लंबी सेवा के बाद केवल तकनीकी आधार पर शिक्षकों की बर्खास्तगी अनुचित : हाईकोर्ट, 19 साल से कार्यरत शिक्षकों की सेवा बहाल
प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि लंबी सेवा के बाद शिक्षकों की सेवा सिर्फ तकनीकी आधार समाप्त करना अनुचित है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए कोर्ट ने निरस्त कर संबंधित शिक्षकों को सभी लाभ देने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने दिया है।
मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि गौतमबुद्ध नगर स्थित राम सिंह विश्व चैतन्य कन्या जूनियर हाई स्कूल में वर्ष 2006 में दो सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। बाद में विद्यालय को अनुदान सूची में शामिल किया गया, लेकिन इन शिक्षकों को लंबे समय तक वेतन नहीं मिला। वर्ष 2014 में शासनादेश के बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई और 2018 में क्षेत्रीय अनुमोदन समिति ने नियुक्तियों को सही मानते हुए वेतन देने का आदेश दिया।
वर्ष 2025 में अधिकारियों ने नियुक्ति को अवैध बताते हुए सेवा समाप्त करने का आदेश दे दिया। शिक्षकों ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति नियमों के अनुरूप थी। 2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन मिल चुका है। उन्हें बिना सुनवाई के सेवा से रोका गया जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
खंडपीठ ने पहले ही केवल वेतन विवाद तक सीमित जांच का निर्देश दिया था। राज्य सरकार का कहना था कि नियुक्ति विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता का उल्लेख नहीं था। वर्ष 2006 में बीएड योग्यता मान्य नहीं थी। इसलिए नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध थीं। पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति की वैधता पर दोबारा फैसला किया है। 2018 में नियुक्ति को सही मानकर आदेश दिया जा चुका था, इसलिए इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता।
शिक्षकों को बिना सुनवाई के सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। शिक्षक करीब 19 वर्षों से कार्यरत हैं, ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर सेवा समाप्त करना गलत है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को आसानी से रद नहीं किया जा सकता। यदि धोखाधड़ी नहीं है तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा जरूरी है। कोर्ट ने 26 अगस्त 2025, 30 अगस्त 2025, एक सितंबर 2025 और आठ सितंबर 2025 के सभी आदेश रद करते हुए शिक्षकों की सेवा जारी रखने और सभी वेतन व अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है।
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