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Thursday, October 2, 2025

शिक्षकों का पहले तबादला, फिर वापसी, आखिर गलती किसकी? तबादलों से शिक्षकविहीन हुए बेसिक स्कूल, अब वापस पुराने स्कूल भेजा जा रहा

शिक्षकों का पहले तबादला, फिर वापसी, आखिर गलती किसकी? तबादलों से शिक्षकविहीन हुए बेसिक स्कूल, अब वापस पुराने स्कूल भेजा जा रहा

लखनऊ: जुलाई- अगस्त में बेसिक शिक्षकों के अंतःजनपदीय (जिले के अंदर) तबादले हुए। उनको दूसरे जिलों में जॉइनिंग भी दे दी गई। इससे कई ऐसे स्कूल एकल शिक्षक या शिक्षकविहीन हो गए। ऐसे शिक्षकों को अब फिर से पुराने स्कूल में वापस भेजा जा रहा है। कई जिलों में लगातार बीएसए ऐसे आदेश कर रहे हैं। वे अपने खंड शिक्षाधिकारियों से सवाल भी कर रहे है कि स्कूल शिक्षकविहीन होने या एकल शिक्षक होने के लिए जिम्मेदार कौन है? 

अब यह एक बड़ा सवाल बन गया है। इसका जवाब विभाग और शासन के बड़े अफसरों के पास भी नहीं है। क्या तबादला करते समय मानकों की जांच नहीं की गई? अगर पहले जांच की गई तो अब शिक्षकों को वापस क्यों भेजा जा रहा है? दोनों ही स्थितियों में गलती किसकी है?



ऐसे हुए तबादले
प्रदेश में बेसिक शिक्षकों के अंतःजनपदीय तबादलों की प्रक्रिया जुलाई में शुरू हुई थी। उसके बाद 11 अगस्त को तबादला लिस्ट जारी की गई। इसमें कुल 5,378 का तबादला हुआ। तब जॉइनिंग देने के तुरंत बाद यह बात सामने आई थी कि छात्र शिक्षक अनुपात बिगड़ गया है। कुछ बीएसए ने शिक्षकों को तुरंत ही पुराने स्कूल में वापस करने के आदेश किए थे। उस समय विभाग के बड़े अफसरों ने हस्तक्षेप कर यह कहा था कि जिनका तबादला हो गया है, उनको रोका नहीं जाएगा। सभी को नई जगह जॉइनिंग दी जाएगी। बाद में स्कूलों की पेयरिंग के बाद एक बार फिर से तबादले समायोजन किए जाएंगे। उसमें अनुपात को सुधार लिया जाएगा। 


लगातार हो रहे वापसी के आदेश: स्कूलों की पेयरिंग हो गई लेकिन उसके बाद समायोजन नहीं हुआ। ज्यादातर जिलों में कई स्कूल एकल या शिक्षकविहीन हो गए हैं। ऐसे में सभी बीएसए फिर से शिक्षकों को अपने पुराने स्कूल में भेजने के आदेश कर रहे हैं। मेरठ, कन्नौज, महाराजगंज, सुलतानपुर, हमीरपुर सहित करीब दर्जनभर जिलों के बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों को आदेश दिए है कि कोई स्कूल तबादले समायोजन की वजह से एकल या शिक्षक विहीन हो रहा है तो शिक्षकों को मूल विद्यालय में वापस भेजा जाए। वहीं, बस्ती और जालौन सहित कई जिलों के बीएसए ने नियमों का हवाला देते हुए लिखा है कि कोई विद्यालय एकल या शिक्षकविहीन नहीं होना चाहिए। इन नियमों के तहत शिक्षकों को कार्यमुक्त या कार्यभार ग्रहण कराने की कार्यवाही की जाए।


एक ही सवाल, जिम्मेदार कौन ?
इस बारे में कुछ शिक्षकों ने डीजी स्कूल शिक्षा और विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि शिक्षकों का तबादला ऑनलाइन हुआ है। इसमें शिक्षकों का कोई दोष नहीं है। ऐसे में उनके तबादले निरस्त न किए

कहां हुई गड़बड़ ?
जब तबादले किए गए तब छात्र-शिक्षक अनुपात तय करते समय शिक्षामित्रों को भी जोड़कर शिक्षको की संख्या का आकलन किया गया। कई सकूल ऐसे थे जिनमे शिक्षामित्र तो है लेकिन शिक्षक एक या दो ही थे। का तबादला हो गया तो वे एकल या शिक्षकविहीन हो गए। पहले जब यह बात उठी तो एक बार और समायोजन का आश्वासन दिया गया। वह समायोजन हुए नही। हाल में शिक्षकवहीन स्कूल का मामला हाई कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने आदेश दिए कि विद्यालय एकल या शिक्षक विहीन नहीं होना चाहिए। इसके बाद से सभी बीएसए शिक्षकों को पुराने विद्यालय में वापसी के आदेश कर रहे है।

 खबरों के अंदर की बात
 प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि पहले तबादले किए गए। अब निरस्त किए जा रहे है। इसमें किसी की भी गलती हो, लेकिन शिक्षक गलत नहीं है। जिसने गलती की है, जांच करके उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि विभाग की छवि धूमिल न हो।

जांच की जाएगीः प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा का कहना है कि इस बारे में उन्हें कुछ जानकारी नहीं है। वहीं डीजी स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि डायरेक्टर के स्तर से मामले की जांच की जाएगी।




बेसिक शिक्षकों का पहले किया तबादला, अब कर रहे वापस, मेरठ, महराजगंज, शाहजहांपुर समेत कई जिलों में आदेश जारी, पहले शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षक मानकर कर ली गई गणना

लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तवादले को लेकर गंभीर प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बन गई है। पहले शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षक मानकर तवादले किए गए लेकिन अब जब कई विद्यालय एकल या शिक्षकविहीन हो गए तो विभाग उन्हीं तबादलों को निरस्त करने लगा है। मेरठ, महराजगंज, शाहजहांपुर समेत कई जिलों में शिक्षकों को वापस उनके मूल विद्यालयों में बुलाया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी और असमंजस का माहौल है।

