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Saturday, August 1, 2026

माध्यमिक विद्यालयों में होगी व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई, एक विद्यालय में दो-दो प्रशिक्षक होंगे तैनात, सप्ताह में छह घंटे मिलेगा प्रशिक्षण, शिक्षा के साथ ही कौशल विकास पर दिया जा रहा है जोर

माध्यमिक विद्यालयों में होगी व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई, एक विद्यालय में दो-दो प्रशिक्षक होंगे तैनात, सप्ताह में छह घंटे मिलेगा प्रशिक्षण, शिक्षा के साथ ही कौशल विकास पर दिया जा रहा है जोर


लखनऊ । शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अब छात्रों के लिए व्यवसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है। अब माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा भी दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक विद्यालयों में दो-दो प्रशिक्षकों की तैनाती की गई है। वह सप्ताह में छह घंटे छात्रों को प्रशिक्षण देंगे।


राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ रोजगारपरक व्यावसायिक शिक्षा भी दी जाएगी। विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा नौवीं से 12वीं के छात्र मनपसंद ट्रेड चुन सकेंगे। छात्रों को कृषि, आईटी और रिटेल सहित ट्रेडों के कौशल सिखाए जाएंगे।

व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में 25 छात्रों का दाखिला अनिवार्य किया गया है। सप्ताह में छह घंटे छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक विद्यालयों में दो-दो प्रशिक्षकों की तैनाती की कार्य योजना माध्यमिक शिक्षा परिषद ने तैयार की है। प्रशिक्षण में केवल किताबों की पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि व्यावहारिक जानकारी और काम करने का तरीका भी सिखाया जाएगा।

इससे विद्यार्थियों में नई तकनीकी और व्यावसायिक दक्षता विकसित होगी। इससे वे आगे की पढ़ाई के साथ स्वरोजगार और कौशल आधारित कॅरिअर के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।  माध्यमिक विद्यालयों में जल्द ही व्यावसायिक प्रशिक्षकों की तैनाती की जाएगी। दाखिला लेने वाले विद्यालयों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

Sunday, June 28, 2026

प्रोजेक्ट प्रवीण में 36 हजार अभ्यर्थियों को कौशल प्रशिक्षण 15 जुलाई से

प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत माध्यमिक स्कूलों के 36103 विद्यार्थियों को मिलेगा प्रशिक्षण

15 से शुरू होंगी कक्षाएं, गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थी होंगे

आईटी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण

लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की मुहिम तेज कर दी गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के लिए लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं।


इस योजना के तहत आईटी आईटीईएस, हेल्थकेयर, अपैरल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जॉब और कृषि क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थी
की होंगे। इससे बच्चों को प्रयोगात्मक व व्यावहारिक ज्ञान अच्छे से मिल सकेगा। इस साल प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत कुल 36,103 प्रशिक्षणार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कौशल विकास मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि केंद्र की स्थापना, पंजीकरण और बैच बनाकर 15 जुलाई तक कक्षाओं का संचालन शुरू करना होगा। बैच शुरू होने के सात दिन के अंदर सभी विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री का वितरण कर उसकी फोटो मिशन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रशिक्षण प्रदाता समय पर कार्य शुरू नहीं करता है या जिला स्तर से किसी प्रकार की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


ये जिले शामिल
आगरा, बरेली, आजमगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र सहित राज्य के राजकीय विद्यालयों में सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी दी गई है। पाठ्यक्रम की अधिकतम अवधि 300 घंटे होगी।

सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी युवा हुनर से वंचित न रहे। प्रोजेक्ट प्रवीण के जरिये राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में मजबूत कर रहे हैं। -कपिल देव अग्रवाल, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)




प्रोजेक्ट प्रवीण में 36 हजार अभ्यर्थियों को कौशल प्रशिक्षण 15 जुलाई से

 लखनऊ: राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 36,103 छात्र-छात्राओं को इस सत्र में रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। उप्र कौशल विकास मिशन ने 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण (एसटीटी) का लक्ष्य जारी किया है। सभी प्रशिक्षण संस्थानों को 15 जुलाई से हर हाल में कक्षाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशिक्षण की अवधि अधिकतम 300 घंटे होगी और हर बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थी ही शामिल किए जाएंगे।

प्रोजेक्ट प्रवीण के माध्यम से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को सामान्य शिक्षा के साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी दिया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। इस शैक्षणिक सत्र में आगरा, बरेली, आजमगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र समेत अन्य जिलों के राजकीय विद्यालयों में सूचीबद्ध 299 प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

इसके तहत आइटी-आइटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रानिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जाब्स और एग्रीकल्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सीमित बैच होने से विद्यार्थियों को व्यावहारिक और प्रयोगात्मक प्रशिक्षण बेहतर ढंग से मिल सकेगा। मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

Sunday, February 8, 2026

यूपी बोर्ड के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को पढ़ाने के लिए 60 हजार अनुदेशकों की भर्ती होगी

यूपी बोर्ड के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को पढ़ाने के लिए 60 हजार अनुदेशकों की भर्ती होगी


प्रयागराज। यूपी बोर्ड से जुड़े 29 हजार से अधिक स्कूलों में एक अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षिक सत्र 2026-27 से लगभग 60 हजार अनुदेशक रखे जाएंगे। बोर्ड ने कक्षा नौ और 11 में व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल को कम से कम दो कोर्स पढ़ाना होगा। इसके लिए प्रत्येक स्कूल को अपने संसाधनों से दो-दो अनुदेशक रखने होंगे। बोर्ड के विशेषज्ञ स्कूलों में रखे जाने वाले अनुदेशकों की अर्हता तय करेंगे। अनुदेशकों की अर्हता के संबंध में जल्द ही स्कूलों को निर्देश भेजे जाएंगे।


पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल के सहयोग से तैयार इन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में वर्तमान तकनीकी जरूरतों, उद्योग जगत की अपेक्षाओं व विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को केंद्र में रखते हुए व्यवहारिक, कौशल-आधारित एवं रोजगारोन्मुखी विषयवस्तु को शामिल किया गया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करेगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार यह कदम विद्यालयी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने, छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देने तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।


108 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे

व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों हेतु एक साथ 108 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इन कोर्सेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एयरोस्पेस, मीडिया और ऑटो सर्विस टेक्निशियन जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है।

