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Monday, October 7, 2024

स्कूली बच्चों को यूनिफार्म पर एक माह में लें निर्णय, हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों को दिया आदेश

स्कूली बच्चों को यूनिफार्म पर एक माह में लें निर्णय, हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों को दिया आदेश


लखनऊः इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित स्कूलों के बच्चों को यूनिफार्म की सुविधा दिए  जाने के मामले में एक माह में निर्णय - लेने का आदेश दिया है। न्यायालय  ने कहा है कि इस संबंध में जो भी निर्णय लिया जाता है उसे हलफनामा के माध्यम दाखिल किया जाए अथवा बेसिक शिक्षा विभाग व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये अगली सुनवाई उपस्थित पर हों। मामले की अगली सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने यूपी अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक एसोसिएशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।

याचिका पर तीन अप्रैल को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दोनों प्रमुख सचिवों का जवाबी हलफनामा मांगा था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद - हलफनामा न दाखिल होने पर - न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए - दोनों अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने अथवा हाजिर होने का आदेश दिया था। न्यायालय के सख्ती के बाद दोनों अधिकारियों की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया कि मामले में निर्णय के लिए एक माह का समय दिया जाए।



समाज कल्याण के स्कूलों में यूनिफॉर्म न देने के मामले में एक माह में फैसला ले विभाग – हाईकोर्ट
 

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के बेसिक स्कूलों की तरह समाज कल्याण विभाग से संचालित स्कूलों में विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म न देने के मामले में महीने भर में निर्णय लेकर जानकारी पेश करने का आदेश दिया है। 


कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर नवंबर के पहले हफ्ते में होने वाली सुनवाई पर हलफनामा दाखिल न हुआ तो बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण विभागों के प्रमुख सचिवों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश होना होगा। इससे पहले सरकारी वकील ने दोनों प्रमुख सचिवों का जवाबी हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि मामले में निर्णय लेने में महीने भर का समय लगेगा।


 न्यायमूर्ति राजन रॉय और ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश यूपी अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक सहायक समिति लखनऊ के महासचिव द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर दिया। 

Friday, August 16, 2024

अभिभावकों की नीयत डीबीटी पर पड़ रही भारी, बच्चों के अधिकारों के साथ अपने ही कर रहे खिलवाड़

अभिभावकों की नीयत डीबीटी पर पड़ रही भारी,  बच्चों के अधिकारों के साथ अपने ही कर रहे खिलवाड़ 


उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जारी की गई डायरेक्ट बैनफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम का उद्देश्य बच्चों को यूनिफॉर्म सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना था। इस योजना के तहत प्रत्येक बच्चे के अभिभावकों के खाते में 1200 रुपये की धनराशि भेजी गई। एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन स्कूलों में कई बच्चे अब भी बिना यूनिफॉर्म या पुरानी ड्रेस में ही स्कूल आ रहे हैं। 

(प्रतीकात्मक चित्र)


ये स्थिति चिंताजनक है और सवाल उठाती है कि आखिर यह धनराशि कहां जा रही है? क्या अभिभावक इस धनराशि का सही उपयोग नहीं कर रहे हैं? डीबीटी योजना का मूल उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ एक स्वाभिमान भरा वातावरण प्रदान करना था, जिसमें वे एक जैसी यूनिफॉर्म पहनकर आत्मविश्वास से पढ़ाई कर सकें। लेकिन जब 60 फीसदी बच्चे बिना यूनिफॉर्म के स्कूल आ रहे हैं, तो यह साफ है कि धनराशि का सही उपयोग नहीं हो रहा है।


कई स्कूलों में देखा गया कि बच्चे पुरानी ड्रेस पहनकर, हवाई या टूटी-फूटी चप्पलों में स्कूल आ रहे हैं। ऐसे में शासन की वह मंशा, जिसके तहत परिषदीय स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों की तरह चमकाने और बच्चों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य था, कहीं न कहीं विफल हो रहा है। इससे बच्चों के अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।


