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Monday, August 21, 2023

चयन बोर्ड से धारा 18, 21 हटाए जाने से प्रधानाचार्यों में आक्रोश, जमकर विरोध की तैयारी

चयन बोर्ड से धारा 18, 21 हटाए जाने से प्रधानाचार्यों में आक्रोश, जमकर विरोध की तैयारी

प्रधानाचार्य परिषद कार्यसमिति की बैठक में निर्णय का जमकर विरोध

प्रयागराज | माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम में प्रावधानित धारा 21 और 18 को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में हटाए जाने से प्रदेश के प्रधानाचार्य आक्रोशित हैं। शनिवार को आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में प्रधानाचार्य परिषद कार्यसमिति की बैठक हुई, जिसमें इस निर्णय का जमकर विरोध किया।


बैठक के प्रारंभ में विजय वैश्य ने कहा कि प्रबंधक, प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य मिलकर ही संस्था को आगे बढ़ा सकते हैं। प्रदेश अध्यक्ष बृजेश कुमार शर्मा ने कहा कि पेंशन व्यवस्था समाप्त होने के बाद यह दूसरा ऐसा कदम है, जिससे प्रदेश के प्रधानाचार्य और शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होंगी और उन्हें किसी भी समय सेवा से निकाला जा सकेगा।


प्रदेश के मुख्य संरक्षक डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि इस कल्याणकारी राज्य में इस तरह का गया है। कदम दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रीष्मावकाश में प्रधानाचार्य काम करते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें कोई अर्जित अवकाश नहीं दिया जाता। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा ग्रीष्मावकाश के बदले उपार्जित अवकाश प्रदान किए जाने का निर्देश देना अपेक्षित है।


प्रदेश संरक्षक डॉ. जेपी मिश्रा ने कहा कि बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था प्रधानाचार्य और प्रबंधकों पर अविश्वास है। इसके साथ ही प्रतिदिन सूचनाएं मांगी जा रही हैं, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। बता दें कि बेसिक शिक्षा अधिनियम और उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग को समाप्त करके चयन आयोग 2023 बनाया गया है।


प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में विभिन्न जनपदों से 130 सदस्य बैठक में शामिल हुए। इस अवसर पर आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के प्रबंधक पंकज जायसवाल एवं विजय वैश्य ने समस्त प्रधानाचार्यों को शॉल एवं माला पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में डीएवी कॉलेज के प्राचार्य प्रमोद कुमार उपस्थित रहे।

शिक्षकों को प्रबंधतंत्र की मनमानी कार्रवाई से बचाने के लिए माध्यमिक शिक्षक संघ ने विरोध के लिए कसी कमर

शिक्षकों को प्रबंधतंत्र की मनमानी कार्रवाई से बचाने के लिए माध्यमिक शिक्षक संघ ने विरोध के लिए कसी कमर 


लखनऊ : शिक्षकों को प्रबंधतंत्र की मनमानी कार्रवाई से बचाने के लिए नए बनाए गए उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के अधिनियम में कोई प्रविधान न किए जाने का उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (मशिसं ) ने विरोध शुरू कर दिया है। संघ के प्रदेशीय उपाध्यक्ष डा. आरपी मिश्रा ने शनिवार को पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई है। 27 अगस्त को पदाधिकारी राजधानी में एकत्र होंगे और चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा की जाएगी।


उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के अस्तित्व में आने के बाद उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और उसका अधिनियम भी समाप्त हो गया है। इसके अधिनियम की धारा 21 में यह व्यवस्था थी कि बिना बोर्ड की अनुमति के सीधे प्रबंधतंत्र व जिला विद्यालय निरीक्षक शिक्षक पर कार्रवाई नहीं कर सकेंगे। शिक्षकों को उत्पीड़न से बचाने के लिए मशिसं ने यह धारा शामिल कराई थी। वहीं धारा 18 के तहत 60 दिनों तक माध्यमिक स्कूलों में प्राचार्य का पद रिक्त रहने के बाद स्कूल प्रबंधन सबसे वरिष्ठ शिक्षक को पदोन्नति देकर तदर्थ प्राचार्य के रूप में नियुक्त कर सकता था। अब यह भी नहीं हो सकेगा। ऐसे में बड़ी संख्या में स्कूल प्राचार्य विहीन हो जाएंगे। ऐसे में इसे नए अधिनियम में शामिल कराने के लिए आंदोलन शुरू किया जाएगा।



63 हजार शिक्षकों की सेवा सुरक्षा खतरे में, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का मामला, दंड पर चयन बोर्ड के पूर्वानुमोदन की व्यवस्था होगी समाप्त

● नए शिक्षा सेवा चयन आयोग में नहीं सेवा सुरक्षा का प्रावधान

● प्रबंधकों के हाथों शिक्षकों के शोषण की आशंका और बढ़ी

एडेड कॉलेजों में कार्यरत प्रधानाचार्य-शिक्षक

● 1505 प्रधानाचार्य

● 16141 प्रवक्ता

● 45869 सहायक अध्यापक


प्रयागराज :  प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर फिलहाल खतरा मंडरा रहा है। इन स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का चयन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होता है लेकिन नियोक्ता प्रबंधक होते हैं। चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की धारा-21 में यह प्रावधान है कि प्रधानाचार्य या शिक्षक पर कोई कार्रवाई करने या दंड देने से पहले प्रबंधक चयन बोर्ड से अनुमोदन लेते हैं।


हालांकि नौ अगस्त को विधानसभा से पारित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग विधेयक में यह प्रावधान नहीं है। इस विधेयक की धारा-16 के अनुसार अब एडेड कॉलेज के शिक्षकों की सेवा शर्तें और सुरक्षा इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम -1921 के विनियमों के अध्याय-3 के अनुसार संचालित होगी। ऐसे में आशंका है कि अब प्रबंधकों के हाथों शिक्षकों का उत्पीड़न और भी बढ़ जाएगा।

प्रधानाचार्य के पद पर तदर्थ पदोन्नति की व्यवस्था भी नहीं रहेगी प्रयागराज। नई व्यवस्था में प्रधानाचार्य के पद पर तदर्थ पदोन्नति की व्यवस्था भी नहीं रहेगी। यानि भविष्य में नियमित प्रधानाचार्य के सेवानिवृत्त होने पर वरिष्ठतम शिक्षक प्रधानाचार्य का काम तो करेंगे पर उन्हें प्रधानाचार्य का वेतन नहीं मिलेगा। नए आयोग के विधेयक में चयनबोर्ड की धारा-18 को भी हटा दिया गया है। जिसके अंतर्गत प्रधानाचार्य के पद पर तदर्थ पदोन्नति की व्यवस्था थी।

शिक्षकों की तैनाती में मनमानी पर आपत्ति

प्रयागराज : राजकीय शिक्षकों की तैनाती में मनमानी पर आपत्ति उठी है। राजकीय इंटर कॉलेज प्रयागराज के प्रवक्ता जय सिंह को यमुनापार के राजकीय बालिका हाईस्कूल कुंवरपट्टी जेवनिया में हेडमास्टर के पद पर तैनाती दी गई है। यही नहीं जीआईसी के ही मोहम्मद अजीजुल्लाह, जिनकी सेवानिवृत्ति में सिर्फ दो साल बचे हैं, उनको राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहजहांपुर में हेडमास्टर पर पदस्थापित किया गया है। राजकीय शिक्षक संघ के एक गुट अध्यक्ष रामेश्वर पांडेय का कहना है कि पुरुष शिक्षकों को पुरुष विद्यालयों में तैनाती दी जानी चाहिए। दो साल से कम सेवा वाले शिक्षकों को उनके विकल्प के आधार पर पदस्थापित करना चाहिए।

हमारा सरकार से अनुरोध है कि चयन बोर्ड अधिनियम की धारा-21 की व्यवस्था को नए आयोग अधिनियम में भी संशोधन करके लाया जाए। ऐसा न करने पर सभी शिक्षकों को पूरी क्षमता और एकता के साथ इसके लिए संघर्ष करना होगा।

लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट

लंबे संघर्ष के बाद चयन बोर्ड की नियमावली बनी थी। जिसमें बिना पूर्वानुमोदन प्रबंधक की कार्रवाई शून्य मानी जाती थी। अब मनमाने तरीके से शिक्षकों पर कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। नए विधेयक में सेवा सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। संघर्ष की योजना बन रही है। इसको सम्मिलित कराया जाएगा।

सुरेश कुमार त्रिपाठी, प्रदेश अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ व पूर्व एमएलसी

यूपी के संदर्भ में अपडेट करेंगे NCERT की कक्षा एक और दो की किताबें

 यूपी के संदर्भ में अपडेट करेंगे NCERT की कक्षा एक और दो की किताबें


एनसीईआरटी की कक्षा एक व दो की हिन्दी, अंग्रेजी व गणित की किताबों को उत्तर प्रदेश के स्थानीय परिवेश और आवश्यकताओं के आधार पर अपडेट किया जाएगा। एससीईआरटी के निदेशक डॉ. पवन कुमार ने राज्य शिक्षा संस्थान, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान और राज्य हिन्दी संस्था वाराणसी को क्रमश: गणित, अंग्रेजी व हिन्दी की किताबों में यूपी से संदर्भित सामग्री का समावेश करने का आदेश दिया है।



 14 जुलाई को हुई ऑनलाइन बैठक में एनसीईआरटी की पुस्तकों की समीक्षा और प्रदेश के शैक्षिक परिदृश्य, परिस्थितियों एवं स्थानीय परिवेश और आवश्यकता को दृष्टिगत विषयवस्तु जोड़े जाने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया था।


यूपी विशेष के लिए इस साल लागू नहीं कीं किताबें

यूपी के विशेष संदर्भों में किताबें अपडेट करने के कारण ही इस साल से एनसीईआरटी की हिन्दी, अंग्रेजी व गणित की किताबें प्रदेश में निःशुल्क नहीं बाटी जा सकी हैं। सरकार ने पहले शैक्षणिक सत्र 2023-24 से कक्षा एक और दो में एनसीईआरटी किताबें लागू करने का निर्णय लिया था। लेकिन नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के मुताबिक इन किताबों को यूपी के परिवेश में ढालने के लिए लगने वाले समय को देखते हुए बाद में इस सत्र में पूर्व से चल रही किताबों के जरिए ही पढ़ाई कराने का निर्णय लिया गया है।

शब्दकोश निर्माण से बच्चों में बेहतर होगी गणित की समझ, राज्य शिक्षा संस्थान पहली बार बना रहा है शब्दकोश, गणित के कठिन शब्दों को आसान भाषा में समझाएंगे

शब्दकोश निर्माण से बच्चों में बेहतर होगी गणित की समझ

05 वीं तक के एक करोड़ से अधिक बच्चों को लाभ

■ राज्य शिक्षा संस्थान पहली बार बना रहा है शब्दकोश 
■ गणित के कठिन शब्दों को आसान भाषा में समझाएंगे


