Thursday, April 16, 2026
CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं कक्षा के परिणाम आज, 15 अप्रैल को नतीजे जारी हो चुके हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं।
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। यह परिणाम आज शाम 4 बजे जारी हुए हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं। सीबीएसई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 93.70 प्रतिशत बच्चे पास हुए हैं। बीते वर्ष से कुल पास प्रतिशत 0.04 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।
जरूरी आंकड़े
10वीं में कुल पास छात्र- 23,16,008
बीते वर्ष कुल पास छात्र- 22,21,636
कुल पास प्रतिशत- 93.70%
सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षाओं में 2.20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 55,000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। लड़कियों ने इस बार भी रिजल्ट में बाजी मारी और कुल 94.99 प्रतिशत लड़कियां पास हुईं। वहीं 92.69 प्रतिशत लड़के पास हुए।
इस साल भी नहीं जारी हुई टॉपर्स लिस्ट
हालांकि, बोर्ड ने इस वर्ष भी मेरिट सूची नहीं जारी की है। बोर्ड 0.1 प्रतिशत छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र जारी करेगा, ये वो छात्र होंगे जिन्होंने विषयों में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं।
मेरिट प्रमाण पत्र संबंधित छात्र के डिजिलाकर में उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, परीक्षार्थियों को मार्कशीट भी उनके डिजिलाकर खातों में उपलब्ध कराई गई है।
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि बोर्ड जल्द ही छात्रों को उनके स्कूल के माध्यम से उत्तीर्ण प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएगा। वहीं, इस वर्ष कंपार्टमेंट लाने वाले विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षाएं जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में आयोजित की जाएंगी।
रिजल्ट देखने एवं डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर जाएं।
इसके बाद वेबसाइट के होमपेज पर रिजल्ट एक्टिव लिंक पर क्लिक करें।
लिंक पर क्लिक करने के बाद अपना लॉगिन डिटेल डालें।
लॉगिन डिटेल डालने के बाद सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा।
चाहें तो रिजल्ट का प्रिंट आउट भी निकाल सकते हैं।
Wednesday, April 15, 2026
स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं
स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं
लखनऊ। प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो गया है। जोर शोर से स्कूल चलो अभियान भी चलाया जा रहा है। पहले दिन से विद्यार्थियों को सभी किताबें उपलब्ध भी कराई जानी थीं। किंतु हालत यह है कि 15 दिन बाद भी विद्यालयों में किताबों का इंतजार हो रहा है। विभाग ने इस पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।
हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा में बताया गया कि किताब वितरण की गति 25 जिलों में अपेक्षाकृत धीमी है। इसमें इटावा व हाथरस ने कोई रिपोर्ट ही नहीं दी है। जबकि बहराइच के 2834 में से 2002 विद्यालयों में किताबें नहीं वितरित हुई हैं। बता दें कि बहराइच में ही फरवरी की शुरुआत में कबाड़ में किताबें बेचने का मामला सामने आया था।
आजमगढ़ के 2955 में से 1921 विद्यालयों में, संभल के 1289 में से 803 विद्यालयों में, बांदा के 1797 में से 630 विद्यालयों में, चित्रकूट के 1262 में से 377 विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची हैं। इसी क्रम में अयोध्या में 335, गोरखपुर में 247, सीतापुर में 52, अमेठी में 50, लखनऊ के 33 विद्यालयों में अभी तक सभी किताबें नहीं पहुंची हैं। इसका असर यहां के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
Tuesday, April 14, 2026
प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में नए निर्देश जारी
प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में नए निर्देश जारी
लखनऊ। प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के संचालन के लिए प्रबंध समिति व आदर्श प्रशासन योजना समिति का गठन किया जाता है। किंतु आदर्श प्रशासन योजना में सदस्यों के मनोनयन में गड़बड़ी व मनमानी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग सख्त हुआ है। विभाग ने इसमें से विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य बनाने की व्यवस्था खत्म करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी आदेश में हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि आदर्श प्रशासन योजना को निरस्त कर दिया गया है। कुछ संस्थाओं में आदर्श प्रशासन योजना में विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।
इसलिए जिन संस्थाओं में प्रशासन योजना में विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था, वे साधारण सभा से प्रस्ताव प्राप्त कर इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त कराएं। इसका आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। जानकारी के अनुसार कुछ विद्यालयों में समिति के सदस्यों की ओर से आगे चलकर विद्यालयों के एसेट आदि पर अधिकार कर लिया गया है। इसकी शिकायत विभाग में हुई है।
वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रबंध समिति के चुनाव के लिए संस्था द्वारा पर्यवेक्षक की मांग करने पर डीआईओएस को सात दिन में पर्यवेक्षक नामित करना होगा। यदि डीआईओएस समय से चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति नहीं करते हैं तो प्रबंधतंत्र को निर्धारित समय में चुनाव कराने का अधिकार होगा। इस चुनाव को डीआईओएस द्वारा अमान्य नहीं किया जाएगा।
प्रबंध समिति का चुना होने के बाद हस्ताक्षर प्रमाणित करने के लिए डीआईओएस को 14 दिन के अंदर भेजा जाएगा। निर्विवाद रूप से कार्यरत प्रबंध समिति के चुनाव में पूर्व प्रबंधक चुने जाते हैं तो फिर से हस्ताक्षर प्रमाणित करने की जरूरत नहीं है। वहीं पदाधिकारी व समिति के सदस्यों का का कार्यकाल पांच साल का होगा। अगर आदर्श प्रशासन योजना निरस्त भी होती है तो प्रबंध समिति का कार्यकाल वही होगा जो संस्था की प्रशासन योजना में पहले से तय है।
प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में।
यूपी के 47.69 लाख बच्चे आउट आफ स्कूल, इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए NIOS से समझौता
यूपी के 47.69 लाख बच्चे आउट आफ स्कूल, इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए NIOS से समझौता
प्रयागराज : पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को पुनः मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से भारत सरकार के कराए गए सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसमें 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों की पहचान की गई है, जिन्होंने प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ाई तो की, लेकिन 10वीं या 12वीं तक पहुंचने से पहले ही विद्यालय जाना बंद कर दिया। देश भर में यह संख्या दो करोड़ 72 लाख है, जिनमें से उत्तर प्रदेश के 47.69 लाख हैं। उत्तर प्रदेश के 'आउट आफ स्कूल' बच्चों को इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआइओएस) के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह सर्वे करीब तीन वर्ष की अवधि में किया गया है। इन बच्चों की पहचान उन्हें विद्यालय से मिलने वाले यूनिक नंबर (अपार आइडी) के आधार पर की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस योजना तैयार की है। एनआइओएस की मदद से इन बच्चों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए जिला या ब्लाक स्तर पर पीएमश्री विद्यालय में इनके नामांकन प्रदेश सरकार कराएगी। इसके बाद एनआइओएस के माध्यम से पाठ्यसामग्री संबंधित विद्यार्थियों के घर भेजी जाएगी।
लंबी सेवा के बाद केवल तकनीकी आधार पर शिक्षकों की बर्खास्तगी अनुचित : हाईकोर्ट, 19 साल से कार्यरत शिक्षकों की सेवा बहाल