अभिभावकों की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए यह कहा जा सकता है कि यदि वे बच्चों के भविष्य के प्रति सचेत होते तो इस धनराशि का सही उपयोग करते। बच्चों के अधिकारों और उनकी शिक्षा के प्रति यह लापरवाही केवल उनके भविष्य को ही नहीं, बल्कि देश के भविष्य को भी अंधकार में धकेलने वाली है। शासन को इस पर कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि इस धनराशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके और बच्चों को उनके अधिकार मिल सकें। 

Tuesday, April 30, 2024

मांग : परिषदीय विद्यार्थियों को सिली सिलाई यूनिफॉर्म मिले तो खत्म हों कई दिक्कतें

मांग : परिषदीय विद्यार्थियों को सिली सिलाई यूनिफॉर्म मिले तो खत्म हों कई दिक्कतें


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नया सत्र 2024-25 शुरू हो चुका है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे के लिए उनके अभिभावकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिये पैसे भेजा जाएगा। पर, अभी ही विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म व बैग आदि देने की मांग उठने लगी है, क्योंकि अभिभावक पैसे का सही इस्तेमाल नहीं करते हैं। इससे शिक्षकों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। 


सरकार परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को जहां निशुल्क किताबें देती है। वहीं यूनिफॉर्म, बैग, जूता-मोजा और स्वेटर के पैसे डीबीटी के जरिये अभिभावकों के खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं। 


उप्र बीटीसी शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि यूनिफॉर्म के लिए पैसे नहीं, बच्चों को यूनिफॉर्म ही दी जाए। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग निविदा कर जेम पोर्टल से मानक के अनुसार यूनिफॉर्म लेकर पाठ्य-पुस्तकों की तरह वितरित करे।


 संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि अभिभावकों के खातों में जो पैसा भेजा जा रहा है, उसका शतप्रतिशत इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इससे आधे ही बच्चे यूनिफार्म में आते हैं। वहीं, शिक्षकों को बार-बार अभिभावकों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए कहा जाता है। इसे लेकर कई जगह विवाद भी हो रहा है।

Friday, April 5, 2024

समाज कल्याण के स्कूलों में यूनिफॉर्म देने पर चार सप्ताह में निर्णय ले सरकार: हाईकोर्ट

समाज कल्याण के स्कूलों में यूनिफॉर्म देने पर चार सप्ताह में निर्णय ले सरकार: हाईकोर्ट 




लखनऊ : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्कूलों के बच्चों को यूनिफॉर्म की सुविधा देने के विषय पर चाह सप्ताह में निर्णय लें। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मई की तिथि तय करते हुए बेसिक शिक्षा विभाग व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों का हलफनामा भी तलब किया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने यूपी अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक एसोसिएशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में कहा गया है कि बेसिक शिक्षा द्वारा संचालित स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को यूनिफॉर्म दिया जाता है, जबकि 26 अक्टूबर 2023 के ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए समाज कल्याण विभाग के स्कूलों के बच्चों को यूनिफार्म की सुविधा देने से इनकार कर दिया गया है।


 पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा था। न्यायालय ने कहा कि यूनिफॉर्म की सुविधा को रोक देना प्रथम दृष्टया तार्किक निर्णय नहीं लगता। इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि सरकार इस मामले पर पुनर्विचार कर रही है।

Wednesday, July 12, 2023

जुलाई आधी बीतने को, नहीं मिला DBT के जरिए ड्रेस व स्कूल बैग का पैसा, बेसिक विद्यालयों के बच्चे पुरानी ड्रेस आ रहे स्कूल

जुलाई आधी बीतने को, नहीं मिला DBT के जरिए ड्रेस व स्कूल बैग का पैसा, बेसिक विद्यालयों के बच्चे पुरानी ड्रेस आ रहे स्कूल


लखनऊ। आधी जुलाई बीतने वाली है, लेकिन अब तक बैग, जूता-मोजा के लिए दिया जाने वाला पैसा नहीं दिया गया है। ऐसे में बच्चे पुरानी ड्रेस में स्कूल आ रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने यह दावा किया था कि नए सत्र की शुरुआत में ही पैसा सीधे खाते में डीबीटी कर दिया जाएगा।


