्त हों।''

बीएड काउंसिलिंग : 6000 शामिल, 4500 सीटें बुक, 8 अक्तूबर तक पहली काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे

बीएड काउंसिलिंग : 6000 शामिल, 4500 सीटें बुक, 8 अक्तूबर तक पहली काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे



बरेली। बीएड काउंसिलिंग के दूसरे दिन छह हजार विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसमें 4500 विद्यार्थियों ने कॉलेजों में सीटें बुक कीं। आठ अक्तूबर तक पहले चरण की काउंसिलिंग चलेगी। दस अक्तूबर से दूसरे चरण की काउंसलिंग होगी।


रुहेलखंड विश्वविद्यालय बीएड की काउंसिलिंग अक्तूबर तक करवाएगा। चार चरणों में यह काउंसिलिंग होगी। पहले चरण की काउंसिलिंग में एक से लेकर 75 हजार रैंक तक के विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। शाम चार बजे तक काउंसिलिंग में छह हजार विद्यार्थियों ने अपने अभिलेख डाउनलोड किए। विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों से कहा है कि बैंक खाता संख्या ऐसा दें जो चालू हालत में हो। साथ ही जनधन खाते की डिटेल इसके लिए न दें। इसके अलावा विद्यार्थियों से कहा गया है कि वह अपने प्रमाण पत्रों की अपलोडिंग के दौरान उनके साइज पर ध्यान दें।


साथ ही हर डिटेल को सेव भी करते रहें। सेव न होने की स्थिति में डाटा अचानक गायब भी हो सकता है। राज्य समन्वयक प्रो. वीपी सिंह ने बताया कि ऑनलाइन काउंसिलिंग में विद्यार्थी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आठ अक्तूबर तक पहले चरण की काउंसलिंग चलेगी।

Saturday, October 1, 2022

फतेहपुर : 02 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती समारोह आयोजित करने संबंधी निर्देश / आदेश जारी

फतेहपुर : 02 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती समारोह आयोजित करने संबंधी निर्देश / आदेश जारी


देव दीपावली पर साढ़े तीन लाख दिए जलाएंगे वाराणसी के बेसिक शिक्षक, बीएसए वाराणसी ने दिया आदेश, दिया, तेल और बाती का खर्चा देगा पर्यटन विभाग

देव दीपावली पर साढ़े तीन लाख दिए जलाएंगे वाराणसी के बेसिक शिक्षक, बीएसए वाराणसी ने दिया आदेश,  दिया, तेल और बाती का खर्चा देगा पर्यटन विभाग


बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी में देव दीपावली पर 10 लाख दीए जलाए जाएंगे। इनमें से साढ़े तीन लाख दिए बेसिक शिक्षा विभाग जलवाएगा। इसके लिए जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने विभागीय शिक्षकों के लिए निर्देश जारी किया है।




शिक्षा अधिकारी ने यह काम देव दीपावली पर शिक्षकों को दीये जलाने के लिए जारी किया है। इसमें  बेसिक शिक्षकों को साढ़े तीन लाख दीये जलाने को कहा गया है। दिया और तेल बाती पर्यटन विभाग उपलब्ध कराएगा। 


 बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार पाठक की ओर से जारी आदेश के मुताबिक शिक्षकों को 10 अलग अलग सेक्टरों में 35,000 हजार दीये जलाने है। देव दिपावली पर सेक्टर 11 से सेक्टर 20 तक के दिए शिक्षकों को जलाने हैं। बीएसए ने हर सेक्टर के लिए प्रभारी भी नियुक्त किया हैं।

खेल शुल्क में 'खेल' नहीं कर पाएंगे सरकारी व निजी शिक्षण संस्थान, खेल के आयोजनों पर ही खर्च करनी होगी यह राशि

खेल शुल्क में 'खेल' नहीं कर पाएंगे सरकारी व निजी शिक्षण संस्थान

व्यवस्था पारदर्शी बनाने के साथ खेल अनिवार्य करने के निर्देश

खेल के आयोजनों पर ही खर्च करनी होगी खेल शुल्क की धन


लखनऊ। छात्रों से खेल के नाम पर वसूले जाने वाले शुल्क का शिक्षण संस्थान द्वारा डकारने का 'खेल' अब नहीं चलेगा। प्रदेश के सभी सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों को यह शुल्क अब खेल के आयोजनों पर ही खर्च करने होंगे।


दरअसल, प्रदेश के लगभग सभी संस्थान अपने विद्यार्थियों से इस मद में हर साल शुल्क वसूलते हैं। पर प्रबंधन न तो प्रतियोगिताओं का आयोजन कराता है और न ही छात्रों को किसी खेल का नियमित अभ्यास कराया जाता है। यही नहीं कुछ संस्थान तो इस राशि का उपयोग अपने निजी उपयोग में कर देते हैं। 


