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Thursday, July 9, 2020

सीबीएसई 12वीं के छात्र पढ़ेंगे सरदार पटेल के नजरिए से राष्ट्रवाद का पाठ

सीबीएसई 12वीं के छात्र पढ़ेंगे सरदार पटेल के नजरिए से राष्ट्रवाद का पाठ


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 12वीं के छात्र अब सरदार वल्लभ भाई पटेल का राष्ट्रवाद और दीन दयाल उपाध्याय के भारतीय धर्म निरपेक्षता का पाठ पढ़ेंगे। दरअसल, पहली बार 12वीं के कोर्स करिकुलम में सरदार पटेल का नाम आया है। यह पहले कोर्स में नहीं था। सीबीएसई ने अपना 30 फीसद पाठ्यक्रम घटाया है लेकिन 11वीं के पाठ्यक्रम से राष्ट्रवाद, संघवाद, धर्म निरपेक्षता तथा नागरिकता को हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 


इस बारे में सीबीएसई द्वारा बनाई गई कोर्स कमिटी ने निर्णय लिया था। इस कोर्स कमेटी के एक सदस्य का कहना है कोविड-19 से उपजी स्थिति को देखते हुए बस सत्र 2020-21 के लिए 30 फीसद तक कोर्स में कमी करनी थी। 11वीं के राजनीतिक सिद्धांत पुस्तक में से धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद को इसलिए हटाया गया है क्योंकि इसे 10वीं में छात्रों ने समाज विज्ञान विषय में पढ़ा है। धर्म निरपेक्षता व राष्ट्रवाद एक पश्चिमी संकल्पना है।
 

12वीं के पाठ्यक्रम में कमेटी ने धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद को भारतीय संदर्भ में पढ़ाने का पाठ्यक्रम बनाया है। वह भारतीय महापुरुषों और भारतीय समाज व परिप्रेक्ष्य के नजरिए से होगा। उन्होंने बताया कि 12वीं में राष्ट्रवाद सरदार वल्लभ भाई पटेल की दृष्टि से पढ़ाया जाएगा। भारतीय धर्म निरपेक्षता को दीन दयाल उपाध्याय के मानवतावाद तथा राम मनोहर लोहिया व जय प्रकाश नारायण के समाजवाद के संदर्भ में पढ़ाया जाएगा। कोर्स कमेटी ने इसमें जो भी संशोधन किए हैं उसे सम सामयिकता व भारतीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान मे रखकर किया है। 


भारत को विश्व की नई शक्ति के रूप में पढ़ाया जाएगा
कोर्स कमेटी के सदस्य ने बताया कि पहले पाठ्यक्रम में चीन को पढ़ाया जाता था लेकिन अब छात्र ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देश को पढ़ेंगे। भारत को उभरती हुई विश्व की नई शक्ति के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसमें वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की महत्ता भी दर्शाई जाएगी। नई उभरती शक्तियों में खासकर भारत इजरायल के संबंध भी 12वीं के छात्रों के पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।


किस कक्षा से क्या पाठ्यक्रम हटा

● दसवीं : लोकतंत्र एवं विविधता, लिंग, जाति एवं धर्म, लोकप्रिय संघर्ष एवं आंदोलन और लोकतंत्र के लिए चुनौतियां जैसे विषय हटाए गए हैं।

● 11वीं : संघवाद, नागरिकता, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और भारत में स्थानीय सरकारों के विकास से संबंधित पाठ शामिल हैं। 

● 12वीं : छात्रों को भारत के अपने पड़ोसियों- पाकिस्तान, म्यामां, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के साथ संबंध, भारत के आर्थिक विकास की बदलती प्रकृति, भारत में सामाजिक आंदोलन और नोटबंदी सहित अन्य विषय पर पाठों को नहीं पढ़ना होगा।


इसलिए घटाया गया पाठ्यक्रम
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पाठ्यक्रम को विद्यार्थियों का बोझ कम करने के लिए घटाया गया है, लेकिन मुख्य अवधारणाओं को जस का तस रखा गया है। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम भार में अनुपातिक कमी के लिए शिक्षण संबंधी समय के नुकसान का आकलन किया गया। इसके अनुसार, बोर्ड की पाठ्यक्रम समिति ने सिलेबस घटाने पर काम शुरू किया। विभिन्न पक्षधारकों से सुझाव मांगे गए थे।

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