जून और अगस्त में लंबी कवायद के बाद शिक्षकों के जिले के अंदर परस्पर तवादले किए गए थे। इसमें जून में 20182 शिक्षकों का जिले के अंदर सामान्य तवादला किया गया था। वहीं अगस्त में 5378 शिक्षकों का तबादला हुआ था। उस समय विभाग का यह दावा था कि उसने सभी आवश्यक चीजें देखकर तवादले किए हैं। साथ ही बीएसए को भी नियमानुसार ही शिक्षकों को जॉइन कराने का निर्देश दिया था।

 अब गौतमबुद्धनगर, औरैया, हमीरपुर, महाराजगंज, शाहजहांपुर, मेरठ आदि कई जिलों में बीएसए की ओर से शिक्षकों के तबादले से जुड़े आदेश जारी किए जा रहे हैं। इनमें कहा गया है, तवादले के बाद यह पता चला कि जिले के कई विद्यालय शिक्षकविहीन हो गए हैं। इसकी वजह से विसंगति पैदा हो रही है।

बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन शिक्षकों के तबादले के बाद विद्यालय एकल या शिक्षकविहीन हो गए हैं। वहां के शिक्षकों को तत्काल उनके मूल विद्यालय में वापस लाने की कार्यवाही की जाए।

साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि विद्यालय के एकल या शिक्षकविहीन होने के लिए कौन उत्तरदायी है? अब दो-तीन महीने बाद तबादला निरस्त करने से शिक्षकों में काफी नाराजगी है। आखिर यह विभाग की कैसी मनमानी व नियमावली है कि जब चाहा तबादला किया और जब चाहा निरस्त कर दे रहे हैं


पहले हुई गलती या अब

तबादला प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह गलती हुई कब। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी की ओर से आठ अगस्त को जारी आदेश के बिंदु संख्या छह में स्पष्ट कहा गया है कि स्वेच्छा से तबादला व समायोजन प्रक्रिया में शिक्षकों को कार्यमुक्त करने से विद्यालय एकल या शिक्षकविहीन हो रहे हैं, तो उनको कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। ऐसे में या तो उस समय तबादलों में गलती हुई या अब गलत किया जा रहा है?

यह कुछ शिक्षकों का ही मामला है। कुछ जगह पर स्कूलों का मर्जर निरस्त होने के बाद स्थितियां बदली हैं। यह देखा जाएगा कि पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया गया है या नहीं? इसमें जिस अधिकारी की गलती मिलेगी उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। - सुरेंद्र तिवारी, सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद




मर्जर का दुष्प्रभाव : डिमर्ज हुए स्कूल पुनः अपनी जगह चलने शुरू हुए तो घट गए शिक्षक,  स्कूलों की पेयरिंग के दौरान हुआ था शिक्षकों का समायोजन, अब पढ़ाई पर संकट

स्कूलों की पेयरिंग और अनपेयरिंग से पैदा हुआ स्कूलों में शिक्षकों का संकट


लखनऊः जिले में पेयर किए गए कई बेसिक स्कूल वापस अपने भवन में चलने लगे है। इससे पहले पेयरिंग के दौरान कई जगह शिक्षक बढ़ गए थे, जो स्वैच्छिक समायोजन के तहत दूसरे स्कूलों में चले गए। ऐसे में अब स्कूल पुरानी जगह चलने लगे तो छात्रों की हाजिरी बढ़े लगी है, लेकिन शिक्षकों की कमी हो गई है। जहां पहले दो शिक्षक थे, वहां अब महज एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई हो रही है। कई एकल शिक्षक स्कूल तो शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं।


जानकारी के मुताबिक, पेयरिंग के बाद कई स्कूलों में शिक्षकों को सप्लस बताकर उनका स्वैच्छिक समायोजन कर दिया गया था। बेसिक शिक्षा मंत्री ने 31 जुलाई को अधिक दूरी वाले स्कूलों को अनपेयर करने का ऐलान किया था। इसके बाद भी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अनपेयरिंग का कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया, बल्कि अगस्त में कई स्कूलों को पुराने भवन में संचालित करने का मौखिक निर्देश दे दिया। इसके बाद स्कूल पुराने भवन में शुरू हुए, तब पता चला कि पहले के मुकाबले शिक्षक घट गए है।


पढ़ाई पर पड़ रहा असर

मोहनलालगंज के भौदरी ग्राम पंचायत के मरूई प्राथमिक विद्यालय में करीब 35 छात्र है। यहां दो शिक्षक थे। पेयरिंग के वक्त एक शिक्षक को दूसरे स्कूल में समायोजित कर दिया गया था। अब स्कूल पुराने भवन में पहले की तरह चल रहा है, लेकिन दो के बजाय सिर्फ शिक्षक के भरोसे पढ़ाई हो रही है। इसी तरह मोहनलालगंज के प्राथमिक विद्यालय उत्तरगांव में भी दो शिक्षक थे। एक शिक्षक के समायोजन के बाद पुराने भवन में सिर्फ सहायक अध्यापक ही सभी बच्चो को पढ़ा रहे है। वही, माल के प्राथमिक विद्यालय बनेवापुरवा में 35 बच्चों पर दो शिक्षक तैनात थे। पेयरिंग और समायोजन के बाद इस स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक है।


शिक्षामित्रों के भरोसे स्कूल

माल का पीरनगर प्राथमिक विद्यालय पहले एकल शिक्षक के भरोसे चल रहा था। पेयरिंग के वक्त शिक्षक का समायोजन दूसरे स्कूल में कर दिया गया। अब पुराने भवन में स्कूल शुरू होने पर शिक्षामित्र के भरोसे पढ़ाई चल रही है। मलिहाबाद का इमलिया प्राथमिक विद्यालय पहले एकल शिक्षक स्कूल था, लोकिन अब यह शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहा है।

Tuesday, September 2, 2025

परिषदीय स्कूलों के विलय मामले की अगली सुनवाई अब 22 सितंबर को, हाईकोर्ट ने सीतापुर में स्कूलों की यथास्थिति बहाल रखने का दिया था आदेश

परिषदीय स्कूलों के विलय मामले की अगली सुनवाई अब 22 सितंबर को, हाईकोर्ट ने सीतापुर में स्कूलों की यथास्थिति बहाल रखने का दिया था आदेश