बेसिक के विद्यालयों में अप्रैल में ही नया सत्र शुरू हो गया था। दो महीने की पढ़ाई के बाद गर्मी की छुट्टियां हो गई। गर्मी की छुट्टियों के बाद भी तीन जुलाई से बच्चों का डीबीटी का इंतजार नहीं समाप्त हुआ है। जबकि विभाग ने गर्मी की छुट्टियों से पहले ही स्कूल चलो अभियान के माध्यम से नए सत्र में बच्चों के नामांकन कराए और उनका आधार आदि का डाटा फीड कराया था। इसका उद्देश्य यही था कि समय बच्चों को ड्रेस, स्कूल बैग, जूते-मोजे आदि का पैसा डीबीटी कर दिया जाए। 


आवश्यक तैयारी पूरी कर ली गई है। जल्द ही पैसा डीबीटी सीधे अभिभावकों के खाते में कर दिया जाएगा। इसमें किसी तरह की दिक्कत नहीं है। अभी स्कूल खुले हुए कुछ दिन ही हुए हैं। जल्द ही बच्चे ड्रेस में स्कूल आएंगे। -विजय किरन आनंद, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

Wednesday, June 28, 2023

अनुदानित मदरसों के बच्चों को चार साल बाद यूनिफार्म, निशुल्क पाठ्य पुस्तकें पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी

अनुदानित मदरसों के बच्चों को चार साल बाद यूनिफार्म


■ निशुल्क पाठ्य पुस्तकें पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी हैं

■ मदरसों के पिछले वर्ष कराए गए सर्वे पर अब तक नहीं हो सका फैसला


लखनऊ  । प्रदेश के 560 अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से कक्षा आठ तक के बच्चों को जुलाई में निःशुल्क यूनिफार्म दिये जाने की तैयारी है। मदरसों के इन बच्चों को चार साल बाद यूनिफार्म मिलेगी। यह जानकारी उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डा. इफ्तेखार अहमद जावेद ने दी।


उन्होंने बताया कि जो यूनिफार्म बेसिक शिक्षा परिषद के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को निःशुल्क दी जा रही है। वही यूनिफार्म मदरसों के बच्चों को भी मिलेगी। उन्होंने बताया कि अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से कक्षा आठ तक के बच्चों को बेसिक शिक्षा परिषद की पाठ्य पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। 


पिछले साल अक्तूबर में प्रदेश के सभी जिलों में मदरसों का 12 बिन्दुओं पर सर्वे करवाया गया था, जिसमें 7500 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मिले थे। 15 नवम्बर तक जिलाधिकारियों ने अपने- अपने जिलों के मदरसा सर्वे की रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, मगर उसके बाद से अब तक इस रिपोर्ट पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन ने इस बारे में पूछने पर बताया कि शासन स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है।

Saturday, January 21, 2023

यूपी : अनुदानित मदरसों के बच्चों को मिल सकेगी फ्री ड्रेस, अभिभावकों के खाते में भेजे जाएंगे रुपए

यूपी : अनुदानित मदरसों के बच्चों को मिल सकेगी फ्री ड्रेस, अभिभावकों के खाते में भेजे जाएंगे रुपए


अपयूपी में मदरसों के बच्चों को मिलेगी फ्री ड्रेस, अभिभावकों के खाते में भेजे जाएंगे रुपएउत्तर प्रदेश के मदरसों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को फ्री ड्रेस मिलेगी। इन बच्चों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस की धनराशि भेजी जाएगी।  

उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पांच साल बाद इस बार नि:शुल्क ड्रेस मिलने की उम्मीद जगी है। 


प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डा.इफ्तिखार अहमद जावेद को इस बारे में पेश आ रही सभी कठिनाईयों को दूर करवाने का आश्वासन दिया है। अगर यह कठिनाईयां दूर हो गयीं तो राज्य के 560 मान्यता प्राप्त अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को भी बेसिक शिक्षा के सरकारी स्कूलों में इन कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों की ही तरह नि:शुल्क ड्रेस मिलेगी। 