प्रयागराज । प्रदेश के एक लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा एक से पांच तक के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं में गणित की समझ बेहतर बनाने के लिए पहली बार गणित विषय का शब्दकोश बनाया जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) से अनुमति मिलने के बाद शब्दकोश निर्माण के लिए राज्य शिक्षा संस्थान एलनगंज में सात अगस्त को कार्यशाला शुरू हुई है जो नौ सितंबर तक चलेगी।


संस्थान के प्राचार्य नवल किशोर का कहना है कि बच्चों के मानसिक स्तर के अनुसार गणित के कठिन शब्दों को सरल और रोजमर्रा की बोलचाल की भाषा में समझाने के लिए शब्दकोश बनवाया जा रहा है। इसके लिए बाहरी विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया है। संस्थान की सहायक उप शिक्षा निदेशक और समन्वयक समग्र शिक्षा डॉ. दीप्ति मिश्रा के अनुसार गणित के कई शब्द ऐसे होते हैं जो आसानी से समझ नहीं आते। इन शब्दों को समझने में छोटे बच्चों को अधिक परेशानी होती है। इसलिए शब्दकोश तैयार किया जा रहा है।


अगले साल से शुल्क भरपाई के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी होगी अनिवार्य, एक कोर्स छोड़ एंट्रेंस के जरिये दूसरे कोर्स में जाने पर बंद नहीं होगी छात्रवृत्ति

अगले साल से शुल्क भरपाई के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी होगी अनिवार्य

एक कोर्स छोड़ एंट्रेंस के जरिये दूसरे कोर्स में जाने पर बंद नहीं होगी छात्रवृत्ति

नैक ग्रेडिंग होगी अनिवार्य

प्रदेश में वर्ष 2025-26 से उन्हीं संस्थानों के छात्रों को यह सुविधा मिलेगी, जिन्हें नैक या समकक्ष संस्थाओं से ग्रेडिंग हासिल होगी।


लखनऊ। प्रदेश में अगले साल से छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के लिए न्यूनतम 75 फीसदी बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य होगी। यह नियम इंटरमीडिएट से ऊपर के सभी शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा। साथ ही एक कोर्स बीच में छोड़कर सरकारी प्रवेश प्रक्रिया (एंट्रेंस) के जरिये दूसरे कोर्स में एडमिशन लेने पर छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई की सुविधा बंद नहीं होगी।


इसके लिए नई नियमावली तैयार कर ली गई है, जिसके अगले सप्ताह जारी होने की पूरी संभावना है। यूपी में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को ढाई लाख रुपये तक और अन्य वर्ग के छात्रों को दो लाख रुपये तक सालाना परिवार की आमदनी होने पर यह सुविधा मिलती है। हर साल सभी वर्गों के 50 लाख से ज्यादा छात्र इस योजना का लाभ पाते हैं।


प्रस्तावित नियमावली में छात्रों की उपस्थिति पर काफी जोर दिया गया है। बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य होने से वास्तविक छात्र ही योजना का लाभ ले पाएंगे। अनुमान है कि इससे हर साल करीब 10 फीसदी बजट बचेगा। ऐसे में कोई भी पात्र छात्र बजट के अभाव में भुगतान से वंचित नहीं रहेगा।


अभी तक लागू नियमों के तहत अगर कोई छात्र स्नातक स्तर की पढ़ाई बीच में छोड़कर स्नातक स्तर के ही किसी दूसरे व्यावसायिक पाठ्यक्रम में दाखिला लेता है तो उसे न्यूनतम एक साल तक इस योजना का लाभ नहीं मिलता है। प्रस्तावित नियमावली लागू होने पर ऐसा नहीं होगा । 

Sunday, August 20, 2023

फीस वापसी की राह आसान नहीं! बेसिक शिक्षा विभाग में 72,825 शिक्षकों की निरस्त भर्ती प्रक्रिया का मामला

फीस वापसी की राह आसान नहीं!  बेसिक शिक्षा विभाग में 72,825 शिक्षकों की निरस्त भर्ती प्रक्रिया का मामला

पहले डायट हिसाब दे, तब हो फीस वापसी

आवेदन शुल्क के करीब 290 करोड़ रुपये है जमा सरकार के पास



बेसिक शिक्षकों की 72,825 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकला और वह 2012 में निरस्त हो गई। जिलेवार भर्ती के लिए अभ्यर्थियों ने कई-कई जिलों में आवेदन किए। ऐसे में आवेदन शुल्क भी हर जिले में जमा किया लेकिन वह आज तक वापस नहीं किया गया। अब हाई कोर्ट लगातार आदेश दे रहा है। उसके बावजूद भी बेसिक शिक्षा विभाग उनकी फीस वापस नहीं कर पा रहा। विभाग के आला अफसर जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) से हिसाब मांग रहे हैं। डायट अभी हिसाब ही नहीं दे पा रहे। ऐसे में माना जा रहा है कि शुल्क वापसी की राह अभी आसान नहीं है।


यह है मामला

बेसिक शिक्षकों के 72,825 पदों के लिए 2012 में सपा सरकार में विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती के लिए जिलेवार आवेदन मांगे गए थे। ऐसे में अभ्यर्थियों ने कई जिलों में आवेदन किए थे। ऐसे अभ्यर्थी भी हैं जिन्होंने 40-45 जिलों में आवेदन किया था। विज्ञापन में त्रुटि होने के कारण ये भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। उसके बाद नए सिरे से भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया लेकिन पहले आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों से ली गई।


आदेश के बाद भी फीस वापसी नहीं

भर्ती के लिए सामान्य और ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए 500 रुपये, एससी- एसटी के लिए 200 रुपये शुल्क था। विभागीय सूत्रों के अनुसार अभ्यर्थियों से आवेदन शुल्क का करीब 290 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा हुआ। जब शुल्क वापस नहीं हुआ तो कुछ अभ्यर्थी कोर्ट गए। इसके बाद 2018 में परिषद ने फीस वापसी के आदेश जारी किए थे। लेकिन आज तक फीस वापस नहीं हुई।


हाल ही में कोर्ट ने फिर फीस वापसी के आदेश दिए हैं। इसके बाद फिर बेसिक शिक्षा परिषद ने आदेश जारी किए कि सभी संबंधित डायट में आवेदन करके फीस वापस ले सकते हैं। उधर सभी डायट को भी आदेश दिए गए कि वे अपने जिले में अभ्यर्थियों और जमा फीस का ब्योरा भेजें। अभी तक डायट ये ब्योरा नहीं दे पाए हैं। अभी फीस वापसी भी नहीं हो रही। ऐसे में अभी 17 अगस्त को फिर एक आदेश जारी किया गया है। इसमें फिर से सभी डायट को ब्योरा भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि फीस वापसी की जा सके।


बहुत पुराना मामला है। अब हमारी कोशिश है कि सभी अभ्यर्थियों की फीस वापस हो जाए, इसलिए डायट से ब्योरा मांगा जा रहा है। निश्चित ही सभी अभ्यर्थियों की जल्द से जल्द फीस वापस की जाएगी। -प्रताप सिंह बघेल, सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद



 इसलिए आ रही मुश्किल 

मामला 2012 का है भर्ती के लिए जिलेवार आवेदन मांगे गए। फीस भी हर जिले में जमा हुई। हर अभ्यर्थी ने अलग-अलग जिलों में कई आवेदन किए। भर्ती निरस्त हो गई लेकिन तब अफसरों ने ढिलाई बरती और फीस वापस नहीं की। अभ्यर्थी लगातार मांग करते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। कोर्ट ने जब पहली बार 2018 में फीस वापसी के लिए कहा तो बेसिक शिक्षा परिषद ने फीस वापसी के आदेश तो कर दिए लेकिन गंभीरता से नहीं लिया। कोर्ट की सख्ती के बाद फिर से विभाग के अफसर आदेश कर रहे हैं। अब मुश्किल ये है कि पहले तो हर जिले से इतना पुराना हिसाब मिले। एक अभ्यर्थी ने एक आवेदन किया होता तब तो हिसाब भी आसान होता। किसी ने 10 तो किसी ने 40 और 45 जिलों तक में आवेदन कर दिए। ऐसे में हर जिले में उसकी फीस भी जमा हुई। यह हिसाब जिले की डायट से ही लिया जाना है। विभाग के ही जानकारों का मानना है कि कोशिश करने पर भी इसमें वक्त तो लगेगा ही।

स्कूली छात्रों को ‘प्रयास से मिलेगा अनुसंधान का मौका, 10 अक्तूबर से होगी योजना की शुरुआत

स्कूली छात्रों को ‘प्रयास से मिलेगा अनुसंधान का मौका,  10 अक्तूबर से होगी योजना की शुरुआत

- शिक्षा मंत्रालय इसके लिए ‘प्रयास योजना शुरू करने जा रहा

- NCERT ने योजना के लिए तैयार किया है दिशा-निर्देश


नई दिल्ली, । स्कूली  छात्रों को वैज्ञानिक पद्धति और प्रयोगों से परिचित कराकर उन्हें अनुसंधान एवं खोज का अवसर प्रदान किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय प्रोमोशन ऑफ रिसर्च एटीट्यूड इन यंग एंड एस्पाइयरिंग स्टूडेंट (प्रयास) योजना शुरू करने जा रहा है।


10 अक्तूबर से होगी शुरुआत : राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने प्रयास योजना 2023-24 के लिए एक दिशा-निर्देश तैयार किया है। इसकी शुरुआत 10 अक्तूबर 2023 से होगी। ‘प्रयास के दिशा-निर्देश के अनुसार, इसका मकसद युवा छात्रों के बीच वैज्ञानिक चिंतन उत्पन्न करना और साक्ष्य आधारित विज्ञान प्रक्रिया कौशल, नवीनता और रचनात्मकता का विकास करना है। इसमें व्यक्तिगत रूप से या समूहों में अनुसंधान या खोज करने के लिए छात्रों में क्षमता विकास पर जोर दिया गया है।


वैज्ञानिक कारणों की पहचान होगी

दस्तावेज के अनुसार, इसमें किसी स्थानीय समस्या की पहचान कर उसका अध्ययन किया जाएगा। इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों की जांच करने एवं हल खोजने तथा किसी विचार, कल्पना या अवधारणा पर शोध करने पर जोर दिया गया है। ‘प्रयास के अंतर्गत स्कूली छात्रों और शिक्षकों के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों के एक विशेषज्ञ की सहायता से किसी स्थानीय समस्या का हल करने या अनुसंधान आधारित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।


कौन लेगा हिस्सा

इसमें भाग लेने वाले शिक्षार्थियों की आयु 14-18 वर्ष होनी चाहिए। उनका नौवीं से 11वीं कक्षा में अध्ययनरत होना अनिवार्य होगा। योजना के दस्तावेज के अनुसार, इसमें एक छात्र या अधिकतम दो छात्रों के समूह के साथ स्कूल के एक शिक्षक और किसी उच्च शिक्षण संस्थान के एक विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं। प्रति विद्यालय केवल एक प्रविष्टि पर विचार होगा। इस परियोजना की अवधि स्कूल में कार्यक्रम शुरू होने की तारीख से एक वर्ष के लिए है। प्रयास 2023-24 के लिए कार्यकाल का समय 10 अक्तूबर 2023 से शुरू होकर 9 अक्तूबर 2024 तक रहेगा।


