कक्षा में पढ़ाई संग कमाई की तैयारी, प्रशिक्षण लेकर 89 हजार से अधिक विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनने की राह में
लखनऊ: माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई सिर्फ किताबों और परीक्षा तक सीमित नहीं रही। प्रदेश के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम छात्रों को पढ़ाई के साथ कमाई के लिए भी तैयार कर रहा है। सिलाई, प्लंबरिंग, आटो सर्विसिंग, डेटा एंट्री, ब्यूटी वेलनेस, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे रोजगारोन्मुख कार्यक्रम में प्रशिक्षण लेकर 89 हजार से अधिक विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
प्रदेश सरकार की यह कौशल विकास आधारित पहल माध्यमिक स्तर पर ही छात्रों को रोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। योजना के तहत कक्षा में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ प्रयोगशालाओं और वर्कशाप में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षक विद्यार्थियों को वास्तविक कार्य परिस्थितियों से परिचित करा रहे हैं, जिससे वे आगे नौकरी या स्वरोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
शैक्षिक सत्र 2025-26 में योजना का दायरा और बढ़ाया गया। इसमें प्रदेश के 1701 माध्यमिक विद्यालयों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ा गया है, जहां विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण चल रहा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव के अनुसार इन विद्यालयों में संचालित सभी वोकेशनल कोर्स जनवरी तक पूरे कर लिए जाएंगे। इससे पहले 2022-23 में 289, 2023-24 में 356 और 2024-25 में 208 विद्यालयों में योजना लागू हुई थी, जहां 100 प्रतिशत कोर्स सफलतापूर्वक पूरे किए, गए।
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को 16 ट्रेड्स और 18 जाब रोल्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें सहायक राजमिस्त्री, प्लंबर, सिलाई मशीन आपरेटर, ब्यूटी थैरेपिस्ट, खाद्य एवं पेय सेवा सहायक, डेयरी कर्मी, आटो सेवा तकनीशियन, डेटा एंट्री आपरेटर, रिटेल सहायक, सुरक्षा गार्ड, ऊर्जा मीटर तकनीशियन, माइक्रो फाइनेंस सहित कई रोजगारपरक विकल्प शामिल हैं। योजना की निगरानी लाइट हाउस पोर्टल के जरिये रियल टाइम में की जा रही है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपस्थिति और प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।
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