स्कूल भौगोलिक आधार पर करेंगे विषयों का चयन

प्रत्येक स्कूल को अपनी भौगोलिक स्थिति के आधार पर कम से कम दो विषयों का चयन करना होगा। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को स्थानीय उद्योगों से जोड़ना है, जैसे भदोही में कालीन उद्योग से संबंधित प्रशिक्षण। संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में 10 दिनों की अनिवार्य इंटर्नशिप का प्रावधान भी रखा गया है।


Monday, January 26, 2026

कक्षा में पढ़ाई संग कमाई की तैयारी, प्रशिक्षण लेकर 89 हजार से अधिक विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनने की राह में

कक्षा में पढ़ाई संग कमाई की तैयारी, प्रशिक्षण लेकर 89 हजार से अधिक विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनने की राह में


लखनऊ: माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई सिर्फ किताबों और परीक्षा तक सीमित नहीं रही। प्रदेश के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम छात्रों को पढ़ाई के साथ कमाई के लिए भी तैयार कर रहा है। सिलाई, प्लंबरिंग, आटो सर्विसिंग, डेटा एंट्री, ब्यूटी वेलनेस, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे रोजगारोन्मुख कार्यक्रम में प्रशिक्षण लेकर 89 हजार से अधिक विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


 प्रदेश सरकार की यह कौशल विकास आधारित पहल माध्यमिक स्तर पर ही छात्रों को रोजगार से जुड़कर  आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। योजना के तहत कक्षा में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ प्रयोगशालाओं और वर्कशाप में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षक विद्यार्थियों को वास्तविक कार्य परिस्थितियों से परिचित करा रहे हैं, जिससे वे आगे नौकरी या स्वरोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। 


शैक्षिक सत्र 2025-26 में योजना का दायरा और बढ़ाया गया। इसमें प्रदेश के 1701 माध्यमिक विद्यालयों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ा गया है, जहां विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण चल रहा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव के अनुसार इन विद्यालयों में संचालित सभी वोकेशनल कोर्स जनवरी तक पूरे कर लिए जाएंगे। इससे पहले 2022-23 में 289, 2023-24 में 356 और 2024-25 में 208 विद्यालयों में योजना लागू हुई थी, जहां 100 प्रतिशत कोर्स सफलतापूर्वक पूरे किए, गए। 


कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को 16 ट्रेड्स और 18 जाब रोल्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें सहायक राजमिस्त्री, प्लंबर, सिलाई मशीन आपरेटर, ब्यूटी थैरेपिस्ट, खाद्य एवं पेय सेवा सहायक, डेयरी कर्मी, आटो सेवा तकनीशियन, डेटा एंट्री आपरेटर, रिटेल सहायक, सुरक्षा गार्ड, ऊर्जा मीटर तकनीशियन, माइक्रो फाइनेंस सहित कई रोजगारपरक विकल्प शामिल हैं। योजना की निगरानी लाइट हाउस पोर्टल के जरिये रियल टाइम में की जा रही है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपस्थिति और प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।

Thursday, January 22, 2026

अटल आवासीय विद्यालय के छात्रों को भी मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, 18 आवासीय विद्यालयों के 9 से 11 के छात्रों को मिलेगा लाभ

अटल आवासीय विद्यालय के छात्रों को भी मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, 18 आवासीय विद्यालयों के 9 से 11 के छात्रों को मिलेगा लाभ

कौशल विकास मिशन की बैठक में लिया गया निर्णय


लखनऊ। प्रदेश में प्रोजेक्ट प्रवीण का विस्तार करते हुए अब अटल आवासीय विद्यालयों के छात्रों को भी कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। कौशल विकास मिशन की बुधवार को हुई बैठक में तय किया गया कि अटल आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक व कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।


इस नई पहल के तहत सभी 18 अटल आवासीय विद्यालयों के कक्षा 9, 10 और 11 के छात्रों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य सेवा, ब्यूटी एवं वेलनेस, फूड प्रोसेसिंग, आईटी एवं आईटीईएस और परिधान क्षेत्र में दिया जाएगा। हर कक्षा के 140 छात्रों का सर्वे किया जाएगा। ताकि वे अपनी पसंद के ट्रेड का चयन कर सकें। इससे उन्हें व्यक्तिगत और भविष्य की जरूरत के अनुरूप कौशल विकास का रास्ता मिलेगा। 


मिशन निदेशक पुलकित खरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशिक्षण की कार्य योजना, पाठ्यक्रम, प्रशिक्षकों की उपलब्धता व प्रशिक्षण की गुणवत्ता मानकों पर चर्चा की गई। बैठक में पूजा यादव, अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह, संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार आदि उपस्थित थे। 

Saturday, January 17, 2026

यूपी बोर्ड सत्र 2026-27 से 9वीं और 11वीं में व्यावसायिक शिक्षा होगी अनिवार्य

सत्र 2026-27 से 9वीं और 11वीं में व्यावसायिक शिक्षा होगी अनिवार्य, यूपी बोर्ड में कौशल आधारित शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम, रोजगारपरक होगी पढ़ाई



प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने विद्यालयी शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक अहम पहल की है। परिषद द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 एवं कक्षा 11 में व्यवसायिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने का निर्णय लिया है। इस क्रम में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स, एपेरल तथा ब्यूटी एंड वेलनेस विषयों के व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को विषय समितियों द्वारा अनुमोदित कर यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह को सौंप दिया है।


इन सभी ट्रेड्स के अंतर्गत जॉब रोल आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा कई चरणों में बैठकें आयोजित की गईं। यह कार्य अपर सचिव सत्येंद्र कुमार सिंह, स्कंद शुक्ल के निर्देशन तथा उप-सचिव डॉ. आनंद कुमार त्रिपाठी के संयोजन में संपन्न हुआ। सफलतापूर्वक विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार किए गए इन पाठ्यक्रमों में वर्तमान तकनीकी आवश्यकताओं, उद्योग जगत की अपेक्षाओं और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को केंद्र में रखा गया है।

परिषद के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो विद्यार्थियों में कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक क्षमता को बढ़ावा देगी। यह कदम विद्यालयी शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने और छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है।

यूपी बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगे अन्य व्यवसायिक ट्रेड्स के पाठ्यक्रम विकसित करने का कार्य प्रगति पर है, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा का लाभमिल सके।

इन पाठ्यक्रमों के निर्माण में केंद्रीय व्यवसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल के सहयोग के साथ-साथ विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनमें संजीव कुमार आर्य (वरिष्ठ प्रशिक्षण अधिकारी, राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक संस्थान, नैनी), वीरेंद्र नाथ शुक्ला, डॉ. अदिति गोस्वामी, डॉ. दिलीप सिंह और डॉ. अविनाश पांडेय सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।