इस संबंध में मिली शिकायतों को देखते हुए अपर मुख्य सचिव खेल नवनीत सहगल ने प्रमुख सचिव माध्यमिक व बेसिक शिक्षा दीपक कुमार समेत अन्य को पत्र लिखकर इस शुल्क का इस्तेमाल हर हाल में खेल पर ही खर्च करने की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं।


यह भी कहा कि इस राशि को वास्तव में खेल संबंधी गतिविधियों पर ही खर्च करने के बारे में जानकारी की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है। इसके चलते ही संस्थान इसका दुरुपयोग करते हैं। इसे देखते हुए एक ऐसी व्यवस्था बने, जिससे कि राशि का दुरुपयोग न हो पाए। इसके साथ ही उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों में खेल को अनिवार्य करने के भी निर्देश दिए।

बीएड की पहली काउंसिलिंग में शामिल हुए 2600 विद्यार्थी, नौ अक्तूबर तक चलेगी पहली काउंसलिंग, दस अक्तूबर से दूसरा चरण

बीएड की पहली काउंसिलिंग में शामिल हुए 2600 विद्यार्थी, नौ अक्तूबर तक चलेगी पहली काउंसलिंग, दस अक्तूबर से दूसरा चरण



बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से बीएड की काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरे प्रदेशभर में शुरू करवा दी गई। ऑनलाइन काउंसिलिंग के पहले दिन शाम पांच बजे तक लगभग 2600 विद्यार्थियों ने अपने अभिलेख अपलोड किए। इनमें दो हजार से अधिक विद्यार्थियों ने कॉलेजों में सीटें बुक कीं। नेट की गति धीमी होने के कारण विद्यार्थियों को अभिलेख अपलोड करने में दिक्कतें जरूर आईं लेकिन अन्य तकनीकी बाधाएं नजर नहीं आई।




बीएड की काउंसिलिंग शुक्रवार की सुबह से ही जारी है। पूर्वाह्न 11 बजे तक प्रदेशभर से पांच सौ विद्यार्थियों ने काउंसलिंग में हिस्सा लिया। अपने अंकपत्र, सर्टिफिकेट, फोटो, बैंक पासबुक आदि अपलोड कीं। उसके बाद विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती गई। इस बार विद्यार्थी काउंसिलिंग के अभिलेख अपलोड करते ही अपने पसंदीदा कॉलेजों का भी चयन कर रहे हैं। 


हालांकि कॉलेज अलॉटमेंट की प्रक्रिया नौ अक्तूबर को होगी। दस अक्तूबर से काउंसिलिंग का दूसरा चरण शुरू होगा। राज्य समन्वयक प्रो. पीबी सिंह ने बताया कि काउंसिलिंग में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। विद्यार्थियों को पहले दिन दिक्कतें नहीं आई हैं। विद्यार्थी काउंसिलिंग में आ रही दिक्कतों को लेकर 9513632554 मोबाइल नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

OMR शीट पर परीक्षा देंगे 10वीं यूपी बोर्ड के छात्र, दो भागों में बांटा जाएगा प्रश्नपत्र

OMR शीट पर परीक्षा देंगे 10वीं यूपी बोर्ड के छात्र, दो भागों में बांटा जाएगा प्रश्नपत्र 

यूपी बोर्ड: कम्प्यूटर व मैनुअल दो तरह से जंचेंगी उत्तरपुस्तिकाएं

2023 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा, 2024 में 11वीं की वार्षिक गृह परीक्षा और 2025 की इंटर बोर्ड परीक्षा में ओएमआर शीट व्यवस्था लागू होगी। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन दो तरह से होगा। ओएमआर शीट स्कैन करकम्प्यूटर से जांची जाएंगी व उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन पहले की तरह शिक्षक करेंगे।



प्रयागराज। यूपी बोर्ड 2023 में पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा में ओएमआर शीट का भी उपयोग करेगा। प्रश्नपत्र हल करने के लिए 10वीं के छात्र-छात्राओं को सामान्य उत्तरपुस्तिका के साथ ही ओएमआर शीट भी दी जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बोर्ड यह बदलाव करने जा रहा है। इस संबंध में बोर्ड के स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। 70 अंकों की लिखित परीक्षा के प्रश्नपत्र को दो भागों में बांटा जाएगा।




प्रश्नपत्र के लगभग 30 प्रतिशत यानि 20 अंक का प्रथम भाग बहुविकल्पीय (मल्टीपल च्वॉयस क्वेश्चन) होगा, जिसका उत्तर परीक्षार्थियों को ओएमआर शीट पर देना होगा। दूसरा भाग (लगभग 70 प्रतिशत या 50 नंबर का) वर्णनात्मक प्रश्नों का होगा, जिनके उत्तर पहले की तरह पारम्परिक कॉपी पर देने होंगे। इन प्रश्नपत्रों में सीआईएससीई की तरह उच्चतर चिंतन कौशल से संबंधित प्रश्न भी रखे जाएंगे।