इसके लिए इन बच्चों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस की धनराशि भेजी जाएगी। इसके साथ ही इन अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को बेसिक शिक्षा परिषद के पाठ्यक्रम की किताबें नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाएंगी।


उत्तर प्रदेश के मदरसों में मार्च से NCERT का पाठ्यक्रम लागू होगा


उत्तर प्रदेश में स्कूलों की तरह चरणबद्ध तरीके से सभी मान्यता प्राप्त या राज्य सहायता प्राप्त मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।


उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड इस साल मार्च से शुरू होने वाले अगले शैक्षणिक वर्ष में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है। राज्य के सभी मान्यता प्राप्त या राज्य सहायता प्राप्त मदरसों में स्कूलों की तरह चरणबद्ध तरीके से एनसीईआरटी पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।


इस बीच मदरसा छात्रों को गणवेश वितरण में आ रही बाधा भी जल्द ही दूर हो जाएगी। राज्य द्वारा संचालित स्कूलों के छात्रों को वर्तमान में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजना के तहत उनकी स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 1,200 रुपये मिलते हैं। इसलिए, नई व्यवस्था के साथ, यूपी में मदरसा छात्रों को भी सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद वर्दी के लिए उतनी ही राशि मिलेगी।


इस संबंध में एक निर्णय 18 जनवरी को यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड की एक महत्वपूर्ण बैठक में कथित तौर पर लिया गया था। बैठक में बोर्ड सदस्यों ने बेसिक शिक्षा विभाग को हितग्राहियों को गणवेश वितरण में आ रही दिक्कतों पर चर्चा की. मदरसा (कक्षा 1 से 8)। सदस्यों ने मदरसा छात्रों की वर्दी खरीदने के लिए सीधे उनके खातों में पैसे भेजने का भी फैसला किया।


छात्रों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद ने हाल ही में एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, अब मदरसा के बच्चे कंप्यूटर, गणित और विज्ञान का अध्ययन कर सकेंगे।


जावेद ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगले शैक्षणिक वर्ष से यूपी के मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। अभी तक, मदरसा छात्रों के लिए वर्दी को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन वे वर्दी चुन सकते हैं, जो कि लड़कियों के लिए सलवार और कुर्ता और लड़कों के लिए कुर्ता और पायजामा है।
उत्तर प्रदेश में 25 हजार से ज्यादा मदरसे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 16,513 से अधिक मदरसा राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। इनमें से 558 सरकारी सहायता प्राप्त हैं और अन्य केवल मदरसा शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं। छात्र रिकॉर्ड को देखें, तो 19 लाख से अधिक उम्मीदवार मान्यता प्राप्त मदरसों में नामांकित हैं और लगभग सात लाख छात्र वर्तमान में राज्य के लगभग 8,500 मदरसों में पढ़ रहे हैं जो गैर मान्यता प्राप्त हैं।

Friday, January 6, 2023

यूपी : माता-पिता संग भी ड्रेस में स्कूल से बाहर नहीं घूम सकेंगे बच्चे

यूपी : माता-पिता संग भी ड्रेस में स्कूल से बाहर नहीं घूम सकेंगे बच्चे


स्कूली ड्रेस में बच्चे अपने माता-पिता के संग भी बाहर घूम नहीं पाएंगे। उन्हें घर जाकर ड्रेस बदलनी होगी। इसके बाद कहीं और जा सकेंगे। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य निर्मला पटेल ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि स्कूली ड्रेस में मॉल, पार्क आदि सार्वजनिक स्थलों पर घूमने पर रोक लगाई गई है। कुछ स्कूल प्रबंधन एवं अभिभावकाें की ओर से मांग की गई थी कि माता-पिता के साथ ड्रेस में भी कहीं जाने की छूट दी जाए, लेकिन यह पाबंदी हर स्थिति में लागू रहेगी।



निर्मला पटेल ने बताया कि माता-पिता या अन्य रिश्तेदार के साथ भी बच्चे स्कूली ड्रेस में कहीं नहीं जा सकेंगे। आयोग की सदस्य ने बताया कि गोद लेने की प्रक्रिया भी आसान की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी गोद लेने की प्र्रक्रिया काफी लंबी है। इसके अलावा गोद लेने के बाद विभाग की ओर से पांच साल निगरानी रखी जाती है।


