सीबीएसई : 10वीं तक नहीं बदलनी होगी विदेशी भाषा, तीन भाषाओं वाली नीति में विद्यार्थियों को बड़ी राहत
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में तीन भाषाओं वाली नीति (त्रि-भाषा फॉर्मूला) को लेकर भ्रम को दूर किया है, जिससे लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ने वाले जिन विद्यार्थियों ने त्रि-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं को चुना है, उन्हें मौजूदा भाषाएं बदलने की जरूरत नहीं है। ये विद्यार्थी कक्षा 10 तक अपनी चुनी भाषाओं के साथ पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नई भाषा नीति के तहत कम के कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ने की अनिवार्यता को आगामी सत्र से केवल कक्षा 6 से लागू किया जाएगा। इसे कक्षा 7 से 9 में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नहीं थोपा जाएगा। सीबीएसई ने मई में जारी सर्कुलर में कहा था कि 1 जुलाई से कक्षा 9 में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड के इस नियम के खिलाफ विद्यार्थियों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और कई विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।
पहले अनिवार्य की थीं तीन भाषाएं
बोर्ड ने 15 मई को सर्कुलर में कहा था कि जब तक तीसरी भाषा की नई पुस्तकें नहीं आ जाती हैं, तब तक कक्षा 9 के विद्यार्थी चुनी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों का इस्तेमाल करेंगे। अप्रैल में, सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से त्रि-भाषा नीति लागू करने और कक्षा 9 के लिए गणित व विज्ञान के लिए दो-स्तरीय प्रणाली शुरू करने की घोषणा की थी।
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