02 सितंबर 2025
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अगली सुनवाई 22 सितंबर को नियत की है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश मामले में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध विशेष अपीलों पर दिया हैं। यह जानकारी राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने दी।

बीती 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने विलय प्रक्रिया में उजागर हुई स्पष्ट अनियमितताओं के मद्देनजर सीतापुर के स्कूलों के विलय पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह अंतरिम आदेश देते समय अदालत ने स्कूलों के विलय की सरकार की नीति और इस पर अमल करने की मेरिट पर कुछ नहीं किया है। पहली विशेष अपील सीतापुर के पांच बच्चों ने और दूसरी भी वहीं के 17 बच्चों ने अभिभावकों के जरिये दाखिल की है। इनमें स्कूलों के विलय में एकल पीठ द्वारा 7 जुलाई को दिए गए फैसले को चुनौती देकर रद्द करने का आग्रह किया गया है।

दरअसल यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्रथामिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था। जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग के 16 जून के उस आदेश को चुनौती देते हुए रद्द करने का आग्रह किया था, जिसके तहत प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का प्रावधान किया गया है।




हाईकोर्ट में बोली यूपी सरकार– एक किलोमीटर से अधिक दूरी के स्कूलों का नहीं होगा विलय, सीतापुर में स्कूलों की पेयरिंग पर यथास्थिति अगली सुनवाई 01 सितंबर तक बरकरार रखने के आदेश

22 अगस्त 2025
लखनऊ। प्रदेश के सरकारी स्कूलों के मर्जर (विलय) को लेकर चल रही कवायद पर आज लखनऊ हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की। अदालत ने साफ कहा कि राज्य सरकार को अब तक हुए सभी आदेशों और निर्णयों को रिकॉर्ड पर लाना होगा, जिससे अदालत पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर सके। कोर्ट ने साथ ही यह भी निर्देश दिया कि सीतापुर ज़िले के स्कूलों के संबंध में वर्तमान स्थिति को यथावत बनाए रखा जा, यानी वहां फिलहाल कोई नया बदलाव लागू नहीं होगा। 


यूपी में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में गुरूवार को स्कूलों की पेयरिंग के मामले में सुनवायी हुी। याची पक्ष की ओर से उपस्थित अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने बताया कि सीतापुर में स्कूलों की पेयरिंग पर यथास्थिति अगली सुनवाई तक बरकरार रखने के आदेश न्यायालय ने दिए हैं।

वहीं राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया है कि एक किलोमीटर से कम दूरी वाले तथा जिन स्कूलों में 50 से अधिक बच्चे हैं, उनकी पेयरिंग नहीं की जाएगी। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने सरकार को इस सम्बंध में पारित आदेश को रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 सितम्बर को होगी।


सीतापुर में प्राइमरी स्कूलों के विलय पर रोक

यूपी में अभिभावकों और बच्चों को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सीतापुर जनपद में प्राथमिक स्कूलों के विलय पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। 

न्यायालय ने कहा कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से हलफनामे के साथ दाखिल रिकॉर्ड में स्पष्ट तौर पर कुछ विसंगतियां पाई गई हैं। लिहाजा अगली सुनवाई तक सीतापुर जनपद के संबंध में चल रही कार्रवाई पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तिथि तय करते हुए अपील करने वालों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।



यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने सीतापुर के स्कूली बच्चों की ओर से उनके अभिभावकों द्वारा दाखिल दो विशेष अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया था। अपीलों में एकल पीठ के 7 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें स्कूलों का विलय करने के विरुद्ध दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था





हाईकोर्ट में परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में सुनवाई आज, अनियमितताओं के मद्देनजर हाईकोर्ट ने सीतापुर में स्कूलों की यथास्थिति बहाल रखने का दिया था आदेश


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 21 अगस्त को सुनवाई होगी। मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष विशेष अपीलें सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध हैं।

बीती 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने विलय प्रक्रिया में उजागर हुई स्पष्ट अनियमितताओं के मद्देनजर सीतापुर के स्कूलों के विलय पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह अंतरिम आदेश देते समय अदालत ने स्कूलों के विलय या मर्जर की सरकार की नीति और इसपर अमल करने की मेरिट पर कुछ नहीं किया है।


मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष 24 जुलाई को विशेष अपीलों पर राज्य सरकार व  बेसिक शिक्षा विभाग के अधिवक्ताओं ने बहस की थी। अदालत के सामने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए विलय के कुछ दस्तावेजों अनियमितताएं सामने आईं थीं।

राज्य सरकार की ओर से इनका स्पष्टीकरण देने का समय मांगा गया था। जिनके मद्देनजर कोर्ट ने सीतापुर जिले में स्कूलों की विलय/पेयरिंग प्रक्रिया पर 21 अगस्त तक मौजूदा स्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। अदालत ने अपीलकर्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर जवाब पेश करने को अगली सुनवाई तक का समय दिया था। 

Friday, August 22, 2025

निजी स्कूलों में बढ़े बच्चे, ज्यादा दूरी की पेयरिंग रद्द करने में आनाकानी से परिषदीय स्कूलों में घटी हाजिरी, विभागीय मंत्री के एलान के बावजूद कई जिलों में नहीं जारी हुए पेयरिंग रद्द करने के आदेश

निजी स्कूलों में बढ़े बच्चे, ज्यादा दूरी की पेयरिंग रद्द करने में आनाकानी से परिषदीय स्कूलों में घटी हाजिरी, विभागीय मंत्री के एलान के बावजूद कई जिलों में नहीं जारी हुए पेयरिंग रद्द करने के आदेश


लखनऊः बेसिक शिक्षा विभाग ने बेहतर पढ़ाई और सुविधाओं का तर्क देकर बेसिक स्कूलों की पेयरिंग तो कर दी, लेकिन इसका फायदा बेसिक स्कूलों के बजाय निजी स्कूलों को मिल रहा है। दूरी बढ़ने के कारण पेयर किए गए सभी स्कूलों में बच्चों की हाजिरी घट गई है। बीते दिनों बेसिक शिक्षा मंत्री ने एक किमी से ज्यादा दूरी वाले स्कूलों की पेयरिंग रद्द करने का ऐलान किया था, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने अब तक कोई आदेश नहीं जारी किया है। ऐसे में तमाम अभिभावकों ने बच्चों को दूर भेजने के बजाय नजदीक के निजी स्कूलों में दाखिला करवाना शुरू कर दिया है।


