जनपद के परिषदीय विद्यालयों में हेड मास्टर द्वारा एसएमएस से उनके, शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज कराए जाने के मामले में विभाग व शिक्षक संगठन एक बार फिर से आमने-सामने हैं। करीब तीन माह पहले जनपद में लागू की गई इस प्रणाली में मात्र सात फीसद विद्यालय ही उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इस प्रणाली को मानने से इंकार करने वाले शिक्षकों का कहना है कि इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू करने पर ही वे इसे अपनाएंगे।बीएसए व शिक्षक संगठनों की बैठक में सिर्फ एक को छोड़कर अन्य चारों ने एसएमएस से उपस्थिति दर्ज कराने की सहमति का पत्र दे दिया। प्रशासनिक दबाव, बाकी शिक्षक संगठनों के समर्थन जैसी इतनी कवायद के बाद भी बैठक के तीसरे दिन गुरुवार को मात्र 7 प्रतिशत अर्थात 124 विद्यालयों ने एसएमएस से हाजिरी लगाई, इसमें भी दो विद्यालयों के एसएमएस गलत थे। सबसे ज्यादा 53 विद्यालयों के एसएमएस महेवा ब्लॉक से, बढ़पुरा के 25, भरथना के 12, जसवंतनगर के 5, सैफई के 4 और चकरनगर के 3 विद्यालयों ने एसएमएस से हाजिरी लगाई। सैफई, नगर क्षेत्र व ताखा के किसी विद्यालय ने हाजिरी का एसएमएस नहीं भेजा।इतनी कम संख्या में एसएमएस आने के सवाल पर बीएसए जेपी राजपूत ने कहा कि नई प्रणाली को अपनाने में हो सकता है कुछ असहजता हो रही हो, लेकिन इस प्रणाली से जनपद की शैक्षिक गुणवत्ता में निश्चित ही उन्नयन होगा। इसलिए सभी को यह प्रणाली मानते हुए एसएमएस करना ही होगा। यह ध्यान दिया जाए कि शिक्षक विद्यालय पहुंचकर एसएमएस करें, अन्यथा उपस्थिति दर्ज नहीं होगी। इसके अलावा जो शिक्षक संबद्ध विद्यालय से एसएमएस करेंगे उनका मैसेज मान्य नहीं होगा। 1उन्होंने बताया कि फरुखाबाद में करीब 97 प्रतिशत, कन्नौज में करीब 90 प्रतिशत, कानपुर देहात में करीब 95 प्रतिशत, कानपुर नगर में करीब 47 प्रतिशत विद्यालय एसएमएस से हाजिरी लगा रहे हैं। वहीं प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि एसएमएस से हाजिरी लगाने का कोई शासनादेश है ही नहीं। यदि इस प्रकार का कोई शासनादेश है तो वह हमें दिखाया जाए, हम उसका पालन अवश्य करेंगे। कुछेक जिलों में किसी एनजीओ के प्रोजेक्ट को लागू कर शिक्षकों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
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