लंबी सेवा के बाद केवल तकनीकी आधार पर शिक्षकों की बर्खास्तगी अनुचित : हाईकोर्ट, 19 साल से कार्यरत शिक्षकों की सेवा बहाल
प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि लंबी सेवा के बाद शिक्षकों की सेवा सिर्फ तकनीकी आधार समाप्त करना अनुचित है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए कोर्ट ने निरस्त कर संबंधित शिक्षकों को सभी लाभ देने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने दिया है।
मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि गौतमबुद्ध नगर स्थित राम सिंह विश्व चैतन्य कन्या जूनियर हाई स्कूल में वर्ष 2006 में दो सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। बाद में विद्यालय को अनुदान सूची में शामिल किया गया, लेकिन इन शिक्षकों को लंबे समय तक वेतन नहीं मिला। वर्ष 2014 में शासनादेश के बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई और 2018 में क्षेत्रीय अनुमोदन समिति ने नियुक्तियों को सही मानते हुए वेतन देने का आदेश दिया।
वर्ष 2025 में अधिकारियों ने नियुक्ति को अवैध बताते हुए सेवा समाप्त करने का आदेश दे दिया। शिक्षकों ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति नियमों के अनुरूप थी। 2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन मिल चुका है। उन्हें बिना सुनवाई के सेवा से रोका गया जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
खंडपीठ ने पहले ही केवल वेतन विवाद तक सीमित जांच का निर्देश दिया था। राज्य सरकार का कहना था कि नियुक्ति विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता का उल्लेख नहीं था। वर्ष 2006 में बीएड योग्यता मान्य नहीं थी। इसलिए नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध थीं। पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति की वैधता पर दोबारा फैसला किया है। 2018 में नियुक्ति को सही मानकर आदेश दिया जा चुका था, इसलिए इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता।
शिक्षकों को बिना सुनवाई के सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। शिक्षक करीब 19 वर्षों से कार्यरत हैं, ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर सेवा समाप्त करना गलत है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को आसानी से रद नहीं किया जा सकता। यदि धोखाधड़ी नहीं है तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा जरूरी है। कोर्ट ने 26 अगस्त 2025, 30 अगस्त 2025, एक सितंबर 2025 और आठ सितंबर 2025 के सभी आदेश रद करते हुए शिक्षकों की सेवा जारी रखने और सभी वेतन व अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है।
81 नवनिर्मित और निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी
81 नवनिर्मित और निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी
प्रधानमंत्री जन विकास योजना के तहत पूर्ण हो चुके 49 राजकीय इंटर कॉलेज शामिल
प्रयागराज। प्रदेश में 81 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद के सृजन की स्वीकृति मिल गई है। इनमें 32 निर्माणाधीन तथा प्रधानमंत्री जन विकास योजना के तहत पूर्ण हो चुके 49 राजकीय इंटर कॉलेज भी शामिल हैं।
माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-1 के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्त ने बताया कि इन पदों पर भर्ती उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा (पंचम संशोधन) नियमावली-2025 के तहत की जाएगी। इससे प्रदेश में नए विद्यालयों के संचालन को गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री जन विकास योजना के अंतर्गत निर्मित 49 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पद सृजित किए गए हैं। इनमें अंबेडकरनगर के टांडा, बदायूं के सैदपुर, बहराइच के गुरघुट्टा, अचौलिया और बसहियापाते, बरेली के उरला जागीर व पैंगा रिछा सहित सिद्धार्थनगर, कई जनपदों के विद्यालय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त संभल, पीलीभीत, अमरोहा, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, संतकबीरनगर, मेरठ और हापुड़ में एक-एक, जबकि बिजनौर, लखीमपुर, सीतापुर और रामपुर में दो-दो कॉलेज शामिल हैं। शामली, मुरादाबाद और सीतापुर में तीन-तीन, मुजफ्फरनगर में चार तथा सहारनपुर और बरेली में छह-छह कॉलेज इस सूची में शामिल हैं।
32 निर्माणाधीन कॉलेज भी शामिल: इसके साथ ही 32 निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में भी प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी दी गई है। इनमें मैनपुरी, अयोध्या, एटा, फिरोजाबाद, कासगंज, संभल, कन्नौज, शामली, अमेठी, मेरठ और सोनभद्र में एक-एक, जबकि सीतापुर और बिजनौर में दो-दो कॉलेज शामिल हैं।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जलाई मशाल, राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जुलूस निकालकर भेजा ज्ञापन
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जलाई मशाल, राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जुलूस निकालकर भेजा ज्ञापन
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के संयोजन में दर्ज कराया विरोध
14 अप्रैल 2026
लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को पूरे प्रदेश में शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए मशाल जलाई। शिक्षकों व कर्मचारियों ने मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की।
राजधानी लखनऊ में बीएन सिंह की प्रतिमा के पास से शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकाला। नो टीईटी बिफोर आरटीई की तख्तियां लिए शिक्षकों ने 2017 में गोपनीय तरीके से किए गए टीईटी अनिवार्यता के संशोधन को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 25 साल की लंबी सेवा करने के बाद अब वे परीक्षा देने की स्थिति में नहीं हैं। उनके रोजगार पर लटकी तलवार को हटाया जाए। जिलों में भी शिक्षकों ने टीईटी के विरोध में मशाल जलाई।
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय व विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकार लगातार शिक्षकों व कर्मचारियों पर अव्यवहारिक नियम थोप रही है, जिससे उनका मनोबल गिर रहा है। टीईटी की अनिवार्यता, पेंशन समाप्त करना, निजीकरण और सेवा शर्तों में लगातार हो रहे बदलाव जैसे मुद्दे आज पूरे शिक्षक व कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है।
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद ने कहा कि सरकार टेट अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करे। पुरानी पेंशन बहाल कर शिक्षकों व कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करे। जुलूस में अनिल यादव, दिलीप चौहान, हरिशंकर राठौर, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी मिश्रा, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह आदि शामिल थे।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आज शिक्षक निकालेंगे मशाल जुलूस
13 अप्रैल 2026
लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर शिक्षक मशाल जुलूस निकालेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय और अटेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी जैसी नई शर्तें थोपना अनुचित है।
मुख्य विधिक प्रभारी विवेकानन्द ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता हटाने के लिए न्यायालय तक संघर्ष जारी रहेगा। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के संजय मणि त्रिपाठी और विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के संतोष तिवारी ने आंदोलन को निर्णायक बताया।
इसके अलावा कमलेश पांडेय, अपूर्व दीक्षित, दिनेश विद्रोही, विनय सिंह, डॉ. महेंद्र यादव, सोहन लाल वर्मा, रवींद्र सिंह, बंदना सिंह चौहान, शालिनी मिश्रा तथा ओपी त्रिपाठी समेत कई शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों से बड़ी संख्या में शामिल होकर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की अपील की।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध हेतु 13 अप्रैल को जनपद मुख्यालयों में मशाल जुलूस के लिए किया जा रहा शिक्षकों से व्यापक जनसंपर्क