8 बच्चों ने छोड़ा स्कूलः बीकेटी में प्राथमिक विद्यालय उमरभारी से करीब एक किमी दूर ज्वारगांव तरैया प्राथमिक विद्यालय है। इसके बावजूद 2.5 किमी दूर पीएस कमला बाग बड़ौली में प्राथमिक विद्यालय उमरभारी की पेयरिंग कर दी। मौजूदा सत्र में उमरभारी स्कूल में 23 बच्चे थे, लेकिन पेयरिंग के बाद इनकी तादाद 15 के आसपास हो गई है। जानकारी के मुताबिक, सात से आठ बच्चों के अभिभावकों ने इनका दाखिला नजदीक के निजी स्कूलों में करवा दिया है।


15 के आसपास बच्चो ने छोड़ा स्कूलः बीकेटी में ही पीएस पालपुर की पेयरिंग पीएस रायपुर राजा में हुई है। दोनों स्कूलों के बीच की दूरी 2.5 किमी से अधिक है। पीएस रायपुर राजा की बिल्डिंग भी अच्छी स्थिति में नहीं है। पेयरिंग से पहले पीएस पालपुर में 37 बच्चे थे। अब इनमें से दो-तीन बच्चे ही रायपुर राजा पहुंच रहे हैं। करीब 15 बच्चों के अभिभावकों ने इनका दाखिला दूसरे स्कूलों में करवा दिया है। बाकी बच्चों के अभिभावक पेयरिंग रद्द होने का इंतजार कर रहे है, ताकि बच्चों को दोबारा स्कूल भेज सकें।


 स्कूल के साथ चलेगी बाल वाटिकाः मंत्री के ऐलान के 20 दिन बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग ने एक किमी से ज्यादा दूरी वाले स्कूलों की पेयरिंग रद्द करने का आदेश जारी नहीं किया है। विभागीय अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इस बीच पेयर किए गए स्कूलों में बाल वाटिका खुलने लगी है। सीडीओ बाल वाटिका खोलने के लिए 96 स्कूलों की सूची जारी की है। इसमें यह भी जिक्र है कि पेयरिंग रद्द होने के बाद एक ही भवन में स्कूल और बाल वाटिका चलाई जाएगी।

Tuesday, August 19, 2025

यूपी में विद्यालयों बंद करने के फैसले के खिलाफ आप नेता संजय सिंह की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार, जानिए क्यों?

यूपी में विद्यालयों बंद करने के फैसले के खिलाफ आप नेता संजय सिंह की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार, जानिए क्यों? 


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के 105 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने के फैसले के खिलाफ आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। 

यूपी सरकार ने जिन प्राथमिक विद्यालयों में शून्य या कम नामांकन हैं उनका पास के दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि इसी तरह का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है। 


पीठ ने याचिकाकर्ता से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को वापस लेने को कहा। याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। पीठ ने कहा कि यह एक स्थानीय समस्या है और अन्य राज्यों तक नहीं फैली है, इसलिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को इसकी जांच करनी चाहिए। 

अदालत ने कहा कि यह मामला बच्चों के निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत वैधानिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित है। हाईकोर्ट पहले से ही इस मामले पर विचार कर रहा है, इसलिए बेहतर होगा कि वह इस पर निर्णय ले। अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की छूट दी और मामले का शीघ्र निपटारा करने के लिए कहा। 



Tuesday, August 12, 2025

कमज़ोर तबका शिक्षा से वंचित किया जा रहा– विपक्ष का आरोप, सरकार बोली – बच्चों की बेहतरी के लिए हो रहा मर्जर, विधान परिषद में हंगामा

कमज़ोर तबका शिक्षा से वंचित किया जा रहा– विपक्ष का आरोप,  सरकार बोली – बच्चों की बेहतरी के लिए हो रहा मर्जर, विधान परिषद में हंगामा

सरकार के जवाब से असंतुष्ट सपा विधायकों ने किया वॉक आउट


लखनऊ । शिक्षा के गिरते स्तर और बेसिक स्कूलों की पेयरिंग के मुद्दे पर विधान परिषद में सोमवार को भाजपा और सपा सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। सपा सदस्यों ने कहा कि मधुशालाएं खुल रही है और पाठशालाएं बंद की जा रही है। आरोप लगाया कि सरकार गरीब व कमजोर तबके के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश की जा रही है। उसके बाद सरकार के जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्यों ने वॉक आउट किया।

सोमवार को कार्य स्थगन के तहत सपा ने शिक्षा के गिरते स्तर और बेसिक स्कूलों की पेयरिंग का मुद्दा उठाया। सपा सदस्य मान सिंह ने कहा कि सरकार अपनी खामियां सुगाने के लिए स्कूल मर्जर पेयरिंग और कंपोजिट स्कूल जैसे नए-नए शब्द खोजकर ला रही है। बच्चों की संख्या कम होने की बात कहकर स्कूल बंद किए जा रहे है। अगर कोई बीमारी होती है तो उसका इलाज किया जाता है। मरीज को मारा नहीं जाता। आशुतोष सिन्हा ने कहा कि जिस समाज को कमजोर करना हो, उसे शिक्षा से वंचित कर दिया जाता है। सरकार गरीबों और कमजोर तबके के लोगों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश कर रही है। 


लोकसभा में केंद्र सरकार ने ही आंकड़ा दिया है कि 2017-18 से 2023-24 तक 26,040 स्कूल बंद किए गए या मर्ज कर दिए गए। इसके बाद सरकार ने शासनादेश के जरिए 10,827 स्कूल बंद कर दिए। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी ने कहा कि सरकार संविधान के खिलाफ काम कर रही है। 