50 हजार रुपये का प्रोत्साहन

दस्तावेज के अनुसार, प्रत्येक चयनित शोध प्रस्ताव के लिए कुल 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन अनुदान किया जाएगा। इस राशि में से 10 हजार रुपये छात्र को दिए जाएंगे (दो छात्र होने पर 5-5 हजार)। इसमें से छात्रों को शोधकार्य करने में सुविधा देने के लिए स्कूलों को 20 हजार और उच्च शिक्षण संस्थान के विशेषज्ञ को 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। परियोजना में स्कूल के एक विज्ञान शिक्षक को पूरे कार्यकाल के दौरान छात्रों को उनके शोध कार्य में मार्गदर्शन के लिए नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए 20 सितंबर तक आवेदन किया जा सकेगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना 10 अक्तूर 2023 से प्रारंभ होगी।

CBSE छात्र 12वीं में विषय नहीं बदल सकेंगे

CBSE छात्र 12वीं में विषय नहीं बदल सकेंगे 


नई दिल्ली, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने वर्ष 2024 में होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक, 12वीं कक्षा में छात्र विषय नहीं बदल सकेंगे। यानी जो विषय वे 11वीं में पढ़ेंगे, उन्हें वही 12वीं में भी पढ़ने होंगे।


सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों की फोटो और जानकारी सावधानीपूर्वक भरें। सीबीएसई के अनुसार, 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा फरवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होनी हैं। स्कूलों को इस बात की सूचना पहले ही दे दी गई है। पहले उन विषयों की परीक्षा होगी, जिनमें छात्रों की संख्या कम रहेगी। इसके अलावा यदि कोई छात्र अतिरिक्त विषय लेना चाहता है तो उसे नौवीं या 11वीं कक्षा में पंजीकरण के समय लेना होगा।



बोर्ड के अनुसार, एक जनवरी, 2024 तक स्कूल में छात्रों की 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। बोर्ड ने कहा कि क्षेत्रीय कार्यालय के पास छात्रों की सूची आने के बाद इसका निर्णय लिया जाएगा कि कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति मिलनी चाहिए या नहीं।

राजकीय शिक्षकों ने मांगा 62 वर्ष में सेवानिवृत्ति का विकल्प और एसीपी का लाभ

राजकीय शिक्षकों ने मांगा 62 वर्ष में सेवानिवृत्ति का विकल्प और एसीपी का लाभ 


● एडेड माध्यमिक व वेसिक के शिक्षकों के पास है 60 या 62 वर्ष का अवसर 
● राजकीय शिक्षकों को नहीं दिया जा रहा एसीपी का लाभ


प्रयागराज : अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के पास सेवानिवृत्ति को लेकर विकल्प है, लेकिन राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के पास विकल्प की सुविधा नहीं है। उन्हें 60 वर्ष की आयु पर ग्रेच्युटी लाभ के साथ सेवानिवृत्त कर दिया जाता है। राजकीय शिक्षक भी सेवानिवृत्ति को लेकर 62 वर्ष का विकल्प चाहते हैं। इसके लिए महानिदेशक (डीजी) स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद को पत्र भेजा गया है।


डीजी को भेजे पत्र में राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय एवं प्रांतीय महामंत्री सत्यशंकर मिश्र ने बताया कि एडेड माध्यमिक के शिक्षकों की तरह बेसिक शिक्षा के शिक्षकों के पास भी विकल्प भरने की सुविधा है कि वह 60 वर्ष की आयु पर ग्रेच्युटी लाभ के साथ सेवानिवृत्ति चाहते हैं या 62 वर्ष की आयु पर। 


62 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्ति होने पर ग्रेच्युटी का लाभ नहीं दिया जाता । इसके विपरीत राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के एलटी, प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक एवं प्रधानाचार्यों को 60 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्ति दी जाती है। मांग की गई है उन्हें भी विकल्प का अवसर दिया जाए कि वह ग्रेच्युटी के साथ 60 वर्ष में सेवानिवृत्ति या बिना ग्रेच्युटी लाभ के 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति चुन सकें। 


यह भी बताया है कि राजकीय शिक्षकों को राज्य कर्मचारी नहीं माना गया है और न ही उन्हें एश्योर्ड करियर प्रमोशन (एसीपी) का लाभ दिया जा रहा है। मांग की गई है कि समानता के अधिकार के तहत उन्हें भी विकल्प की सुविधा दी जाए।

Saturday, August 19, 2023

उच्च शिक्षा : महाविद्यालयों ने स्मार्ट क्लास पर खर्च धनराशि का नहीं दिया विवरण, शासन ने डिग्री कालेजों से मांगा खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र, 58 महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लास के लिए दिया था 10 करोड़

उच्च शिक्षा : महाविद्यालयों ने स्मार्ट क्लास पर खर्च धनराशि का नहीं दिया विवरण

● शासन ने डिग्री कालेजों से मांगा खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र

● 58 महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लास के लिए दिया था 10 करोड़


प्रयागराज : प्रदेश के 58 राजकीय महाविद्यालयों में 112 स्मार्ट क्लासेज की स्थापना के लिए एक वर्ष पहले 10 करोड़ रुपये दिए गए थे। इन कालेजों में क्लास स्मार्ट हुई या नहीं, इसका विवरण अब तक उच्च शिक्षा निदेशालय को नहीं भेजा गया। अब शासन ने उपयोगिता प्रमाणपत्र मांगा तो अफसर सक्रिय हुए हैं।


उच्च शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाई का तरीका आधुनिक करने के लिए प्रदेश के 172 राजकीय महाविद्यालयों में से 83 में 154 स्मार्ट क्लास की स्थापना के लिए शासन से पिछले वर्ष स्वीकृति मिली थी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में शासन ने 58 कालेजों में 112 स्मार्ट क्लास की स्थापना के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किया था। 8.91 लाख रुपये प्रति स्मार्ट क्लास की दर से कालेजों को धनराशि दी गई। चार अगस्त 2022 को कालेजों के खाते में धनराशि भेज दी गई थी। धनराशि लिए एक वर्ष हो गए लेकिन प्राचार्यों ने इसका उपयोगिता प्रमाण पत्र निदेशालय को नहीं भेजा। कुछ दिन पहले विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने उच्च शिक्षा निदेशक से स्मार्ट क्लास पर खर्च की गई धनराशि का विवरण मांगा। शासन के निर्देश पर सहायक निदेशक डा. जय सिंह ने प्राचार्यों से उपयोगिता प्रमाणपत्र ई - मेल पर मंगवाया। 25 और कालेजों में 42 स्मार्ट क्लास लगाना है। जल्द ही धनराशि अवमुक्त होगी।

यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों पर बरसेंगे अंक, बन रहा माड्यूल

यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों पर बरसेंगे अंक, बन रहा माड्यूल

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के विद्यालयों के छात्र- छात्राओं को परिश्रम के बावजूद कम अंक मिलने को गंभीरता से लिया गया है। चिंता जताई गई है। कि आखिर ज्यादातर विद्यार्थी 60 प्रतिशत अंक के आसपास ही क्यों अटक जाते हैं। वह पूर्णांक के आसपास तक क्यों नहीं पहुँचते हैं। अब इसका कारण जानने के साथ निवारण पर काम किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी अधिकतम अंक प्राप्त कर सकें।


इसके लिए कक्षा - 11 एवं 12 के छात्र-छात्राओं को ध्यान में रखकर अंग्रेजी, गणित व विज्ञान विषय में उपचारात्मक शिक्षण ( रेमेडियल माड्यूल) कार्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी इंस्टीट्यूट आफ एडवांस स्टडीज इन एजूकेशन (आइएएसई) को दी गई है। इसमें कठिन अध्याय, भाग, सूत्र आदि को सरल ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि विद्यार्थी सहजता से समझकर परीक्षा में अच्छे अंक पा सकें। आइएसई के प्राचार्य संतराम सोनी ने बताया कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। विज्ञान विषय में भौतिक, रसायन और जीवविज्ञान पर केंद्रित माड्यूल बनेगा। इसी तरह गणित और अंग्रेजी विषय के विशेषज्ञ कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों के शिक्षण कार्यक्रम तैयार करेंगे। इसमें उन पक्षों का समाधान रहेगा, जिसके कारण विद्यार्थी अधिकतम अंक प्राप्त करने से वंचित हो जाते हैं । 

उपचारात्मक शिक्षण कार्यक्रम की पुस्तक में इसी पर जोर रहेगा। इसमें जो सूत्र, अध्याय या विषयवस्तु विद्यार्थियों को कठिन लगते हैं, उसका सरलीकरण होगा। इसके माध्यम से शिक्षक सरल ढंग से विद्यार्थियों को समझा सकेंगे। इसे महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद के निर्देश पर शैक्षिक सत्र 2024-25 को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना है। माड्यूल से शिक्षण कार्यक्रम 50 दिन का होगा, जिसके अनुरूप विद्यालयों में एक अप्रैल से 20 मई तक पढ़ाई होगी।

डिग्री ही नहीं डिप्लोमा में भी संबद्धता अधूरी, पॉलीटेक्निक में एक साल पढ़ाई करा चुके कई संस्थानों की एनओसी भी फंसी

डिग्री ही नहीं डिप्लोमा में भी संबद्धता अधूरी, पॉलीटेक्निक में एक साल पढ़ाई करा चुके कई संस्थानों की एनओसी भी फंसी

22 अगस्त से काउंसिलिंग प्रस्तावित, आगे बढ़ाई जा सकती है इसकी तिथि

लखनऊ : राजकीय, एडेड व निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों में दाखिले के लिए जहां प्रवेश परीक्षा के नतीजे जारी हो चुके हैं, वहीं विद्यार्थियों से उनके पसंद के कॉलेजों का विकल्प भी लिया जा रहा है। लेकिन अब तक इंजीनियरिंग व फार्मेसी डिप्लोमा संस्थानों की संबद्धता प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में 22 अगस्त से प्रस्तावित काउंसिलिंग को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।


पॉलीटेक्निक संस्थानों की संबद्धता को लेकर पिछले कुछ महीने से उठापटक चल रही है। निर्धारित मानक न पूरा करने वाले 427 संस्थानों की एनओसी निरस्त कर दी गई थी। दो दर्जन से ज्यादा संस्थान ऐसे भी हैं, जिनमें एक साल की पढ़ाई भी हो चुकी है। इनकी संबद्धता भी अब तक नहीं फाइनल हुई है। इनकी सूची भी संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। यह कहा गया है कि इन संस्थानों की नए सत्र 2023-24 में संवद्धता अभी लंबित है। ऐसे में ये कॉलेज

प्राविधिक शिक्षा परिषद और शासन के चक्कर काट रहे हैं। नए संस्थानों की भी संबद्धता फाइनल नहीं हो पाई है। जबकि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के कैलेंडर के अनुसार संबद्धता प्रक्रिया 31 जुलाई तक हो जानी चाहिए थी। प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव अजीत कुमार मिश्र बताते हैं कि जिन संस्थानों के नवीनीकरण में कोई विधिक अड़चन नहीं थी, उनकी संबद्धता जारी कर दी गई है। कुछ पुराने संस्थानों और नए संस्थानों की संबद्धता पर निर्णय होना बाकी है। इसे जल्द जारी कर दिया जाएगा।

