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Friday, July 17, 2020

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा में अंधेरगर्दी, 6 साल पहले बन्द कार्यालय में लगातार बैठ रहा स्टाफ

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा में अंधेरगर्दी, 6 साल पहले बन्द कार्यालय में लगातार बैठ रहा स्टाफ।


फतेहपुर : कागजों में बन्द कार्यालय असल में चल रहा, डेढ़ वर्ष पहले जारी अपने ही आदेश का पालन नहीं करा सके बीएसए, नगरीय क्षेत्र का आवासीय भत्ता भी पा रहे कर्मचारी


फतेहपुर :  जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अंधेरगर्दी का जीतता जागता उदाहरण है छह साल पहले बंद हो चुका उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय। सिर्फ कागजों में बंद इस कार्यालय में आज भी लिपिक ब्लाकों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनको नगरीय आवासीय भत्ता भी मिल रहा है। ये स्थिति तब है जब बीएसए ने डेढ़ साल पहले खुद इस कार्यालय को बंद करने के निर्देश दिए थे और फिर अपने ही आदेश का पालन नहीं करा सके।


 ब्लाकवार परिषदीय शिक्षकों का वेतन बिल बनाने के लिए जिले में 11 लिपिक हैं। इनका काम बीआरसी में बैठकर वेतन बिल तैयार कर महीने के अंत में लेखा विभाग में फीडिंग कराना है। पहले ये लिपिक डिप्टी बीएसए के अधीन होते थे, लेकिन छह साल पहले शासन ने ये पद खत्म कर दिया था। साथ ही कार्यालय का अस्तित्व स्वतः खत्म हो गया। तत्कालीन डिप्टी बीएसए डॉ. प्रभाकर द्विवेदी के खास सेवानिवृत्त होने के बाद कोई नई नियुक्ति भी नहीं हुई। फिर भी कार्यालय खब चल रहा है। डेढ़ साल पहले तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह को कार्यालय अपने यहां मर्ज कर लिपिकों को ब्लाकों में तैनात करने के निर्देश दिए थे।


 इस पर बीएसए ने लिपिकों को ब्लाकों में बैठने का आदेश भी दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं करा सके। बता दें कि ये लिपिक काम ब्लाकों का करते हैं, लेकिन इन्हें नगरीय आवासीय भत्ता मिल रहा है। नियमानुसार ग्रामीण आवासीय भत्ता मिलना चाहिए। इस संबंध में बीएसए ने बताया कि डिप्टी बीएसए कार्यालय के लिपिक ब्लाकों में बैठकर वेतन बिल बना रहे हैं। महीने में कई बार वेतन फीडिंग के लिए लेखा कार्यालय जरूर आना पड़ता है। नगरीय आवासीय भत्ता के संबंध में वित्तीय विशेषज्ञों से रायशुमारी की जाएगी।


फतेहपुर :  बेसिक शिक्षा विभाग में अंधेरगर्दी का साम्राज्य है। शासन के निर्देश पर छह साल से बंद उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अभी तक स्टाफ की नियुक्ति है। स्टाफ को हर महीने करीब 4.40 लाख वेतन का भुगतान किया जा रहा है। खास बात तो यह है सालभर पहले कार्यालय में तीन लिपिकों की नियुक्ति भी की गई। है तो यहां तक हुई कि डेढ़ साल पहले जानकारी होने पर तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने भी कार्यालय बंद कर लिपिकों की तैनाती ब्लाकों में करने के आदेश दिए थे, लेकिन उनके आदेश का क्रियान्वयन नहीं हो छह साल पहले तक जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के दो कार्यालय संचालित होते थे।





इनमें एक बीएसए और दूसरे में उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का कमांड था। छह साल पहले शासन बीएसए के अलावा विभाग के अन्य सभी पद खत्म कर खंड शिक्षा अधिकारी का पद सृजित किया था। इसी के साथ उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का अस्तित्व समाप्त हो गया था। पद खत्म होने के बावजूद अभी तक इस कार्यालय में 11 लिपिक, दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत । जिला पंचायत कार्यालय में संचालित इस कार्यालय के पूरे स्टाफ को महीने में करीब 4.40 लाख रुपये वेतन का भुगतान किया जा रहा है। इस मामले को डेढ़ साल पहले तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने संज्ञान लिया था। उन्होंने कार्यालय तत्काल बंद कर लिपिकों की तैनाती ब्लाकों में करने के निर्देश दिए थे। आदेश के कुछ ही दिन में उनका तबादला हो गया, तो यह आदेश रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है। बीएसए शिवेेेन्द््द्र प्रताप सिंह का कहना है कि उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सभी लिपिकों को ब्लाकों में बैठने के निर्देश हैं। ब्लाक न जाने वाले लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सालभर पहले बंद हो चुके कार्यालय में तीन लिपिकों की और कर दी गई तैनाती।


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