10 अप्रैल 2026
लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके माध्यम से आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी।
महासंघ के सभी घटक संगठनों द्वारा इसके लिए व्यापक स्तर पर जनसंपर्क किया जा रहा है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय व समन्वयक विजय कुमार बंधु ने बताया कि विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस आंदोलन को शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा व न्यायपूर्ण व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा मानकर समर्थन दिया है।
आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना अनुचित है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने सभी शिक्षक संगठनों व शिक्षकों से अपील की कि जिला स्तर पर समन्वय स्थापित कर अधिकतम संख्या में सहभागिता सुनिश्चित करें।
टीईटी के विरोध में 13 को फिर हुंकार भरेंगे शिक्षक, जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस, दर्ज कराएंगे विरोध, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले दो दर्जन संगठन लामबंद
6 अप्रैल 2026
लखनऊ। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक फिर हुंकार भरेंगे। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले करीब दो दर्जन संगठन सड़क पर उतरेंगे। संगठन 13 अप्रैल को प्रदेश भर में - मशाल जुलूस निकालेंगे।
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि मशाल जुलूस निकालने के लिए हर - जिले में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। गाजियाबाद, एटा, - लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, प्रयागराज में तैयारियां जोरशोर से की जा रही हैं। जुलूस के लिए हर न्याय पंचायत पर एक सह प्रभारी, ब्लॉक स्तर प्रभारी व जिला स्तर पर एक जिला समन्वयक की नियुक्ति की गई है।
शिक्षक इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के प्रति गंभीर नहीं है। इसी वजह से 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस के साथ शिक्षक सड़क पर उतरेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता के आदेश से प्रदेश के 1 लाख 86 हजार शिक्षकों सहित देश के लगभग 18 लाख शिक्षक काफी आहत हैं। केंद्र सरकार इन्हें जल्द राहत दे। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद आर्य, एससीएसटी बेसिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश विद्रोही ने कहा जब तक सेवारत शिक्षकों पर से अव्यावहारिक टेट अनिवार्यता का नियम नहीं हटेगा शिक्षक पूरे जोर शोर से लगातार आंदोलन करता रहेगा। बता दें, टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर शनिवार को देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में टीईटी के विरोध में रैली की थी।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी
23 संगठनों का महासंघ एकजुट,
लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे पर देशभर के शिक्षक अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। कई शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया है। शिक्षक की पाती अभियान के बाद अब 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने बताया कि 23 शिक्षक संगठनों से बना यह महासंघ ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चला रहा है। इसके साथ ही कानूनी लड़ाई को भी पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर दिल्ली में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई है, जिसमें आगामी सुनवाई की रणनीति तय की गई।
दावा किया कि प्रदेश के करीब 1.86 लाख और देशभर के लगभग 18 लाख शिक्षकों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। वहीं, महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो अप्रैल के बाद कभी भी हो सकती है, जिसे लेकर वकीलों से विस्तृत चर्चा की गई है।
प्रयागराज : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारियो को सौपकर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।
महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा है कि आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम-2009 लागू होने से पहले जिन महिला/पुरुष शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, उन्हें 20 से 25 वर्ष की सेवा के बाद टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना उचित नहीं है। अधिकांश ऐसे शिक्षकों की आयु 50 वर्ष के आसपास है और अब उन पर पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां अधिक हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों की उम्र के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा है कि इस अभियान को कई शिक्षक संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी संघ, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, यूटा, एससी-एसटी शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, उर्दू शिक्षक कर्मचारी संघ, महिला मोर्चा तथा विशेष शिक्षक एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल हैं। सभी संगठन मिलकर मशाल जुलूस निकाल कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज करेंगे।
यूपी के 2441 माध्यमिक विद्यालयों में मिलेगी वाई-फाई की सुविधा, स्मार्ट क्लास व ऑनलाइन पठन-पाठन को मिलेगा बढ़ावा
यूपी के 2441 माध्यमिक विद्यालयों में मिलेगी वाई-फाई की सुविधा, स्मार्ट क्लास व ऑनलाइन पठन-पाठन को मिलेगा बढ़ावा
छात्रों के साथ विद्यालय के कामकाज में होगा उपयोगी
लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की जा रही है। इसके तहत छात्रों को नए सत्र 2026-27 में निःशुल्क वाई-फाई की सुविधा मिलेगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग कंपोजिट ग्रांट से प्रदेश के 2441 विद्यालयों में वाई-फाई लगवाएगा। जो छात्रों के साथ-साथ विद्यालय के कामकाज में भी उपयोगी होगी।
हाल के वर्षों में प्रदेश के राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में पठन-पाठन से जुड़े संसाधन बेहतर करने के लिए कवायद की जा रही है। इसी क्रम में विद्यालयों में वाई-फाई लगवाया जाएगा। यह छात्रों के साथ-साथ विद्यालयों में बनी स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, प्रधानाचार्य को मिले टैबलेट आदि के संचालन में भी उपयोगी होगा।
इससे ऑनलाइन पठन-पाठन को विद्यालयों में बढ़ावा दिया जा सकेगा। विद्यालयों में वाई-फाई की सुविधा का विस्तार होने से छात्रों को न केवल अपनी पढ़ाई के लिए इंटरनेट का प्रयोग करने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे विभिन्न शैक्षिक संसाधनों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे छात्र ऑनलाइन ट्यूटोरियल, ई-बुक्स और अन्य डिजिटल शैक्षिक सामग्री का लाभ उठा सकेंगे।
गणित-विज्ञान जैसे विषयों को विजुअल समझाया जा सकेगा। शिक्षक प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड के जरिए लाइव कंटेंट दिखा सकते हैं। वाई-फाई की सुविधा पढ़ाई को रोचक भी बनाने में मददगार होगी। छात्रों को किसी भी चीज में शोध करने में आसानी होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। क्योंकि शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में अभी भी संसाधनों की कमी है।
स्मार्ट क्लास व आईसीटी लैब का बेहतर उपयोग
माध्यमिक विद्यालयों में पहले से बनी स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब भी इस सुविधा के मिलने से पूरी क्षमता से काम करेंगे। वाई-फाई की सुविधा इन अत्याधुनिक शिक्षण उपकरणों के प्रभावी प्रयोग को सुनिश्चित करेगी। शिक्षक इन संसाधनों से इंटरैक्टिव पढ़ाई करा सकेंगे, जिससे छात्रों की समझ और जुड़ाव बढ़ेगा। वहीं प्रधानाचार्यों को दिए गए टैबलेट का संचालन भी वाई-फाई से अधिक सुचारू रूप से हो सकेगा, जिससे विद्यालय प्रबंधन में दक्षता आएगी।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ और यूटा ने सुप्रीम कोर्ट में की थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने सभी सेवारत शिक्षकों के लिए बताया है अनिवार्य
आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षक कर रहे हैं इसका विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने सभी सेवारत शिक्षकों के लिए बताया है अनिवार्य
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ और यूटा ने सुप्रीम कोर्ट में की थी याचिका
उन शिक्षकों को मिली है छूट जिनकी बची है पांच साल की नौकरी
प्रयागराज। कक्षा एक से आठ तक के सभी सरकारी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता से राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने दस अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल टीचर (पूर्व माध्यमिक) एसोसिएशन की रिट याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में इस कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को ही चुनौती दी गई है, इसलिए इसमें कोई दम नहीं है।
इससे पहले 17 नवंबर 2025 को भी सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदूरकर की खंडपीठ ने यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) उत्तर प्रदेश की रिट याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने साफ कहा था कि याचिका की सारी प्रार्थनाएं एक सितंबर 2025 के अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के फैसले से पहले ही तय हो चुकी हैं। एक सितंबर को शीर्ष अदालत ने आरटीई एक्ट के तहत गैर-माइनॉरिटी स्कूलों में टीईटी अनिवार्य माना था।
सेवारत पुराने शिक्षकों को भी टीईटी पास करना जरूरी है। जिन शिक्षकों के पास पांच साल से कम की सेवा बाकी है, उन्हें बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक काम करने की छूट दी थी लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। जिनके पास पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास करना होगा, वरना अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी।
दोनों फैसलों का मतलब
सुप्रीम कोर्ट ने अब दो बार (17 नवंबर 2025 और दस अप्रैल 2026) यूपी के शिक्षक संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों मामलों में कोर्ट का रुख बिल्कुल साफ है कि आरटीई कानून और टीईटी की अनिवार्यता पर कोई ढील नहीं मिलेगी। प्रयागराज समेत पूरे उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों पर अब टीईटी पास करने का दबाव बढ़ गया है। जिन शिक्षकों की पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास न करने पर नौकरी गंवानी पड़ सकती है।
जन्मतिथि की विसंगति मात्र सेवा समाप्ति का आधार नहीं– हाईकोर्ट
जन्मतिथि की विसंगति मात्र सेवा समाप्ति का आधार नहीं– हाईकोर्ट
मऊ निवासी याची ने आदेश को को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती, शिक्षक का निलंबन रद्द
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में दर्ज जन्मतिथि की भिन्नता को धोखाधड़ी या जानबूझकर की गई गलतबयानी नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने मऊ के सहायक अध्यापक विजय यादव की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि अभ्यर्थी ने गलत जन्मतिथि का सहारा लेकर किसी प्रकार का अनुचित लाभ प्राप्त किया है, तब तक ऐसी विसंगति को सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने दिया है।
याची की 2014 में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की गई थी। सेवा के कई साल बाद एक शिकायत पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने जांच शुरू की, जिसमें यह पाया गया कि उनकी आठवीं क्लास के रिकॉर्ड और हाईस्कूल गजट में जन्मतिथि दो जुलाई 1984 दर्ज थी। वहीं, नियुक्ति के लिए प्रस्तुत 'पूर्व मध्यमा' प्रमाणपत्र में यह तिथि सात जुलाई 1987 अंकित थी। इसी विसंगति को तथ्यों को छिपाना और धोखाधड़ी मानते हुए विभाग ने 27 जून 2019 को याची को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश भी दिया था। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अधिवक्ता ने दलील दी कि याची ने कभी भी हाईस्कूल के उस प्रमाणपत्र का उपयोग नहीं किया, जिसमें 1984 की जन्मतिथि दर्ज थी। स्पष्ट किया कि याची की पूरी शैक्षणिक यात्रा और नियुक्ति पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा और शास्त्री की डिग्री पर आधारित थी, जो पूर्णतः वैध है।
दस्तावेज फर्जी मिलते हैं तो कार्रवाई को स्वतंत्र
कोर्ट ने पाया कि विभाग ने याची के किसी भी प्रमाणपत्र को फर्जी या जाली नहीं पाया गया है। यदि हाईस्कूल वाली जन्मतिथि (1984) को भी सही मान लिया जाए तो भी वह निर्धारित आयु व पात्रता के दायरे में ही है। ऐसी स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि याची ने किसी गलत मंशा से इस जानकारी को छिपाया था। कोर्ट ने याची को तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही विभाग को छूट भी दी है कि यदि भविष्य में याची के प्रस्तुत मूल दस्तावेज कभी फर्जी या जाली पाए जाते हैं तो अधिकारी कानून के अनुसार पुनः कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
Monday, April 13, 2026
रिक्त पद भरकर कस्तूरबा विद्यालयों में सुविधाएं भी बढ़ाईं, हॉस्टल, डॉरमेटरी, कंप्यूटर लैब, टॉयलेट ब्लॉक जैसी सुविधाओं का हो रहा विस्तार
रिक्त पद भरकर कस्तूरबा विद्यालयों में सुविधाएं भी बढ़ाईं, हॉस्टल, डॉरमेटरी, कंप्यूटर लैब, टॉयलेट ब्लॉक जैसी सुविधाओं का हो रहा विस्तार
लखनऊ। प्रदेश के 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में छात्राओं को और बेहतर सुविधा देने की कवायद नए सत्र से पहले पूरी हो रही है। एक ओर जहां खाली पदों को तेजी से भरा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आधारभूत ढांचे और छात्राओं की दैनिक सुविधाओं के विस्तार में भी प्रगति आई है।
केजीबीवी में एकेडमिक हॉस्टल, अतिरिक्त डॉरमेट्री, कंप्यूटर लैब और टॉयलेट ब्लॉक जैसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। प्रयागराज में 43, बलिया में 42, उन्नाव में 39 और एटा में 35 रिक्तियों को चिह्नित कर इनको भरने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जबकि श्रावस्ती, रायबरेली, आजमगढ़, ललितपुर आदि में कोई भी पद खाली नहीं है।
दूसरी तरफ छात्राओं के दैनिक जीवन को सुगम बनाने के लिए रोटी मेकिंग मशीन, सोलर गीजर, जेनसेट व वाशिंग मशीन जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही फोक म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट, ओपन जिम और एक केजीबीवी-एक खेल जैसी पहल भी छात्राओं के समग्र विकास में सहयोगी बन रही हैं।
Sunday, April 12, 2026
बेसिक शिक्षकों को प्रतिकर अवकाश दिए जाने की मांग
बेसिक शिक्षकों को प्रतिकर अवकाश दिए जाने की मांग
लखनऊ। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने गर्मी की छुट्टियों में जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने पर उन्हें प्रतिकर अवकाश देने की मांग उठाई है। संगठन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है।
प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी एवं प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि गर्मी की छुट्टियां शिक्षकों को उनके आवश्यक एवं व्यक्तिगत कार्यों के लिए प्रदान की जाती हैं, इसलिए यदि इस अवधि में उनकी ड्यूटी शासकीय कार्यों में लगाई जाती है तो उनका अवकाश प्रभावित होता है। ऐसे में जिन शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना अथवा अन्य सरकारी कार्यों में लगाई जाए, उन्हें बाद में प्रतिकर अवकाश दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों का मनोबल बना रहेगा और वे पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ शासकीय कार्यों का निर्वहन करेंगे। संगठन ने यह भी मांग की है कि गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों के अंतरजनपदीय एवं जिले के भीतर तबादलों की प्रक्रिया भी आयोजित की जाए।
Saturday, April 11, 2026
प्रदेश के महाविद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश, 15 किमी दायरे में संपर्क अभियान चलाने का आदेश
