नदियों के नाम पर होंगे एनसीईआरटी की भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम
छठी और नौवीं की भारतीय भाषाओं की सभी पाठ्यपुस्तकों के नाम स्थानीय नदियों के नाम पर रखे
हिंदी की पाठ्यपुस्तक का नाम अलकनंदा और रेवा, तो पंजाबी भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम सतलुज और रावी रखा
नई दिल्ली: देश की नई पीढ़ी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के त्रिभाषा फार्मूले के जरिये भारतीय भाषाओं से जोड़ने की पहल में छात्र सिर्फ भाषा नहीं सीखेंगे, बल्कि देश की नदियों के नाम से भी रूबरू होंगे। एनसीईआरटी सभी भारतीय भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम देश की नदियों के नाम पर रख रही है। अब तक छठी और नौंवी कक्षा के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम क्षेत्र या राज्यों की भाषाओं के आधार पर वहां की स्थानीय नदियों के नाम पर रखा गया है।
पंजाबी भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम सतलुज और रावी रखा गया है, जबकि तमिल भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम भवानी और वैगई (तमिलनाडु की प्रमुख नदियां) के नाम पर रखा गया है। हिंदी की पाठ्यपुस्तकों का नाम अलकनंदा व रेवा रखा गया है। बांग्ला भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम भागीरथी और कालिंदी है। वहीं, मैथिली भाषा की पुस्तक का नाम कमला और कौशिकी (स्थानीय नदियां) रखा गया है।
इसी तरह अन्य भाषाओं की पुस्तकों के नाम भी देश की प्रमुख भाषाओं के नाम पर रखे गए हैं। एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग भाषाओं की इन पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने का काम त्रिभाषा फार्मूले के तहत किया जा रहा है। छठी से दसवीं तक छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, इनमें दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। इन पाठ्यपुस्तकों का नाम नदियों के नाम पर रखने का फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि नई पीढ़ी भाषाओं की तरह देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी नदियों के नाम भी जान सकेगी।
किन प्रमुख नदियों के नाम पर है किताबेंः अलकनंदा, सतलुज, भवानी, कृष्णा, नेपाली तीस्ता, गोदावरी, साबरमती, भागीरथी, लोकतक, मांडवी, कमला, झेलम, बैतरणी, देविका, गोमती, सिंधु, रेवा, नर्मदा, पंचगंगा, कालिंदी, रावी, महानदी, तुंगभद्रा, पंबा, कपिला, कौशिकी, तवा, चिनाब, लुनी, वैगई आदि।
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