प्रदेश एवं केंद्र सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखे जाने के बावजूद क्षेत्र की प्राथमिक शिक्षा लड़खड़ा रही है। जुलाई माह अपने अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन अब तक बच्चों को ड्रेस तथा कॉपी-किताब का आवंटन तक नहीं किया जा सका है। साथ ही बच्चों की उपस्थिति पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जागरण की पड़ताल में हकीकत सामने आयी। सवाल उठता है कि जब बच्चों को किताब कॉपी नहीं मिल पा रही है तो कैसी पढ़ाई हो रही है? ऐसे में गरीब नौनिहालों को मुफ्त शिक्षा देने के नाम पर मजाक किया जा रहा है।यह हाल तब है जबकि बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद इसी जिले के हैं। इसके बावजूद व्यवस्था सुधरने के बजाय और बदहाल होती जा रही है।
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