बताया कि आयोग की ओर से प्रक्रिया को सरल करने एवं निगरानी की अवधि तीन महीने किए जाने के सुझाव दिए गए हैं। पांच वर्ष से कम आयु में ही बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, इसके लिए भी प्रयास तेज किए जाएंगे। ताकि, बच्चे को आभास न होने पाए कि  उसे गोद लिया जा रहा है।


सदस्य ने संबंधित विभाग के अफसरों संग बैठक कर योजनाओं की समीक्षा की तथा जरूरी निर्देश दिए। इससे पहले उन्होंने सदर बाजार आंगनबाड़ी केंद्र, सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय के एनआरसी एवं पीकू वार्ड, राजकीय बालगृह-बालिका एवं वन स्टाप सेंटर का निरीक्षण किया तथा जरूरी निर्देश दिए।


आंगनबाड़ी केंद्र में एक गर्भवती महिला की गोद भराई भी की। इस दौरान जिला प्रोबेधन अधिकारी पंकज मिश्र, प्रभारी जिल कार्यक्रम अधिकारी विमल चौबे, संजिता सिंह, ज्योत्सना त्रिपाठी, बाल विकास परियोजना अधिकारी ओम प्रकाश याद आदि मौजूद रहे।


कौशल विकास-रोजगार के लिए मांगे सुझाव
कौशल विकास मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं रोजगार की योजनाएं तैयार करने में अब आम लोगों की भी मदद ली जाएगी। इसके लिए मिशन के जिला समन्वयक राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य एसके श्रीवास्तव की ओर सुझाव मांगे गए हैं। मिशन कार्यालय की ओर एक प्रस्ताव एवं प्रारूप भी तैयार किया गया है। इसी के अनुरूप सुझाव मांगे गए हैं। 

Saturday, September 17, 2022

शैक्षणिक संस्थानों में समान ड्रेस कोड मांग वाली याचिका खारिज

शैक्षणिक संस्थानों में समान ड्रेस कोड मांग वाली याचिका खारिज


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी पंजीकृत शैक्षणिक संस्थानों में स्टाफ और छात्रों के लिए समान ड्रेस कोड की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा, यह कोई ऐसा मामला नहीं है जिसपर अदालत को गौर करना चाहिए। 


याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने पीठ से कहा कि यह एक सांविधानिक मुद्दा है लिहाजा अदालत को इस पर गौर करना चाहिए। भाटिया ने यह भी कहा कि यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा, अधिनियम के तहत एकरूपता होनी चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना था कि शैक्षणिक संस्थान धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक स्थान हैं और ज्ञान, रोजगार, राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए हैं न कि धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए। 



नागा साधु का दिया उदाहरण

याचिकाकर्ता ने कहा कि एक सामान्य ड्रेस कोड लागू करना बहुत आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है। तो कल को नागा साधु कॉलेजों में प्रवेश ले सकते हैं और आवश्यक धार्मिक प्रथाओं का हवाला देते हुए बिना कपड़ों के कक्षा में जाने की बात कर सकते हैं। हालांकि पीठ भाटिया की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई।

Wednesday, March 2, 2022

नया सत्र एक अप्रैल से और पाठ्य पुस्तकों के वितरण की तैयारी शून्य, नए सत्र में यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, बैग और स्वेटर मिलेगा या नकद पैसा, इसका निर्णय बाद में

नया सत्र एक अप्रैल से और पाठ्य पुस्तकों के वितरण की तैयारी शून्य

परिषदीय स्कूल : नए सत्र में यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, बैग और स्वेटर मिलेगा या नकद पैसा, निर्णय बाद में

अप्रैल से नया सत्र : अभी तक पाठ्य पुस्तकों के वितरण तो छोड़िए उनके प्रकाशन की टेंडर प्रक्रिया तक नहीं हो सकी

सत्ता संग्राम में फंसा नौनिहालों का भविष्य, पाठ्य पुस्तक से लेकर जूता, मौजा, स्कूल बैग, ड्रेस के मामले में तैयारी शून्य


कोरोना काल के बाद जैसे-तैसे धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही शैक्षणिक व्यवस्था विधानसभा चुनाव के चलते फिर से सुस्त पड़ने जा रही है। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होने जा रहा है। लेकिन अभी तक पाठ्य पुस्तकों के वितरण तो छोड़िए उनके प्रकाशन की टेंडर प्रक्रिया तक नहीं हो सकी है, जबिक टेंडर प्रक्रिया से लेकर पुस्तकों के प्रकाशन और वितरण में करीब तीन माह का समय लगता है। ऐसे में साफ है कि नया सत्र बेशक एक अप्रैल से शुरू हो जाएगा। लेकिन, नौनिहालों को बिना पाठ्य पुस्तकों के ही स्कूल में पढ़ने को मजबूर होना पड़ेगा।


परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को हर साल पाठ्य पुस्तक और स्कूल ड्रेस, बैग, स्वेटर, जूते-मौजे निशुल्क वितरित किए जाते हैं। नया सत्र लागू होने से तीन माह पहले ही इनके वितरण की तैयारी शुरू हो जाती है। टेंडर प्रक्रिया से लेकर वितरण तक की व्यवस्था में तीन माह का समय लगता है। इस बार विद्यार्थियों का सत्र एक अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। मगर, विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते शासन अभी तक इनको लेकर कोई भी निर्णय नहीं कर पाया है। 


अधिकारी टकटकी लगाए नई सरकार के गठन का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, अधिकारियों में यह भी डर है कि नई सरकार पूर्व के आदेश को जारी रखती है या फिर उनमें फेरबदल करेगी। मसलन, पिछले वर्ष योगी सरकार ने स्कूल बैग, ड्रेस, जूते-मौजे और सर्दियों में स्वेटर का पैसा अभिभावकों के खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से भेजा था। प्रत्येक बच्चे को 1100 रुपये इनकी एवज में दिए गए थे। इस बार यह आदेश लागू रहेगा या फिर से सिर्फ वस्तुओं का ही वितरण किया जाएगा


लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र 2022-23 शुरू हो जाएगा, लेकिन विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित कराने की तैयारी अभी तक शुरू नहीं की गई है। ऐसे में विद्यार्थियों को अप्रैल में पाठ्य पुस्तकों का वितरण होना संभव नहीं लग रहा है। उधर, विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्कूल बैग और स्वेटर की राशि का नकद भुगतान किया जाएगा या सामग्री खरीद कर वितरित की जाएगी, इस पर भी अभी निर्णय नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक नई सरकार के रुख पर इसका निर्णय किया जाएगा।



परिषदीय स्कूलों में 1.80 करोड़ विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया जाता है। पहली कक्षा में ही एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाना है। वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भी पाठ्यक्रम का निर्धारण होना है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पाठ्यपुस्तक प्रकाशन को लेकर अभी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। टेंडर प्रक्रिया को पूरा करने में करीब एक महीने से अधिक समय लगेगा। जिस भी फर्म को टेंडर मिलेगा, उसे पुस्तक प्रकाशित कर वितरण के लिए कम से कम दो महीने का समय देना होगा। ऐसे में मई जून तक ही स्कूलों में किताबें पहुंच सकेंगी।

Wednesday, November 17, 2021

1100₹ के लिए सुबह से शाम तक घनघना रहे बेसिक शिक्षकों के फोन, जवाब देते शिक्षक हो रहे परेशान

यूनिफॉर्म, बस्ता, जूता, मोजा उपलब्ध कराना शिक्षकों के लिए टेढ़ी खीर, DBT के जरिये कितने खातों में धन पहुंचा इसका आंकड़ा नहीं

1100₹ के लिए सुबह से शाम तक घनघना रहे बेसिक शिक्षकों के फोन, जवाब देते शिक्षक हो रहे परेशान


ठंड बढ़ती जा रही है।  परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले काफी बच्चों को ड्रेस, बैग, स्वेटर और जूते-मोजे का इंतजार है। शासन के निर्देश के बावजूद अब तक बहुत से  विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में धनराशि नहीं प्रेषित की जा सकी है। शासन ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को 30 नवंबर तक धनराशि प्रेषित करने का निर्देश दिया है। 

इसके बाद से विभाग ने छात्रों के आधार कार्ड के सत्यापन के काम में और तेजी लाई है। डीबीटी शिक्षकों के लिए मुसीबत बन गई है। पहले डाटा एंट्री में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण शिक्षकों को परेशानी हुई थी। अब पैसे को लेकर पूछताछ से शिक्षक परेशान हैं। सुबह से शाम तक शिक्षकों के फोन घनघना रहे हैं। कई अभिभावक तो बच्चों का नाम न फीडिंग में न भेजने की शिकायत करते हैं।

पंजीकृत बच्चों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजी जा रही है। जिन अभिभावकों के आधार व बैंक खाते में त्रुटियां हैं, उन अभिभावकों को सूचना दी जा रही है। 30 नवंबर तक प्रक्रिया पूरी करने का जिम्मेदार दावा कर रहे हैं।



परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत  छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म, बस्ता, जूता, मोजा उपलब्ध कराना शिक्षकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो गया है। डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में धनराशि भेजी गई, लेकिन इसका ब्योरा कोई नहीं दे पा रहा है। इसे लेकर शिक्षक परेशान हैं। अभिभावकों के जनधन के खाते भी संदेह के घेरे में बताए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग अभिभावकों के खातों में धनराशि ट्रांसफर करने का दावा कर रहा है, लेकिन कितनों के खाते में पैसा पहुंचा या नहीं इसका सही आंकड़ा किसी के पास नहीं है।


शिक्षा सत्र 2021-22 में इस बार स्कूलों में बंपर नामांकन हुए हैं। छात्र-छात्राओं का पंजीकरण प्रेरणा पोर्टल पर किया गया था। शासन के निर्देश पर इस बार बच्चों को दो दो जोड़ी जूते, मोजे, यूनिफॉर्म एक बैग, एक स्वेटर उपलब्ध कराया जाना है। एक छात्र को इसके लिए 1100 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जानी थी। यह धनराशि अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन शिक्षा विभाग की मानें तो दो सप्ताह पूर्व अभिभावकों के खातों में धनराशि भेज दी गई है।


अब शिक्षा विभाग के आला अधिकारी शिक्षकों को अभिभावकों के खातों में भेजी गई धनराशि से यूनिफॉर्म जूते, मोजे, बैग आदि सामग्री का क्रय कराने का दबाव बना रहे। शिक्षक स्कूलों में अभिभावकों को बुलाकर पूछ रहे हैं कि उनके खातों में धनराशि आई है, तो बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध करा दें। 


परंतु अभिभावक स्कूलों के शिक्षकों को खातों में आई धनराशि के बारे में जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कहीं स्कूली बच्चे यूनिफॉर्म से वंचित रह न रह जाएं, इसका भी शिक्षकों को डर सताने लगा है। लेकिन ब्लॉक स्तर पर तैनात खंड शिक्षा अधिकारी शिक्षकों से कह रहे हैं कि वह जल्द से जल्द बच्चों को यूनिफॉर्म, स्कूली बैग, जूते, मोजे आदि सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग करें। अभी तक शिक्षकों को यह भी जानकारी नहीं है कि कितने बच्चों के अभिभावकों के खातों में धनराशि आई है और कितने बच्चों के खातों में धनराशि नहीं आई है।


शिक्षकों पर दबाव बनाना है गलत

शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी डीबीटी से भेजी गई धनराशि से संतुष्ट नहीं हैं।  विभाग की ओर से डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खातों में धनराशि भेजी गई है। अब बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना अभिभावकों की जिम्मेदारी है। इसमें शिक्षक कुछ नहीं कर सकते। शिक्षकों पर दबाव बनाना गलत है। 

शिक्षकों को अभी यह सूची भी उपलब्ध नहीं कराई गई कितने खातों में धनराशि भेजी गई है। पहले शिक्षकों को सूची उपलब्ध कराई जानी चाहिए। 