Sunday, December 21, 2025

छठवीं से पड़ेगी कॅरिअर की नींव, माध्यमिक विद्यालयों में शुरू होगी व्यावसायिक कौशल की ट्रेनिंग, समग्र शिक्षा के तहत नए सत्र से सभी स्कूलों में लागू होगी योजना

छठवीं से पड़ेगी कॅरिअर की नींव, माध्यमिक विद्यालयों में शुरू होगी व्यावसायिक कौशल की ट्रेनिंग, समग्र शिक्षा के तहत नए सत्र से सभी स्कूलों में लागू होगी योजना

प्री-वोकेशनल प्रशिक्षण पूरा, शिक्षकों को दी जा रही मास्टर ट्रेनिंग, विषयों के साथ मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

लखनऊ। अब विद्यार्थियों को कॅरिअर की दिशा तय करने का अवसर छठवीं कक्षा से ही मिलेगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत नए शैक्षिक सत्र से प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह से व्यावसायिक कौशल (वोकेशनल स्किल) की ट्रेनिंग शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही तकनीक, नवाचार और रोजगारपरक कौशल से जोड़ना है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एससीईआरटी) के अधिकारियों के अनुसार, अभी तक कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप अब इस दायरे को बढ़ाकर कक्षा 6, 7 और 8 तक किया जा रहा है, ताकि छात्र-छात्राएं रुचि के अनुसार कौशल विकसित कर सकें।


मंडल स्तर पर पूरी हुई प्री-वोकेशनल मास्टर ट्रेनिंग : योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों को पहले प्रशिक्षित किया जा रहा है। नवंबर माह में लखनऊ में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंडल स्तर पर प्री-वोकेशनल की मास्टर ट्रेनिंग दी गई। इसमें निशातगंज राजकीय इंटर कॉलेज के गणित एवं विज्ञान शिक्षक स्वतंत्र कुमार गुप्ता को प्रशिक्षित किया गया है। 

अब मंडल स्तर पर प्रशिक्षित शिक्षक जिलों में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को नियमित विषयों के साथ-साथ अतिरिक्त रूप से वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए अल्पकालीन प्रशिक्षण कोर्स भी संचालित किए जाएंगे। इन कोर्सों के माध्यम से छात्र मैकेनिक, इलेक्ट्रीशियन, मोबाइल रिपेयरिंग, फिटर, वेल्डर, आईटी, कंप्यूटर, प्लंबिंग, सर्विस सेक्टर और अन्य तकनीकी क्षेत्रों से जुड़ा व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे। 

कार्यरत माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे, जिससे योजना को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके। स्वतंत्र कुमार के अनुसार, कक्षा छह से ही व्यावसायिक कौशल की शुरुआत से विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता और व्यावहारिक समझ विकसित होगी।

Wednesday, October 29, 2025

अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय, बेसिक, राजकीय और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय का किया निरीक्षण और दिए ये निर्देश


अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय, बेसिक, राजकीय और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय का किया निरीक्षण और दिए ये निर्देश 


उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी

अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा ने जूनियर एडेड भर्ती में पारदर्शिता पर दिया जोर


प्रयागराज। राज्य सरकार अब व्यावसायिक शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम कर रही है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि राज्य में व्यावसायिक शिक्षा का जो स्तर है, उसे ऊंचा उठाने की आवश्यकता है। सरकार का लक्ष्य है कि वोकेशनल ट्रेनिंग इतनी मजबूत हो कि उसका स्तर राष्ट्रीय मानकों के बराबर हो जाए।


अपर मुख्य सचिव मंगलवार को माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय, बेसिक, राजकीय और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के निरीक्षण पर पहुंचे थे। उन्होंने जूनियर एडेड 2021 भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरतने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि विज्ञान के अध्यापकों की भर्ती शीघ्र की जाए ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।


उन्होंने पाठ्यपुस्तकों के सही और समयबद्ध प्रकाशन के भी निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि राज्य में कोई भी बच्चा अशिक्षित न रहे। इसके लिए उन्होंने शिक्षा के प्रत्येक स्तर को आपस में जोड़ने की जरूरत बताई। कहा कि आंगनबाड़ी से निकलने वाला हर बच्चा प्राइमरी स्कूल में पहुंचे, प्राइमरी से जूनियर, जूनियर से हाईस्कूल और आगे की शिक्षा तक जाए। यह अध्यापकों, बीएसए और जिला विद्यालय निरीक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।


उन्होंने कहा कि शिक्षकों का उत्साह और संवेदनशीलता ही बच्चों के भविष्य की नींव है। यदि शिक्षक प्रेरित रहेंगे तो कोई भी बच्चा बीच में पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होगा। इस दौरान उन्होंने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़ीं योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।


उन्होंने कहा कि भवनों के सुधार के लिए बजट आवंटित किया गया है। कोशिश है कि माध्यमिक और बेसिक, निदेशालय शिक्षा परिषद माध्यमिक, राजकीय का भवन अच्छा दिखे। इस अवसर पर एडी माध्यमिक सुरेंद्र तिवारी, एडी राजकीय अजय द्विवेदी, सचिव यूपी बोर्ड भगवती सिंह और उप शिक्षा निदेशक संस्कृत रामाज्ञा सिंह समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

Monday, August 4, 2025

कक्षा 9 से 12 तक छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य, 23 चुने हुए सेक्टरों में से एक ट्रेड का अध्ययन करना होगा

कक्षा 9 से 12 तक छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य, 23 चुने हुए सेक्टरों में से एक ट्रेड का अध्ययन करना होगा

शिक्षण संस्थान अपने खर्च पर संचालित कर सकेंगे कोर्स

व्यावसायिक शिक्षा में कालेजों की भी तय की गई जिम्मेदारी


लखनऊः उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब छात्रों को अपनी नियमित पढ़ाई के साथ-साथ एक व्यावसायिक ट्रेड (जाब रोल) सीखना अनिवार्य होगा। इस नई नीति के तहत, छात्रों को 23 चुने हुए सेक्टरों में से किसी एक का ट्रेड चुनना होगा। यह बदलाव हाईस्कूल (कक्षा 9-10) और इंटरमीडिएट (कक्षा 11-12) दोनों स्तरों पर लागू होगा।