यूपी के 70 फीसदी युवा यूट्यूब-व्हाट्सऐप पर बर्बाद कर रहे अपना कीमती समय

यूपी के 70 फीसदी युवा यूट्यूब-व्हाट्सऐप पर बर्बाद कर रहे अपना कीमती समय

1100 विद्यार्थियों पर भारत लैब ने किया सर्वे 


लखनऊ :  यूपी के 70 फीसदी युवा यूट्यूब और व्हाट्सएप को पसंद करते हैं। जिसके चलते यूट्यूब और व्हाट्सएप पर उनका काफी समय बर्बाद हो रहा है। यह तथ्य एलयू और रीडिफ्यूजन द्वारा स्थापित भारत लैब के सर्वे में सामने आया है। यह सर्वे एलयू के प्रबंधन विभाग के शोधार्थियों ने प्रदेश के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलेज जाने वाले 16 से 25 वर्ष के 1100 विद्यार्थियों पर किया।


भारत लैब ने यूथ की ‘फिल टाइम-किल टाइम’ आदतों पर रिपोर्ट जारी की है। कुलपति आलोक कुमार राय ने बताया कि रीडिफ्यूजन और एलयू की ओर से लॉन्च किए गए थिंक टैंक ‘अपना टाइम आ गया’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में दिया गया है कि 18 फीसदी  युवा सप्ताहांत में दोस्तों और विस्तारित परिवार के साथ चार घंटे से अधिक समय बिताते हैं।


रेडियो का उपयोग हुआ कम
 सर्वे में सामने आया है कि 87 फीसदी युवा मनोरंजन या समाचार के लिए रेडियो का उपयोग नहीं कर रहा। वहीं 24 फीसदी  आबादी अपने खाली समय में टेलीविजन देखना पसंद करती है। जबकि अन्य लोग सोशल और ऑनलाइन मीडिया पर समय बर्बाद करना पसंद करते हैं।


यूट्यूब और व्हॉट्सएप पर अधिक सक्रिय
 सर्वे में सामने आया कि 56 फीसदी  लोग मनोरंजन के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। लगभग 70 अन्य प्लेटफार्मों की तुलना में यूट्यूब और व्हाट्सएप को पसंद कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 50 फीसदी युवा अन्य सभी प्लेटफार्मों के अलावा मनोरंजन के लिए नियमित रूप से यूट्यूब का उपयोग करते हैं।


फिल्में, वेब शृंखला और संगीत पसंद

लगभग 60 फीसदी युवा अन्य प्रकार की सामग्री की तुलना में फिल्में और वेब सीरीज देखना पसंद करते हैं। इसके अलावा संगीत भी पसंद है। 22 फ़ीसदी लोग नियमित रूप से टेलीविजन पर धारावाहिक देखते हैं।


खाली समय में यूट्यूब पसंद
 सोशल मीडिया की बात होती है तो समाचार, शैक्षिक सामग्री और समसामयिक मामलों यूट्यूब पहली पसंद है। वहीं 16 फीसदी लोग समाचार और समसामयिक मामलों के लिए टेलीविजन देखते हैं। लगभग 23 फीसदी  समाचार पत्र और पत्रिकाएं पढ़ते हैं। वहीं 60 फीसदी लोग वेबसाइटों और फोन एप्स पर समाचारों को पढ़ना पसंद कर रही है। 32 फीसदी नियमित रूप से ऑनलाइन स्ट्रीमिंग खेल देखते हैं।


बेसिक शिक्षा परिषद सचिव आदेश का पालन करें या हाजिर हों : हाईकोर्ट

बेसिक शिक्षा परिषद सचिव आदेश का पालन करें या हाजिर हों : हाईकोर्ट


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के सचिव प्रताप सिंह बघेल को कोर्ट के आदेश का पालन कर हलफनामा दाखिल करने या हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सचिव को आदेश का अनुपालन कर हलफनामा दाखिल करने के लिए एक माह का समय दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने चेतना साहनी की द्वितीय अवमानना याचिका पर अधिवक्ता एमए सिद्दीकी को सुनकर दिया है। 


कोर्ट ने सचिव को सहायक अध्यापक याची का स्थानान्तरण सीतापुर से लखनऊ करने पर विचार करने का आदेश दिया था। पालन न करने पर दाखिल अवमानना याचिका पर कोर्ट ने आदेश पालन करने का समय दिया था। इसके बावजूद आदेश पालन नहीं किया गया तो दोबारा अवमानना याचिका की गई।


यूपी में मदरसों को मान्यता देने की तैयारी

यूपी में मदरसों को मान्यता देने की तैयारी

लखनऊ : प्रदेश में करीब आठ साल बाद एक बार फिर मदरसों को मान्यता देने की तैयारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की अगले सप्ताह यहां बैठक होने वाली है। इस बैठक में पिछले लम्बे अरसे से सरकारी मान्यता के लिए आवेदन कर रहे मदरसों को मान्यता दिये जाने पर विचार किया जाएगा।


यह जानकारी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तेखार अहमद जावेद ने दी। उन्होंने बताया कि बैठक में मान्यता के नवीनीकरण, मदरसों के उच्चीकरण आदि पर विचार विमर्श होगा। बताते चलें कि राज्य में इससे पहले वर्ष 2015 में करीब 1500 मदरसों को मान्यता दी गई थी और 100 मदरसे अनुदान सूची पर भी लिए गए थे।


इस वक्त प्रदेश में मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या करीब 16 हजार 700 है, इनमें से 560 मदरसे अनुदानित भी हैं। इनके अलावा 8000 से कुछ अधिक मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं।

Friday, August 18, 2023

बीएड अभ्यर्थियों ने की प्राथमिक शिक्षक भर्ती में शामिल करने की मांग, बेसिक शिक्षा निदेशालय का किया घेराव

बीएड अभ्यर्थियों ने की प्राथमिक शिक्षक भर्ती में शामिल करने की मांग, बेसिक शिक्षा निदेशालय का किया घेराव 


लखनऊ। प्राथमिक शिक्षकों को नियुक्ति में बीएड की डिग्री को योग्य न मानने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद बीएड डिग्रीधारी प्रदेश के युवा काफी परेशान हैं। प्रदेश के बीएड अभ्यर्थियों ने बृहस्पतिवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय का घेराव किया।


अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार से मांग की वह यूपी में बीएड अभ्यर्थियों को पीआरटी (कक्षा एक से पांच) की शिक्षक भर्ती में शामिल करने क आदेश जारी करे और इसके लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) में भी अपना आवेदन करे।


 प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रदेश में 13 से 17 लाख बीएड डिग्री धारक हैं। जिन्होंने पीआरटी में भर्ती के लिए ही बीएड की डिग्री ली है। अब अचानक उन्हें इसके लिए अयोग्य कर दिया गया है। इस मामले में राजस्थान सरकार और एनसीटीई ने सुप्रीम कोर्ट में ठीक से पैरवी नहीं की। जिसकी वजह से उनकी बात ठीक से रखी नहीं जा सकी है।


अभ्यर्थियों ने कहा कि इसमें काफी ऐसे भी अभ्यर्थी हैं जिन्होंने बीटेक, बीकॉम के बाद बीएड किया है। वे पीआरटी के अलावा किसी और शिक्षक भर्ती के लिए योग्य नहीं हैं। प्रदेश सरकार हमारी मांग एनसीटीई तक पहुंचाए। उन्होंने कहा कि चार साल से टीजीटी, पीजीटी की भर्ती नहीं आई है। ऐसे में उनके पास नौकरी का कोई विकल्प नहीं होगा।


अभ्यर्थियों की महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद से वार्ता हुई उन्होंने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि इसके बाद भी अभ्यर्थी निदेशालय पर डटे रहे। 

Thursday, August 17, 2023

पढ़ाना टीचर की ड्यूटी का हिस्सा, 'मिड-डे मील' लागू करना नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की केंद्र की पुनर्विचार याचिका

पढ़ाना टीचर की ड्यूटी का हिस्सा, 'मिड-डे मील' लागू करना नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की केंद्र की पुनर्विचार याचिका


बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जिसमें 'मिड-डे मील' योजना को लागू करने की जिम्मेदारी शिक्षकों को नहीं दी जा सकती है। इसमें शिक्षा अधिकार कानून में शिक्षकों को दूसरी ड्यूटी देने का प्रावधान नहीं दिया गया है। पहली से आठवीं के स्टूडेंट्स के लिए केंद्र ने 1995 में योजना शुरू की थी।
 

मुंबई : 'मिड-डे मील' योजना को लागू करने की जिम्मेदारी शिक्षकों को नहीं दी जा सकती है। यह मत व्यक्त करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज़ कर दी। हाई कोर्ट ने 27 फरवरी, 2014 एक आदेश में कहा था कि 'मिड-डे मील' के तहत दिए जाने वाले भोजन को टेस्ट करने व उसका रिकॉर्ड रखने का काम शिक्षकों को न दिया जाए। केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि हाई कोर्ट अपने इस आदेश पर दोबारा विचार करे।

हम अपील कोर्ट नहीं: बेंच

जस्टिस एस़ बी़ शुक्रे व जस्टिस राजेश पाटील की बेंच के सामने केंद्र की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान बेंच ने कहा कि यदि एक बार हाई कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला है कि 'मिड-डे मील' का कार्यान्वयन शिक्षकों की ड्यूटी का हिस्सा नहीं है, तो हम इस पर पुनर्विचार नहीं कर सकते हैं, क्योंकि हम अपील कोर्ट नहीं हैं। वैसे भी, हमारे सामने संतोषजनक कारण नहीं है, जिसके आधार पर पुराने आदेश पर पुनर्विचार किया जा सके। इसीलिए केंद्र सरकार की याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है। 'मिड-डे मील' योजना लागू करने के लिए राज्य सरकार की ओर से नियम तैयार किए गए हैं, जिसके खिलाफ महिला बचत गुट ने भी कोर्ट में याचिका दायर की है।


'शिक्षा अधिकार कानून में शिक्षकों को दूसरी ड्यूटी देने का प्रावधान नहीं'पहली से आठवीं के स्टूडेंट्स के लिए केंद्र ने 1995 में 'मिड-डे मील' योजना शुरू की थी। राज्य सरकार ने इस योजना के अमल को लेकर जून, 2009 और फरवरी, 2011 में निर्णय लिया था। सरकार के निर्णय के मुताबिक तय शर्तों को पूरा करने के बाद महिला बचत गट को 'मिड-डे मील' का ठेका दिया जाता है। इस योजना में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है, जबकि 25 प्रतिशत राज्य सरकार की हिस्सेदारी की है। 22 जुलाई, 2013 में केंद्र सरकार ने योजना को लेकर नए सिरे से नियमावली जारी की। इस नियम के तहत छात्रों को भोजन देने से पहले शिक्षक उसे जांचे और उसका रिकॉर्ड रखें।


साल 2014 में हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 'मिड-डे मील' की योजना से जुड़ा काम शिक्षकों का न दिया जाए। इसके लिए क्षेत्र के विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाए, जो 'मिड-डे मील' के किचन व स्वच्छता से जुड़े पहलू को देखेंगे। शिक्षा अधिकार कानून की धारा 27 के तहत शिक्षकों को शैक्षणिक कार्य के अलावा कोई दूसरा काम नहीं दिया जा सकता है।

माध्यमिक शिक्षा : शिक्षिकाओं को मिलेगा करवा चौथ का अवकाश, अन्य महिला व्रत पर भी ले सकेंगी छुट्टी

माध्यमिक शिक्षा : शिक्षिकाओं को मिलेगा करवा चौथ का अवकाश, अन्य महिला व्रत पर भी ले सकेंगी छुट्टी


लखनऊ। माध्यमिक विद्यालयों में तैनात महिला शिक्षिकाओं को करवा चौथ के व्रत के लिए अवकाश घोषित किया गया है। इसकी मांग लंबे समय से शिक्षक संगठन कर रहे हैं। 


माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने इससे संबंधित आदेश बुधवार को जारी किया। उन्होंने यह भी कहा है कि क्षेत्र विशेष में हरि तालिका तीज या हरियाली तीज, संकठा चतुर्थी, हलषष्ठी/ ललई छठ, ज्यूतिया व्रत / अहोई अष्टमी व्रत रखने वाली महिला शिक्षिकाओं को उनके प्रार्थना पत्र के आधार पर प्राचार्य छुट्टी स्वीकृत करेंगे।  बता दें कि बेसिक विद्यालयों में करवा चौथ का अवकाश पहले से दिया जा रहा है।



विवाहित शिक्षिकाओं के लिए विशेष अवकाश के आदेश


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में कार्यरत विवाहित महिलाओं के लिए विभिन्न त्योहारों के अवसर पर विशेष अवकाश के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। साल के अलग-अलग तिथियों में होने वाले अवकाश के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से सोमवार को आदेश जारी कर दिया गया है।


 आदेश के अनुसार प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत विवाहित महिला शिक्षिकाओं के लिए करवा चौथ के दिन अवकाश रहेगा। इसी प्रकार से क्षेत्र विशेष में हरितालिका तीज, अथवा हरियाली तीज, संकठा चतुर्थी हलषष्ठी / ललई छठ, अहोई अष्टमी में व्रत रखने वाली महिला शिक्षिकाओं को उनके प्रार्थना पत्र के आधार पर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक द्वारा अनुमन्य किया जाएगा। शेष अवकाश पूर्ववत रहेगा। 


निर्देश दिए गए हैं कि शासन द्वारा 8 दिसम्बर 2022 को घोषित अवकाश के आधार पर सभी विद्यालयों के लिए वर्ष 2023 के लिए अवकाश तालिका संलग्न कर प्रेषित की जा चुकी है।

बीएड अभ्यर्थियों को दोहरा झटका, प्राइमरी से हुए बाहर और माध्यमिक की भर्ती भी फंसी

बीएड अभ्यर्थियों को दोहरा झटका, प्राइमरी से हुए बाहर और माध्यमिक की भर्ती भी फंसी



प्रयागराज । बीएड अभ्यर्थियों को दोहरा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्राइमरी शिक्षक भर्ती से बाहर कर दिया है। वहीं, अशासकीय और राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में भी साल भर से अधिक समय से शिक्षक भर्ती फंसी हुई है।

प्राइमरी शिक्षक भर्ती से बाहर किए जाने पर बीएड अभ्यर्थियों को तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि प्राइमरी में ही शिक्षकों के सबसे अधिक पदों पर भर्ती निकलती है। पिछली बार वर्ष 2018 में 69 हजार पदों पर शिक्षक भर्ती निकली थी। प्राइमरी से बाहर किए जाने पर बीएड अभ्यर्थियों को अब माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती से उम्मीद रह गई है, लेकिन माध्यमिक विद्यालयों में भी एक साल से भर्ती फंसी हुई है।


राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में बीएड की अर्हता मांगी जाती है। वहीं, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक (टीजीटी) के पदों पर भर्ती के लिए बीएड की अर्हता अनिवार्य है, जबकि अशासकीय विद्यालयों में प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में बीएड अभ्यर्थियों को पांच अंकों का अधिभार मिलता है।

अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में भर्ती की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पास है। बोर्ड ने पिछले साल टीजीटी-पीजीटी के 4163 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था और अगस्त 2022 में आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन बोर्ड में अब न तो अध्यक्ष हैं और न ही कोई सदस्य । अब तक परीक्षा तिथि घोषित नहीं हो सकी है और यह भर्ती अब नए शिक्षा सेवा चयन आयोग को करनी है।

भर्ती के लिए 13 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं, जिन्हें अब नए आयोग का गठन होने तक भर्ती के लिए इंतजार करना पड़ेगा। वहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को एलटी ग्रेड शिक्षकों के छह हजार से अधिक पदों का अधियाचन मिल चुका है। अधियाचन मिले एक साल बीत चुका है, लेकिन समकक्ष अर्हता स्पष्ट न होने के कारण यह भर्ती भी फंसी हुई है।


संशोधित गजट के लिए धरने पर बैठे अभ्यर्थी

प्रयागराज । प्राइमरी शिक्षक भर्ती से बाहर किए गए अभ्यर्थियों ने बुधवार को पत्थर गिरजाघर चौराहे के पास युवा मंच के बैनर तले धरना-प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया। 

ज्ञापन के जरिये राष्ट्रपति से मांग की गई कि राजपत्र को संशोधित करते हुए बीएड अभ्यर्थियों को प्राइमरी भर्ती में शामिल होने का मौका दिया जाए और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए। युवा मंच के अनिल सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने टीजीटी-पीजीटी के तकरीबन 25 हजार पद रिक्त होने की जानकारी दी, लेकिन भर्ती केवल 4163 पदों पर की जा रही है। 


यूपी के मेडिकल कॉलेजों में आधार आधारित हाजिरी अनिवार्य, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने पिछले साल ही आधार इनबिल्ड बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम सिस्टम लागू करने का दिया है निर्देश

यूपी के मेडिकल कॉलेजों में आधार आधारित हाजिरी अनिवार्य

सभी प्रधानाचार्यों को नियम का पालन कराने का आदेश

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने पिछले साल ही आधार इनबिल्ड बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (एईबीएएस) सिस्टम लागू करने का दिया है निर्देश


लखनऊ। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में अब आधार आधारित हाजिरी व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। जहां आधार आधारित हाजिरी व्यवस्था नहीं होगी, वहां के संकाय सदस्यों, रेजीडेंट डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों का वेतन और मानदेय का भुगतान नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, भविष्य में एमबीबीएस व एमएस एमडी की सीटों की मान्यता में भी समस्या आएगी।


राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने पिछले साल ही आधार इनबिल्ड बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (एईबीएएस) सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया है। पिछले दिनों आयोग की टीम ने कॉलेजों का निरीक्षण किया तो एईबीएएस लागू नहीं होने की जानकारी मिली। इस पर कई मेडिकल कॉलेजों को पाठ्यक्रम का नवीनीकरण व मान्यता देने से इन्कार कर दिया था।


वहीं, पिछले दिनों समीक्षा बैठक में कई कॉलेजों में एईबीएएस न लागू करने की पुष्टि हुई। इस पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने सभी प्रधानाचार्यों को आधार आधारित हाजिरी व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया गय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी मेडिकल कॉलेज में सीट बढ़ोतरी के मामले में हाजिरी क वजह से रोड़ा अटका तो संबंधित प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे।


क्या है नई व्यवस्था

एईवीएएस में बायोमीट्रिक हाजिरी को आधार कार्ड से भी जोड़ दिया गया है। इससे हाजिरी में किसी तरह का घालमेल नहीं हो सकती है। संबंधित व्यक्ति हाजिरी लगाने के बाद कॉलेज में है या नहीं, इसकी भी निगरानी की जा सकेगी।

Wednesday, August 16, 2023

CTET 2023 admit card: CTET के एडमिट कार्ड जल्द होने वाले हैं जारी, ऐसे कर सकेंगे डाउनलोड

CTET 2023 admit card: CTET के एडमिट कार्ड जल्द होने वाले हैं जारी, ऐसे कर सकेंगे डाउनलोड


सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) जल्द ही केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी करेगा। आपको बता दें कि 20 अगस्त को परीक्षा आयोजित की जानी है। इसलिए 18 अगस्त यानी दो-तीन दिन पहले परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे, एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र, परीक्षा का समय लिखा होगा। 

इससे पहले सीटेट के परीक्षा जिला जारी किए गए थे, जिससे उम्मीदवारों को पता चल जाए कि सीटेट परीक्षा के लिए उन्हें किस जिले में परीक्षा  केंद्र मिला है। आधिकारिक नोटिफिकेशन की मानें तो केंद्रों की डिटेल्ड जानकारी 18 अगस्त को जारी की जाएगी। आपको बता दें कि सीटीईटी परीक्षा के लिए अप्रैल में रजिस्ट्रेशन शुरू हुए थे। 26 मई तक रजिस्टेशन चले थे और फिर परीक्षा की तिथि की घोषणा बाद में की गई थी।


सीबीएसी सीटीईटी की वेबसाइट पर एडमिट कार्ड की जानकारी दी जाएगी। सीबीएसई सीटीईटी परीक्षा ऑफलाइन, पेन-एंड-पेपर (ओएमआर) मोड में आयोजित की जाएगी। परीक्षा पूरी तरह से ओएमआर सीट पर ली जाऐगी।  


सीटीईटी दिसंबर 2022 में 9.5 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी पास हुए थे। पेपर-1 में 17,04,282 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे जिसमें से 14,22,959 परीक्षा में बैठे और इनमें से 5,79,844 पास हुए। पेपर 2 में 15,39,464 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे जिसमें से 12,76,071 परीक्षा में बैठे और इनमें से 3,76,025 पास हुए। सीटीईटी परीक्षा 28 दिसंबर, 2022 से 7 फरवरी, 2023 तक आयोजित की गई थी।



Tuesday, August 15, 2023

12 दिन के अंतर से तबादले से वंचित हुए हजारों बेसिक शिक्षक

12 दिन के अंतर से तबादले से वंचित हुए हजारों बेसिक शिक्षक

05 साल की सेवा अनिवार्य है अंतरजनपदीय तबादलों के लिए 


प्रयागराज । परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित हजारों शिक्षक मात्र 12 दिनों के अंतर से अंतर जनपदीय पारस्परिक तबादले से वंचित हो जाएंगे। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने शिक्षकों के तबादले के लिए न्यूनतम पांच साल की सेवा अनिवार्य की है। 


जबकि शिक्षिकाओं को दो साल की सेवा पर ट्रांसफर का लाभ दिया गया है। मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन 26 जुलाई तक लिए गए थे और बीएसए के स्तर से सत्यापन के बाद आवेदन 25 अगस्त तक लॉक किए जाएंगे।


 68500 में चयनित शिक्षकों को सात सितंबर 2018 को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे।  आवेदन लॉक करने की अवधि 12 दिन बढ़ाकर सात सितंबर कर दी जाए तो पुरुष शिक्षक भी तबादले के लिए पात्र हो जाएंगे। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक पिछले एक महीने से कई अधिकारियों से मिल चुके हैं।

संस्कृत प्रतिभा खोज के आवेदन 15 अगस्त से, 24 सितम्बर को होगी परीक्षा आयोजित

संस्कृत प्रतिभा खोज के आवेदन 15 अगस्त से,  24 सितम्बर को होगी परीक्षा आयोजित


लखनऊ । उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की ओर से संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिये उत्तर प्रदेश संस्कृत प्रतिभा खोज परीक्षा-2023 आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।


उत्तर प्रदेश संस्कृत प्रतिभा खोज परीक्षा-2023 के लिए आवेदन 15 अगस्त से 5 सितम्बर तक किए जा सकते हैं। रविवार 24 सितम्बर को परीक्षा आयोजित की जाएगी तथा परीक्षा के परिणाम की घोषणा पांच अक्तूबर को की जाएगी।


प्रत्येक वर्ग से 30 (कुल-90) छात्रों को 1000/ - रुपये की छात्रवृत्ति प्रतिमाह एक वर्ष तक दी जाएगी। परीक्षा तीन वर्गों प्रथमा कक्षा- 6, 7, 8, पूर्व मध्यमा कक्षा 9, 10 एवं उत्तर मध्यमा कक्षा 11,12 में आयोजित की जाएगी।



यूपी : प्रदेश में होगा संस्कृत प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन, सफल छात्रों को दी जाएगी ₹1000 की सालाना छात्रवृत्ति 


छात्रों का संस्कृत में रुझान बढ़ाने के लिए प्रदेश में संस्कृत प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। सफल अभ्यर्थियों को छात्रवृत्ति भी दी जाएगी। 


प्रदेश में संस्कृत के प्रति विद्यार्थियों का रुझान बढ़ाने, संस्कृत में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश अमृत काल संस्कृत प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर केंद्र बनाकर बहुविकल्पीय सवालों पर आधारित परीक्षा का आयोजन किया जाएगा और सफल हुए 90 विद्यार्थियों को एक-एक हजार रुपये सालाना छात्रवृत्ति दी जाएगी।


यह निर्णय शुक्रवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। माध्यमिक शिक्षा के प्रभारी निदेशक भगवती सिंह की अध्यक्षता में निदेशालय में हुई बैठक में यह तय किया गया कि प्रवेश परीक्षा तीन स्तर पर प्रथमा (कक्षा छह से आठ तक), पूर्व मध्यमा (कक्षा नौ-दस) और उत्तर मध्यमा (कक्षा 11-12) के विद्यार्थियों की होगी। इसमें संस्कृत पढ़ने वाला कोई भी विद्यार्थी शामिल हो सकेगा। इस परीक्षा का आयोजन हर साल होगा। इसके लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा।


बैठक में शैक्षणिक सत्र 2023-24 व 2024-25 के लिए नई शिक्षा नीति 2020 के क्रम में हिंदी, गणित, अंग्रेजी, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में कमी को भी हरी झंडी दी गई। इसी तरह कॉलेजों को 10 विषय पढ़ाने की सहमति दी गई। वहीं अतिरिक्त विषय के लिए लिए जाने वाले मान्यता शुल्क को 2500 से कम कर 500 रुपये प्रति विषय करने का भी निर्णय लिया गया। कार्यकारिणी ने चार डिप्लोमा कोर्स स्ववित्तपोषित में शुरू करने और उसके लिए ऑनलाइन आवेदन लेने को सहमति दी।


प्रधानाचार्य व शिक्षकों को दिलाया जाएगा प्रशिक्षण

उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव आरके तिवारी ने बताया कि कार्यकारिणी ने सभी 591 प्रधानाचार्य व 1186 शिक्षकों के संस्कृत विद्वानों से प्रशिक्षण कराने पर सहमति दी। सदस्यों ने संविदा शिक्षकों की नियुक्ति के चयन व मानदेय भुगतान में हो रही देरी से अवगत कराया। वहीं गर्मी को देखते हुए विद्यालयों के समय में बदलाव का निर्णय अपने स्तर से लेने की बात कही गई। बैठक में जेपी सिंह अध्यक्ष संस्कृत भारती न्यास अवध प्रांत, विधायक धनंजय कनौजिया, विनोद मिश्र, हर्षदेव, सालिगराम, वंदना द्विवेदी आदि उपस्थित थे।

यूपी : बेसिक शिक्षकों के जनपद के अन्दर परस्पर तबादले में फिर अटका पेंच, नहीं खुल रहा पोर्टल, शिक्षक परेशान, पदोन्नति का भी कर रहे हैं इंतजार

यूपी : बेसिक शिक्षकों के जनपद के अन्दर परस्पर तबादले में फिर अटका पेंच, नहीं खुल रहा पोर्टल, शिक्षक परेशान, पदोन्नति का भी कर रहे हैं इंतजार


बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से चार अगस्त को जारी निर्देश में कहा गया था कि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले की प्रक्रिया अगस्त अंत तक पूरी की जानी है।


प्रदेश में तबादले का इंतजार कर रहे बेसिक के शिक्षकों की समस्या समाप्त होती नहीं दिख रही है। एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले की प्रक्रिया गति नहीं पकड़ पा रही है। हालत यह है कि एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले के लिए शिक्षकों को पेयर (जोड़ा) बनाने की कार्यवाही के लिए पोर्टल 12 अगस्त से लाइव होना था लेकिन यह अभी तक काम नहीं कर रहा है। इससे शिक्षक परेशान हैं।


विभाग में पिछले कई महीने से विभिन्न स्तर पर शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया चल रही है लेकिन इसमें एक भी पूरी नहीं हो पा रही है। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से चार अगस्त को जारी निर्देश में कहा गया था कि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले की प्रक्रिया अगस्त अंत तक पूरी की जानी है।


इसके तहत दस अगस्त तक बीएसए शिक्षकों के रजिस्ट्रेशन पत्र को सब्मिट करेंगे और 11 अगस्त को इन सभी आवेदन पत्रों को एनआईसी की ओर से विकसित पोर्टल पर दिखाया जाएगा। वहीं 12 अगस्त से शिक्षक पारस्परिक स्थानांतरण के लिए पेयर (जोड़ा) बनाने की कार्यवाही करेंगे। इसमें शिक्षक आवेदन करने के साथ ही दूसरे शिक्षक के मोबाइल पर ओटीपी जाएगा, ओटीपी देने के साथ ही यह प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।


शिक्षकों का कहना है कि विभाग की ओर से इसके लिए विकसित वेबसाइट ही नहीं खुल रही है। न तो शिक्षकों के रजिस्ट्रेशन ही दिखाई दे रहे हैं और न ही जोड़ा बनाने की कार्यवाही हो पा रही है। जबकि इस बीच लगातार छुट्टियां भी पड़ रही हैं। इससे शिक्षकों को आवेदन व पेयर आदि के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाएगा। ऐसे में इस बार भी शिक्षकों को सिर्फ कागजी कार्यवाही तक ही लाभ मिल पाएगा।


पदोन्नति का भी कर रहे हैं इंतजार

बेसिक के शिक्षक लंबे समय से पदोन्नति का भी इंतजार कर रहे हैं। इसके लिए भी प्रक्रिया कई महीने से चल रही है लेकिन पूरी नहीं हो पाई है। पदोन्नत्ति के लिए विभाग ज्येष्ठता सूची बनाकर अपलोड कर रहा है। जबकि अभी भी कई जिलों की बाकी ही है। इसमें टीईटी अनिवार्यता को लेकर स्थिति अस्पष्ट है। इसी तरह जिले के अंदर परस्पर तबादला और तबादला पाए शिक्षकों का स्कूल आवंटन की प्रक्रिया भी चल रही है। तबादला पाए काफी शिक्षक भी ज्वॉइनिंग के लिए भटक रहे हैं।


पोर्टल खुलने का इंतजार

शिक्षक पहले से कह रहे हैं कि विभाग शिक्षकों को तबादला आदि का लाभ देना नहीं चाहता है। वह सिर्फ उनको उलझाए रखना चाहता है। जो प्रक्रिया जून की छुट्टी में पूरी होनी थी वह अभी तक अटकी है। तीन दिन से शिक्षक पोर्टल खुलने के इंतजार में हैं।- अनिल यादव, प्रदेश अध्यक्ष, यूपी बीटीसी शिक्षक संघ


विभाग तेजी से शिक्षकों की तबादला व ज्वॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करा रहा है। कुछ तकनीकी वजह से अगर पोर्टल नहीं खुल रहा है तो इसे जल्द ठीक करवाएंगे। शिक्षकों का परस्पर तबादला समय से पूरा किया जाएगा।- डॉ. महेंद्र देव, निदेशक, बेसिक शिक्षा

Monday, August 14, 2023

बीएड के लिए NCTE गजट में संशोधन की उठने लगी मांग

बीएड के लिए NCTE गजट में संशोधन की उठने लगी मांग  

प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बाहर होने पर बीएड अभ्यर्थियों ने छेड़ा अभियान

दावा : बीएड को शामिल करने से स्कूलों को मिल रहे थे ज्यादा योग्य शिक्षक


प्रयागराज। प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बीएड अभ्यर्थियों को बाहर किए जाने का मुद्दा ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छाया हुआ है।


बीएड अभ्यर्थियों ने मांग की है कि उन्हें प्राइमरी शिक्षक भर्ती में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार एवं एनसीटीई संशोधित गजट लाए। रविवार को सलोरी में हुई संयुक्त युवा मोर्चा की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई।


युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार एवं एनसीटीई को संशोधित गजट जारी कर पुनर्विचार याचिका दाखिल करनी चाहिए। जिन लाखों अभ्यर्थियों ने एनसीटीई के गजट 28 जून 2018 के आधार पर बीएड की डिग्री हासिल की है, उन्हें सजा देना उचित नहीं है। 


बीएड अभ्यर्थियों के शामिल होने के पूर्व 68500 प्राथमिक शिक्षक भर्ती में 27 हजार सीटें खाली रह गई थीं। कटऑफ 40/45 फीसदी अंक न लाने की वजह से ऐसा हुआ था।


वहीं, बीएड शामिल होने के बाद 69000 शिक्षक भर्ती में 60/65 फीसदी अंक प्राप्त करने के बावजूद भी भारी संख्या में अभ्यर्थी मेरिट में न आने के कारण चयन से वंचित हो गए।


स्पष्ट है कि बीएड अभ्यर्थियों के शामिल होने के बाद परिषदीय विद्यालयों को ज्यादा योग्य शिक्षक मिले। ऐसे में एनसीटीई के गजट में तकनीकी खामी के आधार पर बीएड अभ्यर्थियों को अपात्र कहना उचित नहीं है। सरकार को चाहिए कि बीएड एवं बीटीसी अभ्यर्थियों को आपस में न लड़ाए और सबको समान मौका दे। जो परीक्षा में सफल होगा, उसे नियुक्ति मिलेगी।

बेटियों की फीस माफी पर अब फंस गया मानक का पेच, सीएम योगी की अपेक्षाओं पर दो साल से खरे नहीं उतर पा रहे जिम्मेदार

बेटियों की फीस माफी पर अब फंस गया मानक का पेच, सीएम योगी की अपेक्षाओं पर दो साल से खरे नहीं उतर पा रहे  जिम्मेदार


 
प्रयागराज :  निजी स्कूल या कॉलेज में पढ़ रही दो में से एक बहन की फीस माफी के मानक में पेच फंस गया है। अफसर यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि कितनी फीस वापसी होगी। किसी की दो बेटियां निजी स्कूल या कॉलेज में पढ़ रही हैं तो वह बड़ी कक्षा के लिए फीस माफी चाहेगा। इसके अलावा प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक में निजी संस्थाओं की फीस अलग-अलग है। ऐसे में फीस वापसी का क्या मानक हो यह तय करने में अड़चन आ रही है।


आय सीमा को लेकर भी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की आय सीमा एक लाख रुपये है जबकि सामान्य वर्ग के जिन छात्रों की फीस की भरपाई समाज कल्याण से होती है उनके लिए 2.5 लाख रुपये की सीमा तय है। 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो अक्तूबर 2021 (गांधी जयंती) को निजी स्कूलों से अपील की थी कि दो बहनें एक साथ पढ़ रही हों तो एक की फीस माफ हो। सीएम ने घोषणा की थी अगर निजी स्कूल ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित विभाग एक छात्रा की फीस का प्रबंध करे। 


विधानसभा चुनाव 2022 में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री घोषणा प्रकोष्ठ के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने शिक्षा विभाग के अफसरों से प्रस्ताव मांगा था। इसके बावजूद अब तक अभिभावकों को इसका लाभ नहीं मिल सका है।

बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान पर बिफरे शिक्षामित्र, कामों की लिखी तख्तियां लेकर की नारेबाजी

बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान पर बिफरे शिक्षामित्र,  कामों की लिखी तख्तियां लेकर की नारेबाजी 


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की जिला इकाई की आज़ाद पार्क में रविवार को हुई बैठक में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के बयान पर नाराजगी व्यक्त की गई। आजाद की प्रतिमा के सामने अपने कामों की लिखी तख्तियां लेकर शिक्षामित्रों ने मंत्री के बयान वापस लेने के नारे भी लगाए। 


अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा कि विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बेसिक शिक्षा मंत्री के शिक्षक एवं शिक्षामित्रों के कार्य में भिन्नता होने की बात कहना दुर्भाग्यपूर्ण है।

शिक्षामित्र स्कूल में समय से उपस्थित रहकर कक्षाओं में शिक्षण कार्य करने के साथ-साथ निपुण लक्ष्य, बालगणना, जनगणना, परिवार सर्वेक्षण, बीएलओ, एफएलएन, एमडीएम, अभिभावक संपर्क, खेलकूद, योग, समेत सभी कार्य अध्यापकों के समान करते हैं।

 संचालन कर रहे संघ के मंत्री जनार्दन पांडेय ने कहा की दस हजार मानदेय में परिवार चलाना कठिन हो गया है। शिक्षामित्र अवसाद ग्रसित हैं। निरंतर शिक्षामित्रों की मौतें हो रही हैं लेकिन सरकार के कान में जूं नहीं रेंगती।


 बैठक में सुनील तिवारी, अरुण पटेल, लालमणि पाल, महेश सिंह, दशरथ भारती, सुमंत भार्गव, हरिभान सिंह, जमाल अहमद, अनामिका गिरी, सिद्धराज सिंह, रेखा देवी, अंतिमा यादव, निशा तिवारी, अर्चना कुशवाहा, रेनू सिंह, कमलाकर सिंह, घनश्याम दत्त मिश्र आदि उपस्थित रहे।

Sunday, August 13, 2023

लगातार छुट्टियों के दिन स्कूल खोले जाने से नाराज शिक्षक प्रतिनिधियों ने छुट्टी के दिन काम के बदले मांगा विशेष अवकाश



लखनऊ। उ प्र.माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री से छुट्टियों के दिनों में स्कूल खोलने के बदले शिक्षकों को उपार्जित व विशेष अवकाश देने की मांग उठायी है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि स्कूल महानिदेशक ने मेरी माटी मेरा देश कार्यक्रम का आयोजन रविवार को कराने के निर्देश जारी किये हैं। संघ के पदाधिकारियों ने अवकाश के दिन कार्यक्रम के आयेजित आपत्ति जतायी है।


संगठन के प्रादेशिक उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र का कहना है कि शिक्षकों के लिए छुट्टियां निर्धारित हैं। मनमाने तरीके से महानिदेशक द्वारा अवकाशों में कटौती किया जाना उचित नही है। कभी मोहर्रम का अवकाश निरस्त किया जाता है तो कभी रविवार का। राज्य के शिक्षकों को वही अवकाश मिलते है जो कर्मचारियों को देय है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों के समान ही अवकाश दिए जाते है। 


राज्य कर्मचारियों की तरह शिक्षकों को 14 आकस्मिक अवकाश, राज्य कर्मचारियों को देय 30 उपार्जित अवकाश के स्थान पर शिक्षकों को जून माह का 30 दिन का ग्रीष्मावकाश दिया जाता है। राज्य सरकार से मांग की है कि यदि शिक्षकों से अवकाश के दिनों में काम लिया जाता है। तो उसके बदले विशेष अवकाश स्वीकृत किए जाने सम्बन्धी शासनदेश जारी किया जाय।


प्राथमिक शिक्षक संघ ने पूर्व घोषित अवकाशों और रविवार को परिषदीय स्कूल खोले जाने के बदले DGSE से की विशेष प्रतिकर अवकाश की मांग

प्राथमिक शिक्षक संघ ने पूर्व घोषित अवकाशों और रविवार को परिषदीय स्कूल खोले जाने के बदले DGSE से की विशेष प्रतिकर अवकाश की मांग


उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने DGSE  से मांग की है कि रविवार को स्कूल खोले जाने के बदले प्रतिकर या विशेष अवकाश दिया जाए। पहले मुहर्रम का अवकाश निरस्त किया गया था और अब रविवार भी। 


सभी वर्गों के लिए एकसमान बनाए जाएंगे छात्रवृत्ति के नियम, अभी कहीं संस्थानों की श्रेणी तो कहीं अंक के आधार पर दी जाती है वरीयता

सभी वर्गों के लिए एकसमान बनाए जाएंगे छात्रवृत्ति के नियम, अभी कहीं संस्थानों की श्रेणी तो कहीं अंक के आधार पर दी जाती है वरीयता

लखनऊ : प्रदेश में सभी वर्गों के लिए छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के नियमों में एकरूपता लाई जाएगी। अभी समाज कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग संस्थानों की श्रेणी के अनुसार तो पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग अंकों के आधार पर इस वरीयता सूची तय करते हैं।


प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों के लिए ढाई लाख रुपये सालाना और अन्य वर्गों के लिए दो लाख रुपये सालाना तक आय होने पर यह सुविधा देती है। प्रदेश में अल्पसंख्यक, सामान्य और एससी-एसटी के उन छात्रों को पहले छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की जाती है, जो सरकारी या सरकार से सहायता प्राप्त संस्थानों में पढ़ रहे हैं। वहीं, राशि बचने पर निजी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों की बारी आती है।

वहीं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों और निजी संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की एक साथ अंकों के आधार पर वरीयता सूची तैयार करता है। उपलब्ध राशि को इस वरीयता सूची के आधार पर ऑनलाइन भुगतान किया जाता है। माना जा रहा है कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग भी अन्य विभागों की तरह सरकारी और एडेड संस्थानों के विद्यार्थियों को वरीयता देने के लिए अपनी नियमावली में संशोधन कर सकता है। इसके लिए उच्चस्तर पर वार्ता चल रही है।

सीबीएसई : 10वीं-12वीं परीक्षा के लिए 14 अगस्त से भरें फार्म

सीबीएसई : 10वीं-12वीं परीक्षा के लिए 14 अगस्त से भरें फार्म



नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने वर्ष 2024 में होने वाली 10वीं-12वीं की परीक्षा के लिए संशोधित कार्यक्रम जारी किया है। 


स्कूलों में परीक्षा फॉर्म 14 अगस्त से भरने शुरू हो जाएंगे। बिना विलंब शुल्क के साथ परीक्षा फॉर्म 13 सितंबर तक भरे जा सकेंगे।

Saturday, August 12, 2023

डीएलएड (बीटीसी) के पक्ष में फैसला आने के बाद बढ़ेगा दाखिला, डीएलएड 2023 के लिए चल रहे हैं आवेदन, दो बार मौका, फिर भी 1.33 लाख सीटें खाली

प्राइमरी से बीएड बाहर होने से डीएलएड और बीटीसी को मिलेगी संजीवनी


प्रयागराज : प्राइमरी शिक्षक भर्ती में जून 2018 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा गजट जारी कर बीएड को भी शामिल करने के निर्णय का राजस्थान बीएसटीसी अभ्यर्थियों ने विरोध कर हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने याचियों के पक्ष में निर्णय दिया था। इस निर्णय के विरोध में सुप्रीम कोर्ट गए बीएड अभ्यर्थियों की याचिका खारिज हो गई। इसी के साथ एनसीटीई का गजट रद हो गया।


 इधर, एनसीटीई के आदेश पर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती में बीएड को शामिल कर लिया था। उत्तर प्रदेश में प्राइमरी में 69000 शिक्षक भर्ती में बीएड प्रशिक्षित चयनित भी हुए। अब मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने से डीएलएड/बीटीसी, बीएसटीसी अभ्यर्थियों में खुशी है।


इस निर्णय से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षितों को राहत मिली है। प्राइमरी भर्ती में बीएड को भी शामिल कर लिए जाने से डीएलएड प्रशिक्षितों के चयनित होने के अवसर घट गए थे, जिसके कारण डीएलएड का महत्व घटने लगा था। अब डीएलएड प्रशिक्षितों के समक्ष प्राइमरी भर्ती के सभी पदों पर चयनित होने का अवसर रहेगा।


डीएलएड (बीटीसी) के पक्ष में फैसला आने के बाद बढ़ेगा दाखिला, डीएलएड 2023 के लिए चल रहे हैं आवेदन, दो बार मौका, फिर भी 1.33 लाख सीटें खाली



प्रयागराज । कक्षा एक से पांच तक की शिक्षक भर्ती में डीएलएड के पक्ष में फैसला आने के बाद डीएलएड प्रशिक्षण 2023 में प्रवेश बढ़ना तय है। 28 जून 2018 में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अधिसूचना जारी कर बीएड को भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती में मान्य कर दिया था। उसके बाद से साल दर साल डीएलएड का क्रेज घटता गया क्योंकि बीएड करने के बाद कक्षा एक से 12 तक की भर्ती के अर्हता मिलने लगी जबकि डीएलएड करने के बाद कक्षा एक से आठ तक की भर्ती में आवेदन कर सकते थे।


इस साल दो बार मौका देने के बावजूद प्रदेशभर के सरकारी और निजी कॉलेजों में डीएलएड की कुल 2,33,350 सीटों में से 133603 सीटें खाली हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने पंजीकरण के लिए 21 अगस्त तक मौका दिया है।


 अभी गौरतलब है कि इससे पहले आवेदन की अंतिम तिथि 28 जुलाई तक 121246 अभ्यर्थियों ने डीएलएड में प्रवेश के लिए पंजीकरण कराया था। इस बार प्रदेश के 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) व सीटीई की 10600 और 2974 निजी कॉलेजों की 222750 कुल 233350 सीटों पर प्रवेश होने हैं। यानी आधे से अधिक 1,33,603 सीटें खाली हैं।




बेसिक शिक्षा में पति-पत्नी के स्थानांतरण के नियमों की विसंगतियां दूर करें सरकार

बेसिक शिक्षा में पति-पत्नी के स्थानांतरण के नियमों की विसंगतियां दूर करें सरकार


लखनऊ। विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि प्राथमिक शिक्षकों की स्थानांतरण नीति में पति-पत्नी के स्थानांतरण के नियमों में सरकार विसंगतियां दूर करें। 


पति- पत्नी में से किसी एक के शिक्षा विभाग और दूसरे के किसी अन्य विभाग में कार्यरत होने पर किसी जिले में उन्हें दांपत्य नीति का लाभ दिया गया तो कहीं नहीं दिया गया। 


भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह ने यह मामला सदन में उठाया था। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि इसमें बिजली बोर्ड के कर्मियों को भी शामिल किया जाए। 

शिक्षा मित्रों को शिक्षकों के समान वेतन नहीं, फिलहाल, मानदेय बढ़ाने की भी कोई योजना नहीं

शिक्षा मित्रों को शिक्षकों के समान वेतन नहीं, फिलहाल, मानदेय बढ़ाने की भी कोई योजना नहीं


लखनऊ । शिक्षा मित्रों को शिक्षकों के समान वेतनमान नहीं दिया जा सकता। दोनों की नियुक्ति की प्रकृति एवं शर्ते भिन्न हैं। विधान परिषद में बुधवार को सपा के डा. मानसिंह यादव के एक सवाल के जवाब में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने यह स्पष्ट किया। 


उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाने की भी कोई योजना नहीं है। इस पर सपा सदस्यों ने कहा कि कुछ मानदेय ही बढ़वा दीजिए। संदीप सिंह ने कहा कि हमारी सरकार ने ही 3500 से बढ़ाकर उनका मानदेय 10,000 रुपये किया था। फिलहाल, मानदेय बढ़ाने की भी कोई योजना नहीं है।  पूर्व में 15240 शिक्षा मित्र जो सहायक अध्यापक की अर्हता पूरी करते थे, उन्हें नियुक्ति दी जा चुकी है।



शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने के मुद्दे पर सपा का वॉकआउट

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा, मानदेय बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं


लखनऊ। विधान परिषद में शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने के मुद्दे पर सपा सदस्यों ने वॉकआउट किया। वे शिक्षामित्रों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग कर रहे थे। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि फिलहाल मानदेय बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने कहा कि कम मानदेय के कारण करीब 9 हजार शिक्षामित्र आत्महत्या कर चुके हैं। भाजपा के सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि यह आंकड़ा भरोसेमंद नहीं है। इस पर सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि डॉ. मान सिंह यादव जानकारी का स्रोत बताएं। अगर यह जानकारी ठीक न हो तो सदन में कही अपनी बात वापस लें ।

जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि नियुक्ति की प्रकृति एवं शर्तें भिन्न होने से कार्य भी अलग-अलग हैं। इसलिए शिक्षामित्रों की अन्य सहायक अध्यापकों से तुलना करना औचित्यपूर्ण नहीं है। भाजपा के अशोक कटारिया ने कहा कि दोनों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी अलग-अलग है। इस पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद सपा सदस्यों ने सदन से बाहर चले गए। 

Friday, August 11, 2023

लोकेटेड आंगनबाडी केन्द्रों में Mother Orientation कार्यक्रम का आयोजन माह अगस्त से मार्च तक, तैयारियों हेतु दिनांक 11 अगस्त 2023 को यू-ट्यूब सेशन का होगा आयोजन

लोकेटेड आंगनबाडी केन्द्रों में Mother Orientation कार्यक्रम का आयोजन माह अगस्त से मार्च तक, तैयारियों  हेतु दिनांक 11 अगस्त 2023 को यू-ट्यूब सेशन का होगा आयोजन 



प्री-प्राइमरी शिक्षा के अंतर्गत को लोकेटेड आंगनबाडी केन्द्रों में Mother Orientation कार्यक्रम का आयोजन माह अगस्त से मार्च तक प्रतिमाह किया जाना है।

 उक्त आयोजन के बिंदुवार गतिविधियों के सफलतापूर्वक संचालन हेतु नोडल एसआरजी, नोडल शिक्षक संकुल, प्रधानाध्यापक एवं नोडल अध्यापक प्री-प्राइमरी, आंगनबाडी कार्यकत्री, सुपरवाइजर बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार का ऑनलाइन उन्मुखीकरण  दिये गये बिंदुओं पर दिनांक 11 अगस्त 2023 11 बजे ऑनलाइन गोष्ठी (यू-ट्यूब सेशन) का आयोजन किया जा रहा है। उक्त ऑनलाइन गोष्ठी में निम्नलिखित बिंदुओं के अनुसार अभिमुखीकरण किया जायेगा।


❤️ यूट्यूब सेसन लिंक : https://youtube.com/live/AZMgeEtcjLe?feature=share



आंगनबाडी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं का मानदेय अभी नहीं बढ़ेगा

आंगनबाडी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं का मानदेय अभी नहीं बढ़ेगा



लखनऊ। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का मानदेय बढ़ाने का अभी सरकार का कोई विचार नहीं है। 


यह बात विधान परिषद में महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार विकास मंत्री बेबीरानी मौर्य ने एक सवाल का जवाब देते हुए कही। 


उन्होंने कहा कि एक साल पहले ही उनका मानदेय बढ़ाया गया है। इस बाबत सदस्य भीमराव अंबेडकर ने सवाल पूछा था।

तदर्थ शिक्षकों को वेतन देने से यूपी सरकार का दो टूक इंकार

तदर्थ शिक्षकों को वेतन देने से यूपी सरकार का दो टूक इंकार

 

लखनऊ : विधानसभा में सरकार ने साफ किया कि तदर्थ शिक्षकों को वेतन व उन्हें विद्यालयों में आगे रखने के लिए सरकार बाध्य नहीं है। महाविद्यालयों के प्रबंध तंत्र अपने खर्च से रख सकते हैं।


विधानसभा में गुरुवार को काम रोको प्रस्ताव के तहत सपा के राममूर्ति वर्मा ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों के मुकाबले मौलिक पदों पर नियुक्त गत 23 सालों से पढ़ा रहे तदर्थ शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है। आयु अधिक होने के कारण किसी अन्य भर्ती में चयनित नहीं हो सकते। अभी 3500 शिक्षक रिटायर्ड हो गए हैं, उनकी जगह कोई नियुक्त नहीं हुई है, ऐसे में इन तदर्थ शिक्षकों को उनकी जगह मौका मिलना चाहिए।


 माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि इन शिक्षकों के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2020 में कहा था कि इन्हें इंटरमीडिएट अधिनियम के तहत अध्यापक भर्ती सेवा में भारांक देकर आवदेन लिए जाएं। इस आधार पर 2022 में 54 तदर्थ शिक्षक परीक्षा में बैठे इसमें 40 चयनित हो गए। बाकी तदर्थ शिक्षकों के वेतन के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है।


 उन्होंने सुप्रीम कोर्ट ने 2021 निर्णय के हवाले से कहा कि जिन तदर्थ शिक्षकों ने उक्त परीक्षा में हिस्सा नहीं लिया उन्हें शिक्षण संस्था में बनाए रखने के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है।

Thursday, August 10, 2023

78 फीसदी ग्रामीण माता-पिता की चाह बिटिया स्नातक करे, केंद्रीय शिक्षा ने 'ग्रामीण भारत में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति-2023' रिपोर्ट जारी की

78 फीसदी ग्रामीण माता-पिता की चाह बिटिया स्नातक करे, केंद्रीय शिक्षा ने 'ग्रामीण भारत में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति-2023' रिपोर्ट जारी की


नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में 78 फीसदी अभिभावक चाहते हैं कि उनकी बिटिया ग्रेजुएशन तक पढ़ाई करे। बेटों के लिए ऐसा चाहने वाले अभिभावक 82 फीसदी है। 


एक ताजा सर्वे में 'ग्रामीण भारत में बुनियादी शिक्षा का स्तर 2023' में यह दावा किया गया है। इसकी रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार, लड़के और लड़की की उच्च शिक्षा को लेकर ग्रामीण भारत में एक जैसे रुझान हैं। 


यह सर्वे छह से 16 साल के बच्चों को गांवों में मिली रही शिक्षा पर केंद्रित रखा गया। इसे ट्रांसफॉर्मिंग रूरल इंडिया फाउंडेशन की डवलपमेंट इंटेलिजेंस यूनिट और सम्बोधि प्राइवेट द्वारा करवाया गया।


मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर टालमटोल पड़ी भारी, परिषद सचिव की अपील 10 हजार हर्जाने के साथ हाईकोर्ट ने की खारिज

मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर टालमटोल पड़ी भारी, परिषद सचिव की अपील 10 हजार हर्जाने के साथ हाईकोर्ट ने की खारिज



प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में रिक्त पद के सापेक्ष नियुक्ति करने के आदेश के विरुद्ध दाखिल बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव की अपील 10 हजार रुपये हर्जाने के साथ खारिज कर दी है। कोर्ट ने हर्जाने की राशि का दो सप्ताह में भुगतान करने और एकल पीठ के आदेश का अनुपालन करने का निर्देश भी दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एंव न्यायमूर्ति डी रमेश की खंडपीठ ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव की अपील पर सरकारी वकील और याची अनूप कुमार सत्संगी के अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी को सुनकर दिया है।


मामले के तथ्यों के अनुसार याची अनूप कुमार सत्संगी की मां इटावा जिले के एक प्राथमिक विद्यालय मे प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थीं। उनकी वर्ष 2013 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई। उसके बाद याची ने लिपिक के पद के लिए मृतक आश्रित कोटे में आवेदन किया। 


तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने पद न होने का हवाला देकर याची का आवेदन निरस्त कर दिया था, जिसके विरुद्ध याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने याचिका पर बीएसए से वर्तमान स्थिति का व्यक्तिगत हलफनामा मांगा। 


बीएसए ने बताया कि वर्तमान में एक पद रिक्त है। कोर्ट ने रिक्त पद के सापेक्ष लिपिक के पद का नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया। इस आदेश के विरुद्ध सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने विशेष अपील दाखिल की। 


खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को सही माना और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज की अपील को 10 हजार रुपये हर्जाने के साथ खारिज कर दिया। कोर्ट ने हर्जाने की राशि दो सप्ताह में भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही एकल पीठ के आदेश का तत्काल अनुपालन करने का भी निर्देश दिया है।