प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में नए निर्देश जारी
लखनऊ। प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के संचालन के लिए प्रबंध समिति व आदर्श प्रशासन योजना समिति का गठन किया जाता है। किंतु आदर्श प्रशासन योजना में सदस्यों के मनोनयन में गड़बड़ी व मनमानी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग सख्त हुआ है। विभाग ने इसमें से विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य बनाने की व्यवस्था खत्म करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी आदेश में हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि आदर्श प्रशासन योजना को निरस्त कर दिया गया है। कुछ संस्थाओं में आदर्श प्रशासन योजना में विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।
इसलिए जिन संस्थाओं में प्रशासन योजना में विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था, वे साधारण सभा से प्रस्ताव प्राप्त कर इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त कराएं। इसका आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। जानकारी के अनुसार कुछ विद्यालयों में समिति के सदस्यों की ओर से आगे चलकर विद्यालयों के एसेट आदि पर अधिकार कर लिया गया है। इसकी शिकायत विभाग में हुई है।
वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रबंध समिति के चुनाव के लिए संस्था द्वारा पर्यवेक्षक की मांग करने पर डीआईओएस को सात दिन में पर्यवेक्षक नामित करना होगा। यदि डीआईओएस समय से चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति नहीं करते हैं तो प्रबंधतंत्र को निर्धारित समय में चुनाव कराने का अधिकार होगा। इस चुनाव को डीआईओएस द्वारा अमान्य नहीं किया जाएगा।
प्रबंध समिति का चुना होने के बाद हस्ताक्षर प्रमाणित करने के लिए डीआईओएस को 14 दिन के अंदर भेजा जाएगा। निर्विवाद रूप से कार्यरत प्रबंध समिति के चुनाव में पूर्व प्रबंधक चुने जाते हैं तो फिर से हस्ताक्षर प्रमाणित करने की जरूरत नहीं है। वहीं पदाधिकारी व समिति के सदस्यों का का कार्यकाल पांच साल का होगा। अगर आदर्श प्रशासन योजना निरस्त भी होती है तो प्रबंध समिति का कार्यकाल वही होगा जो संस्था की प्रशासन योजना में पहले से तय है।
प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में।
No comments:
Write comments