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Monday, June 20, 2022

इंटर को पछाड़ने लगे हाईस्कूल के होनहार, पिछले कुछ सालों से बदलने लगा बोर्ड रिजल्ट का ट्रेंड, पहले हाईस्कूल से अच्छा रहता था इंटर का परिणाम

इंटर को पछाड़ने लगे हाईस्कूल के होनहार, पिछले कुछ सालों से बदलने लगा बोर्ड रिजल्ट का ट्रेंड, पहले हाईस्कूल से अच्छा रहता था इंटर का परिणाम

● 2013 व 2014 में 12वीं में 92 तो 10वीं में 86 थे पास
● 2018 से हाईस्कूल में अधिक छात्र-छात्राएं पास हो रहे।


यूपी बोर्ड के परिणाम में पिछले कुछ सालों में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले आमतौर पर इंटरमीडिएट का परिणाम हाईस्कूल से बेहतर रहता था। लेकिन इधर लगातार चार सालों से हाईस्कूल के होनहार इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं को पछाड़ने लगे हैं। शनिवार को घोषित 2022 की बोर्ड परीक्षा के परिणाम में भी यह बदलाव देखने को मिला। इस साल 10वीं में 88.18 प्रतिशत तो 12वीं में 85.33 छात्र-छात्राओं को कामयाबी मिली है।

पिछले दस सालों के परिणाम पर ही नजर दौड़ाएं तो साफ हो जाएगा कि 2013 से 2017 तक हाईस्कूल की तुलना में इंटरमीडिएट में अधिक छात्र-छात्राओं को सफलता मिली थी। वैसे उससे पहले भी अधिकांश वर्षों में इंटर के रिजल्ट का ही बोलबाला रहा है। यहां तक कि कल्याण सिंह की सरकार के दौरान 1992 में जब बोर्ड परीक्षा में सबसे अधिक सख्ती हुई थी, उसमें भी हाईस्कूल की तुलना में इंटर के अधिक छात्र पास हुए थे। 1992 में हाईस्कूल में 14.70 फीसदी जबकि इंटर के दोगुने से अधिक 30.38 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए थे। लेकिन 2018 से बदलाव की बयार बहने लगी।

29746 छात्रों को मिलेगा 2021 का प्रमाणपत्र
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल ओर इंटरमीडिएट परीक्षा 2022 में सफल 29746 छात्र-छात्राओं को 2021 का अंकपत्र सह प्रमाणपत्र मिलेगा। पिछले साल कोरोना के कारण सरकार ने बोर्ड परीक्षा निरस्त करते हुए आन्तरिक मूल्यांकन और शैक्षणिक रिकॉर्ड के आधार पर छात्र-छात्राओं को प्रमोट किया था। यही कारण था कि 2021 में हाईस्कूल के 29,96,031 परीक्षार्थियों में से 29,82,055 (99.53) और इंटर के 26,10,247 विद्यार्थियों में से 25,54,813 (97.88) पास हो गए थे। परिणाम में असंतुष्ट छात्रों के लिए बोर्ड ने 18 सितंबर से छह अक्टूबर 2021 तक अंक सुधार परीक्षा कराई थी।

दस साल के परीक्षा परिणाम पर एक नजर
वर्ष हाईस्कूल इंटर

2022 88.18 85.33

2021 99.53 97.88

2020 83.31 74.63

2019 80.07 70.06

2018 75.16 72.43

2017 81.18 82.62

2016 87.66 87.99

2015 83.74 88.83

2014 86.71 92.21

2013 86.63 92.68

(नोट: 2021 में कोरोना के कारण बिना बोर्ड परीक्षा कराए बच्चों को प्रमोट कर दिया गया था।)

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