हर वर्ष बीस हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों की दशा नहीं सुधरने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपना माथा पीट रहे हैं। तो उन्हें एक बार ग्रामसभा मरदह स्थित प्राथमिक विद्यालय सोढ़रा जरुर आना चाहिए, सिर्फ यह जानने के लिए कि जो कार्य उनकी पूरी सरकार नहीं कर पाई उसे एक ग्रामप्रधान की पहल पर जागरूक युवाओं ने कैसे कर दिखाया है। जी हां..कुछ ऐसा ही है यह प्राथमिक विद्यालय, जिसे देखकर अच्छे-अच्छे पब्लिक स्कूल भी अपना मुंह छिपा लेंगे। यह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है और इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि अभिभावक अपने बच्चों को पब्लिक स्कूलों से निकालकर इस परिषदीय विद्यालय में प्रवेश दिला रहे हैं। सिर्फ महीने भर में इसकी छात्र संख्या बढ़कर चार गुनी हो गई है। इस समय यहां पर 395 बच्चे पंजीकृत हैं। ‘जागरण’ टीम ने पुराने स्वरूप से लेकर माडल विद्यालय बनने तक इस परिषदीय विद्यालय के सफर की पड़ताल की तो जागरूक युवाओं का दृढ़ संकल्प और सामुदायिक भावना उभर कर सामने आयी। लगता नहीं कि सरकारी स्कूल है..इस विद्यालय को देखकर नहीं लगता कि यह सरकारी स्कूल है। यहां सभी कमरों में मैट लगाया गया है। बच्चों के बैठने के लिए डेस्क बेंच भी हैं। बच्चों को गर्मी न हो इसके लिए पंखे और कूलर लगाए गए हैं। अच्छी पढ़ाई के लिए ब्लैक बोर्ड की जगह आधुनिक व्हाइट बोर्ड लगाए गए हैं। बिजली कटौती की स्थिति में विकल्प के रूप में इनवर्टर व सोलर सिस्टम का भी प्रबन्ध है। परिसर में कूड़ा एकत्र करने के लिए जगह-जगह कूड़ेदान लगाए गए हैं। परिसर को हराभरा रखने के लिए खूब पेड़-पौधे व फूल रोपे गए हैं। बच्चों को खेलने के लिए झूला व चकरी आदि भी परिसर में लगाया गया है। स्वच्छ पेयजल व शौचालय में पानी उपलब्ध कराने के लिए सबमर्सिबल लगाया गया है। प्रत्येक कमरे व शौचालय आदि की रंगाई-पोताई कर पूरे विद्यालय को आकर्षक रूप दिया गया है।
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