प्रदेश के महाविद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश, 15 किमी दायरे में संपर्क अभियान चलाने का आदेश
प्रयागराज, 10 अप्रैल 2026।
उत्तर प्रदेश के शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण पत्र के माध्यम से प्रदेश के सभी राजकीय एवं सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों को छात्र संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी निर्देश के अनुसार, आगामी 28 एवं 29 अप्रैल 2026 को इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित होने की संभावना को देखते हुए महाविद्यालयों को पहले से सक्रिय होने को कहा गया है। इसके तहत सभी महाविद्यालय अपने-अपने क्षेत्र के 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित इंटर कॉलेजों से संपर्क स्थापित करेंगे और प्रवेश प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए “प्रवेश उत्सव” कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
पत्र में यह भी निर्देशित किया गया है कि छात्र-छात्राओं को आकर्षित करने के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं, जिनकी फोटोग्राफी, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ प्रमाण भी संकलित किए जाएं। इन गतिविधियों की रिपोर्ट संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि महाविद्यालयों में छात्र संख्या में वृद्धि करना अनिवार्य है। यदि किसी महाविद्यालय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती है, तो संबंधित प्राचार्य, शिक्षक एवं कार्मिकों के कार्य मूल्यांकन में इस तथ्य को शामिल किया जाएगा और शासन को अवगत कराया जाएगा।
इस आदेश की प्रतिलिपि सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को भेजते हुए निर्देश दिया गया है कि वे अभियान की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें और प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करें।
शिक्षा विभाग के इस कदम को उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
Friday, April 10, 2026
पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश
पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश
2005 तक चयनित ऐसे शिक्षामित्रों का मामला जो बाद में अध्यापक बन गए
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अनूप कुमार सिंह व अन्य की याचिका सुनवाई करते हुए दिया है।
सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से दलील दी गई कि सरकार के 28 जून 2024 एवं 30 जुलाई 2025 के शासनादेशों के तहत पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र दिया गया है और याचियों का दावा संबंधित अधिकारियों के पास लंबित है लेकिन उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकारी वकील ने याचियों की मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट ने तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को याचियों के दावे पर नियमानुसार विचार कर उन्हें सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करते हुए दो माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि वर्ष 2005 तक चयनित ऐसे शिक्षा मित्र जो बाद की सीधी भर्तियों में अध्यापक बन गए हैं, उन्होंने पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र भरा है जिस पर शासन को निर्णय लेना है।
बेसिक शिक्षकों ने की आकांक्षी जनपद से वरिष्ठता के आधार पर स्थानांतरण की मांग
बेसिक शिक्षकों ने की आकांक्षी जनपद से वरिष्ठता के आधार पर स्थानांतरण की मांग
बहराइच। पिछले 10 से 15 वर्षों से बहराइच जनपद में कार्यरत शिक्षकों ने आज दिनांक 09 04 2026 को माननीय मुख्यमंत्री महोदय उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ को जिलाधिकारी महोदय बहराइच के माध्यम से बेसिक शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण में भारांक नीति को समाप्त करके बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 के नियम-22 के अनुसार वरिष्ठता आधारित अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण करने के सम्बन्ध में ज्ञापन कार्यक्रम दिया।
ज्ञापन के माध्यम से बहराइच के शिक्षकों ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय से विनम्र निवेदन किया कि विगत 10 से 15 वर्षों से अधिक समय से आकांक्षी जनपदों सहित अन्य जनपदों से भारांक नीति के कारण सेवा में वरिष्ठ शिक्षकों का स्थानान्तरण गृह जनपद में नहीं हो पा रहा है।जबकि कनिष्ठ शिक्षक लाभान्वित हो जा रहे हैं।
भारांक नीति से वरिष्ठ शिक्षको के संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार अनुच्छेद 14, 15, और 16 का हनन हो रहा है।शिक्षक लक्ष्मीकांत दुबे ने बताया कि यदि भारांक नीति समाप्त न की गई तो पीड़ित शिक्षक पूरे सेवा काल में स्थानानारण से वचित रहेंगे।विजय पाण्डेय ने बताया कि आकांक्षी जनपदों से 2018 और 2020 में अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध था और शासन द्वारा जारी ट्रासफर नीति में यह कहा गया था कि दो वर्ष के अंदर विकल्प लेकर ट्रांसफर कर दिया जाएगा लेकिन अभी भी सभी ट्रांसफर से वंचित है।
दीपक यादव ने बताया कि आकांक्षी जनपदों में कार्यरत शिक्षकों का परिवार ट्रांसफर न होने से अत्याधिक पीड़ा से गुजर रहा है।राजकुमार सिंह ने बताया कि माता-पिता उम्र के इस पड़ाव पर है कि पारिवारिक जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही है जिसरो अत्यधिक तनाव पूर्ण स्थिति होती जा रही है।
आकांक्षी जनपद बहराइच के शिक्षकों ने कहा कि अंतर्जनपदीय स्थानांतरण वरिष्ठता के क्रम में प्रत्येक वर्ष किए जाए जो कि 2023 से नहीं किए गए है, उक्त के सम्बंध में शिक्षकों ने अवगत कराया कि पूर्व में हुए अंतर्जनपदीय स्थानांतरण में जिन शिक्षकों के पास भारांक नहीं रहे है। उनमें से किसी भी शिक्षक का स्थानांतरण नहीं हुआ जबकि उनकी सेवा का अंतर जनपदीय स्थानांतरण का लाभ प्राप्त कर चुके शिक्षकों से अधिक है। उसका कारण भारांक का न होना है।
शिक्षकों ने सरकार से निवेदन किया कि इसी वर्ष मई माह में आवेदन लेकर अंतर्जनपदीय स्थानांतरण किए जाए जिससे कि हम अपने गृह जनपद या उसके नजदीक के जनपद में पहुँच कर पूर्ण मनोयोग से कार्य कर सके एवं परिवार का सहयोग कर सके।
इस ज्ञापन कार्यक्रम में लक्ष्मीकांत दुबे, आलोक सिंह, विजय पाण्डेय, सुनील परिहार, प्रवीण सिंह, शैलेन्द्र मौर्य, पवन दुबे, नितिन शर्मा, दीपक यादव, आशीष मिश्रा, के साथ सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रही।
Thursday, April 9, 2026
डाउनलोड करें – माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जनपदवार सूची
यूपी बोर्ड ने 29,208 मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची वेबसाइट पर डाली
डाउनलोड करें – माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जनपदवार सूची
District | Download |
AGRA | |
FIROZABAD | |
MAINPURI | |
ETAH | |
MATHURA | |
ALIGARH | |
HATHRAS | |
KASGANJ | |
BULANDSHAHR | |
GHAZIABAD | |
GAUTAM BUDH NAGAR | |
MEERUT | |
BAGPAT | |
HAPUR | |
MUZAFFAR NAGAR | |
SHAHARANPUR | |
SHAMLI | |
MORADABAD | |
AMROHA | |
BIJNOR | |
RAMPUR | |
SAMBHAL | |
BAREILLY | |
BUDAUN | |
SHAHJAHANPUR | |
PILIBHIT | |
LAKHIMPUR KHIRI | |
SITAPUR | |
HARDOI | |
LUCKNOW | |
UNNAO | |
RAE BARAILI | |
KANPUR NAGAR | |
KANPUR DEHAT | |
FARRUKHABAD | |
ETAWAH | |
KANNAUJ | |
AURIYA | |
JALAUN | |
JHANSI | |
LALITPUR | |
HAMIRPUR | |
MAHOBA | |
BANDA | |
CHITRAKOOT | |
PRATAPGARH | |
PRAYAGRAJ | |
FATEHPUR | |
KAUSHAMBI | |
SULTANPUR | |
AYODHYA | |
BARABANKI | |
AMBEDKAR NAGAR | |
AMETHI | |
BAHRAICH | |
SHRAWASTI | |
GONDA | |
BALRAMPUR | |
BASTI | |
SANT KABIR NAGAR | |
SIDDHARTA NAGAR | |
GORAKHPUR | |
MAHARAJGANJ | |
DEORIA | |
KUSHINAGAR | |
AZAMGARH | |
MAU | |
BALLIA | |
JAUNPUR | |
GHAZIPUR | |
VARANASI | |
CHANDAULI | |
BHADOHI | |
MIRZAPUR | |
SONBHADRA |
