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Tuesday, July 27, 2021

31 जुलाई तक आना है 12वीं का रिजल्ट, यूपी बोर्ड ने साधी चुप्पी

31 जुलाई तक आना है 12वीं का रिजल्ट, यूपी बोर्ड ने साधी चुप्पी 

◆ 10वीं और 12वीं के 56 लाख बच्चों को रिजल्ट का है इंतजार
◆ सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक परिणाम घोषित करने को कहा
◆ इंटर के बच्चों का रोल नंबर वेबसाइट पर अपलोड नहीं


प्रयागराज : सीआईएससीई की 10वीं व 12वीं का परिणाम घोषित होने के साथ ही यूपी बोर्ड के 56 लाख से अधिक विद्यार्थियों की उत्सुकता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी बोर्ड को 31जुलाई तक 12वीं का परिणाम जारी करने का आदेश दिया है।

कोर्ट से निर्धारित तिथि में मात्र पांच दिन बचे हैं, लेकिन यूपी बोर्ड अब तक परिणाम जारी करने की तिथि तक नहीं बता सका है। स्थिति यह है कि अब तक इंटर के छात्र छात्राओं के रोल नंबर वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए जा सके हैं। जबकि हाईस्कूल के रोल नंबर 10 जुलाई को ही अपलोड हो गए थे। बोर्ड का कहना है कि 10वीं और 12वीं के रोल नंबर पहले ही स्कूलों को भेज दिए थे लेकिन इस साल बच्चों की सहूलियत के लिए वेबसाइट पर भी अपलोड कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार परिणाम को लेकर शासन स्तर पर फैसला नहीं हो पा रहा है। बोर्ड ने उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के निर्देश पर जुलाई के पहले सप्ताह में ही परिणाम तैयार कर लिया था। लेकिन शासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण परिणाम जारी करने की तिथि तय नहीं हो पा रही है। चर्चा है कि इस देरी के पीछे एक कारण कागजी औपचारिकता पूरी न होना भी है।

29,94,312
परीक्षार्थी हाईस्कूल में हैं।

26,10,316
छात्र-छात्राएं इंटरमीडिएट

कब क्या हुआ

◆ 29 मई : हाईस्कूल की परीक्षा परीक्षार्थी हाईस्कूल में हैं निरस्त करने का निर्णय
◆ 3 जून : इंटरमीडिएट की परीक्षा रद्द करने पर लगी मुहर
◆ 20 जून : शासन ने जारी किया परिणाम तैयार करने का फॉर्मूला

परिणाम में क्या फंसा है पेच

कोरोना महामारी के कारण यूपी बोर्ड के 100 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार है कि बिना परीक्षा परिणाम घोषित होगा। बोर्ड के अधिनियम में बिना परीक्षा परिणाम जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है। हर साल 10वीं-12वीं की परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण से लेकर हर छोटे-बड़े काम के लिए बकायदा शासनादेश जारी होते हैं। इस साल शासन ने बिना परीक्षा परिणाम घोषित करने का निर्णय तो ले लिया लेकिन उसके लिए कोई आदेश जारी नहीं किया। ऐसे में बोर्ड अफसरों को डर भी सता रहा है कि कहीं परिणाम जारी होने के बाद कोई विवाद हाईकोर्ट पहुंचता है और कोर्ट ये पूछता है कि किस आधार या शासनादेश पर परिणाम तैयार किया गया तो क्या जवाब देंगे।

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