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि पहले शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह जर्जर थी। सपा शासन में 3.50 करोड़ बच्चे शिक्षा से दूर थे। अब इन्हें बच्नों के भविष्य की चिंता सता रही है। उन्होंने स्कूलों के मर्जर पर साफ किया कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार को छीनने की हमारी मंशा नहीं है। बच्चों की शिक्षा को बेहतर चनाने ग्रुप लर्निंग, पेयर लर्निंग के लिए मर्जर किया गया है। एक किलोमीटर से दूर और 50 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों का मर्जर नहीं होगा। लाल बिहारी ने कहा कि हम जो सवाल कर रहे हैं, उसका जवाब मंत्री नहीं दे रहे। जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्य सदन से वॉक आउट कर गए।

Friday, July 25, 2025

सीतापुर में प्राइमरी स्कूलों के विलय पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश, अंतरिम आदेश का राज्य सरकार की पेयरिंग नीति से संबंध नहीं

सीतापुर में प्राइमरी स्कूलों के विलय पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश, अंतरिम आदेश का राज्य सरकार की पेयरिंग नीति से संबंध नहीं

विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए पारित किया आदेश, अगली सुनवाई 21 अगस्त को

25 जुलाई 2025
लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीतापुर जिले के प्राइमरी स्कूलों के विलय के संबंध में राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश किये गए कुछ दस्तावेजों में घोर विरोधाभास पाने के कारण यह आदेश पारित किया है। कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को कहा है कि वे इन दस्तावेजों के खिलाफ अपना जवाब अगली सुनवाई तक दाखिल कर सकते हैं। स्पष्ट किया है कि इस अंतरिम आदेश का राज्य सरकार की पेयरिंग पालिसी या इसके क्रियान्वयन से कोई लेना देना नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

यह आदेश चीफ जस्टिस अरुण भंसाली व जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने मास्टर नितीश कुमार व धर्म वीर की ओर से अलग अलग दाखिल दो विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए पारित किया। ये विशेष अपीलें एकल पीठ के गत सात जुलाई के उस फैसले के खिलाफ दाखिल की गईं हैं जिसमें एकल पीठ ने राज्य सरकार के विलय संबंधी 16 जून के आदेश पर मुहर लगाते हुए रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

अपीलार्थियों का प्रमुख तर्क है कि पेयरिंग करने में राज्य सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत पड़ोस में शिक्षा पाने के हक का उल्लंघन किया है। यह भी तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार का आदेश संविधान के अनुच्छेद 21ए का उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान बेंच ने पाया कि एकल पीठ ने अपने फैसले में सरकार के कुछ दस्तावेजों पर भी भरोसा किया था। हालांकि वे दस्तावेज रिकार्ड पर नहीं थे क्योंकि सरकार की ओर से कोई जवाबी हलफनामा नहीं पेश किया गया था।

 कोर्ट के कहने पर राज्य सरकार की ओर से उन दस्तावेजों को शपथ पत्र के जरिये रिकार्ड पर पेश किया गया। दस्तावेजों को रिकार्ड पर लेने के बाद कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को उनका जवाब पेश करने के लिए मौका देते हुए उपरोक्त अंतरिम आदेश पारित किया है।




परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का दिया आदेश

24 जुलाई 2025
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ द्वारा 24 जुलाई 2025 को दिए गए निर्णय (विशेष अपील संख्या 222 व 223/2025) के आधार पर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में स्कूलों के मर्जर/पेयरिंग पर ‘यथास्थिति बनाए रखने’ का जो आदेश जारी किया गया है, उसका विवेचन निम्न प्रमुख बिंदुओं के आधार पर किया जा सकता है:


1. याचिकाकर्ताओं का आधार – RTE और अनुच्छेद 21A का उल्लंघन
याचिकाएं इस आधार पर दाखिल की गई थीं कि स्कूलों का मर्जर/पेयरिंग, बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है, जो मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE Act 2009) और संविधान के अनुच्छेद 21-A के अंतर्गत सुरक्षित हैं। याचियों का तर्क था कि पड़ोस में स्कूल की जो व्यवस्था RTE अधिनियम में की गई है, पेयरिंग से उसका स्पष्ट उल्लंघन हो रहा है।


2. सरकारी पक्ष की कमजोरी – एकल पीठ में उत्तर न दाखिल करना
अदालत ने नोट किया कि एकल पीठ में सरकार द्वारा कोई काउंटर एफिडेविट दाखिल नहीं किया गया था, बल्कि केवल मौखिक रूप से कुछ दस्तावेज और बातें रखी गईं। यह दर्शाता है कि सरकार की ओर से न्यायालय के समक्ष समुचित और पारदर्शी जवाब नहीं दिया गया।


3. मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी – गम्भीर विसंगतियों का ज़िक्र
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकारी दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियाँ पाई गईं, जिन्हें बाद में सफाई देने हेतु अतिरिक्त हलफ़नामे के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट करने का प्रयास किया। अदालत ने इन्हीं विसंगतियों को गंभीरता से लेते हुए सीतापुर जिले में “यथास्थिति बनाए रखने” का आदेश पारित किया।


4. अंतरिम आदेश का सीमित दायरा – केवल सीतापुर पर लागू
यह आदेश अभी सिर्फ सीतापुर जिले तक सीमित है, और नीति के गुण-दोष या पूरे प्रदेश के स्कूल मर्जर पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। परंतु यह आदेश इस बात का संकेत अवश्य देता है कि यदि अन्य जनपदों में भी विसंगतियाँ उजागर होती हैं, तो ऐसी ही राहत संभव है।


5. नीतिगत आधार पर फैसला नहीं – पर संकेत महत्वपूर्ण
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश नीति की वैधता पर अंतिम टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह प्रक्रियात्मक विसंगतियों और दस्तावेजी अस्पष्टता के आधार पर दिया गया है। यानी, भले ही नीति का मूल्यांकन नहीं हुआ हो, पर कार्यप्रणाली में गम्भीर सवाल हैं।


6. आगे की सुनवाई और संभावनाएँ
अदालत ने अपीलकर्ताओं को सरकारी हलफ़नामे पर उत्तर देने का अवसर दिया है और अगली सुनवाई की तिथि 21 अगस्त 2025 तय की है। यह आगामी सुनवाई नीति के गहराई से परीक्षण का द्वार खोल सकती है।