Tuesday, April 20, 2021

शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, निजी स्कूल नई किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बना रहे दबाव

शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, निजी स्कूल नई किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बना रहे दबाव


प्रयागराज : पिछले सत्र में एक भी दिन विद्यार्थी स्कूल नहीं गए। बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई की। नए सत्र पर भी कोरोना की काली छाया पड़ रही है। तमाम स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, कुछ में चल रही है। कई स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई दोबारा शुरू करा दी है। इन सब के बीच राहत वाली बात यह कि स्कूलों में किसी भी तरह का पाठ्यक्रम नहीं बदला है। विद्यार्थी पुरानी किताबें लेकर आगे की पढ़ाई कर सकते हैं।


स्कूल की तरफ से नई किताबों को खरीदने का भी दबाव नहीं बनाया जाएगा। कुछ स्कूलों ने तो पुस्तक बैंक भी बनाई है जिसमें वह पुरानी किताबें एकत्र कर जरूरतमंद बच्चों को दे रहे हैं। इसके लिए वह किसी भी तरह का शुल्क नहीं ले रहे। यह कदम कोरोना काल में अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए उठाया जा रहा है।


हालांकि तमाम अभिभावकों की शिकायत है कि स्कूलों की तरफ से नई किताबों को खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ स्कूल विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान यूनिफार्म पहनकर बैठने के लिए भी निर्देशित कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब बच्चे घर में हैं तो यूनिफार्म की क्या जरूरत है। कोरोना काल में अनावश्यक रूप से ड्रेस खरीदने का दबाव ठीक नहीं हैं।


सभी स्कूलों में दोबारा शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, अभिभावकों की शिकायत, स्कूल नई किताबें खरीदने के लिए बना रहे दबाव


निजी स्कूल अनावश्यक रूप से दबाव बना रहे हैं। आर्थिक बोझ भी डाल रहे हैं जबकि पढ़ाई सुचारू ढंग से नहीं हो रही है। कापियों के मूल्य बढ़ने के साथ ही कुछ स्कूल नई किताब खरीदने का भी दबाव बना रहे हैं। इसके लिए खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। - विजय गुप्त, अभिभावक एकता समिति।

मेरा पुत्र सिविल लाइंस के निजी विद्यालय में पढ़ता है। पिछले सत्र में आधा पाठ्यक्रम भी नहीं पूरा कराया जा सका। नए सत्र में फीस 15 फीसद बढ़ा दी गई है। स्कूल प्रबंधन से मांग है कि कोरोना काल में फीस माफ की जाए। ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़े। - संजय द्विवेदी, अभिभावक।

इस बार भी कक्षाएं ऑनलाइन शुरू हो गई हैं। पुरानी किताबें मिलें तो वह उसे लेकर पढ़ाई कर सकते हैं। नई किताबों का कोई दबाव नहीं है। - फादर थामस कुमार, प्रधानाचार्य सेंट जोसफ इंटर कॉलेज।

पुरानी किताबें मिल जाएं तो उसे लेकर पढ़ाई करें। हां कॉपियों को जरूर लेना होगा। इस बार कॉपियां अनिवार्य रूप से जांची जाएंगी। सुझाव भी बच्चों को दिए जाएं। -डा. विनीता इसूवियस, प्रधानाचार्य जीएचएस।

पुरानी किताबें यदि बच्चों को मिल जाएं तो वह उसे लेकर पढ़ाई कर सकते हैं। शिक्षक भी अध्ययन सामग्री बच्चों के वाट्सएप पर भेज रहे हैं, वेबसाइट पर भी मैटर है। -डेविड ल्यूक, प्रधानाचार्य, बीएचएस।

स्कूल में करीब 150 बच्चों ने पुरानी किताबें जमा कराई हैं। उसे जरूरतमंदों को दिया जा रहा है। अन्य विद्यार्थी भी स्कूल या अपने आसपास के बच्चों को किताबें दे सकते हैं। - अर्चना तिवारी, प्रधानाचार्य, टैगोर पब्लिक।