बड़ी संख्या में स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे
प्रयागराज। प्रदेश में बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने बुधवार को करीब 30 हजार मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इस पहल से जहां अभिभावकों को सही स्कूल चुनने में सुविधा मिलेगी, वहीं विभागीय अधिकारियों के लिए भी अवैध रूप से संचालित संस्थानों पर कार्रवाई करना आसान होगा।
परिषद के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9-10) के 10,295 और इंटरमीडिएट स्तर (कक्षा 9-12) के 18,913 विद्यालय मान्यता प्राप्त हैं। इस प्रकार कुल 29,208 स्कूल आधिकारिक रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कई ऐसे विद्यालय हैं, जिन्हें केवल हाईस्कूल तक की मान्यता मिली है, लेकिन वे इंटरमीडिएट तक कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ स्कूलों में सिर्फ विज्ञान वर्ग की मान्यता होने के बावजूद कला वर्ग की पढ़ाई भी कराई जा रही है। हाल ही में 262 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से 107 स्कूलों को मान्यता देने की संस्तुति शासन को भेजी गई है, जबकि 36 मामलों को पुनर्विचार के लिए अग्रसारित किया गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश भर में एक हजार से अधिक स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। ऐसे ही मामलों में हाल में देवरिया जिले में दो स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिन्होंने बिना मान्यता के बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरवाए थे।
नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत से पहले मान्यता प्राप्त सभी विद्यालयों की सूची पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। अभिभावकों से अपील है कि नामांकन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित विद्यालय को किस स्तर तक की मान्यता प्राप्त है। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा। - भगवती सिंह, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद
Wednesday, April 8, 2026
अमान्य विद्यालयों का संचालन बंद कराएगा यूपी बोर्ड, 18 अप्रैल तक अभियान चलाकर निरीक्षण के निर्देश
अमान्य विद्यालयों का संचालन बंद कराएगा यूपी बोर्ड, 18 अप्रैल तक अभियान चलाकर निरीक्षण के निर्देश
निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की भी होगी जांच
वेबसाइट पर अपलोड संबद्ध 29,208 स्कूलों की सूची से होगी अमान्य की पहचान
प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी - बोर्ड) ने परिषद से संबद्ध 29,208 - विद्यालयों की सूची upmsp.edu.in पर अपलोड कर अमान्य विद्यालयों की पहचान सुगम कर दी है। इसके साथ ही बोर्ड के - सचिव भगवती सिंह ने सभी - डीआइओएस, बीएसए व बीईओ को - पत्र लिखकर अमान्य विद्यालयों के विरुद्ध 18 अप्रैल तक सघन - अभियान चलाकर उनके विरुद्ध - कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ - ही कहा है कि जांच के दौरान निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की भी जांच कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करें। इस कार्रवाई की रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
यूपी बोर्ड से संबद्ध प्रदेश भर में संचालित विद्यालयों में 10,295 हाईस्कूल स्तर (कक्षा नौ-10) के हैं, जबकि 18,913 विद्यालय इंटरमीडिएट स्तर तक (कक्षा नौ से = 12) के हैं। इसके अलावा संचालित अन्य विद्यालय अमान्य माने जाएंगे।
बोर्ड सचिव ने कहा है कि परिषद की विनियमावली तथा शिक्षा का - अधिकार अधिनियम के तहत बिना मान्यता प्राप्त किए विद्यालय की स्थापना या संचालन पूर्णतया प्रतिबंधित है। संचालन पर इनके विरुद्ध भारी अर्थदंड व विधिक कार्यवाही का प्रविधान है। उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियम अधिनियम 2002 के अनुसार मान्यता प्राप्त विद्यालय में कार्यरत शिक्षक का निजी कोचिंग संस्थान में सेवाएं देना वर्जित है।
हाई कोर्ट ने भी एक याचिका पर आदेश दिए हैं कि प्रदेश भर में संचालित अमान्य संस्थानों को चिह्नित किया जाए। मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए शासन के नौ जून 2025 के निर्देश पर सभी जिलों में डीआइओएस की अध्यक्षता में समिति गठित है। समिति के माध्यम से अभियान चलाकर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए बोर्ड ने एक प्रारूप भी जारी किया है। इसमें जनपदवार संचालित अमान्य विद्यालयों की संख्या, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई, निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की संख्या व उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण 30 अप्रैल तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
परिषदीय विद्यालयों का समय बदलने की जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की मांग, माध्यमिक विद्यालयों की तुलना में अधिक शिक्षण अवधि पर जताई चिंता
परिषदीय विद्यालयों का समय बदलने की जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की मांग, माध्यमिक विद्यालयों की तुलना में अधिक शिक्षण अवधि पर जताई चिंता
लखनऊ/हरदोई, 7 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के समय में बदलाव की मांग को लेकर शासन को ज्ञापन सौंपा है। संघ का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, ऐसे में विद्यालयों का समय तत्काल परिवर्तित किया जाना आवश्यक है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों का समय प्रातः 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित है, जबकि माध्यमिक विद्यालयों का समय सुबह 7:50 से 12:50 तक है। इस असमानता के कारण छोटे बच्चों को अधिक गर्मी में पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे उनके बीमार होने की संभावना बढ़ रही है।
शिक्षक संघ ने विशेष रूप से बुंदेलखंड और पूर्वांचल के जिलों—जैसे जालौन, महोबा, हमीरपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, बांदा और झांसी—का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। इसके अलावा, कई गांवों में बच्चों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है, जिससे गर्मी में उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
संघ ने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षण कार्य का समय लगभग 5 घंटे निर्धारित है, इसलिए विद्यालय समय को सुबह 7:30 से दोपहर 12:30 तक किया जा सकता है। इससे बच्चों को तेज धूप और लू से राहत मिलेगी तथा उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।
ज्ञापन में शासन से मांग की गई है कि बच्चों के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए परिषदीय विद्यालयों का समय शीघ्र ही संशोधित किया जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों से इस मुद्दे पर त्वरित निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।
शिक्षक संघ ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मांग पर संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द ही आवश्यक कदम उठाएगी, जिससे लाखों विद्यार्थियों को राहत मिल सकेगी।
शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने पर कैबिनेट की मुहर, अप्रैल माह से बढ़ा मानदेय एक मई को पहुंचेगा खातों में
शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने पर कैबिनेट की मुहर, अप्रैल माह से बढ़ा मानदेय एक मई को पहुंचेगा खातों में
1.43 लाख शिक्षामित्रों और 24 हजार अनुदेशकों को मिली राहत
सरकार पर आएगा 1475 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार
8 अप्रैल 2026
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को अब 18 हजार रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। मानदेय में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुहर लगा दी गई। इस निर्णय को एक अप्रैल से लागू किया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय एक मई को शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा।
