DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Sunday, June 28, 2020

UP Board Result 2020: मातृभाषा हिंदी में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके आठ लाख मेधावी, सभी फेल


UP Board Result 2020: मातृभाषा हिंदी में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके आठ लाख मेधावी, सभी फेल


UP Board Result 2020परीक्षाओं के करीब आठ लाख परीक्षार्थी सिर्फ इसलिए फेल हो गए हैं क्योंकि वे हिंदी विषय में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके हैं। ...

प्रयागराज । प्यारी हिंदी, हमारी हिंदी का नारा विशेष दिवस पर खूब गूंजता है। मातृभाषा के प्रति विशेष लगाव शायद नारों तक ही सिमट कर रह गया है, प्यारी हिंदी को हम सब वैसा प्यार नहीं करते जिसकी उसे दरकार है। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर का परीक्षा परिणाम इसकी पुष्टि कर रहा है। दोनों परीक्षाओं के करीब आठ लाख परीक्षार्थी सिर्फ इसलिए फेल हो गए हैं, क्योंकि वे हिंदी विषय में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके हैं। बोर्ड की ओर से जारी हिंदी विषय का यह आंकड़ा शर्मसार करने वाला है, क्योंकि उत्तर प्रदेश हिंदी पट्टी का अहम व देश में आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य है।


यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटर का विषयवार परिणाम जारी किया है। इंटर की हिंदी परीक्षा में 1,08,207 व सामान्य हिंदी में 1,61,753 सहित कुल 2,69,960 परीक्षार्थी अनिवार्य प्रश्नपत्र में उत्तीर्ण होने लायक अंक नहीं ला पाए। ऐसे ही हाईस्कूल की हिंदी परीक्षा में 5,27,680 व प्रारंभिक हिंदी में 186 सहित कुल 5,27,866 परीक्षार्थी फेल हुए हैं। दोनों परीक्षाओं में कुल 7,97,826 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण हैं। ये वे परीक्षार्थी हैं, जो हिम्मत जुटाकर परीक्षा में शामिल हुए थे। हैरत यह भी है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार हाईस्कूल में फेल होने वालों की संख्या बढ़ी है, जबकि इंटर के हिंदी विषय में फेल होने वालों का आंकड़ा तेजी से घटा है। वैसे भी इंटर के परीक्षार्थियों को हाईस्कूल की अपेक्षा अधिक परिपक्व माना जाता है। ज्ञात हो कि मातृभाषा में अनुत्तीर्ण होने वालों का इतना खराब परिणाम पहली बार नहीं आया है, बल्कि पिछले साल तो फेल होने वालों की तादाद दस लाख को पार गई थी।


दोनों परीक्षाओं में मातृभाषा हिंदी की परीक्षा देना अनिवार्य है और इसका असर पूरे परीक्षा परिणाम पर पर पड़ता है लेकिन, इस पर शिक्षक गंभीर हैं न परीक्षार्थी और न ही उनके अभिभावक, क्योंकि हर साल हिंदी में फेल होने वालों की तादाद लाखों में रहती है।


यही नहीं दोनों परीक्षाओं में 2,91,793 परीक्षार्थी शामिल होने तक का साहस नहीं जुटा सके। बोर्ड के अनुसार हाईस्कूल के हिंदी विषय में 1,43,246 व प्रारंभिक हिंदी में 1745 सहित कुल 1,43,306 और इंटर के हिंदी 56,092 व सामान्य हिंदी विषय में 92,395 सहित कुल 1,48,487 ने परीक्षा से ही किनारा कर लिया। इस तरह देखा जाए तो हाईस्कूल व इंटर परीक्षा से हिंदी में फेल व किनारा करने वालों की तादाद 10 लाख 89 हजार 619 है। 

No comments:
Write comments