निष्कर्ष:
इस आदेश को नीति पर एक संवेदनशील और तर्कसंगत हस्तक्षेप के रूप में देखा जाना चाहिए। भले ही यह अंतिम फैसला नहीं है, पर यह उन हजारों गांवों और लाखों गरीब बच्चों के लिए आशा की किरण है, जिनकी आवाज़ अक्सर ‘तथ्यात्मक आंकड़ों’ और ‘नीतिगत जुमलों’ के बीच दबा दी जाती है। यह फैसला एक संकेत है कि यदि ग्रामवासियों, शिक्षकों और बच्चों की असल परिस्थितियों को कानूनी और संवैधानिक ढांचे में उठाया जाए, तो न्याय की संभावना हमेशा बनी रहती है।


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24 जुलाई 2025 : 3:30PM 
यूपी में स्कूलों के विलय मामले में हाईकोर्ट लखनऊ बेंच से यूपी सरकार को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सीतापुर में स्कूलों के विलय पर यथा स्थिति बनाए रखने का दिया आदेश है। बुधवार को को लखनऊ बेंच हाई कोर्ट में सरकार की ओर से वकील ने अपना पक्ष रखा था। बुधवार को सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को भी इस मामले में सुनवाई की। दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश की गईं। कोर्ट को बताया गया कि 50 से कम बच्चों वाले स्कूलों के विलय का आदेश दिया है। साथ ही जिन स्कूलों में 50 से अधिक बच्चे थे उनको भी विलय की सूची में शामिल कर दिया गया है। हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया।

बतादें कि बेसिक शिक्षा विभाग के तहत संचालित स्कूलों के विलय मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में बुधवार को भी बहस हुई थी। हालांकि समय की कमी के चलते बुधवार को भी बहस पूरी न हो पाने पर मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ मामले की गुरुवार को भी सुनवायी करेगी। उक्त अपीलों में बच्चों की ओर से उनके अभिभावकों ने विशेष अपीलें दाखिल करते हुए, एकल पीठ के 7 जुलाई के निर्णय को चुनौती दी है। उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई को एकल पीठ ने स्कूलों का विलय करने के विरुद्ध दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

बुधवार को बहस के दौरान सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने दलील दी थी कि स्कूलों का विलय पूरी कर से सम्बंधित प्रावधानों के तहत किया गया। यह भी बताया गया कि खाली हुए स्कूल भवनों का उपयोग बल वाटिका स्कूल के रूप में व आंगनबाड़ी कार्य के लिए किया जाएगा। सरकार की ओर से कुछ अन्य तथ्यों को भी रखने के लिए मंशा जाहिर की गई जिसके लिए न्यायालय ने मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया।




परिषदीय विद्यालयों के विलय से परेशान बच्चों की अपील पर आज भी सुनवाई करेगा हाईकोर्ट

24 जुलाई 2025 
लखनऊ। प्राथमिक स्कूलों के विलय मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में विशेष अपीलों पर सुनवाई बुधवार को भी जारी रही। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष विशेष अपीलों पर राज्य सरकार व बेसिक शिक्षा विभाग के अधिवक्ताओं की बहस चली। याचियों के अधिवक्ता बहस कर चुके हैं। दोनों पक्षों के वकीलों ने दलीलों के समर्थन में नजीरें भी पेश कीं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को नियत की है।


पहली विशेष अपील 5 बच्चों ने और दूसरी 17 बच्चों ने अपने अभिभावकों के जरिये दाखिल की है। इनमें स्कूलों के विलय के मुद्दे पर एकल पीठ द्वारा बीती 7 जुलाई को याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ एलपी मिश्र व अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने दलीलें दीं। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया, मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह के साथ बहस की।

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने दलील दी कि विलय की कार्यवाही संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए बच्चों के हित में की जा रही है। सरकार ने ऐसे 18 प्राथमिक स्कूलों का हवाला दिया जिनमें एक भी विद्यार्थी नहीं है। कहा, ऐसे स्कूलों का पास के स्कूलों में विलय करके शिक्षकों और अन्य सुविधाओं का बेहतर उपयोग किया जाएगा। सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिहाज से ऐसे स्कूलों के विलय का निर्णय लिया है। 



स्कूलों के विलय के मामले में सुनवाई आज भी रहेगी  जारी

23 जुलाई 2025
लखनऊ। प्राथमिक स्कूलों के विलय मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में विशेष अपीलों पर सुनवाई जारी है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को विशेष अपीलों पर याचियों के अधिवक्ताओं ने बहस की।

इसके जवाब में सरकारी अधिवक्ताओं ने बहस की। दोनों पक्षों ने दलीलों के समर्थन में नजीरें भी पेश की। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को नियत की है। बता दें कि 7 जुलाई को स्कूलों के विलय मामले में एकल पीठ ने प्राथमिक स्कूलों के विलय आदेश को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था। 

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था। 



परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में विशेष अपीलें दाखिल,  दो न्यायाधीश की खंडपीठ हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में आज करेगी सुनवाई

दाखिल एक जनहित याचिका को भी खंडपीठ ने बीती 10 जुलाई को खारिज कर दिया था।

22 जुलाई 2025
लखनऊ। प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के विलय मामले में एकल पीठ के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दो न्यायाधीशों की खंडपीठ में विशेष अपीलें दाखिल कर चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष 22 जुलाई को इन अपीलों पर सुनवाई होंगी।


अपीलकर्ताओं के अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने बताया कि पहली विशेष अपील 5 बच्चों ने और दूसरी 17 बच्चों ने अपने अभिभावकों के जरिये दाखिल की है। इनमें एकल पीठ के स्कूलों के विलय में एकल पीठ द्वारा बीती 7 जुलाई को दिए गए फैसले को रद्द करने का आग्रह किया गया है। इसके बाद मामले में इससे पहले बीती 7 जुलाई को स्कूलों के विलय मामले में राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली थी। 

एकल पीठ ने प्राथमिक स्कूलों के विलय आदेश को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था। 


स्कूलों के विलय के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

स्कूलों के विलय के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

25 जुलाई 2025
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सैकड़ों सरकारी स्कूलों के विलय के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। जस्टिस दीपंकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चूंकि मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहा है इसलिए याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना चाहिए।