पहले नैतिक शिक्षा, योग, खेल और समाजोपयोगी कार्य जैसे विषय पढ़ाए जाते थे, लेकिन अब छात्रों को आटोमोबाइल, बैंकिंग, इलेक्ट्रिशियन आदि जैसे व्यावसायिक ट्रेड में से एक का चयन करना होगा। इस संबंध में विशेष सचिव ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, इंटर की परीक्षा में बैठने के लिए छात्रों को हाईस्कूल या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा, और कक्षा 11 से ही एक व्यावसायिक ट्रेड का चयन करना होगा।

यदि छात्र ने कक्षा 9-10 में एक ट्रेड सीखा है तो कक्षा 11-12 में उसे किसी दूसरे सेक्टर का ट्रेड लेना होगा। इस नीति का उद्देश्य छात्रों को न केवल पढ़ाई में बल्कि किसी हुनर में भी दक्ष बनाना है। इसके साथ ही व्यावसायिक शिक्षा में कालेजों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

हर मान्यता प्राप्त स्कूल को अपनी सुविधा और क्षेत्र की जरूरत के अनुसार दो-दो व्यावसायिक क्षेत्रों का चयन करना होगा। इनमें से एक-एक जाब रोल का अध्ययन छात्रों को कक्षा 9 से 12 तक कराना होगा। इसके लिए संस्थाएं अपने निजी संसाधनों से व्यवस्था करेंगी और सरकार की ओर से कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं दी जाएगी। स्कूलों को इसके लिए किसी नई मान्यता की आवश्यकता नहीं होगी। वे जिस सेक्टर में पढ़ा रहे हैं, उसे स्वतः मान्य माना जाएगा।

स्कूल, जाब रोल की ट्रेनिंग के लिए आस-पास के वर्कशाप, उद्योगों या कंपनियों से जुड़ सकते हैं। विद्यालय अवधि के बाद इन संसाधनों का उपयोग स्कूल अपनी आय बढ़ाने के लिए भी कर सकेंगे। इस नई नीति से छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ हुनर भी मिलेगा, जिससे वे भविष्य में नौकरी या स्वरोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे। संस्थाओं द्वारा संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के व्यावहारिक ज्ञान के लिए नजदीकी वर्कशाप, उद्योग या कंपनियों से संपर्क किया जाएगा।

ये हैं व्यावसायिक क्षेत्र
एयरोस्पेस और एविएशन, कृषि, परिधान, आटोमोबाइल, बैंकिंग, सौंदर्य एवं वेलनेस, कैपिटल गुड्स, निर्माण, घरेलू कार्य, इलेक्ट्रानिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य देखभाल, सूचना प्रौद्योगिकी, लाजिस्टिक्स, मीडिया और मनोरंजन, शारीरिक शिक्षा, प्लंबिंग, बिजली, निजी सुरक्षा, स्किल काउंसिल, खेल, पर्यटन और आतिथ्य, दूरसंचार।




हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा (कक्षा-9 से 12) में व्यावसायिक क्षेत्रों से सम्बन्धित जॉब रोल्स को अनिवार्य रुप से पढ़ाये जाने के सम्बन्ध में 


Wednesday, April 2, 2025

CBSE : बाहरवीं के पाठ्यक्रम में चार तो 9वीं और 10 वीं में एक स्किल इलेक्टिव विषय जोड़े गए

CBSE : बाहरवीं के पाठ्यक्रम में चार तो 9वीं और 10 वीं में एक स्किल इलेक्टिव विषय जोड़े गए  

सत्र 2025-26 में स्कूलों को इस पाठ्यक्रम के आधार पर ही पढ़ाना है


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र (2025-26) के लिए नौवीं से बारहवीं कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम जारी कर दिया है। 12वीं के पाठ्यक्रम में बोर्ड ने स्किल इलेक्टिव विषयों के ग्रुप में चार विषयों को जोड़ा है, इनमें लैंड ट्रांसपोर्टेशन एसोसिएट, इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर, डिजाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन व फिजिकल एक्टिविटी ट्रेनर शामिल हैं।

12वीं के इन चारों स्किल इलेक्टिव विषयों में 50 अंकों की थ्योरी व 50 अंकों का प्रैक्टिकल होगा। इन विषयों को जोड़ने के पीछे बोर्ड का उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान देने के साथ-साथ काम करने के लिए जरूरी चीजें भी सिखाना है।


9वीं व 10वीं के पाठ्यक्रम में दो भाषा (एक भाषा अनिवार्य व एक अन्य भाषा), सोशल साइंस, गणित, साइंस कोर विषयों के अलावा व वैकल्पिक विषय के रूप में किसी स्किल विषय व हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन, आर्ट एजुकेशन को पढ़ना होगा। वहीं, अब छात्रों को तीन स्किल-आधारित सब्जेक्ट्स स्कूल कंप्यूटर ऐप्लिकेशन, इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी, व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में से भी एक का चुनाव करना होगा। इस नए पाठ्यक्रम के आधार पर छात्रों का मूल्यांकन होगा। 


ये विषय शामिल किए

■ लैंड ट्रांसर्पोटेशन
■ इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर
■ डिजाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन
■ फिजिकल ट्रेनर एक्टिविटी

Thursday, March 27, 2025

लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम में स्कूल भी चयनित और लैब भी निर्मित, लेकिन पढ़ाने के लिए नहीं हो सका तकनीकी अनुदेशको का चयन

लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम में स्कूल भी चयनित और लैब भी निर्मित, लेकिन पढ़ाने के लिए नहीं हो सका तकनीकी अनुदेशको का चयन

■ दो चरणों में 43250 रुपये से विद्यालयों में स्थापित हुई प्रयोगशाला

■ सितंबर से अब तक नहीं हो सका विषय विशेषज्ञों का चयन

प्रयागराज। कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं के कौशल विकास के लिए करोड़ों रुपयों से प्रदेश  के हजारों उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में प्रयोगशाला तो स्थापित कर ली गई है लेकिन इन बच्चों को सिखाने के लिए  तकनीकी अनुदेशकों का चयन अब तक नहीं हो सका है। 


महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने पिछले वर्ष नौ सितंबर को ही तकनीकी अनुदेशकों के चयन के आदेश दिए थे लेकिन छह महीने बाद भी चयन नहीं हो सका है। प्रदेश सरकार ने इन स्कूलों में प्रयोगशाला उपकरण खरीदने के लिए दो चरणों में 14,480 और 28,770 कुल 43,250 रुपये दिया है। उपकरणों की खरीद भी हो चुकी है। 


जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को तकनीकी अनुदेशकों का चयन जेम पोर्टल के माध्यम से करना है लेकिन छह महीने में भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जानकारों की मानें तो यह स्थिति केवल प्रयागराज में ही नहीं बल्कि प्रदेश के दो-चार जिलों को छोड़ दें तो अधिकांश जिलों में अनुदेशक चयन नहीं हो सका है। प्रदेश में 1772 स्कूल इस कार्यक्रम के तहत चुने गए हैं। 


2402 अनुदेशकों का होना है चयनः प्रदेशभर के 886 विकासखंडों में कुल 2402 तकनीकी अनुदेशकों का चयन होना है। इनमें इंजीनियरिंग और वर्कशॉप ट्रेड, एनर्जी एंड इन्वायमेंट ट्रेड, एग्रीकल्चर, नर्सरी एंड गार्डनिंग और होम एंड हेल्थ ट्रेड शामिल है। अनुदेशकों को 10450 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।

Thursday, February 27, 2025

प्रवीण योजना के तहत कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों का कौशल विकास होगा, माध्यमिक के छात्र व्यावसायिक शिक्षा से बनेंगे दक्ष व आत्मनिर्भर

प्रवीण योजना के तहत कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों का कौशल विकास होगा, माध्यमिक के छात्र व्यावसायिक शिक्षा से बनेंगे दक्ष व आत्मनिर्भर

1100 माध्यमिक स्कूलों में अभिरुचि के अनुसार कोर्स शुरू होंगे

853 माध्यमिक विद्यालयों में समग्र शिक्षा के तहत पहले से कोर्स चल रहे


लखनऊ। माध्यमिक स्कूलों में अब विद्यार्थियों की अभिरुचि के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा मिलेगी। सरकार अगले शैक्षिक सत्र से पहले इसके लिए बकायदा स्कूलवार सर्वेक्षण कराएगी और जो विद्यार्थी व्यवसायिक शिक्षा से जुड़े जिस भी विषय को पढ़ना चाहेंगे, उन्हें उन्हीं विषयों की शिक्षा दी जाएगी। नए सत्र में सरकार प्रदेश के 1100 माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की अभिरुचि के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का कोर्स शुरू करने जा रही है। इसके लिए तैयारियां अन्तिम चरण में है।


प्रवीण योजना के तहत सरकार माध्यमिक स्कूलों में अब नए सिरे से व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े कोर्स की शुरुआत करने जा रही है, जो प्रदेश के ऐसे 1100 माध्यमिक विद्यालय, जहां अभी व्यवसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। इन विद्यालयों में सिरे से व्यवसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू करने का मुख्य उद्देश्य माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक विषयों में महत्त्वपूर्ण कौशल प्रदान करना है ताकि वे 10 या 12 वीं कक्षा के बाद ही उद्यमिता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें।

 इसके तहत जिस विद्यार्थी की जिस ट्रेड में रुचि होगी, उसका उसी ट्रेड में नामांकन किया जाएगा। सर्वे में किसी स्कूल में एक ट्रेड के विद्यार्थी कम होंगे तो उस ट्रेड के विद्यार्थियों को उसी ट्रेड के अधिक संख्या वाले विद्यालयों से ऑनलाइन या अन्य किसी विधि से सम्बद्ध कर मनपसंद व्यवसायिक ट्रेड की शिक्षा दिलाई जाएगी। विभाग की ओर से इस बारे में स्कूलों में सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे पूरा होते ही इस मामले में तैयार किए गए नए फार्मूले को विभाग सार्वजनिक करेगा।

 प्रदेश में अब तक समग्र शिक्षा के तहत 853 माध्यमिक विद्यालयों में पहले से व्यावसायिक शिक्षा का कोर्स संचालित किया जा रहा है। वहीं 892 सहायता प्राप्त एवं राजकीय स्कूलों में करीब एक दशक पूर्व शुरू हुई पुरानी व्यावसायिक शिक्षा योजना के तहत विद्यार्थियों को व्यवसायिक शिक्षा मुहैय्या कराई जा रही है।


ये विषय होंगे शामिल
एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, आईटी एण्ड आईटीईएस, प्लंबिंग, रिटेल, सिक्यूरिटी, इलेक्ट्रिकल वर्क, पावर, सोलर सिस्टम इंस्टॉलेशन, मोबाइल रिपेयरिंग, टेक्सटाइल डिजाइन, स्पोर्ट्स एण्ड फिजिकल एजुकेशन, ट्रांसपोर्टेशन एण्ड लॉजिस्टिक और वेयर हाउस, हेल्थ केयर, कंस्ट्रक्शन, टेलीकम्यूनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड हार्डवेयर, फोटोग्राफी, गारमेंट डिजाइन और डेकोरेशन, रेडियो तथा टेलीविजन टेक्नोलॉजी एवं डिजिटल मार्केटिंग विषय के नाम मुख्य रूप से शामिल हैं।

Wednesday, February 19, 2025

856 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 64 हजार छात्र होंगे "प्रवीण"

856 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 64 हजार छात्र होंगे "प्रवीण"

19 फरवरी 2025
लखनऊ। प्रदेश में प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत प्रदेश के 856 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 64 हजार छात्रों को अत्याधुनिक क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनको राष्ट्रीय प्रमाण पत्र भी मिलेगा। चार मार्च से पूरे प्रदेश में एक साथ इस प्रशिक्षण की शुरुआत होगी। 

माध्यमिक शिक्षा विभाग, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता विभाग के साथ मिलकर इसे पूरा करेगा। प्रदेश में माध्यमिक स्तर पर ही छात्रों को उद्योगों से जोड़ने व उसके अनुरूप तैयार करने के तहत प्रोजेक्ट प्रवीण की शुरुआत की गई थी। वर्तमान सत्र 2024-25 में इसके तहत 856 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के लगभग 64 हजार छात्रों को इसमें प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

इसके तहत छात्रों को हर दिन डेढ़ घंटे का कौशल प्रशिक्षण देकर उद्योगों से जोड़ा जाएगा। इसमें कक्षा नौ से 12 के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन कक्षाओं के छात्रों को आईटी, ब्यूटीशियन व वेलनेस, ऑटोमोटिव, बैंकिग व फाइनेंस, कारपेट व हैंडीक्रॉफ्ट, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रानिक्स, टेलीकम्युनिकेशन, मीडिया व इंटरटेनमेंट, पॉवर, रिटेल, खेलकूद व पर्यटन से संबंधित क्षेत्रों के कौशल पाठ्यक्रमों में कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। 




