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Wednesday, February 18, 2026

वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में अनुचित साधन प्रयोग करते हुए पकड़े गये परीक्षार्थियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं कराये जाने के सम्बन्ध में

वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में अनुचित साधन प्रयोग करते हुए पकड़े गये परीक्षार्थियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं कराये जाने के सम्बन्ध में।

समायोजन 3.0 पर यथास्थित बनाए रखने का हाईकोर्ट का आदेश, जिला स्तरीय समिति एक माह में करे निर्णय, देखें कोर्ट ऑर्डर


समायोजन 3.0 पर यथास्थित बनाए रखने का हाईकोर्ट का आदेश, जिला स्तरीय समिति एक माह में करे निर्णय

🔴 कोर्ट ने दिए यह निर्देश

तबादले सत्यापित एवं अद्यतन आंकड़ों पर आधारित हों।

जिलास्तर पर स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षकों की संख्या और छात्र नामांकन का समेकित डेटा अनिवार्य रूप से देखा जाए।

प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण हो।

समायोजन को दंडात्मक या उत्पीडन के औजार के रूप में इस्तेमाल न किया जाए।

प्रशासनिक आवश्यकता और छात्र हित सर्वोपरि रहे।

शिक्षकों के समायोजन में अपनाई जाए पारदर्शी प्रक्रियाः हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के समायोजन और स्थानांतरण में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिलास्तरीय कमेटी शिक्षकों से प्रत्यावेदन लेकर विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात के हिसाब से समायोजन की प्रकिया पूरी करे। तब तक विद्यालयों में यथास्थिति कायम रखी जाए। प्रदेश के कई जिलों के सैकड़ों शिक्षकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने दिया है। याचिकाओं में शिक्षकों के समायोजन एवं तबादला संबंधी 14 नवंबर 2025 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी। 

याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, नवीन शर्मा और अन्य वकीलों का कहना था कि समायोजन और स्थानांतरण की प्रक्रिया मनमाने तरीके से अपनाई जा रही है। नियमावली में दिए निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण हर जिले में अपने-अपने तरीके से प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मध्य सत्र में समायोजन का औचित्य नहीं जबकि वर्तमान सत्र मार्च में समाप्त होने वाला है। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विस्तृत निर्णय में कहा कि स्थानांतरण सेवा की एक सामान्य शर्त है और अदालतें आमतौर पर तबादला आदेशों में दखल नहीं देतीं। कोर्ट ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि नीतिगत मामलों में अदालतें अपील प्राधिकरण की तरह कार्य नहीं कर सकतीं और न ही यह जांच सकती हैं कि कोई अन्य नीति अधिक उचित या बेहतर हो सकती थी। 

कोर्ट ने कहा कि न्यायिक समीक्षा का उद्देश्य नीति की बुद्धिमत्ता का पुनर्मूल्यांकन करना नहीं, बल्कि यह देखना है कि निर्णय प्रक्रिया कानून के अनुरूप है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि कि यू-डायस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों की सत्यता और सत्यापन को लेकर अस्पष्टता है, जिससे शैक्षिक ढांचे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

याचियों को प्रत्यावेदन देने का निर्देश

अदालत ने कहा कि याचिकाओं में संस्थानवार स्वीकृत पद, कार्यरत संख्या और अधिशेष/कमी का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में व्यक्तिगत तथ्यों की जांच प्रशासनिक स्तर पर ही संभव है। इसलिए प्रत्येक याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति के समक्ष पृथक एवं विस्तृत प्रत्यावेदन प्रस्तुत करे। कोर्ट ने समिति को एक माह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि एक माह तक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिए जाने तक यथा स्थिति कायम रखी जाए। कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को यू-डायस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों का तत्काल सत्यापन एवं अद्यतन करने तथा संशोधित आंकड़ों के आधार पर शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।



छात्र-शिक्षक अनुपात के साथ UDISE पोर्टल को करें अपडेट : हाई कोर्ट

पुनर्व्यवस्थापन आदेश को चुनौती देने वाले शिक्षकों को ताकालिक राहत, यथास्थिति का निर्देश

जिलाधिकारी की कमेटी महीने भर में याचियों के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय ले

17 फरवरी 2026
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित प्राधिकारी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन (यूडीआइएसई अथवा यू-डायस) पोर्टल पर सही व प्रमाणित डेटा सत्यापित कर इसके अनुरूप ही सहायक अध्यापकों-प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति करें ताकि निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखा जा सके। कोर्ट ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी को याचियों के प्रत्यावेदन पर एक माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है और तब तक इन अध्यापकों की वर्तमान स्थिति कायम रखने को कहा है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने यह आदेश देते हुए 157 उन शिक्षकों को तात्कालिक तौर पर राहत दी है जिन्होंने राज्य सरकार के 14 नवंबर 2025 के आदेश के क्रम में अपने पुनर्व्यवस्थापन को चुनौती दी थी।

कोर्ट ने कहा, याचीगण ने आवश्यक तथ्यात्मक जानकारी नहीं दी है, जिससे कार्रवाई की वैधता की जांच करना मुश्किल हो रहा है। याचीगण को संस्थान-वार विवरण देना होगा, जिसमें स्वीकृत संख्या, कार्यरत संख्या और शिक्षकों की अधिकता या कमी की जानकारी हो। प्रशासनिक कार्रवाई में तथ्यात्मक त्रुटियों के कारण प्रणालीगत असंतुलन हो सकता है और इससे छात्रों का हित प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में निष्पक्षता और तर्कसंगतता सुनिश्चित करने के लिए सीमित जांच करनी होगी। कोर्ट ने कहा, पुनर्वितरण मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। यदि कार्रवाई मनमानी है, गैर मौजूद या असत्यापित डेटा पर आधारित है तथा इससे सार्वजनिक हित गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है तो संवैधानिक अदालतें शवितहीन नहीं हैं। अदालत ने पाया कि नवंबर 2025 के सरकारी आदेश के अनुसार पुनर्वितरण के लिए निर्धारित मानदंडों का पालन किया गया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।

याचीगण के अधिवक्ता ने कहा कि पूर्व में आदेश था कि जिलाधिकारी हर साल जुलाई से पहले शिक्षकों की स्वीकृत संख्या की समीक्षा कर आवश्यकता अनुसार पुनर्वितरण करते थे, लेकिन नवंबर का आदेश 23 मई 2025 के आदेश से अलग है। याचीगण का कहना था कि बच्चों के निश्शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रविधानों की अनदेखी की जा रही है। अदालत ने पाया कि प्रत्येक संस्थान में कम से कम दो शिक्षकों की आवश्यकता है। छात्र संख्या के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता है। जूनियर बेसिक स्कूल में 150 तथा सीनियर बेसिक स्कूल में 100 से अधिक छात्रों के लिए एक प्रधानाध्यापक की आवश्यकता है। अरुण प्रताप सिंह व 37 अन्य, संगीता सिंह पटेल और 42 अन्य, अभिषेक कुमार त्रिपाठी व 11 अन्य, स्वदेश कुमार व 57 अन्य तथा अमन राज व पांच अन्य की याचिकाओं को एक साथ सुना गया था। 








परिषदीय शिक्षकों के समायोजन पर हाईकोर्ट की रोक 17 फरवरी तक बढ़ी
 
3 फरवरी 2026
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन में याची शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 13 जनवरी को लगी अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक बढ़ा दी है।

अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने कुल 130 अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया। सोमवार को पक्षकारों ने जवाबी शपथ पत्र व प्रत्युत्तर शपथ पत्र दाखिल किया। इस पर न्यायालय ने अंतिम सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय कर तब तक के लिए अंतरिम रोक बढ़ा दी।



प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन 3.0 पर आगे की कार्यवाही पर 2 फरवरी तक रोक बढ़ी, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया जवाब दाखिल करने का समय

प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया आदेश

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में आगे किसी भी प्रकार की कार्यवाही। पर लगी रोक को 19 जनवरी से बढ़ाकर 2 फरवरी तक कर दिया है। साथ ही राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है।