 तैय्यब खान सलमानी की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया था कि सरकार के इस कदम से राज्य में हजारों से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सात जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को राहत देते हुए सैकड़ों स्कूलों के विलय के फैसले को हरी झंडी दी थी। 



स्कूल मर्जर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

21 जुलाई 2025
परिषदीय स्कूलों के विलय के विरोध में अब पीलीभीत के बच्चों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका हुई है। कल्याणपुर गांव राठ पीलीभीत की दस वर्षीय छात्रा सेन्सी देवी, चांदपुर गांव राठ पीलीभीत की नौ वर्षीय कोमल और इसी गांव की सात वर्षीय मिली देवी ने अपने अभिभावकों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

 याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की दलील है कि बच्चों के मौलिक एवं संवैधानिक शिक्षा के अधिकार को बिना संसदीय स्वीकृति के बाधित नहीं किया जा सकता। यही नहीं सरकार के इस कदम को मनमाना भी बताया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका हो चुकी है।

मामला Sensi Devi बनाम State of U.P. (डायरी संख्या 38597/2025) है, जो स्कूल पेयरिंग मामले को लेकर है। Sensi Devi केस चीफ जस्टिस की पीठ में सूचीबद्ध है। 




स्कूल मर्जर के खिलाफ अब बच्चे पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

18 जुलाई 2025
प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों के विलय के विरोध में अब पीलीभीत के बच्चों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका हुई है। कल्याणपुर गांव राठ पीलीभीत की दस वर्षीय छात्रा सेन्सी देवी, चांदपुर गांव राठ पीलीभीत की नौ वर्षीय कोमल और इसी गांव की सात वर्षीय मिली देवी ने अपने अभिभावकों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

 याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की दलील है कि बच्चों के मौलिक एवं संवैधानिक शिक्षा के अधिकार को बिना संसदीय स्वीकृति के बाधित नहीं किया जा सकता। यही नहीं सरकार के इस कदम को मनमाना भी बताया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका हो चुकी है।



सुप्रीम कोर्ट पहुंचा स्कूलों के मर्जर का मामला, यूपी में हजारों स्कूल बंद करने के फैसले को जनहित याचिका के जरिए चुनौती

15 जुलाई 2025
उत्तर प्रदेश में हजारों सरकारी स्कूलों को बंद करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई. याचिका में कहा गया कि सरकार के इस कदम से राज्य में 3 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.


उत्तर प्रदेश में 5 हजार सरकारी स्कूलों को बंद करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई. याचिका में कहा गया कि सरकार के इस कदम से राज्य में 3 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की.सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का भरोसा देते हुए कहा कि हालांकि यह सरकार का नीतिगत मामला है. याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप यादव ने कोर्ट से इस संवेदनशील मामले पर शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह किया.

सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग
उत्तर प्रदेश में 70 से कम छात्र संख्या वाले 5 हजार सरकारी प्राथमिक स्कूलों को बंद करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई. याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के निर्णय को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया कि सरकार के इस कदम से राज्य में 3 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का भरोसा देते हुए कहा कि हालांकि यह सरकार का नीतिगत मामला है. याचिकाकर्ता के वकील  प्रदीप यादव ने कोर्ट से इस संवेदनशील मामले पर शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह किया.


5,000 स्कूलों के मर्जर के फैसले को मिली थी हरी झंडी
पिछले हफ्ते सोमवार सात जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को राहत देते हुए 5,000 स्कूलों के मर्जर के फैसले को हरी झंडी दिखा दी थी. कोर्ट ने सरकार के 16 जून 2025 के शासनादेश की अधिसूचना के खिलाफ सीतापुर और पीलीभीत के 51 छात्रों की याचिका खारिज कर दी. अधिसूचना के मुताबिक राज्य के दूरदराज में स्थित जिन सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में 70 या इससे कम छात्र हों उनका आसपास के अन्य विद्यालयों में विलय कर दिया गया.

Thursday, July 24, 2025

न दूरी देखी न दिक्कत, बस कर दिया स्कूलों का विलय, जिलों में बढ़ रहा है बेसिक शिक्षा विभाग की मनमानी का विरोध, अभिभावकों-बच्चों के वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहे वायरल

न दूरी देखी न दिक्कत, बस कर दिया स्कूलों का विलय, जिलों में बढ़ रहा है बेसिक शिक्षा विभाग की मनमानी का विरोध, अभिभावकों-बच्चों के वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहे वायरल


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में कम नामांकन वाले 10827 परिषदीय विद्यालयों का विलय (पेयरिंग) किया है। हालांकि, विलय में स्पष्ट मानक न होने से जिलास्तर पर मनमानी की गई। कहीं स्कूलों का विलय दो से तीन किमी दूर कर दिया गया तो कहीं बच्चों को हाईवे और रेलवे लाइन पार करके जाना पड़ रहा है। कहीं पूरे शिक्षक नहीं हैं तो कई जगह खराब रास्ते शिक्षा की राह में रोड़ा बन रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अधिकारियों को बच्चों व अभिभावकों को मनाने के लिए गांव-गांव जाना पड़ रहा है। 


कुशीनगर में 178 विद्यालयों के विलय के बाद आधे बच्चे भी स्कूल नहीं पहुंच रहे। अब जिले-जिले में स्कूलों के विलय का विरोध मुखर हो रहा है। कानपुर देहात, उन्नाव, हरदोई समेत कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शिक्षक संगठनों के साथ लोग व जनप्रतिनिधि भी सड़क पर उतर रहे हैं। 


अभिभावकों का कहना है कि बिना संवाद और जमीनी हकीकत समझे निर्णय लिया। अगर अधिकारियों ने संवाद के बाद फैसला लिया होता तो यह स्थिति न आती। विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने न तो विद्यालयों की दूरी देखी न बच्चों की दिक्कत, बस ताबड़तोड़ विलय कर दिया। 


देवरिया में तो ज्यादा दूरी को देखते हुए बीएसए ने 30 विद्यालयों के विलय आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, कई जिलों में अब भी बच्चों व अभिभावकों की दिक्कत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों के विरोध के बीच आशंका है कि आने वाले दिनों में ड्रॉपआउट दर बढ़ सकती है।