1140 माध्यमिक विद्यालयों के 60 हजार विद्यार्थी होंगे प्रवीण, कौशल विकास मिशन की ओर से दिया जाएगा प्रशिक्षण, विद्यार्थियों को दी जाएगी 200 से 300 घंटे की ट्रेनिंग 

20 अक्टूबर 2024
लखनऊ। प्रदेश में कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से कौशल विकास मिशन की ओर से दिए जा रहे प्रशिक्षण प्रवीण का नए सत्र में विस्तार किया गया है। पिछले साल की अपेक्षा तीन गुणा ज्यादा विद्यालयों के विद्यार्थियों को कुशल बनाया जाएगा। जिससे वे चाहें तो हाईस्कूल या इंटर करने के बाद खुद का रोजगार शुरू कर सकें।

पिछले साल प्रोजेक्ट प्रवीण में 315 विद्यालय शामिल किए गए थे। इस बार 1140 माध्यमिक विद्यालयों के 60 हजार से अधिक विद्यार्थियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। योजना के तहत प्रति विद्यालय कम से कम 40 छात्रों को योजना का लाभ मिलेगा। इसमें छात्राओं के चयन को प्राथमिकता दी जाएगी। खास यह कि इस प्रशिक्षण के बाद कौशल विकास मिशन की ओर से इन विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। ताकि ये विद्यार्थी कहीं जॉब के लिए जाते हैं तो इसका प्रयोग भी कर सकेंगे।

योजना के तहत विद्यार्थियों को किसी भी दो जॉब रोल में 200 से 300 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार जल्द ही इसके लिए दोनों विभागों के बीच अनुबंध किया जाएगा।


इन क्षेत्रों में दिया जाएगा प्रशिक्षण

ब्यूटीशियन, सिलाई और कढ़ाई, आईटी एंड इलेक्ट्रानिक्स, अपेरल (टेक्सटाइल डिजाइनिंग), सिक्योरिटी, रिटेल मैनेजमेंट, कंप्यूटर ऑपरेटर, डिजिटल मार्केटिंग आदि।



प्रोजेक्ट प्रवीण अंर्तगत प्रशिक्षण के जरिये एक लाख छात्र-छात्राएं बनेंगे दक्ष,  चयनित माध्यमिक विद्यालयों में चलेगा अभियान

कक्षा 9 से 12 के छात्रों को प्रतिदिन 90 मिनट का देंगे कौशल प्रशिक्षण

15 अक्टूबर 2024
लखनऊ। छात्रों के कौशल विकास को निखारने और युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत इस साल एक लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय किया गया है। सत्र 2024-25 में इसका विस्तार करते हुए इसे प्रदेशभर के चयनित माध्यमिक विद्यालयों में लागू किया जाएगा। मकसद है युवाओं का कौशल विकास कर उन्हें रोजगार के लिए तैयार करना।

व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संकल्पना के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट प्रवीण की शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों व कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को नियमित पढ़ाई के साथ निशुल्क कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


अब तक 63 हजार को किया प्रशिक्षित

उन्होंने बताया कि अब तक 315 राजकीय विद्यालयों के 63 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अंतर्गत कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को प्रतिदिन 90 मिनट का कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से प्रदेश के विभिन्न जिलों के चयनित विद्यालयों में यह कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों के समन्वयकों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जिन सेक्टरों में रोजगार की अधिक संभावनाएं हैं और विद्यार्थियों की रुचि है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए। मंत्री ने बताया कि योजना में अधिक से अधिक बालिकाओं को जोड़ने के लिए बालिका विद्यालयों का चयन प्राथमिकता पर किया जाएगा।

Wednesday, June 19, 2024

माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा, रुचि के अनुसार दो ट्रेड चुन सकेंगे

माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा, रुचि के अनुसार दो ट्रेड चुन सकेंगे



समग्र शिक्षा के तहत माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए 18 प्रकार के ट्रेड की सूची तैयार की गई है। माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा में रुचि के अनुसार दो ट्रेड चुन सकते हैं।


नई शिक्षा नीति के तहत व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। जिससे विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ रोजगारपरक शिक्षा ले सकें। इसी को लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद नए शैक्षिक सत्र में राजकीय सहित सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण करेंगे। 


माध्यमिक शिक्षा परिषद से 18 प्रकार के ट्रेडों की सूची जिले में आई है। इस सूची को प्रधानाचार्यों के पास भेज दिया गया है। उन्हें सूची से दो ट्रेड चयनित करने के लिए कहा गया है। ट्रेडों की जानकारी जिला परियोजना अधिकारी को भेजी जाएगी।


सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर होगा फोकसः विद्यालयों में ट्रेड्स के निर्धारण में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग नहीं हैं, वहां कृषि से संबंधित ट्रेड्स को प्रमुखता से लागू किया जाएगा।


 व्यावसायिक शिक्षा के लिए स्थानीय पॉलीटेक्निक, आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, किसान सेवा केंद्र, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, स्किल इंडिया मिशन, यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के साथ चिकित्सा, पशुपालन, कृषि और फलोत्पादन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा को नए रूप में लागू करने के लिए विद्यार्थियों को भाषा की दक्षता, उद्यमिता का ज्ञान आदि की जानकारी भी दी जाएगी। 

Thursday, June 6, 2024

CBSE कक्षा 9 व 10 में एक स्किल सब्जेक्ट करेगा अनिवार्य, अगले शैक्षणिक सत्र से हर स्कूल को चुनना होगा कम से कम एक स्किल कोर्स

CBSE कक्षा 9 व 10 में एक स्किल सब्जेक्ट करेगा अनिवार्य, अगले शैक्षणिक सत्र से हर स्कूल को चुनना होगा कम से कम एक स्किल कोर्स


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) कक्षा नौ से 12वीं तक संचालित स्किल कोर्स को अनिवार्य करने जा रहा है। अब तक ये कोर्स सीबीएसई स्कूलों में वैकल्पिक तौर पर चलाए जाते हैं। मसलन, सीबीएसई की ओर से चलाए जाने वाले कुल कोर्स में से संबंधित स्कूल अपनी सुविधा के हिसाब से कुछ कोर्स चुनते हैं और छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं। मगर, अब ऐसा नहीं होगा।


सीबीएसई कक्षा नौ से 12 तक नियमित पाठ्यक्रमों के साथ 33 स्किल और व्यावसायिक कोर्स संचालित करता है। इसका मकसद नियमित पढ़ाई के साथ छात्र- छात्राओं का व्यावसायिक कौशल विकास करना है। नई शिक्षा नीति में इन पाठ्यक्रमों पर खास जोर दिया गया है। कक्षा नौ से लेकर 12वीं तक फिजिकल एक्टिविटी एंड ट्रेनर, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, फाउंडेशन स्किल फॉर साइंस, डिजाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटलीजेंस, लैंड ट्रांसपोर्टेशन एसोसिएट समेत 33 प्रोफेशनल और स्किल पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। 


सीबीएसई पैटर्न स्कूल अपनी सहूलियत के हिसाब से इनमें से कोर्स चुनकर पढ़ाते हैं। मगर, शैक्षणिक सत्र 2025-26 से सीबीएसई कम से कम एक स्किल कोर्स की पढ़ाई अनिवार्य करेगा। उन्हें उस पाठ्यक्रम के लिए शिक्षक और अन्य व्यवस्थाएं करनी होंगी।


 सीबीएसई आगामी सत्र से स्किल बेस्ड पाठ्यक्रमों को हर स्कूल में अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है। कम से कम एक कोर्स हर स्कूल को अनिवार्य रूप से चुनना ही होगा। कक्षा नौ और 10 में तो यह जरूर लागू हो सकता है।

Saturday, February 3, 2024

इंटरमीडिएट कॉलेजों में ITI की होगी पढ़ाई, NEP-2020 के तहत नए सत्र से कोर्स शुरू करने की तैयारी

इंटरमीडिएट कॉलेजों में आईटीआई की होगी पढ़ाई

एनईपी-2020 के तहत नए सत्र से कोर्स शुरू करने की तैयारी, एआईसीटीई से लेना होगा अनुमोदन

एक व दो वर्षीय, शॉर्ट टर्म कोर्स चलेंगे अब इंटरमीडिएट के बाद विद्यार्थियों को नहीं छोड़ना पड़ेगा कॉलेज

टेक्नीशियन पावर इलेक्ट्रानिक्स, मैकेनिक, कम्प्यूटर, मल्टी मीडिया व इंटरनेट आदि के चलेंगे कोर्स


लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत राजधानी समेत प्रदेश के इंटरमीडिएट कॉलेजों में मल्टी एजुकेशनल कोर्स चलाने की योजना रही है। इससे विद्यार्थियों को इंटरमीडिएट के बाद आईटीआई, डिप्लोमा कोर्स के लिए दूसरे शिक्षण संस्थानों में नहीं जाना होगा।


वे एक ही संस्थान में कौशल, तकनीक व डिप्लोमा कोर्स कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए कॉलेज को अखिल भारतीय तकनीक शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से अनुमोदन लेना जरूरी होगा।

एनईपी-2020 के तहत विद्यार्थियों को मल्टी एजुकेशनल शिक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है। इसके आधार पर शिक्षण संस्थानों में एक, दो, तीन व चार वर्ष के डिप्लोमा, डिग्री कोर्स चलाए जा रहे हैं। इसी के तहत माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में भी तकनीक व कौशल रोजगारपरक शिक्षा को लागू करने की योजना बनाई जा रही है। 

प्रशिक्षण एवं सेवायोजन विभाग के मुताबिक पॉलिटेक्निक व इंजीनियरिंग कॉलेजों में पहले से आईटीआई से जुड़े कोर्स चलाए जा रहे हैं। आगामी सत्र से माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में भी यह व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इस संबंध में बीते दिनों एआईसीटीई के साथ हुई ऑनलाइन मीटिंग में व्यावसायिक कोर्स चलाने पर चर्चा हुई।


व्यावसायिक कोर्स चलाने पर जोर...
प्रशिक्षण एवं सेवायोजन विभाग के अनुसार शिक्षण संस्थानों में ज्यादा से ज्यादा व्यावसायिक कोर्स चलाए जा रहे हैं। सीआईटीएस के तहत तकनीक शिक्षण संस्थानों में 78 से अधिक आईटीआई कोर्स चल रहे हैं। माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में मल्टी एजुकेशनल की व्यवस्था लागू होने पर एक व दो वर्षीय और शॉर्ट टर्म कोर्स चलेंगे। इनमें टेक्नीशियन पावर इलेक्ट्रानिक्स, मैकेनिक, कम्प्यूटर, मल्टी मीडिया व इंटरनेट सहित अन्य कोर्स शामिल होंगे।


स्किल कौशल की मिलेगी जानकारी
माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में आईटीआई से जुड़े कोर्स चलाए जाते हैं तो विद्यार्थियों को स्किल कौशल की जानकारी मिलेगी। एक ही संस्थान में इलेक्ट्रिकल, टेक्नीशियन व मल्टी मीडिया के शॉर्ट टर्म कोर्स की पढ़ाई की जा सकेगी।- राजकुमार यादव, प्राचार्य, आईटीआई अलीगंज


आत्मनिर्भर बनेंगे छात्र 
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रावधान है कि माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक कोर्स लागू किया जाए। इससे स्वरोजगार व आत्मनिर्भर बनने की शिक्षा मिलेगी। देखा गया है कि इंटर पास विद्यार्थियों के पास कौशल शिक्षा की जानकारी नहीं होती। ऐसे में व्यावसायिक कोर्स लागू होने से इन्हें लाभ मिलेगा। - महेंद्र देव, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा

Tuesday, January 9, 2024

परिषदीय और माध्यमिक स्कूलों में वर्ष 2025 तक 50 फीसदी छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा देने की तैयारी

परिषदीय और माध्यमिक स्कूलों में वर्ष 2025 तक 50 फीसदी छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा देने की तैयारी

माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से सभी डीआईओएस को भेजा पत्र


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा योजना लागू किया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 2025 तक 50 फीसदी विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दिए जाने की सरकार की योजना है। इसी के तहत राज्य के परिषदीय एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा को कोर्स के रूप में शुरू करने पर गम्भीरता से विचार कर रही है ताकि अधिक से अधिक युवाओं को शिक्षा पूरी करने के बाद स्वरोजगार से जुड़ने में न कोई दिक्कत हो।


इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से प्रदेश भर के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत सरकारी एवं अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में व्यवसायिक शिक्षा शुरू करने की योजना है, जिसका विस्तृत प्रारूप शीघ्र ही प्रेषित किया जाएगा। 


पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2025 तक 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को व्यवसायिक शिक्षा देने की योजना है, लिहाजा स्कूलों में इसकी तैयारियां तत्काल शुरू करना समीचीन होगा। पत्र में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को कहा गया है कि सभी सरकारी एवं अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूलों में इस योजना को लागू करना है। 