अभी तक शिक्षामित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को नौ हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा था। इस तरह दोनों के मानदेय में 8,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि करने का निर्णय हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले वर्ष पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर और इस वर्ष 20 फरवरी को विधान सभा में मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी।
कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में दिया जाता रहा है। मानदेय बढ़ने के बाद इस पर 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय आएगा, जिसे प्रदेश सरकार वहन करेगी। इसके अलावा 13,597 शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिनका मानदेय पूरी तरह राज्य सरकार देती है। इनके लिए 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार भी राज्य सरकार उठाएगी।
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव पर आज लगेगी कैबिनेट की मुहर
07 अप्रैल 2026
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में सुबह 10:30 बजे कैबिनेट की बैठक होगी। इसमें करीब एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों को स्वीकृति मिल सकती है।
सबसे अहम प्रस्ताव बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत 1.43 लाख शिक्षामित्रों और 25 हजार अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने से संबंधित है। शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया जाएगा और अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार किया जायेगा। वर्ष 2017 के बाद अब इनका मानदेय बढ़ने जा रहा है। इन्हें एक अप्रैल से बढ़ा हुआ मानदेय दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान की थी।
05 अप्रैल 2026
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय इसी महीने से दिए जाने की घोषणा की। सीएम ने ये घोषणा वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय से स्कूल चलो अभियान के शुभारंभ के मौके पर की। उन्होंने कहा, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, रसोइयों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
1.68 लाख शिक्षामित्रों-अनुदेशकों का बढ़ेगा मानदेय
लखनऊः सरकार द्वारा बढ़ाए गए मानदेय का लाभ प्रदेश के 1.68 लाख से अधिक शिक्षामित्रों व अंशकालिक अनुदेशकों को मिलेगा। बढ़ाए गए मानदेय का भुगतान करने के लिए सरकार हर वर्ष 1480 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च करेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। दोनों को हर शैक्षिक सत्र में 11 माह के लिए मानदेय का भुगतान किया जाता है। प्रदेश में वर्तमान में 1,43,450 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। वर्तमान में उन्हें 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ने पर 1,262.36 करोड़ रुपये अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा। वहीं 24,781 अंशकालिक अनुदेशकों को अभी 9,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। उनके मानदेय की राशि बढ़ने पर 218.07 करोड़ रुपये 1,480 करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त खर्च करेगी सरकार सरक बढे मानदेय पर अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा।
Tuesday, April 7, 2026
अनधिकृत किताबों पर सख्ती, 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान, यूपी बोर्ड पुस्तक जागरुकता के लिए आयोजित करेगा शिविर
अधिकृत-सस्ती किताबों के लिए हर जिले में लगाएंगे पुस्तक मेला, सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिया निर्देश
15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से लगाएं शिविर
प्रयागराज। यूपी बोर्ड के 29 हजार से अधिक स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को अधिकृत और सस्ती किताबें उपलब्ध कराने के लिए हर जिले में पुस्तक जागरुकता और सुलभता शिविर (पुस्तक मेला) लगेगा। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों, उप शिक्षा निदेशकों और संयुक्त शिक्षा निदेशकों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। सचिव ने अभिभावकों को जागरूक करने और छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आगरा एवं सहारनपुर मंडलों की तरह प्रत्येक जिले के राजकीय एवं सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से पुस्तक मेला आयोजित कराने को कहा है।
अधिकृत मुद्रकों (पायनियर प्रिंटर्स आगरा, पीताम्बरा बुक्स झांसी एवं सिंघल एजेंसीज-लखनऊ) की सहभागिता से लगने वाले मेले के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी जिला स्तर के किसी शिक्षाधिकारी को देने और उसकी ग्रुप फोटो यूपी बोर्ड की वेबसाइट और व्हाट्सएप ग्रुप पर भी अनिवार्य रूप से भेजने को कहा है। एनसीईआरटी नई दिल्ली की 70 पाठ्यपुस्तकों एवं कक्षा नौ से 12 तक की हिन्दी, संस्कृत एवं उर्दू विषयों की चयनित 12 पाठ्यपुस्तकें छपवाई गई है।
स्कूलों में न चलने दें 149 से 361 प्रतिशत तक महंगी किताबेंः सचिव के अनुसार, पता चला है कि विद्यालयों में अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें अनुचित रूप से प्रचलित की रही हैं। कुछ संस्थाओं और पुस्तक विक्रेताओं ने साठगांठ करके निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए अनधिकृत निजी प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकें/गाइड बुक जो यूपी बोर्ड की किताबों से 149 प्रतिशत से 361 प्रतिशत तक महंगी हैं। लिहाजा 15 अप्रैल तक अभियान चला कर स्कूलों का निरीक्षण करें ताकि विद्यार्थियों एवं अभिभावकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। अनधिकृत पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करने वाले प्रधानाचार्य, प्रबंधक या शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए। ध्यान दें इस साल छपी पाठ्यपुस्तकों की असली नकली पहचान के लिए कवर पेज पर सात अंकों का अल्ट्रा वॉयलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग में सीरियल नंबर मुद्रित है।
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने स्कूलों में अनधिकृत किताबों और गाइड के प्रचलन पर सख्त रुख अपनाया है। परिषद के ने निर्देश पर प्रदेश भर के स्कूलों में 515 अप्रैल तक विशेष चेकिंग न अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान न किताबों की उपलब्धता, गुणवत्ता और निर्धारित प्रकाशकों की पुस्तकों । की बिक्री की जांच की जाएगी।
परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई स्कूल संचालक या प्रधानाचार्य छात्रों को अनधिकृत पुस्तकें या गाइड खरीदने छात्रों को अनधिकृत पुस्तकें या गाइड खरीदने के लिए बाध्य किया तो होगी कार्रवाई के लिए बाध्य करता है तो उसके खिलाफ इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के विनियम-18 के तहत कड़ी कार्रवाई करें।
शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 36 विषयों की एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त एवं स्ववित्त पोषित विद्यालयों में लागू किया गया है। कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू की चयनित 12 पुस्तकों को भी सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
सचिव ने अभिभावकों को जागरूक करने और छात्रों को आसानी से पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए 15 अप्रैल तक सभी जिलों में पुस्तक जागरूकता एवं सुलभता शिविर/पुस्तक मेला आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इन मेलों में अधिकृत मुद्रकों पायनियर प्रिंटर्स (आगरा), पीतांबरा बुक्स (झांसी) और सिंघल एजेंसीज (लखनऊ) की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
नकली किताब बेचने वालों पर होगी कार्रवाई
परिषद ने स्पष्ट किया है कि पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट उसके पास है। ऐसे में पायरेसी या डुप्लीकेसी कर नकली किताबें बेचने वाले अनधिकृत मुद्रकों और दुकानदारों के खिलाफ पुलिस, वाणिज्य कर, आयकर और प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनसीईआरटी की कॉपीराइट शर्तों के उल्लंघन पर कॉपीराइट एक्ट के तहत भी कार्रवाई होगी।