Tuesday, July 15, 2025

बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने दिया निर्देश, 50 से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों का नहीं होगा मर्जर

बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने दिया निर्देश, 50 से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों का नहीं होगा मर्जर 

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बेसिक शिक्षा विभाग की बैठक में शिक्षकों के खाली पदों पर जल्द नियुक्ति की आवश्यकता को रेखांकित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात आदर्श स्थिति में होना चाहिए। खाली पदों के सापेक्ष अधियाचन तत्काल भेजा जाए और नियुक्ति प्रक्रिया समय से पूरी हो।

मुख्यमंत्री ने विद्यालयों की पेयरिंग व्यवस्था को दूरगामी और व्यापक दृष्टिकोण से लागू करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों तीनों के हित में है। इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकेगा। उन्होंने जिन विद्यालयों में 50 से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं, उन्हें स्वतंत्र विद्यालय के रूप में चलाने का निर्देश दिया।

उन्होंने पेयरिंग के बाद खाली हुए विद्यालय भवनों में बाल वाटिकाएं, प्री-प्राइमरी स्कूल चालाने को कहा। कहा- इन भवनों में आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थानांतरित किया जाए ताकि शिशु शिक्षा का आधार सुदृढ़ हो। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 06 से 14 साल का एक भी बच्चा विद्यालय से वंचित नहीं रहना चाहिए। विद्यालय प्रबंध समिति (प्रधानाध्यापक व ग्राम प्रधान) इसे सुनिश्चित कराएं। स्कूल चलो अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जिन विद्यालयों में आधारभूत संरचना की कमी है, वहां अविलंब संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए


अभिभावकों के खाते म जल्द करें डीबीटी

मुख्यमंत्री ने परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे हर बच्चों के अभिभावक के खाते में यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्टेशनरी व पाठ्य सामग्री के लिए 1200 रुपये की सहायता राशि डीबीटी से जल्द भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह कार्य पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किया जाए ताकि लाभार्थियों को समय पर मदद मिल सके।




अभिभावक-छात्र-शिक्षक, तीनों के हित में है स्कूलों की पेयरिंग', सीएम योगी ने बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में किया दावा 

लखनऊ । सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बेसिक स्कूलों की पेयरिंग छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों तीनों के हित में है। इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसे दूरगामी दृष्टिकोण से लागू करने की जरूरत है। जिन स्कूलों में 50 से अधिक स्टूडेंट अध्ययनरत हैं, उन्हें स्वतंत्र रूप में संचालित करें, जिससे प्रशासनिक सुविधा, जवाबदेही और शैक्षणिक निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके।


योगी ने सोमवार को बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पेयरिंग व्यवस्था के कारण खाली हुए स्कूल भवनों में बाल वाटिकाएं/प्री-प्राइमरी स्कूल संचालित किए जाएं। इन भवनों में आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थानांतरित किया जाए ताकि शिशु शिक्षा का आधार सुदृढ़ हो। यह प्रक्रिया तय समय-सीमा के भीतर पूरी की जाए और इस काम में किसी तरह की शिथिलता न बरती जाए।


'स्कूल जाने से कोई बच्चा न छूटे' सीएम ने कहा कि 6 से 14 साल की उम्र का एक भी बच्चा स्कूल से वंचित नहीं रहना चाहिए। विद्यालय प्रबंध समिति (प्रधानाध्यापक व ग्राम प्रधान) इसे सुनिश्चित करवाए। हर स्टूडेंट के अभिभावक के बैंक खाते में यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्टेशनरी एवं पाठ्य सामग्री के लिए 1,200 रुपये की सहायता राशि को डीबीटी के जरिए जल्द ट्रांसफर किया जाए। जिन स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, वहां इसे बिना देरी के पूरा करवाएं। 


खाली पदो पर तत्काल भेजे अधियाचन योगी ने शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि सभी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात आदर्श स्थिति में होना चाहिए। रिक्तियों के सापेक्ष अधियाचन तत्काल भेजा जाए और नियुक्ति प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए।

अभिभावक-छात्र-शिक्षक, तीनों के हित में है स्कूलों की पेयरिंग', सीएम योगी ने बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में किया दावा

अभिभावक-छात्र-शिक्षक, तीनों के हित में है स्कूलों की पेयरिंग', सीएम योगी ने बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में किया दावा 


लखनऊ । सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बेसिक स्कूलों की पेयरिंग छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों तीनों के हित में है। इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसे दूरगामी दृष्टिकोण से लागू करने की जरूरत है। जिन स्कूलों में 50 से अधिक स्टूडेंट अध्ययनरत हैं, उन्हें स्वतंत्र रूप में संचालित करें, जिससे प्रशासनिक सुविधा, जवाबदेही और शैक्षणिक निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके।


योगी ने सोमवार को बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पेयरिंग व्यवस्था के कारण खाली हुए स्कूल भवनों में बाल वाटिकाएं/प्री-प्राइमरी स्कूल संचालित किए जाएं। इन भवनों में आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थानांतरित किया जाए ताकि शिशु शिक्षा का आधार सुदृढ़ हो। यह प्रक्रिया तय समय-सीमा के भीतर पूरी की जाए और इस काम में किसी तरह की शिथिलता न बरती जाए।


'स्कूल जाने से कोई बच्चा न छूटे' सीएम ने कहा कि 6 से 14 साल की उम्र का एक भी बच्चा स्कूल से वंचित नहीं रहना चाहिए। विद्यालय प्रबंध समिति (प्रधानाध्यापक व ग्राम प्रधान) इसे सुनिश्चित करवाए। हर स्टूडेंट के अभिभावक के बैंक खाते में यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्टेशनरी एवं पाठ्य सामग्री के लिए 1,200 रुपये की सहायता राशि को डीबीटी के जरिए जल्द ट्रांसफर किया जाए। जिन स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, वहां इसे बिना देरी के पूरा करवाएं। 


खाली पदो पर तत्काल भेजे अधियाचन योगी ने शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि सभी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात आदर्श स्थिति में होना चाहिए। रिक्तियों के सापेक्ष अधियाचन तत्काल भेजा जाए और नियुक्ति प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए।