प्रोजेक्ट अलंकार के बजट का न इस्तेमाल किया न लौटाया, तीन किश्त जारी लेकिन पहले का ही नहीं हुआ प्रयोग, माध्यमिक शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों पर करेगा सख्ती
लखनऊ। प्रदेश में जर्जर व पुराने हो चुके राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में सुधार के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अलंकार योजना शुरू की गई। लेकिन विद्यालय विभाग की इस योजना को पलीता लगा रहे हैं। वे बजट तो ले ले रहे हैं मगर न तो इसका प्रयोग कर रहे हैं न ही विभाग को इसकी जानकारी दे रहे हैं।
प्रदेश के राजकीय व एडेड कॉलेजों में निर्माण, मरम्मत व अवस्थापना सुविधाओं के लिए प्रोजेक्ट अलंकार के तहत बजट दिया जाता है। खास यह कि इसमें राजकीय विद्यालयों को 95 फीसदी तक तो एडेड में 75 फीसदी तक कुल आगणन का पैसा दिया जा रहा है। इसके बाद भी कई बार प्रस्ताव भेजने में आनाकानी की जाती है, वहीं कई जिलों में बजट के सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रोजेक्ट अलंकार योजना में वर्ष 2023-24, 2024-25 व 2025-26 में एडेड कॉलेजों के प्रस्ताव पर शासन व निदेशालय की ओर से तीन किश्तें जारी की जा चुकी हैं। लेकिन इसमें कई विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अभी तक न तो पहली किश्त का प्रयोग किया न ही बजट सरेंडर करने की जानकारी निदेशालय को भेजी गई है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक (अर्थ) महेंद्र कुमार सिंह ने सभी डीआईओएस को पत्र भेजकर कहा है कि जिलों में यह कहा जाता है कि संस्था को आवंटित धनराशि समर्पित कर दी गई है। जबकि निदेशालय को इसकी जानकारी ही नहीं मिली है। उन्होंने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि जिलों में विद्यालयों को आवंटित पहली किश्त की राशि का प्रयोग किया गया या नहीं? या इसको समर्पित कर दिया गया है? इसके बारे में जल्द सूचना उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने पर अब विभाग सख्ती करते हुए इससे शासन को भी अवगत कराएगा।
No comments:
Write comments