इसके लिए स्कूलों में पूर्व से चल रही एच्छिक व्यवसायिक शिक्षा योजना, समग्र शिक्षा (माध्यमिक) से संचालित व्यवसायिक शिक्षा योजना एवं कौशल विकास मिशन द्वारा संचालित प्रवीण योजना वाले स्कूलों में चल रहे आवश्यक उपकरणों, सामग्रियों एवं कार्यशाला तथा उनमें अध्यनरत विद्यार्थियों की विद्यालयवार मैपिंग भी की जाए। 


इसका मकसद निर्धारित समय से पहले ही इसके लिए विद्यालय स्तर पर भी तैयारियां पूरी करना है। निदेशालय की ओर से इस संबंध में एक प्रारूप भी सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजा गया है, जिसमें जिले स्तर पर तैयार रोडमैप की जानकारी देनी होगी।


Thursday, December 28, 2023

NEP के तहत माध्यमिक विद्यालयों में 50 फीसदी बच्चों को मिलेगी व्यावसायिक शिक्षा, मैपिंग शुरू

NEP के तहत माध्यमिक विद्यालयों में 50 फीसदी बच्चों को मिलेगी व्यावसायिक शिक्षा, मैपिंग शुरू


लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)- 2020 के तहत प्रदेश के राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में भी छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी। विभाग ने इसके लिए विद्यालयों की मैपिंग शुरू कर दी है। एनईपी में किताबों का बोझ कम करने के साथ कौशल विकास पर फोकस किया गया है।


 उच्च शिक्षा से लेकर बेसिक तक में इसकी प्रक्रिया चल रही है। इसके तहत राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में भी व्यावसायिक शिक्षा योजना लागू करने की प्रक्रिया तेज हुई है। इसमें 2025 तक 50 फीसदी छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तेज हुई प्रक्रिया

देने का लक्ष्य रखा गया है।

विद्यार्थियों को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक कंप्यूटर से जुड़ा प्रशिक्षण, ड्रोन, एआई, मशीन लर्निंग आदि की जानकारी दी जाएगी। विद्यालयों में अगर पहले से ऐसी कोई योजना चल रही है या इसे लागू करने के लिए आवश्यक जरूरत, कौशल विकास मिशन, विभिन्न जॉब रोल, ट्रेड, आवश्यक उपकरण, कार्यशाला आदि की जानकारी मांगी गई है। साथ ही अवस्थापना सुविधाओं व अन्य जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा ताकि इसे प्रभावी बनाने में दिक्कत न हो।

Wednesday, December 6, 2023

यूपी कौशल विकास मिशन खुद शुरू कर सकेगा कोर्स, देगा डिग्री

यूपी कौशल विकास मिशन खुद शुरू कर सकेगा कोर्स, देगा डिग्री

प्रदेश की पहली संस्था जिसे मिला यह अधिकार

एनसीवीईटी के साथ एमओयू, शुरू होंगे नए कोर्स


लखनऊ : उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन अब खुद नया कोर्स शुरू कर सकेगा, मूल्यांकन के लिए विद्यार्थियों की खुद ही परीक्षा ले सकेगा और सर्टिफिकेट व डिग्री भी दे सकेगा। यह प्रदेश की पहली संस्था है जिसे राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी), नई दिल्ली ने यह अधिकार दिया है। अभी तक इसके लिए उन्हें एनसीवीईटी की अनुमति लेनी पड़ती थी। यही नहीं इसके द्वारा शुरू किए जाने वाले पाठ्यक्रमों की मान्यता पूरे देश में होगी। विद्यार्थियों को अधिक से अधिक नए कोर्सेज की पढ़ाई का विकल्प मिलेगा।


एनसीवीईटी के अध्यक्ष डा. निर्मलजीत सिंह कलसी की मौजूदगी में प्रमुख सचिव, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता एम. देवराज और एनसीवीईटी के सचिव कर्नल संतोष कुमार ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। 


एनसीवीईटी, नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में डा.कलसी ने कहा कि अवार्डिंग बाडी (ड्यूल) का अधिकार मिलने से यह एनसीवीईटी की तरह ही कौशल विकास मिशन भी सर्टिफिकेट व डिग्री जारी कर सकेगा। 


कोर्सेज की मान्यता पूरे देश में होने से विद्यार्थियों को रोजगार हासिल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी। एम.देवराज ने कहा कि अब युवाओं के लिए जल्द नए-नए रोजगारपरक कोर्स शुरू किए जाएंगे। विद्यार्थियों के लिए समय की मांग के अनुसार यह कोर्स शुरू किए जाएंगे। कौशल विकास मिशन अधिक से अधिक युवाओं को हुनरमंद बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

Tuesday, June 28, 2022

UP के 50% माध्यमिक स्कूलों में शुरू होंगे व्यावसायिक कोर्स

UP के 50% माध्यमिक स्कूलों में शुरू होंगे व्यावसायिक कोर्स



उत्तर प्रदेश के 50 प्रतिशत माध्यमिक स्कूलों में अगले चार साल के अंदर व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यूपी को यह लक्ष्य दिया है। वर्तमान में यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के कुल 41 ट्रेड विषय संचालित करता है। लेकिन चुनिंदा स्कूलों में ही इन्हें पढ़ाया जाता है। इनमें से तमाम कोर्स ऐसे हैं जिनमें 50 छात्र भी पंजीकरण नहीं कराते।


युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2022-23 शैक्षिक सत्र के लिए वार्षिक कार्ययोजना और बजट को लेकर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक के 22 जून को जारी मिनट्स में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।


माध्यमिक स्कूलों में होंगी स्मार्ट क्लास

सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों समेत माध्यमिक स्कूलों में इन्फार्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) और स्मार्ट क्लास की सुविधा दी जाएगी। छात्र-छात्राओं को इंटरनेट की नि:शुल्क सुविधा भी मिलेगी। राज्य सरकार को स्कूलों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।


कक्षा नौ में प्रवेश के लिए बच्चों को करेंगे तैयार

आठवीं पास करने वाले बच्चों का कक्षा नौ में पंजीकरण बढ़ाने के मकसद से बच्चों को मानसिक रूप से तैयार किया जाएगा। पीएबी रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों को माध्यमिक शिक्षा के लिए तैयार करने के मकसद से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के जरिए दो-तीन महीने का स्कूल रेडिनेस कोर्स बनवाया जाएगा।