ऐसे करें असली किताब की पहचान
इस वर्ष पाठ्य पुस्तकों के आवरण पर सात अंकों का अल्ट्रा वॉयलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग का सीरियल नंबर मुद्रित किया गया है। जिन पुस्तकों पर यह नंबर नहीं होगा, उन्हें अनधिकृत माना जाएगा।
नियमित की तनख्वाह के हकदार कार्यवाहक प्रधानाचार्यः हाईकोर्ट, अनुदानित संस्थानों के कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को कोर्ट ने दी बड़ी राहत
नियमित की तनख्वाह के हकदार कार्यवाहक प्रधानाचार्यः हाईकोर्ट, अनुदानित संस्थानों के कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को कोर्ट ने दी बड़ी राहत
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अनुदानित संस्थानों में कार्यरत कार्यवाहक प्रधानाचार्य बिना किसी अतिरिक्त राहत, नियमित प्रधानाचार्य को मिलने वाले वेतन के हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति तक उन्हें कार्य करने का अधिकार है लेकिन नियमित नियुक्ति के आते ही पद छोड़ना होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने पांच विशेष अपीलों को स्वीकार करते हुए दिया है। तीन महीने में पद के वेतन का भुगतान का आदेश देते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि अपीलार्थी तब तक पद पर बने रहेंगे, जब तक नियमित नियुक्ति नहीं होती। कोर्ट ने धनेश्वर सिंह चौहान बनाम डीआईओएस, नर्मदेश्वर मिश्र बनाम डीआईओएस, सालोमन मोरार झा बनाम डीआईओएस देवरिया के निर्णयों का देते हुए कि कार्यवाहक प्रधानाचायों को नियमित प्रधानाचार्य के समान वेतन मिलना चाहिए विशेषकर तब, जब पद 30 दिन से अधिक समय तक खाली हो।
अपीलार्थियों ने एकल पीठ के निर्णयको चुनौती दी थी। खंडपीठ ने संदर्भ के लिए वीरेश चंद्र मिश्र व दो अन्य का मामला लिया। वीरेश चंद्र मिश्र सेवा चयन बोर्ड द्वारा रसायन विज्ञान के व्याख्यातानियुक्त किएगएथे। उन्हेंउसी वर्ष स्वतंत्र भारत अंतर महाविद्यालय सुरजावली वाया खुर्जा बुलंदशहर आवंटित किया गया। यहां तत्कालीन प्रधानाचार्य अनिल कुमार ने त्यागपत्र देने के साथ ही याची को कार्यभार सौंप दिया, जो संस्थान में सबसे वरिष्ठ व्याख्याता थे। उन्होंने प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया लेकिन उन्हें प्रधानाचार्य पद के अनुसार वेतन नहीं दिया गया।
20 दिनों में सेवा सुरक्षा बहाल न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे माध्यमिक शिक्षक
20 दिनों में सेवा सुरक्षा बहाल न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे माध्यमिक शिक्षक
लखनऊ। राजधानी के ईको गार्डन धरना स्थल पर सोमवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने शक्ति प्रदर्शन किया। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की बहाली पर सरकार को अल्टीमेटम दिया। 20 दिन के अंदर सेवा सुरक्षा बहाली न होने पर शिक्षक सड़क पर उतरेंगे और कलमबंद हड़ताल करेंगे। माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के आह्वाहन पर प्रदेशभर के शिक्षक ईको गार्डन धरना स्थल पर सुबह से एकत्रित होने लगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री आवास से शिक्षक प्रतिनिधियों का बुलावा आया।
इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारियों ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि 20 से 25 दिन के अंदर सेवा सुरक्षा की धारा 21,18 और 12 को बहाल करते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 में शामिल किया जाएगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा ने बताया कि एडेड माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक शिक्षकों का उत्पीड़न करते हैं। यह बंद होना चाहिए। यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को 25 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। इनमें एडेड माध्यमिक विद्यालयों की राजकीयकरण की मांग की गई है।
सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर माध्यमिक शिक्षकों की रैली आज, लखनऊ के ईको गार्डन में जुटेंगे हजारों शिक्षक
06 अप्रैल 2026
लखनऊः अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक सेवा सुरक्षा और स्कूलों के राजकीयकरण की मांग को लेकर सोमवार को अपनी ताकत दिखाएंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के बैनर तले लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित होने वाली राज्यस्तरीय रैली में वे अपनी मांगों को लेकर मुखर होंगे।
संघ के नेताओं ने प्रदेश भर के शिक्षकों से अपील की है कि वे यहां पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाएं। प्रदेश में इस समय 4512 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें करीब 67 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए। संघ का आरोप है कि सेवा सुरक्षा खत्म होने के कारण प्रबंधकों का दबाव बढ़ गया है।
संगठन के नेताओं का कहना है कि इसी के चलते प्रदेश में अब तक करीब 180 शिक्षकों को निलंबित और 120 शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। उनकी यह भी मांग है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम में सेवा सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट प्रविधान शामिल किए जाएं, ताकि भविष्य में शिक्षकों के साथ मनमानी न हो सके।
Sunday, April 5, 2026
शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी तो नियुक्ति शुरू से शून्यः हाईकोर्ट
शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी तो नियुक्ति शुरू से शून्यः हाईकोर्ट
मेरठ की शिक्षिका ने नियुक्ति को अवैध घोषित करने और वेतन रोकने के खिलाफ दायर की थी याचिका
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने जालसाजी या धोखाधड़ी से सार्वजनिक रोजगार प्राप्त किया है तो दशकों तक की उसकी सेवा भी नियुक्ति को वैधता प्रदान नहीं सकती। धोखाधड़ी और न्याय कभी एक साथ नहीं रह सकते और कर जालसाजी पर टिकी कोई भी नींव कानून की नजर में शुरुआत से ही शून्य मानी जाती है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने मेरठ की शिक्षिका वीणा मेनन की याचिका खारिज करते हुए दिया है।
याची की नियुक्ति वर्ष 1989 में मेरठ के एक स्कूल में सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी। विवाद तब शुरू हुआ जब मानव संपदा पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया के दौरान याची ने वर्ष 1984 की अपनी हाईस्कूल की मूल मार्कशीट और प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदन किया, जो लंबे समय से फर्जी टीसी के आधार पर बोर्ड ने रोके गए रिजल्ट की श्रेणी में डाल दिया था।
जांच में सामने आया कि याची ने हाईस्कूल परीक्षा में बैठने के लिए कक्षा-आठ का जो स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) लगाया था, वह फर्जी था। इस आधार पर याची की नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए वेतन रोक दिया गया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची के अधिवक्ता ने रखा तर्क 35 वर्ष तक बिना विवाद सेवा दी
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि शिक्षिका ने 35 वर्षों तक बिना किसी विवाद के सेवा दी है। उसकी नियुक्ति के समय दस्तावेज के सत्यापन में अधिकारियों ने चूक की है। अधिकारियों की चूक के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति का आधार ही धोखाधड़ी हो तो सेवा की अवधि का कोई महत्व नहीं रह जाता।
कोर्ट ने कहा, अधिकारियों की कथित चूक का लाभ नहीं दिया जा सकता
अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों की ओर से सत्यापन में हुई कथित देरी या चूक का लाभ उठाकर किसी भी जालसाजी को जायज नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने इस मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से याची का वेतन रोकने और उसके दस्तावेजों को रद्द करने की कार्यवाही को पूरी तरह वैध करार दिया।
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