याची शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह परिहार ने बताया कि कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित करते हुए अंतरिम आदेश दिया है कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 के संबंध में आगे की कार्यवाही नहीं करेंगे। 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का लाभ इस याचिका से संबद्ध अन्य याचिकाओं के याची शिक्षकों को भी मिलेगा। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया है। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश बाराबंकी की संगीता पाल सहित 29 प्राथमिक शिक्षकों द्वारा दाखिल याचिका पर पारित किया।

याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण संबंधी शासनादेश को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई है। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने नियम 21 का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षक की सहमति के बिना समायोजन नहीं किया जा सकता। मामले में राज्य सरकार की ओर से भी अधिवक्ता उपस्थित हुए। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक याचियों को मिली अंतरिम राहत को बढ़ाते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। 



मध्य सत्र में बेसिक शिक्षकों के समायोजन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार से प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों का मध्य सत्र में स्थानांतरण और समायोजन करने के मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान अध्यापकों के विरुद्ध कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अरुण प्रताप व 37 अन्य अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 

कोर्ट ने जवाब के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। याचिका के अनुसार याची चित्रकूट के प्राथमिक विद्यालयों में हेड मास्टर और सहायक अध्यापक हैं। उन्हें उन विद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है, जहां या कोई अध्यापक नहीं है या फिर बंद हो चुके हैं। याचियों का कहना है कि मध्य सत्र में समायोजन का कोई औचित्य नहीं है जबकि सत्र अप्रैल में प्रारंभ होता है। यह यूपी आरटीई एक्ट 2011 के नियम 21 का उल्लंघन भी है। याचियों को शीघ्र पदन करने का निर्देश दिया गया है।


अमेठी, बाराबंकी और श्रावस्ती में भी समायोजन 3.0 पर लगी रोक, पुरानी  याचिकाओं के साथ कनेक्ट करते हुए 19 जनवरी को होगी अगली सुनवाई, देखें कोर्ट ऑर्डर 





शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक अंतरिम रोक

लखनऊ । हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए याची शिक्षकों के समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा है कि 19 जनवरी को वह मामले पर अंतिम सुनवाई करेगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने शिक्षकों की ओर से दाखिल 12 अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि याची शिक्षकों के संबंध में कोई अग्रिम कार्यवाही न की जाए। याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है।

कहा गया है कि पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे, उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी तथा मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया।



परिषदीय शिक्षकों के समायोजन 3.0 में आगे की कार्यवाही पर 19 तक हाईकोर्ट की रोक, अगली सुनवाई 19 जनवरी को, देखें कोर्ट ऑर्डर 

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में किसी भी आगे की कार्रवाई पर 19 जनवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी निर्धारित की और अंतरिम आदेश दिया कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 मामले में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

कोर्ट ने यह अंतरिम राहत इस याचिका से जुड़ी 11 अन्य याचिकाओं के याचियों को भी उपलब्ध कराई है। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3.0 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने बाराबंकी की संगीता पाल समेत 29 शिक्षकों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी समायोजन/स्थानांतरण के शासनादेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने कहा कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1981 के नियमों का उल्लंघन करता है। नियम 21 के तहत शिक्षक की सहमति के बिना उन्हें समायोजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और अन्य विसंगतियां भी उत्पन्न हो रही हैं। 



माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश

यूपी बोर्ड के 8033 परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के विशेष इंतजाम

आज से यूपी बोर्ड परीक्षाएं शुरू, 15 दिन में पूरी होंगी परीक्षाएं, परीक्षार्थियों को हर पेज पर लिखना होगा अनुक्रमांक

प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक चलेंगी। इस बार परीक्षा अवधि लगभग 15 कार्य-दिवस में पूर्ण कराने की तैयारी है। प्रदेश भर में कुल 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इस बार 53,37,778 परीक्षार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। नकल रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

परीक्षार्थियों को मुख्य व अनुपूरक (सप्लीमेंट्री) उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक लिखना अनिवार्य का होगा डिजचा की जाएगी। मुख्य पृष्ठ पर केवल यूनिक (केंद्र) कोड की मुहर लगेगी, जबकि केंद्र व्यवस्थापक के हस्ताक्षर व पदनाम की मुहर नहीं लगाई जाएगी। इस बार मुख्य विषयों के प्रश्नपत्रों के अतिरिक्त सेट की भी व्यवस्था की गई है।

स्ट्रैटिक मजिस्ट्रेट व केंद्र व्यवस्थापक को छोड़कर कोई भी कर्मचारी मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं रख सकेगा। स्ट्रांग रूम में मोबाइल पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यदि किसी कक्ष निरीक्षक, केंद्र व्यवस्थापक या शिक्षक का पाल्य उसी केंद्र पर परीक्षा दे रहा है तो उसे परीक्षा कार्य से अलग कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर एक आंतरिक और एक बाह्य दो केंद्र व्यवस्थापक तैनात रहेंगे। इस वर्ष यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 परीक्षार्थी शामिल होंगे। प्रदेश के 75 जिलों में कुल 8033 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया


परिषद ने जारी किया टोल-फ्री नंबर

छात्रों एवं अभिभावकों की समस्याओं के समाधान के लिए परिषद ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18001805310 और 18001805312 जारी किए हैं। परीक्षार्थी किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या के लिए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।



आधा घंटा तक विलंब से पहुंचे परीक्षार्थी को अनुमति दे सकेंगे केंद्र व्यवस्थापक, सचिव ने केंद्र व्यवस्थापकों एवं कक्ष निरीक्षकों के लिए जारी किए निर्देश 

प्रयागराजः यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा शुचितापूर्ण संपन्न कराने के लिए केंद्र व्यवस्थापकों एवं कक्ष निरीक्षकों के लिए यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा है कि किसी प्रश्नपत्र के लिए अधिकतम आधा घंटा तक देर से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को केंद्र व्यवस्थापक परीक्षा में बैठने की अनुमति दे सकेंगे। इससे ज्यादा देर वालों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा उत्तर पुस्तिका पर मुद्रित क्रमांक को उपस्थिति पत्रक पर परीक्षार्थियों द्वारा अंकित किया जाना अनिवार्य है। इसे कक्ष निरीक्षक सुनिश्चित कराएंगे।

परीक्षा 18 फरवरी से आरंभ होकर 12 मार्च तक चलेगी। प्रश्न पत्रों की परीक्षा अवधि 3.15 घंटे निर्धारित है, जिसमें से शुरू के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ्ने के लिए है। दिव्यांग तथा दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों को परीक्षा के लिए निर्धारित अवधि के अतिरिक्त 20 मिनट प्रति घंटे के हिसाब से अतिरिक्त देय होगा। इसके अलावा प्रत्येक परीक्षा केंद्रों में कम से कम 50 प्रतिशत स्टाफ बाह्य विद्यालयों से नियुक्त किए जाएंगे।

 स्ववित्तपोषित विद्यालयों में यथासंभव राजकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के 50 प्रतिशत स्टाफ नियुक्त किए जाएंगे। रिजर्व सेट से संबंधित अलमारी लाक करने और आकस्मिक स्थिति में उसे खोलने की कार्यवाही माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव से निर्देश प्राप्त करने के बाद ही जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कराई जाएगी, उस समय केंद्र व्यवस्थापक, बाह्य केंद्र व्यवस्थापक, स्टैटिक मजिस्ट्रेट एवं संबंधित थानाध्यक्ष अथवा नामित इंस्पेक्टर की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। इसके अलावा कक्ष निरीक्षकों का यह व्यक्तिगत उत्तरदायित्व होगा कि हर परीक्षार्थी से उत्तरपुस्तिका के प्रत्येक पृष्ठ पर उनका अनुक्रमांक एवं उत्तरपुस्तिका क्रमांक अनिवार्य रूप से लिखवाएं।

प्रत्येक कक्ष में दो कक्ष निरीक्षक अनिवार्य

हर परीक्षा कक्ष में दो कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। कक्ष निरीक्षकों के पास उनका परिचय पत्र, आधार कार्ड रहना केंद्र व्यवस्थापक सुनिश्चित कराएंगे। सचल दल में महिला निरीक्षणकर्ता का होना अनिवार्य है। बालिका परीक्षार्थी वाले केंद्र पर सचल/निरीक्षण दल के पुरुष सदस्य तलाशी नहीं ले सकेंगे। सभी कक्ष निरीक्षकों/कर्मचारियों के लिए फोटो युक्त परिचय पत्र अनिवार्य है। जीआइसी व एडेड विद्यालयों के शिक्षकों को न्यूनतम 20 पाली में कक्ष निरीक्षण अनिवार्य रहेगा।


यूपी बोर्ड: 20 पाली का कक्ष निरीक्षण अनिवार्य, सरकारी शिक्षकों को हाईस्कूल, इंटर परीक्षा में करनी होगी ड्यूटी

प्रयागराज। यूपी बोर्ड की 18 फरवरी से शुरू हो रही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के सभी शिक्षकों को कम से कम 20 पाली का कक्ष निरीक्षण अनिवार्य रूप से करना होगा। परीक्षा केंद्र बने वित्तविहीन विद्यालयों में राजकीय और एडेड कॉलेज के 50 प्रतिशत स्टाफ की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।

यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने तथा परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिनकी केंद्र व्यवस्थापक तथा कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी लगाई गई है उनके स्तर से लापरवाही या जानबूझकर अनुपस्थित होने पर अनुशासनात्मक एवं विधिक कार्रवाई की जाए। प्रत्येक परीक्षा कक्ष में दो कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे।

स्ट्रांग रूम में रखनी होगी लोहे की चार आलमारी : परीक्षा केंद्र पर स्ट्रांग रूम में पालीवार प्रश्नपत्रों के सुरक्षित रख-रखाव, अवशेष प्रश्नपत्रों तथा बंडल स्लिप को रखने के लिए कुल चार लोहे की डबल लॉकयुक्त आलमारी की व्यवस्था की जाएगी। दोनों पालियों के मुख्य प्रश्नपत्र सेट के सुरक्षित रखरखाव के लिए दो आलमारी रहेगी। तीसरी आलमारी में बचे हुए प्रश्नपत्र रखे जाएंगे जबकि चौथी आलमारी में रिजर्व सेट के प्रश्नपत्रों के पैकेट रखने होंगे।



परीक्षा शुरू होने से एक सप्ताह पूर्व पोर्टल पर जारी किए जाएंगे निरीक्षकों के परिचय पत्र, यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर जारी किए निर्देश

सचिव भगवती सिंह की ओर से सभी डीआईओएस को भेजा गया पत्र

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु, पारदर्शी और नकलविहीन संचालन के लिए कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सचिव ने निर्देश दिया है कि । कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाते ए समय उनके संपूर्ण विवरण की न भलीभांति जांच की जाए। किसी विद्यालय से संबंधित परीक्षा केंद्र रे पर कितने कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता होगी, इसका पूरा 5 विवरण डीआईओएस स्तर से ही निर्गत किया जाएगा। कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर परीक्षा प्रारंभ होने से एक सप्ताह पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा डाउनलोड किए जाएंगे।

परिचय पत्र पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कक्ष निरीक्षक को आवंटित परीक्षा केंद्र का विवरण अंकित कर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को हस्तगत कराया जाएगा। कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापकों को परीक्षा प्रारंभ होने की तिथि से तीन दिवस पूर्व 15 फरवरी को अपने आवंटित परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होकर केंद्र व्यवस्थापक को रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।

डीआईओएस द्वारा जनपद में बनाए गए सभी परीक्षा केंद्रों के लिए केंद्रवार कक्ष निरीक्षकों की सूची तैयार कर अपने कार्यालय में सुरक्षित रखी जाएगी। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक परीक्षा कक्ष में न्यूनतम दो कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जिनमें से एक कक्ष निरीक्षक का बाह्य विद्यालय से होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा पांच कक्षों पर एक मोचक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक यह सुनिश्चित करें कि कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापक माध्यमिक शिक्षा परिषद के पारिश्रमिक कार्यों से डिबार न किए गए हों। परीक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, जिन परीक्षा केंद्रों पर बालिका परीक्षार्थी परीक्षा दे रही हों, वहां महिला कक्ष निरीक्षकों की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जाएगी।

परीक्षा केंद्रों पर प्रत्येक कक्ष में 40 परीक्षार्थियों पर दो तथा 41 से 60 परीक्षार्थियों पर तीन कक्ष निरीक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि स्वकेंद्र पर छात्राओं के परीक्षा कक्षों में उसी विद्यालय के अध्यापकों की कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी।




परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला निरीक्षक की लगेगी ड्यूटी, बोर्ड परीक्षा की 30 दिन तक रखनी होगी रिकॉर्डिंग

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किया आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। राजधानी के 120 केंद्रों पर परीक्षा को सुचारू और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए परिषद के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने आदेश जारी किए हैं। इसके अनुसार परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला कक्ष की ड्यूटी लगाना जरूरी है। तलाशी की भी उन्हीं को अनुमति होगी।

परिषद की ओर से जारी आदेश में सख्त निर्देश दिए गए हैं। परिसर के अंदर छात्र-छात्राओं के साथ ही कक्ष निरीक्षकों को भी मोबाइल फोन, कैलकुलेटर व अन्य इलेक्ट्रिॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्ट्रांग रूम, परीक्षा कक्ष व अन्य जगहों पर लगने वाले सीसीटीवी कैमरे में आवाज की भी रिकॉर्डिंग होनी जरूरी है। साथ ही इसका डाटा परीक्षा खत्म होने के 30 दिनों तक रखना अनिवार्य है।

परिषद के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पेज पर अनुक्रमांक अनिवार्य रूप से लिखेंगे। कक्ष बोर्ड पर किसी स्तर से कुछ भी लिखने की अनुमति नहीं होगी।

परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र और उस पर लगने वाली फोटो का सही तरीके से मिलान जरूरी है। परीक्षा के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक होगी। ऐसा पाए जाने पर विभागीय व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।




यूपी बोर्ड की परीक्षा में जूते मोजे उतरवाने पर प्रतिबंध, रोज कैमरों और वायस रिकॉर्डर की होगी जांच, एक माह तक सुरक्षित रखनी होगी रिकॉर्डिंग

लखनऊ । राज्य सरकार ने यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों के जूते-मोजे उतरवाकर परीक्षा लेने पर रोक लगा दी है। केंद्र के मुख्य द्वार पर ही परीक्षार्थियों की पूरी जांच होगी। केंद्रों पर लगे कैमरों और वायस रिकॉर्ड की जांच होगी। खराब होने पर सूचना तुरंत डीआईओएस के साथ कंट्रोल रूम को देनी होगी और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शासनादेश जारी करते हुए मंडलायुक्तों जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया है। इसमें कहा है कि किसी भी छात्रा की तलाशी पुरुष शिक्षक नहीं करेंगे। केंद्र पर जिस विषय का पेपर है, उसके शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगेगी। परीक्षार्थियों से अभद्र व्यवहार नहीं करेंगे। 

बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के हर पेज पर रोल नंबर और उत्तर पुस्तिका क्रमांक लिखना होगा। केंद्र पर फोटोग्राफी और प्रेस, मीडिया को ब्रीफिंग नहीं होगी। सीसीटीवी कैमरे, वायस रिकार्डर के बिना किसी भी कीमत पर परीक्षा नहीं होगी। कैमरे, वायस रिकार्डर के डीवीआर की रिकार्डिंग 30 दिन सुरक्षित रखनी होगी। केंद्रों के निरीक्षण की रिपोर्ट रोज सेक्टर, स्टैटिक मजिस्ट्रेट डीएम, डीआईओएस को देंगे। केंद्रों पर प्रवेश पत्र के साथ कक्ष निरीक्षकों, ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के परिचय पत्र की भी जांच होगी। निरीक्षकों के मोबाइल और गैजेट बाहर जमा कराए जाएंगे।



माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश






यूपी बोर्ड के अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर एसटीएफ करेगी निगरानी, नकल में संलिप्त बाहरी व्यक्तियों पर अंकुश के लिए एलआइयू रहेगी सक्रिय

थानाध्यक्षों को निर्देश, केंद्र व्यवस्थापक व निरीक्षक माने जाएंगे लोकसेवक


 प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा नकलविहीन और शुचितापूर्ण संपन्न कराने के लिए प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, एडीजी, डीएम, पुलिस आयुक्त/एसएससी व एसपी को शासन स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं। कहा गया है कि नकल में संलिप्त बाह्य व्यक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए एलआइयू व अन्य स्त्रोतों से सूचना एकत्र कर परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर आवश्यकतानुसार एसटीएफ को तैनात किया जाए।

परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूमों के बाहर पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस अनुरूप व्यवस्था बनाने के निर्देश यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी)/ जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षण व व्यवस्थापन कार्य करने वाले अध्यापकों व केंद्राध्यक्षों को लोक सेवक माना जाएगा। ऐसे में इन पर हमला आदि दुर्घटनाओं के मामले में संज्ञेय अपराध के अंतर्गत एफआइआर दर्ज की जाएगी।

 परीक्षा केंद्र से सामूहिक नकल अथवा परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र लीक की सूचना मिलने/संदेह होने पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इसमें आजीवन कारावास तक तथा एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। जनपद को जोन सेक्टर में बांटकर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाएंगे। यह दायित्व एसडीएम/नगर मजिस्ट्रेट/कार्यकारी मजिस्ट्रेट को दिया जाएगा। 

निरीक्षण व्यवस्था इस तरह बनाई जाए कि प्रत्येक सेक्टर में परीक्षा केंद्रों की संख्या 10 से अधिक न हो। यथासंभव प्रधानाचार्य पद के समानांतर या उच्च पदधारक कार्मिक अधिकारी को ही स्टैटिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाएगा। स्टैटिक मजिस्ट्रेट प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर नियुक्त किए जाएंगे। परीक्षा 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर कराई जाएगी।



बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के प्रश्नपत्रों के सुरक्षित रख-रखाव हेतु परीक्षा केन्द्रों पर स्ट्रांग रूम की स्थापना व उसमें रखी डबल लॉक आलमारी की सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रश्नपत्रों के वितरण के सम्बन्ध में।


विशेष शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता पर केंद्र से जवाब तलब, अदालत ने कहा, इस मुद्दे पर नियमों और दिशानिर्देशों में स्पष्टता जरूरी

विशेष शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता पर केंद्र से जवाब तलब, अदालत ने कहा, इस मुद्दे पर नियमों और दिशानिर्देशों में स्पष्टता जरूरी


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले विशेष शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर नियमों और दिशानिर्देशों में स्पष्टता जरूरी है।


जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी, न्याय मित्र ऋषि मल्होत्रा और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद केंद्र से जवाब मांगा। अदालत ने तीन सवालों पर स्पष्टीकरण चाहा है, क्या माध्यमिक स्तर के विशेष शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य है, 10 जून 2022 के शिक्षा मंत्रालय के पत्र में बताई गई भर्ती प्रक्रिया सभी स्तरों पर लागू होती है या नहीं, और क्या 2010 के बाद किसी राज्य या केंद्र ने माध्यमिक स्तर के लिए टीईटी आयोजित की है।


केंद्र ने कहा-टीईटी सभी शिक्षकों के लिए जरूरी

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से कहा गया कि टीईटी सभी शिक्षकों के लिए जरूरी है और विशेष शिक्षकों के लिए भारतीय पुनर्वास परिषद का प्रमाणपत्र भी अनिवार्य है। इस पर जस्टिस दत्ता ने 2021 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि टीईटी की शर्त स्पष्ट रूप से कक्षा 1 से 5 और 6 से 8 तक के लिए है, 9 से 12 के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी अनिवार्यता केवल प्रशासनिक पत्र से नहीं, बल्कि विधि या नियमों के तहत तय होनी चाहिए। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 21 जुलाई 2022 के आदेश के अनुपालन में संविदा शिक्षकों के वेतन और सेवा शर्तों पर एक महीने में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया।

Tuesday, February 17, 2026

वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले परीक्षार्थियों के विषयों एवं जेण्डर कोड की त्रुटियों के निवारण के संबंध में

विषय और जेंडर कोड संबंधी त्रुटियों को सुधारने के निर्देश, यूपी बोर्ड ने सभी डीआईओएस को जारी किए निर्देश

साक्ष्यों के आधार पर संशोधन कर परीक्षार्थियों को परीक्षा में किया जाए शामिल

प्रयागराज । माध्यमिक शिक्षा परिषद की 18 फरवरी से शुरू हो रही हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले - परीक्षार्थियों के विषय और जेंडर कोड संबंधी त्रुटियों में सुधार के लिए परिषद ने एक और अवसर दिया है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश जारी किए हैं। कहा कि छात्र हित को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जेंडर कोड में संशोधन एवं प्रश्नपत्रों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए परीक्षार्थियों के विषय भी संशोधित कर उन्हें परीक्षा में सम्मिलित किया जाए।

परिषद ने स्पष्ट किया है कि सभी संशोधनों को हर हाल में पूर्ण कर क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिवों से 20 मार्च तक प्राप्त कर लिया जाए। ऐसा न होने पर त्रुटिपूर्ण डाटा फीडिंग के लिए संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, इससे पहले भी परिषद की वेबसाइट पर प्रधानाचार्यों द्वारा अपलोड किए गए शैक्षिक विवरणों में त्रुटियों को दूर करने के लिए ऑनलाइन संशोधन के अवसर दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी जो त्रुटियां शेष रह गई हैं, उनमें संशोधन के लिए प्रधानाचार्य के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन लेकर क्षेत्रीय कार्यालय की संस्तुति पर संशोधन की सुविधा प्रदान की गई है।




वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले परीक्षार्थियों के विषयों एवं जेण्डर कोड की त्रुटियों के निवारण के संबंध में।

वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केन्द्रों पर विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने वाले शिक्षणेत्तर कार्मिकों के परिचय पत्र निर्गत किये जाने के सम्बंध में

यूपी बोर्ड परीक्षा में पहली बार परीक्षा केंद्र के शिक्षणेत्तर कर्मियों को भी जारी होगा QR कोड युक्त परिचय पत्र

प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा में पहली बार परीक्षा केंद्र के शिक्षणेत्तर कर्मियों को परिचय पत्र जारी करने का आदेश दिया गया है। अभी तक केवल कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र जारी किए जाते थे। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि नकल विहीन परीक्षा कराने के उद्देश्य से ऐसा कदम उठाया गया है। परिषद ने कक्ष निरीक्षकों को क्यूआर कोड युक्त मुद्रित परिचय पत्र पोर्टल पर अपलोड कर निर्गत किए जाने के संबंध में निर्देश सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पहले ही प्रेषित कर चुकी है। 


वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केन्द्रों पर विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने वाले शिक्षणेत्तर कार्मिकों के परिचय पत्र निर्गत किये जाने के सम्बंध में

आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ेगा, सीएम योगी की विधानसभा में घोषणा, कहा –शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकार

आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ेगा, सीएम योगी की विधानसभा में घोषणा, कहा –शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकार


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधान परिषद में आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की है। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। हाल ही में इनके लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा हुई है। 


एक अप्रैल से पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा निशुल्क उपलब्ध होगी। सीएम ने कहा रिकॉर्ड स्तर पर पुलिस भर्तियां की गईं, महिला सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया। युवाओं के लिए नई योजनाएं शुरू की गईं।


शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकारः उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। शिक्षक चाहे बेसिक के हों, माध्यमिक या उच्च शिक्षा केइसके अलावा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, रसोइयों को भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की गई है। एक अप्रैल से इसका लाभ भी मिलने लगेगा।

पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने वालों का 28 फरवरी को बंद हो जाएगा एनपीएस खाता, यूपी सरकार का विधान परिषद में जवाब

पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने वालों का 28 फरवरी को बंद हो जाएगा एनपीएस खाता, यूपी सरकार का विधान परिषद में जवाब 

28 मार्च 2005 से पहले विज्ञापित पदों पर चयनित कार्मिकों को दी गई सुविधा

विधान परिषद में प्रश्न प्रहर में प्रदेश सरकार का जवाब


लखनऊ। प्रदेश में पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने वाले कार्मिकों का 28 फरवरी को एनपीएस खाता बंद हो जाएगा। यह विकल्प चुनने का अधिकार उन कार्मिकों को दिया गया है, जिनकी नियुक्ति का विज्ञापन 28 मार्च 2005 के पूर्व हो चुका था। यह जानकारी विधान परिषद में प्रश्न प्रहर में सपा एमएलसी डॉ. मान सिंह यादव के प्रश्न के जवाब में संसदीय कार्य राज्यमंत्री जसवंत सैनी ने दी।


उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाने संबंधी आदेश जारी करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 और एनपीएस खाता बंद करने की तिथि 30 जून 2025 निर्धारित की गई थी। कार्मिकों की ओर से या तो विलंब से विकल्प प्रस्तुत किए गए या नियुक्ति प्राधिकारियों ने समय से आदेश जारी नहीं किए। इसलिए अब एनपीएस खाता बंद करने की तिथि 28 फरवरी निर्धारित की गई है। उसके बाद ही एनपीएस में जमा राशि को जीपीएफ खाते में जमा कराया जा सकेगा।


 एनपीएस वाले शिक्षकों का राज्यांश समय से जमा कराएं

लखनऊ। विधान परिषद में एनपीएस के दायरे में आने वाले शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए सदस्य ध्रुव कुमार पाठक ने कहा कि ये व्यवस्था अधिकारियों की मनमानी का शिकार हो गई है। एनपीएस में शिक्षक का राज्यांश 10 और 14 फीसदी का अंशदान जमा करने की व्यवस्था है। इन दोनों कटौतियों का अंशदान एनएसडीएल में जमा करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि राज्यांश देरी से जमा किया जाता है। ध्रुव त्रिपाठी ने ये भी कहा कि पुरानी पेंशन के दायरे में आने वाले हजारों शिक्षकों की एनपीएस धनराशि जीपीएस खातों में ट्रांसफर नहीं की गई है। एनपीएस सेवा के अंतर्गत रिटायर होने वाले शिक्षकों को 800 से लेकर 1500 रुपये महीना पेंशन मिल रही है। इस पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि राज्यांश की धनराशि में कोई देरी नहीं की जा रही है। समय से धनराशि का आवंटन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्यांश की धनराशि प्रत्येक तिमाही जमा की जाती है। इस पर ध्रुव त्रिपाठी ने कहा कि 10 फीसदी और 14 फीसदी राज्यांश दोनों एक साथ शिक्षक के खाते में जाए ताकि ब्याज का नुकसान न हो। सभापति ने उनके सुझाव का परीक्षण कराने के निर्देश दिए। 

यूपी बोर्ड परीक्षा में नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई, देखें जारी नए दिशा निर्देश

यूपी बोर्ड परीक्षा में नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई, देखें जारी नए दिशा निर्देश 


प्रयागराज। बोर्ड परीक्षा में शुचिता, सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से केंद्र व्यवस्थापकों, कक्ष निरीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले पर कार्रवाई होगी। 

जारी दिशा-निर्देश के अनुसार...

प्रश्नपत्र निर्धारित समय से पहले किसी भी परिस्थिति में नहीं खोले जाएंगे और लिफाफा खोलते समय विषय, तिथि व पाली का मिलान अनिवार्य होगा।

जेंडर त्रुटि होने पर अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षक की अनुमति से संशोधन किया जाए।

केंद्र व्यवस्थापक व स्टैटिक मजिस्ट्रेट को छोड़ कर कोई भी कर्मचारी /परीक्षार्थी मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं रखेगा, स्ट्रांग रूम में भी मोबाइल पूर्णतः प्रतिबंधित है।

किसी भी स्थिति में बालिका परीक्षार्थियों की तलाशी पुरुष कक्ष निरीक्षक /अधिकारी द्वारा नहीं ली जाएगी।

बिना परिचय-पत्र कोई भी कार्मिक परीक्षा परिसर में नहीं रहेगा तथा सभी नियुक्त कार्मिक अपनी ड्यूटी स्थल पर ही उपस्थित रहेंगे।

उत्तर पुस्तिका के मुख्य पृष्ठ पर केवल यूनिक (केंद्र) कोड की मुहर लगेगी, केंद्र व्यवस्थापक के हस्ताक्षर व पदनाम की मुहर नहीं लगाई जाएगी।

परीक्षा शुरू होने से पूर्व घोषणा की जाए कि उत्तर पुस्तिका में रुपये रखना दंडनीय है, ऐसा मिलने पर छात्र तथा संबंधित कक्ष निरीक्षक दोनों पर कार्रवाई होगी।

किसी भी परीक्षार्थी का प्रवेश-पत्र विद्यालय द्वारा नियम विरुद्ध नहीं रोका जाएगा।

प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त फर्नीचर, प्रकाश, पेयजल तथा क्रियाशील शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य होगी।


CBSE: दसवीं के छात्रों को पहली बोर्ड परीक्षा देना अनिवार्य, दूसरी परीक्षा में सिर्फ प्रदर्शन सुधारने का मौका मिलेगा

CBSE: दसवीं के छात्रों को पहली बोर्ड परीक्षा देना अनिवार्य, दूसरी परीक्षा में सिर्फ प्रदर्शन सुधारने का मौका मिलेगा

दसवीं में दो बोर्ड परीक्षाओं पर बोर्ड ने स्पष्ट की नीति

नई दिल्ली । सीबीएसई ने साफ किया है कि दसवीं में दूसरी बोर्ड परीक्षा में छात्रों को तभी मौका मिलेगा, जब उन्होंने पहली बार परीक्षा अनिवार्य रूप से दी हो। बोर्ड ने साफ किया कि दूसरी बोर्ड परीक्षा में सिर्फ प्रदर्शन सुधारने का अवसर मिलेगा।


सीबीएसई ने दसवीं में इस बार दो बोर्ड परीक्षाओं की नीति को लेकर यह स्पष्टीकरण दिया है। दरअसल, हाल में बोर्ड को कई आवेदन मिले, जिनमें छात्रों ने कई कारणों से पहली परीक्षा में नहीं बैठ पाने की बात कहते हुए दूसरी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि दूसरी बार में सिर्फ तीन विषयों की परीक्षा दे सकेंगे। छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा में से कोई तीन विषय चुन सकेंगे। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र पहली बोर्ड परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों की परीक्षा नहीं देता है तो उसे दूसरी परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। ऐसे छात्र 'एसेंशियल रिपीट' श्रेणी में रखे जाएंगे। उन्हें अगले साल मुख्य बोर्ड परीक्षा में ही बैठ सकेंगे।

Monday, February 16, 2026

लाखों खर्च कर मिली बीएड डिग्री बनी बेरोजगारी का प्रतीक, भर्ती ठप होने से युवाओं में निराशा

लाखों खर्च कर मिली बीएड डिग्री बनी बेरोजगारी का प्रतीक, भर्ती ठप होने से युवाओं में निराशा


लखनऊ। शिक्षक बनने का सपना दिखाने वाली बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) की डिग्री उत्तर प्रदेश में हजारों युवाओं के लिए उम्मीद से ज्यादा चिंता का कारण बनती जा रही है। प्रदेश भर में वर्षों से शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में ठहराव, परीक्षाओं का टलना और नियुक्तियों में देरी ने बीएड धारकों के सामने गंभीर भविष्य संकट खड़ा कर दिया है।


बीते वर्षों में बड़ी संख्या में युवाओं ने बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। फीस, कोचिंग, हॉस्टल और अन्य शैक्षिक खर्च मिलाकर एक अभ्यर्थी को भारी आर्थिक निवेश करना पड़ता है। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में स्थायी शिक्षक पदों पर नियुक्तियां समय पर न होने से बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा बेरोजगार हैं। कई अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया की अनिश्चितता ने उनके मनोबल को प्रभावित किया है।

राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से नियमित भर्ती न होने की शिकायतें उठती रही हैं। टीजीटी और पीजीटी जैसी प्रमुख शिक्षक भर्तियों के विज्ञापन जारी होने के बाद भी प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लगना, परीक्षाओं का स्थगित होना या परिणाम में विलंब जैसे कारण युवाओं में असंतोष को बढ़ा रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी बनी रहती है और दूसरी ओर प्रशिक्षित अभ्यर्थी रोजगार के इंतजार में भटकते हैं, तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में पद रिक्त रहने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

बीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने सरकारी शिक्षक बनने की उम्मीद में समय और संसाधन दोनों लगाए, लेकिन वर्षों तक भर्ती न होने से उनका करियर अनिश्चितता में फंसा हुआ है। कई युवा ओवरएज होने की दहलीज पर पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ निजी संस्थानों में कम वेतन पर कार्य करने को मजबूर हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शिक्षक भर्ती की नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि प्रशिक्षित युवाओं का विश्वास बना रहे और विद्यालयों को योग्य शिक्षक मिल सकें। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती केवल नीतियों से नहीं, बल्कि समयबद्ध नियुक्तियों और स्पष्ट रोडमैप से ही संभव है।

प्रदेश स्तर पर उठ रहा यह मुद्दा अब केवल रोजगार का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता, युवाओं के भविष्य और सरकारी नीतियों की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। बीएड डिग्री धारकों की बढ़ती संख्या और सीमित अवसरों के बीच संतुलन कैसे स्थापित होगा, यह आने वाले समय में राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

Sunday, February 15, 2026

यूपी बोर्ड ने विज्ञप्ति जारी कर छात्रों और अभिभावकों को दी महत्वपूर्ण सलाहें, देखें विज्ञप्ति

यूपी बोर्ड ने विज्ञप्ति जारी कर छात्रों और अभिभावकों को दी महत्वपूर्ण सलाहें, 18 फरवरी से शुरू होंगी हाईस्कूल-इंटर की परीक्षाएं


प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के नाम महत्वपूर्ण अपील जारी की है। परिषद की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि 18 फरवरी से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं प्रारंभ हो रही हैं, जो विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। ऐसे में छात्रों से सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और नियमित परिश्रम के साथ परीक्षा में सम्मिलित होने का आग्रह किया गया है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि विद्यार्थियों को अब अपने पाठ्यक्रम का व्यवस्थित पुनरावलोकन करना चाहिए और अपनी अध्ययन शैली के अनुरूप समय-सारणी बनानी चाहिए। परिषद की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर उपलब्ध मॉडल प्रश्नपत्रों का उपयोग भी तैयारी के लिए किया जा सकता है। यदि पढ़ाई के दौरान किसी विषय में कठिनाई या जिज्ञासा हो तो उसे नोट कर संबंधित अध्यापक से समाधान प्राप्त करने की सलाह दी गई है। साथ ही माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित टोल फ्री नंबर 1800-180-5310 तथा 1800-180-5312 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

परिषद ने इंटरनेट के सीमित और उपयोगी प्रयोग की भी सलाह दी है। विद्यार्थियों से कहा गया है कि वे अनावश्यक सामग्री से दूरी बनाकर शैक्षिक वीडियो और आधिकारिक यूट्यूब चैनल का उपयोग करें। नियमित दिनचर्या, संतुलित भोजन और पर्याप्त विश्राम को भी परीक्षा की तैयारी का अहम हिस्सा बताया गया है। पढ़ाई के बीच-बीच में अल्प विश्राम लेने की भी सलाह दी गई है ताकि मानसिक थकान से बचा जा सके।

परीक्षा के दौरान तनाव को नियंत्रित रखने पर विशेष बल दिया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि यदि किसी प्रकार की चिंता या दबाव महसूस हो तो विद्यार्थी अपने माता-पिता, गुरुजनों या परिजनों से खुलकर बात करें। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टेलीमानस हेल्पलाइन सेवा के टोल फ्री नंबर 14416 और 800-891-4416 का उल्लेख किया गया है, जो 24 घंटे उपलब्ध है।

अभिभावकों से भी अपेक्षा की गई है कि वे इस संवेदनशील समय में अपने बच्चों को भावनात्मक सहयोग दें, उनकी तुलना अन्य छात्रों से न करें और सकारात्मक वातावरण प्रदान करें। परिषद ने कहा है कि अब परीक्षा में कुछ ही दिन शेष हैं, इसलिए विद्यार्थी आत्मविश्वास और पूरी तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हों। अंत में सभी परीक्षार्थियों को बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी गई हैं।



प्रवेश पत्र भूल गए तब भी दे सकेंगे यूपी बोर्ड की परीक्षा

प्रवेश पत्र भूल गए तब भी दे सकेंगे यूपी बोर्ड की परीक्षा


लखनऊ । यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में गलती या हड़बड़ी में प्रवेश पत्र भूलने पर परीक्षार्थियों को परीक्षा देने की सुविधा मिलेगी। परीक्षार्थी इसके लिए केंद्र व्यवस्थापक को अगली परीक्षा में प्रवेश पत्र या उसकी डुप्लीकेट कापी लाने का शपथ देगा। इसी शर्त पर उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलेगी। बोर्ड परीक्षा में राजकीय व एडेड स्कूल के शिक्षकों की 20 पालियों में ड्यूटी भी अनिवार्य कर दी गई है।


यूपी बोर्ड की 18 फरवरी से शुरू हो रही परीक्षा से पहले माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैक्षिणिक मार्गदर्शन के लिए यू-ट्यूब सेशन आयोजित किया। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा व माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह शामिल हुए। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों, केंद्र व्यवस्थापकों व कक्षनिरीक्षकों के प्रश्नों का उत्तर दिया। 

किसी कारण से प्रवेश पत्र न लाने पर केंद्र व्यवस्थापक अपने स्वविवेक का प्रयोग कर उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दे सकेगा। अगली परीक्षा में इसे न देने पर उसे रोक दिया जाएगा। प्रवेश पत्र में नाम व लिंग इत्यादि की त्रुटि होने पर अन्य पहचान पत्रों से मिलान कर छात्र को परीक्षा में बैठने दिया जाएगा। केंद्र पर देर से पहुंचने पर व्यवस्थापक वास्तविक कारण बताने पर परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट बाद तक छात्रों को अवसर देगा।


यह है हेल्प लाइन नंबर
तनाव होने पर टेली मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 पर संपर्क करें।
यूपी बोर्ड की हेल्पलाइन नंबर 18001805310 व 18001805312


प्रयोगात्मक परीक्षा छूटने पर दोबारा अवसर
छात्र बीमार है या कोई अन्य कठिनाई है तो उसकी तय तारीख पर प्रयोगात्मक परीक्षा छूटने पर दो बार प्रयोगात्मक परीक्षाओं का अवसर देता है। लिखित परीक्षाओं के बाद दोबारा अवसर मिलेगा।


दिव्यांगों को 20 मिनट का अतिरिक्त समय
दिव्यांग परीक्षार्थियों को परीक्षा अवधि से 20 मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा। अगर केंद्र दो मंजिला भवन में है तो दिव्यांग छात्र को भूतल के कमरे में ही बैठाकर परीक्षा दिलाने की सुविधा होगी।


मॉक टेस्ट कर उत्तर लिखना भी सीखें
अपर मुख्य सचिव ने छात्रों को हिदायत दी कि वह मॉक टेस्ट देकर उत्तर लिखना सीखें। कई छात्र ऐसे होते हैं जिन्हें सबकुछ आता है, लेकिन वह प्रश्न का जवाब ढंग से नहीं लिख पाते। इसलिए जो सवाल अच्छे से आता है उसे पहले हल करें। उत्तर में महत्वपूर्ण चीजों को हाईलाइट करें, हेडिंग लगाएं, प्वाइंट के अनुसार लिखें, ग्राफ व डायग्राम बनाएं, क्योंकि परीक्षक के पास कापी जांचने के लिए अधिक समय नहीं होता। वहीं प्रश्न पत्र हल करने के बाद पांच मिनट का समय रिवाइज करने के लिए हो कि कहीं कुछ छूटा तो नहीं। टाइम मैनेजमेंट भी हो।

Saturday, February 14, 2026

उत्तर पुस्तिकाओं में रुपये मिले तो नकल मानकर होगी सख्त कार्रवाई, यूपी बोर्ड ने कक्ष निरीक्षकों को लेकर भी जारी किए कड़े निर्देश

यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा को लेकर सख्ती, बोर्ड सचिव ने सभी डीआईओएस को निगरानी के दिए निर्देश, कॉपी से निकले नोट तो छात्र संग कक्ष निरीक्षक पर होगी कार्रवाई

मूल्यांकन के दौरान हर साल उत्तरपुस्तिकाओं से निकलता है नोट

अबकी बार ऐसा होने पर कक्ष निरीक्षक की लापरवाही मानी जाएगी

प्रयागराज । 18 फरवरी से शुरू हो रही यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट 2026 की परीक्षा में यदि उत्तरपुस्तिका में नोट निकलता है तो संबंधित छात्र के साथ ही कक्ष निरीक्षक पर भी कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं। सचिव ने साफ किया है कि यदि किसी परीक्षार्थी की उत्तर पुस्तिका में मुद्रा (धनराशि) प्राप्त होगी तो इसे अनुचित साधन सामग्री माना जाएगा और मूल्यांकन के समय इसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकार के मामलों को ड्यूटी के समय लापरवाही मानते हुए कक्ष निरीक्षक के खिलाफ भी विभागीय नियमों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

12 फरवरी को सभी डीआईओएस को भेजे पत्र में सचिव ने लिखा है कि बोर्ड परीक्षा की निष्पक्षता और गरिमा को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि उत्तरपुस्तिकाओं के संकलन और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मानक के अनुरूप हो। पूर्व के वर्षों में देखा गया है कि कुछ परीक्षार्थी अनजाने में या भ्रामक धारणाओं (अधिक नंबर के लालच में) में फंसकर उत्तर-पुस्तिकाओं के अंदर मुद्रा (धनराशि) नत्थी कर देते हैं। यह परीक्षा के अनुशासन के विरुद्ध है।

परीक्षा से पहले ही छात्रों को चेताना होगा
सचिव ने परीक्षा केंद्रों के केंद्र व्यवस्थापकों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि परीक्षा कक्ष में परीक्षार्थियों को पूर्व में ही सूचित किया जाए कि उत्तर-पुस्तिका के अंदर किसी भी प्रकार की अवांछित सामग्री या मुद्रा रखना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। कक्ष निरीक्षकों को भी निर्देशित किया जाए कि वे इस पर सतर्क नजर रखें। यदि संकलन या मूल्यांकन के दौरान किसी उत्तर-पुस्तिका में नोट मिलते हैं, तो उसे तत्काल नियमानुसार राजकोष में जमा कराया जाए। ऐसी घटनाओं की सूचना तत्काल डीआईओएस को दी जाए ताकि उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत संबंधित के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा सके। सभी केंद्र व्यवस्थापक और शिक्षक यह सुनिश्चित करें कि परीक्षा का वातावरण भयमुक्त हो।




उत्तर पुस्तिकाओं में रुपये मिले तो नकल मानकर होगी सख्त कार्रवाई, यूपी बोर्ड ने कक्ष निरीक्षकों को लेकर भी जारी किए कड़े निर्देश

प्रयागराज। वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से 12 फरवरी 2026 को जारी पत्र में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और परीक्षा केंद्रों को परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं मानक अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 18 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 12 मार्च 2026 तक आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षाओं की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। पूर्व के अनुभवों के आधार पर यह संज्ञान में आया है कि कुछ परीक्षार्थी उत्तर पुस्तिकाओं के भीतर मुद्रा (धनराशि) रख देते हैं, जो न केवल परीक्षा अनुशासन के विरुद्ध है बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास भी माना जाएगा।

परिषद ने निर्देशित किया है कि परीक्षा केंद्रों के केंद्र व्यवस्थापक एवं शिक्षक यह सुनिश्चित करें कि परीक्षा कक्ष में परीक्षार्थियों को पूर्व में ही सूचित कर दिया जाए कि उत्तर पुस्तिका के भीतर किसी भी प्रकार की अवांछित सामग्री या धनराशि रखना अनुचित साधन की श्रेणी में आएगा। कक्ष निरीक्षकों को भी इस संबंध में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संकलन या मूल्यांकन के दौरान किसी उत्तर पुस्तिका में धनराशि प्राप्त होती है तो उसे तत्काल नियमानुसार राजकोष में जमा कराया जाए और घटना की सूचना संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक को दी जाए। ऐसे मामलों में परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत संबंधित के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।

पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि इस प्रकार की घटना लापरवाही के कारण होती पाई गई तो संबंधित कक्ष निरीक्षक के विरुद्ध भी विभागीय नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। परिषद ने सभी संबंधित अधिकारियों से निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि बोर्ड परीक्षाओं की विश्वसनीयता और मूल्यांकन की निष्पक्षता बनी रहे।


यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 से पहले छात्रों को मिलेगा सीधा मार्गदर्शन, 14 फरवरी को अपर मुख्य सचिव का लाइव सेशन

यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 से पहले छात्रों को मिलेगा सीधा मार्गदर्शन, 14 फरवरी को अपर मुख्य सचिव का लाइव सेशन


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लखनऊ। समग्र शिक्षा (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश के राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से वर्ष 2025-26 में आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य परियोजना निदेशक द्वारा जारी पत्र में कक्षा 10 एवं 12 के विद्यार्थियों को परीक्षा से पूर्व आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से एक राज्य स्तरीय ऑनलाइन सत्र आयोजित करने की जानकारी दी गई है।

पत्र के अनुसार “Session by ACS, Secondary Education on Board Examination, 2026” शीर्षक से यह विशेष सत्र 14 फरवरी 2026 को प्रातः 10:30 बजे यूट्यूब के माध्यम से लाइव प्रसारित किया जाएगा। इस सत्र में बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि छात्र-छात्राएं परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें और उनकी शंकाओं का समाधान हो सके।

राज्य स्तर से सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों, प्रधानाचार्यों, केंद्र व्यवस्थापकों एवं शिक्षकों की सहभागिता अनिवार्य की गई है। निर्देश दिए गए हैं कि जनपद स्तर पर समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थी इस ऑनलाइन सत्र से जुड़ सकें। विद्यालयों को अपने स्तर पर विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक प्रयास करने को कहा गया है।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी इस कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार की व्यवस्था करें और विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर लाइव सत्र से जोड़ने की जिम्मेदारी निभाएं। यूट्यूब लाइव लिंक के माध्यम से यह प्रसारण किया जाएगा।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस प्रकार के राज्य स्तरीय मार्गदर्शन सत्र से विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी, समय प्रबंधन, प्रश्नपत्र की समझ और तनाव प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर उपयोगी जानकारी मिलेगी, जिससे बोर्ड परीक्षाओं की गुणवत्ता और परिणामों में सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

Friday, February 13, 2026

शिक्षा पर उत्तर प्रदेश का बड़ा दांव: बजट में बेसिक से प्राविधिक तक हजारों करोड़ की सौगात, देखें शिक्षा के हर स्तर पर कितना हुआ बजट आवंटन

राजकीय माध्यमिक स्कूलों में 'ड्रीम लैब' से बदलेगी तस्वीर, बजट में 150 करोड़ का प्रावधान

लखनऊ: राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल लर्निंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अब बजट में इन विद्यालयों में 'ड्रीम स्किल लैब क्लस्टर' स्थापित करने के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही आधुनिक तकनीक और कौशल से जोड़ना है। योजना के अनुसार पहले चरण में प्रत्येक मंडल से दो विद्यालय एक बालक और एक बालिका को हब स्कूल बनाया जाएगा। 

एक हब से तीन अन्य विद्यालय स्पोक स्कूल के रूप में जुड़े रहेंगे। प्रत्येक हब की अनुमानित लागत 13.34 करोड़ रुपये होगी। खर्च उद्योग समूहों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के बीच 68:32 के अनुपात में साझा किया जाएगा। टाटा टेक्नोलाजीज, टाटा क्लासेस और जापान की यास्कावा जैसी कंपनियां तकनीकी सहयोग देंगी। पांच वर्षों तक उपकरणों के रखरखाव और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी उद्योग समूहों की होगी। ड्रीम लैब में एआइ, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स, एआर-वीआर, ड्रोन तकनीक, कंप्यूटर एडेड मशीनिंग, ईवी और बैटरी तकनीक, प्लंबिंग और ओडीओपी आधारित ट्रेड कोर्स सिखाए जाएंगे।



शिक्षा पर उत्तर प्रदेश का बड़ा दांव:  बजट में बेसिक से प्राविधिक तक हजारों करोड़ की सौगात, देखें शिक्षा के हर स्तर पर कितना हुआ बजट आवंटन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026–27 के बजट में शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए बेसिक, माध्यमिक, उच्च और प्राविधिक शिक्षा के लिए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए हैं। बजट में स्कूल शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के विकास तक कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं, जिससे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।



बेसिक शिक्षा के लिए 77,622 करोड़ रुपये
बेसिक शिक्षा के लिए 77,622 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूता-मोजा और स्टेशनरी उपलब्ध कराने हेतु 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश के सभी 75 जनपदों में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। साथ ही प्रत्येक जनपद में एक विद्यालय को ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

जहां कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना के लिए 580 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना हेतु 358 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये तथा सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों के सुरक्षा ऑडिट में कमियां पाए जाने पर अनुरक्षण के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।


माध्यमिक शिक्षा के लिए 22,167 करोड़ रुपये
माध्यमिक शिक्षा के लिए 22,167 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु 520 करोड़ रुपये तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
राजकीय संस्कृत पाठशालाओं के छात्रों की छात्रवृत्ति हेतु 20 करोड़ रुपये, ड्रिम स्कूल क्लस्टर की स्थापना के लिए 150 करोड़ रुपये और अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना हेतु 89 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। गोरखपुर में पूर्वांचल के पहले एवं प्रदेश के दूसरे सैनिक स्कूल की स्थापना और संचालन भी आरंभ किया गया है।


उच्च शिक्षा को 6,591 करोड़ रुपये
उच्च शिक्षा के लिए 6,591 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो वर्ष 2025–26 की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है। मेधावी छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना हेतु 400 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के लिए 40 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

मिर्जापुर, मुरादाबाद और बलरामपुर में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए 50-50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। शाहजहांपुर और भदोही में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना हेतु 21-21 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के लिए 14 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान भी किया गया है।


प्राविधिक शिक्षा में 72 प्रतिशत वृद्धि
प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में 72 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 2,365 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के 195 डिप्लोमा स्तरीय संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि 23 नए राजकीय पॉलिटेक्निक निर्माणाधीन या प्रक्रियाधीन हैं।

राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में नवीन तकनीक से सुसज्जित उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए 714 करोड़ रुपये तथा उन्नयन और अवस्थापना विकास हेतु 254 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। 251 स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं और 143 नए स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना प्रक्रिया में है।


राज्य सरकार ने इस बजट के माध्यम से प्राथमिक से लेकर तकनीकी और उच्च शिक्षा तक एक समग्र शैक्षिक ढांचा विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकेत दिया है। बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल संसाधनों के विस्तार, छात्र कल्याण योजनाओं और संस्थागत विकास पर विशेष जोर इस बजट की प्रमुख विशेषता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन घोषणाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया, तो उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

दिल्ली में पढ़ने वाले यूपी के छात्रों के लिए हॉस्टल बनवाएगी योगी सरकार, बजट में की गई पांच करोड़ रुपये की व्यवस्था

दिल्ली में पढ़ने वाले यूपी के छात्रों के लिए हॉस्टल बनवाएगी योगी सरकार, बजट में की गई पांच करोड़ रुपये की व्यवस्था


लखनऊ। दिल्ली में पढ़ने वाले प्रदेश के छात्रों के लिए वहां रहने की व्यवस्था प्रदेश सरकार करेगी। इसके लिए सरकार ने बजट में दिल्ली में पढ़ने वाले छात्रों को आवासीय सुविधा के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा।


उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रदेश के काफी छात्र छात्राएं पीजी, पीएचडी आदि की पढ़ाई के लिए जाते हैं। वहां पर उन्हें आवासीय सुविधा के लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसे देखते हुए यह महसूस किया गया कि उन्हें बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत है। इसके लिए छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। इससे न सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवार के छात्रों की आर्थिक दिक्कत दूर होगी बल्कि और छात्र उच्च शिक्षा के लिए जाने को प्रेरित होंगे। 

जल्द तय होंगे जरूरी नियम

उच्च शिक्षा विभाग छात्रावास के लिए जमीन आदि की व्यवस्था कर इसके लिए विस्तृत नियम-कानून भी तैयार करेगा। इसमें तय किया जाएगा कि यह पूरी तरह निःशुल्क होगा या इसके लिए कोई टोकन मनी ली जाएगी।

Thursday, February 12, 2026

यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 के स्ट्रांग रूम में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा/नकल विहीन परीक्षा की शुचिता, पवित्रता एवं विश्वसनीयता हेतु सतर्कता के सम्बन्ध में

यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 के स्ट्रांग रूम में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा/नकल विहीन परीक्षा की शुचिता, पवित्रता एवं विश्वसनीयता हेतु सतर्कता के सम्बन्ध में


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षाओं के दृष्टिगत निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त कक्ष निरीक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के संबंध में शासनादेश जारी

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षाओं के दृष्टिगत निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त कक्ष निरीक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के संबंध में शासनादेश जारी 


यूपी बोर्ड परीक्षा: कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड युक्त परिचय पत्र जारी, कल तक वितरण के निर्देश, हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट पक्षाओं के दौरान कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड से होगी पहचान

यूपी बोर्ड परीक्षा: कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड युक्त परिचय पत्र जारी, कल तक वितरण के निर्देश, हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट पक्षाओं के दौरान कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड से होगी पहचान


प्रयागराजः हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड युक्त परिचय पत्र उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिए हैं कि ये 13 फरवरी तक कक्ष निरीक्षकों के लिए निर्गत कर दिए जाएं। संदिग्ध स्थिति मिलने पर क्यूआर कोड के माध्यम से परिचय पत्रों की मोबाइल एप से जांच की जा सकेगी।

सचिव ने कहा है कि सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य पोर्टल से परिचय पत्र डाउनलोड कर दो प्रतियों में प्रिंट करेंगे। परिचय पत्र पर अंकित शिक्षक के विवरण एवं फोटो को विद्यालयी अभिलेखों से मिलान कर प्रधानाचार्य स्वयं तथा संबंधित शिक्षक हस्ताक्षर सुनिश्चित करेंगे। इसके बाद परीक्षा केंद्र का नाम अंकित कर परिचय डीआइओएस को प्रतिहस्ताक्षर के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। डीआइओएस प्रतिहस्ताक्षरित एक प्रति प्रधानाचार्य को लौटाएंगे तथा दूसरी प्रति कार्यालय अभिलेख में रखी जाएगी। जिन शिक्षकों के क्यूआर कोड युक्त परिचय पत्र पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए सादे परिचय पत्र जारी करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग से लगाए गए कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से निर्गत किए जाएंगे।

केंद्र के बाहर अभिभावकों से लिए रखें पेयजल व्यवस्था

परीक्षा केंद्र व उसके आसपास साप. सफाई, विशेष रूप से शौचालय साफ-सुफरा रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा केंद्र में शुद्ध पेयजल व्यवस्था तथा केंद्र के बाहर यदि परीक्षार्थ के अभिभावक उपस्थित हों तो उनके लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

पर्याप्त कक्ष निरीक्षकों की उपलब्धता के निर्देश

18 फरवरी से 12 मार्च तक चलने वाली यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए पर्याप्त कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी से समन्वय बनाकर केंद्र पर प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था परीक्षार्थियों एवं कार्मिकों के लिए सुनिश्चित की जाए।